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अंधेरे में रहने को मजबूर है राजमाता की रियाया

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भारत गणराज्य में छोटे बच्चे से अगर पूछा जाए कि देश पर वास्तव में शासन कौन कर रहा है तो निश्चित तौर पर उसका जवाब होगा ‘सोनिया गांधी‘। नेहरू गांधी परिवार के नाम पर आधी सदी से ज्यादा राज करने वाली कांग्रेस ने अघोषित तौर पर कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी को अपनी राजमाता और कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी को अपना युवराज मान ही लिया है। क्या आप जानते हैं कि राजमाता और युवराज की सल्तनत का आलम क्या है?

जी हां अमेठी और रायबरेली में रियाया को महज दो से तीन घंटे बिजली ही मिल पा रही है। मतलब यहां की जनता 21 से 22 घंटे बिना बिजली के ही गुजर बसर करने पर मजबूर है, वहीं दूसरी ओर इसी जनता के जनादेश के बलबूते देश पर परोक्ष तौर पर हुकूमत करने वाली श्रीमति सोनिया गांधी और उनके पुत्र राहुल गांधी पूरे नवाबी शौक के साथ देश की राजनैतिक राजधानी दिल्ली मंे विलासिता का जीवन जी रहे हैं। यह मामला तब प्रकाश में आया जब उत्तर प्रदेश विधानसभा में इस मामले को उठाया गया। यह है भारत गणराज्य का आजादी के तिरेसठ साल बाद का नजारा। जब देश पर शासन करने वाली कांग्रेसनीत संप्रग सरकार की नैया के खिवैयों का यह हाल है तो बाकी गरीब गुरबों के बारे में अनुमान लगाने से ही रूह सिहर उठती है।

घर फूंक कर तमाशा देख रही है केंद्र सरकार
विश्व भर में भारत के सत्तर फीसदी लोगों की भुखमरी, बेरोजगारी, लाचारी पर आए दिन जगहसाई होती रहती है, इस सब से ‘बाखबर‘ होते हुए भी बेखबर होने का स्वांग रचने वाली केंद्र सरकार की आखों के नीचे कामन वेल्थ गेम्स के नाम पर अरबों रूपयों के वारे न्यारे हो रहे हैं। इसी तारम्य में अब नई बात सामने आई है। कामन वेल्थ गेम्स की ओपनिंग और क्लोजिंग सेरेमनी में दर्शकों के मनोरंजन के लिए 12 मीटर से ज्यादा उचंाई के एक गुब्बारे को स्टेडियम में उड़ाया जाएगा। इस गुब्बारे की कीमत 38 करोड़ रूपए बताई जा रही है। इस गुब्बारे का लाईव प्रदर्शन देखने के लिए देश की जनता के गाढ़े पसीने की कमाई को हवा में उड़ाने के लिए आर्गनाईजिंग कमेटी के स्पेशल डीजी जी.जी.थामस, भर बाला और विराफ सरकारी सहित एक उच्च स्तरीय दल लंदन भी रवाना हो गया है। इस विशेष दल के खर्चे का हिसाब अलग से रखा जाएगा। कुल मिलाकर कामन वेल्थ गेम्स के नाम पर जो कुछ भी हो रहा है, वह किसी भी दृष्टि से उचित कतई नहीं कहा जा सकता है। प्रधानमंत्री ने स्वाधीनता दिवस के उद्बोधन में इसे राष्टŞीय पर्व के तौर पर मनाने की बात कही थी। अगर कोई पर्व हमारी लाचारी, बेचारगी, गरीबी का माखौल उड़ाए तब उसे मनाने का क्या ओचित्य?

महिला विरोधी हैं संसद सदस्य
देश की सबसे बड़ी पंचायत में बैठकर फैसला करने वाले सांसद क्या महिलाओं के घोर विरोधी हैं? हालात देखकर तो यही लगता है कि सांसद नहीं चाहते कि महिलाएं किसी भी कीमत पर चौका चूल्हा छोड़कर बाहर आएं और मर्दों की बराबरी करें। अपने वेतन भत्ते बढ़ाने के मामले में सारे सांसद एकजुट ही नजर आए। मसखरी के सरगना लालू प्रसाद यादव ने साफ कह दिया कि सांसदों का वेतन तो जूनियर क्लर्क से भी कम है। लालू को कौन समझाए कि सांसदों की योग्यताओं का तुलनात्मक अध्ययन किया जाए तो वे जूनियर क्लर्क बनने लायक भी नहीं हैं। सांसदों के दबाव के आगे केंद्र सरकार ने घुटने टेके और केबनेट ने सांसदों की पगर बढ़ाने की बात पर अपनी सहमति दे दी। यक्ष प्रश्न यह है कि सालों से टलते आ रहे महिला आरक्षण बिल के मामले में लालू यादव या अन्य सांसदों ने एसी एकजुटता क्यों नहीं दिखाई। महिला आरक्षण के मामले मंे सांसदों के रवैए को देखकर लगने लगा है कि सांसद महिलाओं के विरोधी हैं।

झाडू लगाती और बर्तन मांझती हैं छात्राएं!
दिल्ली सहित किसी भी भाग में अगर आपका बच्चा सरकारी स्कूल में पढ़ने जा रहा है तो सप्ताह में एक बार जाकर अपने बच्चे के हाल चाल जरूर ले लीजिएगा, जरूरी नहीं कि आपका बच्चा स्कूल में जाकर शिक्षा ग्रहण कर रहा हो। राजधानी दिल्ली के कदीपुर स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक बालिका विद्यालय का नजारा देखकर लगता है कि बालिकाएं यहां झाडू लगाने और बर्तन मांझने ही आती हैं। छात्राओं के अनुसार सुबह आते ही सबसे पहले उन्हें शाला के कक्षों में साफ सफाई करने हेतु झाडू लगाना पड़ता है। इसके बाद मध्यान्न भोजन को तैयार करना और उसे परोसना फिर जूठे बर्तन तक धोना उनकी जिम्मेदारियों मंे शामिल कर दिया गया है। हो सकता है शाला प्रशासन यह सोच रहा हो कि बालिकाओं को कल ब्याह कर दूसरे घर जाना है अतः उन्हें साफ सफाई और बर्तन धुलाई का व्यवहारिक प्रशिक्षण भी लगे हाथ दे ही दिया जाए पर यह मानवाधिकार हनन की श्रेणी में तो आता ही है।limty.jpg

मंदी और मंहगाई की छाया से कोसों दूर हैं सियासी दल
देश की आधी से अधिक आबादी दिन भर में महज बीस रूपए कमा पाए या न कमा पाए पर इसी गरीबी को मुद्दा बनाकर सियासत करने और सत्ता पाने वाले सियासी दलों के खजाने में दिन दूनी रात चौगनी बढ़ोत्तरी हो रही है। राजनैतिक दलों द्वारा जब आयकर विवरणी दाखिल की गई तब देशवासियों की आंखें चकाचौध होना स्वाभाविक ही थीं। कमाई के मामले में सबसे अव्वल कांग्रेस है, जिसे आठ सालां में 1518 करोड़ तो पिछले साल 497 करोड़ की कमाई हुई। दूसरी पायदान पर रहने वाली आदर्शों को अपनने वाली पार्टी भाजपा ने इसी अवधि में 754 करोड़ रूपए अर्जित किए और पिछले साल 220 करोड़ की खालिस कमाई हुई है भाजपा को। बैंक खातों पर अगर नजर दौड़ाई जाए तो कांग्रेस के 549 करोड़, बसपा के 286 करोड़, भाजपा के 245 करोड़, समाजवादी पार्टी के 177 करोड़, माकपा के 135 करोड़, राष्टŞवादी कांग्रेस पार्टी के 32 करोड़, भाकपा के 6 करोड़ रूपए तो लालू यादव की राजद के खाते में महज 58 लाख रूपए ही जमा हैं।

मंत्री जी को मिलता है बढ़िया खाना
सांसदों की शिकायत है कि एयर इंडिया में मिलने वाला भोजन बेस्वाद और घटिया होता है। नागर विमानन मंत्री हैं कि सांसदों की शिकायत को सिरे से खारिज कर रहे हैं। विमान में मिलने वाले घटिया क्वालिटी के खाने को लेकर लगभग सभी पार्टी के सांसदों ने नागरिक उड्डयन मंत्री प्रफुल्ल पटेल को जमकर घेरा। संसद में नोक झोंक के दौरान जब एक सांसद ने कहा कि मंत्री ने अपने जवाब में स्वयं ही लिखा है कि घरेलू उड़ाने में उन्हें 22 तो समुद्रपारीय उड़ानों में इस तरह की 19 शिकायतें मिली हैं। इस पर पटेल का जवाब था कि हजारों उड़ानों में अगर दस बीस शिकायतें मिली भी हैं तो यह औसत काफी कम है। मंत्री जी के जवाब को सुनकर बसपा सांसद गंगा चरण राजपूत उखड़ गए और बोले उन्होंने खुद ही दस शिकायतें की हैं, पर एक पर भी कार्यवाही नहीं हुई है। बाद में राजपूत ने चुटकी लेते हुए कहा कि लगता है मंत्री जी जब भी विमान में जाते हैं उन्हें बेहतरीन और लजीज भोजन मिलता है तभी तो वे शिकायतें सुनना नहीं चाह रहे हैं।

मुकदमों को लटकाने की प्रवृति से सुप्रीम कोर्ट खफा
मुकदमों में अनावश्यक होने वाली देरी पर देश की सबसे बड़ी पंचायत ने अपनी नाराजगी जताई है। सर्वोच्च न्यायायल की एक खण्डपीठ ने इलाहबाद उच्च न्यायायल द्वारा हतया के एक मामले में 36 साल पहले लगाई गई एक रोक पर यह नाराजगी जताई है। इस मामले में 36 सालों में सुनवाई ही नहीं हो पाई है। सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि न्याय मिलने में देरी और न्याय न मिलने की दशा में लोग कानून को अपने हाथों में लेने लगेंगे, जिससे समाज में अव्यवस्थ बढ़ेगी और न्याय पालिका पर से लोगों का विश्वास घटने लगेगा। आज न्यायालयों में 01 से 09 वर्ष वाले लंबित प्रकरणों की संख्या 8129, 10 से 20 साल की अवधि वाले 1453, 20 से 30 साल की अवधि वाले 902 और 30 से 36 साल पूर्व वाले उन प्रकरणों की संख्या जिसमें स्थगन लिया हुआ है 43 है। एमाईकस क्यूरी ने सुझाव दिया कि उच्च न्यायलयों को यह निर्देश दिए जाएं कि 10 साल या उससे अधिक पुराने मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निष्पादित किया जाए। इसके लिए हाईकोर्ट को अधिकतम छः माह का समय दिया जाना चाहिए।

रेलगाड़ियों में खाना परोसती नजर आएंगी परिचारिकाएं
भारतीय रेल के खानपान एवं पर्यटन निगम 'आईआरसीटीसी˝ से रेलों में खान पान का अधिकार अपने पास वापस लेने के बाद अब भारतीय रेल इसमें अमूल चूल बदलावा की तैयारी में दिख रहा है। खबर है कि आने वाले समय में भारतीय रेल की सभी गाडियों में परिचारिकाएं खाना परोसती नजर आएंगी। वर्तमान में शताब्दी में ट्रॉली के माध्यम से पुरूष परिचारक खाना परोसते हैं। कुछ समय पूर्व स्वर्ण शताब्दी में परिचारिका रखने का प्रयोग किया जा चुका है। कहा जा रहा है कि शताब्दी के साथ ही साथ राजधानी और दुरंतो एक्सप्रेस में महिला परिचारिकाओं के जरिए खाना परोसा जाएगा। यह प्रयोग अगर सफल रहा तो आने वाले दिनों में लंबी दूरी की मेल एक्सप्रेस गाड़ियों में भी इसे लागू किया जा सकता है। मंत्रालय के सूत्र कहते हैं कि यह योजना तभी परवान चढ़ पाएगी जब ममता दीदी पश्चिम बंगाल से निकलकर भारतीय रेल की ओर नजरें इनायत करना आरंभ करेंगी।

पतंग के मामले में हार गया चीन
भारत के बाजार में चीनी सामान का जादू सर चढ़कर बोल रहा है। सस्ते और आकर्षक होने के कारण लोगों का मोह चीनी ड्रेगन की ओर होना स्वाभाविक ही है, किन्तु पतंगों के मामले में चीन पिछड़ गया है। पन्नी की बनी चीनी पतंगों के बजाए अब देशी कमची यानी बांस की खपच्ची की पतंगों की मांग जबर्दस्त तरीके से बढ़ी है। लोगों का मानना है कि पन्नी की चीनी पतंगे उड़ाने में उन्हें बहुत ही मुश्किलों का सामना करना पड़ता है, पर खपच्ची की बनी देशी पतंग को आसमान मंे जैसा चाहे वैसे ठुमके लगवा लो। पंद्रह अगस्त पर दिल्ली वासियों के दिलो दिमाग पर पतंग का जुनून देखते ही बनता है। दिल्ली में पतंग का कारोबार सौ करोड़ रूपए से अधिक का है। दिल्ली में बरेली, रामपुर, अमरोहा, जयपुर, अहमदाबाद, लखनऊ आदि से आती हैं। इसके अलावा रील और मन्झा बरेली, अहमदाबाद, आगरा, जयपुर, बरेली आदि से बुलाया जाता है। पतंग बाजों के लिए धागा रखने का चरखा सौ से दो सौ रूपए तक की कीमत का होता है, जिसमें तीन हजार मीटर तक मन्झा भरा जा सकता है।

विवादित होना आमिर खान की फितरत!
मशहूर अभिनेता आमिर खान की किस्मत में विवादित होना बदा ही है। चाहे उनकी फिल्म थ्री ईडियट हो या पीपली लाईव, हर बार वे किसी ने किसी विवाद से अपना नाता जोड़ ही लेते हैं। मामला चाहे जो भी हो पर लगता है आमिर और विवाद का चोली दामन का साथ है। पहले थ्री ईडियट्स में उनका विवाद लेखक चेतन भगत के साथ हुआ, अब पीपली लाईव में विवादों के साए में आ गए हैं आमिर। देश के हृदय प्रदेश के बैतूल जिले के ग्राम सेहरा निवासी कुंजी लाल ने आमिर खान को एक नोटिस भेजकर पीपली लाईव से होने वाली आय का आधा हिस्सा मांगा है। कुंजी लाल का कहना है कि पीपली लाईव की कहानी उनकी आपबीती को व्यक्त कर रही है। उन्होंने अपने वकील के माध्यम से भेजे नोटिस में कहा है कि इसका आधार 20 अक्टूबर 2005 को बैतूल से दस किलो मीटर दूर ग्राम सेहरा के निवासी कुंजी लाल का कथन है, जिसमें वह खुद के मरने की घोषणा करता है। यद्यपि कुंजी लाल जिंदा है पर उस समय देश भर के मीडिया ने उसे सर पर उठा रखा था।

दस नंबरी होगी लेण्ड लाईन
दूरसंचार नियामक आयोग 'ट्राई' चाहता है कि मोबाईल के नंबरों की तरह ही लेण्ड लाईन के नंबर भी दस अंकों के हों। इस आशय का परिचर्चापत्र ट्राई ने लैण्डलाईन सेवा प्रदाता कंपनियों को जारी किया है। अब तक मोबाईल पर तो दस अंको के नंबर होते हैं किन्तु लेण्ड लाईन के नंबरों में पर्याप्त मात्रा में असमानता ही दिखाई देती है। ट्राई का कहना है कि फिक्सड और मोबाईल सेवाआं के लिए एकीकृत नंबर योजना को 31 दिसंबर 2011 तक लगू किया जाना सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उसके अनुसार आने वाले तीस चालीस सालों के लिए देश में मौजूदा सेवाओं और प्रस्तावित या भविष्य की योजनाओं के लिए पर्याप्त संख्या में नंबर उपलब्ध हो सकेंगे। ट्राई शायद यह भूल गया कि वर्तमान की योजना एनएनपी 2003 को 75 करोड़ कनेक्शन के मद्देनजर रखकर 2030 तक के लिए बनाया गया था, किन्तु पिछले साल ही मोबाईल के लिए तय कनेक्शन की संख्या पार की जा चुकी है।

क्रिकेट की पिच पर उखड़ने लगे हैं महाराज के पांव
कांग्रेस के सांसद और केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया तथा मध्य प्रदेश के भाजपा के विधायक और वाणिज्य और उद्योग मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बीच राजनैतिक जंग जिस भी स्तर पर हो किन्तु अब दोनों ही के बीच मध्य प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन को लेकर जबर्दस्त जंग मची हुई है। 22 अगस्त को संपन्न होने वाले चुनावों में संभवतः पहली बार ही एसा होगा कि चुनाव मतदान से होगा, वरना तो आम राय से ही अध्यक्ष बना दिया जाता था। विजयवर्गीय इंदौर जिला क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष चुने जाने के बाद एमपीसीए का अघ्यक्ष बनने की जुगत में हैं। सिंधिया ने संसद के सत्र को तजकर इंदौर में डेरा डाल दिया है। उनकी ओर से कमान भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के संयुक्त सचिव संजय जगदाले ने संभाल रखी है। अब सभी की निगाहें इस पर जाकर टिक गईं हैं कि इस रण में विजय किसकी होती है।

हमसे नहीं अलगाववादियों से करो चर्चा
काश्मीर की स्थिति सुधारने की गरज से वजीरे आजम डॉ.मन मोहन सिंह द्वारा पीडीपी से चर्चा की पेशकश को पीडिपी नेता मुफ्ती मोहम्मद सईद ने ठुकरा दी है। पीडीपी का कहना है कि काश्मीर में अमन अगर लाना है तो वजीरे आजम को चाहिए कि पीडीपी से चर्चा करने के बजाए यह चर्चा घाटी के अलगाववादियों से की जाए। पीडीपी का दो टूक कहना है कि वे तो भारत के साथ हैं, और पीडीपी के नेताओं से चर्चा करने भर से कोई हल निकलने वाला नहीं है। गौरतलब होगा कि पूर्व में कांग्रेस के एक महासचिव और केंद्रीय मंत्री के हवाले से यह खबर आई थी कि पीडीपी नेता सईद घाटी के हालातों को लेकर जल्द ही प्रधानमंत्री से मिलने वाले हैं, किन्तु सईद वर्तमान में चेन्नई में अपने परिवार के साथ हैं और उनकी जल्द वापसी की कोई उम्मीद भी नहीं दिख रही है। पार्टी का कहना है कि केंद्र सरकार अगर घाटी में अमन कायम करना चाह रही है तो अलगाववादियों से चर्चा कर इसका हल निकाला जाना चाहिए।

वाका वाका पर हक्का बक्का (पुच्छल तारा)
देश भर में इन दिनों दो ही चर्चे ज्यादा हो रहे हैं अव्वल तो यह कि कामन वेल्थ गेम्स में खेल खेल में अरबों का खेल हो गया है और दूसरा इस गेम का थीम सांग जिसे बक्का बक्का से हर मायने में बेहतर बनाना है और जो ए.आर.रहमान द्वारा गढ़ा जा रहा है। इसी बातों को जोड़ते हुए शाहजहांनाबाद से मणिका सोनल एक ईमेल भेजती हैं। मणिका लिखती हैं कि रहमान के मन में चाहे जो घुमड़ रहा हो, पर वे यह बात जरूर सोच रहे होंगे कि देश की जनता भले ही कॉमन वेल्थ गेम्स की तैयारियों पर ‘‘हक्का बक्का‘‘ हो रही हो, पर इसका थीम सांग ‘‘वाक्का वाक्का‘‘ से बेहतर ही होगा।

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सुरेंद्र जायस्‍वाल on 22 August, 2010 12:14;33
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सच कहा खरे जी देश वाकई आज के हलातों पर हक्‍का बक्‍का है, पर सरकार है कि वक्‍का वक्‍का से ज्‍यादा बेहतरीन गाना लोरी के तौर पर सुनाकर आम जनता को गहरी नींद सुलाने की चेष्‍टा कर रही है, सारे देश को खडे होकर सालामी देते हुए कांग्रेस को कहना ही होगा, ''जय हो, जय हो'' इसमें रहमान को भी आकर गाना ही होगा जय हो जय हो, अरे कांग्रेस के महानुभावों कब तक हमारा खून पियोगे, क्‍या तुम्‍हारी प्‍यास नहीं बुझती आम आदमी भूखा है पर गेम्‍स के नाम पर अरबों उडा रहे हो, कुछ तो शर्म करो मेरे भाई
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preeti sharma. raipur cg on 22 August, 2010 12:41;19
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soniya je sharm karo desh par aap raj kar rahe hain, aapne bate ko aage bada rahe hain, shayad kal vo pm ban jaye par aapko apne sansadeya chatra ka bhi dhyan rakhna jaroori hai madam. agar logon ne aapko nakar diya tab kya hoga!
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rajesh kapoor on 22 August, 2010 16:14;12
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मंदी और मंहगाई की छाया से कोसों दूर हैं सियासी दल में खरे जी आपने बहुत ही करीने से आपने से देश के नेताओं के मुह पर तमाचा मारा है, पर मोटी खाल वाले इन नेताओं पर इसका असर होने वाला नहीं
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brij on 22 August, 2010 23:28;15
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अजब सरकार है एक तरफ अरबों रुपया खेल के नाम पर हड़प किया जारहा है ,दूसरी तरफ सांसद अपना वेतन बढ़वाने पर जोर दल रहे हैं .लेकिन सरकार जनता समस्याओं से आँख मूदे बैठी है .लगता है सरकार घर फूंक कर लोगों को तमाशा दिखा रही है .इतना खर्च करने पर भी खेलों में भारत को अगर चार गोल्ड मेडल मिल जाएँ तो बड़ी बात होगी .हर बार की तरह भारत की नाक कट जायेगी .
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सोनाली बर्मन, मुंबई on 25 August, 2010 11:01;56
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आज देश में राजनेताओं की प्राथमिकताएं और नेतिकताएं पूरी तरह बदल गईं हैं, बदलें भी क्‍यों न जब सवा सौ साल पुरानी कांग्रेस के पास एक भी स्‍वदेशी नेता नहीं बचा है नेतरत्‍व करने के लिए। तभी तो इटली से आयतित एक महिला जो भारतीय बहू बनी उसके हाथों सौंप दी कांग्रेस की कमान। क्‍या सोनिया गांधी को हमारे देश के तीज त्‍योहार, परंपराओं की जानकारी है। जिसकी हिंदी ही आज भी अस्‍पष्‍ट हो उससे देश में सुराज या राम राज लाने की उम्‍मीद करना बेमानी है। कांग्रेस का सोचना है कि नेहरू गांधी परिवार के नाम पर सत्‍ता की मलाई खाओ बस, जनता भूखी मरती है मरती रहे, जय हो जय हो धन्‍यवाद जननेताओं बहुत शुक्रिया
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शक्ति शुक्ला on 25 August, 2010 19:16;38
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ऐसा क्यू होता है? खरे जी। हमेशा से होता आया..आप अब देख रहे है....शाहजहॉ ने मुल्क बरबाद कर दिया था ताजमहल के नाम पर..अशोक ने पहली जिद्द के कारण उडिसा तबह किया, दूसरी सनक से सारे देश में अहिंसा परमो धर्म की जो नींव रखी वो अनवरत रुप से चली आ रही है। हर शासक यही करता आया है अपनी मैज .... देश कि जनता जानते हुये भी क्या करे? क्रुपया रास्ता बताये मुहिम शुरु करुगा मै। यदि नही तो अभियान चलाते है औरों कि राय जानकर.और वो भी नही तो बंद करे समस्या परक पत्रकारिता....समाधान मूलक पत्रकारिता शुरु करे। इंतेजार रहेगा

तब तक के लिये नमस्कार
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image लिमटी खरे लिमटी खरे की खबरें देश के कई अखबारों में छपती हैं. दिल्ली में रहकर स्वतंत्र पत्रकारिता लेखन और विभिन्न मीडिया स्कूलों में पढ़ाते भी हैं. लिमटी की लालटेन नाम से विस्फोट.कॉम में नियमित लिमटी की लालटेन नामक स्तंभ लेखन. limtykhare@gmail.com
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सामी नहीं, कांग्रेस के मुंह पर कालिख
कहने के लिए भले ही छत्तीसगढ़ कांग्रेस में केंद्रीय राज्य मंत्री वी नारायण सामी पर कालिख फेंके जाने का मुद्दा शांत होता दिख रहा हो लेकिन इसकी गूंज अभी लंबे समय तक सुनाई देगी। हकीकत यह है कि यहां कांग्रेस की गुटबाजी को आलाकमान अपना पूरा दम लगाकर भी शांत नहीं कर सकता। प्रभारी के रूप में सामी की यहां यह दूसरी बार फजीहत हुई है। मंगलवार को पीसीसी प्रतिनिधियों की बैठक में जब महज एक लाइन का प्रस्ताव पारित करवाने के लिए सामी यहां पहुंचे थे तो कांग्रेस भवन के बाहर ही उन पर काली स्याही फेंकी गई जो उनके चेहरे और कपड़े पर होते हुए उनके साथ कार से उतरे शहर कांग्रेस अध्यक्ष इंदरचंद धाड़ीवाल पर भी पड़े।...
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अब देखिए राजनीति का कॉमनवेल्थ
कॉमनवेल्थ घोटाले की कड़ी से कड़ी जुडऩे लगी। पहले दिन बीजेपी नेता सुधांशु मित्तल निशाने पर रहे, तो दूसरे दिन खेल गांव बनाने वाली कंपनी एम्मार-एमजीएफ का खेल बिगड़ गया। डीडीए के पास जमा 183 करोड़ की बैंक गारंटी जब्ती का नोटिस जारी हो गया। पर अभी तो सिर्फ ठेका लेने वाली कंपनियों पर शिकंजा कसा। यक्ष प्रश्न, ठेका देने वाले नौकरशाहों-नेताओं ने कितना खाया, इसकी परतें कब उधड़ेंगी? अब ठेकेदारों पर कार्रवाई में तेजी दिखाने से क्या होगा? ठेकेदार तो अपना टेंडर भरते। यह तो देने वाले पर निर्भर, किस कंपनी को ठेका दे। सो सवाल, ठेका देते वक्त नौकरशाहों-नेताओं ने होश क्यों गंवाया?...
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अब शुरू हुआ असली खेल
कॉमनवेल्थ खेलों के लिए लगाये गये टेन्ट, तंबू कनात उखड़ गये हैं. लेकिन असली खेल उसके बाद शुरू हुआ है. भारतीय जनता पार्टी बनाम कांग्रेस के इस खेल में राजनीति का स्वर्ण पदक कौन हासिल करेगा यह कहना मुश्किल है लेकिन जो खुलासे होंगे वे यह साबित कर देंगे कि खेल भारतीय राजनीति में पर्दे के पीछे असली समाजवाद कायम है. अगर भाजपा की सरकार में कांग्रेसी सुरेश कलमाड़ी कामनवेल्थ खेलों के लिए अगुआ बने रहते हैं तो कांग्रेस की सरकार में आठ सौ करोड़ का ठेका भाजपा के हितैषी सुधांशु मित्तल को मिल जाता है. ...
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बताओ भला, सीएजी शीला और कलमाड़ी का क्या बिगाड़ लेगी?
कॉमनवेल्थ के आयोजक सफलता की खुमारी में हैं तो देश की जनता विजयादशमी के जश्न में डूबी है, ऐसे में रामायण के एक प्रसंग का जिक्र लाजिमी होगा। जब भगवान राम लंका पर फतह कर अयोध्या लौटे। राज्याभिषेक हो गया तब सिर्फ एक धोबी की टिप्पणी सुन राम ने अग्नि परीक्षा दे चुकी सीता को तज दिया था। पर कॉमनवेल्थ के आयोजकों पर न जाने कितने आरोप लग चुके, फिर भी किसी ठोस कार्रवाई की उम्मीद बेमानी। पहले भी जांच हुई, रपटे आईं लेकिन उन्हीं शीला दीक्षित ने सीएजी को ठेंगा दिखा दिया जिनके खिलाफ अब कामनवेल्थ खेलों में भ्रष्टाचार के खिलाफ जांच करने की बात कही जा रही है....
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काश हर मस्जिद की खिडकी मंदिर में खुलती
6 दिसंबर, 1992 को जब विवादित ढांचा ढहाया गया, तब मैं जवान हो रहा था। बारहवीं में था। पिताजी उन दिनों बुलंदशहर में बतौर अध्यापक तैनात थे। हम सब उनके साथ ही रह रहे थे। दंगे भडक चुके थे। हमने छत पर चढकर दूर मकानों से उठती लपटों की आंच महसूस की थी। मौत के खौफ से बिलबिलाते लोगों की चीखें सुनी थीं। हैवानियत का नंगा नाच देखा था। 'जयश्री राम' और 'अल्लाह ओ अकबर' के नारों में भले ही ईश्वर और अल्लाह का नाम हो, लेकिन तब उन्हें सुनकर रीढ़ में बर्फ-सी जम जाती थी।...
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ऐसे आदमी का सियासत में क्या काम?
कहां इकबाल,गालिब व फैज का शौक और कहां सियासत! जो भी हो पर पंजाब के कमजोर आर्थिक पक्ष व सियासत की गफलत में पंजाब के पूर्व वित्त मंत्री (निलंबन के दूसरे दिन उन्हें पूर्व भी कर दिया गया है) मनप्रीत सिंह बादल पंजाब के उन अहम से मारे सियासतदानों से बिल्कुल अलग है जो सियासतदान गनमैनों के लाव लश्कर के बिना चलना अपनी तौहीन समझते हैं।...
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आरटीआई का दिल है इंटरनेट
इन्टरनेट आरटीआई का दिल है, यह बात किसी आईटी प्रोफेसनल या इन्टरनेट सर्विस प्रोवाइडर द्वारा अथवा ईमेल सेवा प्रदाता कंपनी ने नहीं कही, बल्कि ऐसे शख्स श्री वजाहत हबीबुल्लाह ने कही, जो केन्द्रीय सूचना आयोग के मुख्य सूचना आयुक्त रहे हैं। जिस कार्यक्रम में मुख्य सूचना आयुक्त ने दिल की बात दिल से जोड़कर कही, उस कार्यक्रम में मैं भी मौजूद था। मैंने कार्यक्रम में आये भारत के विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों व अन्य देशों से आये विषय विशेषज्ञों से आरटीआई को इन्टरनेट के जरिए प्रोत्साहित करने की बात कही।...
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