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लोडिंग, बफरिंग का शिकार हो गया आईपीएल

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तीसरी बार आयोजित हो रहे इंडियन प्रीमीयर लीग के लिए केवल बाल ठाकरे ही संकट नहीं थे जिन्होंने आष्ट्रेलियाई खिलाड़ियों को भारत न आने देने की बात कहकर बीसीसीआई को परेशान कर दिया था. ऐसा लगता है कि बीसीसीआई में आईपीएल के प्रभारी और कमिश्नर ललित मोदी ही इसके जन्मदाता भी थे और अब वही इस खेल को मार भी देंगे.

आईपीएल को मोदी ने ऐसा खेल बना दिया है जिसका नाम लेने के लिए भी पैसा वसूल करना चाहते हैं. टीम बनने से जो खरीद बिक्री का खेल शुरू होता है वह खेलने और देखने तक जारी रहता है. यह सवाल दीगर है कि ऐसे में क्या इसे खेल कहा जाए या फिर इसे एक जुए की उपाधि देकर इसका तिरस्कार कर दिया जाए? लेकिन ललित मोदी का पैसे कमाने का यह अति उत्साह उनके अपने ही ब्रेन चाईल्ड आईपीएल के लिए अब जहर की घुट्टी बनता जा रहा है. आईपीएल की एक भी बाईट समाचार चैनलों पर नहीं जानी चाहिए यह जिद्द आईपीएल के कमिश्नर ललित मोदी की ही थी क्योकि उन्होंने सेट मैक्स से इतना पैसा ले लिया था कि सेटमैक्स आईपीएल का एक भी फुटेज सिवाय अपने चैनल के कहीं और दिखाना बर्दाश्त नहीं कर सकता था. यहां तक कि खबर के नाम पर समाचार चैनलों पर भी आईपीएल की फुटेज नहीं दिखाई जा सकती. इसका परिणाम यह हुआ कि टेलीवीजन चैनलों ने आईपीएल के कवरेज का ही बहिष्कार कर दिया.

न्यूज चैनलों के लिए भी यह घाटे का सौदा था. इसलिए दोनों ओर से पैच-अप का खेल हुआ और पहले मैच के दिन दोनों ओर से एक सहमति बनी कि एक दिन में एक न्यूज चैनल 5.5 मिनट से अधिक का फ्रेश फुटेज नहीं दिखाएगा. इसके साथ ही आईपीएल ने एक शर्त और लादी कि चीयर लीडर्स को डेढ़ मिनट से ज्यादा का फुटेज न्यूज चैनल नहीं दिखा सकते. इतनी शर्तों के बाद भी न्यूज चैनलों ने बहिष्कार वापस ले लिया और भिक्षा में मिली फुटेज से ही काम चलाने का फैसला कर लिया.

ऐसे ही वक्त में इंटरनेट कनेक्शन का इस्तेमाल करनेवालों के लिए गूगल के साथ मिलकर यूट्यूब पर आईपीएल का टेलिकास्ट करने का करार कर लिया. 19 जनवरी को हुए इस करार के तहत यू-ट्यूब को यह अधिकार दिया गया कि वह थोड़ी देर के अंतर पर मैच को सीधा प्रसारित कर सकता है. हालांकि यह रहस्य भेदन नहीं हुआ कि गूगल और आईपीएल ने यह डील कितने में किया लेकिन गार्जियन अखबार ने यह खबर जरूर प्रकाशित की थी कि यूट्यूब पर प्रसारण से जो भी विज्ञापन की कमाई होगी वह दोनों कंपनियों में बंटेगी. इंटरनेट कंपनी गूगल ने आईपीएल के जरिए बड़ा दांव लगाया था क्योंकि भारत में प्रतिमाह उसके 3 करोड़ 10 लाख से अधिक यूनिक यूजर्स हैं तो कि किसी भी सेटेलाइट बेस्ड चैनल से अधिक बड़ा दर्शक वर्ग है. लेकिन गूगल और मोदी के इस दांव को भारत की इंटरनेट स्पीड ने फुस्स कर दिया. भारत में औसत स्पीड 100 एमबीपीएस है जो कि वीडियो दिखाने में भी पांच सेकेण्ड से अधिक की बाईट नहीं दिखा पाता और बफर करता है. फिर लाईव टेलीकास्ट के लिए कम से कम 1 एमबीपीएस की स्पीड तो होनी ही चाहिए. ललित मोदी की चालाकी और गूगल का दांव दोनों ही उल्टा पड़ गया है.

हालांकि एयरटेल ने अपने ग्राहकों को आफर किया है कि वे चाहें तो आईपीएल के लिए उसके 2 एमबीपीएस के विशेष पैकेज को ले सकते हैं. यहां भी एयरटेल आईपीएल के जरिए अपनी कमाई का रास्ता खोल रही है लेकिन सामान्य दर्शकों के लिए जो आईपीएल का क्रेज था वह तो पूरी तरह से प्रभावित हो ही गया. धुर पूंजीवादी मानसिकता ऐसे ही प्रभाव डालती है. जब आईपीएल का गठन हुआ था तो हमने उस वक्त ही कहा था कि यह खेल नहीं तमाशा है जो पूरी तरह से पूंजी के प्रभाव में है. आईपीएल खेल न होकर पूंजी का ऐसा झमेला बन गया है जिसके पास शायद ही कोई स्वस्थ दिमाग वाला व्यक्ति फटकना चाहे.

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Chandra Bhushan on 14 March, 2010 11:38;57
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You have very wrong knowledge over Internet and plz. don't confuse others.
India has been ranked at a dismal 115th among 223 countries in terms of average Internet connection speeds. India has an average Internet connection speed of just 772 Kbps compared with the global average of 1.5 Mbps.

At the end of 2008, approximately 19 per cent Internet connections around the world were at speeds greater than 5 Mbps -- a 21 per cent increase over

The average global connection speed at the end of 2007.

This is according to the State of the Internet report, a quarterly study by Akamai Technologies, the US-based Internet content distribution giant.

Country: Average connection speed: % connections over 5 Mbps
1. South Korea: 15 Mbps: 69%
2. Japan: 7 Mbps: 54%
3. Hong Kong: 6.9 Mbps: 38%
4. Romania: 5.7 Mbps: 45%
5. Sweden: 5.6Mbps: 39%
6. Switzerland: 5 Mbps:
7. Netherlands: 4.9 Mbps: 28%
8. Belgioum: 4.7 Mbps: 31%
9. Slovakia: 4.5 Mbps
10. Norway: 4.5 Mbps: 38%

rediff.com: Net connection: The top 10 countries

Points that emerge from this study are:
1. Industrialised western countries are absent.
2. All the ranked countries are small.
5. Singapore is not in the top ten.
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visfot news network on 14 March, 2010 15:53;23
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मैं यहीं पर पाठकों से पूछता हूं कि क्या वे अपने इंटरनेट कनेक्शन की स्पीड से संतुष्ट हैं? क्या वास्तव में उन्हें आपके बताए अनुसार 772 केपीबीएस की औसत स्पीड मिल रही है?

पहला जवाब मैं देता हूं. बिल्कुल नहीं. औसत स्पीड 100 केपीबीएस ही है जो कि एमटीएनल का ब्राडबैण्ड कनेक्शन है और 256 केपीबीएस स्पीड का दावा करता है. और पाठकों के जवाब का इंतजार है
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अंकुर गुप्ता on 14 March, 2010 20:44;18
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नमस्कार, आपने बिल्कुल सही फ़रमाया. भारत में इंटरनेट काफ़ी महंगा है. मेरा कनेक्शन 512KBPS दिन में और रात में 1MBPS का है जिसका महीने का बिल करीब डे़ढ़ हजार रुपये आता है. मेरी कुछ विशेष जरूरते हैं इसलिए इतना खर्च करता हूं.बाकी मेरी पहचान वालों में किसी के पास इतना या इससे अधिक गति का इंटरनेट नही है.कुछ लोग तो छोटे प्लान भी खर्च की वजह से कटवा दे रहे हैं. एक दिन एयरटेल का इंजीनियर आया था तो बता रहा था कि पूरे बिलासपुर में एयरटेल के इंटरनेट के बड़े प्लान लेने वाले करीब पच्चीस - तीस ग्राहक ही हैं.
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Chandra Bhushan on 15 March, 2010 02:30;38
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अंकुर गुप्ता जी आप पोस्ट फिर से पढ़े, ऊपर 100MBPS लिखा है 100KBPS नहीं KBPS एंड MBPS में बहुत अंतर है 1024KB = 1MB होता है PS यानि per second. अब रही बात औसत स्पीड की तो आप यह जरुर जानने की कोशिश करे की औसत स्पीड कैसे निकला जाता है|
आप सही कहते हैं की आम इन्टरनेट user 100KBPS या उससे भी कम स्पीड प्राप्त करता है, लेकिन औसत स्पीड निकलने के क्रम में बड़ी बड़ी कम्पनियाँ भी आ जाती है जो औसत स्पीड को प्रभावित करती है| जैसे 10MB से 100MB या फिर 200MB या इससे से भी ज्यादा use करते हैं| आप तो जानते है की भारत में call center का जाल है, ये call center audio/video बहुत जादा use करतें हैं इसलिए हाई स्पीड इन्टरनेट use करतें हैं| अतः ये कंपनी औसत स्पीड का अकड़ा बिगर देते हैं|
अमेरिका का तो औसत स्पीड 1.7-1.8MBPS है मात्र|
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अंकुर गुप्ता on 15 March, 2010 03:38;13
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चंद्रभूषण जी, पोस्ट में १००एमबीपीएस लिखा है परंतु लगता है कि वो गलती से लिख गया है क्योंकि visfot news network ने टिप्पणी में स्वयं १००केबीपीएस लिखा है.
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अंकुर गुप्ता on 15 March, 2010 03:40;05
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@visfot news network: मैं तो अपने कनेक्शन स्पीड से संतुष्ट हूं. क्योंकि मुझे बताए अनुसार ही स्पीड मिलती है. हां ये बात जरूर है कि खर्च बहुत ज्यादा है.
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