बिहार की मीडिया में यौनाचार की परंपरा
मीडिया में भ्रस्टाचार के साथ ही मीडिया में यौनाचार की परम्परा भी इन दिनों कुलाचे मार रही है। हालाकि मीडिया में यौनाचार की परम्परा काफी पुरानी है। पहले और आज में अंतर केवल इतना है की पहले इक्का दुक्का लोग गलत यौन संबंधो के लिए जाने जाते थे , लेकिन आज बहुतेरे मीडिया कर्मी सेक्सुअल संबंधो को अपना अधिकार और कर्त्तव्य मान बैठे है।
देश में ऐसा न कोई राज्य बचा है और न ही कोई मीडिया संस्थान जहा सेक्सुअल संबंधो की कहानियाँ मौजूद नहीं है। ईमान की पत्रकारिता ख़त्म हो जाने के बाद पतित हिन्दी पत्रकारिता का जो चेहरा हमारे सामने आया है, उसकी चर्चा करने में भी शर्म आती है। पटना में पिछले कुछ महीनो में रंडीवाज पत्रकारों की एक लम्बी सूची तैयार हो गयी है। इसमें कुछ चैनलों के कलाकार है तो कुछ अखवारो के। इस खेल में महिला पुरुष पत्रकारों ने मिलकर ऐसी नंगई की है कि पूरी पत्रकारिता पर ही कालिख पुत गयी है। किस चैनल में किस कथित पत्रकार ने कैसी रासलीला की है और किस अखबारी पत्रकार ने कितनी महिला पत्रकारों का शोषण किया है, इनके नाम जारी कर दिए जाए तो संभव है कि ये लोग कही के नहीं रहेंगे। इनके घर भी टूटेंगे और इनका सामाजिक बहिस्कार भी होगा। लेकिन इशारों में ही इन रंडीबाजों के बारे में कुछ तस्वीर तो खींची ही जा सकती है।
अभी कुछ महीने पहले की घटना है कि एक चैनल के दफ्तर में उस वक्त मार पीट शुरू हो गयी जब एक पत्रकार की रखैल महिला पत्रकार के साथ चैनल प्रमुख बंद कमरे में मजा ले रहे थे। बंद कमरे में अपनी प्रेमिका के साथ अपने बॉस को देख कर रिपोर्टर ने अपना आपा खो दिया और बॉस को पीट दिया। बता दें कि उस बॉस ने उस महिला पत्रकार को इन्टर्नशिप से सीधे स्टाफ बना दिया था। बाद में दोनों पत्रकार संस्थान से बाहर कर दिए गए। आजकल दोनों एक दूसरे चैनेल में पटना में ही काम कर रहे है और दिल्ली में बैठे बॉस आजकल पटना कम जा रहे हैं।
पटना में ही एक दूसरे चैनल की दो महिला पत्रकारों में से एक ब्यूरो प्रमुख ने जामकर लुफ्त उठाया । मीडिया में बाते फ़ैल गयी और एक दिन पत्रकार महोदय पिट गए। चर्चा है कि पत्रकार भाई ने दोनों को अपने यहाँ काम देने का वादा किया था। मामला पत्रकार भाइयों तक ही सिमित नहीं है। कई मामले तो ऐसे भी है जिनमे कई महिला पत्रकारों ने अपनी नौकरी के लिए या फिर आगे बढ़ने के लिए अपने साथी पत्रकार का भरपूर उपयोग किया। पटना में कम से कम छह ऐसी महिला पत्रकार है जिन्होंने अपने पीछे कई पत्रकारों की वर्जनाये तोड़ दी है। इनमे से दो महिला पत्रकार आजकल दिल्ली पहुंच गयी है और एक अखवार का हिस्सा बन गयी है।
मुजफ्फरपुर में दो वरिष्ठ पत्रकार वेश्या के कोठे पर पकड़े गए और पुलिस से पिट गए । इनमे से एक राष्ट्रीय चैनल में काम करते हैं। यहीं के एक पत्रकार ने गलत तरीके से इतना धन कमाया है कि उसे रोज लड़की की जरूरत होती है। कहा जा रहा है की ये महोदय हर रोज नेताओं को भी "माल" पहुचाने का काम करते हैं।
पटना में एक अखवार के सम्पादक आये तो थे दरिद्र के रूप में , लेकिन आज वो करोड़ों के मालिक हैं। हर शाम इन्हें शराब के साथ "माल" भी चाहिए होता है। इन महोदय ने अब तक दर्जनों महिला पत्रकारों को बर्बाद किया है, या कहें तो आबाद कर रखा है। इनकी रंडीबाजी की चर्चा पटना से लेकर दूर दिल्ली तक है। इनके कर्मों के कारण पटना की कोई चार महिला पत्रकारों की शादी टूट चुकी है। इन पत्रकारों की सीडी बनी हुई है। आरा की एक महिला पत्रकार का सम्बन्ध एक नेता से है और पटना के मीडिया सर्किल में इस महिला के खौफ से कई बड़े पत्रकार भी डरते है। नेताओं के यौनाचार के बाद मीडिया में यौनाचार की कहानी समाज के लिए एक नयी जानकारी हो सकती है। हमारी नजर इस पर है।
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दिल्ली में तीन नये चैनल ऐसे हैं, जहां रंडीवाज पत्रकारों की कमी नहीं है। नयी लड़की आते ही मुंह मारना शुरू कर देते हैं।
इसका मुख्य कारण यह है कि जिस मीडिया संस्थान का मालिक रसिया या रंडीवाज है, उस मीडिया संस्थानों में इस तरह के कार्य का चलन खूब है। दूसरा कारण, अयोग्यता, बेरोजगारी और चमचागिरी भी है।
aur aisa bihar me hi nahi hai. aapko har jagah ki khabar milegi intzar kare. mamle to kai tarah ke hai. kuchh ko edit kar raha hun.
अगर आप विस्फोट के लेखक हैं तो आपको इतनी हिम्मत करनी ही चाहिए. आगे जैसी आपकी मर्जी
jo bhi likha sab ka sab ghatiya type ke subject par abe suar tujhe kuch aur nazar nahin aata kya. miyan bibi razi to kya karega kazi. teri sakal se lagata hai tu hamesa se hi upechit hi rha girls ke mamlon main.
Prdeep Bhai ye visfote ka writer nahin ho sakta kyonki iski ye kahaniyaan bhadas media pe bhi mil jayengi. abe apne aap ko dekh, main to kahta hoon ki agar tu maze le sakta hai to tu bhi le , pan bakwaas mat kar.
AMIT
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