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असली अमिताभ और फिल्मी अमिताभ में कोई समानता नही है

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सदी के महानायक और पर्दे के एंग्री यंगमैन अमिताभ बच्चन वह नहीं है जो नरेन्द्र मोदी से हाथ मिलाकर राज्य में पर्यटन का बढ़ावा देने चल पड़ते हैं. यह अमिताभ बच्चन वह अमिताभ है जो पैसे के लिए किसी भी विज्ञापन में काम कर सकता है और किसी भी कंपनी का ब्राण्ड एम्बेसडर बन सकता है.

सदी का महानायाक अमिताभ बच्चन पर्दे पर जो है उस पर कोई सिरफिरा व्यक्ति ही होगा जो अमिताभ बच्चन की अभिनय क्षमता पर अंगुली उठा सके। इसमें कोई दो राय नहीं है कि महाकवि स्व. हरिवंश राय बच्चन जो ''मधुशाला'' सहित अनेकों कालजयी रचनाओं के जनक हैं के लल्ला अमिताभ बच्चन में नैसर्गिक अभिनय क्षमता कूट-कूट कर भरी हुई है।

अमर कथाकार-लेखक-फिल्म निर्माता ख्वाजा अहमद अब्बास की छोटे बजट वाली यादगार फिल्म ''सात हिन्दुस्तानी'' में एक हिन्दुस्तानी के छोटे से रोल वह भी गूंगे पात्र के द्वारा भारतीय फिल्म जगत में पदार्पण करने वाले अमिताभ के बारे में किसने सोचा था कि यह व्यक्ति इंडियन फिल्म इंडस्ट्रीज का दो-चार साल वास्ते नहीं वरन् दशकों तक के लिये पर्याय बन जायेगा।

लगातार दस-बारह फ्लॉफ फिल्में देने वाले अमिताभ को जब १९७३ में निर्माता-निर्देशक प्रकाश मेहरा ने ''जंजीर'' फिल्म में ब्रेक दिया तो रातों रात अमिताभ स्टार बन गये। और इसके बाद से आज तक उन्होंने पीछे मुडक़र नहीं देखा। हालांकि २० वीं सदी के अंतिम दशक में इनकी अनेकों फिल्में बॉक्स आफिस पर धड़ाधड़ पीट गई थीं। साथ ही इनके द्वारा स्थापित फिल्म एवं टी.वी. सीरियल निर्माण क्म्पनी एबीसीएल की विफलताओं ने इन्हें सर से पैर तक कर्ज में डूबा दिया था।

सेल्यूलाईड, रजतपट पर ऐंग्री यंग मैन (क्षुब्ध पुरूष) के रूप में छा जाने वाले अमिताभ अपनी असली जिंदगी में एक बेहद कमजोर, मौका परस्त, पलायनवादी व्यक्ति हैं। फिल्मों में अन्याय एवं सितमगरों के खिलाफ जोरदार जंग लडऩे वाला नायक ''विजय'' अपने वास्तविक जीवन में बहुत ही समझौतापरस्त और धन पिपासु अति साधारण मानव है। ''दीवार'' सहित कई फिल्मों में भगवान से भी टकराने का हौसला रखने वाला अमिताभ अत्यंत धर्मभीरू, अंधविश्वासी, भाग्यवादी, डरपोक व्यक्ति है। इन सब तथ्यों की पुष्टि उनके सार्वजनिक जीवन का चलताऊ विश्लेषण करने पर ही हो जाती है इसके लिये किसी गहन एवं सूक्ष्म समीक्षा की तो कतई आवश्यक्ता नहीं है।

लेकिन आज हरिवंश राय बच्चन के बिटवा, सदी के महानायक, ऐंग्री यंग मैन को उनका मेहनताना देकर (बहुत बड़ी रकम) आप अमिताभ से किसी भी घटिया, अनजान, अविश्वसनीय वस्तु का भी विज्ञापन, गुण-गान करवा सकते हैं। अपने आर्थिक-राजनैतिक लाभ के लिये अमिताभ नामक यह शख्स नेहरू-गांधी परिवार से भी पीढिय़ों पुराने प्रगाढ़ रिश्तों को पल भर में ही तोड़ सकता है बशर्ते कि उनकी पत्नी को कोई दूसरा राजनैतिक दल राज्य सभा सदस्य बना दे एवं स्वयं अमिताभ को उत्तर प्रदेश का ब्रांड एम्बेसडर नियुक्त कर उनकी वाहयात फिल्मों को भी राज्य में मनोरंजन कर से छूट प्रदान कर दे।

पैसा कमाने के लिये और अपनी तथा अपने परिवार की राजनैतिक-सामाजिक-आर्थिक-प्रचारात्मक सुरक्षा एवं अभिवृद्धि हेतु अमिताभ नाम का यह इंसान कुछ भी, कभी भी, कैसा भी कर सकता है इसमें कोई शक ओ सुबहा नहीं है। अमिताभ की केंचुंआ प्रवृत्ति, रीढ़हीनता का ताजा उदाहरण है इनका गुजरात राज्य का ब्रांड एम्बेसडर बनना, विवादास्पद मुख्यमंत्री भाजपाई नरेन्द्र मोदी का पिछलग्गू हो जाना। अमिताभ बच्चन ऐसा न करते तो अच्छा रहता. कम से कम पर्दे के अमिताभ के महानायक की छवि को कोई धक्का नहीं लगता.

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Pushkar on 05 February, 2010 20:18;00
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Illogical and basied article, dose not deserve a palce in Visfot.
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NAMAN on 05 February, 2010 21:40;29
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KULBHUSHN JI AGAR AMITABH BACHCHAN GUJRAT KE PARYATAN BADHANE KE LIYE KARYA KAR RAHEN HAI TO< TUMHE MIRCHI KYO LAG RAHI HAI,
AMITABH APNE DESH KE EK RAJUA KA BRAND AMBASDOR NA BANE TO KYA PAKISTAN KA BANE.
KYA TUM BHI DHONGI SECULAR HO.
AGAR TUM SACHHE SECULAR HO KASHMIR KE BARE ME BHI LIKHO,
UPA ME MANTRI BANE AUR EK SAMRADAYIK PARTY MUSLM LEAGUE KE BARE ME LIKHO,
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Sanjeet Tripathi.blogspot.com on 06 February, 2010 00:37;30
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एक तथ्य सुधार लें,
अमिताभ " सात हिंदुस्तानी' में गूंगे नही थे, वे गूंगे थे तो " रेशमा और शेरा" जहां तक मेरी याददाश्त साथ देती है, बाकी आप लोग बड़े लोग/लेखक/पत्रकार हैं। जैसा ठीक लगे।
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sanjiv on 06 February, 2010 00:49;09
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likhne ka matlab ye nhi hota ki kuchh bhi likh diya jaye.aur hr insaan ki apni vaktigal kamjoriyaan hoti hain . aise bahut se kaam hum aur aap bhi krte hain ya krne padte hain.....
fir bhi mujhe nhi lgta ki big b koi gunah kr rhe hain .

jb vo ads krte hain to sirf acting krte hain . ye unka kaam hai.
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dilip kumar singh on 06 February, 2010 14:02;29
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AAP APNE AAP KO KISKE CHAMCHE SABIT KARNA CHAHTE HO LAGTA HAI ABHI MEDIA ME NAYE HO ABHI AAP KA NAAM TAK NAHI SUNA HAMNE YE KULBHUSHN KAUN HAI MAI AAP SE PUCHNA CHAHTA HU AAP PAISE KE LIYE KYA NAHI KAR SAKTE HO YE SAB LIKH KAR KYA SABIT KARNA CHAHTE HO KI AMITABH KE BARE ME LIKH KAR CHARCHA ME AA JAUNGA KOI NAAM LENE WALA NAHI HAI YE KULBHUSHN KIS CIDIYA KA NAAM HAI MODI KE BARE ME KYA JANTE HO BAS YAHI WO VIVADIT HAI. MODI ME KUCH HAI AMIT JI KI BATT HI KYA APNE BARE ME SOCHO DUSARO KE BARE ME LIKHNA TUM JAISO KA KAAM HAI KABHI APNE BARE ME BHI SOCHA MAI KAHA HU SHARMA JI KUCH NAYA LIKHO IN SAB KO PATHAK NAHI MANTA SACH KADVA LAGTA
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dilip kumar singh on 06 February, 2010 14:27;31
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PATA NAHI VISFOT ME KITNE DENO BAD ITNE NICHLE ASTAR KA ARTICLE PADA LEKHAK KI SOCH KITNE NIMN ASTAR KI HAI BHAI REAL LIFE AUR REAIL LIFE ME SAMANTA HOTI HAI KYA KABHI APNE BARE ME LIKA KYA AGAR ACCHA NAHI LIKHNE AATA TO KOSHIS KARO LIKH LOGE HAME LAGTA HAI ULTA KA SEEDHA LIKO
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R K GUPTA on 06 February, 2010 14:41;10
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सेल्यूलाईड, रजतपट पर ऐंग्री यंग मैन (क्षुब्ध पुरूष) के रूप में छा जाने वाले अमिताभ अपनी असली जिंदगी में एक बेहद कमजोर, मौका परस्त, पलायनवादी व्यक्ति हैं। फिल्मों में अन्याय एवं सितमगरों के खिलाफ जोरदार जंग लडऩे वाला नायक ''विजय'' अपने वास्तविक जीवन में बहुत ही समझौतापरस्त और धन पिपासु अति साधारण मानव है।

@yaa EaImaana jaI Aaap BaI naa jaanao kha^M sao @yaa ilaKnao hao Agar ilaKnaa nahI Aata hO tao @yaoa ilaKto hao .
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अनमोल on 06 February, 2010 17:15;38
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कुलभूषण शर्मा कमाते कितना हो...इतना Frustated....मर जाओगे.... और विस्फोट ये टीआरपी की जंग में तुम भी आ गये क्या....
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