हिन्दुस्तानी होने की आम बीमारी
हिंदुस्तानी आदमी की सबसे बड़ी कमजोरी है कि उसमें किलर इंस्टिंक्ट का सर्वथा अभाव होता है. दैनंदिन राजनय से लेकर खेल के मैदान तक उसकी यह कमी देखी जा सकती है. हमेशा हिन्दवी समुदाय इस तथ्य को बिसार देता है कि 'क्षमा शोभती उस भुजंग को जिसके पास गरल हो. ' अर्थात क्षमा उस सर्प का आभूषण है जिसके पास गरल यानी जहर हो. जिसके पास जहर ही नहीं होगा उस सांप को कोई केचुए से ज्यादा महत्त्व क्यों देगा? हिंदुस्तानी हमेशा बिना जहर दिखाए क्षमा करने निकल पड़ते हैं इसलिए जीवन के हर क्षेत्र में उन्हें अपमान का घूँट पीना पड़ता है.
ऑस्ट्रेलिया में उन पर नस्लवादी हमले होते हैं, हम कंगारुओं से क्रिकेट खेलने के लिए मरे जाते हैं. आईपीएल में कंगारू नहीं खेलेंगे तो जैसे आसमान टूट जाएगा. हमारे शरद बाबू को जितना सड़े हुए गेंहू का ख़याल नहीं उससे कई गुना ख्याल वे सदी हुयी मानसिकता वाले कंगारू खिलाड़ियों का करते हैं. शरद बाबू ने काश इतना ख़याल गरीब किसानों का किया होता तो सैकड़ों किसानों की जान बच गयी होती.खैर इस तरह की भ्रांत खेल भावना में जीने वाले इस देश में कोई अकेले शरद बाबू नहीं हैं. यह तो हिन्दुस्तानियों की आम बीमारी है. पाकिस्तान रोज हमारे खिलाफ आतंकी भेजता है,वैश्विक स्तर पर हर कदम पर हमारे देश का विरोध करता है लेकिन एक हमारे देशवासी हैं वे अमन की आशा में दुबले हुए जा रहे हैं. सानिया मिर्जा का डोला इस्लामाबाद चला गया फिर भी हमारे देशवासी परेशान हैं कि वह राष्ट्रमंडल खेलों में हमारे देश की कप्तानी कर ले. करने दो न उसे पाकिस्तान की कप्तानी.जरा बुर्का चढ़ा कर उतरने दो न उसे खेल के मैदान में. एकाध पदक वह ले जायेगी पाकिस्तान तो संभव है कि पाकिस्तान के किसी हाफ़िज़ सईद का दिल पसीजे हिन्दुस्तान के प्रति. लेकिन नहीं .इस देश की रीति-नीति बन गयी है कि खाओ हिन्दुस्तान का और बजाओ पाकिस्तान का, जो करे उसे सेकुलर मान लिया जाए. सौ चूहे खाकर सारी बिल्लियाँ हज कर आयें. हम हैं उनकी शान में खजूर और आबे जम-जम पेश करने के लिए. हाजी साहब और हज्जन कह कर हाथ चूमने के लिए.गुलाम अली यहाँ आएंगे पाकिस्तानी शायरों के कलाम गायेंगे हम तालियाँ बजायेंगे ,उन पर अपनी दौलत लुटाएँगे. अदनान सामी ने तो सारे नियम कानून तोड़ कर यहाँ अपनी दुनिया बसा ली है. हर साल बड़े शान से नयी-नयी खातूनों से निकाह पढ़ रहा है. उस पर न कोई नियम लागू न कोई कानून. जब मन करे हमारे देश से उड़ कर जाए और पाकिस्तानी प्रधान मंत्री की दावत उड़ाकर वापस आ जाए.फिर सुर्ख़ियों में बने रहने के लिए एक ब्यान भी ठोंक दे कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री स्वरकोकिला लता मंगेशकर को पाकिस्तान में निमंत्रित करना चाहते हैं. क्यों नहीं करते ?
यह बयान देने के लिए क्या गिलानी को अदनान सामी का सहारा चाहिए. जैसे अदनान समी, गुलाम अली हिन्दुस्तान में माल कमा रहे हैं वैसा सौजन्य लता दीदी,आशा भोसले समेत हिंदुस्तानी कला जमात के किसी हस्ती को पाकिस्तानी क्यों नहीं प्रदान करते? कभी नहीं करेंगे. तब उनका इस्लाम आड़े खडा हो जाएगा. दशकों से उनका इस्लाम आड़े खडा है. उनके सुर में सुर यहाँ के इस्लाम से मिल रहा है. हम इस जुगलबंदी के खिलाफ खुला कर बोल रहे हैं तो हम साम्प्रदायिक हो गए. वे हर घड़ी धार्मिक उन्माद फैला रहे हैं वे सेकुलर हैं. मोहम्मद अली जिन्ना को भी इसी अंदाज में दशकों तक सेकुलर समझा जाता रहा. सरोजिनी नायडू तो कहा करती थीं कि जिन्ना हिन्दू-मुस्लिम एकता के राजदूत हैं.मौक़ा मिलते ही यही राजदूत यमदूत बन गए.लाखों हिदुओं का कत्ले आम कर पाकिस्तान खडा कर दिया.आज भी जब मौक़ा मिलता है पाकिस्तान हिन्दुस्तान के खिलाफ कुचक्र रचता है. हिन्दुस्तानियों को नीचा दिखाने का हरसंभव प्रयास होता है. संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद से लेकर क्रोकेट के मैदान तक यह सिलसिला जरी रहता है.
इन दिनों हिन्दुस्तान की क्रिकेट टीम श्रीलंका के दौरे पर है. सनद रहे कि पिछले एक अरसे से श्रीलंका में चीनी सहयोग से पाकिस्तानी प्रभाव का विस्तार हुआ है. लिबरेशन ऑफ़ तमिल टाइगर्स ईलम के खिलाफ श्रीलंका की सेना को पाकिस्तानी मदद मिली. बदले में दोनों देशों के बीच क्रिकेट की डिप्लोमेसी चली. आतंकवाद के बेलगाम होने के चलते जब दुनिया की कोई टीम पाकिस्तान में क्रिकेट में खेलने से दर रही थी तब श्रीलंका के बोर्ड ने अपनी टीम वहाँ भेजी थी. उस समय आतंकवादियों ने श्रीलंकाई टीम पर हमला भी किया था. तब आई एस आई ने हिंदुस्तानी खुफिया एजेंसियों पर इस हमले का आरोप मढ़ने का प्रयास भी किया था. खैर,पाकिस्तान के प्रयास से श्रीलंका ने भी हिन्दुस्तान को अपना दुश्मन मान लिया है. यह श्रीलंकाई खिलाड़ियों के व्यवहार से स्पष्ट दिखाई दे रहा है. बीते दिनों हिंदुस्तानी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग का शतक रोकने के लिए जिस तरह से श्रीलंकाई टीम ने षड्यंत्र रचा,प्रैक्टिस के लिए जिस अंदाज में ज्यादा उछाल वाली पिच उपलब्ध कराई गयी ताकि हिंदुस्तानी खिलाड़ी घायल हो जाएँ वह हिन्दुस्तान के प्रति श्रीलंका के भाव को स्पष्ट करता है. दूसरी ओर हिन्दुस्तान की खेल भावना है कि हमारे खिलाड़ी मुरलीधरन के ८०० विकेट का रिकार्ड पूरा करने के लिए अपना विकेट फेंकते नजर आते हैं. सहवाग के प्रकरण पर हमारे देश के क्रिकेट नियंता मौन साधे रहे .
परिणाम सामने है कि अगले मैच में हिन्दुस्तानी खिलाड़ियों के मनोबल के साथ बलात्कार ही कर दिया गया. सहवाग को पिछले मैच में नो बाल डाल कर शतक नहीं पूरा करने दिया गया था,इस बार श्रीलंकाई अम्पायर ने सहवाग पिच पर टिकते उसके पहले ही विकेट से साफ़-साफ़ बाहर जाती गेंद पर पगबाधा आउट करार दे दिया. दाम्बुला के मैदान पर श्रीलंका के अम्पायर कुमार धर्मसेना और पाकिस्तानी अम्पायर असद रौफ ने जैसे पहले से ही तय कर रखा था कि टीम इंडिया को बेइज्जत करना है. उनकी मेहरबानी से टीम के ४ महत्वपूर्ण खिलाड़ियों को गलत ढंग से आउट करार दे दिया गया.परिणाम स्वरुप टीम १९८१ के बाद सबसे सोचनीय पराजय का शिकार हुयी. दिनेश कार्तिक और सुरेश रैना को जिन गेदों पर आउट करार दिया गया उसे हर कोई जानता था कि अम्पायर पूरी तरह से बल्लेबाजों की बंद बजाने पर आमादा हैं. युवराज सिंह लम्बी बीमारी से उठ कर मैदान पर डटने के प्रयास में थे उन्हें जबरन पवेलियन भेज दिया गया. यदि यह हरकत पाकिस्तान या श्रीलंका की टीम के साथ किसी हिन्दुस्तानी अम्पायर ने की होती तो अब तक उनके बोर्ड आसमान सिर पर उठा कर खड़े हो गए होते. लेकिन यह तो हिन्दुस्तानी केंचुआ वृत्ति का कमाल है कि हमारे कृषि मंत्री और अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के अध्यक्ष शरद पवार मौन साधे पड़े हैं. हमारी इसी केंचुआ वृत्ति का लाभ हर कोई ले रहा है. काश किसी मैदान में हमारे लोग ईंट का जवाब पत्थर से देना सीख लेते.
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- सोनिया का सच जान बेकाबू क्यों होते हो?
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साधुवाद..
****तब उनका इस्लाम आड़े खडा हो जाएगा. दशकों से उनका इस्लाम आड़े खडा है. उनके सुर में सुर यहाँ के इस्लाम से मिल रहा है. हम इस जुगलबंदी के खिलाफ खुला कर बोल रहे हैं तो हम साम्प्रदायिक हो गए. वे हर घड़ी धार्मिक उन्माद फैला रहे हैं वे सेकुलर हैं.***
एक दम सही कहा आपने
क्षमा शोभती उस भुजंग को .......ठीक लिखा पर देश शस्त्रों से निर्वीर्य नहीं है ,सरकार निर्वीर्य है .
इश्वर आपकी लेखनी की धार और तेज करे ऐसी शुभकामनाये
***तब उनका इस्लाम आड़े खडा हो जाएगा. दशकों से उनका इस्लाम आड़े खडा है. उनके सुर में सुर यहाँ के इस्लाम से मिल रहा है***
ऊपर जो लाइन आपने लिखी है उसपर संदेह शायद मुस्लिमों को भी नहीं होगा और हम सब उसका परिणाम सालों से भुगत रहे हैं, पर हमारे तथाकथित सेकुलर नेता जो कश्मीर में अलगाववादी मुस्लिमों से मिलने जा सकते है पर देशभक्त कश्मीरी पंडितों से नहीं और जो सर से लेकर पाँव तक भ्रस्टाचार में डूबे हैं, आप जैसे लोगों की देशहित की बातों पर भी सम्प्रादयिकता का ठप्पा लगा देतें हैं. मुझे लगता है यही हालात रहे तो एक दिन हमारी सेना भी दूसरे देशों की तरह एक दिन तख्ता पलट करेगी और शायद देश का हित तभी सुरक्षित होगा क्योंकि देश पर कोई भी आफत आती है तो मरता आम आदमी और सिपाही है नेता नहीं.......
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