चुनाव हुए महाराष्ट्र में असर हुआ उत्तर प्रदेश में
समाजवादी पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव के लिए यह राहत की बात हो सकती है कि उनकी पार्टी ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में 1995 वाली सफलता दोहराते हुए चार सीटें जीत ली हैं,भले ही इससे कोई फायदा होता दिखे या ना दिखे लेकिन उन्हे तसल्ली इस बात से है कि बहुजन समाज पार्टी को एक भी सीट हासिल नहीं हो सकी है।
महाराष्ट्र में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अबू आजमी मानखुर्द-शिवाजीनगर और भिवंडी (पूरब) से चुनाव लडे़ थे। उन्हें दोनों सीटों पर अच्छे मतों के अंतर से जीत हासिल हुई है। उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के सदस्य रहे आजमी मई में हुये उत्तर-पश्चिम मुंबई सीट से लोकसभा चुनाव हार गए थे। 2004 में भिवंडी से वह विधानसभा चुनाव भी हार गए थे, लेकिन इस बार उनकी पार्टी रिपब्लिकन वाम लोकतांत्रिक मोर्चे का हिस्सा बन कर चुनाव मैदान में उतरी। फैसला सही साबित हुआ। 126 करोड़ रुपये की घोषित संपत्ति के मालिक आजमी तो दो-दो सीटों पर जीते ही, दो अन्य सीटों पर अपने उम्मीदवारों को जिताने में भी कामयाब रहे। इसमें से एक कांग्रेस का गढ़ माने जाने वाले नंदुरबार जिले की नवापुर सीट है। यहां से शरद गावित जीते हैं। हालिया लोकसभा चुनाव में गावित भी हार गए थे। इस विधानसभा चुनाव में भिंवडी-पश्चिम से भी सपा उम्मीदवार राशिद ताहिर मोमिन जीते हैं। सपा ने 1995 में चार एवं 1999 में दो विधानसभा सीटें जीती थीं, लेकिन 2004 के विधानसभा चुनाव में उसका खाता भी नहीं खुला था।
महाराष्ट्र विधान सभा के चुनाव नतीजों से स्पष्ट है कि मतदाता अब जातिवादी और साम्प्रदायिक ताकतों को बर्दाश्त करने के मूड में कतई नहीं है। इन्हें वहां करारी पराजय मिली है। समाजवादी पार्टी ने मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व में समाजवाद, धर्मनिरपेक्षता और अल्पसंख्यकों की लडा़ई लड़ते हुए महाराश्ट्रवासियों का जो स्नेह और विश्वास हासिल किया उसके फलस्वरूप समाजवादी पार्टी को चार स्थानों पर विजय श्री मिली है। समाजवादी पार्टी प्रत्याशियों की जीत ने उन तत्वों को भी बेनकाब कर दिया है जो यह भ्रम फैला रहे थे कि अल्पसंख्यकों को समाजवादी पार्टी से मोह भंग हो रहा है। बसपा का यहां खाता भी नहीं खुला। महाराश्ट्र विधान सभा में जीते प्रत्याशियों सर्वश्री अबू आसिम आजमी (भिवंडी पूर्व एवं मनखुर्द शिवाजीनगर क्षेत्र) अब्दुल रशीद ताहिर मोमिन (भिवंडी पश्चिम) तथा गावित शरद कृष्णा राव (नबापुरा) है।
उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री सुश्री मायावती ने इस राज्य की जनता की गाढी़ कमाई को दूसरे राज्यों में बहुजन समाज पार्टी को पैठ दिलाने में दोनों हाथ से लुटाया, जातीय भावनाएं भड़काई फिर भी उनका परिणाम शून्य ही रहा। मतदाताओं ने समझ लिया कि जो मायावती उत्तर प्रदेश के हर मोर्चे पर विफल रहीं है उसके भुलावें में आने से क्या फायदा? उन्होने यह भी देख लिया कि मायावती ने ढाई वर्ष के अपने मुख्यमंत्रित्वकाल में सिर्फ पार्कों, स्मारकों और अपनी प्रतिमाओं के निर्माण पर ही ध्यान दिया है। दलित की इस बेटी की फाइव स्टार लाइफ स्टाइल देखकर दलित समाज भी अब चौकन्ना हो गया है कि वह उनका बंधुआ मजदूर नहीं बनेगा।
झूठे वायदों और छलावें की राजनीति ज्यादा दिनों तक नहीं चलती है। उत्तर प्रदेश की जनता को बसपा की सरकार का अच्छा तजुर्बा हो गया है। इसमें सिर्फ लूट, वसूली और कब्जा करों का ही सिद्धान्त चलता है। अपराधियों को संरक्षण देने में बसपा के मंत्री एवं नेता आगे है। उसके फलस्वरूप प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति गंभीर है। मिलावटखोरों और जमाखोरो की चॉदी है। कमीशनखोरी और भ्रश्टाचार अपने चरम पर है। अन्य प्रदेशों की जनता ने बसपा की तानाशाह को करारा जबाब देकर जता दिया है कि उसे उत्तर प्रदेश की दुर्गति की कहानी नहीं दुहरानी है। जिसमें एक प्रदेश का शासन चलाने की क्षमता नहीं उसका देश की नेता बनने का गुरूर जनता ने चकना चूर कर दिया है। महाराष्ट्र के नतीजों से गदगद सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव का सीना चौडा नजर आता है वे कहते है कि उन्हे भरोसा है कि उनके मतदाता हमेशा उनके साथ रहेगें,अब ऐसा लगने लगा है कि हम होगें कामयाब एक दिन.
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