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असफल गृहमंत्री का सफल 'आतंकवाद'

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हमारे केंद्रीय गृहमंत्री पी.चिदबरम ने पुलिस प्रमुखों के समेलन में ''भगवा आतंकवाद'' का नया शगूफा छोड़ दिया। वैसे इस केंद्रीय मंत्रिमंडल के कई मंत्री बयानों के मामले में शूरवीर की प्रसिद्धी प्राप्त कर चुके है। पी. चिदबरम भी ऐसे ही मंत्री हैं जो अपने बयानों के कारण चर्चा में रहते हैं. आतंकवाद का मामला हो, नकसलवाद का मामला हो, कश्मीर समस्या का मामला हो, या देश में घटित कोई भी अन्य महत्वपूर्ण मामला हो उनके आतंकवाद की थ्योरी भले ही सफल हो रही हो लेकिन बतौर गृहमंत्री वे असफल साबित हो रहे हैं.

चिदबरम स्वयं एक बहुत ही पढ़े लिखे विज्ञान, बौद्धिक और इक्कीसवीं सदी के आधुनिक मंत्री माने जाते है और उनकी तुलना में ज्ञानी जैल सिंह से की जाय जिन्हे अनपढ़ मंत्री कहा गया था (यद्यपि गुरूमुखी में उनकी बहुत कमाण्ड थी) उनसे भी ज्यादा असफल मंत्री सिद्ध हो रहे है। केंद्रीय शासन का और खासकर गृहमंत्री का यह मूल दायित्व है कि वह देश में फैले आतंकवाद की जड़ों को उस तरह से मूल रूप से समाप्त करें जैसे उनके पूर्ववर्ती गृहमंत्री एवं केन्द्रीय शासन ने पंजाब में आतंकवाद को समाप्त किया था। लेकिन चिदबरमजी आतंकवाद को समाप्त करने के बजाय नये-नये आतंकवाद को गढक़र कौन सी राजनीति करना चाहते है ये आम जनता के समझ के परे है। यद्यपि राजनैतिक लोग उनकी भाषा को और भावार्थ को समझ गये है और इसलिए उसकी तीव्र प्रतिक्रिया भी हुई है। सभी जनप्रतिनिधी, राजनैतिक पार्टीया जिसमें कांग्रेस पार्टी (जिसके गृहमंत्री भी सदस्य है), भी शामिल है विभिन्न संगठन एवं संस्थाए सब लोग एक आवाज में हमेशा से यह कहते आये है, कि आतंकवाद का न तो कोई रंग होता है और न ही धर्म होता है। कांग्रेस प्रवक्ता शकील अहमद ने भी कल यही बात कही है। भगवा आतंकवाद कहने के पहले गृहमंत्री को हरा-लाल या सिक्ख आतंकवाद नहीं दिखा? क्योंकि ये शब्द उनकी राजनीति को वह प्रभाव नहीं देते है जिस उद्देश्य के लिए उन्होने उक्त शब्द का गठन कर डाला। क्या 'भगवा' शद का अर्थ केंद्रीय गृहमंत्री जानते है?

कुछ आतंकी घटनाओं मसलन अजमेर, मालेगांव, गोवा आदि में तथाकथित रूप से अभिनव भारत या आर.एस.एस. से जुडे़ हिन्दू के कारण शायद गृहमंत्री ने उक्त शद की उत्पति की होगी। गृहमंत्रीजी को यह मालूम होना चाहिए कि भारत में हो रही आतंकी घटनाओं में यदि कोई भारतीय उससे जुड़ा है, उसमें संलग्र है तो वह व्यक्तिगत हैसियत से है न कि संस्थागत हैसियत से जिसकी न केवल सर्वत्र निंदा की जानी चाहिए बल्कि उसके खिलाफ कठोरतम कार्यवाही कर उसे नागरिकता से भी वंचित किया जाना चाहिए। लेकिन यदि वह व्यक्ति किसी परिवार का, संगठन का या संस्था का सदस्य है तो इसका यह मतलब नहीं है कि उस परिवार, संगठन या संस्था ने उसको उक्त कार्य करने के लिए प्रेरित किया, उत्पे्रित किया, ट्रेनिंग दिया। हमारे देश में हजारों मामले ऐसे है जहां विभिन्न नागरिकगण चोरी से लेकर बलातकार और हत्या के मामले में आरोपित होकर सजा पा चुके है उनमें से बहुत से लोग विभिन्न राजनैतिक पार्टियों से लेकर अनेक प्रतिष्ठित समाज सेवा संगठनों से जुड़े है जिनका उल्लेख करना समय की बरबादी होगी। लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि वे सब पार्टी या संगठन उक्त कृत्य के लिए उत्तरदायी है। बल्कि व्यक्तिगत रूप से उन अपराधियों ने जो कृत्य किया उसके लिए उन्होने सजा भी भुगती। इसी प्रकार यदि किसी भगवा वस्त्र धारी ने राष्ट्र हित के खिलाफ कोई काय किया है, आतंकी घटना में सहयोग किया है तो उसे निश्चित रूप से सजा दी जाना चाहिए। लेकिन क्या माननीय गृहमंत्री देश की जनता को यह बताने का कष्ट करेंगे कि कोई भी भगवा धारी संगठन या हिन्दू संगठन हमारे देश में पाया गया जिसके खिलाफ आतंकवादी होने के कोई भी सबूत केंद्रिय सरकार या उसके अधीन सीबीआई, रॉ या अन्य कोई संस्था के पास है? और यदि है तो उन्हे अदालतों या जनता के सामने प्रस्तुत क्यों नहीं किया जाता है। 'भगवा' शद का अर्थ चिदंबरम जानते है?

भगवा रंग आदिकाल से पूजा का रंग है इसे हिन्दू धर्म मानने वाले मानते है। पी. चिदंबरम भी हिन्दू है इस दृष्टि से वे भी भगवा रंग को पूजा स्थल का रंग मानते होंगे। कुछ सिरफिरे हिन्दुओं के आतंकवाद में लिप्त (चिदंबरम के शब्दों में) होने मात्र से ही सपूर्ण भगवा रंग को गाली देने का अधिकार चिदंबरम को नहीं है। इसके विपरीत अलकायदा, तालीबान, सिमी, लश्कर ए तोयबा, जैस-ए-मोहमद से लेकर विभिन्न नामों से नये उगते मुस्लिम आतंवादी संगठन है जिनकी आतंकी घटनाओं को इस देश ने झेला है। चाहे वह काश्मीर का मामला हो या मुबई बम कांड हो या २६/११ का मुबई का मामला हो तब चिदंबरम को हरा आतंकवाद नहीं दिखा? मुसलमानों के पूजा का प्रतीक हरा रंग है। माओवादी से नकसलवादीयों द्वारा की जा रही दिन प्रतिदिन तोडफ़ोड़ की घटनाओं में चिदंबरम को लाल आतंकवादी नहीं दिखता? मै ही नहीं इस देश का अधिसंख्यक जनसमुदाय जातीय, धर्म या विचारधारा के आधार पर लाल या हरा आतंकवाद नहीं मानता है पर तब माननीय चिदंबरम साहब इस तरह के बयान देकर देश के कुछ भागों में उत्पन्न हुई अशांत स्थिति को पूरे देश में क्यों झोंकना चाहते हैं? रामजन्मभूंमि मामले में सभवतः आगामी १६ तारीख को आने वाले निर्णय के पूर्व चिदबरम का बयान कोई सोची-समझी चाल के तहत तो नहीं है? चिदबरम का दायित्व है कि उनके बयान से जो एक शंका और आक्रोस की लहर देश में उठी है वे इसे तुरंत दूर करें अन्यथा प्रधानमंत्री को ऐसे गृहमंत्री को तुरंत मंत्रीमंडल से बर्खास्त कर देना चाहिए।

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sandeep on 01 September, 2010 22:09;30
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भगवा रंग तो हिन्दू सिख धरम का साँझा प्रतीक है [सठिया गये है चिदंबरम [लगता है देश में गृह मंत्री को शांति पसंद नही जो उलटे सीधे ब्यान देकर देश में दुबारा दंगे की स्थिति पैदा कर रहे है [
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DINESH on 01 September, 2010 23:19;00
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Bloody fools always express their foolishness
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वीरेन्द्र जैन on 02 September, 2010 00:31;26
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भग वा हो या इस लाम, कोई भी धर्म आतंकवाद के लिए पैदा नहीं हुआ। धर्म के प्रति धर्मान्धों की आस्था को देखते हुए आतंकी इनकी ओट लेकर धोखा देते हैं। इइतिहास गवाह है कि आतंकियों ने हिन्दू,सिख, इस्लाम आदि की ओट लेकर अपने दुष्कृत्यों को किया है। राम कथा में रावण भी साधु का भेष रख कर सीता को धोखा देता है। आतंकियों के सहयोगी शब्दों को ले उड़ते हैं इसलिए मंत्रियों को शब्द चयन में बहुत सावधानी रखना चाहिए।
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दीपक बाबा on 03 September, 2010 21:16;22
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खंडेलवाल जी, टिपण्णी बॉक्स तो आपके लेख के लिए खोला था ....... पर वीरेंदर जैन साहिब कि टिपण्णी देख कर चोक गए........................
पहेली बार इन्होने कोई पते कि बात बोली है..... पर कहते हैं सात घर तो डायन भी छोड़ देती है....... और मुझे लगता है सातवां घर आपका है.
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rajeev on 03 September, 2010 21:31;25
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चिदंबरम पगला गया है
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sanjay modi on 04 September, 2010 17:47;05
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राजीव भाई ठीक कहा आपने की चिदंबरम पागल हो गए है , मगर उनको इसके इलाज के लिए रांची नहीं भेजना चाहिए नहीं तो जान को खतरा हो जायेगा क्योंकि रांची मओवादिओं के छेत्र में ही आता है.
नपुंसक को गृहमंत्री बनाओगे तो वो सिर्फ ताली ही बजाएगा , वही काम चिदंबरम कर रहा है.
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D.P. on 08 September, 2010 13:55;53
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संजय मोदी को गृह मंत्रालय सौंप दे लगता है ये भारत के सबसे योग्य व्यक्ति है.
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anaam lekhak on 08 September, 2010 16:05;16
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chidanbaram saheb se loi puchhe ki aaj Jhaarakhand men kiska raaj hai?yadi koi kahe ki, GUNDON,MAFIAS,ka to shaayad sahi hoga.ab yahi dekh lijiye ki,beete pakhavaare men kam se kam do aisi ghatanaayen west bengal ke Asansol mahakame men huin jo ki uparokt dhaarana ki hi pushti karati hai.beete saptaah,RANIGANJ P.S. ke tahat ek sthaan par shaam ko karib 6.30baje ek private bollero vaahan men Dhanbad se pulis ke 4 vardidhaari log aate hain aur ek naujavaan ko pakad kar lejaate hain,bina paschim bangal pulis aur sthaaneey thaane ko koi bhi ittala diye.yah to sajog ki hi baat thi ki vahaan par majud logon ne tatkaal hi RANIGANJ thaane ko yah suchana di.Tab kahin jaa kar ub vardi dhaari gundon ko p.bangal pulis ne hathiyaaronki nok par Asansol ke pas roka aur ASANSOL SOUTH P.S. men lejaakar havaalat men daaldiya.jahaan se unki rihaai saath laaye waarant ko dikhane aur Dhanbad se samkash S.P. se pushti ke baad raha kar kathit aaropi ko saath lejaane diya gaya.bataate chalen ki case IPC 302,307,jaisa ganbhir bhi nahin tha.jabaki niyam yah hota hai ki baahar ke pradesh ki pulis bina p.bangal pulis ko bataaye aise kisi bhi aaropi ko girftaar kar saath nahin lejaa sakati.dusri ghatana ASANSOL city ki hai jahan par kiuparokt jaisi hai vaaradat ko jhaarkhand ki behaya,bhrasht,pulis anjaam deti hai.yah baat deegar hai aaropi ek shaatir aparaadhi bataaya jata hai.Raniganj men jan pratirodh se Jhaarakhand pilis ka pala nahin pada tha magar Asansol men 500-600logon ki bheed ne J.Pulis ko gher kar unko maarane pitane par utaaru hogayae the.jinhen Asansol pulis ne mauke par pahunchkar jaan bachaai.Yah to rahi pulis ki baat.vahaan to har shahar ,gaaon men rangadaaron ki chalati hai,15august 1947 ke baad se hi,jaiasa ki bataaya jaata hai.Bihar se Jhaarkhand ko alg hue koi 10baras bitane ko aaye.is bich ganga men bahut paani bah gaya hai.bahut kuchh badala.nahin badali to vahaan ke aadivaasiyon,dalit,pichhade,nirdhan logon ki takadir.vahaan ki khanij sanpada ka dohan kar bahaari aur kaee tathkathit unche tabake ke log khaak pati se karod pati ban gaye.magar aaj bhi aadivaasiyon ko jal,kangal,jameen,ka apana haq nahin mil paaya hai.haa unke kuchh jyada hi padhe likhe,samajhadaar netaaon ko faayad jarur hua.yahi kuchh baaten hain jo ki Jhaarkhand men NAXAL VAAD ko fulane,pampane,ki jameen pradaan ki aur kiye jaa rahin hain.jahaanki santri se lekar mantri par bhrashtaachar ke aarop lag chuke hain.
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image Rajeeva Khandelwal मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में भारतीय जनसंघ के संथापक स्वर्गीय श्री गोवेर्धन दास जी खंडेलवाल जो की संविद शासन काल में मंत्री एवं आपातकाल में मीशाबंदी रहे ! जिनके नेतृत्व में न केवल पार्टी का विकाश हुआ अपितु बैतूल जिले में प्रगति के जो भी आयाम उभरे उन्हें आज भी जनता भूली नहीं है, उनके पुत्र राजीव खंडेलवाल है जिन्होंने वर्ष १९७९-८० में एलएलबी पास करने के बाद पहले सिविल, क्रिमिनल एवं आयकर, विक्रयकर की वकालत प्रारम्भ की । अब आयकर वाणिज्यकर की ही वकालत करते है। सरकार, समाज और संगठन के विभिन्न जिम्मेदरियो को सम्भालते हुए समाज सेवा करने के दौरान सामने आने वाली समाज की विभिन्न समश्याओ को जनता एवं सरकार के सामने उठाने का प्रयास करते है.
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