Home | बात-करामात | सोचिए, कांग्रेस का 'हाथ' किसके साथ?

सोचिए, कांग्रेस का 'हाथ' किसके साथ?

Font size: Decrease font Enlarge font 425
image

इंतिहा हो गई इंतजार की। पर अपने पीएम अभी भी यही कह रहे, थोड़ा और इंतजार करिए। कांग्रेस की वर्किंग कमेटी महंगाई पर सीएम मीटिंग से ठीक पहले हुई। तो मनमोहन ने कुछ हफ्तों में सरकारी कदम के असर की सफाई दी। शरद पवार ने दस दिन में महंगाई कम होने का दावा किया था। अपने पीएम पिछले साल अगस्त की वर्किंग कमेटी में भी कुछ ऐसी ही दलील दे चुके। पर महंगाई का कुछ नहीं बिगड़ा।

अलबत्ता महंगाई 'पुराण बन गई। मौके-बेमौके नेतागण बांच रहे। अब शनिवार को सीएम मीटिंग में बेपर्दा हों।  कांग्रेस ने शुक्रवार को ही वर्किंग कमेटी कर अपनी गंभीरता का ढोंग रचाया। अब आशंकाएं तो यहां तक जताई जा रहीं। यूपीए के अर्थशास्त्रीगण कृषि में विदेशी निवेश यानी एफडीआई का रास्ता खोलने की जुगत में। सो महंगाई को जानबूझकर बेलगाम होने दिया गया। ताकि मांग-आपूर्ति, भंडारण और लचर सिस्टम पर सवाल उठे। फिर बेहतर कोल्ड स्टोरेज, मांग-आपूर्ति में संतुलन और डिस्ट्रीब्यूशन की पूरी श्रृंखला को दुरुस्त करने के बहाने एफडीआई की पैरवी हो। इसलिए दलील दी जा रही, कृषि क्षेत्र का उचित प्रबंधन न होने से 40 फीसदी अनाज बेकार हो रहा। कहीं ट्रांसपोर्टेशन की दिक्कत। तो कहीं स्टोरेज की। सो बेहतरी के नाम पर निवेश फार्मूला सोच रही सरकार। अब सचमुच ऐसा हुआ। तो सोचिए, कांग्रेस का 'हाथ' किसके साथ?

पर शुक्रवार को कांग्रेस ने सिर्फ महंगाई पर ढोंग नहीं किया। सुरक्षा अमले से घिरे राहुल गांधी ने मुंबई जाकर शिवसेना को चुनौती दी। एटीएम से पैसे निकाले। लोकल ट्रेन का टिकट लाइन में लग खरीदा। फिर चाक-चौबंद सुरक्षा के बीच 'आम मुसाफिरों' की माफिक सफर किया। अब महाराष्ट्र का गृह राज्यमंत्री जूता उठाने को बैठा हो। तो ऐसी यात्रा कोई भी कर ले। राहुल की सुरक्षा में समूची सरकार और प्रशासन सड़कों पर उतरा था। सीएम अशोक चव्हाण राहुल की अगवानी में इतने तन, मन, धन से लगे रहे। सीडब्ल्यूसी की बैठक में आना भी मुनासिब न समझा। यों राहत की बात, शिवसेनिक दड़बे में ही बांध दिए गए। राहुल सकुशल मुंबई का दौरा पूरा कर पुडिचेरी चले गए। पर अपना एक छोटा सा सवाल विलासराव देशमुख, अशोक चव्हाण, आरआर पाटिल और बड़े नेता सोनिया-मनमोहन से। जब 2008 में राज ठाकरे मुंबई की सड़कों पर तांडव कर रहे थे। क्या तब महाराष्ट्र में कोई सीएम था या नहीं? पुलिस थी या नहीं? क्या सिर्फ सरकार और पुलिस सिर्फ वीआईपी के लिए होती? अगर नहीं, तो ऐसा सुरक्षा बंदोबस्त तब उत्तर भारतीयों के लिए क्यों नहीं किया गया? माना, शिवसेना को उसके गढ़ में चुनौती देकर राहुल ने माकूल जवाब दिया। पर क्या इस दौरे से शिवसेना-राज ठाकरे की ओछी सियासत बंद हो जाएगी? आखिर इस दौरे का क्या संदेश गया?

यही ना, अगर शासन और प्रशासन ईमानदारी दिखाए। तो मुंबई में उत्तर भारतीय बेखौफ रह सकते हैं। अगर कांग्रेस वाकई ईमानदार। तो चचा-भतीजा ठाकरे पर कड़ी कार्रवाई का साहस दिखाए। वरना राहुल का दौरा भी महंगाई जैसा ही महज ढोंग माना जाएगा। पर शिवसेना कहां मुंह बंद रखने वाली। राहुल ने एटीएम से पैसा निकाला। तो उद्धव ठाकरे बोले- 'दिल्ली के नेता मुंबई को एटीएम यानी ऑल टाइम मनी समझते। यही मानसिकता हमें बदलनी है।' अब उद्धव ने छोटी बात से अपने वोटरों को बड़ा संदेश दे दिया। यानी अनजाने में ही सही, शिवसेना को छोटी बात से बड़ा फायदा मिल गया। सो जरूरत जुबानी जंग की नहीं। अलबत्ता कुछ करने की है, ताकि चचा-भतीजा ठाकरे पर नकेल कसी जा सके। पर अपनी सरकार जैसे घरेलू मोर्चे पर असहाय दिख रही। अब कूटनीतिक मोर्चे पर भी नाकामी का सेहरा बंध गया। कहां 26/11 के हमले के बाद भारत ने पाक को दुनिया के कटघरे में खड़ा किया। मनमोहन ने दो-टूक कह दिया। जब तक पाक दोषियों पर कार्रवाई नहीं, बातचीत नहीं। पर जुलाई 2009 में ही शर्म अल शेख जाकर पाक पीएम गिलानी संग साझा बयान कर आए। अमेरिकी दबाव में पहली बार बलूचिस्तान साझा बयान में आ गया। पर देश में बवाल मचा। बीजेपी ने सरकार को बेपर्दा किया।

तो कांग्रेस घबरा गई। घबराहट में तबके विदेश सचिव और मौजूदा एनएसए ने ड्राफ्टिंग एरर कहा। तो विदेश राज्यमंत्री शशि थरूर ने साझा बयान को बंदिश नहीं माना। पर चूक तो थी, सो संसद के दोनों सदनों में मनमोहन को सफाई देनी पड़ी। फिर वही वायदा, जब तक पाक 26/11 के दोषियों पर कार्रवाई नहीं करता। सार्थक बातचीत नहीं होगी। पर ओबामा के दबाव में अब खुद भारत ने आगे बढ़ पाक के सामने बातचीत की पेशकश कर दी। इसी महीने की दो तारीखें भी सुझाईं। तो जैसे गिलानी ने शर्म अल शेख को अपनी जीत बताया था। अब भारत की पेशकश को दुनिया का दबाव बता रहे। भारत से बातचीत का विषय और एजंडा पहले साफ करने की शर्त रख दी। इसे कहते हैं, चोरी और सीनाजोरी। याद है, 22 जनवरी को ही गिलानी ने क्या कहा था। पाक 26/11 नहीं दोहराने की गारंटी नहीं दे सकता। अब पाक पीएम ऐसा बयान दे। फिर भी भारत अपनी ओर से बातचीत की पेशकश करे। तो क्या कहेंगे आप। विपक्ष को तो मनमोहन की नीयत पर संदेह। अब बजट सत्र में बीजेपी पीएम से नया वादा मांगेगी। अरुण जेतली बोले- 'संसद में हमें पीएम से स्पष्ट वायदा चाहिए कि कश्मीर पर 1994 के प्रस्ताव से नहीं हटेंगे। और ना ही सीमा के बारे में भारत की पुरानी स्थिति को छोड़ेंगे।'

Subscribe to comments feed Comments (4 posted):

RAJ SINH on 06 February, 2010 16:37;21
avatar
शाबास !
Thumbs Up Thumbs Down
1
Vicky G on 06 February, 2010 17:06;10
avatar
संतोष ने अच्छा लिखा है. लेकिन मैं विस्फ़ोट की टीम को विशेष साधुवाद दूंगा फ़ोटो सलेक्शन के लिए. लेख के साथ लगाया गया फ़ोटो दिल को छू गया. सच में, वह बुज़ुर्ग महिला निरीह आम आदमी का प्रतिनिधि चेहरा लगती है.
Thumbs Up Thumbs Down
0
Jitendra Dave on 06 February, 2010 18:00;29
avatar
अच्छा लिखा है.
Thumbs Up Thumbs Down
1
Anand G.Sharma on 07 February, 2010 08:52;39
avatar
एक बात सीधी सरल भाषा में समझ लीजिये - मंहगाई बढती नहीं है - मंहगाई बढाई जाती है l फार्मूला एकदम सरल है : ९९% जनता की मूर्खता पर १% धूर्त नेताओं की मक्कारी का तड़का - बस, जायकेदार मंहगाई तैयार है - जी भर के स्वाद ले ले कर खाइए - खूब बखान कीजिये - टीवी पर खूब चर्चा कीजिये - खूब कागज काले कीजिये - बड़ा मजा आता है l
आनंद शर्मा
Thumbs Up Thumbs Down
0
total: 4 | displaying: 1 - 4

Post your comment comment

Please enter the code you see in the image:

Type in Hindi (हिन्दी में कमेन्ट करने के लिए यहां रोमन में लिखिए यह अपने आप हिन्दी में बदल देगा.)

Title :
Body
Powered by Vivvo CMS v4.1.2
Share |
  • email Email to a friend
  • print Print version

ईमेल से विस्फोटः अपना ईमेल यहां भरें और सब्सक्राइब करें:

Delivered by FeedBurner

Author info
image संतोष कुमार मीडिया में माखन लाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय से मास्टर डिग्री. अमर उजाला, यूनिवार्ता और नवज्योति का कार्य अनुभव. दिल्ली में रहकर दिल्ली की रिपोर्टिंग और नवज्योति में नियमित इंडिया गेट कालम का लेखन. पत्रकार के साथ साथ समालोचक. विस्फोट के लिए विशेष लेखन.
Rate this article
3.67
More from बात-करामात
Previous
image
असफल गृहमंत्री का सफल 'आतंकवाद'
हमारे केंद्रीय गृहमंत्री पी.चिदबरम ने पुलिस प्रमुखों के समेलन में ''भगवा आतंकवाद'' का नया शगूफा छोड़ दिया। वैसे इस केंद्रीय मंत्रिमंडल के कई मंत्री बयानों के मामले में शूरवीर की प्रसिद्धी प्राप्त कर चुके है। पी. चिदबरम भी ऐसे ही मंत्री हैं जो अपने बयानों के कारण चर्चा में रहते हैं. आतंकवाद का मामला हो, नकसलवाद का मामला हो, कश्मीर समस्या का मामला हो, या देश में घटित कोई भी अन्य महत्वपूर्ण मामला हो उनके आतंकवाद की थ्योरी भले ही सफल हो रही हो लेकिन बतौर गृहमंत्री वे असफल साबित हो रहे हैं....
image
मुसलमान ही सुलझाएं अयोध्या विवाद
अयोध्या विवाद के संभावित फैसले पर मुझे झटका तब लगा, जब मेरे एक दोस्त की पन्द्रह साल की बेटी का एक एसएमएस मिला। एसएमएस में लिखा था- 'बाबरी मस्जिद का फैसला आने वाला है। दुआ कीजिए कि फैसला मुसलमानों के हक में हो। इस एसएमएस को अपने मुसलिम भाईयों को फॉरवर्ड करें।' इस बात का मतलब यह है कि अयोध्या फैसले की सुरसराहट उन बच्चों में भी हो गयी है, जिन्होंने 1992 के बाद दुनिया देखी है। ...
image
नियमगिरी में अमन चैन की वापसी
भारत अपने विकास के पथ पर तो बढ़ता जा रहा है लेकिन साथ-साथ देश में अमीर-गरीब के बीच की दूरियां भी लगातार बढती ही जा रही हैं। देश के कई भू-भागों में आज भी प्राकृतिक संसाधनों पर स्वामित्व का संघर्ष अपने चरम पर हैं, जहाँ एक ओर अपने जीवन यापन के लिए जंगल और प्रकृति पर निर्भर आदिवासी समुदाय है, तो उनके सामने सर्वाधिकार युक्त एवं सशक्त उद्योगपति हैं। इस संघर्ष में जीत किसी होगी ये एक बड़ा सवाल होता हैं। भय और औद्योगिक आतंक के साए में जी रहे उड़ीसा के कालाहांडी जिले के नियमगिरि पहाड़ों के आसपास निवास करने वाले आदिवासी समुदाय के लोग अब निस्संदेह चैन की साँस ले सकते है।...
image
जयराम की जय हो!
अगर दिल्ली दरबार में एक मंत्री भी अपना काम इमानदारी से करने का फैसला कर ले तो बहुत कुछ बदल सकता है. आज के ६३ साल पहले व्यवस्था बदल देने के लिए सत्ता में आई कांग्रेस के शुरुआती मंत्री तो बहुत ही इमानदार थे ,शायद इसीलिये बहुत सारी चीज़ें ऐसी हुईं जिनकी उम्मीद आज़ादी के लिए संघर्ष करने वाले वीरों ने देखी थी लेकिन वक़्त के साथ बेईमानों की संख्या बढ़ने लगी और बहुत सारे फैसले पैसे के बल पर होने लगे....
image
हिन्दुस्तानी होने की आम बीमारी
हिंदुस्तानी आदमी की सबसे बड़ी कमजोरी है कि उसमें किलर इंस्टिंक्ट का सर्वथा अभाव होता है. दैनंदिन राजनय से लेकर खेल के मैदान तक उसकी यह कमी देखी जा सकती है. हमेशा हिन्दवी समुदाय इस तथ्य को बिसार देता है कि 'क्षमा शोभती उस भुजंग को जिसके पास गरल हो. ' अर्थात क्षमा उस सर्प का आभूषण है जिसके पास गरल यानी जहर हो. जिसके पास जहर ही नहीं होगा उस सांप को कोई केचुए से ज्यादा महत्त्व क्यों देगा? हिंदुस्तानी हमेशा बिना जहर दिखाए क्षमा करने निकल पड़ते हैं इसलिए जीवन के हर क्षेत्र में उन्हें अपमान का घूँट पीना पड़ता है....
image
अंधेरे में रहने को मजबूर है राजमाता की रियाया
भारत गणराज्य में छोटे बच्चे से अगर पूछा जाए कि देश पर वास्तव में शासन कौन कर रहा है तो निश्चित तौर पर उसका जवाब होगा ‘सोनिया गांधी‘। नेहरू गांधी परिवार के नाम पर आधी सदी से ज्यादा राज करने वाली कांग्रेस ने अघोषित तौर पर कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी को अपनी राजमाता और कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी को अपना युवराज मान ही लिया है। क्या आप जानते हैं कि राजमाता और युवराज की सल्तनत का आलम क्या है?...
image
सिर्फ आर्थिक अपराध नहीं है जन धन की लूट
पिछले कुछ समय से ऐसा कोई सप्ताह नहीं बीतता जब समाचार माध्यमों में किसी न किसी सरकारी अधिकारी, राजनेता, या ठेकेदार के यहाँ पड़े छापों में करोड़ों रुपयों का अवैध धन और किलो की तौल में सोना निकलने का समाचार नहीं आता। समाचार माध्यमों का आम पाठक, श्रोता या दर्शक इसे कौतूहल या ईर्षा के भाव से देखता है और निरीह सा अपनी व्यवस्था में आस्था घटाते हुये चुप बैठ जाता है। इन समाचारों से केवल अल्पकालीन सनसनी भर पैदा होती है, और फिर आरोपियों को मामला रफा दफा करने के लिए पर्याप्त समय देते हुये ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।...
image
आजाद कर दो कश्मीर
अगर कश्मीरी हिंदुस्तान में नहीं रहना चाहते तो उन्हें यह अनुभव कर लेने दिया जाना चाहिये कि वे जंगी और आर्थिक समस्याओं से घिरे अस्थिर पाकिस्तान में रह लें या फिर नेपाल या बांग्लादेश की तरह आजाद रहकर तय तक लें कि प्रगति के दौर में वह कहां तक जा पाते हैं. हालांकि इस देश ने अपने किसी वासी को यह तय करने का मौका नहीं दिया कि वह देश में रहना चाहता है या नहीं मगर अगर कश्मीर खुद को थोड़ा अलग महसूस कर रहा है तो उसे मौका दिया जाना चाहिये. बनिस्पत उसे हर साल दसियों हजार करोड़ के स्पेशल पैकेज दिये जायें और उसमें अपनी हजारों फौजों को मौत से मुकाबला करने के लिये ढकेल दिया जाय....
image
दंभ के चलते ख़त्म हो रही है एक बड़ी पार्टी
पश्चिम बंगाल में सरकार गँवा देने के मुहाने पर खडी मार्क्सवादी काम्युनिस्ट पार्टी को अपनी एक और ऐतिहासिक भूल का पता लग गया है. पार्टी के लगभग सभी बड़े नेता आन्ध्र प्रदेश के नगर, विजयवाड़ा में मिले और स्वीकार किया कि यूपीए सरकार से समर्थन वापस लेने में देर हो गयी. पार्टी को लगता है कि समर्थन उसी वक़्त वापस ले लेना चाहिए था जब यूपीए-प्रथम सरकार अमरीका से परमाणु समझौता करने का मंसूबा ही बना रही थी. ...
image
कश्मीरी आवाम से अहिंसा की उम्मीद क्यों?
कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग के रूप में शामिल वाला पूरे भारत की ओर से कश्मीर को क्या मिला है? वहां कश्मीर घाटी की हिंसा में मरने स्थानीय लोगों की खबरों हमें नहीं झकझोरती हैं। देश ने केवल यह दावा किया की कश्मीर हमारा है। लेकिन इस दावे के बाद भी पूरा कश्मीर उपेक्षित हो गया। भूख तो पशु भी बर्दाश्त कर सकते हैं, लेकिन उपेक्षा नहीं। फिर भला एक पूरी समुदाय उपेक्षित हो तो उसे अहिंसक होने की अपेक्षा कैसे की जा सकती है?...
image
राष्ट्रमंडल खेलों के बहाने होगी लंपटों की नारी 'पूजा'
इन दिनों एक खबर जोरशोर से उछाली जा रही है कि राष्ट्रमण्डल खेलों के आयोजन के दौरान भारत सरकार की मंजूरी से या भारत सरकार की ओर से या सरकार की मौन सहमति से हजारों 'सुरक्षित' सेक्स वर्कर राजधानी नयी दिल्ली में आने को तैयार हैं। कहा जा रहा है, कि यह न मात्र हमारी स्वर्णिम और नारी की पूजा करने वाली संस्कृति को नष्ट कर देने वाली पश्चिमी जगत की चाल है, बल्कि इससे ऐड्‌स के तेजी से फैलने की भी भारी आशंका है। इससे देश का चरित्र भी नष्ट होना तय है।...
image
सचमुच हिप्पोक्रेसी की हद है
मीडिया सचिन तेंदुलकर को क्रिकेट का भगवान मानता है और उसकी पूजा के लिये बहाने ढूंढता है. और अपनी इस कोशिश में कई बार मीडिया इतना अतार्किक हो जाता है कि उसपर हंसने की भी इच्छा नहीं होती....
image
भ्रष्टाचार का रंगा शियार निकला 'शेरा'
मणिशंकर अय्यर के भाग्य से कॉमनवेल्थ का छीका टूट ही गया। यों कॉमनवेल्थ के नाम पर मची राष्ट्रीय लूट का खुलासा शरद यादव दो साल से करते आ रहे पर लोकतंत्र के चारों स्तंभों ने अनसुना कर दिया। अब मणि के बोल से ही सही, परतें उधड़ रहीं तो सुनने वाले दांतों तले उंगली नहीं, पूरा हाथ दबा रहे हैं। ...
image
लूट की लड़ाई का नया मैदान बनेगा अफगानिस्तान
अफगानिस्तान अमेरिका के लिए दूसरा वियनताम साबित हो चुका है। यह सच विकीलीक्स के खुलासे के बाद आ चुका है। अमेरिका अफगानिस्तान से भागने की तैयारी में है। वीकीलीक्स ने इसकी जमीन तैयार कर दी है। अफगानिस्तान को अब अपनी नियति खुद तय करनी होगी। अमेरिका के जाने के बाद अफगानिस्तान में क्या होगा, यह दुनिया को दिखने लगा है। ...
image
प्रेमचंद के बहाने साहित्यकारों से दो बातें
महान कथाकार प्रेमचंद की कल जयंती बीत गई। मेरे जेहन में उनका जयशंकर प्रसाद के साथ खिंचवाई एक तसवीर ताजा हो गई है। इस तसवीर में कामायनी के रचयिता महाकवि प्रसाद धीर-गंभीर मुद्रा में खड़े हैं। लेकिन उनके साथ खड़े उपन्यास सम्राट की भंगिमा बिलकुल अलग है। उपन्यास सम्राट के फटे जूते से पैरों की अनामिका उंगली किंचित झांकती सी नजर आ रही है। प्रसाद जी की गंभीरता से ठीक उलट प्रेमचंद के स्मित होठ इससे बेपरवाह नजर आ रहे हैं।...
image
मानो या ना मानो ‘मीडिया बन चुकी है धनकुबेर की लौंडी‘
स्वच्छ, निष्छल, निर्भीक, जनसेवा के लिए की जाने वाली पत्रकारिता के दिन लद चुके हैं। अब जमाना पेड न्यूज का आ चुका है। मीडिया की लगाम वाकई में धनपतियों के हाथों में जा चुकी है। पेड न्यूज पर देशभर में हो रही बहस बेमानी नहीं है। नए चुनाव आयुक्त एस.वाई.कुरैशी का कहना है कि आयोग की पेड न्यूज पर पैनी नजर होगी।...
image
कोहिनूर के बहाने कुछ सवाल
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन अपनी पहली दो दिवसीय यात्रा पर भारत आए। सुना है कि ब्रिटेन को फांके पड़ रहे हैं। ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था बदहाल है। प्रधानमंत्री डेविड कैमरन की इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य ब्रिटेन की डूबती नैया के लिए सहारा जुटाना था। कैमरन भारत के साथ व्यापार बढ़ाना चाहते हैं और 600 अरब रुपए के सौदे को भुनाने की ताक में थे जिसमें उन्हें कामयाबी हासिल हुई।...
Next
Tags
No tags for this article
सर्वाधिकार (अ)सुरक्षित

विस्फोट.कॉम कॉपीराइट के सभी प्रकार के दावों और दायरों से मुक्त है.

Powered by Vivvo CMS v4.1.2