'श्री' और 'जी' ने कराया अमर का इस्तीफा
श्री और जी, दो ऐसे शब्द है जिनके इस्तेमाल के बाद खुद व खुद सम्मान झलकने लगता है.अगर इन शब्दों का इस्तेमाल ना भी किया जाये तो कोई फर्क नही पडता है लेकिन अगर कोई इन्हीं दो शब्दों की बिना पर नाराज हो जाये तो माना जा सकता है कि उसका अपमान किया जा रहा है बिल्कुज ऐसा ही लगा सपा नेता अमर सिंह को जिन्होंने ने अपने सभी पदों से इन्हीं दो शब्दों की वजह से इस्तीफा देना मुनासिब समझा.
अमर सिंह के सपा के कई पदों से इस्तीफे के बाद एक बात साफ हो गई है कि अमर सिंह ने अपना इस्तीफा यूं ही नहीं दिया अमर सिंह को बडा मलाल है कि अब उनके नाम के आगे श्री और पीछे जी का इस्तेमाल नहीं किया गया सबसे अधिक वेदना अमर सिंह को मुलायम सिंह यादव के भाई डा.रामगोपाल यादव के उस पत्र से हुई जिसमें रामगोपाल ने अमर सिंह के नाम के आगे ना तो (श्री) का इस्तेमाल किया और ना ही सिंह के बाद (जी) लगाया. अमर सिंह को (श्री) और (जी) दो शब्दों से शायद इतनी बेदना हुई कि बीमारी और डाक्टरी सलाह का बहाना करके अमर सिंह ने इस्तीफा दिया जब कि पिछले साल बीमारी के बीच में ही अमर सिंह जोरदारी से चुनाव प्रचार करते हुये देखे गये थे.
अमर सिंह ने हालांकि अपने इस्तीफे में इन शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया है लेकिन एक न्यूज चैनल से बातचीत में अमर सिंह ने इस बात का जिक्र किया तब बात साफ हई कि अमर सिंह के मन में नाराजगी का भाव आखिर क्यों है?
सपा को चलाने को लेकर पार्टी अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव सहित पार्टी के अनेक नेताओं से मतभेद पैदा होने के बाद अमर सिंह ने अपना इस्तीफा यादव को दुबई से भेज दिया. हांलाकि उन्होंने इस्तीफा देने के पीछे स्वास्थ्य कारणों की दुहाई दी है और यादव में आस्था जताते हुए पार्टी नहीं छोडने की भी बात कही है. यह पूछे जाने पर कि क्या वह किसी अन्य पार्टी में शामिल होने जा रहे है उन्होंने कहा कि यह काल्पनिक उड़ान है जिसका वह जवाब नहीं देंगे .
पिछले 14 वर्षों से सपा से जुड़े अमर सिंह ने पूर्व में भी तीन बार इस्तीफा दिया था पर सपा प्रमुख द्वारा इसे अस्वीकार कर दिया गया. इस बार अमर सिंह का कहना है कि वह पार्टी अध्यक्ष का निर्देश नहीं मानेंगे क्योंकि उन्होंने अपनी प्राथमिकताएं बदल ली है उन्होंने कहाकि 53 वर्ष की उम्र में वह 20 वर्षों के राजनीतिक जीवन को छोड़ परिवार और बच्चों की देखभाल करना चाहते है. उन्होंने कहा कि चिकित्सकों ने भी उन्हें यही सलाह दी है. अब वह पार्टी का साधारण कार्यकर्ता बनकर रहेंगे, पुस्तकें पढ़ेंगे, फिल्में देखेंगे, ब्लाग लिखेंगे और परिवार व मित्रों के साथ विश्व भ्रमण करेंगे. अमर सिंह ने कहा कि यह कहना बिल्कुल गलत है कि उनके यादव के साथ मतभेद है. उन्होंने कहा कि यादव ने उन्हें जो अवसर दिये उसके लिये वे आभारी है, इसीलिये वह पार्टी में सीमित जिम्मेदारियां लेना चाहते हैं, पर साथ ही यह भी कहा कि सिंगापुर में जब तक अपना गुर्दा बदलवाने गये थे तब अमिताभ बच्चन, अनिल अम्बानी और उनका परिवार ही 24 घंटे उनके साथ रहा, पार्टी अध्यक्ष सपा प्रमुख उन्हें देखने तक नहीं आये और पार्टी ने भी उनके लिये कुछ नहीं किया,अमर के इस शब्द को क्या वेदना नहीं माना जा सकता है.
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि अमर सिंह ने पार्टी के तीन प्रमुख पदों से इस्तीफा स्वास्थ्य कारणों से नहीं पार्टी अध्यक्ष और अन्य नेताओं के साथ बढ़ते मतभेदों के चलते दिया है. यह मतभेद फिरोजाबाद लोकसभा उपचुनाव को लेकर और गहरा गये जिसमें पार्टी अध्यक्ष की पुत्रवधु डिम्पल यादव की सपा के ही पूर्व नेता एवं कांग्रेस उम्मीदवार फिल्म अभिनेता राज बब्बर के हाथों शिकस्त मिली थी . पार्टी अध्यक्ष का भी मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में पार्टी जिस नीति पर चली है उससे मुसलमान मतदाता उससे दूर होता जा रहा है और कांग्रेस की ओर उसका झुकाव बढ़ रहा है .
सपा छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम 15वीं लोकसभा में पहुंचे पूर्व केन्द्रीय मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा का कहना है कि मुलायम की सारी काली कमाई अमर के पास है इसलिये वह उन्हें छोड़ ही नहीं सकते .सपा से निकाले गये आजम खां ने कहा कि अमर अब जनेश्वर मिश्र और रामगोपाल यादव को पार्टी से निकालने का दबाव पार्टी अध्यक्ष पर बना रहे थे जो उनके लिये संभव नहीं था क्योंकि जनेश्वर मिश्र वरिष्ठ, संजीदा और प्रदेश में प्रभाव रखने वाले नेता हैं और रामगोपाल यादव मुलायम के चचेरे भाई हैं। सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव कहते है कि अमर सिंह सच में काफी बीमार हैं और उनके विदेश से इलाज करा कर वापस आने के बाद वह उनसे बात करेंगे तथा त्यागपत्न वापस लेने के लिये समझाएंगे.मुलायम कहते है कि अमर सिंह पार्टी के जिम्मेदार नेता है और सपा को उनकी जरूरत है. उन्होंने कहा कि अमर सिंह ने एक बार पहले भी इस्तीफा दिया था लेकिन उन्हें समझाया गया था.बातचीत के बाद उन्होंने त्यागपत्र वापस ले लिया था. उन्होंने कहा कि सिंह के विदेश से आने के बाद पार्टी की कोर कमेटी की बैठक होगी और उसमें त्यागपत्र वापस लेने का आग्रह किया जाएगा.
अमर सिंह ने सपा के कई पदों से भले ही इस्तीफा दे दिया हो और वापस लेने के इरादे पर भी अटल दिख रहे हो लेकिन सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव अमर सिंह के इस कदम को बहुत ही हल्के में लेते हुये नजर आ रहे है अगर ऐसा नहीं होता तो मुलायम थोडा सा भी तीखा बोलते लेकिन मुलायम ने तीखा बोलना तो दूर ऐसा लगा कि अमर का इस्तीफा कोई नई बात नहीं है.यह बात भी सही है कि अमर का इस्तीफा मुलायम के लिये कोई नई बात नहीं है लेकिन इस बार इस्तीफे के पीछे जो वजह (श्री) और (जी) को लेकर कही गई है उससे ऐसा लगता है कि अमर मानने वाले नहीं है.
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वहीं पे बँटा ढार है, जहाँ पङे ये पाँव.
जहाँ पङे ये पाँव, जमीनें धंस जाती हैं.
अच्छी-भली- मुलायम गाङी फ़ंस जाती है.
कह साधक कवि, दल्लालों का यही खेल है.
राजनीति के गाँव, अमरसिंह अमर बेल हैं.
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