Home | बात करामात | गूगल क्रोम पर 24 घण्टे

गूगल क्रोम पर 24 घण्टे

image

हालांकि यह थोड़ा कम समय होता है किसी ब्राउजर को पूरा समझने में फिर भी क्रोम के बारे एक बात जो सबसे पहले आपका ध्यान खींचती है वह है इसकी तीव्रता. मैं आईई-6,7, ओपेरा, सफारी और फायरफाक्स का प्रयोग कर चुका हूं लेकिन यह उन सब ब्राउजर से तेज है. और जो बात सबसे ज्यादा निराश करती है वह है इसकी सादगी. आपको भी हैरानी हो सकती है कि सादगी तो इंटरनेट की जान है फिर इसमें निराश होनेवाली कौन सी बात है?

जब हम भारतीय परिवेश और यहां के इंटरनेट व्यवहार को देखें तो यही सबसे निराश करनेवाला पहलू लगता है. अपने 24 घण्टे के परीक्षण में जो कुछ समझा उसकी परख करते हैं. सबसे पहली बात हिन्दी से शुरू करते हैं. क्रोम हिन्दी की वह सुविधा लेकर आया है जो हिन्दी को इंटरनेट की मुख्यधारा की भाषा में शामिल करता है. वह आपको हिन्दी शब्दों के वर्तनी जांच की सहायता उपलब्ध कराता है, बस शर्त इतनी है कि आप जिस अप्लीकेशन में काम कर रहे हैं वह जावा सक्षम होना चाहिए. गूगल क्रोम 43 भाषाओं में उपलब्ध है जिसमें हिन्दी भी शामिल है. क्रोम आपको उसी भाषा में वर्तनी जांच की सुविधा देता है जिस भाषा में आप इसका प्रयोग कर रहे हैं. बस क्रोम डाउनलोड करते समय यह ध्यान रखें कि आपने भाषा का चुनाव हिन्दी किया है.

इसकी दूसरी खासियत है इसका टैब व्यवहार. संभवतः ओपेरा ने सबसे पहले सर्फिंग में टैब को स्वतः चालित प्रक्रिया के तहत ब्राउजिंग के साथ जोड़ा था और हर बार कोई लिंक या एक्सटेंशन क्लिक करने पर आपके सामने नयी विन्डो खुलने की बजाय एक नया टैब खुलता है. दूसरे ब्राउजर यहां तक कि आईई-7 में भी इसकी सेटिंग डिफाल्ट नहीं होती और उसी विन्डो में टैब खोलने के लिए आपको कन्ट्रोल बटन का सहारा लेना पड़ता है. गूगल ने यहां क्रोम को ओपेरा की तर्ज पर आटोमेटिक टैब सिस्टम लागू किया है इसके लिए आपको कन्ट्रोल बटन का सहारा नहीं लेना पड़ता. गूगल की इस टैब प्रणाली में आपके द्वारा ज्यादा प्रयोग की गयी वेबसाइटों का यह अपनेआप इतिहास बनाकर नये टैब में जोड़ता चला जाता है. जैसे ही आप न्यू टैब पर क्लिक करते हैं यह अपने आप सहेजे गये पृष्ठों को बाक्स में प्रदर्शित करता है. फिलहाल पसंदीदा साईटों को नये टैब में सहेजकर रखने की यह सुविधा केवल ओपेरा के ब्राउजर में मिलती है. 

गूगल अभी तक जिस फायरफाक्स को प्रमोट करता रहा है उसकी सबसे बड़ी खामी यह थी कि डिफाल्ट सर्च इंजन गूगल ही होता था जिसमें सीधे होमपेज से जीमेल आदि की सुविधाओं की कमी खटकती थी. आईई-7 आपको एकसाथ कई सारे होमपेज बनाकर रखने की सुविधा देता है इसलिए आपको इस लिहाज से आईई-7 ज्यादा सुविधाजनक लगता है. लेकिन आईई-7 की सबसे बड़ी समस्या उसकी मंथर गति है. भारत में 128 केपीबीएस स्पीड को ब्राडबैण्ड स्पीड कहा जाता है, जबकि पश्चिम के देशों में 1 एमबीपीएस की स्पीड ब्राडबैण्ड की श्रेणी में आता है. वह भी यह स्पीड आपको तब मिलती है जब आपका सेवा प्रदाता आपको बताता है कि आपको 256 केपीबीएस का ब्राडबैण्ड दे रहा है. औसत इंटरनेट उपभोक्ता इसी स्पीड पर काम करता है. छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में तो यह स्पीड 76 केपीबीएस ही होती है. ऐसे में आईई-7 बहुत थका देनेवाला सौदा होता है. ओपेरा, सफारी और फायरफाक्स  इस लिहाज से थोड़े बेहतर हैं लेकिन इतनी कम स्पीड पर कोई भी ब्राउजर ठीक से काम नहीं कर सकता.

शायद यही कारण है आज भी भारत में सबसे ज्यादा आईई-6 का प्रयोग किया जाता है. क्योंकि इसमें सुरक्षा मानकों आदि के लिहाज कोई खास इंतजाम नहीं हैं और कोई सुविधाओं की भरमार नहीं है इसलिए यह बहुत सादा और सटीक ब्राउजर कम स्पीड वाले इंटरनेट पर राज करता है. वैसे भी अपने यहां इंटरनेट का मतलब आईई-6 की बटन घूमता हुआ "ई" ही होती है. ब्राउजर के फीचर्स की बात करना यानी कोई अत्यधिक एडवांस टेक्नॉलाजी के बारे में बात करने जैसा है. हिन्दी पट्टी की बात छोड़िये जो अंग्रेजी के नेट प्रयोक्ता हैं वे भी इस बारे में कोई खास सावधानी नहीं रखते. असल में यहां ब्राउजर इत्यादि के बारे में ज्यादा तकनीकि जानकारी लोग रखेंगे भी क्यों? जिस देश में 90 फीसदी से ज्यादा कम्प्यूटरों में पायरेटेड विन्डोज प्रयोग होता हो वहां ब्राउजर की समुन्नत अवस्था और फीचर्स की बात तो दूर की कौड़ी ही लगती है.

खूबियां भी और खामियां भी

क्रोम को प्रयोग करते समय सबसे पहले आपको यह भूल जाना होगा कि आपके ब्राउजर के ऊपर कोई पट्टी आयेगी जिस पर फाईल, एडिट और आप्सन्श के बटन होंगे. क्रोम के निर्माताओं ने इसे क्यों हटा दिया है यह तो वे जाने लेकिन इससे विन्डो की साईज काफी बढ़ गयी है. जो लोग 14-15 इंच का मानीटर प्रयोग करते हैं उन्हें ज्यादा बेहतर विजबिलटी मिलेगी. लेकिन नये उपभोक्ता के लिए यही संकट का भी कारण होगा. जो सेटिंग्स आप सीधे जाकर निर्धारित कर देते थे उसके लिए कुछ शार्टकट को समझना होगा. क्रोम की एक बड़ी खामी यह है कि यह माउस के राईट क्लिक पर रिफ्रेश का आप्सन नहीं देता. भारत में लगभग सभी कम्प्यूटरों में विन्डोज के ही विभिन्न संस्करण प्रयोग किये जाते हैं ऐसे में प्रयोग करते समय आदतन हम अपना अधिकांश काम राईट क्लिक के जरिए ही करते हैं. जो लोग एप्पल प्रयोग करते हैं वे जानते हैं कि वहां सेव और रिफ्रेश/रिलोड आदि के लिए राईट क्लिक पर कोई आप्शन नहीं होता.

लेकिन एक अच्छी खूबी गूगल ने और जोड़ी है वह है गु्प्त पेज. यानी अगर आप ऐसी सर्फिंग करना चाहते हैं जिसका कोई रिकार्ड न बने और दूसरे लोग उसका अंदाज न लगा सकें कि आपने इंटरनेट पर क्या किया तो गूगल गुप्त बिन्डो का प्रयोग करिए. यह उन लोगों को लुभाएगा जो इंटरनेट पर अपने व्यवहार को दूसरों के सामने जाहिर नहीं करना चाहते.  

एक सीधी बात कही जा सकती है कि विन्डोज पर काम करनेवालों के लिए क्रोम परेशानियां भी पैदा कर सकता है और उन्हें इन्टरनेट ब्राउजिंग के लिए नये व्यवहार को समझना होगा. जाहिर सी बात है जो लोग पहले ही किसी न किसी ब्राउजर का प्रयोग कर रहे हैं वे इस नये ब्राउजर को नयेपन के नाम पर ही अनायास नहीं अपना लेंगे. जैसे यह ब्राउजर मेरे लिए भी कुछ परेशानियां पैदा कर रहा है, या फिर अपने को इतना टाईम नहीं है कि मैं इसको सिर्फ नयेपन के नाम पर समझने की कोशिश करूं क्योंकि डिफाल्ट एनकोडिंग यूटीएफ-8 करने के बाद भी एचटीएमल फार्मेट में हिन्दी नहीं दिखा रहा है और पाप-अप सेटिंग में बदलवा करने के बाद भी यह ओपेन नहीं कर रहा. इसलिए खास आपके लिए क्रोम में यह पोस्ट लिखने के बाद मैं तो फायरफाक्स और सफारी के प्रयोग से खुश हूं.

गूगल ब्लाग पर अन्य जानकारी पायें

एक्सपी और विस्टा के लिए डाउनलोड करें

Subscribe to comments feed Comments (3 posted):

Alok tomar on 05 September, 2008 20:14;48
avatar
meine bhee chrome ka prayog kiya hai aur ab tak samajh raha hoon. mujhe to mozzilla , opera aur firefox se behtar laga. rahee baat ie kee to vo cycle hai jiskee aadat pad chukee hai aur car seekhne mein waqt lagta hee hai.
Thumbs Up Thumbs Down
0
Neeraj Doshi on 05 September, 2008 21:01;05
avatar
meine to chrome istemal hi nahi kar paya kynki yeh filhal windows ke liye hi launch hua hai mac ke liye nahi. lekin is samiksha ke liye aapko dhanyavad..kafi gyanvardak hai. fir bhi google ki baki technologies ko dekhte hue mein iska ek baar prayog jaroor karna chahoonga. google kuch alag karne ke liye jana chahata hai.. dekhte hain Firefox se behtar kya hai.
Thumbs Up Thumbs Down
0
Shailendra on 07 September, 2008 16:34;43
avatar
I have just seen the visfot.com, This is just a brilliant site.
Waise mein hun to sirf 14 saal ka, par internet aur computers ke bare mein achha janata hun, good post!!

Mujhe to chrome behad pasnad aaya, bas usme google toolbar aur kuch aur extentions/addons jodne se chrome mein chaar chand lad jaayenge!!
Thumbs Up Thumbs Down
0
total: 3 | displaying: 1 - 3

Post your comment comment

Type in Hindi (हिन्दी में कमेन्ट करने के लिए यहां रोमन में लिखिए यह अपने आप हिन्दी में बदल देगा.)

Title :
Body
Powered by Vivvo CMS v4.1.2
Share |
  • email Email to a friend
  • print Print version

ईमेल से विस्फोटः अपना ईमेल यहां भरें और सब्सक्राइब करें:

Delivered by FeedBurner

Author info
image संजय तिवारी आप जहां तक सोच सकते हैं इंटरनेट आपको वह करने का मौका देता है. अभी तक मानव सभ्यता ने जितने भी मीडिया माध्यमों का उपयोग किया है यह उन सबमें अनूठा, प्रभावी और सर्वगुण संपन्न है. सूचना लेने देने के तीन माध्यमों दृश्य, श्रवण और पाठ को एक ही धागे में लपेटे नया मीडिया उत्पादन और पहुंच दोनों के लिहाज से सर्वश्रेष्ठ है. ऐसे नये मीडिया का जनहित के लिए भरपूर उपयोग हो, विस्फोट.कॉम उसी दिशा में उठा एक कदम है. sanjaytiwari07@gmail.com
Rate this article
3.67
More from बात करामात
Previous
image
अजमेर चार्जशीट और संघी उछल-कूद
बढ़ते पैमाने पर इसके साक्ष्य सामने आ रहे हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर एस एस) से जुड़े लोगों का आतंकवादी हमलों में हाथ रहा है। इन हालात में आर एस एस इस पुराने सूत्र पर चल रहा लगता है कि हमला ही सबसे अच्छा बचाव है। उसने 10 नवंबर को देशव्यापी विरोध कार्रवाइयों का आह्वान किया है। इन कार्रवाइयों में संघ के शीर्ष नेताओं के शामिल होने की बात कही जा रही है। बहरहाल, इसकी चर्चा हम जरा बाद में करेंगे।...
image
खुद ही खुदा बनने चला संघ
आर एस एस ने अब शायद बी जे पी को हाशिये पर लाने का मन बना लिया है .अपनी आबरू बचाने के लिए १० नवम्बर को आरएसएस के नेता खुद सडकों पर उतरेगें और धरना प्रदर्शन करेगें . उनकी शिकायत है कि यूपीए सरकार संघी आतंकवाद के ब्रैंड को प्रचारित करने में लगभग कामयाब हो गयी है और बीजेपी वाले कोई भी राजनीतिक पहल नहीं कर रहे हैं. नाराज़ संघी नेतृत्व अब खुद ही मैदान ले रहा है ....
image
शाबाश ओबामा, पहले दिन ही दस अरब डालर का बिजनेस
अपने भारत दौरे के पहले दिन ही बराक ओबामा दस अऱब डालर का बिजनेस कर गए। बेशक भारत को कुछ न मिले। पर भारत ओबामा को काफी कुछ देगा। भारत अमेरिकी बेरोजगारी को दूर करेगा। बेशक आतंकी हमलों से संबंधित भाषण में ओबामा ने पाकिस्तान का नाम नहीं लिया, पर भारत ने अपनी सेवा में कोई कसर नहीं छोड़ी। भारत सरकार और भारत के प्राइवेट कारपोरेट ने ओबामा को खुश कर दिया है। चीन से परेशान बराक ओबामा को भारत दौरे से राहत मिली है।...
image
भारत के रुख से चीन बेचैन
इस समय चीन बैचेन है। बैचेनी का कारण भारत की विस्तारवादी विदेश नीति है। इस विदेश नीति के तहत भारत ने उन देशों से दोस्ती बढ़ानी शुरू कर दी है, जो देश चीन से किसी न किसी मसले पर भीड़े है। चीन काफी बैचेने से भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की हाल ही में हुई विदेश यात्रा और बराक ओबामा का नवंबर के दूसरे सप्ताह में होने वाली दक्षिण एशिया की यात्रा पर नजर रखे है। भारतीय प्रधानमंत्री की जापान, मलेशिया, दक्षिण कोरिया, वियतनाम यात्रा की आलोचना चीनी अखबार पीपुल्स डेली कर रहा है। जबकि ओबामा की यात्रा को भी चीनी अखबार विस्तारवादी यात्रा बता रहा है।...
image
चड्ढी पहन के फूल खिलाने वाले उपेक्षित
छत्तीसगढ़ के सन्दर्भ में कुछ साल पहले ‘ विकास बनाम संस्कृति ’ पर चर्चा करते हुए डा. रमन सिंह ने एक बड़ी अच्छी बात कही थी. बकौल डा. सिंह ‘आखिर कब तक आप संस्कृति के नाम पर गरीब आदिवासियों के सिर पर सिंह लगा उन्हें नचाते रहेंगे ? उनको भी विकास और समाज की मुख्यधारा में शामिल होने का अवसर दीजिए.’ तो ज़ाहिर सी बात है कि अगर हम प्रदेश को बदलते वैश्विक परिवेश के अनुसार आगे बढते और विकसित प्रदेश के रूप में उसकी पहचान बनाना देखना चाहते हों तो हमें नवाचार को बढ़ावा देना होगा....
image
बस, एक सरदार चाहिए कश्मीर के लिए!
कश्मीर समस्या ने इस मिथक को भी तोड़ दिया की विकास की योजनाओं और बुनियादी अवशक्ताओ की पूर्ति से किसी भी समस्या का हल ढूंढा जा सकता है ,कश्मीर में वो सब प्रयास विफल रहे है। वो हाथ जो डल झील में नाव चलाते थे, अब पत्थर-बाजी में शरीक है। इन स्थितियों में तो ऐसा लगता है काश आज सरदार पटेल के कद और राजनीतिक दृढता वाला कोई नेता देश में होता तो अब तक ये विवाद कब का हल हो गया होता। ...
image
शुक्र मनाओ कि तुम भारत में हो अरुंधती
भारतीय समाज में बुद्धजीवी का दर्जा पा चुकी अरुंधती रॉय ने कहा है कि कश्मीर कभी भी भारत का अभिन्न हिस्सा रहा ही नहीं है. गिलानी दिल्ली में सेमिनार में कह रहें है कि उन्हें आज़ादी से कम कुछ भी नहीं चाहिए. गिलानी अगर ऐसी बात कहें तो कोई हैरानी नहीं होती लेकिन अरुंधती ऐसा कहें तो आश्चर्य होता है. हालांकि इसके पहले भी अरुंधती रॉय एक ऐसा ही बयान दे चुकी हैं. तब उन्होंने मावोवाद का समर्थन किया था. कश्मीर को भारत का अभिन्न हिस्सा ना मानने सम्बन्धी बयान वहां पर अपनी जान कि बाज़ी लगा रहे जवानों के लिए एक तमाचा है. साथ ही शेष देश के लोगों के लिए क्षोभ और शर्मिंदगी की वजह है....
image
आइये अरुंधती को लानत भेंजे
उसका बस चले तो वो हिंदुस्तान के सिर्फ इसलिए टुकड़े टुकड़े कर दे क्यूंकि ऐसा करने से वो भीड़ से अलग नजर आएगी। उसके पास हत्याओं को वाजिब ठहराने के तमाम तर्क हमेशा मौजूद रहते हैं ,क्यूंकि इसे वो खुद को महान साबित करने का औजार समझती है। संभव है इसके बहाने वो नोबेल पुरस्कार पाने की कोशिश कर रही हो। वो वामपंथ का ऐसा क्रूर चेहरा है जिसका इस्तेमाल मीडिया कभी अपनी टीआरपी बढाने में तो कभी व्यवस्था के विरुद्ध अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए करता है। संभव है बहुतों को उससे मोहब्बत हो लेकिन हम अरुंधती को लानत भेजते हैं क्योंकि उसे राष्ट्र के अस्तित्व से नफरत है।...
image
टुम बोले टुम बोले हम टो टुप्पई टाप!
पुरानी कहानी है कि एक परिवार के तीन तोतलों की शादी नहीं हो पा रही थी। पिता ने हिदायत दी कि इस बार जो लडकी वालों के सामने बोलेगा उसको घर से निकाल दिया जाएगा। लकड़ी वाले आए, बडे बोला -‘पितादी ती बात याद है न।‘‘ मंझला बोला -‘‘टुप्प भईया।‘‘ छोटा बोल उठा -‘‘टुम बोले टुम बोले हम टो टुप्पई टाप!‘‘ इस तरह तीनों की पोल खुल गई। कांग्रेसनीत केंद्र सरकार में भी कमोबेश एसा ही कुछ होता दिख रहा है।...
image
संघ को बदनाम करने की कांग्रेसी साजिश
राजस्थान सरकार के आतंकवाद विरोधी दस्ते ने अजमेर दरगाह शरीफ पर कुछ साल पहले हुूए बम धमाके के मामले में कुछ तथाकथित अभियुक्तों के खिलाफ अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया है। इस आरोप पत्र में जिन आरोपियों को नाम हैं उनमें इन्द्रेश कुमार का नाम नहीं है। यहां तक का किस्सा सामान्य जांच प्रक्रिया का अंग है। परंतु उसके बाद की कहानी राजनैतिक कहानी है।...
image
सामी नहीं, कांग्रेस के मुंह पर कालिख
कहने के लिए भले ही छत्तीसगढ़ कांग्रेस में केंद्रीय राज्य मंत्री वी नारायण सामी पर कालिख फेंके जाने का मुद्दा शांत होता दिख रहा हो लेकिन इसकी गूंज अभी लंबे समय तक सुनाई देगी। हकीकत यह है कि यहां कांग्रेस की गुटबाजी को आलाकमान अपना पूरा दम लगाकर भी शांत नहीं कर सकता। प्रभारी के रूप में सामी की यहां यह दूसरी बार फजीहत हुई है। मंगलवार को पीसीसी प्रतिनिधियों की बैठक में जब महज एक लाइन का प्रस्ताव पारित करवाने के लिए सामी यहां पहुंचे थे तो कांग्रेस भवन के बाहर ही उन पर काली स्याही फेंकी गई जो उनके चेहरे और कपड़े पर होते हुए उनके साथ कार से उतरे शहर कांग्रेस अध्यक्ष इंदरचंद धाड़ीवाल पर भी पड़े।...
image
अब देखिए राजनीति का कॉमनवेल्थ
कॉमनवेल्थ घोटाले की कड़ी से कड़ी जुडऩे लगी। पहले दिन बीजेपी नेता सुधांशु मित्तल निशाने पर रहे, तो दूसरे दिन खेल गांव बनाने वाली कंपनी एम्मार-एमजीएफ का खेल बिगड़ गया। डीडीए के पास जमा 183 करोड़ की बैंक गारंटी जब्ती का नोटिस जारी हो गया। पर अभी तो सिर्फ ठेका लेने वाली कंपनियों पर शिकंजा कसा। यक्ष प्रश्न, ठेका देने वाले नौकरशाहों-नेताओं ने कितना खाया, इसकी परतें कब उधड़ेंगी? अब ठेकेदारों पर कार्रवाई में तेजी दिखाने से क्या होगा? ठेकेदार तो अपना टेंडर भरते। यह तो देने वाले पर निर्भर, किस कंपनी को ठेका दे। सो सवाल, ठेका देते वक्त नौकरशाहों-नेताओं ने होश क्यों गंवाया?...
image
अब शुरू हुआ असली खेल
कॉमनवेल्थ खेलों के लिए लगाये गये टेन्ट, तंबू कनात उखड़ गये हैं. लेकिन असली खेल उसके बाद शुरू हुआ है. भारतीय जनता पार्टी बनाम कांग्रेस के इस खेल में राजनीति का स्वर्ण पदक कौन हासिल करेगा यह कहना मुश्किल है लेकिन जो खुलासे होंगे वे यह साबित कर देंगे कि खेल भारतीय राजनीति में पर्दे के पीछे असली समाजवाद कायम है. अगर भाजपा की सरकार में कांग्रेसी सुरेश कलमाड़ी कामनवेल्थ खेलों के लिए अगुआ बने रहते हैं तो कांग्रेस की सरकार में आठ सौ करोड़ का ठेका भाजपा के हितैषी सुधांशु मित्तल को मिल जाता है. ...
image
बताओ भला, सीएजी शीला और कलमाड़ी का क्या बिगाड़ लेगी?
कॉमनवेल्थ के आयोजक सफलता की खुमारी में हैं तो देश की जनता विजयादशमी के जश्न में डूबी है, ऐसे में रामायण के एक प्रसंग का जिक्र लाजिमी होगा। जब भगवान राम लंका पर फतह कर अयोध्या लौटे। राज्याभिषेक हो गया तब सिर्फ एक धोबी की टिप्पणी सुन राम ने अग्नि परीक्षा दे चुकी सीता को तज दिया था। पर कॉमनवेल्थ के आयोजकों पर न जाने कितने आरोप लग चुके, फिर भी किसी ठोस कार्रवाई की उम्मीद बेमानी। पहले भी जांच हुई, रपटे आईं लेकिन उन्हीं शीला दीक्षित ने सीएजी को ठेंगा दिखा दिया जिनके खिलाफ अब कामनवेल्थ खेलों में भ्रष्टाचार के खिलाफ जांच करने की बात कही जा रही है....
image
काश हर मस्जिद की खिडकी मंदिर में खुलती
6 दिसंबर, 1992 को जब विवादित ढांचा ढहाया गया, तब मैं जवान हो रहा था। बारहवीं में था। पिताजी उन दिनों बुलंदशहर में बतौर अध्यापक तैनात थे। हम सब उनके साथ ही रह रहे थे। दंगे भडक चुके थे। हमने छत पर चढकर दूर मकानों से उठती लपटों की आंच महसूस की थी। मौत के खौफ से बिलबिलाते लोगों की चीखें सुनी थीं। हैवानियत का नंगा नाच देखा था। 'जयश्री राम' और 'अल्लाह ओ अकबर' के नारों में भले ही ईश्वर और अल्लाह का नाम हो, लेकिन तब उन्हें सुनकर रीढ़ में बर्फ-सी जम जाती थी।...
image
ऐसे आदमी का सियासत में क्या काम?
कहां इकबाल,गालिब व फैज का शौक और कहां सियासत! जो भी हो पर पंजाब के कमजोर आर्थिक पक्ष व सियासत की गफलत में पंजाब के पूर्व वित्त मंत्री (निलंबन के दूसरे दिन उन्हें पूर्व भी कर दिया गया है) मनप्रीत सिंह बादल पंजाब के उन अहम से मारे सियासतदानों से बिल्कुल अलग है जो सियासतदान गनमैनों के लाव लश्कर के बिना चलना अपनी तौहीन समझते हैं।...
image
आरटीआई का दिल है इंटरनेट
इन्टरनेट आरटीआई का दिल है, यह बात किसी आईटी प्रोफेसनल या इन्टरनेट सर्विस प्रोवाइडर द्वारा अथवा ईमेल सेवा प्रदाता कंपनी ने नहीं कही, बल्कि ऐसे शख्स श्री वजाहत हबीबुल्लाह ने कही, जो केन्द्रीय सूचना आयोग के मुख्य सूचना आयुक्त रहे हैं। जिस कार्यक्रम में मुख्य सूचना आयुक्त ने दिल की बात दिल से जोड़कर कही, उस कार्यक्रम में मैं भी मौजूद था। मैंने कार्यक्रम में आये भारत के विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों व अन्य देशों से आये विषय विशेषज्ञों से आरटीआई को इन्टरनेट के जरिए प्रोत्साहित करने की बात कही।...
Next
Tags
No tags for this article
सर्वाधिकार (अ)सुरक्षित

विस्फोट.कॉम में प्रकाशित सामग्री पर हमारी ओर से कोई कापीराइट नहीं है.

Powered by Vivvo CMS v4.1.2