Home | बात करामात | दंभ के चलते ख़त्म हो रही है एक बड़ी पार्टी

दंभ के चलते ख़त्म हो रही है एक बड़ी पार्टी

image सोमनाथ चटर्जी का निष्कासन पार्टी के दंभ का चरम था

पश्चिम बंगाल में सरकार गँवा देने के मुहाने पर खडी मार्क्सवादी काम्युनिस्ट पार्टी को अपनी एक और ऐतिहासिक भूल का पता लग गया है. पार्टी के लगभग सभी बड़े नेता आन्ध्र प्रदेश के नगर, विजयवाड़ा में मिले और स्वीकार किया कि यूपीए सरकार से समर्थन वापस लेने में देर हो गयी. पार्टी को लगता है कि समर्थन उसी वक़्त वापस ले लेना चाहिए था जब यूपीए-प्रथम सरकार अमरीका से परमाणु समझौता करने का मंसूबा ही बना रही थी.

अफ़सोस ज़ाहिर करते हुए कहा गया है कि पार्टी के पोलित ब्यूरो और सेन्ट्रल कमेटी ने इस बात का सही आकलन नहीं किया कि मनमोहन सिंह की उस वक़्त की सरकार का इरादा कितना पक्का है. इसलिए गलती हो गयी. ज़ाहिर है कि मार्क्सवादी पार्टी ने अपनी एक  और ऐतिहासिक भूल को स्वीकार कर लिया है. इसके पहले भी यह पार्टी कई ऐतिहासिक भूलें कर चुकी है लेकिन इस भूल का रंग थोडा अलग है . जब १९९६ में ज्योति बसु को मुख्य मंत्री बनने से रोका गया था, उसे भी सीपीएम के आर्काइव्ज़ में एक बड़ी ऐतिहासिक भूल की श्रेणी में रख दिया गया है.  उस भूल के सूत्रधार भी आज के महासचिव, प्रकाश करात को माना जाता है लेकिन उन दिनों वे परदे के पीछे से अपना काम करते थे.

अब खेल बदल गया है. वे खुद ही पार्टी के आला अफसर हैं और जो मन में आता है उसी  को नीति बनाकर पेश कर देते हैं. इसलिए जब परमाणु समझौते के मुद्दे पर मनमोहन सिंह सरकार को गिराने की बात आई तो वे पूरी तरह से कंट्रोल में थे. जिसने भी उनकी बात नहीं मानी उसको डांट दिया. महासचिव का फरमान आया कि पार्टी के बड़े नेता और लोक सभा के स्पीकर सोमनाथ चटर्जी अपना पद छोड़ दें. सोमनाथ जी ने पार्टी के सबसे आदरणीय नेता ज्योति बसु से राय ली और कहा कि अभी इस्तीफ़ा देना ठीक नहीं है क्योंकि स्पीकर तो पार्टी की राजनीति से ऊपर उठ चुका होता है. करात बाबू  को गुस्सा आ गया और उन्होंने सोमनाथ चटर्जी को पार्टी से निकाल दिया. अपनी जीवनी में सोमनाथ चटर्जी ने उस वक़्त की तानाशाही की बात को विस्तार से लिखा है. मार्क्सवादी पार्टी के बड़े नेता और पार्टी से सहानुभूति रखने वाले बुद्धिजीवी मानते हैं कि वह फैसला इतना बेतुका था कि  उसके घाव को वामपंथी आन्दोलन बहुत दिन तक झेलेगा. एक मत यह भी है कि पश्चिम बंगाल में पार्टी की हालत उसी दिन से बिगड़ना शुरू हो गयी थी जिस दिन सोमनाथ दा को निकाला गया था. 

अब विजयवाड़ा में पेश किये गए कागजों से पता चलता है कि पार्टी ने स्वीकार किया है कि 'पार्टी ने अपनी ताक़त को ज्यादा आंक लिया था, इसी वजह से गलती हो गयी. आत्मालोचन की इस बात में दम है. यह बात बिकुल सच है कि पार्टी ने अपनी ताक़त को बहुत बढ़ा चढ़ा कर आंक लिया था. पार्टी के आला हाकिम को मुगालता हो गया था कि वह मायावती, चन्द्रबाबू नायडू आदि नेताओं का नेता बन जाएगा और तीसरा मोर्चा एक सच्चाई  बन जाएगा और जब चुनाव  होगें तो चारो तरफ मार्क्सवादी  पार्टी की ताक़त का डंका बज जाएगा.

इस सारे खेल में सबसे  अजीब बात यह है कि पार्टी के सबसे बड़े नेता के अलावा सब को  मालूम था कि वह मुंगेरी लाल के हसीन सपने देख रहा है लेकिन उसे उस वक़्त रोकना  असंभव था. केरल में एक भ्रष्ट नेता को ईमानदार साबित करने का प्रोजेक्ट भी उसी मनोदशा का नमूना है. बहर हाल अब पार्टी का लगभग सब कुछ ख़त्म होने को है. और अगर सोमनाथ चटर्जी की बात का विश्वास करें तो इसके लिए जिम्मेवार केवल प्रकाश करात हैं. उनका कहना है कि पार्टी के वर्तमान महासचिव में दंभ बहुत ज्यादा है और वे अपनी बात के सामने किसी  को सही नहीं मानते. उनकी दूसरी  सबसे बड़ी दिक्क़त यह है कि वे किसी तरह के विरोध को बर्दाश्त नहीं कर पाते और विरोध करने वाले को दुश्मन मान बैठते हैं. बहर हाल विजयवाड़ा में एक बार फिर यह तय किया गया है कि गैर कांग्रेस-गैर बी जे पी विकल्प की तलाश जारी रहेगी.  अब जब कुछ महीनों बाद बंगाल में भी सत्ता लुट जायगी तो इस काम को करने  के लिए बड़ी संख्या में नेता भी मिल जायेगें और एक बार फिर जनवादी राजनीति को ज़मीन पर विकास का मौक़ा दिया जाएगा. इस बार बस फर्क इतना है कि आर एस एस की रहनुमाई में फासिस्ट  ताकतें पहले से  बहुत ज्यादा मज़बूत हैं और एक आदमी की जिद के चलते कम्युनिस्ट पार्टियां बहुत कमज़ोर हो चुकी हैं।

Subscribe to comments feed Comments (4 posted):

Dr pawan on 14 August, 2010 11:22;04
avatar
thanks god Communist era is going bahut mehanga pada hai inka experiment Bengal ko 200 saal back le gaye , china ne WTO se hath mila liya or ye china k paid worker india me america ka dar dikhate hai ,kerala me professor ka hath kat diya jata hai or ye Modi ko antakwadi batate hai,aaj inki meharbani se bengal bangla desh ban chuka hai jo ek din kasmir bn jayega ,Taslima ko bengal me nahi rkh sakte ,madaani (kerala based terrorist) ka court se bahar red carpet pe welcome karte hai, BJP se smell aati hai par PDP se hath milate hai , Narayan g ye desh k log garib hai par pagal nahi jo inki drawing room politics ko nahi samaj sake 4 saal tk UPA me apne ulte seede kam nikal kar desh ko bewaquf banana chahte h ye log ,desh 4 crore bangla deshi inhi ki to badolat hai jo har sehar me chori dacaity or crime kar rhi hai ye Log BJP ko regressive kehati hai compare the any govt of BJP rule state and communist which one is progressive moreover jis congress ko 50 saal tk oppose karte rahe bengal me khilaf ladte rhe sata k lalach me 2004 me unhi ko support kiya nahi to congress name ki bimari to bajpayi sahab ne khatam hi kar hi kar di thi ye sb ye sb comredo ki meharbani hai jo congress aaj fir itni arrogant hai desh mehangai se mar rha hai or ye commonwealth ko congresswealth banane par tule hai jaihind
Thumbs Up Thumbs Down
0
दीपक डुडेजा on 14 August, 2010 15:27;36
avatar
हमारा इतना बड़ा देश जो की बोधिक रूप से भी सम्पन है - कैसे बहार की विचारधारा को मान ले. कोम्युनिशो की विचारधारा बहार से आयातित है. अत भारत में इतने साल चल गई तो क्या कम है. इनका पतन होना चाहिए था - और होगा.
Thumbs Up Thumbs Down
0
अब्दुल हमीद on 14 August, 2010 16:52;49
avatar
शेष जी आपके मुंह में घी शक्कर :-)
Thumbs Up Thumbs Down
0
वीरेन्द्र जैन on 14 August, 2010 20:55;50
avatar
इस लेख में भी वही भूल की गयी है जो पहले भी कम्युनिस्टों के बारे में दूसरे राजनीतिक दलों की तरह विचार करके की जाती रही है। कम्युनिष्टों के लक्ष्य और उनकी कार्यप्रणाली दूसरे दलों से भिन्न है। यदि उस दृष्टि से देखा जायेगा तो बिल्कुल ही भिन्न निष्कर्ष निकलेंगे। उनकी भिन्नता गिनाने के लिए यह स्थान कम है।
Thumbs Up Thumbs Down
0
total: 4 | displaying: 1 - 4

Post your comment comment

Type in Hindi (हिन्दी में कमेन्ट करने के लिए यहां रोमन में लिखिए यह अपने आप हिन्दी में बदल देगा.)

Title :
Body
Powered by Vivvo CMS v4.1.2
Share |
  • email Email to a friend
  • print Print version

ईमेल से विस्फोटः अपना ईमेल यहां भरें और सब्सक्राइब करें:

Delivered by FeedBurner

Author info
image शेष जी शेष नारायण सिंह मूलतः इतिहास के विद्यार्थी हैं. शुरू में इतिहास के शिक्षक रहे. .बाद में पत्रकारिता की दुनिया में आये...प्रिंट, रेडियो और टेलिविज़न में काम किया. इन्होने १९२० से १९४७ तक की महात्मा गाँधी की जीवनी के उस पहलू पर काम किया है जिसमें वे एक महान कम्युनिकेटर के रूप में देखे जाते हैं..1992 से अब तक तेज़ी से बदल रहे राजनीतिक व्यवहार पर अध्ययन करने के साथ साथ विभिन्न मीडिया संस्थानों में नौकरी की. अब मुख्य रूप से लिखने पढने के काम में लगे हैं. एक अखबार में काम और विस्फोट.कॉम के सम्मानित स्तंभलेखक.
Rate this article
0
More from बात करामात
Previous
image
अजमेर चार्जशीट और संघी उछल-कूद
बढ़ते पैमाने पर इसके साक्ष्य सामने आ रहे हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर एस एस) से जुड़े लोगों का आतंकवादी हमलों में हाथ रहा है। इन हालात में आर एस एस इस पुराने सूत्र पर चल रहा लगता है कि हमला ही सबसे अच्छा बचाव है। उसने 10 नवंबर को देशव्यापी विरोध कार्रवाइयों का आह्वान किया है। इन कार्रवाइयों में संघ के शीर्ष नेताओं के शामिल होने की बात कही जा रही है। बहरहाल, इसकी चर्चा हम जरा बाद में करेंगे।...
image
खुद ही खुदा बनने चला संघ
आर एस एस ने अब शायद बी जे पी को हाशिये पर लाने का मन बना लिया है .अपनी आबरू बचाने के लिए १० नवम्बर को आरएसएस के नेता खुद सडकों पर उतरेगें और धरना प्रदर्शन करेगें . उनकी शिकायत है कि यूपीए सरकार संघी आतंकवाद के ब्रैंड को प्रचारित करने में लगभग कामयाब हो गयी है और बीजेपी वाले कोई भी राजनीतिक पहल नहीं कर रहे हैं. नाराज़ संघी नेतृत्व अब खुद ही मैदान ले रहा है ....
image
शाबाश ओबामा, पहले दिन ही दस अरब डालर का बिजनेस
अपने भारत दौरे के पहले दिन ही बराक ओबामा दस अऱब डालर का बिजनेस कर गए। बेशक भारत को कुछ न मिले। पर भारत ओबामा को काफी कुछ देगा। भारत अमेरिकी बेरोजगारी को दूर करेगा। बेशक आतंकी हमलों से संबंधित भाषण में ओबामा ने पाकिस्तान का नाम नहीं लिया, पर भारत ने अपनी सेवा में कोई कसर नहीं छोड़ी। भारत सरकार और भारत के प्राइवेट कारपोरेट ने ओबामा को खुश कर दिया है। चीन से परेशान बराक ओबामा को भारत दौरे से राहत मिली है।...
image
भारत के रुख से चीन बेचैन
इस समय चीन बैचेन है। बैचेनी का कारण भारत की विस्तारवादी विदेश नीति है। इस विदेश नीति के तहत भारत ने उन देशों से दोस्ती बढ़ानी शुरू कर दी है, जो देश चीन से किसी न किसी मसले पर भीड़े है। चीन काफी बैचेने से भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की हाल ही में हुई विदेश यात्रा और बराक ओबामा का नवंबर के दूसरे सप्ताह में होने वाली दक्षिण एशिया की यात्रा पर नजर रखे है। भारतीय प्रधानमंत्री की जापान, मलेशिया, दक्षिण कोरिया, वियतनाम यात्रा की आलोचना चीनी अखबार पीपुल्स डेली कर रहा है। जबकि ओबामा की यात्रा को भी चीनी अखबार विस्तारवादी यात्रा बता रहा है।...
image
चड्ढी पहन के फूल खिलाने वाले उपेक्षित
छत्तीसगढ़ के सन्दर्भ में कुछ साल पहले ‘ विकास बनाम संस्कृति ’ पर चर्चा करते हुए डा. रमन सिंह ने एक बड़ी अच्छी बात कही थी. बकौल डा. सिंह ‘आखिर कब तक आप संस्कृति के नाम पर गरीब आदिवासियों के सिर पर सिंह लगा उन्हें नचाते रहेंगे ? उनको भी विकास और समाज की मुख्यधारा में शामिल होने का अवसर दीजिए.’ तो ज़ाहिर सी बात है कि अगर हम प्रदेश को बदलते वैश्विक परिवेश के अनुसार आगे बढते और विकसित प्रदेश के रूप में उसकी पहचान बनाना देखना चाहते हों तो हमें नवाचार को बढ़ावा देना होगा....
image
बस, एक सरदार चाहिए कश्मीर के लिए!
कश्मीर समस्या ने इस मिथक को भी तोड़ दिया की विकास की योजनाओं और बुनियादी अवशक्ताओ की पूर्ति से किसी भी समस्या का हल ढूंढा जा सकता है ,कश्मीर में वो सब प्रयास विफल रहे है। वो हाथ जो डल झील में नाव चलाते थे, अब पत्थर-बाजी में शरीक है। इन स्थितियों में तो ऐसा लगता है काश आज सरदार पटेल के कद और राजनीतिक दृढता वाला कोई नेता देश में होता तो अब तक ये विवाद कब का हल हो गया होता। ...
image
शुक्र मनाओ कि तुम भारत में हो अरुंधती
भारतीय समाज में बुद्धजीवी का दर्जा पा चुकी अरुंधती रॉय ने कहा है कि कश्मीर कभी भी भारत का अभिन्न हिस्सा रहा ही नहीं है. गिलानी दिल्ली में सेमिनार में कह रहें है कि उन्हें आज़ादी से कम कुछ भी नहीं चाहिए. गिलानी अगर ऐसी बात कहें तो कोई हैरानी नहीं होती लेकिन अरुंधती ऐसा कहें तो आश्चर्य होता है. हालांकि इसके पहले भी अरुंधती रॉय एक ऐसा ही बयान दे चुकी हैं. तब उन्होंने मावोवाद का समर्थन किया था. कश्मीर को भारत का अभिन्न हिस्सा ना मानने सम्बन्धी बयान वहां पर अपनी जान कि बाज़ी लगा रहे जवानों के लिए एक तमाचा है. साथ ही शेष देश के लोगों के लिए क्षोभ और शर्मिंदगी की वजह है....
image
आइये अरुंधती को लानत भेंजे
उसका बस चले तो वो हिंदुस्तान के सिर्फ इसलिए टुकड़े टुकड़े कर दे क्यूंकि ऐसा करने से वो भीड़ से अलग नजर आएगी। उसके पास हत्याओं को वाजिब ठहराने के तमाम तर्क हमेशा मौजूद रहते हैं ,क्यूंकि इसे वो खुद को महान साबित करने का औजार समझती है। संभव है इसके बहाने वो नोबेल पुरस्कार पाने की कोशिश कर रही हो। वो वामपंथ का ऐसा क्रूर चेहरा है जिसका इस्तेमाल मीडिया कभी अपनी टीआरपी बढाने में तो कभी व्यवस्था के विरुद्ध अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए करता है। संभव है बहुतों को उससे मोहब्बत हो लेकिन हम अरुंधती को लानत भेजते हैं क्योंकि उसे राष्ट्र के अस्तित्व से नफरत है।...
image
टुम बोले टुम बोले हम टो टुप्पई टाप!
पुरानी कहानी है कि एक परिवार के तीन तोतलों की शादी नहीं हो पा रही थी। पिता ने हिदायत दी कि इस बार जो लडकी वालों के सामने बोलेगा उसको घर से निकाल दिया जाएगा। लकड़ी वाले आए, बडे बोला -‘पितादी ती बात याद है न।‘‘ मंझला बोला -‘‘टुप्प भईया।‘‘ छोटा बोल उठा -‘‘टुम बोले टुम बोले हम टो टुप्पई टाप!‘‘ इस तरह तीनों की पोल खुल गई। कांग्रेसनीत केंद्र सरकार में भी कमोबेश एसा ही कुछ होता दिख रहा है।...
image
संघ को बदनाम करने की कांग्रेसी साजिश
राजस्थान सरकार के आतंकवाद विरोधी दस्ते ने अजमेर दरगाह शरीफ पर कुछ साल पहले हुूए बम धमाके के मामले में कुछ तथाकथित अभियुक्तों के खिलाफ अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया है। इस आरोप पत्र में जिन आरोपियों को नाम हैं उनमें इन्द्रेश कुमार का नाम नहीं है। यहां तक का किस्सा सामान्य जांच प्रक्रिया का अंग है। परंतु उसके बाद की कहानी राजनैतिक कहानी है।...
image
सामी नहीं, कांग्रेस के मुंह पर कालिख
कहने के लिए भले ही छत्तीसगढ़ कांग्रेस में केंद्रीय राज्य मंत्री वी नारायण सामी पर कालिख फेंके जाने का मुद्दा शांत होता दिख रहा हो लेकिन इसकी गूंज अभी लंबे समय तक सुनाई देगी। हकीकत यह है कि यहां कांग्रेस की गुटबाजी को आलाकमान अपना पूरा दम लगाकर भी शांत नहीं कर सकता। प्रभारी के रूप में सामी की यहां यह दूसरी बार फजीहत हुई है। मंगलवार को पीसीसी प्रतिनिधियों की बैठक में जब महज एक लाइन का प्रस्ताव पारित करवाने के लिए सामी यहां पहुंचे थे तो कांग्रेस भवन के बाहर ही उन पर काली स्याही फेंकी गई जो उनके चेहरे और कपड़े पर होते हुए उनके साथ कार से उतरे शहर कांग्रेस अध्यक्ष इंदरचंद धाड़ीवाल पर भी पड़े।...
image
अब देखिए राजनीति का कॉमनवेल्थ
कॉमनवेल्थ घोटाले की कड़ी से कड़ी जुडऩे लगी। पहले दिन बीजेपी नेता सुधांशु मित्तल निशाने पर रहे, तो दूसरे दिन खेल गांव बनाने वाली कंपनी एम्मार-एमजीएफ का खेल बिगड़ गया। डीडीए के पास जमा 183 करोड़ की बैंक गारंटी जब्ती का नोटिस जारी हो गया। पर अभी तो सिर्फ ठेका लेने वाली कंपनियों पर शिकंजा कसा। यक्ष प्रश्न, ठेका देने वाले नौकरशाहों-नेताओं ने कितना खाया, इसकी परतें कब उधड़ेंगी? अब ठेकेदारों पर कार्रवाई में तेजी दिखाने से क्या होगा? ठेकेदार तो अपना टेंडर भरते। यह तो देने वाले पर निर्भर, किस कंपनी को ठेका दे। सो सवाल, ठेका देते वक्त नौकरशाहों-नेताओं ने होश क्यों गंवाया?...
image
अब शुरू हुआ असली खेल
कॉमनवेल्थ खेलों के लिए लगाये गये टेन्ट, तंबू कनात उखड़ गये हैं. लेकिन असली खेल उसके बाद शुरू हुआ है. भारतीय जनता पार्टी बनाम कांग्रेस के इस खेल में राजनीति का स्वर्ण पदक कौन हासिल करेगा यह कहना मुश्किल है लेकिन जो खुलासे होंगे वे यह साबित कर देंगे कि खेल भारतीय राजनीति में पर्दे के पीछे असली समाजवाद कायम है. अगर भाजपा की सरकार में कांग्रेसी सुरेश कलमाड़ी कामनवेल्थ खेलों के लिए अगुआ बने रहते हैं तो कांग्रेस की सरकार में आठ सौ करोड़ का ठेका भाजपा के हितैषी सुधांशु मित्तल को मिल जाता है. ...
image
बताओ भला, सीएजी शीला और कलमाड़ी का क्या बिगाड़ लेगी?
कॉमनवेल्थ के आयोजक सफलता की खुमारी में हैं तो देश की जनता विजयादशमी के जश्न में डूबी है, ऐसे में रामायण के एक प्रसंग का जिक्र लाजिमी होगा। जब भगवान राम लंका पर फतह कर अयोध्या लौटे। राज्याभिषेक हो गया तब सिर्फ एक धोबी की टिप्पणी सुन राम ने अग्नि परीक्षा दे चुकी सीता को तज दिया था। पर कॉमनवेल्थ के आयोजकों पर न जाने कितने आरोप लग चुके, फिर भी किसी ठोस कार्रवाई की उम्मीद बेमानी। पहले भी जांच हुई, रपटे आईं लेकिन उन्हीं शीला दीक्षित ने सीएजी को ठेंगा दिखा दिया जिनके खिलाफ अब कामनवेल्थ खेलों में भ्रष्टाचार के खिलाफ जांच करने की बात कही जा रही है....
image
काश हर मस्जिद की खिडकी मंदिर में खुलती
6 दिसंबर, 1992 को जब विवादित ढांचा ढहाया गया, तब मैं जवान हो रहा था। बारहवीं में था। पिताजी उन दिनों बुलंदशहर में बतौर अध्यापक तैनात थे। हम सब उनके साथ ही रह रहे थे। दंगे भडक चुके थे। हमने छत पर चढकर दूर मकानों से उठती लपटों की आंच महसूस की थी। मौत के खौफ से बिलबिलाते लोगों की चीखें सुनी थीं। हैवानियत का नंगा नाच देखा था। 'जयश्री राम' और 'अल्लाह ओ अकबर' के नारों में भले ही ईश्वर और अल्लाह का नाम हो, लेकिन तब उन्हें सुनकर रीढ़ में बर्फ-सी जम जाती थी।...
image
ऐसे आदमी का सियासत में क्या काम?
कहां इकबाल,गालिब व फैज का शौक और कहां सियासत! जो भी हो पर पंजाब के कमजोर आर्थिक पक्ष व सियासत की गफलत में पंजाब के पूर्व वित्त मंत्री (निलंबन के दूसरे दिन उन्हें पूर्व भी कर दिया गया है) मनप्रीत सिंह बादल पंजाब के उन अहम से मारे सियासतदानों से बिल्कुल अलग है जो सियासतदान गनमैनों के लाव लश्कर के बिना चलना अपनी तौहीन समझते हैं।...
image
आरटीआई का दिल है इंटरनेट
इन्टरनेट आरटीआई का दिल है, यह बात किसी आईटी प्रोफेसनल या इन्टरनेट सर्विस प्रोवाइडर द्वारा अथवा ईमेल सेवा प्रदाता कंपनी ने नहीं कही, बल्कि ऐसे शख्स श्री वजाहत हबीबुल्लाह ने कही, जो केन्द्रीय सूचना आयोग के मुख्य सूचना आयुक्त रहे हैं। जिस कार्यक्रम में मुख्य सूचना आयुक्त ने दिल की बात दिल से जोड़कर कही, उस कार्यक्रम में मैं भी मौजूद था। मैंने कार्यक्रम में आये भारत के विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों व अन्य देशों से आये विषय विशेषज्ञों से आरटीआई को इन्टरनेट के जरिए प्रोत्साहित करने की बात कही।...
Next
Tags
No tags for this article
सर्वाधिकार (अ)सुरक्षित

विस्फोट.कॉम में प्रकाशित सामग्री पर हमारी ओर से कोई कापीराइट नहीं है.

Powered by Vivvo CMS v4.1.2