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अमिताभ बच्चन का अक्लहीन फैसला

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यूपी में सपा का दम निकलने के बाद या कहें कि अमर सिंह के साथ मिलकर सपा का दम निकालने के बाद अमिताभ बच्चन ने अब गुजरात में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए गुजरात का ब्रांड एम्बेसेडर बनने का निर्णय लिया है। सपा से अमर सिंह की विदाई के बाद अमिताभ बच्चन ने शायद यही सोचा होगा कि उत्तर प्रदेश से बोरिया बिस्तर समेटने में भलाई है। इसलिए अब वह नरेन्द्र मोदी के कारनामों से बदनाम हुए गुजरात में पर्यटकों को आकृषित करने के लिए उसके ब्रांड एम्बेसेडर बन गए हैं।

टेलीविजन पर अमिताभ बच्चन महीनों तक 'यूपी में हैं दम, क्योंकि यहां जुर्म हैं कम' चिल्लाते रहे, लेकिन यूपी में जुर्म तो कम नहीं हुआ लेकिन अमिताभ की तिजोरी में करोड़ों रुपए का इजाफा जरुर हो गया होगा। अमिताभ को यूपी से कोई मौहब्बत नहीं थी कि वे मुफ्त में ही सब कुछ कर रहे थे। मुलायम सिंह का गुणगान करने के लिए उन्हें पैसा दिया गया था। अब अमिताभ बच्चन उस गुजरात में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए काम करेंगे, जिसके मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी हैं और हजारों बेगुनाह लोगों के खून से जिनके हाथ रंगे हुए हैं। अस्सी दशक का 'एंग्रीयंग' मेन, जो गरीब गुरबों की लड़ाई को पर्दे पर लड़ता दिखता था, अब पैसों के पीछे भागने वाला एक इंसान बन गया है, जो किसी भी तरीके से पैसा कमाना चाहता है।'रण' फिल्म में अमिताभ बच्चन हिन्दू-मुस्लिम एकता की पैरवी करते नजर आए थे तो फिल्म 'देव' में एक मुख्यमंत्री की शह पर हुए कत्लेआम का राज फाश करने के लिए अपनी जान देने कुर्बान करते हुए दिखाई दिए थे। फिल्म 'देव' में श्याम बेनेगल ने गुजरात नरसंहार को ही अपनी विषय-वस्तु बनाया था। लेकिन फिल्म तो फिल्म है। हकीकत तो यह है कि अमिताभ बच्चन सिर्फ और सिर्फ एक प्रोफेशनल आदमी हैं। पैसों के लिए वह 'बूम' जैसी घटिया फिल्म में काम कर सकते हैं। उनके परिवार की फिल्में महाराष्ट्र में बिना किसी बाधा के रिलीज होती रहें, इसके लिए वह बाल ठाकरे और राज ठाकरे की ड्योढी पर सिर नवाने से भी परहेज नहीं करते। भले ही उनके शहर इलाहाबाद के लोगों को राज ठाकरे के गुंडे मार-मार कर मुंबई से भगाते रहें।

अब जब अमिताभ गुजरात के पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए गुजरात के ब्रांड एम्बेसेडर बन ही गए हैं तो उन्हें दुनिया को यह बताना चाहिए कि गुजरात में नरोदा पाटिया, गुलबर्गा सोसायटी और बेस्ट बेकरी नाम की जगह भी हैं, जहां प्रदेश के 'जांबाज' मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी की शह पर सैकड़ों लोगों को जिन्दा जला दिया गया था। उन राहत कैम्पों के बारे में भी विस्तार से दुनिया को जानकारी दें, जिनमें आज भी बहुत सारे लोग इसलिए नारकीय जीवन बिता रह हैं, क्योंकि उनका घर-बार सब कुछ लुट लिया गया है और गुजरात सरकार जिन्हें मुआवजे के रुप में चन्द रुपयों से नवाज रही है। गुजरात के उस अलिखित कानून का भी जिक्र करें, जिसके तहत एक समुदाय के लोगों को किसी प्रकार की सरकारी सहायता नहीं दी जाती है। बिलकीस बानो के बारे में भी बताना चाहिए, जिसके साथ सामूहिक बलात्कार हुआ था। 19 साल की छात्रा इशरत जहां के बारे में भी जरुर बताएं, जिसे आतंकवादी बताकर फर्जी मुडभेड़ में मार दिया गया था। सोहराबुद्दीन शेख में बारे में भी जानकारी दें कि कैसे उसको फर्जी मुठभेड़ में मारकर उसकी पत्नी की लाश तक को गायब कर दिया था। मुख्यमंत्री की शह पर गुजरात के दर्जनों युवकों को आतंकवादी बताकर फर्जी मुठभेड़ों में मारने वाले पुलिस अधिकारी डीके बंजारा की 'बहादुरी' की भी जरुर चर्चा करें।

लगता है कि अमिताभ बच्चन का जमीर जैसी किसी चीज से कोई मतलब नहीं है। यदि अमिताभ के पास जमीर नाम की चीज होती तो वह गुजरात का ब्रांड एम्बेसेडर बनना मंजूर नहीं करते। यदि वह ऐसा कर पाते तो यह फासिस्ट ताकतों के मुंह पर एक तमांचा होता और मजलूम लोगों के दिलों में सम्मान पाते। पता नहीं अमिताभ बच्चन नरेन्द्र मोदी के बारे में क्या विचार रखते है, लेकिन पूरी दुनिया उन्हें मानवता का कातिल मानती है। इसीलिए अमेरिका भी उन्हें वीजा जारी नहीं करता। लेकिन अमिताभ को इससे क्या, उन्हें तो पैसा चाहिए इसके लिए वह सब कुछ कर सकते हैं। तेल बेच सकते हैं। उत्तर प्रदेश में जुर्म कम बता सकते हैं। यहां तक कि नरेन्द्र मोदी के राज्य के ब्रांड एम्बेसेडर भी बन सकते हैं। गुजरात का ब्रांड एम्बेसेडर बनने से पहले अमिताभ बच्चन को सोचना चाहिए था कि वह देश में 'रील' के महानायक कहे जाते हैं। 'रियल' में महानायक बनने के लिए उन्हें पैसों का मोह छोड़कर उस मजलूम आदमी के जज्बातों को भी समझना होगा, जो उन्हें फिल्मों में मजलूम की लड़ाई लड़ता देखकर अपने करीब समझने लगता है। नरेन्द्र मोदी के साथ खड़ा होकर अमिताभ बच्च्न को पैसा तो मिल सकता है, लेकिन उन लोगों की हमदर्दी और प्यार नहीं मिल सकता, जो नरेन्द्र मोदी के सताए हुए हैं।

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डॉ दुर्गाप्रसाद अग्रवाल on 03 February, 2010 20:35;08
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बहुत बेबाक और प्रखर टिप्पणी. मुझे लगता है कि अब अमिताभ अपनी ज़िन्दगी में उस मुकाम पर पहुंच गए हैं जहां सिर्फ और सिर्फ पैसा अहमियत रखता है. पैसा कोई तेल बेचने से मिले, सीमेंट बेचने से मिले, राज्य बेचने से मिले - जैसे भी मिले, मिले. मैं तो अब इस बात को भूल जाना चाहूंगा कि उनके नाम के साथ हिंदी के एक उत्कृष्ट कवि का नाम भी जुड़ा हुआ है.
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सुरेश चिपलूनकर on 03 February, 2010 22:05;35
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ह्म्म्म्म, यानी अमिताभ अचानक खलनायक बन गये, अचानक ही उनकी सारी बुराईयाँ सामने आ गईं… वेरी गुड…। अमिताभ वाकई बुरे हैं क्यों यदि वे पप्पू यादव, शहाबुद्दीन अथवा अब्दुल नासेर मदनी के साथ रहते तो यह सारी बुराईयाँ दबी रहतीं।

यानी टाइटलर के साथ यदि शाहरुख दिखाई दे जाये तो? अथवा यासीन मलिक के साथ राहुल गांधी खड़े दिखें तो? अरे-अरे-अरे मैंने किन संतों-महात्माओं की बात कर दी सॉरी भाई…।
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NANDAN on 03 February, 2010 22:14;20
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AMITABH BACHCHAN AGAR RAJIV GANDHI KE SATH GAYE TO THEEK. JIN RAJIVJI KE SAMNE HAZARON NIRDOSH SIKHON KO MAR DIYA GAYA, JIN RAJIVJI NE KAHA THA KI BADA PED GIRTA HAI TO ANDHI AATI HAI, THEEK NARENDRA MODI KI TARAH KI KRIYA KI PRATIKRIYA HOTI HAI.(अब अमिताभ बच्चन उस गुजरात में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए काम करेंगे, जिसके मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी हैं और हजारों बेगुनाह लोगों के खून से जिनके हाथ रंगे हुए हैं।)

AB VAHI AMITABH MODI KE SATH JATEN HAIN (JO THEEK RAJIV GANDHI KI TARAH HAIN)TO KISI SALEEM AKHTAR KOI DURGA PRASAD AGRVAL JAISE dhongi aur dohre chritra WALE CHHDM SECULAR KE CHAATI PAR SAANP LOTNE LAGTA HAI.

YE DHONG AB BAND KARE, AGAR AAP SECULAR HAI TO SABKO EK CHASME SE DEKHEN. MR. SIDDIQUI AUR MR. AGRAVAL.

PURVAGRAH SE PRERIT LEKH, AUR GUJARAT KE MATDATAON KA APMAN
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Sam Pruner on 03 February, 2010 22:22;13
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Every sucessful people think with his brain not with his heart.Amitabh need a political shelter, and there is nothing wrong in it to go with Gujrat. He is promoting the tourism of Gujrat. Gujraties are the most successful people in world, Everyone wants a good relation with them
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prashant mehrishi on 03 February, 2010 23:32;41
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SALIM lekh lika hai ya al kayada ke training camp ka bhashan ?
na to dusra koi abhitabh ban sakta hai aur na modi . JALNE wale jalte raho .best bakery ke biscut kab tak khaoge kabhi kashmir ke seb bhi khao .
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anurag trivedi on 03 February, 2010 23:53;29
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pagla gaya hai salim akhtar
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Irfan on 04 February, 2010 02:15;38
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This is one of the great article and I congratulate Saleem on this. No one will deny that Amitabh is a great actor and successful businessman but he owe this country and millions of people. He needs to think before taking all these decision whether screen "Rann" for Bal Thakrey OR going Gujrat for shelter... People like Prashant OR Suresh Chiplunkar can never digest truth...

Great work indeed!
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vivek on 04 February, 2010 11:51;41
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Sare musalman gujrat dango ko ro rahe hai par godara aur Miraj ka nam bhi nahi lete. Salim Siddqi to har lekh me Modi aur Gujrat ko le ke baithta hai.
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NANDAN on 04 February, 2010 12:30;34
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IRFAN MAINE RAJIV GANDHI JI KA JIKRA KIYA THA< AAPKA KYA KEHNA HAI IS BARE ME,
SALIM JI TO JAWAB DENE SE RAHE.
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vikas mishra on 04 February, 2010 12:45;46
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गुजरात में कत्लेआम से आहत इंसानियत हुई। चाहे वह ट्रेन आगजनी में मारे गए हिंदू हो या मुसलमान। इन घटनाओं में मारा गया व्यक्ति सबसे पहले इंसान था। दोनों घटनाओं में मारे गए लोगों को केवल धर्म विशेष से जोड़कर देखना ओछी मानसिकता का परिचायक है। इसके वास्तविक दोषियों को निकालकर सजा देनी चाहिए। जिनका सब किया धरा तो वह शायद बच गए हों मारे गए तो सभी निर्दोष थे। सड़क पर यदि किसी इंसान को तड़पता देखें तो पहले उसके इलाज की सोचें, इस पर नहीं कि वह किस धर्म का है और यदि मैं उसी धर्म का हूँ तो अस्पताल ले जाऊँ। जय हिंद। जय भारत।
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image सलीम अख्तर देश के अनेक समाचार-पत्रों में सामायिक मुद्दों पर लेख आदि लिखने के साथ ही टेक्निकल पुस्तकों का स्वतन्त्र लेखन। लेखन या पत्रकारिता का कोई कोर्स नहीं किया। लिखने की शुरुआत 1984 से दिल्ली से प्रकाशित होने वाले 'हिन्दुस्तान' और 'नवभारत टाइम्स' में सम्पादक के नाम पत्रों से की थी। हौसला बढ़ा तो सम्पादकीय पेज पर छपने के लिए लिखना शुरु किया। मशहूर पत्रकार स्व0 उदयन शर्मा मेरे आइडियल रहे हैं। इसलिए कलम का इस्तेमाल हमेशा ही फिरकापरस्त ताकतों के खिलाफ और दबे-कुचले लोगों के पक्ष में चली है। जनवादी लेखक संघ से भी जुड़ा हुआ हूँ। संपर्क: saleem_iect@yahoo.co.in
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