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बात करामात

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अमन के लिए किया गया फैसला इंसाफ नहीं होता

साठ साल बाद एक जटिल मसले पर फ़ैसला आया है। इस देश में न्यायिक प्रक्रिया की धीमी निष्क्रिय गति को देखते हुए तमाम लोग शुक्र मना सकते हैं कि वे अपने जीवनकाल में न्यायालय को एक फ़ैसला सुनाते हुए देख पा रहे हैं। बार-बार बताया जा रहा है कि यह एक नया भारत है, और नया भारत आगे बढ़ गया है, और नए भारत के आगे बढ़ जाने का ये भी एक लक्षण है कि वह कठिन फ़ैसले सुनाने में घबराता नहीं है तो यह अच्छी बात है।
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दिलों की दूरियां भी मिट जाए, अब हो ऐसी सुलह

तुम्हारी भी जय-जय, हमारी भी जय-जय, न तुम हारे, न हम हारे। गर सचमुच फैसले को दोनों पक्ष इसी नजरिए से देखें। तो अयोध्या पर अदालती फैसला न सिर्फ एतिहासिक, अलबत्ता राष्ट्रीय एकता की अनूठी मिसाल होगा। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बैंच के तीनों जजों ने राम जन्मभूमि को कानूनी मान्यता दी। तो बाकी अन्य पक्षों को भी निराश नहीं किया। भले तीनों जजों की राय में फर्क हो पर फैसला यही, विवादित जमीन तीन हिस्सों में बांटी जाए।
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अब बापू भजन का ही आसरा

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ईश्वर-अल्लाह तेरो नाम, सबको सन्मति दे भगवान। अयोध्या हो या कॉमनवेल्थ, अब बापू भजन ही आसरा। अयोध्या विवाद में गुरुवार को नया अध्याय जुड़ेगा, सो फैसले से पहले शांति की अपील के साथ-साथ सुरक्षा के भी पुख्ता बंदोबस्त हो गए। अब इंतजार तीन जजों की बैंच के फैसले का। कॉमनवेल्थ गेम्स के आगाज से ठीक पहले फैसले ने सरकार के हाथ-पांव फुला रखे, सो बुधवार को होम मिनिस्टर पी. चिदंबरम ने बापू भजन सुना शांति की अपील की।...
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अफगानिस्तान में फंस गया अमेरिका

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अमरीका की फौजें अफगानिस्तान में बुरी तरह से फंस गयी हैं . सैनिक इतिहास के जानकार बताते हैं कि अफगानिस्तान में अमरीका की जो जकड़न है, वह उसकी वियतनाम की दुर्दशा से भी भयावह है. मौजूदा अमरीकी राष्ट्रपति के पूर्ववर्ती, जार्ज डब्ल्यू बुश ने अफगानिस्तान में सैनिक कार्रवाई शुरू की थी. बहरहाल अरबों अरब डालर खर्च करके अब अमरीका को लगने लगा है कि गलती हो गयी....
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कमजोर कृष्णा की मजबूत दलील

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भारत के विदेशमंत्री एस एम कृष्णा आमतौर पर कमज़ोर राजनेता माने जाते हैं और विदेशमंत्री के रूप में तो खैर वह बहुत ही कमज़ोर हैं. विदेश मंत्रालय के अफसरों में भी शायद अब लीडरशिप के रोल में १९८० के बाद ग्रेजुएशन करने वाले लोग आ गए हैं जो अपने समय के सबसे कुशाग्रबुद्धि लोग नहीं हैं क्योंकि उस दौर में बेहतरीन टैलेंट अन्य क्षेत्रों में जाने लगा था. शायद इसीलिये कूटनीति के क्षेत्र में पाकिस्तान जैसा मामूली मुल्क भी भारत के विदेश मंत्री को कूटनीति के मैदान में मात पर मात दे रहा था. लेकिन विदेश मंत्री का संयुक्त राष्ट्र महासभा में दिया गया भाषण इस बात को नकारता है....
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संघ-भाजपा ने बनाया कश्मीर को समस्या

बहुत वर्षों बाद दिल्ली के नेता कश्मीर समस्या के बारे में शुतुरमुर्गी नीति से बाहर निकल पाए हैं. उम्मीद की जानी चाहिए कि जम्मू-कश्मीर की दो दिन की यात्रा पर गया सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल कश्मीर की समस्या को सही परिप्रेक्ष्य में रखने में मील का पत्थर साबित होगा. यह अलग बात है कि बीजेपी ने इस अवसर पर भी राजनीति खेलने की कोशिश की लेकिन आज पूरे देश में कश्मीर समस्या का हल खोजने का माहौल बन चुका है. लगभग सभी चाहते हैं कि कश्मीर समस्या में पाकिस्तान की दखलंदाजी ख़त्म हो. देश में जागरूक जनमत को मालूम है कि कश्मीर समस्या को पैदा करने में सबसे ज्यादा योगदान बीजेपी का ही है.
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अयोध्या पर फैसला कुछ भी हो, असर कुछ नहीं होगा

'बहुत शोर सुनते थे पहलू में दिल का, जो चीरा तो कतरा ए खून न निकला।' ठीक इसी प्रकार 24 सितम्बर को श्रीराम जन्मभूमि के स्वामित्व विवाद मामले में अदालती फैसले के मद्देनजर कई प्रकार की आशंकाएं व्यक्त की जा रही हैं। इन आशंकाओं में देश भर में हिंसा भड़कना भी शामिल है। कहा जा रहा है कि देश भर में काफी बावेला मच सकता है। फैसला जिसके पक्ष में नहीं आएगा, वह पक्ष खूनी खेल खेल सकता है, पर वास्तव में ऐसा नहीं होगा।
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हिन्दुओं और मुसलमानों के लिए परीक्षा की घड़ी होगी 24 सितंबर

बाबरी मस्जिद बनाम राममंदिर के मालिकाना हक के 24 सितम्बर को आने फैसले को रोकने के लिए रिट याचिकाएं हाईकोर्ट ने रद्द करके सही किया है। अदालत से बाहर इस मसले का निपटारे असम्भव हो चला है। जब फैसला आने में महज एक सप्ताह ही रह गया है तो इस पर यह कहना कि अदालत से बाहर हल निकालने का समय दिया जाना चाहिए, बैमानी ही नहीं बल्कि मसले को लटकाए का रखने का प्रयास भी था। सवाल यह है कि फैसले की तारीख की घोषणा होते ही फैसला रुकवाने की कवायद क्यों की गयी ?
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बुरे फंसे उमर अब्दुल्ला

कश्मीर में हर बड़े राजनीतिक दल या फिर नेता ने भारत विरोध को सत्ता पाने या बचाने का माध्यम बनाया है. शेख अब्दुल्ला से लेकर मुफ्ती मोहम्मद सईद तक सबने इस सिक्के का इस्तेमाल किया है. उम्मीद की गयी थी उमर अब्दुल्ला इस राजनीति को त्यागकर सही रास्ते को अख्तियार कर लेंगे और अपनी पार्टी को मजबूत करने के साथ साथ घाटी में अमन चैन लाने की दिशा में काम करेंगे. लेकिन ऐसा नहीं हुआ.
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'तराजू' पर टिकी हैं 'तिलक' और 'टोपी' की उम्मीदें

हमारे राजनेताओ ने रामजन्मभूमि विवाद-बाबरी मुद्दे पर खूब राजनीतिक–व्यापार किया और लाभ भी कमाया लेकिन आम जनता की झोली आज भी खाली है और ये भी निश्चित है की यदि कोई दंगा–फसाद हुआ तो आम जनता ही पिसेगी फिर वो तिलक वाला हो या टोपी वाला। समय है कि हम सबको अब इस मुद्दे को धार्मिक चश्मे से देखना बंद करना होगा नहीं तो हम फिर उन धर्म के ठेकदारों के हथियार बन जायेंगे जो अपने राजनितिक लाभ के लिए हमे सूली पर चढा देते है।
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सुदर्शन का (कु) दर्शन
जबसे आरएसएस के लोगों की आतंकवादी घटनाओं में संलिप्तता सामने आयी है, तब से आरएसएस के नेता बौखला गए हैं। इस बौखलाहट में ही शायद संघ के इतिहास में पहली बार हुआ है कि इसके स्वयंसेवक विरोध प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर उतरे। इसी बौखलाहट में आरएसएस के एक्स चीफ केएस सुदर्शन का मानसिक संतुलन बिगड़ गया और सोनिया गांधी के बारे में ऐसे शब्द बोल दिए, जिन्हें एक विकृत मानसिकता का आदमी ही बोल सकता है।...
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सीआईए नहीं केजीबी एजंट कहिए जनाब
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरसंघचालक ने 10 नवंबर को सोनिया गांधी पर सीआईए एजंट होने का आरोप लगाकर सनसनी पैदा कर दिया है. पूरी की पूरी कांग्रेस उत्तेजित है और संघ भी बैकफुट पर चला गया है. सुदर्शन के आस पास के लोगों का कहना है कि सुदर्शन जी भुलक्कड़ हो गये हैं और उन्हें कुछ ठीक से याद नहीं रहता. शायद इसीलिए उन्होंने इतनी बड़ी चूक कर दी. ...
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सोनिया का सच जान बेकाबू क्यों होते हो?
एक बार फिर लोकतंत्र पर आपातकाल मंडरा पड़ा है. राजमाता सोनिया गांधी के सिपहसालारों ने कांग्रेसी गुण्डों, माफियाओं और लोकतंत्र के हत्यारों का आह्वान किया है कि वह देशभर में संघ कार्यालयों पर धावा बोल दे. इसका तत्काल प्रभाव हुआ और कांग्रेसी गुण्डों ने संघ के दिल्ली मुख्यालय पर धावा भी बोल दिया. ठीक वैसे ही जैसे इंदिरा गांधी की मौत के बाद सिखों को निशाना बनाया गया था. हिंसक और अलोकतातंत्रिक मानसिकता से ग्रस्त कांग्रेसी सोनिया का सच जानकर आखिर इस तरह बेकाबू क्यों हो रहे हैं?...
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नये निजाम के दामन पर है ज्यादा बड़ा दाग
मुंबई। महाराष्ट्र के नए निजाम भी कोई दूध के धुले नहीं हैं। कांग्रेस आलाकमान ने अशोक चव्हाण को फर्जीवाड़े से फ्लैट पाने के आरोप में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की गद्दी से हटा दिया। लेकिन नए मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण भी उसी तरह के फर्जीवाड़े में गले तक डूबे हुए हैं। उन्होंने जितने बड़े बड़े झूठ बोलकर सरकार से फ्लैट हथियाए हैं वे कांग्रेस के लिए ज्यादा दागदार हैं।...
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अजमेर चार्जशीट और संघी उछल-कूद
बढ़ते पैमाने पर इसके साक्ष्य सामने आ रहे हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर एस एस) से जुड़े लोगों का आतंकवादी हमलों में हाथ रहा है। इन हालात में आर एस एस इस पुराने सूत्र पर चल रहा लगता है कि हमला ही सबसे अच्छा बचाव है। उसने 10 नवंबर को देशव्यापी विरोध कार्रवाइयों का आह्वान किया है। इन कार्रवाइयों में संघ के शीर्ष नेताओं के शामिल होने की बात कही जा रही है। बहरहाल, इसकी चर्चा हम जरा बाद में करेंगे।...
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अपने होने पर ही हैरान
‘चुप्पी-चुप्पी नहीं नहीं, बोलेंगे अब सभी-सभी’ इन्हीं नारों से दाहोद (गुजरात) का सीनियर रेलवे संस्थान परिसर 31 अक्टूबर को पूरे दिन गूंजता रहा। यहां गुजरात के बड़ोदरा, पंचमहल, सुरत, भड़ूच, डांग, बालसाड और साबरकांठा जिले से लगभग तीन हजार के आस पास विमुक्त एवं घुमंतू समाज से ताल्लुक रखने वाले लोग इकट्ठे हुए थे। मौका था, अधिकार अभियान की घोषणा का। उस समाज के लिए जो इस लोकतांत्रिक देश में अधिकार का अर्थ अभी तक समझ नहीं पाएं हैं। ...
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गोली लगने के बाद क्या गांधी ने कहा था- हे राम ?
यह एक ऐसा सवाल है जिस पर अब विवाद होने लगा है. 30 जनवरी 1948 को क्या जब महात्मा गांधी को नाथूराम गोडसे ने गोली मारी तो महात्मा गांधी ने अपने मुंह से हे! राम का संबोधन किया था? उस वक्त घटनास्थल पर मौजूद रहे एक प्रत्यक्षदर्शी के डी मदान का कहना है कि "मैंने नहीं सुना था कि उन्होंने हे राम कहा था या नहीं."...
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भद्दा और बेदम रहा संघ का विरोध प्रदर्शन
स्कूल जाते बच्चों के भी हाथ में भगवा थमाकर भले ही संघ ने शक्ति प्रदर्शन की भरपूर कोशिश की हो लेकिन 10 नवम्बर का दिन उसके इतिहास में कोई बडी घटना के रूप में याद नहीं किया जायेगा। हॉ हम बात कर रहे है राजस्थान के भरतपुर जिला मुख्यालय की जहॉ देश भर की ही तरह हिन्दुवादी संघटनों ने अपने उपर लग रहे ‘भगवा आतंकवाद’ के आरोपों के विरोध में शक्ति प्रदर्शन किया था। भरतपुर जहॉ संघ प्रचारक क रूप में भाजपा के पीएमइन वेंटिग लालकृष्ण आडवानी ने अपनी सेवाऐं दी है संघ का ये विरोध प्रदर्शन एक दम भददा और हल्का रहा।...
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एनसीपी के 'दादा' का दांव
महाराष्ट्र में कांग्रेस में परिवर्तन हुआ तो राष्ट्रवादी कांग्रेस ने भी अपने पत्ते खोल दिये. राज्य में लंबे समय से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के भीतर चल रही सत्ता के दावेदारी पर एनसीपी ने आखिरकार प्रदेश की प्रशासनिक कमान अपनी ओर से शरद पवार के भतीजे अजीत पवार को सौंप दी है. अब गुरुवार को शाम साढ़े चार बजे पृथ्वीराज चव्हाण के साथ अजीत "दादा" पवार उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे....
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पीएमओ वाले पृथ्वीराज
महाराष्ट्र के नये मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण यूपीए सरकार पार्ट वन और पार्ट टू में बतौर पीएमओ मिनिस्टर जाने जाते हैं. प्रधानमंत्री कार्यालय में रहते हुए भी उन्होंने कभी ताकतवर होने का दंभ नहीं पाला और चुपचाप काम करते रहे. बिट्स पिलानी से बीई और बर्कले विश्वविद्यालय से एमएस की डिग्री हासिल करनेवाले पृथ्वीराज की राजनीतिक कमेस्ट्री ने उनके सार्वजनिक जीवन में पहली बार इतना गाढ़ा रंग उड़ेला है....
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सुलग रहा है मेरठ 'हिन्दुस्तान'
एक ओर हिन्दुस्तान अखबार अपनी अलग कंपनी बनाकर अखबार को चमकाने और अखबार का विस्तार करने में लगा है वहीं दूसरी ओर हिन्दुस्तान के विभिन्न संस्करणों में हालात ठीक नहीं है. हिन्दुस्तान के मेरठ संस्करण में इन दिनों इस्तीफे दिये जा रहे हैं लेकिन प्रचारित किया जा रहा है कि जो आफिस नहीं आ रहे हैं वे छुट्टी पर चले गये हैं....
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आलोक तोमर के बगल में बसे किशोर मालवीय
सीएनईबी में पहले से एक सलाहकार संपादक थे- आलोक तोमर. अब दूसरे सलाहकार संपादक भी वहां नियुक्त हो गये हैं किशोर मालवीय. उन्होंने सीएनईबी चैनल के साथ बतौर कंसल्टिंग एडिटर अपनी नई पारी की शुरुआत की है। सीएनईबी से पहले वे ‘वायस ऑफ इंडिया’ न्यूज चैनल के साथ जुड़े हुए थे। उन्होंने करीब दो दशक के कॅरियर में देश के नामी-गिरामी मीडिया संस्थानों में कई जिम्मेदारियां निभाईं हैं।...
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सुरक्षा परिषद की छांव में खेती पर दांव
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने संसद में दिये गये अपने भाषण में भारत से मिले प्यार की भूरि भूरि प्रशंसा जरूर की लेकिन अपनी व्यावसायिक मजबूरियों को छिपा नहीं सके. बराक ओबामा ने संसद के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करते हुए जहां एक ओर भारत को महाशक्ति करार देकर उसके लिए संयुक्त राष्ट्र में स्थायी सदस्यता को अपना समर्थन दिया वहीं भारत और अमेरिका द्वारा मिलकर खेती के क्षेत्र में एक और हरित क्रांति के आगाज की घोषणा की....
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आतंक नहीं कश्मीर केन्द्रित हुई ओबामा यात्रा
रविवार की देर शाम भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा आयोजित भोज में ओमर अब्दुल्ला के शामिल होने से जो आशंका पैदा हुई थी वह सोमवार को हैदराबाद हाउस में और प्रबल रूप में सामने आ गयी जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अमेरिकी राष्ट्रपति की उपस्थिति में स्वीकार किया कि वे पाकिस्तान से बात करते वक्त "के" शब्द पर बात करने से नहीं कतराते हैं....
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भारत से धंधा, पाक को चंदा
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक हुसैन ओबामा ने अपना तीन दिवसीय दौरा पूरा कर लिया. मुंबई उतरकर दिल्ली दरबार तक उनकी दस्तक भारत पर अमेरिका के मजबूत पकड़ की मिसाल बन गया. निश्चित रूप से उनका दौरा भारत के लिए उतना महत्वपूर्ण नहीं जितना खुद अमेरिका के लिए है. मंदी के दौर से जूझ रहे अमेरिका को "कारपोरेट" जगत का धंधा दिलाने के लिए उन्होंने न केवल भारत को महाशक्ति करार दे दिया बल्कि सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता का समर्थन भी कर दिया....
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