Home | बात करामात | कपालभांति से भूख को मारेंगे रामदेव

कपालभांति से भूख को मारेंगे रामदेव

और जब लोग कम खायेंगे तो खाद्यान्न संकट अपनेआप खत्म हो जाएगा. हरिद्वार में 70 दिन में बनकर तैयार योगग्राम के उद्घाटन के मौके पर उन्होंने लोगों को सलाह दी कि "कपालभांति करने से भूख कम लगती है और शरीर को भी पूरी ताकत मिलती है. इससे मनुष्य चुस्त-दुरूस्त रहता है." रामदेव का मानना है कि देश को खाद्यान्न संकट से उबरना है तो और कोई रास्ता नहीं है. 

रामदेव ने ऐलान किया है कि योग के बाद अब वे खेती के क्षेत्र में उतरने जा रहे हैं. उन्होंने कहा है कि देश में फैलते खाद्यान्न संकट को देखते हुए यह जरूरी हो गया है कि खेती के क्षेत्र में ऐसा उत्पादन हो जो योग क्रांति के अलावा देश में कृषि क्रांति पैदा कर सके.खेती के धंधे में उतरने का कारण बताते हुए वे कहते हैं कि आज खेती घाटे का सौदा हो गयी है और किसान को उसकी उपज का सही भुगतान नहीं मिल रहा है. दूसरी ओर बहुराष्ट्रीय कंपनियां जो खाने-पीने की चीजें परोस रही हैं वह स्वास्थ्य के लिए अच्छी नहीं होती. इसलिए अब पतंजलि योगपीठ ने निर्णय किया है कि वह देशभर में भोजन की मार्केटिंग भी करेगा. रामदेव का तर्क है कि उनके ऐसा करने से खाद्यान्न संकट कम होगा और किसानों को उसकी उपज का सही मूल्य मिलेगा. वे कहते हैं कि जैसे योग के नुख्से उन्होंने लोगों को दिये हैं उसी तरह अब वे खेती के लिए एक नया नुख्सा तैयार कर रहे हैं. उनको विश्वास है कि इससे देश में योगक्रांति के बाद कृषिक्रांति का सूत्रपात होगा. 

स्वामी रामदेव ने 9 जून को अपने जिस योगग्राम का उद्घाटन मुख्यमंत्री भुवनचंद्र खंडूरी के हाथों करवाया है उसको बनाने में 15 करोड़ रूपये का खर्च आया है. यहां पर एक साथ 25 हजार लोगों के रहने की व्यवस्था है. उनका कहना है कि ऐसा हेल्थ रिसोर्ट अगर कोई कंपनी बनाती तो इससे कई गुना अधिक पैसा खर्च होता. उनका कहना है कि उन्होंने बहुत कम पैसों में यह योगग्राम तैयार करवा दिया है. यह योगग्राम हरिद्वार जिला मुख्यालय रोशनाबाद से सटे ग्राम औरंगाबाद में बना है. जिसे लेकर स्थानीय लोग लगातार विरोध कर रहे हैं. 

योगग्राम का स्थानीय लोगों द्वारा विरोध करने का कारण जमीन को जबरिया कब्जा करने का आरोप है. यह जमीन रामदेव ने हिमालया ड्रग कंपनी से खरीदी है. आरोप है कि हिमालया ड्रग कंपनी ने अपनी पहुंच का इस्तेमाल करके स्थानीय ग्रामीणों से यह जमीन औने-पौने दाम में खरीदी थी. अब वही जमीन रामदेव ने हिमालया ड्रग कंपनी से खरीद ली है. योगग्राम का उद्घाटन भले ही प्रदेश के मुख्यमंत्री भुवनचंद्र खंडूरी ने कर दिया हो लेकिन स्थानीय लोगों का विरोध अभी जारी है. रामदेव का कहना है कि बेहतर स्वास्थ्य के लिए अपने विभिन्न प्रकल्पों के माध्यम से वे अब तक 400 करोड़ रूपये का निवेश कर चुके हैं.      

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दीपक भारतदीप on 10 June, 2008 23:59;18
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आपने एक जगह लिखा है कि किसानों से यह जमीन औने पौने दामों में खरीदी गयी जिसे अब बाबा रामदेव के योग संस्थान को बेचा गया। अब ग्रामीण उसका विरोध कर रहे हैं। एक बात समझ से परे है कि एक तरफ यह मान रहे हैं कि जमीन खरीदी गयी फिर इसका विरोध क्यों हो रहा है जबकि यह जमीन आश्रम वालों ने किसी कंपनी से खरीदी है। वैसे आप जानते हैं कि आजकल जिसके पास पैसा है उसकी ताकत कितनी अधिक है पर मुश्किल यह है कि कई विरोध भी दिखाने के लिए होते हैं। एक बात मैं मानता हूं कि साधू संतों को इस मायाजाल से परे रहना चाहिए। एक योगी को तो ऐसे आश्रमों से परहेज करना चाहिए जो माया के विस्तार का प्रतीक हों।
दीपक भारतदीप
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Dr Durgaprasad Agrawal on 11 June, 2008 00:45;55
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बाबा जी योग का प्रचार प्रसार करते हैं, यह अच्छी बात है, लेकिन वे अपने बडबोलेपन के कारण अक्सर गदबड कर जाते हैं. कपालभांति से भूख कम करने का दावा एक ऐसी ही गडबड है. मैं तो यह आश्चर्य कर रहा हूं कि उन्होंने कर्नल किरोडी सिंह बैंसला को यह सलाह क्यों नहीं दी कि वे भी कपाल भाति करे, इससे गुर्जरों को आरक्षण मिल जाएगा. बाबा जी अक्सर बे सिर पैर के दावे करते रहे हैं, लेकिन वे जानते हैं कि ऐसा करके चर्चा में बने रहने से उनके धन्धे पर अनुकूल प्रभाव पडेगा. तभी तो वे योग सिखाते सिखाते अरबपति बन बैठे हैं.
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vivek on 11 June, 2008 03:42;20
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भारतदीप जी, शायद आप ज़मीन अधिग्रहण और कोर्पोरेट राज से अनजान हैं, चलिए, आपको उत्तराखंड की बात समझ नहीं आ रही, पर सिंगुर और नंदीग्राम की सरकारी गुंडागर्दी की कुछ तो जानकारी होगी आपको! बस यही सब जगहों का हाल है.
औने पौने दामों में खरीदने का मतलब है की, आपकी ज़मीन मेरी कम्पनी को पसंद आ जाती है, कम्पनी सरकार से सांठ-गाँठ करके 'विकास' के नाम पर आपकी अरबों की भूमि पाँच-छः हज़ार रुपये एकड़ मुआवजे पर जबरजस्ती अधिग्रहित कर लेती है, और आपको अपनी ही ज़मीन से बेदखल कर दिया जाता है, और वह मुआवजा भी सालों चक्कर काटने के बाद मिलता है.
और यह 'विकास' के नाम पर ली गई भूमि कम्पनी की संपत्ति हो जाती है, जिसका वह जैसा चाहे उपयोग करे, बेचना भी चाहे तो बेचे.
आप जैसों की समस्या ही यही है, लिखते जाते है, अपनी बात कहते जाते हैं, पर पढ़ते बहुत कम हैं, दूसरों की सुनते नहीं है! और परिणाम होता है वैसे ही मूढ़तापूर्ण प्रशन जो आपने पूछे है.
विस्फोट डॉट कॉम के अब तक के सारे लेख पढ़ लें, शायद आपका कुछ ज्ञानवर्धन हो सके, की इस पावन भारत भूमि पर क्या क्या नहीं हो रहा.
बाबा रामदेव के निस्वार्थ आदर्शवादी रूप से योग शिक्षण से किसी को भी शिकायत नहीं है, पर जब वह उल्टे सीधे दावे करने लग जाते हैं, और योग के नाम पर तरह तरह के धंधे खोल कर दुकान सजा लेते हैं, तब विश्वास को ठेस लगती है. अगर वह सच्चे संत हैं तो ग्रामीणों के इस आरोप की निष्पक्ष जांच कराने का दवाब सरकार पर डालें, और अगर आरोप सही पाए जाते हैं तो भूमि से अपना अधिकार छोड़ने तैयार रहें.
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Rajesh Roshan on 11 June, 2008 08:55;27
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रिलायंस इंडस्ट्रीज Divirsified कंपनी है, काफी मुनाफा होता है. रामदेव भी Divirsified हो रहे हैं.....
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अनिल रघुराज on 11 June, 2008 20:04;33
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हमारे रामदेव लगता है कि उस यूरोपीय रानी के 'यौगिक' पुनर्जन्म हैं जिसने कहा था कि रोटी नहीं है तो ब्रेड खाओ। उसने तो खाने की बात कही थी, ये तो भूख ही मिटाने की सलाह दे रहे हैं। धन्य हैं रामदेव जी!!!
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मैं नियमित रूप से कपाल भांति करता रहा हूं (लगभग एक माह से बं‍द है) किन्तु मुझे बराबर भूख लगती रही है और मेरे आहार में कोई कमी नहीं हुई है । मुझे यह दावा कि कपालभांति से भूख कम होती है, सच नहीं लगता ।

यह मेरा अपना अनुभव है - कोई सुनी-सुनाई बात नहीं ।
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ललित on 12 June, 2008 15:16;59
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रामदेव की ऐसी जादुई विज्ञापनी प्रचार-भाषा ही उनके योग-उद्योग की सफलता का राज है। एक एक शिविर के आयोजन पर 10 से15 लाखु रुपये का अग्रिम भुगतान ले लेते हैं वे। साथ ही उनके दिव्य फार्मेसी की दवाइयाँ लगभग 2 करोड़ की बिकती हैं एक एक शिविर में। अब तक लगभग 6000 करोड़ रुपये कमा चुके होंगे। फिर उनका 100 करोड़ का अस्पताल और योग-केन्द्र क्यों नहीं बना आज तक? क्या बाकी धन स्विस बैंक में है?
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visfot .com on 12 June, 2008 16:30;59
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ललित भाई आप जो बातें बता रहे हैं वह सच हैं लेकिन ऐसी बातों का कोई प्रमाण नहीं होता. लेकिन रामदेव के खिलाफ बहुत कुछ ऐसा है जो मीडिया में अब तक आया नहीं है.
मसलन ऐसा क्यों होता है कि उनके गुरू का अपहरण तब हो जाता है जब वे एक दिन पहले ही रामदेव की बजाय बालकृष्ण को दिव्ययोग मंदिर ट्रस्ट का उत्तराधिकारी बनाने की घोषणा करते हैं. आज तक नहीं पता चला कि रामदेव के गुरू को जमीन खा गया या आसमान निगल गयी.
खबर यह भी है कि वे उत्तराखण्ड सरकार पर वे दबाव डाल रहे हैं कि योग विश्वविद्यालय बनाने के लिए सरकार उन्हें मुफ्त में 2200 एकड़ जमीन दे.
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gopal gupta on 23 June, 2008 15:26;41
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baba ji ke bare me ye sub bat sun kar mera dil dukhne laga. pl es type se aap log kisi sidh puroos per comments kar ke apne liye paap ke bhagi kyo ban rahe hai.
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alok on 27 June, 2008 20:11;31
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aaj ramdeo ji maharaj pure visva me bhartiya yog ko bade pemaine per felane ki baat kar rahe hai .jabki vo kabhi bhi koi tarah ka daan ya koi shivir jaise ankho ka, polio ka ya haddi ka ya aur bhi koi sahayata jaise akaal pidit aur bhukamp valo ki aur garibo ke betiyo ki sadi adi nahi karva sakte kya ye sab paisa kamane ka ik fanda hai
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