Home | बात-करामात | एक शेरनी सौ लंगूर - चिकमगलूर-चिकमगलूर

एक शेरनी सौ लंगूर - चिकमगलूर-चिकमगलूर

Font size: Decrease font Enlarge font 1921
image

कांग्रेस को आगामी लोकसभा चुनाव में ‘जय हो’ में अपनी विजय दिखाई पड़ रही है। स्लमडाग मिलेनियर का आस्कर लेप चढ़ा यह गाना मशहूर क्या हुआ कि कांग्रेस ने उसे अपने हाथ की भाग्य रेखा समझ लिया। उसमें उसे अपनी मुक्ति का रास्ता दिखाई पड़ा। हरेक चुनाव उत्सव में कोई न कोई नारा रंग पकड़ता है। हालांकि यह गाना पहले ही लोगों की जुबान पर चढ़ा था जो पूरी दुनिया को एक झटके में नाप गया। लेकिन यह नारा चुनावी वोटिंग मशीन में कांग्रेस की बटन दबा पाएगा यह समय बताएगा।

कांग्रेस के मुकाबले भाजपा ने मजबूत नेता, निर्णायक सरकार का जैसा गंभीर नारा दिया। उसके नेता है लालकृष्ण आडवाणी। जाहिर है। ‘शाइनिंग इंडिया’ और ‘फील गुड’ से जली भाजपा ने छाछ फूंक कर और अपने नेता के व्यक्तित्व के हिसाब से नारा बांधा। विज्ञापन व तकनीक के युग ने हरेक क्षेत्र में दस्तक दी है। राजनीतिक तामझाम भी उससे अछूती नहीं रहा। पिछले लोकसभा चुनाव में विज्ञापन एजेंसियों की सलाह पर भाजपा ने इंडिया शाइनिंग और फील गुड की पूछ पकड़ कर जनता के बीच गई तो जनता ने उससे राम-राम कर ली। यह नारा चुनाव के बीच में ही दम तोड़ गया था।

भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार लालकृष्ण आडवाणी कई बार अफसोस जता चुके हैं कि वह नारा गलत था जो भाजपा और भारत की छवि के प्रतिकूल था। समझा जाता है कि कुछ वरिष्ठ पत्रकारों ने चुनाव के कवर करने के दरम्यान तबके प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से पूछा कि इंडिया शाइनिंग कहीं नहीं दिखी, जमीनी नेता वाजपेयी का सहज जवाब था कि भले ही कहीं शाइनिंग न दिखे पर उनकी पार्टी के दक्षिण के एक नेता के मस्तक पर शाइनिंग ही शाइनिंग है।

तकनीक चुनावी रणनीति तय कर रही है। संदेश से लेकर प्रचार-प्रसार सब उसके सहारे। लेकिन नारों की अनदेखी नहीं की जा सकती क्योंकि चुनावी फड़ फाइट से ही लड़ा जाता है। नारा उसकी धुरी बनता है। कई बार यह अपना अनोखा असर दिखाता है और देखते-देखते संजीवनी का काम करने लगता है। वहीं कई बार इंडिया से निकले इंडिया शाइनिंग सरीखा नारा उन तंग गलियों में नहीं पहुंच पाता जहां भारत बसता है। इस चुनाव में कांग्रेस इंडिया शाइनिंग की तर्ज पर जनता को जय हो में रंगना चाह रही है।

वहीं यह कहने वाले राजनीतिक पंडितों की कमी नहीं कि जय हो- बेरोजगारी, जय हो-गरीबी, जय हो-असुरक्षा, जय हो सोनिया-राहुल के चाटुकारों की। लेकिन कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनुसंघवी ने जब स्लमडाग मिलेनियर को आस्कर मिलने पर इसे अपनी सरकार की उपलब्धि बताया तो उनको क्या मालूम कि यूरोपीय देशों में इंडियन को इंडियन डाग कहा जाने लगा है। सोनिया की यूपीए की यह समुद्र पार उपलब्धि है। इसी कांग्रेस के दिवंगत नेता व मशहूर साहित्यकार श्रीकांत वर्मा 1971 में तबकी प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से मिलने गए। गांधी बैठक में थी और वर्मा को इंतजार करने को कहा गया। चुनावी बिगुल बज चुका था। इंतजार के क्षणों में वर्मा को बौद्धिक तेजा पनपा और उन्होंने एक कागज के टुकड़े पर लिखा कि ‘वे कहते हैं कि इंदिरा को हटाओ, मैं कहती हूं गरीबी हटाओ’। यह नारा उस समय के विपक्षी महागठबंधन के इंदिरा हटाओ, देश बचाओ पर भारी पड़ा। कांग्रेस ने उनको पछाड़ दिया था।

आपातकाल के दरम्यान और उसके हटने के बाद एक नारा जनता की जुंबा पर चढ़ गया ‘सिंहासन खाली करो की जनता आती है’। राष्ट्रकवि रामाधारी सिंह दिनकर की कविता की इस लाइन ने 18 जनवरी 1977 को प्रयाग में महाकुंभ में जोश भर दिया था। इस दिन आपातकाल हटाने की घोषणा हुई थी। दिनकर की यह लाइन ऐसी चली की नई नवेली जनता पार्टी ने कांग्रेस को ट्रैक से उतार दिया। जनता शब्द जनता पार्टी और नारा दोनों में था। इंदिरा का सिंहासन डोल गया और उस पर जनता पार्टी ने कब्जा किया। मोरारजी देसाई बने देश के प्रधानमंत्री। कुछ समय में जनता पार्टी जनता के हवाले हो गई।

1980 में कांग्रेस ने विपक्ष के ‘इंदिरा हटाओ, देश बचाओ’ को उलटकर जोर लगाया कि ‘इंदिरा लाओ, देश बचाओ’। इसने जादू का काम किया। इंदिरा गांधी देश की प्रधानमंत्री बन गई। लेकिन उसके पहले 1979 में गांधी के लिए कर्नाटक के कांग्रेस सासंद वीरेंद्र पाटिल ने अपनी चिकमंगलूर सीट छोड़ दी। उपचुनाव में कांग्रेसियों का नारा था, ‘एक शेरनी सौ लंगूर - चिकमंगलूर-चिकमंगलूर’। लेकिन यह नारा चिकमंगलूर से निकलकर देश भर में छाया गया। उसके बाद 1985 के चुनाव में इंदिरा की हत्या के कारण कोई नारा नहीं था और राजीव गांधी ने प्रचंड बहुमत से सरकार बनाई। लेकिन उनके शासन में बोफोर्स कांड को लेकर जब वीपी सिंह जनता के बीच निकले तब यह नारा खूब चला कि राजा नहीं फकीर है जनता की तकदीर है। फकीर ने राजीव को सत्ता से बेदखल कर दिया और ‘जय श्री राम’ ने फकीर को राजनीति में फकीर बना दिया। जय श्री राम ने भारतीय जनता पार्टी को देश की केंद्रीय राजनीति में स्थापित कर दिया और 1998 में केंद्र में उसकी अगुवाई में पहली बार सही मायने में गैर-कांग्रेसी सरकार बनी जिसके नेता थे अटल बिहारी वाजपेयी। कहा जा सकता है कि अटल का नाम अटल से बड़ा है। नारा लगता था ‘सब पर अटल बिहारी, अबकी बारी अटल बिहारी’। भाजपा का एक नारा और चला कि ‘सबको परखा बार-बार, हमको परखो एक बार’। लेकिन यह नारा किसी ऐजेंसियों से नहीं आए थे, इसलिए जनता को दिलों को आसानी से छूते और आसन्न प्रभाव दिखाते। लेकिन भाजपा पर तकनीक और एजेंसियों का जादू चढ़ने लगा और उसकी शाइनिंग में भारत कहीं खो गया। इसलिए पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का नारा काफी सहज था। ‘कांग्रेस का हाथ आम आदमी के साथ’

आपातकाल से पहले समाजवादियों से ज्यादा भय इंदिरा गांधी को भाजपा की पूर्ववर्ती जनसंघ से लगता था। समाजवादियों के बारे में सबकी तरह उनका भी ख्याल था कि समाजवादी बिछड़ने के लिए मिलते और मिलने के लिए बिछड़ते हैं। तब जनसंघ का चुनाव चिन्ह दीपक होता था। कांग्रेस का नारा था कि ‘इस दीपक में तेल नहीं, सरकार चलाना खेल नहीं’। कई चुनावों तक दीपक बुझा ही रहा। दीपक का स्थान बाद में कमल ने लिया जिसे राम ने खिला दिया। आंदोलनों के दौर में समाजवादियों की यह चिंघाड़ यदाकदा जनता को हिलाने की कोशिश करती थी कि ‘जिंदा कौमे पांच साल इंतजार नहीं करती’। लेकिन आंदोलनों के दौर का एक महत्वपूर्ण राम जन्मभूमि आंदोलन जिसको वाजपेयी राष्ट्रीय भावनाओं का प्रकटीकरण कहते रहे हैं, ने सही मायने में देश की तस्वीर बदल दी। ‘बच्चा-बच्चा राम का जन्मभूमि के काम का’, ‘कल्याण सिंह कल्याण करो, मंदिर का निर्माण करो’ के सहारे दक्षिणपंथी अरसे तक जनता को राम नाम की घुट्टी पिलाते रहे।

समाजवाद-दक्षिणपंथ-वैचारिक स्तर पर दीवालिया कांग्रेस की राजनीति में कांशीराम को भूला नहीं जा सकता। कई प्रयोगों के बाद बसपा बनी तो उत्तर प्रदेश उसका केंद्रीय अखाड़ा बना। बसपा का नारा था ‘तिलक-तराजू और तलवार, इनको मारो जूते चार’। दलितों को एकजुट करने में यह सफल रहा। लेकिन कांशीराम की उत्तराधिकारी व बसपा सुप्रीमो मायावती ने बहुजन को सर्वजन कर दिया। नारा लगा कि ‘हाथी नहीं गणेश हैं- ब्रह्मा विष्णु महेश है’। अयोध्या में विवादित ढांचा गिरने के बाद मुलायम और काशीराम के मिलने पर नारा था ‘मिले मुलायम-कांशीराम, हवा हो गए जय श्री राम’

उत्तर प्रदेश में भाजपा सत्ता से बेदखल हो गई और उसके बाद कभी अपने दम पर बहुमत हासिल नहीं कर सकी। लेकिन वक्त के फेर में मुलायम और बसपा में बाद में इतनी दूरी बढ़ी कि भाजपा इन दोनों के बीच डोलती रही। पिछले साल उत्तर प्रदेश के चुनाव में मायावती ने मुलायम के खिलाफ इस नारा के साथ मोर्चा खोला कि ‘चढ़ गुंडन की छाती पर, मुहर लगेगी हाथी पर’। इसने कमाल का प्रभाव डाला और बसपा ने उत्तर प्रदेश में अपने दम पर सरकार बना ली। लेकिन वही मायावती एक-एक कर माफियाओं को अपनी पार्टी में ला रही हैं। आवाज आ रही हैं ‘पत्थर रख लो छाती पर गुंडा चढ़ गए हाथी पर’। लेकिन बसपा जैसी पार्टियों के नारे किसी एजेंसियों से नहीं निकलते, इसलिए उनकी मारक छमता ज्यादा होती है। उनके चिंतक ही कोई खेल करते हैं जिससे माया को माया मिल जाती है। जो दिल्ली पहुंचता है वह ‘सत्यमेव जयते’ के नीचे देश सेवा की शपथ लेता है। इस सत्यमेव जयते को स्थापित करने में पंडित मदन मोहन मालवीय ने जबर्दस्त भूमिका निभाई थी।

Subscribe to comments feed Comments (0 posted):

total: | displaying:

Post your comment comment

Please enter the code you see in the image:

Type in Hindi (हिन्दी में कमेन्ट करने के लिए यहां रोमन में लिखिए यह अपने आप हिन्दी में बदल देगा.)

Title :
Body
Powered by Vivvo CMS v4.1.2
Share |
  • email Email to a friend
  • print Print version

ईमेल से विस्फोटः अपना ईमेल यहां भरें और सब्सक्राइब करें:

Delivered by FeedBurner

Rate this article
4.38
More from बात-करामात
Previous
image
जातिवाद, क्षेत्रवाद, धर्मवाद का शिकार माओवाद
बिहार में हुई हाल की घटनाओं ने साबित कर दिया है कि माओवादी अब महज डकैतों और माफिया गुंडों का समूह है जिनसे सिर्फ डरा जा सकता है. विचारधारा और शोषण के खिलाफ लड़ने के उनके जज्बे के कारण लोगों में उनके प्रति जो सम्मान बचा था वह भी अब खत्म होने की कगार पर है. मगर इस क्राइसिस के बाद जो सबसे चौकाने वाली बात उभर कर सामने आयी है वह इन समूहों की वास्तविकता बन चुके जातिवादी झगड़े हैं....
image
चलाचली की बेला में चिदम्बरम
भारत गणराज्य के गृह मंत्री पलनिअप्पम चिदम्बरम की रूखसती की बेला आ गई है। एक के बाद एक हर मोर्चे पर नाकामी का सेहरा अपने सर बांधने वाले चिदम्बरम के खिलाफ कांग्रेस में भी अंदर ही अंदर रोष और असंतोष के स्वर खदबदाने लगे हैं। ...
image
असफल गृहमंत्री का सफल 'आतंकवाद'
हमारे केंद्रीय गृहमंत्री पी.चिदबरम ने पुलिस प्रमुखों के समेलन में ''भगवा आतंकवाद'' का नया शगूफा छोड़ दिया। वैसे इस केंद्रीय मंत्रिमंडल के कई मंत्री बयानों के मामले में शूरवीर की प्रसिद्धी प्राप्त कर चुके है। पी. चिदबरम भी ऐसे ही मंत्री हैं जो अपने बयानों के कारण चर्चा में रहते हैं. आतंकवाद का मामला हो, नकसलवाद का मामला हो, कश्मीर समस्या का मामला हो, या देश में घटित कोई भी अन्य महत्वपूर्ण मामला हो उनके आतंकवाद की थ्योरी भले ही सफल हो रही हो लेकिन बतौर गृहमंत्री वे असफल साबित हो रहे हैं....
image
मुसलमान ही सुलझाएं अयोध्या विवाद
अयोध्या विवाद के संभावित फैसले पर मुझे झटका तब लगा, जब मेरे एक दोस्त की पन्द्रह साल की बेटी का एक एसएमएस मिला। एसएमएस में लिखा था- 'बाबरी मस्जिद का फैसला आने वाला है। दुआ कीजिए कि फैसला मुसलमानों के हक में हो। इस एसएमएस को अपने मुसलिम भाईयों को फॉरवर्ड करें।' इस बात का मतलब यह है कि अयोध्या फैसले की सुरसराहट उन बच्चों में भी हो गयी है, जिन्होंने 1992 के बाद दुनिया देखी है। ...
image
नियमगिरी में अमन चैन की वापसी
भारत अपने विकास के पथ पर तो बढ़ता जा रहा है लेकिन साथ-साथ देश में अमीर-गरीब के बीच की दूरियां भी लगातार बढती ही जा रही हैं। देश के कई भू-भागों में आज भी प्राकृतिक संसाधनों पर स्वामित्व का संघर्ष अपने चरम पर हैं, जहाँ एक ओर अपने जीवन यापन के लिए जंगल और प्रकृति पर निर्भर आदिवासी समुदाय है, तो उनके सामने सर्वाधिकार युक्त एवं सशक्त उद्योगपति हैं। इस संघर्ष में जीत किसी होगी ये एक बड़ा सवाल होता हैं। भय और औद्योगिक आतंक के साए में जी रहे उड़ीसा के कालाहांडी जिले के नियमगिरि पहाड़ों के आसपास निवास करने वाले आदिवासी समुदाय के लोग अब निस्संदेह चैन की साँस ले सकते है।...
image
जयराम की जय हो!
अगर दिल्ली दरबार में एक मंत्री भी अपना काम इमानदारी से करने का फैसला कर ले तो बहुत कुछ बदल सकता है. आज के ६३ साल पहले व्यवस्था बदल देने के लिए सत्ता में आई कांग्रेस के शुरुआती मंत्री तो बहुत ही इमानदार थे ,शायद इसीलिये बहुत सारी चीज़ें ऐसी हुईं जिनकी उम्मीद आज़ादी के लिए संघर्ष करने वाले वीरों ने देखी थी लेकिन वक़्त के साथ बेईमानों की संख्या बढ़ने लगी और बहुत सारे फैसले पैसे के बल पर होने लगे....
image
हिन्दुस्तानी होने की आम बीमारी
हिंदुस्तानी आदमी की सबसे बड़ी कमजोरी है कि उसमें किलर इंस्टिंक्ट का सर्वथा अभाव होता है. दैनंदिन राजनय से लेकर खेल के मैदान तक उसकी यह कमी देखी जा सकती है. हमेशा हिन्दवी समुदाय इस तथ्य को बिसार देता है कि 'क्षमा शोभती उस भुजंग को जिसके पास गरल हो. ' अर्थात क्षमा उस सर्प का आभूषण है जिसके पास गरल यानी जहर हो. जिसके पास जहर ही नहीं होगा उस सांप को कोई केचुए से ज्यादा महत्त्व क्यों देगा? हिंदुस्तानी हमेशा बिना जहर दिखाए क्षमा करने निकल पड़ते हैं इसलिए जीवन के हर क्षेत्र में उन्हें अपमान का घूँट पीना पड़ता है....
image
अंधेरे में रहने को मजबूर है राजमाता की रियाया
भारत गणराज्य में छोटे बच्चे से अगर पूछा जाए कि देश पर वास्तव में शासन कौन कर रहा है तो निश्चित तौर पर उसका जवाब होगा ‘सोनिया गांधी‘। नेहरू गांधी परिवार के नाम पर आधी सदी से ज्यादा राज करने वाली कांग्रेस ने अघोषित तौर पर कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी को अपनी राजमाता और कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी को अपना युवराज मान ही लिया है। क्या आप जानते हैं कि राजमाता और युवराज की सल्तनत का आलम क्या है?...
image
सिर्फ आर्थिक अपराध नहीं है जन धन की लूट
पिछले कुछ समय से ऐसा कोई सप्ताह नहीं बीतता जब समाचार माध्यमों में किसी न किसी सरकारी अधिकारी, राजनेता, या ठेकेदार के यहाँ पड़े छापों में करोड़ों रुपयों का अवैध धन और किलो की तौल में सोना निकलने का समाचार नहीं आता। समाचार माध्यमों का आम पाठक, श्रोता या दर्शक इसे कौतूहल या ईर्षा के भाव से देखता है और निरीह सा अपनी व्यवस्था में आस्था घटाते हुये चुप बैठ जाता है। इन समाचारों से केवल अल्पकालीन सनसनी भर पैदा होती है, और फिर आरोपियों को मामला रफा दफा करने के लिए पर्याप्त समय देते हुये ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।...
image
आजाद कर दो कश्मीर
अगर कश्मीरी हिंदुस्तान में नहीं रहना चाहते तो उन्हें यह अनुभव कर लेने दिया जाना चाहिये कि वे जंगी और आर्थिक समस्याओं से घिरे अस्थिर पाकिस्तान में रह लें या फिर नेपाल या बांग्लादेश की तरह आजाद रहकर तय तक लें कि प्रगति के दौर में वह कहां तक जा पाते हैं. हालांकि इस देश ने अपने किसी वासी को यह तय करने का मौका नहीं दिया कि वह देश में रहना चाहता है या नहीं मगर अगर कश्मीर खुद को थोड़ा अलग महसूस कर रहा है तो उसे मौका दिया जाना चाहिये. बनिस्पत उसे हर साल दसियों हजार करोड़ के स्पेशल पैकेज दिये जायें और उसमें अपनी हजारों फौजों को मौत से मुकाबला करने के लिये ढकेल दिया जाय....
image
दंभ के चलते ख़त्म हो रही है एक बड़ी पार्टी
पश्चिम बंगाल में सरकार गँवा देने के मुहाने पर खडी मार्क्सवादी काम्युनिस्ट पार्टी को अपनी एक और ऐतिहासिक भूल का पता लग गया है. पार्टी के लगभग सभी बड़े नेता आन्ध्र प्रदेश के नगर, विजयवाड़ा में मिले और स्वीकार किया कि यूपीए सरकार से समर्थन वापस लेने में देर हो गयी. पार्टी को लगता है कि समर्थन उसी वक़्त वापस ले लेना चाहिए था जब यूपीए-प्रथम सरकार अमरीका से परमाणु समझौता करने का मंसूबा ही बना रही थी. ...
image
कश्मीरी आवाम से अहिंसा की उम्मीद क्यों?
कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग के रूप में शामिल वाला पूरे भारत की ओर से कश्मीर को क्या मिला है? वहां कश्मीर घाटी की हिंसा में मरने स्थानीय लोगों की खबरों हमें नहीं झकझोरती हैं। देश ने केवल यह दावा किया की कश्मीर हमारा है। लेकिन इस दावे के बाद भी पूरा कश्मीर उपेक्षित हो गया। भूख तो पशु भी बर्दाश्त कर सकते हैं, लेकिन उपेक्षा नहीं। फिर भला एक पूरी समुदाय उपेक्षित हो तो उसे अहिंसक होने की अपेक्षा कैसे की जा सकती है?...
image
राष्ट्रमंडल खेलों के बहाने होगी लंपटों की नारी 'पूजा'
इन दिनों एक खबर जोरशोर से उछाली जा रही है कि राष्ट्रमण्डल खेलों के आयोजन के दौरान भारत सरकार की मंजूरी से या भारत सरकार की ओर से या सरकार की मौन सहमति से हजारों 'सुरक्षित' सेक्स वर्कर राजधानी नयी दिल्ली में आने को तैयार हैं। कहा जा रहा है, कि यह न मात्र हमारी स्वर्णिम और नारी की पूजा करने वाली संस्कृति को नष्ट कर देने वाली पश्चिमी जगत की चाल है, बल्कि इससे ऐड्‌स के तेजी से फैलने की भी भारी आशंका है। इससे देश का चरित्र भी नष्ट होना तय है।...
image
सचमुच हिप्पोक्रेसी की हद है
मीडिया सचिन तेंदुलकर को क्रिकेट का भगवान मानता है और उसकी पूजा के लिये बहाने ढूंढता है. और अपनी इस कोशिश में कई बार मीडिया इतना अतार्किक हो जाता है कि उसपर हंसने की भी इच्छा नहीं होती....
image
भ्रष्टाचार का रंगा शियार निकला 'शेरा'
मणिशंकर अय्यर के भाग्य से कॉमनवेल्थ का छीका टूट ही गया। यों कॉमनवेल्थ के नाम पर मची राष्ट्रीय लूट का खुलासा शरद यादव दो साल से करते आ रहे पर लोकतंत्र के चारों स्तंभों ने अनसुना कर दिया। अब मणि के बोल से ही सही, परतें उधड़ रहीं तो सुनने वाले दांतों तले उंगली नहीं, पूरा हाथ दबा रहे हैं। ...
image
लूट की लड़ाई का नया मैदान बनेगा अफगानिस्तान
अफगानिस्तान अमेरिका के लिए दूसरा वियनताम साबित हो चुका है। यह सच विकीलीक्स के खुलासे के बाद आ चुका है। अमेरिका अफगानिस्तान से भागने की तैयारी में है। वीकीलीक्स ने इसकी जमीन तैयार कर दी है। अफगानिस्तान को अब अपनी नियति खुद तय करनी होगी। अमेरिका के जाने के बाद अफगानिस्तान में क्या होगा, यह दुनिया को दिखने लगा है। ...
image
प्रेमचंद के बहाने साहित्यकारों से दो बातें
महान कथाकार प्रेमचंद की कल जयंती बीत गई। मेरे जेहन में उनका जयशंकर प्रसाद के साथ खिंचवाई एक तसवीर ताजा हो गई है। इस तसवीर में कामायनी के रचयिता महाकवि प्रसाद धीर-गंभीर मुद्रा में खड़े हैं। लेकिन उनके साथ खड़े उपन्यास सम्राट की भंगिमा बिलकुल अलग है। उपन्यास सम्राट के फटे जूते से पैरों की अनामिका उंगली किंचित झांकती सी नजर आ रही है। प्रसाद जी की गंभीरता से ठीक उलट प्रेमचंद के स्मित होठ इससे बेपरवाह नजर आ रहे हैं।...
Next
Tags
No tags for this article
सर्वाधिकार (अ)सुरक्षित

विस्फोट.कॉम कॉपीराइट के सभी प्रकार के दावों और दायरों से मुक्त है.

Powered by Vivvo CMS v4.1.2