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बात करामात

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जातिवाद, क्षेत्रवाद, धर्मवाद का शिकार माओवाद

बिहार में हुई हाल की घटनाओं ने साबित कर दिया है कि माओवादी अब महज डकैतों और माफिया गुंडों का समूह है जिनसे सिर्फ डरा जा सकता है. विचारधारा और शोषण के खिलाफ लड़ने के उनके जज्बे के कारण लोगों में उनके प्रति जो सम्मान बचा था वह भी अब खत्म होने की कगार पर है. मगर इस क्राइसिस के बाद जो सबसे चौकाने वाली बात उभर कर सामने आयी है वह इन समूहों की वास्तविकता बन चुके जातिवादी झगड़े हैं.
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चलाचली की बेला में चिदम्बरम

भारत गणराज्य के गृह मंत्री पलनिअप्पम चिदम्बरम की रूखसती की बेला आ गई है। एक के बाद एक हर मोर्चे पर नाकामी का सेहरा अपने सर बांधने वाले चिदम्बरम के खिलाफ कांग्रेस में भी अंदर ही अंदर रोष और असंतोष के स्वर खदबदाने लगे हैं।
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असफल गृहमंत्री का सफल 'आतंकवाद'

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हमारे केंद्रीय गृहमंत्री पी.चिदबरम ने पुलिस प्रमुखों के समेलन में ''भगवा आतंकवाद'' का नया शगूफा छोड़ दिया। वैसे इस केंद्रीय मंत्रिमंडल के कई मंत्री बयानों के मामले में शूरवीर की प्रसिद्धी प्राप्त कर चुके है। पी. चिदबरम भी ऐसे ही मंत्री हैं जो अपने बयानों के कारण चर्चा में रहते हैं. आतंकवाद का मामला हो, नकसलवाद का मामला हो, कश्मीर समस्या का मामला हो, या देश में घटित कोई भी अन्य महत्वपूर्ण मामला हो उनके आतंकवाद की थ्योरी भले ही सफल हो रही हो लेकिन बतौर गृहमंत्री वे असफल साबित हो रहे हैं....
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मुसलमान ही सुलझाएं अयोध्या विवाद

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अयोध्या विवाद के संभावित फैसले पर मुझे झटका तब लगा, जब मेरे एक दोस्त की पन्द्रह साल की बेटी का एक एसएमएस मिला। एसएमएस में लिखा था- 'बाबरी मस्जिद का फैसला आने वाला है। दुआ कीजिए कि फैसला मुसलमानों के हक में हो। इस एसएमएस को अपने मुसलिम भाईयों को फॉरवर्ड करें।' इस बात का मतलब यह है कि अयोध्या फैसले की सुरसराहट उन बच्चों में भी हो गयी है, जिन्होंने 1992 के बाद दुनिया देखी है। ...
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नियमगिरी में अमन चैन की वापसी

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भारत अपने विकास के पथ पर तो बढ़ता जा रहा है लेकिन साथ-साथ देश में अमीर-गरीब के बीच की दूरियां भी लगातार बढती ही जा रही हैं। देश के कई भू-भागों में आज भी प्राकृतिक संसाधनों पर स्वामित्व का संघर्ष अपने चरम पर हैं, जहाँ एक ओर अपने जीवन यापन के लिए जंगल और प्रकृति पर निर्भर आदिवासी समुदाय है, तो उनके सामने सर्वाधिकार युक्त एवं सशक्त उद्योगपति हैं। इस संघर्ष में जीत किसी होगी ये एक बड़ा सवाल होता हैं। भय और औद्योगिक आतंक के साए में जी रहे उड़ीसा के कालाहांडी जिले के नियमगिरि पहाड़ों के आसपास निवास करने वाले आदिवासी समुदाय के लोग अब निस्संदेह चैन की साँस ले सकते है।...
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जयराम की जय हो!

अगर दिल्ली दरबार में एक मंत्री भी अपना काम इमानदारी से करने का फैसला कर ले तो बहुत कुछ बदल सकता है. आज के ६३ साल पहले व्यवस्था बदल देने के लिए सत्ता में आई कांग्रेस के शुरुआती मंत्री तो बहुत ही इमानदार थे ,शायद इसीलिये बहुत सारी चीज़ें ऐसी हुईं जिनकी उम्मीद आज़ादी के लिए संघर्ष करने वाले वीरों ने देखी थी लेकिन वक़्त के साथ बेईमानों की संख्या बढ़ने लगी और बहुत सारे फैसले पैसे के बल पर होने लगे.
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हिन्दुस्तानी होने की आम बीमारी

हिंदुस्तानी आदमी की सबसे बड़ी कमजोरी है कि उसमें किलर इंस्टिंक्ट का सर्वथा अभाव होता है. दैनंदिन राजनय से लेकर खेल के मैदान तक उसकी यह कमी देखी जा सकती है. हमेशा हिन्दवी समुदाय इस तथ्य को बिसार देता है कि 'क्षमा शोभती उस भुजंग को जिसके पास गरल हो. ' अर्थात क्षमा उस सर्प का आभूषण है जिसके पास गरल यानी जहर हो. जिसके पास जहर ही नहीं होगा उस सांप को कोई केचुए से ज्यादा महत्त्व क्यों देगा? हिंदुस्तानी हमेशा बिना जहर दिखाए क्षमा करने निकल पड़ते हैं इसलिए जीवन के हर क्षेत्र में उन्हें अपमान का घूँट पीना पड़ता है.
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अंधेरे में रहने को मजबूर है राजमाता की रियाया

भारत गणराज्य में छोटे बच्चे से अगर पूछा जाए कि देश पर वास्तव में शासन कौन कर रहा है तो निश्चित तौर पर उसका जवाब होगा ‘सोनिया गांधी‘। नेहरू गांधी परिवार के नाम पर आधी सदी से ज्यादा राज करने वाली कांग्रेस ने अघोषित तौर पर कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी को अपनी राजमाता और कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी को अपना युवराज मान ही लिया है। क्या आप जानते हैं कि राजमाता और युवराज की सल्तनत का आलम क्या है?
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सिर्फ आर्थिक अपराध नहीं है जन धन की लूट

पिछले कुछ समय से ऐसा कोई सप्ताह नहीं बीतता जब समाचार माध्यमों में किसी न किसी सरकारी अधिकारी, राजनेता, या ठेकेदार के यहाँ पड़े छापों में करोड़ों रुपयों का अवैध धन और किलो की तौल में सोना निकलने का समाचार नहीं आता। समाचार माध्यमों का आम पाठक, श्रोता या दर्शक इसे कौतूहल या ईर्षा के भाव से देखता है और निरीह सा अपनी व्यवस्था में आस्था घटाते हुये चुप बैठ जाता है। इन समाचारों से केवल अल्पकालीन सनसनी भर पैदा होती है, और फिर आरोपियों को मामला रफा दफा करने के लिए पर्याप्त समय देते हुये ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।
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आजाद कर दो कश्मीर

अगर कश्मीरी हिंदुस्तान में नहीं रहना चाहते तो उन्हें यह अनुभव कर लेने दिया जाना चाहिये कि वे जंगी और आर्थिक समस्याओं से घिरे अस्थिर पाकिस्तान में रह लें या फिर नेपाल या बांग्लादेश की तरह आजाद रहकर तय तक लें कि प्रगति के दौर में वह कहां तक जा पाते हैं. हालांकि इस देश ने अपने किसी वासी को यह तय करने का मौका नहीं दिया कि वह देश में रहना चाहता है या नहीं मगर अगर कश्मीर खुद को थोड़ा अलग महसूस कर रहा है तो उसे मौका दिया जाना चाहिये. बनिस्पत उसे हर साल दसियों हजार करोड़ के स्पेशल पैकेज दिये जायें और उसमें अपनी हजारों फौजों को मौत से मुकाबला करने के लिये ढकेल दिया जाय.
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सुदर्शन का (कु) दर्शन
जबसे आरएसएस के लोगों की आतंकवादी घटनाओं में संलिप्तता सामने आयी है, तब से आरएसएस के नेता बौखला गए हैं। इस बौखलाहट में ही शायद संघ के इतिहास में पहली बार हुआ है कि इसके स्वयंसेवक विरोध प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर उतरे। इसी बौखलाहट में आरएसएस के एक्स चीफ केएस सुदर्शन का मानसिक संतुलन बिगड़ गया और सोनिया गांधी के बारे में ऐसे शब्द बोल दिए, जिन्हें एक विकृत मानसिकता का आदमी ही बोल सकता है।...
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सीआईए नहीं केजीबी एजंट कहिए जनाब
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरसंघचालक ने 10 नवंबर को सोनिया गांधी पर सीआईए एजंट होने का आरोप लगाकर सनसनी पैदा कर दिया है. पूरी की पूरी कांग्रेस उत्तेजित है और संघ भी बैकफुट पर चला गया है. सुदर्शन के आस पास के लोगों का कहना है कि सुदर्शन जी भुलक्कड़ हो गये हैं और उन्हें कुछ ठीक से याद नहीं रहता. शायद इसीलिए उन्होंने इतनी बड़ी चूक कर दी. ...
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सोनिया का सच जान बेकाबू क्यों होते हो?
एक बार फिर लोकतंत्र पर आपातकाल मंडरा पड़ा है. राजमाता सोनिया गांधी के सिपहसालारों ने कांग्रेसी गुण्डों, माफियाओं और लोकतंत्र के हत्यारों का आह्वान किया है कि वह देशभर में संघ कार्यालयों पर धावा बोल दे. इसका तत्काल प्रभाव हुआ और कांग्रेसी गुण्डों ने संघ के दिल्ली मुख्यालय पर धावा भी बोल दिया. ठीक वैसे ही जैसे इंदिरा गांधी की मौत के बाद सिखों को निशाना बनाया गया था. हिंसक और अलोकतातंत्रिक मानसिकता से ग्रस्त कांग्रेसी सोनिया का सच जानकर आखिर इस तरह बेकाबू क्यों हो रहे हैं?...
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नये निजाम के दामन पर है ज्यादा बड़ा दाग
मुंबई। महाराष्ट्र के नए निजाम भी कोई दूध के धुले नहीं हैं। कांग्रेस आलाकमान ने अशोक चव्हाण को फर्जीवाड़े से फ्लैट पाने के आरोप में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की गद्दी से हटा दिया। लेकिन नए मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण भी उसी तरह के फर्जीवाड़े में गले तक डूबे हुए हैं। उन्होंने जितने बड़े बड़े झूठ बोलकर सरकार से फ्लैट हथियाए हैं वे कांग्रेस के लिए ज्यादा दागदार हैं।...
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अजमेर चार्जशीट और संघी उछल-कूद
बढ़ते पैमाने पर इसके साक्ष्य सामने आ रहे हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर एस एस) से जुड़े लोगों का आतंकवादी हमलों में हाथ रहा है। इन हालात में आर एस एस इस पुराने सूत्र पर चल रहा लगता है कि हमला ही सबसे अच्छा बचाव है। उसने 10 नवंबर को देशव्यापी विरोध कार्रवाइयों का आह्वान किया है। इन कार्रवाइयों में संघ के शीर्ष नेताओं के शामिल होने की बात कही जा रही है। बहरहाल, इसकी चर्चा हम जरा बाद में करेंगे।...
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अपने होने पर ही हैरान
‘चुप्पी-चुप्पी नहीं नहीं, बोलेंगे अब सभी-सभी’ इन्हीं नारों से दाहोद (गुजरात) का सीनियर रेलवे संस्थान परिसर 31 अक्टूबर को पूरे दिन गूंजता रहा। यहां गुजरात के बड़ोदरा, पंचमहल, सुरत, भड़ूच, डांग, बालसाड और साबरकांठा जिले से लगभग तीन हजार के आस पास विमुक्त एवं घुमंतू समाज से ताल्लुक रखने वाले लोग इकट्ठे हुए थे। मौका था, अधिकार अभियान की घोषणा का। उस समाज के लिए जो इस लोकतांत्रिक देश में अधिकार का अर्थ अभी तक समझ नहीं पाएं हैं। ...
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गोली लगने के बाद क्या गांधी ने कहा था- हे राम ?
यह एक ऐसा सवाल है जिस पर अब विवाद होने लगा है. 30 जनवरी 1948 को क्या जब महात्मा गांधी को नाथूराम गोडसे ने गोली मारी तो महात्मा गांधी ने अपने मुंह से हे! राम का संबोधन किया था? उस वक्त घटनास्थल पर मौजूद रहे एक प्रत्यक्षदर्शी के डी मदान का कहना है कि "मैंने नहीं सुना था कि उन्होंने हे राम कहा था या नहीं."...
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भद्दा और बेदम रहा संघ का विरोध प्रदर्शन
स्कूल जाते बच्चों के भी हाथ में भगवा थमाकर भले ही संघ ने शक्ति प्रदर्शन की भरपूर कोशिश की हो लेकिन 10 नवम्बर का दिन उसके इतिहास में कोई बडी घटना के रूप में याद नहीं किया जायेगा। हॉ हम बात कर रहे है राजस्थान के भरतपुर जिला मुख्यालय की जहॉ देश भर की ही तरह हिन्दुवादी संघटनों ने अपने उपर लग रहे ‘भगवा आतंकवाद’ के आरोपों के विरोध में शक्ति प्रदर्शन किया था। भरतपुर जहॉ संघ प्रचारक क रूप में भाजपा के पीएमइन वेंटिग लालकृष्ण आडवानी ने अपनी सेवाऐं दी है संघ का ये विरोध प्रदर्शन एक दम भददा और हल्का रहा।...
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एनसीपी के 'दादा' का दांव
महाराष्ट्र में कांग्रेस में परिवर्तन हुआ तो राष्ट्रवादी कांग्रेस ने भी अपने पत्ते खोल दिये. राज्य में लंबे समय से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के भीतर चल रही सत्ता के दावेदारी पर एनसीपी ने आखिरकार प्रदेश की प्रशासनिक कमान अपनी ओर से शरद पवार के भतीजे अजीत पवार को सौंप दी है. अब गुरुवार को शाम साढ़े चार बजे पृथ्वीराज चव्हाण के साथ अजीत "दादा" पवार उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे....
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पीएमओ वाले पृथ्वीराज
महाराष्ट्र के नये मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण यूपीए सरकार पार्ट वन और पार्ट टू में बतौर पीएमओ मिनिस्टर जाने जाते हैं. प्रधानमंत्री कार्यालय में रहते हुए भी उन्होंने कभी ताकतवर होने का दंभ नहीं पाला और चुपचाप काम करते रहे. बिट्स पिलानी से बीई और बर्कले विश्वविद्यालय से एमएस की डिग्री हासिल करनेवाले पृथ्वीराज की राजनीतिक कमेस्ट्री ने उनके सार्वजनिक जीवन में पहली बार इतना गाढ़ा रंग उड़ेला है....
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सुलग रहा है मेरठ 'हिन्दुस्तान'
एक ओर हिन्दुस्तान अखबार अपनी अलग कंपनी बनाकर अखबार को चमकाने और अखबार का विस्तार करने में लगा है वहीं दूसरी ओर हिन्दुस्तान के विभिन्न संस्करणों में हालात ठीक नहीं है. हिन्दुस्तान के मेरठ संस्करण में इन दिनों इस्तीफे दिये जा रहे हैं लेकिन प्रचारित किया जा रहा है कि जो आफिस नहीं आ रहे हैं वे छुट्टी पर चले गये हैं....
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आलोक तोमर के बगल में बसे किशोर मालवीय
सीएनईबी में पहले से एक सलाहकार संपादक थे- आलोक तोमर. अब दूसरे सलाहकार संपादक भी वहां नियुक्त हो गये हैं किशोर मालवीय. उन्होंने सीएनईबी चैनल के साथ बतौर कंसल्टिंग एडिटर अपनी नई पारी की शुरुआत की है। सीएनईबी से पहले वे ‘वायस ऑफ इंडिया’ न्यूज चैनल के साथ जुड़े हुए थे। उन्होंने करीब दो दशक के कॅरियर में देश के नामी-गिरामी मीडिया संस्थानों में कई जिम्मेदारियां निभाईं हैं।...
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सुरक्षा परिषद की छांव में खेती पर दांव
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने संसद में दिये गये अपने भाषण में भारत से मिले प्यार की भूरि भूरि प्रशंसा जरूर की लेकिन अपनी व्यावसायिक मजबूरियों को छिपा नहीं सके. बराक ओबामा ने संसद के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करते हुए जहां एक ओर भारत को महाशक्ति करार देकर उसके लिए संयुक्त राष्ट्र में स्थायी सदस्यता को अपना समर्थन दिया वहीं भारत और अमेरिका द्वारा मिलकर खेती के क्षेत्र में एक और हरित क्रांति के आगाज की घोषणा की....
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आतंक नहीं कश्मीर केन्द्रित हुई ओबामा यात्रा
रविवार की देर शाम भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा आयोजित भोज में ओमर अब्दुल्ला के शामिल होने से जो आशंका पैदा हुई थी वह सोमवार को हैदराबाद हाउस में और प्रबल रूप में सामने आ गयी जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अमेरिकी राष्ट्रपति की उपस्थिति में स्वीकार किया कि वे पाकिस्तान से बात करते वक्त "के" शब्द पर बात करने से नहीं कतराते हैं....
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भारत से धंधा, पाक को चंदा
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक हुसैन ओबामा ने अपना तीन दिवसीय दौरा पूरा कर लिया. मुंबई उतरकर दिल्ली दरबार तक उनकी दस्तक भारत पर अमेरिका के मजबूत पकड़ की मिसाल बन गया. निश्चित रूप से उनका दौरा भारत के लिए उतना महत्वपूर्ण नहीं जितना खुद अमेरिका के लिए है. मंदी के दौर से जूझ रहे अमेरिका को "कारपोरेट" जगत का धंधा दिलाने के लिए उन्होंने न केवल भारत को महाशक्ति करार दे दिया बल्कि सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता का समर्थन भी कर दिया....
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