Home | बात करामात | हिन्दुस्तानी होने की आम बीमारी

हिन्दुस्तानी होने की आम बीमारी

image

हिंदुस्तानी आदमी की सबसे बड़ी कमजोरी है कि उसमें किलर इंस्टिंक्ट का सर्वथा अभाव होता है. दैनंदिन राजनय से लेकर खेल के मैदान तक उसकी यह कमी देखी जा सकती है. हमेशा हिन्दवी समुदाय इस तथ्य को बिसार देता है कि 'क्षमा शोभती उस भुजंग को जिसके पास गरल हो. ' अर्थात क्षमा उस सर्प का आभूषण है जिसके पास गरल यानी जहर हो. जिसके पास जहर ही नहीं होगा उस सांप को कोई केचुए से ज्यादा महत्त्व क्यों देगा? हिंदुस्तानी हमेशा बिना जहर दिखाए क्षमा करने निकल पड़ते हैं इसलिए जीवन के हर क्षेत्र में उन्हें अपमान का घूँट पीना पड़ता है.

ऑस्ट्रेलिया में उन पर नस्लवादी हमले होते हैं, हम कंगारुओं से क्रिकेट खेलने के लिए मरे जाते हैं. आईपीएल में कंगारू नहीं खेलेंगे तो जैसे आसमान टूट जाएगा. हमारे शरद बाबू को जितना सड़े हुए गेंहू का ख़याल नहीं उससे कई गुना ख्याल वे सदी हुयी मानसिकता वाले कंगारू खिलाड़ियों का करते हैं. शरद बाबू ने काश इतना ख़याल गरीब किसानों का किया होता तो सैकड़ों  किसानों की जान बच गयी होती.खैर इस तरह की भ्रांत खेल भावना में जीने वाले इस देश में कोई अकेले शरद बाबू नहीं हैं. यह तो हिन्दुस्तानियों की आम बीमारी है. पाकिस्तान रोज हमारे खिलाफ आतंकी भेजता है,वैश्विक स्तर पर हर कदम पर हमारे देश का विरोध करता है लेकिन एक हमारे देशवासी हैं वे अमन की आशा में दुबले हुए जा रहे हैं. सानिया मिर्जा का डोला इस्लामाबाद चला गया फिर भी हमारे देशवासी परेशान हैं कि वह राष्ट्रमंडल खेलों में हमारे देश की कप्तानी कर ले. करने दो न उसे पाकिस्तान की कप्तानी.जरा बुर्का चढ़ा कर उतरने दो न उसे खेल के मैदान में. एकाध पदक वह ले जायेगी पाकिस्तान तो संभव है कि पाकिस्तान के किसी हाफ़िज़ सईद का दिल पसीजे हिन्दुस्तान के प्रति. लेकिन नहीं .इस देश की रीति-नीति बन गयी है कि खाओ हिन्दुस्तान का और बजाओ पाकिस्तान का, जो करे उसे सेकुलर मान लिया जाए. सौ चूहे खाकर सारी बिल्लियाँ हज कर आयें. हम हैं उनकी शान में खजूर और आबे  जम-जम पेश करने के लिए. हाजी साहब और हज्जन कह कर हाथ चूमने के लिए.गुलाम अली यहाँ आएंगे पाकिस्तानी शायरों के कलाम गायेंगे हम तालियाँ बजायेंगे ,उन पर अपनी दौलत लुटाएँगे. अदनान सामी ने तो सारे नियम कानून तोड़ कर यहाँ अपनी दुनिया बसा ली है. हर साल बड़े शान से नयी-नयी खातूनों से निकाह पढ़ रहा है. उस पर न कोई नियम लागू न कोई कानून. जब मन करे हमारे देश से उड़ कर जाए और पाकिस्तानी प्रधान मंत्री की दावत उड़ाकर वापस आ जाए.फिर सुर्ख़ियों में बने रहने के लिए एक ब्यान भी ठोंक दे कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री स्वरकोकिला लता मंगेशकर को पाकिस्तान में निमंत्रित करना चाहते हैं. क्यों नहीं करते ?

यह बयान देने के लिए क्या गिलानी को अदनान सामी का सहारा चाहिए. जैसे अदनान समी, गुलाम अली हिन्दुस्तान में माल कमा रहे हैं वैसा सौजन्य लता दीदी,आशा भोसले समेत हिंदुस्तानी कला जमात के किसी हस्ती को पाकिस्तानी क्यों नहीं प्रदान करते? कभी नहीं करेंगे. तब उनका इस्लाम आड़े खडा हो जाएगा. दशकों से उनका इस्लाम आड़े खडा है. उनके सुर में सुर यहाँ के इस्लाम से मिल रहा है. हम इस जुगलबंदी के खिलाफ खुला कर बोल रहे हैं तो हम साम्प्रदायिक हो गए. वे हर घड़ी धार्मिक उन्माद फैला रहे हैं वे सेकुलर हैं. मोहम्मद अली जिन्ना को भी इसी अंदाज में दशकों तक सेकुलर समझा जाता रहा. सरोजिनी नायडू तो कहा करती थीं कि जिन्ना हिन्दू-मुस्लिम एकता के राजदूत हैं.मौक़ा मिलते ही यही राजदूत यमदूत बन गए.लाखों हिदुओं का कत्ले आम कर पाकिस्तान खडा कर दिया.आज भी जब मौक़ा मिलता है पाकिस्तान  हिन्दुस्तान के खिलाफ कुचक्र रचता है. हिन्दुस्तानियों को नीचा दिखाने का हरसंभव प्रयास होता है. संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद से लेकर क्रोकेट के मैदान तक यह सिलसिला जरी रहता है.

इन दिनों हिन्दुस्तान की क्रिकेट टीम श्रीलंका के दौरे पर है. सनद रहे कि पिछले एक अरसे से श्रीलंका में चीनी सहयोग से पाकिस्तानी प्रभाव का विस्तार हुआ है. लिबरेशन ऑफ़ तमिल टाइगर्स ईलम के खिलाफ श्रीलंका की सेना को पाकिस्तानी मदद मिली. बदले में दोनों देशों के बीच क्रिकेट की डिप्लोमेसी चली. आतंकवाद के बेलगाम होने के चलते जब दुनिया की कोई टीम पाकिस्तान में क्रिकेट में खेलने से दर रही थी तब श्रीलंका के बोर्ड ने अपनी टीम वहाँ भेजी थी. उस समय आतंकवादियों ने श्रीलंकाई टीम पर हमला भी किया था. तब आई एस आई ने हिंदुस्तानी खुफिया एजेंसियों पर इस हमले का आरोप मढ़ने का प्रयास भी किया था. खैर,पाकिस्तान के प्रयास से श्रीलंका ने भी हिन्दुस्तान को अपना दुश्मन मान लिया है. यह श्रीलंकाई खिलाड़ियों के व्यवहार से स्पष्ट दिखाई दे रहा है. बीते दिनों हिंदुस्तानी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग का शतक रोकने के लिए जिस तरह से श्रीलंकाई टीम ने षड्यंत्र रचा,प्रैक्टिस के लिए जिस अंदाज में ज्यादा उछाल वाली पिच उपलब्ध कराई गयी ताकि हिंदुस्तानी खिलाड़ी घायल हो जाएँ वह हिन्दुस्तान के प्रति श्रीलंका के भाव को स्पष्ट करता है. दूसरी ओर हिन्दुस्तान की खेल भावना है कि हमारे खिलाड़ी मुरलीधरन के ८०० विकेट का रिकार्ड पूरा करने के लिए अपना विकेट फेंकते नजर आते हैं. सहवाग के प्रकरण पर हमारे देश के क्रिकेट नियंता मौन साधे रहे .

परिणाम सामने है कि अगले मैच में हिन्दुस्तानी खिलाड़ियों के मनोबल के साथ बलात्कार ही कर दिया गया. सहवाग को पिछले मैच में नो बाल डाल कर शतक नहीं पूरा करने दिया गया था,इस बार श्रीलंकाई अम्पायर ने सहवाग पिच पर टिकते उसके पहले ही विकेट से साफ़-साफ़ बाहर जाती गेंद पर पगबाधा आउट करार दे दिया. दाम्बुला के मैदान पर श्रीलंका के अम्पायर कुमार धर्मसेना और पाकिस्तानी अम्पायर असद रौफ ने जैसे पहले से ही तय कर रखा था कि टीम इंडिया को बेइज्जत करना है. उनकी मेहरबानी से टीम के ४ महत्वपूर्ण खिलाड़ियों को गलत ढंग से आउट करार दे दिया गया.परिणाम स्वरुप टीम १९८१ के बाद सबसे सोचनीय पराजय का शिकार हुयी. दिनेश कार्तिक और सुरेश रैना को जिन गेदों पर आउट करार दिया गया उसे हर कोई जानता था कि अम्पायर पूरी तरह से बल्लेबाजों की बंद बजाने पर आमादा हैं. युवराज सिंह लम्बी बीमारी से उठ कर मैदान पर डटने के प्रयास में थे उन्हें जबरन पवेलियन भेज दिया गया. यदि यह हरकत पाकिस्तान या श्रीलंका की टीम के साथ किसी हिन्दुस्तानी अम्पायर ने की होती तो अब तक उनके बोर्ड आसमान सिर पर उठा कर खड़े हो गए होते. लेकिन यह तो हिन्दुस्तानी केंचुआ वृत्ति का कमाल है कि हमारे कृषि मंत्री और अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के अध्यक्ष शरद पवार मौन साधे पड़े हैं. हमारी इसी केंचुआ वृत्ति का लाभ हर कोई ले रहा है. काश किसी मैदान में हमारे लोग ईंट का जवाब पत्थर से देना सीख लेते.

Subscribe to comments feed Comments (8 posted):

Krishna on 25 August, 2010 14:09;32
avatar
वाह शुक्ल साहब आपने तो सुच में कमल कर दिया एक लेख में कितनी साडी स्टोरी एक दम सटीकता से कवर कर ली .. मुझे हमेशा ही आपके लेख पढने में बहुत दिलचस्पी रही है..
साधुवाद..

****तब उनका इस्लाम आड़े खडा हो जाएगा. दशकों से उनका इस्लाम आड़े खडा है. उनके सुर में सुर यहाँ के इस्लाम से मिल रहा है. हम इस जुगलबंदी के खिलाफ खुला कर बोल रहे हैं तो हम साम्प्रदायिक हो गए. वे हर घड़ी धार्मिक उन्माद फैला रहे हैं वे सेकुलर हैं.***


एक दम सही कहा आपने
Thumbs Up Thumbs Down
4
RAJ SINH on 25 August, 2010 15:37;55
avatar
प्रेम जी ने वर्तमान का सच कह दिया है और सच कड़वा है .लेकिन जब देशद्रोहियों को चुनाव में जनसमर्थन दे हमारी जनता ही चुनती है और बाकी की कसर वोटिंग मशीन से चोरी कर लेती है तो गद्दारों की ही सरकार ही आयेगी और उसके सरदार भी गद्दार ही होंगे .
क्षमा शोभती उस भुजंग को .......ठीक लिखा पर देश शस्त्रों से निर्वीर्य नहीं है ,सरकार निर्वीर्य है .
Thumbs Up Thumbs Down
3
shakti shukla on 25 August, 2010 18:58;49
avatar
वाह पंडित जी गजब आग उगलते है....उम्दा है अंदाजे बयॉ आपका...इतनी आग कि तपश कैसे बरदाश्त करते है आप....लड लड के पाकिस्तान खुद को तबाह कर ले रहा है। विश्व डॉन अमेरिका खुद को नही बचा पाया....अब मुल्क का सारा मैन फोर्स तो इस कार्य में झोका नही जा सकता..अब मिल गये है तो शुरुआत कर भारत जागरण की
Thumbs Up Thumbs Down
0
मुकुल शुक्ल on 25 August, 2010 19:59;27
avatar
कुछ गलत नहीं कहा पंडित जी ने और कोई आग भी नहीं उगली | हम डरपोक लोग जब भी आईने के सामने खड़े किये जाते है तो ऐसा ही शुतुरमुर्गी रवैया दिखा कर अपना मुंह छुपाने की कोशिश करते है | एक वोट बैंक के नाम पर पूरे देश में तुष्टिकरण का जो खले खेला जा रहा है उसका खामियाजा पूरे देश को अपने स्वाभिमान की कीमत पर चुकाना पड़ रहा है | भाईचारे की बात करना गलत नहीं है पर उसका वैसा ही जवाब जब दूसरी और से ना आये और लगातार सिर्फ एक तरफ से ही भाईचारे की बात हो तो इसका मतलब हमारा स्वाभिमान पूरी तरह से मर चूका है जो गोली और गाली खा कर भी हम दुश्मन को अपनी पीठ मे लगातार चुरा भोंकने के न्योता दे रहे है | अब बहुत हो चुकी नपुंसकता की बाते | जब तक हम अपने स्वाभिमान की रक्षा करना नहीं सीखेगे तब तक न हम खुद की रक्षा कर पायेंगे न अपने देश की |
Thumbs Up Thumbs Down
2
prashant mehrishi on 25 August, 2010 21:08;46
avatar
प्रतिदिन क्यों नहीं लिखते ? दैनिक जागरण , अमरउजाला उत्तरी भारत के अख़बार हैं इनमे भी लेख भेजिए .केवल देवेन्द्र स्वरुप जी ,तरुण विजय जी ,और आप v एक दो और राष्ट्र उपयोगी लिख रहे हैं .कुछ ज्यादा प्रयास आवश्यक है संवेदना शुन्य होते हिन्दू समाज को झाझ्कोरने के लिए .
इश्वर आपकी लेखनी की धार और तेज करे ऐसी शुभकामनाये
Thumbs Up Thumbs Down
2
Dr pawan on 26 August, 2010 13:23;27
avatar
Thanks shulka g very good and informative article ye hindustani darpok h or inme inferiority complex h uper se ye corrupt or gaddar neta jo paise k liye apne parivar ko bhi deliver kar denge
Thumbs Up Thumbs Down
2
Mukesh Mishra on 23 September, 2010 09:37;59
avatar
mukesh chandra mishra
Thumbs Up Thumbs Down
-1
Mukesh Mishra on 23 September, 2010 12:20;19
avatar
एकदम सटीक लिखा है सर जी आपने पर देखना आपके लिखने का कुछ असर अगर कहीं होगा तो बस इतना की आपको बीजेपी और संघ परिवार का चमचा बता दिया जायेगा, क्योंकि अब हमारे देश के हिन्दुवों की चेतना सोयी नहीं मर चुकी है ये तभी जागृत होगी जब इनके अस्तित्व पर संकट आएगा या फिर से गुलाम हो जायेंगे.
***तब उनका इस्लाम आड़े खडा हो जाएगा. दशकों से उनका इस्लाम आड़े खडा है. उनके सुर में सुर यहाँ के इस्लाम से मिल रहा है***
ऊपर जो लाइन आपने लिखी है उसपर संदेह शायद मुस्लिमों को भी नहीं होगा और हम सब उसका परिणाम सालों से भुगत रहे हैं, पर हमारे तथाकथित सेकुलर नेता जो कश्मीर में अलगाववादी मुस्लिमों से मिलने जा सकते है पर देशभक्त कश्मीरी पंडितों से नहीं और जो सर से लेकर पाँव तक भ्रस्टाचार में डूबे हैं, आप जैसे लोगों की देशहित की बातों पर भी सम्प्रादयिकता का ठप्पा लगा देतें हैं. मुझे लगता है यही हालात रहे तो एक दिन हमारी सेना भी दूसरे देशों की तरह एक दिन तख्ता पलट करेगी और शायद देश का हित तभी सुरक्षित होगा क्योंकि देश पर कोई भी आफत आती है तो मरता आम आदमी और सिपाही है नेता नहीं.......
Thumbs Up Thumbs Down
0
total: 8 | displaying: 1 - 8

Post your comment comment

Type in Hindi (हिन्दी में कमेन्ट करने के लिए यहां रोमन में लिखिए यह अपने आप हिन्दी में बदल देगा.)

Title :
Body
Powered by Vivvo CMS v4.1.2
Share |
  • email Email to a friend
  • print Print version

ईमेल से विस्फोटः अपना ईमेल यहां भरें और सब्सक्राइब करें:

Delivered by FeedBurner

Author info
image प्रेम शुक्ल मुंबई से प्रकाशित हिन्दी सामना के कार्यकारी संपादक. पिछले 20 सालों से पत्रकारिता. पत्रकारिता के साथ ही मुबंई में हिन्दीभाषी समाज के विभिन्न सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रिय. विस्फोट.कॉम के नियमित स्तंभ लेखक. संपर्क - premshukla@rediffmail.com
Rate this article
5.00
More from बात करामात
Previous
image
अजमेर चार्जशीट और संघी उछल-कूद
बढ़ते पैमाने पर इसके साक्ष्य सामने आ रहे हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर एस एस) से जुड़े लोगों का आतंकवादी हमलों में हाथ रहा है। इन हालात में आर एस एस इस पुराने सूत्र पर चल रहा लगता है कि हमला ही सबसे अच्छा बचाव है। उसने 10 नवंबर को देशव्यापी विरोध कार्रवाइयों का आह्वान किया है। इन कार्रवाइयों में संघ के शीर्ष नेताओं के शामिल होने की बात कही जा रही है। बहरहाल, इसकी चर्चा हम जरा बाद में करेंगे।...
image
खुद ही खुदा बनने चला संघ
आर एस एस ने अब शायद बी जे पी को हाशिये पर लाने का मन बना लिया है .अपनी आबरू बचाने के लिए १० नवम्बर को आरएसएस के नेता खुद सडकों पर उतरेगें और धरना प्रदर्शन करेगें . उनकी शिकायत है कि यूपीए सरकार संघी आतंकवाद के ब्रैंड को प्रचारित करने में लगभग कामयाब हो गयी है और बीजेपी वाले कोई भी राजनीतिक पहल नहीं कर रहे हैं. नाराज़ संघी नेतृत्व अब खुद ही मैदान ले रहा है ....
image
शाबाश ओबामा, पहले दिन ही दस अरब डालर का बिजनेस
अपने भारत दौरे के पहले दिन ही बराक ओबामा दस अऱब डालर का बिजनेस कर गए। बेशक भारत को कुछ न मिले। पर भारत ओबामा को काफी कुछ देगा। भारत अमेरिकी बेरोजगारी को दूर करेगा। बेशक आतंकी हमलों से संबंधित भाषण में ओबामा ने पाकिस्तान का नाम नहीं लिया, पर भारत ने अपनी सेवा में कोई कसर नहीं छोड़ी। भारत सरकार और भारत के प्राइवेट कारपोरेट ने ओबामा को खुश कर दिया है। चीन से परेशान बराक ओबामा को भारत दौरे से राहत मिली है।...
image
भारत के रुख से चीन बेचैन
इस समय चीन बैचेन है। बैचेनी का कारण भारत की विस्तारवादी विदेश नीति है। इस विदेश नीति के तहत भारत ने उन देशों से दोस्ती बढ़ानी शुरू कर दी है, जो देश चीन से किसी न किसी मसले पर भीड़े है। चीन काफी बैचेने से भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की हाल ही में हुई विदेश यात्रा और बराक ओबामा का नवंबर के दूसरे सप्ताह में होने वाली दक्षिण एशिया की यात्रा पर नजर रखे है। भारतीय प्रधानमंत्री की जापान, मलेशिया, दक्षिण कोरिया, वियतनाम यात्रा की आलोचना चीनी अखबार पीपुल्स डेली कर रहा है। जबकि ओबामा की यात्रा को भी चीनी अखबार विस्तारवादी यात्रा बता रहा है।...
image
चड्ढी पहन के फूल खिलाने वाले उपेक्षित
छत्तीसगढ़ के सन्दर्भ में कुछ साल पहले ‘ विकास बनाम संस्कृति ’ पर चर्चा करते हुए डा. रमन सिंह ने एक बड़ी अच्छी बात कही थी. बकौल डा. सिंह ‘आखिर कब तक आप संस्कृति के नाम पर गरीब आदिवासियों के सिर पर सिंह लगा उन्हें नचाते रहेंगे ? उनको भी विकास और समाज की मुख्यधारा में शामिल होने का अवसर दीजिए.’ तो ज़ाहिर सी बात है कि अगर हम प्रदेश को बदलते वैश्विक परिवेश के अनुसार आगे बढते और विकसित प्रदेश के रूप में उसकी पहचान बनाना देखना चाहते हों तो हमें नवाचार को बढ़ावा देना होगा....
image
बस, एक सरदार चाहिए कश्मीर के लिए!
कश्मीर समस्या ने इस मिथक को भी तोड़ दिया की विकास की योजनाओं और बुनियादी अवशक्ताओ की पूर्ति से किसी भी समस्या का हल ढूंढा जा सकता है ,कश्मीर में वो सब प्रयास विफल रहे है। वो हाथ जो डल झील में नाव चलाते थे, अब पत्थर-बाजी में शरीक है। इन स्थितियों में तो ऐसा लगता है काश आज सरदार पटेल के कद और राजनीतिक दृढता वाला कोई नेता देश में होता तो अब तक ये विवाद कब का हल हो गया होता। ...
image
शुक्र मनाओ कि तुम भारत में हो अरुंधती
भारतीय समाज में बुद्धजीवी का दर्जा पा चुकी अरुंधती रॉय ने कहा है कि कश्मीर कभी भी भारत का अभिन्न हिस्सा रहा ही नहीं है. गिलानी दिल्ली में सेमिनार में कह रहें है कि उन्हें आज़ादी से कम कुछ भी नहीं चाहिए. गिलानी अगर ऐसी बात कहें तो कोई हैरानी नहीं होती लेकिन अरुंधती ऐसा कहें तो आश्चर्य होता है. हालांकि इसके पहले भी अरुंधती रॉय एक ऐसा ही बयान दे चुकी हैं. तब उन्होंने मावोवाद का समर्थन किया था. कश्मीर को भारत का अभिन्न हिस्सा ना मानने सम्बन्धी बयान वहां पर अपनी जान कि बाज़ी लगा रहे जवानों के लिए एक तमाचा है. साथ ही शेष देश के लोगों के लिए क्षोभ और शर्मिंदगी की वजह है....
image
आइये अरुंधती को लानत भेंजे
उसका बस चले तो वो हिंदुस्तान के सिर्फ इसलिए टुकड़े टुकड़े कर दे क्यूंकि ऐसा करने से वो भीड़ से अलग नजर आएगी। उसके पास हत्याओं को वाजिब ठहराने के तमाम तर्क हमेशा मौजूद रहते हैं ,क्यूंकि इसे वो खुद को महान साबित करने का औजार समझती है। संभव है इसके बहाने वो नोबेल पुरस्कार पाने की कोशिश कर रही हो। वो वामपंथ का ऐसा क्रूर चेहरा है जिसका इस्तेमाल मीडिया कभी अपनी टीआरपी बढाने में तो कभी व्यवस्था के विरुद्ध अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए करता है। संभव है बहुतों को उससे मोहब्बत हो लेकिन हम अरुंधती को लानत भेजते हैं क्योंकि उसे राष्ट्र के अस्तित्व से नफरत है।...
image
टुम बोले टुम बोले हम टो टुप्पई टाप!
पुरानी कहानी है कि एक परिवार के तीन तोतलों की शादी नहीं हो पा रही थी। पिता ने हिदायत दी कि इस बार जो लडकी वालों के सामने बोलेगा उसको घर से निकाल दिया जाएगा। लकड़ी वाले आए, बडे बोला -‘पितादी ती बात याद है न।‘‘ मंझला बोला -‘‘टुप्प भईया।‘‘ छोटा बोल उठा -‘‘टुम बोले टुम बोले हम टो टुप्पई टाप!‘‘ इस तरह तीनों की पोल खुल गई। कांग्रेसनीत केंद्र सरकार में भी कमोबेश एसा ही कुछ होता दिख रहा है।...
image
संघ को बदनाम करने की कांग्रेसी साजिश
राजस्थान सरकार के आतंकवाद विरोधी दस्ते ने अजमेर दरगाह शरीफ पर कुछ साल पहले हुूए बम धमाके के मामले में कुछ तथाकथित अभियुक्तों के खिलाफ अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया है। इस आरोप पत्र में जिन आरोपियों को नाम हैं उनमें इन्द्रेश कुमार का नाम नहीं है। यहां तक का किस्सा सामान्य जांच प्रक्रिया का अंग है। परंतु उसके बाद की कहानी राजनैतिक कहानी है।...
image
सामी नहीं, कांग्रेस के मुंह पर कालिख
कहने के लिए भले ही छत्तीसगढ़ कांग्रेस में केंद्रीय राज्य मंत्री वी नारायण सामी पर कालिख फेंके जाने का मुद्दा शांत होता दिख रहा हो लेकिन इसकी गूंज अभी लंबे समय तक सुनाई देगी। हकीकत यह है कि यहां कांग्रेस की गुटबाजी को आलाकमान अपना पूरा दम लगाकर भी शांत नहीं कर सकता। प्रभारी के रूप में सामी की यहां यह दूसरी बार फजीहत हुई है। मंगलवार को पीसीसी प्रतिनिधियों की बैठक में जब महज एक लाइन का प्रस्ताव पारित करवाने के लिए सामी यहां पहुंचे थे तो कांग्रेस भवन के बाहर ही उन पर काली स्याही फेंकी गई जो उनके चेहरे और कपड़े पर होते हुए उनके साथ कार से उतरे शहर कांग्रेस अध्यक्ष इंदरचंद धाड़ीवाल पर भी पड़े।...
image
अब देखिए राजनीति का कॉमनवेल्थ
कॉमनवेल्थ घोटाले की कड़ी से कड़ी जुडऩे लगी। पहले दिन बीजेपी नेता सुधांशु मित्तल निशाने पर रहे, तो दूसरे दिन खेल गांव बनाने वाली कंपनी एम्मार-एमजीएफ का खेल बिगड़ गया। डीडीए के पास जमा 183 करोड़ की बैंक गारंटी जब्ती का नोटिस जारी हो गया। पर अभी तो सिर्फ ठेका लेने वाली कंपनियों पर शिकंजा कसा। यक्ष प्रश्न, ठेका देने वाले नौकरशाहों-नेताओं ने कितना खाया, इसकी परतें कब उधड़ेंगी? अब ठेकेदारों पर कार्रवाई में तेजी दिखाने से क्या होगा? ठेकेदार तो अपना टेंडर भरते। यह तो देने वाले पर निर्भर, किस कंपनी को ठेका दे। सो सवाल, ठेका देते वक्त नौकरशाहों-नेताओं ने होश क्यों गंवाया?...
image
अब शुरू हुआ असली खेल
कॉमनवेल्थ खेलों के लिए लगाये गये टेन्ट, तंबू कनात उखड़ गये हैं. लेकिन असली खेल उसके बाद शुरू हुआ है. भारतीय जनता पार्टी बनाम कांग्रेस के इस खेल में राजनीति का स्वर्ण पदक कौन हासिल करेगा यह कहना मुश्किल है लेकिन जो खुलासे होंगे वे यह साबित कर देंगे कि खेल भारतीय राजनीति में पर्दे के पीछे असली समाजवाद कायम है. अगर भाजपा की सरकार में कांग्रेसी सुरेश कलमाड़ी कामनवेल्थ खेलों के लिए अगुआ बने रहते हैं तो कांग्रेस की सरकार में आठ सौ करोड़ का ठेका भाजपा के हितैषी सुधांशु मित्तल को मिल जाता है. ...
image
बताओ भला, सीएजी शीला और कलमाड़ी का क्या बिगाड़ लेगी?
कॉमनवेल्थ के आयोजक सफलता की खुमारी में हैं तो देश की जनता विजयादशमी के जश्न में डूबी है, ऐसे में रामायण के एक प्रसंग का जिक्र लाजिमी होगा। जब भगवान राम लंका पर फतह कर अयोध्या लौटे। राज्याभिषेक हो गया तब सिर्फ एक धोबी की टिप्पणी सुन राम ने अग्नि परीक्षा दे चुकी सीता को तज दिया था। पर कॉमनवेल्थ के आयोजकों पर न जाने कितने आरोप लग चुके, फिर भी किसी ठोस कार्रवाई की उम्मीद बेमानी। पहले भी जांच हुई, रपटे आईं लेकिन उन्हीं शीला दीक्षित ने सीएजी को ठेंगा दिखा दिया जिनके खिलाफ अब कामनवेल्थ खेलों में भ्रष्टाचार के खिलाफ जांच करने की बात कही जा रही है....
image
काश हर मस्जिद की खिडकी मंदिर में खुलती
6 दिसंबर, 1992 को जब विवादित ढांचा ढहाया गया, तब मैं जवान हो रहा था। बारहवीं में था। पिताजी उन दिनों बुलंदशहर में बतौर अध्यापक तैनात थे। हम सब उनके साथ ही रह रहे थे। दंगे भडक चुके थे। हमने छत पर चढकर दूर मकानों से उठती लपटों की आंच महसूस की थी। मौत के खौफ से बिलबिलाते लोगों की चीखें सुनी थीं। हैवानियत का नंगा नाच देखा था। 'जयश्री राम' और 'अल्लाह ओ अकबर' के नारों में भले ही ईश्वर और अल्लाह का नाम हो, लेकिन तब उन्हें सुनकर रीढ़ में बर्फ-सी जम जाती थी।...
image
ऐसे आदमी का सियासत में क्या काम?
कहां इकबाल,गालिब व फैज का शौक और कहां सियासत! जो भी हो पर पंजाब के कमजोर आर्थिक पक्ष व सियासत की गफलत में पंजाब के पूर्व वित्त मंत्री (निलंबन के दूसरे दिन उन्हें पूर्व भी कर दिया गया है) मनप्रीत सिंह बादल पंजाब के उन अहम से मारे सियासतदानों से बिल्कुल अलग है जो सियासतदान गनमैनों के लाव लश्कर के बिना चलना अपनी तौहीन समझते हैं।...
image
आरटीआई का दिल है इंटरनेट
इन्टरनेट आरटीआई का दिल है, यह बात किसी आईटी प्रोफेसनल या इन्टरनेट सर्विस प्रोवाइडर द्वारा अथवा ईमेल सेवा प्रदाता कंपनी ने नहीं कही, बल्कि ऐसे शख्स श्री वजाहत हबीबुल्लाह ने कही, जो केन्द्रीय सूचना आयोग के मुख्य सूचना आयुक्त रहे हैं। जिस कार्यक्रम में मुख्य सूचना आयुक्त ने दिल की बात दिल से जोड़कर कही, उस कार्यक्रम में मैं भी मौजूद था। मैंने कार्यक्रम में आये भारत के विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों व अन्य देशों से आये विषय विशेषज्ञों से आरटीआई को इन्टरनेट के जरिए प्रोत्साहित करने की बात कही।...
Next
Tags
No tags for this article
सर्वाधिकार (अ)सुरक्षित

विस्फोट.कॉम में प्रकाशित सामग्री पर हमारी ओर से कोई कापीराइट नहीं है.

Powered by Vivvo CMS v4.1.2