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बात करामात

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भारत न दारुल इस्लाम होगा न ही इसे हिन्दू राष्ट्र होने दें

इस्लाम किसी भी आधार पर न धर्म है न समाज व्यवस्था। इस्लाम अपने प्रारंभ से ही संगठन रहा है।सूफी सन्तों ने इस्लाम को धर्म की दिशा में प्रेरित किया किन्तु कालान्तर में वह दिशा इस्लाम के इतिहास में दफन हो गईं। अब उसके अवशेष ही बचे हैं अन्यथा इस्लाम एक संगठन के रूप में ही विस्तार पा रहा हैं, जबकि हिन्दुत्व कभी न धर्म रहा न संगठन। हिन्दुत्व या तो व्यक्ति के व्यक्तिगत आचरण से जुड़ा रहा या समाज व्यवस्था सें। इस्लाम और हिन्दुत्व में यह स्पष्ट अन्तर है कि इस्लाम ने अपने संगठन को धर्म घोषित कर दिया तथा अपने (अ) धर्म के ही नियंत्रण में राज्य को भी कर लिया जबकि हिन्दुत्व समाज व्यवस्था ने धर्म को समाज से अलग रखा। राज्य तो उसका था ही नहीं।
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अयोध्या और अदालत: जीत गया इंडिया

अयोध्या में 2.7 एकड़ भूमि के मालिकाने के विवाद का फैसला किसके लिए अधिक अनुकूल रहा और किसके लिए कम, यह अकादमिक और कानूनी, धार्मिक और सियासी चर्चाओं का विषय है। अलबत्ता, पिछले एक हफ्ते के घटनाक्रम में यदि कोई विजेता उभरा है, तो वह है- भारत। यह देश, उसके हिंदू और मुस्लिम नागरिक, दोनों संप्रदायों के धर्माचार्य, राजनेता और यहां की सरकारें भी। क्या कोई यकीन करेगा कि यह वही भारत है जहां इसी मुद्दे पर कितने ही दंगे हो चुके हैं, सैंकड़ों बेकसूर जानें जा चुकी हैं और सरकारें बदल चुकी हैं।
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न्याय के आंखों पर हिन्दुत्ववादी पट्टी

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राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के फैसले ने मुस्लिम समुदाय को कहीं भीतर से तोड़ दिया है। हालांकि उसने अपने इस दर्द को उग्र बयानों के जरिये भी जाहिर नहीं किया। राम मंदिर के मुद्दे को पिछले दो दशक से भी अधिक समय से राजनीतिक लाभ के लिए भुनाने में लगी भाजपा सहित ढेर सारी हिंदुत्ववादी ताकतों ने भी हर बार की तरह लड्डू खाकर/खिलाकर जश्न नहीं मनाया। वैसे देखा जाए, तो दोनों पक्षों ने अपनी प्रतिक्रियाएं व्यक्त करने में परिपक्वता का परिचय दिया है। राम मंदिर समर्थकों को उम्मीद नहीं थी कि उन्हें इतना मिल जाएगा।...
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विधि के विधान पर कानून का समाधान

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3 अक्टूबर को अयोध्या आंदोलन के नायक कहे जानेवाले लालकृष्ण आडवाणी ने अपने ब्लाग पर अयोध्या में विवादित परिसर पर हाइकोर्ट के फैसले पर एक लेख लिखा है. इस लेख में वे अयोध्या आंदोलन के शुरूआत को याद करते हुए मानते हैं कि हाइकोर्ट का जो भी फैसला आया है वह सबको शिरोधार्य करना चाहिए. यही विधि का विधान है जिस पर कानून ने अपना समाधान दिया है. आडवाणी मानते हैं कि फैसला आस्था बनाम कानून नहीं बल्कि आस्था का कानून द्वारा अनुमोदन है. ...
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9/11 की साजिश और अहमदीनेजाद के सवाल

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अमेरिका पर 9/11 को हुए अब तक के सबसे बड़े आतंकी हमले के बाद जहां एक ओर पूरी दुनिया ने आतंकवाद का सबसे भयानक चेहरा देखा वहीं इसी दुनिया का एक बहुत बड़ा वर्ग जिसमें अमेरिका के तमाम लोग भी शामिल हैं, को इस हादसे के पीछे विश्व का अब तक का सबसे बड़ा एक सुनियोजित षड्यंत्र भी नज़र आया। गौरतलब है कि जार्ज बुश द्वितिय का कार्यकाल अमेरिका के लिए एक ऐसा दुर्भाग्यपूर्ण कार्यकाल गिना जाएगा जिसमें न केवल ईसाईयत व इस्लाम के मध्य सत्ता के संघर्ष की अवधारणा को विश्व स्तर पर बल मिला बल्कि उनके कार्यकाल में अमेरिका को सबसे अधिक बदनामी भी उठानी पड़ी।...
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अयोध्या को मिले अयुद्ध भूमि की मर्यादा

साठ साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद अयोध्या मामले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ का फैसला भले ही 2-1 के बहुमत से आया है, लेकिन सार रूप में फैसले का आशय यही है कि इस देश की साझा संस्कृति की बुलंद इमारत हर हाल में बुलंद रहनी चाहिए। जनता के सभी तबके और समुदायों ने जिस संजीदगी और सहृदयता से फैसले को लिया है और मुकदमे से संबंधित सभी पक्षों ने जिस कानूनी मर्यादा के तहत सहजता से इसे स्वीकार किया है, वह ध्यान देने लायक है।
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रेत की तरह खिसल रहा है भाजपा का जनाधार

भाजपा के आला नेताओं की नींद इस बात से उड़ी हुई है कि दो सीटों से लेकर देश पर शासन करने वाली भारतीय जनता पार्टी का जनाधार बहुत ही तेजी से खिसकता जा रहा है। पार्टी प्रमुख नितिन गड़करी के करीबी सूत्रों का दावा है कि पार्टी द्वारा कराए गए अंदरूनी एवं गुप्त सर्वे में यह तथ्य उभरकर सामने आया है कि भाजपा का अगड़ा वोट बैंक बुरी तरह ध्वस्त हो चुका है।
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अस्सी हजार करोड़ की जय हो!

आरोप प्रत्यारोप पीछे छूट गये हैं. टिक टिक करती घड़ी की सूई पल छिन हमें कामनवेल्थ गेम्स के उद्घाटन समारोह के नजदीक ले जा रही है. दो दिन पहले सीटी बजाकर रानी के राजदण्ड का स्वागत करनेवाली शीला दीक्षित ने साबित कर दिया कि वे दिल्ली की बेहतर मेयर हो सकती हैं. कामनवेल्थ गेम्स गांव से लेकर पटरी पर रात गुजारनेवाले कामनमैन तक सब खेलों की जय कर रहे हैं.
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कुजात गांधीवाद

गांधी जी की मृत्यु के बाद गांधीवाद दो हिस्सों में बंट गया- मठी और सरकारी. मठी गांधीवाद का सरकारी गांधीवाद के साथ ऐसा मेल बैठ गया कि इतने सालों में उसने किसी एक अन्याय के खिलाफ संघर्ष नहीं किया. जाति, पूंजीवाद या मुट्ठीभर लोगों का प्रभुत्व, भाषा या दाम उसने किसी के विरद्ध संघर्ष नहीं किया.
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मुसलमान ने मान ली यह बात, मंदिर मस्जिद हो साथ-साथ

अयोध्या में रामजन्मभूमि बाबरी विवाद पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को सेन्ट्रल सुन्नी वक्फ बोर्ड सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की बात कर रहा है. लेकिन क्या अब इसका कोई औचित्य है? सलीम सिद्दीकी मानते हैं कि देश का एक बड़ा मुस्लिम वर्ग अब हाईकोर्ट के फैसले को ही अंतिम मानकर इस विवाद का पटाक्षेप चाहता है ताकि भारतीय जनता पार्टी जैसी सांप्रदायिक पार्टियों को और अधिक राजनीतिक फायदा न मिले.
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सुदर्शन का (कु) दर्शन
जबसे आरएसएस के लोगों की आतंकवादी घटनाओं में संलिप्तता सामने आयी है, तब से आरएसएस के नेता बौखला गए हैं। इस बौखलाहट में ही शायद संघ के इतिहास में पहली बार हुआ है कि इसके स्वयंसेवक विरोध प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर उतरे। इसी बौखलाहट में आरएसएस के एक्स चीफ केएस सुदर्शन का मानसिक संतुलन बिगड़ गया और सोनिया गांधी के बारे में ऐसे शब्द बोल दिए, जिन्हें एक विकृत मानसिकता का आदमी ही बोल सकता है।...
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सीआईए नहीं केजीबी एजंट कहिए जनाब
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरसंघचालक ने 10 नवंबर को सोनिया गांधी पर सीआईए एजंट होने का आरोप लगाकर सनसनी पैदा कर दिया है. पूरी की पूरी कांग्रेस उत्तेजित है और संघ भी बैकफुट पर चला गया है. सुदर्शन के आस पास के लोगों का कहना है कि सुदर्शन जी भुलक्कड़ हो गये हैं और उन्हें कुछ ठीक से याद नहीं रहता. शायद इसीलिए उन्होंने इतनी बड़ी चूक कर दी. ...
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सोनिया का सच जान बेकाबू क्यों होते हो?
एक बार फिर लोकतंत्र पर आपातकाल मंडरा पड़ा है. राजमाता सोनिया गांधी के सिपहसालारों ने कांग्रेसी गुण्डों, माफियाओं और लोकतंत्र के हत्यारों का आह्वान किया है कि वह देशभर में संघ कार्यालयों पर धावा बोल दे. इसका तत्काल प्रभाव हुआ और कांग्रेसी गुण्डों ने संघ के दिल्ली मुख्यालय पर धावा भी बोल दिया. ठीक वैसे ही जैसे इंदिरा गांधी की मौत के बाद सिखों को निशाना बनाया गया था. हिंसक और अलोकतातंत्रिक मानसिकता से ग्रस्त कांग्रेसी सोनिया का सच जानकर आखिर इस तरह बेकाबू क्यों हो रहे हैं?...
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नये निजाम के दामन पर है ज्यादा बड़ा दाग
मुंबई। महाराष्ट्र के नए निजाम भी कोई दूध के धुले नहीं हैं। कांग्रेस आलाकमान ने अशोक चव्हाण को फर्जीवाड़े से फ्लैट पाने के आरोप में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की गद्दी से हटा दिया। लेकिन नए मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण भी उसी तरह के फर्जीवाड़े में गले तक डूबे हुए हैं। उन्होंने जितने बड़े बड़े झूठ बोलकर सरकार से फ्लैट हथियाए हैं वे कांग्रेस के लिए ज्यादा दागदार हैं।...
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अजमेर चार्जशीट और संघी उछल-कूद
बढ़ते पैमाने पर इसके साक्ष्य सामने आ रहे हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर एस एस) से जुड़े लोगों का आतंकवादी हमलों में हाथ रहा है। इन हालात में आर एस एस इस पुराने सूत्र पर चल रहा लगता है कि हमला ही सबसे अच्छा बचाव है। उसने 10 नवंबर को देशव्यापी विरोध कार्रवाइयों का आह्वान किया है। इन कार्रवाइयों में संघ के शीर्ष नेताओं के शामिल होने की बात कही जा रही है। बहरहाल, इसकी चर्चा हम जरा बाद में करेंगे।...
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अपने होने पर ही हैरान
‘चुप्पी-चुप्पी नहीं नहीं, बोलेंगे अब सभी-सभी’ इन्हीं नारों से दाहोद (गुजरात) का सीनियर रेलवे संस्थान परिसर 31 अक्टूबर को पूरे दिन गूंजता रहा। यहां गुजरात के बड़ोदरा, पंचमहल, सुरत, भड़ूच, डांग, बालसाड और साबरकांठा जिले से लगभग तीन हजार के आस पास विमुक्त एवं घुमंतू समाज से ताल्लुक रखने वाले लोग इकट्ठे हुए थे। मौका था, अधिकार अभियान की घोषणा का। उस समाज के लिए जो इस लोकतांत्रिक देश में अधिकार का अर्थ अभी तक समझ नहीं पाएं हैं। ...
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गोली लगने के बाद क्या गांधी ने कहा था- हे राम ?
यह एक ऐसा सवाल है जिस पर अब विवाद होने लगा है. 30 जनवरी 1948 को क्या जब महात्मा गांधी को नाथूराम गोडसे ने गोली मारी तो महात्मा गांधी ने अपने मुंह से हे! राम का संबोधन किया था? उस वक्त घटनास्थल पर मौजूद रहे एक प्रत्यक्षदर्शी के डी मदान का कहना है कि "मैंने नहीं सुना था कि उन्होंने हे राम कहा था या नहीं."...
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भद्दा और बेदम रहा संघ का विरोध प्रदर्शन
स्कूल जाते बच्चों के भी हाथ में भगवा थमाकर भले ही संघ ने शक्ति प्रदर्शन की भरपूर कोशिश की हो लेकिन 10 नवम्बर का दिन उसके इतिहास में कोई बडी घटना के रूप में याद नहीं किया जायेगा। हॉ हम बात कर रहे है राजस्थान के भरतपुर जिला मुख्यालय की जहॉ देश भर की ही तरह हिन्दुवादी संघटनों ने अपने उपर लग रहे ‘भगवा आतंकवाद’ के आरोपों के विरोध में शक्ति प्रदर्शन किया था। भरतपुर जहॉ संघ प्रचारक क रूप में भाजपा के पीएमइन वेंटिग लालकृष्ण आडवानी ने अपनी सेवाऐं दी है संघ का ये विरोध प्रदर्शन एक दम भददा और हल्का रहा।...
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एनसीपी के 'दादा' का दांव
महाराष्ट्र में कांग्रेस में परिवर्तन हुआ तो राष्ट्रवादी कांग्रेस ने भी अपने पत्ते खोल दिये. राज्य में लंबे समय से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के भीतर चल रही सत्ता के दावेदारी पर एनसीपी ने आखिरकार प्रदेश की प्रशासनिक कमान अपनी ओर से शरद पवार के भतीजे अजीत पवार को सौंप दी है. अब गुरुवार को शाम साढ़े चार बजे पृथ्वीराज चव्हाण के साथ अजीत "दादा" पवार उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे....
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पीएमओ वाले पृथ्वीराज
महाराष्ट्र के नये मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण यूपीए सरकार पार्ट वन और पार्ट टू में बतौर पीएमओ मिनिस्टर जाने जाते हैं. प्रधानमंत्री कार्यालय में रहते हुए भी उन्होंने कभी ताकतवर होने का दंभ नहीं पाला और चुपचाप काम करते रहे. बिट्स पिलानी से बीई और बर्कले विश्वविद्यालय से एमएस की डिग्री हासिल करनेवाले पृथ्वीराज की राजनीतिक कमेस्ट्री ने उनके सार्वजनिक जीवन में पहली बार इतना गाढ़ा रंग उड़ेला है....
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सुलग रहा है मेरठ 'हिन्दुस्तान'
एक ओर हिन्दुस्तान अखबार अपनी अलग कंपनी बनाकर अखबार को चमकाने और अखबार का विस्तार करने में लगा है वहीं दूसरी ओर हिन्दुस्तान के विभिन्न संस्करणों में हालात ठीक नहीं है. हिन्दुस्तान के मेरठ संस्करण में इन दिनों इस्तीफे दिये जा रहे हैं लेकिन प्रचारित किया जा रहा है कि जो आफिस नहीं आ रहे हैं वे छुट्टी पर चले गये हैं....
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आलोक तोमर के बगल में बसे किशोर मालवीय
सीएनईबी में पहले से एक सलाहकार संपादक थे- आलोक तोमर. अब दूसरे सलाहकार संपादक भी वहां नियुक्त हो गये हैं किशोर मालवीय. उन्होंने सीएनईबी चैनल के साथ बतौर कंसल्टिंग एडिटर अपनी नई पारी की शुरुआत की है। सीएनईबी से पहले वे ‘वायस ऑफ इंडिया’ न्यूज चैनल के साथ जुड़े हुए थे। उन्होंने करीब दो दशक के कॅरियर में देश के नामी-गिरामी मीडिया संस्थानों में कई जिम्मेदारियां निभाईं हैं।...
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सुरक्षा परिषद की छांव में खेती पर दांव
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने संसद में दिये गये अपने भाषण में भारत से मिले प्यार की भूरि भूरि प्रशंसा जरूर की लेकिन अपनी व्यावसायिक मजबूरियों को छिपा नहीं सके. बराक ओबामा ने संसद के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करते हुए जहां एक ओर भारत को महाशक्ति करार देकर उसके लिए संयुक्त राष्ट्र में स्थायी सदस्यता को अपना समर्थन दिया वहीं भारत और अमेरिका द्वारा मिलकर खेती के क्षेत्र में एक और हरित क्रांति के आगाज की घोषणा की....
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आतंक नहीं कश्मीर केन्द्रित हुई ओबामा यात्रा
रविवार की देर शाम भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा आयोजित भोज में ओमर अब्दुल्ला के शामिल होने से जो आशंका पैदा हुई थी वह सोमवार को हैदराबाद हाउस में और प्रबल रूप में सामने आ गयी जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अमेरिकी राष्ट्रपति की उपस्थिति में स्वीकार किया कि वे पाकिस्तान से बात करते वक्त "के" शब्द पर बात करने से नहीं कतराते हैं....
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भारत से धंधा, पाक को चंदा
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक हुसैन ओबामा ने अपना तीन दिवसीय दौरा पूरा कर लिया. मुंबई उतरकर दिल्ली दरबार तक उनकी दस्तक भारत पर अमेरिका के मजबूत पकड़ की मिसाल बन गया. निश्चित रूप से उनका दौरा भारत के लिए उतना महत्वपूर्ण नहीं जितना खुद अमेरिका के लिए है. मंदी के दौर से जूझ रहे अमेरिका को "कारपोरेट" जगत का धंधा दिलाने के लिए उन्होंने न केवल भारत को महाशक्ति करार दे दिया बल्कि सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता का समर्थन भी कर दिया....
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