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प्रिन्ट मीडिया का 'इंडिया टीवी' है चौथी दुनिया

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मोसाद और सीआईए ने हिन्दुस्तान को बर्बाद और टुकड़ों में बांटने के लिए 'स्माइल इंडिया 2015' प्लान बनाया है। इस प्लान के तहत आने वाले समय में देश के नामचीन लोगों के चरित्र हनन, हिन्दु-मुस्लिम दंगों और बड़े लोगों की हत्याओं का दौर शुरु किया जाएगा, जिससे पूरे देश में अफरा-तफरी का माहौल पैदा होगा।

हालात 1947 सरीखे हो जाएंगे। देश को 31 भागों में बांटने की साजिश हो रही है। हालात पर काबू पाने के लिए अमेरिका भारत को गुलाम बना लेगा। आदि-आदि। यह भी कि इस काम के लिए सीआईए ने देश के बड़े-बड़े और असरदार लोगों को मुंहमांगी कीमत पर खरीद लिया है।

उपरोक्त बातें किसी सुरेन्द्र मोहन पाठक या वेदप्रकाश शर्मा के जासूसी उपन्यास के कथानक का हिस्सा नहीं हैं। ये सब देश का पहला साप्ताहिक अखबार कहे वाला 'चौथी दुनिया' अपने पिछले तीन अंकों में लिखता आ रहा है। अखबार जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल कर रहा है, उससे दहशत और सिहरन पैदा होती है। इन सब बातों को लिखने के लिए अखबार का क्या उद्देश्य है, यह तो अखबार का सम्पादक जानें, हमारा सवाल यह है कि इन सब बातों का आखिर आधार क्या ? जहां तक सीआईए और मोसाद की भारत में दखअंदाजी की बात है तो उसमें नई बात भी कुछ नहीं है। यह विदित ही है कि सीआईए और मौसाद के एजेण्ट किसी-न-किसी रुप में दूसरे देशों में मौजूद रहते ही हैं। सीआईए और मोसाद ही क्यों, क्या रुस की खुफिया एजेंसी केजीबी के अस्तित्व को भारत में नकारा जा सकता है ? अखबार ने जिस तरह से भारत के भविष्य का चित्रण किया है, उससे लगता है कि अखबार का मकसद केवल सनसनी फैलाने के अलावा कुछ नहीं है। चौथी दुनिया' की रिपोर्ट क्या ऐसी नहीं है, जिसमें यह कहा जाता है कि 2012 में दुनिया का अस्तित्व खत्म हो जाएगा ? क्या 'चौथी दुनिया' प्रिंट मीडिया का 'इंडिया टीवी' बनने की ओर बढ़ रहा है ?

यदि किसी अखबार में इस तरह की रिपोर्ट 80 और 90 के दशक में आती तो शायद लोग उस पर यकीन भी कर लेते। क्योंकि उस दौर में भयानक साम्प्रदायिक दंगे हुए थे। राम मंदिर आंदोनल उग्र रुप लिए हुए था। मंडल कमीशन की वजह से पूरे देश में आग लगी हुई थी। इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की हत्या भी इन्हीं दशकों में हुई थीं। कोई केन्द्र सरकार स्थिरता से काम नहीं कर सकी थी। देश की आर्थिक स्थिति बेहद खराब थी। चन्द्रशेखर सरकार को देश का सोना गिरवी रखना पड़ा था। यह वह दौर था, जिसे कहा जा सकता था कि देश अस्थिरता की और बढ़ रहा है। 26/11 तक आतंकवादी हमलों की बाढ़ आई हुई थी। लेकिन बीता 2009 काफी हद तक पूरसकून गुजरा है। ऐसे में 'चौथी दुनिया' की रिपोर्टें गले से नहीं उतरती हैं। यदि रिपोर्ट को सही मान भी लिया जाए तो क्या देश में होने वाले बम धमाके और 26/11 की घटना सीआईए और मोसाद की करतूत थी ? जैसा कि कुछ लोग शक करते हैं, क्या 9/ 11 का हादसा मोसाद की देन था ? क्या साध्वी प्रज्ञा सिंह और कर्नल पुरोहित सीआईए और मोसाद के इशारे पर काम कर रहे थे ? क्या हेडली और तहव्वुर राणा सीआईए के एजेन्ट हैं ?

'चौथी दुनिया' ने इस बात को बहुत प्रमुखता से कहा है कि आने वाले समय में कुछ बड़े सम्पादकों, नेताओं और उच्च अधिकारियों का चरित्र हनन करने के लिए उनकी अश्लील सीडी बनायी जा सकती हैं। तो क्या एनडी तिवारी की अश्लील सीडी इसी सिलसिले की कड़ी है? क्या भाजपा के बंगारु लक्षमण की रिश्वत लेते बनी सीडी भी सीआईए की करतूत थी? सबसे बड़ा सवाल यह है कि भारत को बर्बाद करने में सीआईए और मोसाद का क्या फायदा होने वाला है ? अमेरिका तो पहले ही अफगानिस्तान और इराक में फंसा हुआ है। अफगानिस्तान और इराक जैसे कमजोर और छिन्न-भिन्न देशों पर ही उसका बस नहीं चल रहा है। अमेरिका दोनों देशों से किसी भी सूरत में बाहर आने की जुगत में लगा हुआ है। इन दोनों देशों में अमेरिका आतंवाद के खिलाफ जंग में पता नहीं कितने ट्रिलियन डालर झोंक चुका है, जिसके चलते उसकी आर्थिक स्थिति भी डांवाडोल होने लगी है। भारत बहुत बड़ा देश है। यहां पर अमेरिका की सीआईए क्या कर लेगी ?

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anup on 30 January, 2010 23:02;11
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खबर का आधार क्या है. ये मै नहीं जानता....लेकीन ये मानता हु जिस दिन अमरीका या दूसरी दुनिया .हिंदुस्तान को तोरणा चाहेगी ........उस दिन उनका काम आराम से हों जाये गा....
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Vicky G on 31 January, 2010 01:32;10
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अच्छा लिखा है आपने. मीडिया में बे-सिरपैर का लिखा जाए, तो उसकी भी खिंचाई होनी चाहिए. आपने सही लिखा है. मैंने यह अखबार (?) तो नहीं देखा है, पर इस एक लेख के बारे में पढकर ही कथित अखबार के स्तर का पता चल जाता है. आपका यह कहना भी सही है कि अमेरिका अफ़गानिस्तान और इराक जैसे लस्त-पस्त देशों में जाकर फंस गया, तो वह मज़बूत भारत को लेकर ऐसी मूर्खता करने की कोशिश तो कतई नहीं करेगा. वैसे, यह तो सच है कि अगर कोई खरीदना चाहे, तो भारत में ढेर सारे नेता-अधिकारी-पत्रकार बिकाऊ हैं. बाकी आपने सवाल सही उठाए हैं.
और हां, अनूप जी की टिप्पणी पढकर लगता है कि उन्हें उक्त अखबार में आसानी से नौकरी मिल जाएगी. :-)
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अरे सलीम मियां on 31 January, 2010 01:34;03
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अरे सलीम मियां. इण्डिया टीवी को जिस डाक्टर ने भूत प्रेत का विशेषज्ञ चैनल बनाया वही डाक्टर आजकल चौथी दुनिया का भी इलाज कर रहा है. जब ऐसा काबिल व्यक्ति होगा तो ऐसी ही स्टोरी छपेगी.

जहां तक संतोष भारतीय की बात है तो वे ज्योतिष के आधार पर पत्रकारिता भी करते हैं. अपनी ज्योतिषीय गणना से उन्होंने देख लिया होगा कि आगे नेताओं की सीडी बनेगी इसलिए पहले ही खबर बना दी.

चौथी दनिया एक मजाक बनकर रह गया है.
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Jeet Bhargava on 31 January, 2010 04:02;19
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सिर्फ चौथी दुनिया ही नहीं नहीं लोकतंत्र के चौथे खम्भे यानी पत्रकारिता का चरित्र भी ऐसा ही होता जा रहा है. आपने बढ़िया लिखा है. साधुवाद.
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SUNITA ANIL REJA on 31 January, 2010 18:58;57
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sir, media is service for welfare of people. if for the sake of TRP and just gain short cut success . such news paper and electronic media will loose the respect from the people. Media should be sensible and responsible . people can be make fool for short time not for all the time. so this is high time to thing and rething the real role of media
thanks
Sunita Anil reja, Mumbai
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अफजल शाही on 10 February, 2010 09:28;55
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सलीम मियां, इस नई दुनिया का अखबार दिखाई तो नहीं देता लेकिन आपके लेख में एक बात और गौर करने वाली है. देश के कुछ बड़े संपादक, नेता अन्य के खिलाफ षडयंत्रकारी सीडी की बात. क्या यह स्वंयमभू बड़ा संपादक इसी नई दुनिया का है. अब इंतजार करने वाली बात यह है कि उक्त सीडी नीली(अश्लील), हरी(नोट) या फिर पूरी काली होगी.
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image सलीम अख्तर देश के अनेक समाचार-पत्रों में सामायिक मुद्दों पर लेख आदि लिखने के साथ ही टेक्निकल पुस्तकों का स्वतन्त्र लेखन। लेखन या पत्रकारिता का कोई कोर्स नहीं किया। लिखने की शुरुआत 1984 से दिल्ली से प्रकाशित होने वाले 'हिन्दुस्तान' और 'नवभारत टाइम्स' में सम्पादक के नाम पत्रों से की थी। हौसला बढ़ा तो सम्पादकीय पेज पर छपने के लिए लिखना शुरु किया। मशहूर पत्रकार स्व0 उदयन शर्मा मेरे आइडियल रहे हैं। इसलिए कलम का इस्तेमाल हमेशा ही फिरकापरस्त ताकतों के खिलाफ और दबे-कुचले लोगों के पक्ष में चली है। जनवादी लेखक संघ से भी जुड़ा हुआ हूँ। संपर्क: saleem_iect@yahoo.co.in
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