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1411 का इमोशनल अत्याचार

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अगर आप किसी नगर या महानगर में रहते हैं तो इस संख्या 1411 से अपरिचित नहीं होंगे. देश की पांचवी सबसे बड़ी मोबाइल फोन सेवा प्रदाता कंपनी एयरसेल ने भारत में घटते बाघों की चिंता में यह धुंआधार प्रचार अभियान शुरू किया है. एयरसेल का मानना है कि देश में कुल 1411 बाघ ही बचे हैं. कंपनी का ऐसा मानना क्यों है इसका कोई आधार नहीं है फिर भी कंपनी ने बाघ बचाने का बीड़ा उठा रखा है.

एयरसेल का यह अभियान उसकी प्रतिद्वंदी कंपनी आइडिया से भी एक कदम आगे जाता है जो वर्चुअल ट्री के जरिए पर्यावरण बचाने का गोरखधंधा कर रहा है. हमें तो यह अच्छा ही लगना चाहिए कि हमारी कंपनियां जो "एयरटाइम" जैसी कपोल कल्पित अवधारणा के आधार पर लंबे समय से भारी मुनाफा पीट रही हैं वे हमारे पर्यावरण और बाघों के प्रति किस कदर हमें जागरुक कर रही हैं. लेकिन ऐसा होने के बावजूद अच्छा क्यों नहीं लग रहा है? एयरसेल का एक एसएमएस आया है. अगर आप 1411 रुपये का रिचार्ज करते हैं तो आपको 1411 मिनट का एसटीडी, 1411 मिनट का लोकल और 1411 एसएमएस की सुविधा प्रदान की जाएगी. यह सुविधा एक महीने के लिए होगी यानी वैलेडिटी पीरियड-30 दिन. अब सवाल उपभोक्ता के सामने है. अगर वह 1411 रुपये का रिचार्ज नहीं कराता है तो सुविधा से वंचित तो रहता ही है उसके मन में एक भावनात्मक ठेस भी पहुंचती है कि वह देश में बाघों को बचाने के लिए एक 1411 रुपये का रिचार्ज भी नहीं करा सकता? अब अगर उपभोक्ता रिचार्ज नहीं कराता है तो अपने आपको कोसता है और अगर रिचार्ज कराता है तो कंपनी मजे से पैसा पीटती है और कारपोरेट सोशल रिस्पांसबिलिटी का अहम रोल भी निभाती है.

बाघों के बारे में इमोशनल अत्याचार करनेवाली अकेली एयरसेल कंपनी ही नहीं है. बाघों को बचाने के जितने भी प्रयास किये जा रहे हैं, बाघ उसी संख्या में तेजी से कम होते जा रहे हैं. 1411 के जादुई आंकड़े का एक आधार यह है कि भारत में 1200 से 1650 बाघों के बीच कोई संख्या मौजूद हो सकती है. क्योकि सरकार भी यह मानती है कि समस्त बाघ अभयारण्यों में ही नहीं विराजते हैं इसलिए उनकी संख्या के बारे में ठीक से कुछ कह पाना मुश्किल है. बाघ बचाने के सरकारी आंकड़े ने जो अंदाज नहीं लगाया वह काम किया एयरसेल ने. उसने एक समेकित आंकड़ा निकाला जो 1411 के आस पास हो सकता है. सबसे पहले तो एयरसेल के इस दावे को ही चुनौती दिये जाने की जरूरत है कि किस आधार पर वह 1411 बाघ बचे होने का दावा कर रहा है? उसका आधार बाघों की 2007 की गणना है जबकि ताजा गणना अक्टूबर से दिसंबर 2009 के बीच पूरी की गयी है और आखिरी आंकड़े आने अभी बाकी है. आंकड़े अच्छे नहीं होंगे इसकी पूरी गारंटी है क्योकि बाघों को लेकर चीन के रवैये पर खुद वन एवं पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश जिस तरह से निराशा जता चुके हैं वह बताता है कि बाघों का बदस्तूर मरना जारी है. पिछली सदी में 40,000 से अधिक बाघोंवाले देश में सचमुच अब कितने बाघ बचे हैं कहना मुश्किल है.

केन्द्र सरकार के बहुप्रचारित प्रोजेक्ट टाईगर के तहत 80 अभयारण्यों में से 7 को बाघों के लिए संरक्षित अभयारण्य घोषित किया गया है जिसमें रणथंभौर, कान्हा, बांधवगढ़, पन्ना, सरिस्का, सुंदरबन और मानस अभयारण्य शामिल हैं. दबी जुबान में सरकारी नुमांइदे भी यह स्वीकार करते हैं कि इसमें से कुछ अभयारण्यों में तो बाघ बचे ही नहीं है. हालात चाहे जो हों, अगर बाघ संकट में है तो कारपोरेट घराने उस संकट से फायदा उठाने से कैसे पीछे रह सकते हैं. एयरसेल यही कर रहा है. एयरसेल के प्रचार अभियान में कहीं भी यह नहीं बताया गया है कि खास लोग बाघ के बचाव में दिल्ली बंबई में बैठ कर क्या कर सकते हैं? सरकार भी मानती है कि बाघ के शिकारी बाघ के मरे हुए शरीर के हिस्से भारत में नहीं बल्कि चीन, ताईवान, वियतनाम और थाईलैण्ड में भेजते हैं जहां उनकी बहुत अच्छी मांग है. यानी अपने देश में लोग अभी भी इतने संवेदनशील तो हैं जो बाघ की खाल को पहनना शान नहीं समझते हैं. ऐसे में तो चाहिए यह कि एयरसेल उन देशों में बाघ बचाने का कैम्पेन शुरू करता जहां बाघ के सामान की मांग है. अगर उन लोगों को यह बात समझ में आ जाए कि उनकी मांग के कारण भारत के बाघ संकट में हैं तो शायद थोड़ी बात बने भी. लेकिन एयरसेल ऐसा नहीं करेगी. आखिरकार उसके ग्राहक तो दिल्ली, मुंबई और चेन्नई में हैं. अभी यह कंपनी इन देशों में सर्विस प्रोवाइडर नहीं है इसलिए बाघ बचाने का इमोशनल अत्याचार वहां नहीं चल सकता. बाघ बचाने के नाम पर उसके प्रचार अभियान का फायदा रिचार्ज कूपन बेचकर कमाना है तो वे थाईलैण्ड या चीन वासियों को जागरुक करके क्या हासिल कर लेंगे? इसलिए कंपनी उन लोगों को अपराध बोध महसूस करा रही है जिनका कोई कसूर ही नहीं है. अब अगर अपराध बोध से बचना है तो 1411 का रिचार्ज करवाना ही पड़ेगा. बाघ बढ़ें न बढें कंपनी की बैलेंसशीट पर मुनाफा जरूर बढ़ जाएगा.

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Munni Totaram on 23 February, 2010 18:48;28
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1411 का रिचार्ज करवाना ही पड़ेगा. बाघ बढ़ें न बढें कंपनी की बैलेंसशीट पर मुनाफा जरूर बढ़ जाएगा.
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सोनू on 24 February, 2010 18:06;53
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"इमोशनल अत्याचार"-- ये बम्बइया जुमला मुझे अखरता है। कुछ अच्छी हिंदी की संकल्पना सोचिए, जैसे: झूठी ग्लानि या अपराध बोध पैदा करना। अंग्रेज़ी मुहावरों से तौबा कीजिए।
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chandan roy on 02 March, 2010 12:20;03
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Baaghon ka sach ho ya.. company ki munafakhori....
hamesha aam janta ke hit hi prabhavit homge...
sarkar jagegi to baagh pariyojnaon par aur badi rashi aankhmoondkar kharch karegi/. aur company to munafa kama hi rahi hai.
kash koi behtar vikalp hota in soudebaziyon se do do haath karne ka?
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