अधिक मतदान भी मुसीबत
अति सर्वत्र वर्जयते...संस्कृत की एक बहुत ही पुरानी कहावत है। ऐसा ही एक वाकया मध्यप्रदेश के विदिशा संसदीय क्षेत्र के ग्राम पांझ में प्रथम चरण के मतदान के दिन यानि 23 अप्रैल को घटित हुआ। इस गाँव में कुल 258 मतदाता हैं। प्रथम चरण के मतदान के दिन इस गाँव में 258 मतदाताओं में से 238 मतदाताओं ने अपने मत का प्रयोग कर के पूरे संसदीय क्षेत्र में सर्वाधिक 92.25 प्रतिशत के मतदान का रिकार्ड बना दिया।
चुनाव आयोग को इस गाँव के लोगों द्वारा मतदान करने के प्रति ऐसी गहन जागरुकता पूर्णत: अविश्वसनीय लगी। चुनाव आयोग लिए इस रिकार्ड प्रतिशत के मतदान को पचा पाना बहुत मुश्किल था। इसी कारण 25 अप्रैल को पुन: इस गाँव में मतदान करवाये गये। दोबारा मतदान का कारण बूथ कैप्चिंरंग को बताया गया। केंद्रीय प्रेक्षक श्री टी एस अप्पाराव ने कहा कि जबरी वोटिंग करवाने के कारण इस तरह रिकार्ड मतदान हुआ. पीठासीन अधिकारी विनोद श्रीवास्तव द्वारा भाजपा अभिकर्ता लखन रघुवंशी के ख़िलाफ़ बूथ कैप्चिंरंग के आरोप भी लगाये गये। श्री श्रीवास्तव के आरोप के आधार पर ही सिविल लाईन थाने में 23 अप्रैल को एक मामला भी दर्ज करवाया गया और उसी रिर्पोट के आधार पर भाजपा अभिकर्ता लखन रघुवंशी को गिरफ्तार भी किया गया।
दोबारा हुए मतदान में कुल 258 मतदाताओं में से 241 मतदाताओं ने लोकतंत्र के इस महापर्व में हिस्सा लेकर यह साबित कर दिया कि पहले हुए मतदान में किसी ने कोई बूथ कैप्चिंरंग नहीं की थी। आश्चर्यजनक रुप से दोबारा हुए मतदान में भी ग्रामीणों में गज़ब का उत्साह था। शत-प्रतिशत मतदान को मूत्तZ रुप देने के लिए घर से बाहर गये मतदाताओं को भी मतदान करने के लिए गाँव बुलाया गया। इतना ही नहीं मरीजों ने भी मतदान किया। सच कहा जाय तो इस गाँव वालों के लिए लोकतंत्र का यह महापर्व सचमुच का महापर्व था। सभी लोग लोकतंत्र के इस महापर्व के रंग में अपने को पूरी तरीके से सराबोर करना चाहते थे । ढोल-ताशे का इंतजाम था। प्रत्येक गाँव वासी इस पर्व का आनंद ले रहा था।
इस संबंध में उल्लेखनीय है कि पुर्नमतदान के दिन प्रशासन ने सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम किया था। 25 अप्रैल को पांझ गाँव में सुबह 7 बजे से ही जिला निर्वाचन अधिकारी और जिलाधिकारी योगेंद्र शर्मा, केंद्रीय प्रेक्षक श्री टी एस अप्पाराव, आरक्षी अधीक्षक आर एल प्रजापति इत्यादि वरिष्ठ अधिकारी उपस्थिति थे। हालांकि ये अधिकारीगण तकरीबन 2-3 घंटो के बाद वापस चले गये थे, किन्तु इन्होंने दोबारा दोपहर 3 बजे गाँव आकर पूरी स्थिति का अवलोकन किया। इनके अलावा सहायक रिटर्निंग अधिकारी एच पी वर्मा, तहसीलदार रवींद्र चौकसे, सिविल लाईन के आरक्षी निरीक्षक एन पी द्विवेदी और उप आरक्षी अधीक्षक आर के समाधिया दिन भर मतदान केन्द्र में ही डटे रहे।
पर जबरिया वोटिंग न पूर्व के मतदान में हुआ था और न ही पुर्नमतदान में हुआ। अंत में जागरुकता और सच्चाई की जीत हुई। गाँव में खूब जश्न मना। गाजे-बाजे के साथ जुलूस निकाला गया। पूरे गाँव में खुशी का माहौल था। सभी अपने और गाँव की जीत पर जश्न मना रहे थे। कोई भी इस खुशी से वंचित नहीं रहना चाहता था। गिरफ्तार भाजपा अभिकर्ता लखन रघुवंशी को भी पुर्नमतदान के दिन जमानत पर रिहा कर दिया गया।
इस सारे ताम-झाम को करने के बाद पाँझ गाँव के गा्रमीणों ने चुनाव आयोग के पुर्नमतदान के फैसले को पूरे गाँव के लिए अपमान बताया । बिना कोई वजह के पुर्नमतदान करवाने के कारण चुनाव आयोग के खिलाफ जम करके नारेबाजी भी गई। ग्रामीण इस बात से भी नाराज़ हैं कि पुर्नमतदान की सूचना ग्रामीणों को समय से नहीं दी गई। अब इस गाँव के निवासी चाहते हैं कि चुनाव आयोग गाँव वालों से माफ़ी मांगे। इसके के लिए ग्रामीणों ने पंचनामा भी तैयार किया है तथा एक ज्ञापन के साथ इसे राष्ट्रपति, सर्वोच्च न्यायलय के मुख्य न्यायधीश एवं मुख्य चुनाव आयुक्त को पंजीकृत डाक से प्रेषित किया है।
इस रिकॉर्ड मतदान के बाद गाँव के कैलाश रघुवंशी ने विदिशा संसदीय क्षेत्र से खड़ी भाजपा की प्रत्याशी श्रीमती सुषमा स्वराज से बात कर के उन्हें पांझ गाँव में रिकार्ड प्रतिशत के मतदान होने की सूचना दी। श्रीमती सुषमा स्वराज ने बातचीत के दौरान वायदा किया कि चुनाव जीतने के बाद वे इस गाँव को गोद ले लेंगी और अपना उड़न खटोला सबसे पहले इसी गाँव में उतारेंगी। हो सकता है कि इस गाँव के सारे मतदाता भाजपा के समर्थक हों और वे भाजपा को जिताने के लिए कृत संकल्पित हों, फिर भी ऐसे जुनून को लोकतंत्र के लिए घातक तो कदापि नहीं कहा जा सकता।
आज के बदलते परिवेश में जब जनता, खास करके युवा बहुत ही जागरुक है। उन्हें पता है कि उन्हें क्या करना है और क्या नहीं। अच्छे-बुरे का फ़र्क वे अच्छी तरीके से जानते हैं। ऐसे में अगर वे अपने मत की शक्ति का प्रयोग करके अयोग्य या अपराधी उम्मीदवारों को बाहर नहीं करते हैं तो क्या वे कभी भी विकास का उजाला देख सकेंगे? निर्णय तो जनता को ही करना है। वर्तमान संदर्भ में मतदाता हमेशा बोलते हैं कि सभी उम्मीदवार एक सरीखे हैं। आखिर वोट किसे दिया जाये? उनके तर्क से सहमत तो हुआ जा सकता है, लेकिन वोट नहीं देना कोई समस्या का समाधान नहीं है। समस्या का निदान तो हमें ही ढूंढ़ना होगा। कम-से-कम हम अपनी वोट की शक्ति का प्रयोग कर के अपराधी उम्मीदवारों को मैदान के बाहर का रास्ता अवश्य दिखा सकते हैं।
जो भी हो पांझ गाँव के रहवासियों ,जिनमें से अधिकांश अनपढ़ हैं ने पढ़े-लिखे लोगों को एक पाठ जरुर पढ़ाया है। दूसरे शब्दों में उन्होंने सभी के लिए एक मिसाल कायम किया है। काश! हम भी ऐसा कर पाते। आज जरुरत है हमें पांझ गाँव से प्रेरणा लेने की।
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- आतंकवाद की राजनीति और मीडिया
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