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जयराम की जय हो!

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अगर दिल्ली दरबार में एक मंत्री भी अपना काम इमानदारी से करने का फैसला कर ले तो बहुत कुछ बदल सकता है. आज के ६३ साल पहले व्यवस्था बदल देने के लिए सत्ता में आई कांग्रेस के शुरुआती मंत्री तो बहुत ही इमानदार थे ,शायद इसीलिये बहुत सारी चीज़ें ऐसी हुईं जिनकी उम्मीद आज़ादी के लिए संघर्ष करने वाले वीरों ने देखी थी लेकिन वक़्त के साथ बेईमानों की संख्या बढ़ने लगी और बहुत सारे फैसले पैसे के बल पर होने लगे.

पिछले २० वर्षों से  तो दिल्ली दरबार में ऐसा माहौल है कि पूंजीपति वर्ग जो चाहे करवा सकता है. सरकार के मंत्रियों की हालत यह है कि किसी भी फैसले को बदल देने में उन्हें कोई संकोच नहीं होता. घूस पात देकर खरबपति बनने वालों की संख्या में लगातार वृद्धि इसी वजह से हो रही है. ऐसा ही मामला उस आदमी का है जो मुंबई में कबाड़े का काम करता था लेकिन आज देश के सबसे समृद्ध भारतीयों में उसकी गिनती होने लगी है. इस तरह के उद्यमियों की खास बात यह है कि ये लोग सभी पार्टियों में बराबर की पैठ रखते हैं. ताज़ा मामला स्टरलाईट और वेदान्त अल्युमिनियम का है जिनकी अपने आपको को छः गुना करने की योजनाओं को ईमानदारी का झटका लग गया है क्योंकि केंद्र सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्री ने तय कर लिया कि नियम कानून में हेराफेरी करके किसी को लाभ लेने की अनुमति नहीं दी जा सकती. वेदान्त अल्युमिनियम के मालिक अनिल  अग्रवाल की कंपनी में कभी गृहमंत्री पी चिदंबरम निदेशक रह चुके हैं और एन डी ए की सरकार के एक मंत्री या कई मंत्रियों ने उन्हें माटी के मोल भारत की सबसे पुरानी सरकारी अल्युमिनियम कंपनी बेच दी थी.

दरअसल उसी बालको( भारत अल्युमिनियम कंपनी ) को सस्ते खरीद कर ही उन्होंने सम्पन्नता की अपनी दौड़ को ताक़त दी थी. उस दौर में कांग्रेस ने उनके काम का कोई विरोध नहीं किया था क्योंकि उनकी कंपनी में कांग्रेस के ताक़तवर नेता, पी चिदंबरम एक निदेशक के रूप में काम कर रहे थे. उडीसा के मुख्य मंत्री नवीन पटनायक से भी उनके बहुत अच्छे रिश्ते थे. ज़ाहिर है उनकी मनमानी की गाड़ी अपनी मर्जी से बेख़ौफ़ चल रही थी. लेकिन अब सब कुछ गड़बड़ हो चुका है. पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने वेदान्त कंपनी और उसके मालिक को कानून की इज्ज़त करने का ककहरा पढ़ा दिया है. उड़ीसा में औने पौने दामों में मिले बाक्साईट की खुदाई के लाइसेंसों को सरकार ने गैरकानूनी करार दे दिया है और अब उनकी रफ़्तार लगभग शून्य पर आ गयी है. अजीब बात यह है कि उनकी लक्ष्मी की साधना में सरकारी क्षेत्र की कंपनी ओडीसा माइनिंग कारपोरेशन ने भी कारिन्दा बनने का फैसला कर लिया था . यह भी माना जाता है कि दिल्ली दरबार से उन्हें बिना किसी रोक टोक के चलते रहने का आशीर्वाद मिला हुआ था. लेकिन अब  बात बिगड़ चुकी है.

पर्यावरण मंत्री, जयराम रमेश ने उड़ीसा माइनिंग कारपोरेशन का वह लाइसेंस रद्द कर दिया है जो नियमगिरि पहाड़ियों से बाक्साईट की खुदाई करके अनिल अग्रवाल की वेदान्त अल्युमिनियम की लान्जीगढ़ रिफाइनरी को बाक्साईट सप्लाई  करने के लिए दिया गया था. मंत्री ने नए लाइसेंस को तो रद्द कर ही दिया है एक लाख टन की क्षमता वाले प्लांट को मिले पुराने लाइसेंस को रद्द करने के लिए भी कार्रवाई शुरू कर दिया है. तीन जिलों में फ़ैली बाक्साईट की इन खदानों में डोंगरिया और खूँटिया जाति के आदिवासी रहते हैं और उनकी जीविका इन्हीं जंगलों की वजह से चलती है. वैसे भी पर्यावरण के जानकारों का कहना है कि कि अंधाधुंध खुदाई से इस इलाके के वातावरण को जो नुकसान होगा उका कोई हिसाब ही नहीं लगाया जा सकता.

इस सारे मामले में मीडिया के एक हिस्से का रोल बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण रहा है. खासकर टेलिविज़न न्यूज़ के एक वर्ग के लोग इस तरह बात कर रहे हैं मानों अगर वेदान्त का आर्थिक नुकसान हो गया तो सर्वनाश हो जाएगा. उनकी तरफ से अनिल अग्रवाल की कंपनियों के शेयर में हो रही गिरावट को इस तरह पेश किया जा रहा है जैसे दुनिया पर कोई भारी संकट आ गया है. ज़ाहिर है कि सरकार, राजनीतिक दल और मीडिया सब की मदद से आम आदमी, खासकर आदिवासी भारतीयों की संपत्ति को हड़प कर यह कम्पनियां सम्पन्नता के इस मुकाम तक पंहुची हैं. लेकिन आम आदमी के नजरिये से कारोबार को देखनेवाले एक मंत्री के रवैये ने वेदांत कंपनी को औकात में ला दिया. जयराम रमेश का एक फैसला भारतीय समाज के मानस के अनुकूल है जिसमें उन्होंने गंगा को अविरल रहने का आश्वासन दिया और एनटीपीसी के लोहारी नागपाला पनबिजलीघर को बंद करवा दिया. ज़रुरत इस बात की है कि जयराम रमेश की तरह के कुछ और लोग सार्वजनिक जीवन में आयें और न्याय पर आधारित राज काज के निजाम की स्थापना करें. जयराम की जय हो!

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anup on 26 August, 2010 16:43;47
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जैराम जी का काम , वाकई काबिले तारीफ है.
इनके जिय्सा नेता चाहिए सामाज को.
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Rajesh Singh on 26 August, 2010 17:14;05
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बधाई हो........ जयराम रमेश नें चिदंबरम पर वेदांता कंपनी के निदेशक होने के पाप को धो दिया. जयराम रमेश नें साबित किया कि उनके माध्यम से ही सही कुछ हद तक कांग्रेस का हाथ आम आदमी के साथ दिखना शुरू हुआ है
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मुकुल शुक्ला on 26 August, 2010 22:53;38
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जयराम की जय तो मीडिया नहीं कर रहा | हाँ अलबत्ता राहुल गाँधी की चमचागिरी ज़रूर शुरू कर दी है कांग्रेसी मीडिया ने | आम आदमी के सिपाही बनने का नाटक भी ज़रूर शुरू कर दिया है राहुल गाँधी ने जिसे खूब बढ़ा चढ़ा के मीडिया दिखाने में जुट गया है | ये वैसे ही है जैसे की हरित क्रांति का श्रेय माननीय लाल बहादुर शास्त्री जी को न दे कर इंदिरा गाँधी के नाम कर दिया था चापलूस कांग्रेस और उसके खरीदे मीडिया ने |
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Vaibhav Kant Adarsh on 26 August, 2010 23:33;43
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If the doors of perception were cleansed, everything would appear as it is - infinite”
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Dr pawan on 27 August, 2010 11:11;25
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Thanks narayan ji very informative article and congrats to jairam ji
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Dinkar on 27 August, 2010 15:57;51
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शेष जी, एक बात बताइये व्यक्ति पूजा करने की आदत आपको बचपन से ही है, या फिर बाद में जाकर लगी है. और आप तलुए चाहते चाहते इतने राम जाते हैं कि ऊपर देखते भी नहीं कि ये तलुए हैं किसके. शबाना, जयराम रमेश का तो फिर भी समझ आया. मगर तलुए चाटने के क्रम में आपने किन्हीं विनीत कुमार को भी नहीं छोड़ा है. जबकि सब जानते हैं कि भाई उभरता हुआ दलाल है. मगर आपको क्या, आप जहां छपने की संभावना हो वहाँ चापलूसी करने लग जाते हैं. अजीब रोग है आपको. आपको क्या लगता है.. गाली गलोच के अड्डे भी आप अपनी संभावना देख ही लेते हैं..
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शेष नारायण सिंह on 27 August, 2010 22:50;19
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यह दिनकर जी भी दिव्यात्मा हैं . मुझ जैसे मामूली आदमी की भद्रा उतारने में अपनी ताक़त लगा रहे हैं . अरे दिनकर जी मैं बहुत ही मामूली आदमी हूँ, हाँ, छपास की थोड़ी बीमारी रहती है . अखबार वाले तो छापते नहीं, इसी वैकल्पिक मीडिया के सहारे काम चला लेता हूँ . अब इस पर भी बुरी नज़र मत डालिए .बाकी जहां तक तलुवे चाटने की बात है , आप भी कभी कुछ अच्छा लिखिए , मैं आपके तलुवे चाट कर धन्य हो जाऊंगा.
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bhaskar on 28 August, 2010 09:53;57
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शेष जी के इस लेख से असहमत नहीं हुआ जा सकता..भले ही इनके अन्य लेखो से मैं प्रायः असहमत रहता हु... व्यक्ति पूजा का आरोप कृपया मत लगाइए.. बहस को सार्थक बनी रहने दीजिये.
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संपादक on 28 August, 2010 10:22;55
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दिनकर नामक इन सज्जन की टिप्पणी को हटाया जा सकता था लेकिन आम जन भी यह देखें कि पूर्वाग्रहग्रस्तता क्या होती है और टिप्पणी का मोल लेख से तौल लें.
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Abhishek on 28 August, 2010 22:25;14
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अगर जय राम जी इतने ही इमानदार है तो BT बैगन और BT कपास के मामले में कड़ा रुख क्यों नहीं रखा, ये सब केवल पैसे की माया है जय राम जय जय राम |
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image शेष जी शेष नारायण सिंह मूलतः इतिहास के विद्यार्थी हैं. शुरू में इतिहास के शिक्षक रहे. .बाद में पत्रकारिता की दुनिया में आये...प्रिंट, रेडियो और टेलिविज़न में काम किया. इन्होने १९२० से १९४७ तक की महात्मा गाँधी की जीवनी के उस पहलू पर काम किया है जिसमें वे एक महान कम्युनिकेटर के रूप में देखे जाते हैं..1992 से अब तक तेज़ी से बदल रहे राजनीतिक व्यवहार पर अध्ययन करने के साथ साथ विभिन्न मीडिया संस्थानों में नौकरी की. अब मुख्य रूप से लिखने पढने के काम में लगे हैं. एक अखबार में काम और विस्फोट.कॉम के सम्मानित स्तंभलेखक.
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