Home | बात करामात | भ्रष्टाचार का रंगा शियार निकला 'शेरा'

भ्रष्टाचार का रंगा शियार निकला 'शेरा'

image

मणिशंकर अय्यर के भाग्य से कॉमनवेल्थ का छीका टूट ही गया। यों कॉमनवेल्थ के नाम पर मची राष्ट्रीय लूट का खुलासा शरद यादव दो साल से करते आ रहे पर लोकतंत्र के चारों स्तंभों ने अनसुना कर दिया। अब मणि के बोल से ही सही, परतें उधड़ रहीं तो सुनने वाले दांतों तले उंगली नहीं, पूरा हाथ दबा रहे हैं।

सचमुच जिस फ्रिज की कीमत आठ-दस हजार हो, उसका किराया कोई 45 हजार दे तो ऐसे आयोजक को मोहम्मद बिन तुगलक ही कहेंगे। छतरी बढिय़ा से बढिय़ा 4100 रुपए की पर कॉमनवेल्थ आयोजकों ने साढ़े छह हजार के किराए पर ली। ऐसा कोई सामान नहीं, जो दुगुने से पांच गुने अधिक दाम पर नहीं लिया गया हो। लूट मचाने का इससे नायाब फार्मूला क्या होगा। कुछ महीने के लिए अपना सामान किराए पर दो, फिर माल भी अपना और धन भी अपनी जेब में सो करोड़ों खर्च कर दुरुस्त हुआ स्टेडियम पानी-पानी हो रहा। समूची दिल्ली खुदी हुई दिख रही। अब मौसम विभाग ने अक्टूबर के पहले हफ्ते में बारिश की आशंका जता दी। सो बेचारे शीला-कलमाड़ी की मुसीबत और बढ़ गई। अभी तो देश की जनता के सामने कलई खुल रही, तब विदेशी मेहमानों को क्या मुंह दिखाएंगे। अब तो चुटकी लेने वाले भी खूब हो गए। शीला-कलमाड़ी को सुझाव मिल रहा, जब दिवालिया कंपनियों से समझौता कर सकते हो तो अक्टूबर में बारिश न हो, इसके लिए इंद्र से 'एमओयू' दस्तखत कर लो। इसी बहाने इंद्र के घर तक जाने का यात्रा भत्ता भी अच्छा-खासा बन जाएगा और किसी को यह घोटाला मालूम ही नहीं पड़ेगा। किसे मालूम इंद्र कहां रहते हैं और उन तक पहुंचने का क्या रास्ता। अपने मीडिया वाले तो कम से कम नहीं पहुंचेंगे। वैसे भी कॉमनवेल्थ गेम पर जितनी हाय-तौबा मच रही, अभी उतना भ्रष्टाचार तो हुआ भी नहीं।

पता नहीं आयोजकों को डाइटिंग किसने सिखा दी। अगर पूरे खेल के आयोजन पर 37,000 करोड़ का खर्चा माना जाए। तो दस से पंद्रह फीसदी का हिस्सा तो ईमानदारी का बनता है, पर अभी महज दो हजार करोड़ के ही आरोप लग रहे हैं। यानी 1700 करोड़ कम। यह तो 'भ्रष्टाचार' का अपमान है। याद करिए अपने राजीव गांधी ने क्या कहा था। एक रुपया अपने पड़ाव तक पहुंचते-पहुंचते महज 15 पैसे रह जाता। यानी जब 80-85 फीसदी पैसा खाकर कोई डकार ले, तब उसे भ्रष्टाचार कहते हैं। पर अपने कॉमनवेल्थ आयोजन से जुड़े लोगों का लीवर कमजोर हो चुका है सो 15 फीसदी भी नहीं डकार पाए, पर देश में हो-हल्ला मच गया। बात संसद तक पहुंच गई तो तैयारियों का हाल देख कांग्रेस खुलकर नहीं रो पा रही। ना ही कलमाडिय़ों का साथ दे रही। पर अब जैसे भी हो, जनता की लूट पर कॉमनवेल्थ गेम कराना मजबूरी सो राज्यसभा में गुरुवार को खेल मंत्री एम.एस. गिल ने लाचारी दिखाई। बोले- अब बारात घर आने को तैयार, सो स्वागत करना ही होगा। जलसा पूरा करना होगा पर बाद में सच सामने लाएंगे। फिलहाल जब कुछ तैयार ही नहीं हुआ, तो जांच किसकी कराएं।

अब सोचो, गेम्स के बाद जांच होंगी, तो समूचे दस्तावेज दुरुस्त हो चुके होंगे। सो फिलहाल हल्ला शांत करने को दो-चार की बलि ले ली। आयोजन समिति से कोषाध्यक्ष अनिल खन्ना का इस्तीफा हो गया। खन्ना के बेटे की कंपनी को भी ठेका मिला था। कलमाड़ी के करीबी टीएस दरबारी, संजय महेंद्रू हटाए गए। हैड एकाउंटेंट जयचंद भी नपे। अब एके मट्टू नए कोषाध्यक्ष होंगे। पर सुरेश कलमाड़ी को हटाने की मुहिम उचित नहीं। वैसे भी यह कैसा फार्मूला, खाने-पीने वाले तोंद निकाल कर आराम करने चले जाएं। और जिम्मेदारी संभालने वाला नया व्यक्ति सिर्फ काम करे, खाने-पीने को कुछ न मिले। वैसे भी जांच में होगा क्या। इराक तेल दलाली के मामले में वोल्कर रपट के बाद नटवर सिंह एंड फेमिली कांग्रेस से नप गई। पर जांच का निचोड़ क्या निकला। किसी पर कार्रवाई हुई। यहां भी वही हाल, दो-चार निलंबन हुए। गेम्स के बाद कुछेक और हो जाएंगे। फिर समय के साथ सारा खाया-पीया हजम हो जाएगा पर बात गेम्स की तैयारी की। जब खेल मंत्री संसद में लाचारी दिखा रहे। तो सोचो, कैसे होगा राष्ट्रमंडल खेल? कैसे बचेगी राष्ट्र की इज्जत?

सचमुच अब तो एक ही फार्मूला, जैसे आठ अक्टूबर 2009 को कॉमनवेल्थ गेम्स फैडरेशन के अध्यक्ष के साथ 71 देशों के डेलीगेट्स ने तैयारियों का मौका-मुआइना किया। तो समूची दिल्ली सील कर दी गई थी। ट्रेफिक की बदहाली विदेशी मेहमान न देख सकें, सो पहले ही लोगों को एडवाइजरी दी जा चुकी थी। तब यहीं पर लिखा था- अभी ऐसा हाल, तो 2010 में क्या होगा। सचमुच अब एक ही तरीका, सरकार उम्दा बाड़ तैयार करे। जब तक गेम्स हों, सभी दिल्ली वालों को बाड़ में ठूंस दो। दिल्ली से लगने वाले सभी बार्डर सील कर दो। समूचे खेल का लाइव टेलीकास्ट कराओ। और अपनी इज्जत बचाओ। सात साल में गेम्स की तैयारी का राजधानी में यह हाल। तो मनमोहन किस विकास दर का ढिंढोरा पीट रहे? अब कॉमनवेल्थ गेम्स के भ्रष्टाचार की जांच ईडी करे, या 'डीडी' (देवी-देवता)। पर होना-जाना कुछ नहीं। तभी तो जब सीवीसी ने खामियां उजागर कीं, सीबीआई से केस दर्ज करने को कहा। तो खेल में पीएम भी कूद गए। सो अगले ही दिन सीवीसी का बयान जारी हो गया- हमारी रपट अभी आरंभिक। सो निष्कर्ष न निकाला जाए। अब सोचो, जब सीवीसी का यह हाल। तो सीबीआई का क्या होगा? बेजा इस्तेमाल का आरोप यों ही नहीं लगता। पर बात गेम्स की, तो कॉमनवेल्थ गेम्स का 'शेरू' आखिर रंगा सियार ही निकला। बारिश होते ही भेद खुल गया।

Subscribe to comments feed Comments (2 posted):

Pawan kurukshetera on 09 August, 2010 12:13;08
avatar
Santosh ji ye media wale bhi jab tak halla machayenge jab tak inka share na mil jaye ye sab mile hue is desh k loktantra ko khatam karne ke liye inko to soharabudin ko shaheed banane ki chinta hai or kaise honduo ko antakwadi bataya ja sake kuch nahi hoga desh khatam kar denge ye sab congress ke agent hai Rahul Sonia bina responsibility ke desh par raj kar rahe h ab kaha h wo koi bayan kyo nahi dete
Thumbs Up Thumbs Down
0
Imran zaheer on 12 August, 2010 04:37;24
avatar
santosh ji ye khabar apki likhi hai ya kisi aur ki is khabar ko dosri website par dosre k nam se prakashit ki gai hai. Batane ka kripa karenge ki aik he report alag alag namo se kaise prakashit ho gai?
Thumbs Up Thumbs Down
0
total: 2 | displaying: 1 - 2

Post your comment comment

Type in Hindi (हिन्दी में कमेन्ट करने के लिए यहां रोमन में लिखिए यह अपने आप हिन्दी में बदल देगा.)

Title :
Body
Powered by Vivvo CMS v4.1.2
Share |
  • email Email to a friend
  • print Print version

ईमेल से विस्फोटः अपना ईमेल यहां भरें और सब्सक्राइब करें:

Delivered by FeedBurner

Author info
image संतोष कुमार मीडिया में माखन लाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय से मास्टर डिग्री. अमर उजाला, यूनिवार्ता और नवज्योति का कार्य अनुभव. दिल्ली में रहकर दिल्ली की रिपोर्टिंग और नवज्योति में नियमित इंडिया गेट कालम का लेखन. पत्रकार के साथ साथ समालोचक. विस्फोट के लिए विशेष लेखन.
Rate this article
5.00
More from बात करामात
Previous
image
अजमेर चार्जशीट और संघी उछल-कूद
बढ़ते पैमाने पर इसके साक्ष्य सामने आ रहे हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर एस एस) से जुड़े लोगों का आतंकवादी हमलों में हाथ रहा है। इन हालात में आर एस एस इस पुराने सूत्र पर चल रहा लगता है कि हमला ही सबसे अच्छा बचाव है। उसने 10 नवंबर को देशव्यापी विरोध कार्रवाइयों का आह्वान किया है। इन कार्रवाइयों में संघ के शीर्ष नेताओं के शामिल होने की बात कही जा रही है। बहरहाल, इसकी चर्चा हम जरा बाद में करेंगे।...
image
खुद ही खुदा बनने चला संघ
आर एस एस ने अब शायद बी जे पी को हाशिये पर लाने का मन बना लिया है .अपनी आबरू बचाने के लिए १० नवम्बर को आरएसएस के नेता खुद सडकों पर उतरेगें और धरना प्रदर्शन करेगें . उनकी शिकायत है कि यूपीए सरकार संघी आतंकवाद के ब्रैंड को प्रचारित करने में लगभग कामयाब हो गयी है और बीजेपी वाले कोई भी राजनीतिक पहल नहीं कर रहे हैं. नाराज़ संघी नेतृत्व अब खुद ही मैदान ले रहा है ....
image
शाबाश ओबामा, पहले दिन ही दस अरब डालर का बिजनेस
अपने भारत दौरे के पहले दिन ही बराक ओबामा दस अऱब डालर का बिजनेस कर गए। बेशक भारत को कुछ न मिले। पर भारत ओबामा को काफी कुछ देगा। भारत अमेरिकी बेरोजगारी को दूर करेगा। बेशक आतंकी हमलों से संबंधित भाषण में ओबामा ने पाकिस्तान का नाम नहीं लिया, पर भारत ने अपनी सेवा में कोई कसर नहीं छोड़ी। भारत सरकार और भारत के प्राइवेट कारपोरेट ने ओबामा को खुश कर दिया है। चीन से परेशान बराक ओबामा को भारत दौरे से राहत मिली है।...
image
भारत के रुख से चीन बेचैन
इस समय चीन बैचेन है। बैचेनी का कारण भारत की विस्तारवादी विदेश नीति है। इस विदेश नीति के तहत भारत ने उन देशों से दोस्ती बढ़ानी शुरू कर दी है, जो देश चीन से किसी न किसी मसले पर भीड़े है। चीन काफी बैचेने से भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की हाल ही में हुई विदेश यात्रा और बराक ओबामा का नवंबर के दूसरे सप्ताह में होने वाली दक्षिण एशिया की यात्रा पर नजर रखे है। भारतीय प्रधानमंत्री की जापान, मलेशिया, दक्षिण कोरिया, वियतनाम यात्रा की आलोचना चीनी अखबार पीपुल्स डेली कर रहा है। जबकि ओबामा की यात्रा को भी चीनी अखबार विस्तारवादी यात्रा बता रहा है।...
image
चड्ढी पहन के फूल खिलाने वाले उपेक्षित
छत्तीसगढ़ के सन्दर्भ में कुछ साल पहले ‘ विकास बनाम संस्कृति ’ पर चर्चा करते हुए डा. रमन सिंह ने एक बड़ी अच्छी बात कही थी. बकौल डा. सिंह ‘आखिर कब तक आप संस्कृति के नाम पर गरीब आदिवासियों के सिर पर सिंह लगा उन्हें नचाते रहेंगे ? उनको भी विकास और समाज की मुख्यधारा में शामिल होने का अवसर दीजिए.’ तो ज़ाहिर सी बात है कि अगर हम प्रदेश को बदलते वैश्विक परिवेश के अनुसार आगे बढते और विकसित प्रदेश के रूप में उसकी पहचान बनाना देखना चाहते हों तो हमें नवाचार को बढ़ावा देना होगा....
image
बस, एक सरदार चाहिए कश्मीर के लिए!
कश्मीर समस्या ने इस मिथक को भी तोड़ दिया की विकास की योजनाओं और बुनियादी अवशक्ताओ की पूर्ति से किसी भी समस्या का हल ढूंढा जा सकता है ,कश्मीर में वो सब प्रयास विफल रहे है। वो हाथ जो डल झील में नाव चलाते थे, अब पत्थर-बाजी में शरीक है। इन स्थितियों में तो ऐसा लगता है काश आज सरदार पटेल के कद और राजनीतिक दृढता वाला कोई नेता देश में होता तो अब तक ये विवाद कब का हल हो गया होता। ...
image
शुक्र मनाओ कि तुम भारत में हो अरुंधती
भारतीय समाज में बुद्धजीवी का दर्जा पा चुकी अरुंधती रॉय ने कहा है कि कश्मीर कभी भी भारत का अभिन्न हिस्सा रहा ही नहीं है. गिलानी दिल्ली में सेमिनार में कह रहें है कि उन्हें आज़ादी से कम कुछ भी नहीं चाहिए. गिलानी अगर ऐसी बात कहें तो कोई हैरानी नहीं होती लेकिन अरुंधती ऐसा कहें तो आश्चर्य होता है. हालांकि इसके पहले भी अरुंधती रॉय एक ऐसा ही बयान दे चुकी हैं. तब उन्होंने मावोवाद का समर्थन किया था. कश्मीर को भारत का अभिन्न हिस्सा ना मानने सम्बन्धी बयान वहां पर अपनी जान कि बाज़ी लगा रहे जवानों के लिए एक तमाचा है. साथ ही शेष देश के लोगों के लिए क्षोभ और शर्मिंदगी की वजह है....
image
आइये अरुंधती को लानत भेंजे
उसका बस चले तो वो हिंदुस्तान के सिर्फ इसलिए टुकड़े टुकड़े कर दे क्यूंकि ऐसा करने से वो भीड़ से अलग नजर आएगी। उसके पास हत्याओं को वाजिब ठहराने के तमाम तर्क हमेशा मौजूद रहते हैं ,क्यूंकि इसे वो खुद को महान साबित करने का औजार समझती है। संभव है इसके बहाने वो नोबेल पुरस्कार पाने की कोशिश कर रही हो। वो वामपंथ का ऐसा क्रूर चेहरा है जिसका इस्तेमाल मीडिया कभी अपनी टीआरपी बढाने में तो कभी व्यवस्था के विरुद्ध अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए करता है। संभव है बहुतों को उससे मोहब्बत हो लेकिन हम अरुंधती को लानत भेजते हैं क्योंकि उसे राष्ट्र के अस्तित्व से नफरत है।...
image
टुम बोले टुम बोले हम टो टुप्पई टाप!
पुरानी कहानी है कि एक परिवार के तीन तोतलों की शादी नहीं हो पा रही थी। पिता ने हिदायत दी कि इस बार जो लडकी वालों के सामने बोलेगा उसको घर से निकाल दिया जाएगा। लकड़ी वाले आए, बडे बोला -‘पितादी ती बात याद है न।‘‘ मंझला बोला -‘‘टुप्प भईया।‘‘ छोटा बोल उठा -‘‘टुम बोले टुम बोले हम टो टुप्पई टाप!‘‘ इस तरह तीनों की पोल खुल गई। कांग्रेसनीत केंद्र सरकार में भी कमोबेश एसा ही कुछ होता दिख रहा है।...
image
संघ को बदनाम करने की कांग्रेसी साजिश
राजस्थान सरकार के आतंकवाद विरोधी दस्ते ने अजमेर दरगाह शरीफ पर कुछ साल पहले हुूए बम धमाके के मामले में कुछ तथाकथित अभियुक्तों के खिलाफ अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया है। इस आरोप पत्र में जिन आरोपियों को नाम हैं उनमें इन्द्रेश कुमार का नाम नहीं है। यहां तक का किस्सा सामान्य जांच प्रक्रिया का अंग है। परंतु उसके बाद की कहानी राजनैतिक कहानी है।...
image
सामी नहीं, कांग्रेस के मुंह पर कालिख
कहने के लिए भले ही छत्तीसगढ़ कांग्रेस में केंद्रीय राज्य मंत्री वी नारायण सामी पर कालिख फेंके जाने का मुद्दा शांत होता दिख रहा हो लेकिन इसकी गूंज अभी लंबे समय तक सुनाई देगी। हकीकत यह है कि यहां कांग्रेस की गुटबाजी को आलाकमान अपना पूरा दम लगाकर भी शांत नहीं कर सकता। प्रभारी के रूप में सामी की यहां यह दूसरी बार फजीहत हुई है। मंगलवार को पीसीसी प्रतिनिधियों की बैठक में जब महज एक लाइन का प्रस्ताव पारित करवाने के लिए सामी यहां पहुंचे थे तो कांग्रेस भवन के बाहर ही उन पर काली स्याही फेंकी गई जो उनके चेहरे और कपड़े पर होते हुए उनके साथ कार से उतरे शहर कांग्रेस अध्यक्ष इंदरचंद धाड़ीवाल पर भी पड़े।...
image
अब देखिए राजनीति का कॉमनवेल्थ
कॉमनवेल्थ घोटाले की कड़ी से कड़ी जुडऩे लगी। पहले दिन बीजेपी नेता सुधांशु मित्तल निशाने पर रहे, तो दूसरे दिन खेल गांव बनाने वाली कंपनी एम्मार-एमजीएफ का खेल बिगड़ गया। डीडीए के पास जमा 183 करोड़ की बैंक गारंटी जब्ती का नोटिस जारी हो गया। पर अभी तो सिर्फ ठेका लेने वाली कंपनियों पर शिकंजा कसा। यक्ष प्रश्न, ठेका देने वाले नौकरशाहों-नेताओं ने कितना खाया, इसकी परतें कब उधड़ेंगी? अब ठेकेदारों पर कार्रवाई में तेजी दिखाने से क्या होगा? ठेकेदार तो अपना टेंडर भरते। यह तो देने वाले पर निर्भर, किस कंपनी को ठेका दे। सो सवाल, ठेका देते वक्त नौकरशाहों-नेताओं ने होश क्यों गंवाया?...
image
अब शुरू हुआ असली खेल
कॉमनवेल्थ खेलों के लिए लगाये गये टेन्ट, तंबू कनात उखड़ गये हैं. लेकिन असली खेल उसके बाद शुरू हुआ है. भारतीय जनता पार्टी बनाम कांग्रेस के इस खेल में राजनीति का स्वर्ण पदक कौन हासिल करेगा यह कहना मुश्किल है लेकिन जो खुलासे होंगे वे यह साबित कर देंगे कि खेल भारतीय राजनीति में पर्दे के पीछे असली समाजवाद कायम है. अगर भाजपा की सरकार में कांग्रेसी सुरेश कलमाड़ी कामनवेल्थ खेलों के लिए अगुआ बने रहते हैं तो कांग्रेस की सरकार में आठ सौ करोड़ का ठेका भाजपा के हितैषी सुधांशु मित्तल को मिल जाता है. ...
image
बताओ भला, सीएजी शीला और कलमाड़ी का क्या बिगाड़ लेगी?
कॉमनवेल्थ के आयोजक सफलता की खुमारी में हैं तो देश की जनता विजयादशमी के जश्न में डूबी है, ऐसे में रामायण के एक प्रसंग का जिक्र लाजिमी होगा। जब भगवान राम लंका पर फतह कर अयोध्या लौटे। राज्याभिषेक हो गया तब सिर्फ एक धोबी की टिप्पणी सुन राम ने अग्नि परीक्षा दे चुकी सीता को तज दिया था। पर कॉमनवेल्थ के आयोजकों पर न जाने कितने आरोप लग चुके, फिर भी किसी ठोस कार्रवाई की उम्मीद बेमानी। पहले भी जांच हुई, रपटे आईं लेकिन उन्हीं शीला दीक्षित ने सीएजी को ठेंगा दिखा दिया जिनके खिलाफ अब कामनवेल्थ खेलों में भ्रष्टाचार के खिलाफ जांच करने की बात कही जा रही है....
image
काश हर मस्जिद की खिडकी मंदिर में खुलती
6 दिसंबर, 1992 को जब विवादित ढांचा ढहाया गया, तब मैं जवान हो रहा था। बारहवीं में था। पिताजी उन दिनों बुलंदशहर में बतौर अध्यापक तैनात थे। हम सब उनके साथ ही रह रहे थे। दंगे भडक चुके थे। हमने छत पर चढकर दूर मकानों से उठती लपटों की आंच महसूस की थी। मौत के खौफ से बिलबिलाते लोगों की चीखें सुनी थीं। हैवानियत का नंगा नाच देखा था। 'जयश्री राम' और 'अल्लाह ओ अकबर' के नारों में भले ही ईश्वर और अल्लाह का नाम हो, लेकिन तब उन्हें सुनकर रीढ़ में बर्फ-सी जम जाती थी।...
image
ऐसे आदमी का सियासत में क्या काम?
कहां इकबाल,गालिब व फैज का शौक और कहां सियासत! जो भी हो पर पंजाब के कमजोर आर्थिक पक्ष व सियासत की गफलत में पंजाब के पूर्व वित्त मंत्री (निलंबन के दूसरे दिन उन्हें पूर्व भी कर दिया गया है) मनप्रीत सिंह बादल पंजाब के उन अहम से मारे सियासतदानों से बिल्कुल अलग है जो सियासतदान गनमैनों के लाव लश्कर के बिना चलना अपनी तौहीन समझते हैं।...
image
आरटीआई का दिल है इंटरनेट
इन्टरनेट आरटीआई का दिल है, यह बात किसी आईटी प्रोफेसनल या इन्टरनेट सर्विस प्रोवाइडर द्वारा अथवा ईमेल सेवा प्रदाता कंपनी ने नहीं कही, बल्कि ऐसे शख्स श्री वजाहत हबीबुल्लाह ने कही, जो केन्द्रीय सूचना आयोग के मुख्य सूचना आयुक्त रहे हैं। जिस कार्यक्रम में मुख्य सूचना आयुक्त ने दिल की बात दिल से जोड़कर कही, उस कार्यक्रम में मैं भी मौजूद था। मैंने कार्यक्रम में आये भारत के विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों व अन्य देशों से आये विषय विशेषज्ञों से आरटीआई को इन्टरनेट के जरिए प्रोत्साहित करने की बात कही।...
Next
Tags
No tags for this article
सर्वाधिकार (अ)सुरक्षित

विस्फोट.कॉम में प्रकाशित सामग्री पर हमारी ओर से कोई कापीराइट नहीं है.

Powered by Vivvo CMS v4.1.2