Home | बात करामात | चलाचली की बेला में चिदम्बरम

चलाचली की बेला में चिदम्बरम

image

भारत गणराज्य के गृह मंत्री पलनिअप्पम चिदम्बरम की रूखसती की बेला आ गई है। एक के बाद एक हर मोर्चे पर नाकामी का सेहरा अपने सर बांधने वाले चिदम्बरम के खिलाफ कांग्रेस में भी अंदर ही अंदर रोष और असंतोष के स्वर खदबदाने लगे हैं।

कांग्रेस के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि चौथी बार कांग्रेस की कमान संभालने वाली राजमाता श्रीमती सोनिया गांधी को बताया गया है कि चिदम्बरम खुद ही पार्टी लाईन के खिलाफ जाकर अल्पसंख्यकों और कांग्रेस के बीच बनी दूरी को पाटने के बजाए उसे गहरा करने का ही उपक्रम कर रहे हैं। पार्टी के महासचिव राजा दिग्विजय सिंह, सलमान खुर्शीद आदि ने चिदम्बरम के खिलाफ खुला मोर्चा खोल रखा है। उधर वन्य जीव और पर्यावरण के नए पहरूआ बनकर उभरे वन एवं पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने नियमागिरी की पहाडियोंमें वेदांता पर रोक लगाकर चिदम्बरम की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मुंबई में हुए अब तक के सबसे बड़े आतंकी हमले के उपरांत कुर्सी संभालने वाले गृह मंत्री के कार्यकाल में नक्सलवाद, अलगाववाद, माओवाद, आतंकवाद का नया चेहरा सामने आया है। नक्सलवादियों ने जहां एक ओर बर्बरता का नया इतिहास लिखा है, वहीं सरकार इन सभी पर काबू पाने में असफल ही रही है। माना जा रहा है कि जल्द ही सोनिया गांधी सरकार में कांग्रेस के मंत्रियों के पत्ते फेंटने वाली हैं, और उसमें चिदम्बरम के स्थान पर कोई दूसरा शख्स गृह मंत्रालय की कमान संभाल सकता है।

सरकार के मुंह पर रहमान का साढ़े पांच करोड़ का तमाचा
कामन वेल्थ गेम्स की तैयारियों में भ्रष्टाचार की गूंज चारों ओर जमकर मची हुई है। कांग्रेसनीत संप्रग सरकार के प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह कह रहे हैं कि इसे राष्टन्न्ीय पर्व के तौर पर देखा जाना चाहिए। कांग्रेस कहती है कि भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच गेम्स के उपरांत की जाएगी, तब दोषियों को सजा दिलाई जाएगी। कामन वेल्थ गेम्स के बिगडने से दुनिया भर में भारत की छवि क्या बनेगी इसकी चिंता है सरकार और कांग्रेस को। गेम्स के लिए थीम सांग बनाने हेतु आस्कर विजेता ए.आर.रहमान को साढ़े पांच करोड़ रूपए का पैकेज दिया गया था, कि वे वक्का वक्का से बेहतर सांग तैयार करें। रहमान ने गाना तैयार किया, गाना गया गया, पर सभी के चेहरों पर लटकी मायूसी साफ जाहिर कर रही थी कि ए.आर.रहमान ने सरकार के मुंह पर साढ़े पांच करोड़ रूपए का जबर्दस्त तमाचा जड़ दिया है। कहते हैं कि उद्यघाटन समारोह को गरिमामय और आकर्षक बनाने के लिए अब किंग खान यानी शाहरूख को न्योता देने की तैयारियां की जा रही हैं। शाहरूख खान को बुलाने का मतलब जनता की जेब पर एक बार फिर डाका डालकर करोड़ों रूपए निकालना। अरे भई अगर थीम सांग पसंद नहीं आया तो दूसरा बनवाया जाए या फिर आयोजन समिति से इसकी राशि वसूली जाए!limty.jpg

तेरा तुझको अर्पण, का लागे मोरा
सरकार इस बात पर संतोष जता रही है कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास का रथ द्रुत गति से दौड़ रहा है, पर जमीनी हकीकत इससे उलट ही नजर आ रही है। नक्सलवादी नेताओं का मानना है कि अगर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास की किरण प्रस्फुटित हो जाएगी तो उनका अस्तित्व ही संकट में पड़ जाएगा। यही कारण है कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास की किरण अब तक नहीं पहुंच सकी है। नक्सलवादियों द्वारा सरकार के द्वारा इस क्षेत्र के विकास के लिए भेजी जाने वाली इमदाद को हड़पकर उसका उपयोग सरकार के खिलाफ ही मोर्चा खोलने में किया जा रहा है। अपनी गतिविधियों को संचालित करने के लिए नक्सलवादियों को धन की आवश्यक्ता होती है, और कहा जा रहा है कि यह धन नक्सलवादियों द्वारा सरकार की योजनाओं पर सीधे सीधे डाका डालकर ही जुगाड़ा जा रहा है। सच ही है तेरा तुझको अर्पण का लागे मोरा।

मालू की अभिनव पहल
मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के इंजीनियरिंग सेल के प्रदेशाध्यक्ष प्रसन्न चंद मालू ने एक अभिनव पहल की है, जिसकी प्रशंसा मुक्त कंठ से होना चाहिए। मूलतः सर गोविंदराम सक्सेरिया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नालाजी एण्ड साईंस इंदौर (जीएसटीआई) से पास आउट प्रसन्न मालू द्वारा सिवनी जिले के निर्धन बच्चों के लिए इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए निशुल्क वातावरण बनाया जाना प्रशंसनीय कहा जाएगा। प्रसन्न मालू द्वारा अपने सहपाठी सुनील डांडीर जो कि टन्नबा इंजीनियरिंग कालेज भोपाल के प्रबंध निदेशक हैं, से अनुरोध किया कि सिवनी जिले के गरीब प्रतिभावान बच्चों को उनके इंजीनियरिंग कालेज में निशुल्क अध्ययन की सुविधा प्रदान करे। मालू के अनुरोध को डांडीर ने स्वीकारा और पहले दो फिर बाद में पांच बच्चों को निशुल्क तौर पर अपने कालेज में अध्ययन हेतु निशुल्क व्यवस्था प्रदान कर दी। प्रसन्न मालू की तरह सिवनी में अनेक संपन्न लोग होंगे जिनके संपर्क में न जाने कितने कालेज, स्कूल के संचालक होंगे पर किसी ने भी सिवनी के बच्चों के हित में इस तरह की बात नहीं सोची होगी। सिवनी के संपन्न लोगों को प्रसन्न मालू की सकारात्मक सोच से प्रेरणा लेकर और भी बच्चों के सुनहरे भविष्य के मार्ग प्रशस्त करना चाहिए।

कांग्रेस अध्यक्ष पद पर राजमाता का कापीराईट
सवा सौ साल पुरानी और भारत गणराज्य पर आधी सदी से ज्यादा राज करने वाली कांग्रेस पर आजादी के उपरांत नेहरू गांधी परिवार की छाया जबर्दस्त तरीके से पड़ी है। जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी, संजय गांधी, राजीव गांधी, सोनिया गांधी और फिर राहुल गांधी के इर्द गिर्द ही कांग्रेस की धुरी घूमती रही है। कांग्रेस में की पोस्ट पर सदा ही गांधी नेहरू परिवार के सदस्य का जलजला रहा है। दरी और झंडे उठाने वाले कांग्रेसी उमर दराज होकर अपनी कमर झुका चले पर उन्हें उनकी निष्ठा का फल कभी भी नहीं मिला। कांग्रेस में गणेश परिक्रमा करने वाले नेताओं को ही सम्मान और पद से नवाजा जाता रहा है। विश्व की ताकतवर महिलाओं में शुमार कांग्रेस की राजमाता श्रीमति सोनिया गांधी 1998 से लगातार कांग्रेस अध्यक्ष पद पर काबिज हैं। देखा जाए तो उन्हें तीसरी बार अपना कार्यकाल पूरा करने के बाद नैतिकता के नाते ही सही इस पद को त्याग देना चाहिए था। कहा जा रहा है कि अभी वे एक दशक तक और इस पद पर बनी रहेंगी, ताकि कांग्रेस की नकेल नेहरू गांधी परिवार के हाथों में ही रहे।

युवराज ने जाना रियाया का हाल
कांग्रेस की नजर में भविष्य के प्रधानमंत्री और कांग्रेस के महासचिव राहुल गांधी ने अपने संसदीय क्षेत्र अमेठी की ओर रूख किया है। कई माह बाद युवराज को अपनी रियाया के बारे में जानने की सूझी है। बताते हैं कि अपने अघोषित राजनैतिक गुरू कांग्रेस महासचिव राजा दिग्विजय सिंह के मशविरे के बाद राहुल गांधी ने अपने संसदीय क्षेत्र में दिलचस्पी लेना आरंभ कर दिया है। दरअसल राहुल गांधी और सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र की बदहाली को विपक्ष द्वारा मुद्दे के तौर पर तैयार करवाना आरंभ कर दिया है, जिससे आने वाले समय में कांग्रेस की राजमाता और युवराज को होने वाली परेशानी के मद्देनजर राजा दिग्विजय सिंह ने अमेठी वासियों के दुखदर्द को अपना दुखदर्द बनाने का मशविरा दे दिया है। हाल ही में एक महिला की फरियाद पर राहुल गांधी ने उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले के मुसाफिर खाना कोतवाली जाने के साथ ही साथ पुलिस से कार्यवाही की गुजारिश की। राहुल गांधी द्वारा जिस शालीनता से पुलिस के साथ व्यवहार किया उससे कोतवाली में उपस्थित पुलिस कर्मी प्रभावित हुए बिना नहीं रहे।

विकलांग मंत्रालय बनाने की सिफारिश
मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष के.जी.बालकृष्णन ने देश में विकलांगों के लिए प्रथक से एक मंत्रालय बनाने की सिफारिश की है। बालकृष्णन का कहना है कि विकलांगों के लिए नियम कायदे तो बहुतेरे बन चुके हैं किन्तु वे कानून जमीनी स्तर पर लागू हुए हैं या नहीं इस बारे में सुध लेने की फुर्सत किसी को भी नहीं है। देश भर के लगभग सवा दो करोड़ विकलांग लोगों के लिए बने कानूनों में ढिलाई बरतने पर राज्य सरकारों के प्रति अपनी तल्ख नाराजगी जाहिर करते हुए बालकृष्णन ने कहा कि विकलांगों के हितों को ध्यान में रखकर बनाए गए कानूनों को लागू करने के लिए प्रभावी निगरानी प्रणाली को विकसित किया जाना आवश्यक है। बालकृष्णन का मानना सही है कि अधिकांश विकलांग गरीब और असहाय तबके से हैं, अतः इसके लिए प्रथक से मंत्रालय बनाया जाकर कानून का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। बालकृष्णन का कहना है कि समाज भी इनके प्रति पूर्वाग्रह से ही ग्रसित नजर आ रहा है।

पीलीभीत में नहीं है गांधी प्रतिमा
राष्ट्रपिता मोहन दास करमचंद गांधी को महात्मा गांधी की उपाधि ऐसे ही नहीं दी गई थी। बापू ने आधी लंगोटी में उघारे बदन ही ब्रितानियों को खदेड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। नेहरू गांधी परिवार का अभिन्न अंग रहीं मेनका गांधी और वरूण गांधी का पीलीभीत से लगाव किसी से छिपा नहीं है। आपको यह जानकर अश्चर्य होगा कि पीलीभीत जिला मुख्यालय देश का इकलौता ऐसा जिला मुख्यालय है जहां महात्मा गांधी की एक भी प्रतिमा मौजूद नहीं है। पीलीभीत में बापू के नाम पर दो सभागार और एक स्पोर्टस कांपलेक्स अवश्य ही है। पूर्व कलेक्टर और वर्तमान कांग्रेसी नेता इंदु प्रकाश एरन ने यहां गांधी स्टेडियम की स्थापना करवाई किन्तु प्रतिमा का प्रस्ताव था ही नहीं। अब गांधी की प्रतिमा लगना और भी दुष्कर हो गया है क्योंकि यूपी गर्वनर्मेंट ने किसी भी महापुरूष की प्रतिमा या मूर्ति स्थापना के पूर्व अनुमति की बाध्यता को लागू कर दिया है। पीलिभीत देश का संभवतः इकलौता जिला होगा जहां बापू की प्रतिमा ही नहीं लगी हो।

बिग बी का अंग्रेजी डर!
भारत पर राज करने वाले ब्रितानियों का डर उस वक्त के हर भारतवासी के मन में था। आजादी के बाद शनैः शनैः वह डर समाप्त हो गया। सदी के महानायक अमिताभ बच्चन को अंग्रेज नहीं पर उनके द्वारा बोली जाने वाली अंग्रेजी भाषा का डर जबर्दस्त तरीके से सताता रहा है। ‘नमक हलाल‘ सिनेमा में अवश्य ही दर्शकों ने अमिताभ बच्चन को ‘‘आई केन टाक इन इंगलिश, आई केन वाक इन इंगलिश, आई केन लाफ इन इंगलिश, बिकाज इंगलिश इज ए वेरी फनी लेंग्वेज‘‘ बोलते हुए सुना होगा, किन्तु बिग बी अंग्रेजी से बहुत ही खौफ खाते थे। अपने ब्लाग पर अमिताभ लिखते हैं कि वे एक जमाने में अंग्रेजी ग्रामर से बहुत ही डरा करते थे। इसी कारण से उन्होंने कालेज में बीए आनर्स ें अंग्रेजी में दाखिला लेने से इंकार कर दिया था। अब भले ही अमिताभ द्वारा फर्राटेदार अंग्रेजी में लोगों से बातचीत की जाती हो पर सच्चाई यह है कि स्कूल कालेज के जमाने में बिग बी को अंग्रेजी से बहुत ही ज्यादा डर लगा करता था।

पीएम लांघने वाले थे खर्च की निर्धारित सीमा
ख्यातिलब्ध पत्रकार खुशवंत सिंह ने अपने 95 साल के जीवन में राजनैतिक तौर पर न जाने कितने उतार चढ़ाव देखे होंगे। राजधानी दिल्ली के वाशिंदे होने के कारण सत्ता को भी उन्होने काफी करीब से देखा। सत्ता को चलाने वालों ने भी खुशवंत सिंह के साथ गलबहियां डाली होंगी, इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है। खुशवंत सिंह की हाल ही में बाजार में आई किताब ‘एब्सेल्यूट खुशवंत: द लो डाउन आन लाईफ, डेथ एंड मोस्ट थिंग्स इन बिटवीन‘, में वे लिखते हैं कि प्रधानमंत्री ने 1999 में उनसे चुनाव के दौरान टेक्सियों के किराए के लिए दो लाख रूपए नकद लिए थे, यह राशि पीएम के दमाद ने खुशवंत सिंह से ली थी। चुनाव हारने के बाद मनमोहन सिंह ने राशि को खुशवंत सिंह को लौटा दिया। सवाल यह उठता है कि 1999 में अगर महज टेक्सियों के लिए ही दो लाख रूपए खर्च करने की योजना हो तो चुनाव पर कुल कितना व्यय किया होगा मनमोहन सिंह ने उस वक्त। क्या इस तरह के खर्च चुनाव में खर्च की निर्धारित सीमा को पार नहीं किया होगा?

Subscribe to comments feed Comments (0 posted):

total: | displaying:

Post your comment comment

Type in Hindi (हिन्दी में कमेन्ट करने के लिए यहां रोमन में लिखिए यह अपने आप हिन्दी में बदल देगा.)

Title :
Body
Powered by Vivvo CMS v4.1.2
Share |
  • email Email to a friend
  • print Print version

ईमेल से विस्फोटः अपना ईमेल यहां भरें और सब्सक्राइब करें:

Delivered by FeedBurner

Author info
image लिमटी खरे लिमटी खरे की खबरें देश के कई अखबारों में छपती हैं. दिल्ली में रहकर स्वतंत्र पत्रकारिता लेखन और विभिन्न मीडिया स्कूलों में पढ़ाते भी हैं. लिमटी की लालटेन नाम से विस्फोट.कॉम में नियमित लिमटी की लालटेन नामक स्तंभ लेखन. limtykhare@gmail.com
Rate this article
0
More from बात करामात
Previous
image
अजमेर चार्जशीट और संघी उछल-कूद
बढ़ते पैमाने पर इसके साक्ष्य सामने आ रहे हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर एस एस) से जुड़े लोगों का आतंकवादी हमलों में हाथ रहा है। इन हालात में आर एस एस इस पुराने सूत्र पर चल रहा लगता है कि हमला ही सबसे अच्छा बचाव है। उसने 10 नवंबर को देशव्यापी विरोध कार्रवाइयों का आह्वान किया है। इन कार्रवाइयों में संघ के शीर्ष नेताओं के शामिल होने की बात कही जा रही है। बहरहाल, इसकी चर्चा हम जरा बाद में करेंगे।...
image
खुद ही खुदा बनने चला संघ
आर एस एस ने अब शायद बी जे पी को हाशिये पर लाने का मन बना लिया है .अपनी आबरू बचाने के लिए १० नवम्बर को आरएसएस के नेता खुद सडकों पर उतरेगें और धरना प्रदर्शन करेगें . उनकी शिकायत है कि यूपीए सरकार संघी आतंकवाद के ब्रैंड को प्रचारित करने में लगभग कामयाब हो गयी है और बीजेपी वाले कोई भी राजनीतिक पहल नहीं कर रहे हैं. नाराज़ संघी नेतृत्व अब खुद ही मैदान ले रहा है ....
image
शाबाश ओबामा, पहले दिन ही दस अरब डालर का बिजनेस
अपने भारत दौरे के पहले दिन ही बराक ओबामा दस अऱब डालर का बिजनेस कर गए। बेशक भारत को कुछ न मिले। पर भारत ओबामा को काफी कुछ देगा। भारत अमेरिकी बेरोजगारी को दूर करेगा। बेशक आतंकी हमलों से संबंधित भाषण में ओबामा ने पाकिस्तान का नाम नहीं लिया, पर भारत ने अपनी सेवा में कोई कसर नहीं छोड़ी। भारत सरकार और भारत के प्राइवेट कारपोरेट ने ओबामा को खुश कर दिया है। चीन से परेशान बराक ओबामा को भारत दौरे से राहत मिली है।...
image
भारत के रुख से चीन बेचैन
इस समय चीन बैचेन है। बैचेनी का कारण भारत की विस्तारवादी विदेश नीति है। इस विदेश नीति के तहत भारत ने उन देशों से दोस्ती बढ़ानी शुरू कर दी है, जो देश चीन से किसी न किसी मसले पर भीड़े है। चीन काफी बैचेने से भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की हाल ही में हुई विदेश यात्रा और बराक ओबामा का नवंबर के दूसरे सप्ताह में होने वाली दक्षिण एशिया की यात्रा पर नजर रखे है। भारतीय प्रधानमंत्री की जापान, मलेशिया, दक्षिण कोरिया, वियतनाम यात्रा की आलोचना चीनी अखबार पीपुल्स डेली कर रहा है। जबकि ओबामा की यात्रा को भी चीनी अखबार विस्तारवादी यात्रा बता रहा है।...
image
चड्ढी पहन के फूल खिलाने वाले उपेक्षित
छत्तीसगढ़ के सन्दर्भ में कुछ साल पहले ‘ विकास बनाम संस्कृति ’ पर चर्चा करते हुए डा. रमन सिंह ने एक बड़ी अच्छी बात कही थी. बकौल डा. सिंह ‘आखिर कब तक आप संस्कृति के नाम पर गरीब आदिवासियों के सिर पर सिंह लगा उन्हें नचाते रहेंगे ? उनको भी विकास और समाज की मुख्यधारा में शामिल होने का अवसर दीजिए.’ तो ज़ाहिर सी बात है कि अगर हम प्रदेश को बदलते वैश्विक परिवेश के अनुसार आगे बढते और विकसित प्रदेश के रूप में उसकी पहचान बनाना देखना चाहते हों तो हमें नवाचार को बढ़ावा देना होगा....
image
बस, एक सरदार चाहिए कश्मीर के लिए!
कश्मीर समस्या ने इस मिथक को भी तोड़ दिया की विकास की योजनाओं और बुनियादी अवशक्ताओ की पूर्ति से किसी भी समस्या का हल ढूंढा जा सकता है ,कश्मीर में वो सब प्रयास विफल रहे है। वो हाथ जो डल झील में नाव चलाते थे, अब पत्थर-बाजी में शरीक है। इन स्थितियों में तो ऐसा लगता है काश आज सरदार पटेल के कद और राजनीतिक दृढता वाला कोई नेता देश में होता तो अब तक ये विवाद कब का हल हो गया होता। ...
image
शुक्र मनाओ कि तुम भारत में हो अरुंधती
भारतीय समाज में बुद्धजीवी का दर्जा पा चुकी अरुंधती रॉय ने कहा है कि कश्मीर कभी भी भारत का अभिन्न हिस्सा रहा ही नहीं है. गिलानी दिल्ली में सेमिनार में कह रहें है कि उन्हें आज़ादी से कम कुछ भी नहीं चाहिए. गिलानी अगर ऐसी बात कहें तो कोई हैरानी नहीं होती लेकिन अरुंधती ऐसा कहें तो आश्चर्य होता है. हालांकि इसके पहले भी अरुंधती रॉय एक ऐसा ही बयान दे चुकी हैं. तब उन्होंने मावोवाद का समर्थन किया था. कश्मीर को भारत का अभिन्न हिस्सा ना मानने सम्बन्धी बयान वहां पर अपनी जान कि बाज़ी लगा रहे जवानों के लिए एक तमाचा है. साथ ही शेष देश के लोगों के लिए क्षोभ और शर्मिंदगी की वजह है....
image
आइये अरुंधती को लानत भेंजे
उसका बस चले तो वो हिंदुस्तान के सिर्फ इसलिए टुकड़े टुकड़े कर दे क्यूंकि ऐसा करने से वो भीड़ से अलग नजर आएगी। उसके पास हत्याओं को वाजिब ठहराने के तमाम तर्क हमेशा मौजूद रहते हैं ,क्यूंकि इसे वो खुद को महान साबित करने का औजार समझती है। संभव है इसके बहाने वो नोबेल पुरस्कार पाने की कोशिश कर रही हो। वो वामपंथ का ऐसा क्रूर चेहरा है जिसका इस्तेमाल मीडिया कभी अपनी टीआरपी बढाने में तो कभी व्यवस्था के विरुद्ध अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए करता है। संभव है बहुतों को उससे मोहब्बत हो लेकिन हम अरुंधती को लानत भेजते हैं क्योंकि उसे राष्ट्र के अस्तित्व से नफरत है।...
image
टुम बोले टुम बोले हम टो टुप्पई टाप!
पुरानी कहानी है कि एक परिवार के तीन तोतलों की शादी नहीं हो पा रही थी। पिता ने हिदायत दी कि इस बार जो लडकी वालों के सामने बोलेगा उसको घर से निकाल दिया जाएगा। लकड़ी वाले आए, बडे बोला -‘पितादी ती बात याद है न।‘‘ मंझला बोला -‘‘टुप्प भईया।‘‘ छोटा बोल उठा -‘‘टुम बोले टुम बोले हम टो टुप्पई टाप!‘‘ इस तरह तीनों की पोल खुल गई। कांग्रेसनीत केंद्र सरकार में भी कमोबेश एसा ही कुछ होता दिख रहा है।...
image
संघ को बदनाम करने की कांग्रेसी साजिश
राजस्थान सरकार के आतंकवाद विरोधी दस्ते ने अजमेर दरगाह शरीफ पर कुछ साल पहले हुूए बम धमाके के मामले में कुछ तथाकथित अभियुक्तों के खिलाफ अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया है। इस आरोप पत्र में जिन आरोपियों को नाम हैं उनमें इन्द्रेश कुमार का नाम नहीं है। यहां तक का किस्सा सामान्य जांच प्रक्रिया का अंग है। परंतु उसके बाद की कहानी राजनैतिक कहानी है।...
image
सामी नहीं, कांग्रेस के मुंह पर कालिख
कहने के लिए भले ही छत्तीसगढ़ कांग्रेस में केंद्रीय राज्य मंत्री वी नारायण सामी पर कालिख फेंके जाने का मुद्दा शांत होता दिख रहा हो लेकिन इसकी गूंज अभी लंबे समय तक सुनाई देगी। हकीकत यह है कि यहां कांग्रेस की गुटबाजी को आलाकमान अपना पूरा दम लगाकर भी शांत नहीं कर सकता। प्रभारी के रूप में सामी की यहां यह दूसरी बार फजीहत हुई है। मंगलवार को पीसीसी प्रतिनिधियों की बैठक में जब महज एक लाइन का प्रस्ताव पारित करवाने के लिए सामी यहां पहुंचे थे तो कांग्रेस भवन के बाहर ही उन पर काली स्याही फेंकी गई जो उनके चेहरे और कपड़े पर होते हुए उनके साथ कार से उतरे शहर कांग्रेस अध्यक्ष इंदरचंद धाड़ीवाल पर भी पड़े।...
image
अब देखिए राजनीति का कॉमनवेल्थ
कॉमनवेल्थ घोटाले की कड़ी से कड़ी जुडऩे लगी। पहले दिन बीजेपी नेता सुधांशु मित्तल निशाने पर रहे, तो दूसरे दिन खेल गांव बनाने वाली कंपनी एम्मार-एमजीएफ का खेल बिगड़ गया। डीडीए के पास जमा 183 करोड़ की बैंक गारंटी जब्ती का नोटिस जारी हो गया। पर अभी तो सिर्फ ठेका लेने वाली कंपनियों पर शिकंजा कसा। यक्ष प्रश्न, ठेका देने वाले नौकरशाहों-नेताओं ने कितना खाया, इसकी परतें कब उधड़ेंगी? अब ठेकेदारों पर कार्रवाई में तेजी दिखाने से क्या होगा? ठेकेदार तो अपना टेंडर भरते। यह तो देने वाले पर निर्भर, किस कंपनी को ठेका दे। सो सवाल, ठेका देते वक्त नौकरशाहों-नेताओं ने होश क्यों गंवाया?...
image
अब शुरू हुआ असली खेल
कॉमनवेल्थ खेलों के लिए लगाये गये टेन्ट, तंबू कनात उखड़ गये हैं. लेकिन असली खेल उसके बाद शुरू हुआ है. भारतीय जनता पार्टी बनाम कांग्रेस के इस खेल में राजनीति का स्वर्ण पदक कौन हासिल करेगा यह कहना मुश्किल है लेकिन जो खुलासे होंगे वे यह साबित कर देंगे कि खेल भारतीय राजनीति में पर्दे के पीछे असली समाजवाद कायम है. अगर भाजपा की सरकार में कांग्रेसी सुरेश कलमाड़ी कामनवेल्थ खेलों के लिए अगुआ बने रहते हैं तो कांग्रेस की सरकार में आठ सौ करोड़ का ठेका भाजपा के हितैषी सुधांशु मित्तल को मिल जाता है. ...
image
बताओ भला, सीएजी शीला और कलमाड़ी का क्या बिगाड़ लेगी?
कॉमनवेल्थ के आयोजक सफलता की खुमारी में हैं तो देश की जनता विजयादशमी के जश्न में डूबी है, ऐसे में रामायण के एक प्रसंग का जिक्र लाजिमी होगा। जब भगवान राम लंका पर फतह कर अयोध्या लौटे। राज्याभिषेक हो गया तब सिर्फ एक धोबी की टिप्पणी सुन राम ने अग्नि परीक्षा दे चुकी सीता को तज दिया था। पर कॉमनवेल्थ के आयोजकों पर न जाने कितने आरोप लग चुके, फिर भी किसी ठोस कार्रवाई की उम्मीद बेमानी। पहले भी जांच हुई, रपटे आईं लेकिन उन्हीं शीला दीक्षित ने सीएजी को ठेंगा दिखा दिया जिनके खिलाफ अब कामनवेल्थ खेलों में भ्रष्टाचार के खिलाफ जांच करने की बात कही जा रही है....
image
काश हर मस्जिद की खिडकी मंदिर में खुलती
6 दिसंबर, 1992 को जब विवादित ढांचा ढहाया गया, तब मैं जवान हो रहा था। बारहवीं में था। पिताजी उन दिनों बुलंदशहर में बतौर अध्यापक तैनात थे। हम सब उनके साथ ही रह रहे थे। दंगे भडक चुके थे। हमने छत पर चढकर दूर मकानों से उठती लपटों की आंच महसूस की थी। मौत के खौफ से बिलबिलाते लोगों की चीखें सुनी थीं। हैवानियत का नंगा नाच देखा था। 'जयश्री राम' और 'अल्लाह ओ अकबर' के नारों में भले ही ईश्वर और अल्लाह का नाम हो, लेकिन तब उन्हें सुनकर रीढ़ में बर्फ-सी जम जाती थी।...
image
ऐसे आदमी का सियासत में क्या काम?
कहां इकबाल,गालिब व फैज का शौक और कहां सियासत! जो भी हो पर पंजाब के कमजोर आर्थिक पक्ष व सियासत की गफलत में पंजाब के पूर्व वित्त मंत्री (निलंबन के दूसरे दिन उन्हें पूर्व भी कर दिया गया है) मनप्रीत सिंह बादल पंजाब के उन अहम से मारे सियासतदानों से बिल्कुल अलग है जो सियासतदान गनमैनों के लाव लश्कर के बिना चलना अपनी तौहीन समझते हैं।...
image
आरटीआई का दिल है इंटरनेट
इन्टरनेट आरटीआई का दिल है, यह बात किसी आईटी प्रोफेसनल या इन्टरनेट सर्विस प्रोवाइडर द्वारा अथवा ईमेल सेवा प्रदाता कंपनी ने नहीं कही, बल्कि ऐसे शख्स श्री वजाहत हबीबुल्लाह ने कही, जो केन्द्रीय सूचना आयोग के मुख्य सूचना आयुक्त रहे हैं। जिस कार्यक्रम में मुख्य सूचना आयुक्त ने दिल की बात दिल से जोड़कर कही, उस कार्यक्रम में मैं भी मौजूद था। मैंने कार्यक्रम में आये भारत के विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों व अन्य देशों से आये विषय विशेषज्ञों से आरटीआई को इन्टरनेट के जरिए प्रोत्साहित करने की बात कही।...
Next
Tags
No tags for this article
सर्वाधिकार (अ)सुरक्षित

विस्फोट.कॉम में प्रकाशित सामग्री पर हमारी ओर से कोई कापीराइट नहीं है.

Powered by Vivvo CMS v4.1.2