Home | कारपोरेट मीडिया | एक दिन सामना से सामना

एक दिन सामना से सामना

image सामना के कार्यकारी संपादक प्रेम शुक्ल

सामना का संपादकीय लिखा जा चुका है. मराठी में लिखा गया बाल ठाकरे का संपादकीय हिन्दी में अनुवादित किया गया है जिसमें कहा गया है कि पुणे विस्फोट के बाद अब कांग्रेसियों को सुन्नत करा लेनी चाहिए और पाकिस्तान जाकर बस जाना चाहिए. बाल ठाकरे का यह संपादकीय हो सकता है कल फिर मीडिया में चर्चा का विषय बने कि उन्होंने कांग्रेसियों को सुन्नत कराने और पाकिस्तान बसने की सलाह दी है. लेकिन खान विवाद और पुणे विस्फोट के बीच बाल ठाकरे का यह रुख उनकी विचारधारा के अनुसार ही है.

इधर संपादकीय विभाग के लिए सबसे महत्वपूर्ण काम पूरा हुआ तो काम करनेवाले लोग स्थानीय खबरों और अन्य पृष्ठों को बनाने संवारने में जुट गये. आज रविवार है इसलिए लोगों की संख्या कम है. फिर भी पूरे सामना कार्यालय में आम दिनों जैसी चहल पहल है. सामना मराठी और हिन्दी दोनों के संपादक यहीं बैठते हैं. प्रभादेवी के इस इलाके में कभी सिर्फ चाल और खपरैल के मकान ही हुआ करते थे. आज भी अधिकांश मकान और दुकाने उसी तरह से हैं. सामना दफ्तर के सामने वाकड़ चाल आज भी भरी पुरी अवस्था में है जिसमें डेरी और अन्य कई दुकानों के मालिक उत्तर भारतीय हैं. फिर भी अब यह इलाका ही मंहगा हो चला है इसलिए प्रभादेवी से सामना कार्यालय के लिए मुड़ते ही आपको सामने ऊंची अट्टालिकाएं बनती दिखाई देंगी. सामना का कार्यालय जिस सद्गुरू दर्शन नामक बिल्डिंग में है वह खुद भी पांच मंजिला है जिसमें दो मंजिलों पर सिर्फ सामना के कार्यालय हैं. इनमें संपादकीय विभाग के अलावा विपणन और विज्ञापन विभाग के लोग भी शामिल हैं. जैसे ही सामना कार्यालय के लिए अंदर आते हैं सामने दो गार्ड बैठे हैं जो इस बात का पूरा ख्याल रखते हैं कि वे किसी व्यावसायिक प्रतिष्ठान नहीं बल्कि किसी मीडिया हाउस के दरवाजे पर बैठे हैं. वे आपसे ज्यादा पूछताछ नहीं करते. ऊपर आकर बायीं ओर संपादकीय विभाग और दाहिनी ओर एक कांफ्रेस टेबल रखी हुई है. यह कांफ्रेस टेबल अंशकालिक संवाददातओं से मिलने से लेकर व्यापारिक गतिविधियों की योजना बनाने तक सबके लिए इस्तेमाल होती है. गैलरी के आखिर में बाला साहेब ठाकरे की हाथ जोड़े एक फोटो लगी है जो हर आने जानेवाले व्यक्ति का अभिवादन करती नजर आती है. उसी फोटो के पास कार्यकारी संपादक का कमरा है.

जिस दिन मैं सामना के कार्यालय में दाखिल हुआ उस दिन सामना के लिखे एक संपादकीय को आधार बनाकर अखबारों ने काफी हल्ला मचाया था. सामना के संपादकीय आमतौर पर मीडिया के बाल ठाकरे का बयान ही होते हैं क्योंकि जब बाल ठाकरे खूब भाषण देते थे तब भी अपनी असली बात लिखकर ही कहते थे. एक लिहाज से देखा जाए तो बाल ठाकरे ने राजनीति में पत्रकारिता को अपने ही अंदाज में बचाये रखा है अन्यथा किसी भी राजनीतिक दल के लिए अपना मुखपत्र निकालने के बारे में सोचना या तो चाटुकारों का प्रपोजल होता है या फिर डरपोकों का प्रस्ताव. राजनीतिक दलों में सिर्फ शिवसेना ही एकमात्र ऐसी पार्टी है जो अपने कार्यकर्ताओं के लिए हिन्दी और मराठी में दैनिक अखबारों का प्रकाशन करती है. संभवत: बाल ठाकरे का अपने कार्यकर्ताओं से नित्य संवाद करने का अपना तरीका है क्योंकि वे मानते हैं कि वे अखबार आम आदमी के लिए नहीं बल्कि अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों के लिए निकालते हैं. अगर यह गांधी के बाद अपनी तरह का अकेला प्रयोग है तो इसके विषय वस्तु की भले ही निंदा कर लें लेकिन इस प्रयोग की निंदा करने से पहले थोड़ा सोचना जायज होगा. अगर हर राजनीतिक दल आज यह तय कर ले कि वह अपनी विचारधारा का घोषित तौर पर मुखपत्र प्रकाशित करेगा तो संभवत: राजनीतिक मैनेजरों को मीडिया पर पानी की तरह पैसा नहीं बहाना पड़ेगा. लेकिन राजनीतिक दलों के मैनेजर अंदर से न तो पार्टी के बारे में और न ही उसकी विचारधारा के बारे में इतने मजबूत हैं कि इस बारे में कोई विचार कर सकें. लेकिन बाल ठाकरे ने अपनी पत्रकारिता को अपनी बात अपने समर्थकों तक पहुंचाने के लिए बहुत सटीक तरीके से इस्तेमाल किया है. पिछले कई महीनों से उन्होंने कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया है. उन्हें जो कुछ कहना होता है वे लिखकर कहते हैं. शुरुआती दिनों में बाल ठाकरे का संपादकीय उनके कार्यकर्ताओं के लिए नियमित संदेश भले ही होता लेकिन अब ऐसा लगता नहीं है. अब बाल ठाकरे का संपादकीय मीडिया के लिए खबर होता है. फिर भी यह क्रम अनवरत जारी रहता है.

मैं एक उत्तर भारतीय हूं. शिवसेना की भाषा में कहें तो भैया. मैं उनके दफ्तर में जाता हूं. हिन्दी में ही बात करता हूं लेकिन यहां का सारा स्टाफ मेरे साथ हिन्दी में सहज नजर आता है. ऐसे वक्त में जब शाहरुख खान विवाद के कारण शिवसेना राष्ट्रीय मीडिया की चर्चा के केन्द्र में खड़ा हो मैं सामना के कार्यालय में पांच-छह घण्टे बैठा रहता हूं लेकिन मुझे वह विद्वेष कहीं दिखाई नहीं देता जिसकी चर्चा हमारा मीडिया हमें बता रहा है. क्या मेरी मति मारी गयी है या फिर सचमुच हालात वैसे नहीं है जैसे मीडिया हमारे सामने रख रहा है?

संपादकीय लेखन पूरा हुआ तो लोग तितर-बितर हो गये. मैंने एक कर्मचारी से आग्रह किया कि मुझे पिछले महीने की फाइल दे सकते हैं? उसने सामना की फाइल लाकर दे दी. हिन्दी का सामना 16 पृष्ठों का टेबलाइड साइज का अखबार है. पहला पूरे महीने पहला पन्ना उसी तरह के खबरों को समर्पित है जो मुंबई की मांग हो सकती है. लेकिन जब-तब बाल ठाकरे का विशेष संपादकीय भी दिखता है. वैसे नियमित संपादकीय तो अंदर के पृष्ठ पर जाता ही है. सामना के एक महीने की फाइल जब मैंने सरसरी तौर पर देखी तो स्पष्ट तौर पर दो बातें समझ में आयी. हो सकता है वह बाल ठाकरे की पार्टी का मुखपत्र हो लेकिन उसने बाजार और टैबलाइड अखबारों की मांग का भी ध्यान रखा है. सोलहवें पन्ने पर सोलहों दिन किसी न किसी मादक अदाकारा की अधनंगी फोटो प्रकाशित होती है. उन फोटोग्राफ्स के साथ अंगूठा चूसने और राज की बात फाश हो जाने जैसी फिल्मी गाशिप भी मौजूद होते हैं. अंदर के पन्नों पर खबरें मुंबई के हिन्दी पाठकों के अनुसार ही हैं. कहीं नल टूटा है तो कहीं सड़क खराब हो गयी है. किसी की चैन छिन गयी है तो कहीं किसी कार्यक्रम में किसी उत्तर भारतीय का स्वागत हो गया है. राष्ट्रीय स्तर की कुछ खबरों को भी जगह दी जाती है लेकिन वह जगह सिर्फ जगह देने के लिए ही दी जाती है. संभवत: सामना का संपादकीय विभाग इस बात को जानता है कि उन्हें क्या पढ़वाना है और उनका पाठक क्या पढ़ना चाहता है. फिर भी आज मुंबई के हिन्दी अखबारों के टैबलाइड बाजार में हिन्दी सामना सबसे बड़ा अखबार बना हुआ है.

यहां आकर एक बात का अहसास जरूर होता है कि हमें कल्पनालोक में जीवित रहने में आनंद आता है. सामना का दफ्तर भी आम अखबारी दफ्तर जैसा ही है सिर्फ एक विशिष्टताबोध के अलावा कि यह शिवसेना का मुखपत्र है. रोजमर्रा की जिंदगी से दो चार होते इस अखबार के पत्रकार भी खबरों की उसी समझ के साथ काम करते हैं जैसे कोई सामान्य पत्रकार करता है. लेकिन आमतौर पर जब हम सामना का नाम लेते हैं तो एक हौव्वा के रूप में उसे परिभाषित करते हैं. संभवत: मीडिया को सामना और शिवसेना का यही स्वरूप चाहिए इसलिए वे उसे उसी रूप में सामने रखते हैं. सामना कार्यालय में बैठे हुए मेरे मन में बार बार यही बात आ रही है कि अन्य राजनीतिक दल अखबार न सही कम से कम मासिक पत्रिका तो प्रकाशित करते ही हैं. फिर सामना में ऐसा क्या है कि उसके संपादकीय लगातार खबरों में बने रहते हैं और पत्रिकाओं के जरिए अपना वैचारिक फैलाव करनेवाले कांग्रेस और भाजपा जैसे बड़े दलों की भी कभी कोई चर्चा नहीं होती?

Subscribe to comments feed Comments (10 posted):

संजय on 14 February, 2010 21:25;07
avatar
अपका अनुभव सही लगता है। महाराष्ट्र में हिंदीभाषियों के प्रति वैसा विद्वेष नहीं दिखता है, जैसा मीडिया दिखाती है। दरअसल विद्वेष मीडिया के लिए मसाला है। मसाला खबरे मीडिया की कमजोरी बन चुकी है। इसी का लाभ लेकर कभी-कभी मराठी के पैरोकार कुछ कमजोर लोगों को पीट कर सुर्खियों में आते हैं।
जय विदर्भ, जय महाराष्ट्र, जय बिहार
Thumbs Up Thumbs Down
1
prem Shukla on 14 February, 2010 21:33;27
avatar
Kyaa Sanjaybhai,Hamaare yahaan hi ..Woh bhi mere saamane baithebathe patrkaariya chhapemari ? Saamana sirf saamaanya aadmi ke man kaa naad ninaad hai.
Thumbs Up Thumbs Down
0
Jeet Bhargava on 15 February, 2010 00:05;01
avatar
बड़ा जबरदस्त स्टिंग ओपरेशन किया आपने. अरे प्रेम भाई की बढ़िया खबर ले ली. चाहे कोई कुछ भी कह ले, सामना अपने-आप में एक अद्वितीय प्रयोग है. वहां से कई प्रोफेशनल पत्रकार तैयार हुए हैं. यह बात दीगर है कि वहां से निकलने के बाद वह 'सेकुलर' हो गए. खैर अब वक्त आ गया है कि सामना को एक व्यवस्थित हिन्दी न्यूज चैनल भी शुरू करना चाहिए. और इसमे कोई शक नहीं कि वह भी सामना अखबार की तरह हीट ही जाएगा.
Thumbs Up Thumbs Down
1
Sanjeet Tripathi on 15 February, 2010 00:35;40
avatar
badhiya!
aakhir me aapne jo sawal puchha hai
vah ek Yaksha prashn ki tarah khadaa hi rahega, anuttarit
Thumbs Up Thumbs Down
1
Vicky G on 15 February, 2010 11:31;30
avatar
जैसे कम्युनिस्ट और सेकुलर लोग हिंदुओं का हौव्वा दिखाकर और बार-बार भडकाकर सभी मुसलमानों को आतंकवादी बना देने पर तुले हैं, वैसे ही ये सेकुलर लोग ही मराठियों को भडका रहे हैं और उत्तर भारतीयों को डरा रहे हैं. सब पालीटिक्स है.
Thumbs Up Thumbs Down
1
Abhay Mishra on 15 February, 2010 16:48;40
avatar
Sanjay ji,
Aapne to Aankho dekhi likh daali. Bahut khoob bhai....
Thumbs Up Thumbs Down
1
limty khare on 15 February, 2010 17:05;53
avatar
bahut badiya sanjay jee badhai
Thumbs Up Thumbs Down
1
RAJ SINH on 15 February, 2010 21:34;19
avatar
सही लिखा. मैं संजय निरुपम के वक्त भी सामना के दफ्तर जा चुका हूँ और हाल में प्रेम शुक्ल के भी साथ वहीं मुलाकात कर चुका हूँ.
हाँ सामना सेना का मुखपत्र है ,और सभी दलों की तरह यह सेना का हक़ है.बहुत सरे मुद्दों पर उस से असहमत हूँ पर हिन्दी सामना हिन्दी भाषियों को भी तवज्जो देता है और छापता भी है.एक अख़बार की ही तरह .
और कमाल है संजय जी . प्रेम जी ने तो लिख ही दिया .....वहीं से सामना का सामना :) .
Thumbs Up Thumbs Down
1
marwaha tk on 09 March, 2010 22:59;11
avatar
तिवारी जी अगर गलत बात को भी सही डंग से प्रस्तुत किया जाये तो वो असरकारक हो जाती हे , और बाल ठाकरे मुम्बईकरों की नस नस से वाकिफ हैं ,इसी बात की आढ मैं वो प्रतिदिन मातुश्री से अश्रु गेस के गोले दागते रहते हैं ,उन पर किसी बात का खौफ इसलिए नहीं हे , की वो केंद्र व राज्य दोनों सताधारिओं के महामंत्र प्राण जाये पर कुर्सी ना जाये से भलीभांति अवगत हैं , इसीलिए हर रोज़ एकनई पों पों के साथ दोनों चाचा भतीजा बजरिये नूरा कुश्ती धिन तिनिन करते रहते हैं ,और जनता आनंदित होती हे .......
Thumbs Up Thumbs Down
0
on 29 October, 2010 18:05;16
avatar
BAHUT ACHHA LAGA
Thumbs Up Thumbs Down
0
total: 10 | displaying: 1 - 10

Post your comment comment

Type in Hindi (हिन्दी में कमेन्ट करने के लिए यहां रोमन में लिखिए यह अपने आप हिन्दी में बदल देगा.)

Title :
Body
Powered by Vivvo CMS v4.1.2
Share |
  • email Email to a friend
  • print Print version

ईमेल से विस्फोटः अपना ईमेल यहां भरें और सब्सक्राइब करें:

Delivered by FeedBurner

Author info
image संजय तिवारी आप जहां तक सोच सकते हैं इंटरनेट आपको वह करने का मौका देता है. अभी तक मानव सभ्यता ने जितने भी मीडिया माध्यमों का उपयोग किया है यह उन सबमें अनूठा, प्रभावी और सर्वगुण संपन्न है. सूचना लेने देने के तीन माध्यमों दृश्य, श्रवण और पाठ को एक ही धागे में लपेटे नया मीडिया उत्पादन और पहुंच दोनों के लिहाज से सर्वश्रेष्ठ है. ऐसे नये मीडिया का जनहित के लिए भरपूर उपयोग हो, विस्फोट.कॉम उसी दिशा में उठा एक कदम है. sanjaytiwari07@gmail.com
Rate this article
2.88
More from कारपोरेट मीडिया
Previous
image
अमिताभ की नजर में नरेन्द्र मोदी सबसे बड़े सेकुलर
गुजरात के ब्राण्ड अम्बेसडर अमिताभ बच्चन का मानना है कि इस देश में नरेन्द्र मोदी सबसे बड़े सेकुलर हैं. मुंबई से प्रकाशित होनेवाले मिड डे अखबार को दिये इंटरव्यू में अमिताभ बच्चन ने कहा है कि उन्हें “नरेन्द्र मोदी को सेकुलर मानने में कोई आपत्ति नहीं है. आखिरकार वे एक राज्य के मुख्यमंत्री हैं जिन्हें वहां की जनता ने बहुमत से चुनकर भेजा है.” अमिताभ बच्चन का कहना है कि नरेन्द्र मोदी से दोस्ती न करने की कोई संवैधानिक रोक नहीं है. अमिताभ कहते हैं कि बतौर ब्राण्ड एम्बेसडर वे गुजरात को प्रमोट करते रहेंगे, फिर नरेन्द्र मोदी मुख्यमंत्री रहें या फिर कोई और....
image
साहित्य को शर्मशार करते हंस और नया ज्ञानोदय
नेट खंगालते-खंगालते, सहज ही मन में इच्छा हुई कि साहित्य की प्रतिष्ठित पत्रिका हंस पढ़ी जाए। पत्रिका का अक्टूबर,2010 अंक डाउनलोड लिया। करीब एक दशक बाद हंस को पढ़ रहा था। पर यह क्या, एक दशक में काफी बदलावा दिखा। साहित्य की इस प्रतिष्ठित पत्रिका में पटना के रामधारी सिंह दिवाकर की एक कहानी रंडियां शीर्षक से छपी हैं। जिस संवदेना को कहानी का आधार बनाया गया है, उसका तानाबाना गजब का है। पर यथार्थ दिखाने के चक्कर में यह इस शब्द का प्रयोग शर्मशार करने वाला है।...
image
पत्रकार के ऊपर हमलावर हुए बुखारी
प्रेस को संबोधित कर सपा को खुश करने लखनऊ पहुंचे जामा मस्जिद के शाही इमाम अब्दुल्ला बुखारी को उस वक्त गुस्सा आ गया जब एक मुसलमान पत्रकार ने ही उनसे सवाल पूछ लिया कि जब दोनों पक्ष सहमति की ओर आगे बढ़ने को राजी हैं तो आप अनायास सवाल क्यों खड़ा कर रहे हैं? क्या कोर्ट के फैसले के बाद भी जमीन हिन्दुओं को नहीं सौंपी जा सकती? ...
image
अहा! क्या कॉमन रिपोर्टिंग है
कॉमनवेल्थ खेलों का उद्घाटन भी हो गया और आज अखबारों ने उस उद्घाटन की जमकर रिपोर्टिंग भी कर दी. दिल्ली से प्रकाशित होने वाले सभी अखबार कॉमनवेल्थ की चकाचौंध भरे उद्घाटन से अभिभूत हैं. कुछ अखबार तो हेडिंग लगाना ही भूल गये है. सिर्फ इतना लिख दिया है- अद्भुद....
image
छह महीने के भीतर ही एक हिन्दी वेबसाइट ने रच दिया इतिहास
हिंदी समाज को वित्तीय रूप से साक्षर बनाने की मुहिम के साथ शुरू हुई वेबसाइट अर्थकाम ने छह महीने बीतते-बीतते ही अपना प्रताप दिखाना शुरू कर दिया है। उसे देश में नए बिजनेस के सर्वोत्तम 74 ‘पावर ऑफ आईडियाज’ में चुन लिया गया है। दो चरणों में होनेवाली ‘पावर ऑफ आइडियाज’ नाम की प्रतियोगिता का आयोजन इकनॉमिक टाइम्स, आईआईएम अहमदाबाद और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय की तरफ से किया जाता है।...
image
प्रचार की छूट हो तो रुक जाएगा पेड न्यूज
सोमवार को सभी पार्टियों के नेताओं के साथ मुख्य चुनाव आयुक्त ने नयी दिल्ली में बैठक की और उनसे पैसा लेकर खबर लिखने और प्रकाशित करने की समस्या पर बात की. लगभग सभी पार्टियों की राय थी कि चुनाव आयोग ने जो खर्च पर सीमा बाँध दी है उसकी वजह से पेड न्यूज़ का सहारा लेना पड़ रहा है. नेताओं ने कहा कि जुलूस, पोस्टर, भोंपू और अखबारों में विज्ञापन पर लगे प्रतिबन्ध की वजह से सभी पार्टियां अपनी बात पंहुचाने के लिए कोई न कोई रास्ता तलाशती हैं और पेड न्यूज़ उसमें से एक है....
image
खबरी अपराधियों का सरगना साबित हुआ दैनिक जागरण
नक्सलवाद जमीन पर जितना है उससे अधिक अखबारों में है. टेलीवीजन चैनलों पर है. मीडिया में नक्सलवाद का जोर अनायास नहीं है. एक ओर जहां सरकार को मीडिया के इस रुख से फायदा मिल रहा है वहीं मीडिया घराने विज्ञापनदाता कंपनियों के हित साधने के लिए नक्सलवाद को अखबारों में बढ़ावा दे रही हैं. दैनिक जागरण ने हाल में ही ऐसी ही एक करतूत की जो सिर्फ और सिर्फ अपने विज्ञापनदाताओं को फायदा पहुंचाने के लिए खबर गढ़ी गयी थी....
image
भाजपा कांग्रेस में साइबर वार
भाजपा और कांग्रेस नये जमाने के साइबर वार को अंजाम दे रहे हैं. भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस को एक नोटिस भेजा है जिसमें कांग्रेस के ऊपर आरोप लगाया गया है कि वह एक ऐसे डोमेन से कांग्रेस की वेबसाइट की ओर पाठकों को मोड़ रही है जो भारतीय जनता पार्टी के नाम का सार संक्षेप है....
image
सर्वे है या राहुल राग अलापने का षण्यंत्र?
देश में कामनवेल्थ गेम्स का आयोजन हो रहा है और उभरते युवराज की कहीं चर्चा ही न हो यह भला कैसे हो सकता है? ठीक खेलों से एक दिन पहले व्यापारी घरानों की लॉबिंग करनेवाली एक संस्था एसोचैम की एक संस्था द एसोचैम सोशल डेवलपमेन्ट फाउण्डेशन ने एक सर्वे जारी किया है जिसमें बताया है कि देश में 72 प्रतिशत नौजवान ऐसे हैं जो यह चाहते हैं कि अगर खेलों के लिए राहुल गांधी को ब्राण्ड ऐम्बेसडर चुना जाता तो अच्छा होता....
image
कमाल है, जो बात प्रधानमंत्री को बोलनी चाहिए वह प्रीती जिंटा बोल रही हैं
दिल्ली से प्रकाशित होनेवाले सभी अखबारों ने आज अयोध्या पर फैसले को ही लीड स्टोरी बनाया है. अंग्रेजी दैनिक टाइम्स आफ इंडिया और हिन्दुस्तान टाइम्स ने पूरे मसले पर तफ्शील से रिपोर्टिंग करने का प्रयास किया है. टाइम्स आफ इंडिया ने लीड बनाया है- 2 Parts To Hindus, 1 Part to Muslims. हालांकि सच्चाई के बाद भी यह हेडिंग थोड़ा परेशान करनेवाली है लेकिन हिन्दुस्तान टाइम्स ने ज्यादा सटीकता से रिपोर्टिंग की है. एचटी की हेडलाइन है- Disputed site is Ram birthplace-HC....
image
थके हारे भारत की बेशर्म मीडिया
ये हिन्दुस्तान की मीडिया का अब तक का सबसे शर्मनाक चेहरा है इस चेहरे में बाजारुपने से उपजी बेशर्मी साफ़ नजर आती है, ऐसी बेशर्मी उस वक़्त भी नजर आई थी जब मुम्बई पर आतंकी हमला हुआ था। ये बेशर्मी उस वक़्त भी नजर आई थी जब सुरक्षाबलों ने देश के गरीब राज्यों में नक्सली उन्मूलन के नाम पर अघोषित युद्ध शुरू कर दिया था, और अब जब राष्ट्रमंडल खेल शुरू होने में महज चंद दिन शेष हैं, एक बार फिर सिर्फ आर्थिक लाभ और टीआरपी के लिए चैनलों की कुकुरदौड़ शुरू हो गयी है।...
image
प्रभु चावला और एमजे अकबर में बंटा इंडिया टुडे
हिन्दुस्तान समूह के बाद अब इंडिया टुडे की बारी है. इंडिया टुडे समूह अपने हिन्दी और अंग्रेजी समाचार व्यापार को अलग अलग करने की तैयारी के तहत पुनर्गठन की तैयारी कर रहा है. अंग्रेजी इंडिया टुडे और हेडलाइन्स टुडे की जिम्मेदारी एमजे अकबर को दे दी गयी है जबकि हिन्दी इंडिया टुडे और भाषायी समाचार व्यापार के सीईओ/संपादक की जिम्मेदारी प्रभु चावला को दी गयी है. ...
image
ऐसे न करें अयोध्या को रिपोर्ट
जैसे जैसे अयोध्या में विवादित स्थान पर हाईकोर्ट के फैसले की घड़ी नजदीक आ रही है इस मसले पर रिपोर्टिंग को लेकर दिल्ली के पत्रकारों में चिंता बढ़ती जा रही है. इसी चिंता के मद्देनजर बुधवार को दिल्ली पत्रकार संघ ने एक राउण्ड टेबल का आयोजन किया जिसके जरिए पत्रकारों से यह अनुरोध किया गया है कि विवादित परिसर पर हाइकोर्ट के फैसले को गफलत में रिपोर्ट न करें. ...
image
निंदक मीडिया राखिए, आंगन कुटी छवाय
''मीडिया में सिर्फ नकारात्मक खबरों का जोर नहीं रहे, बल्कि अच्छी खबरों की जानकारी भी मीडिया में आनी चाहिए। निंदक पास रखने से गलती होने की संभावना कम होती है, इसलिए मीडिया को निंदक मानते हुए उसे पास रखना चाहिए।'' यह बात द संडे इंडियन पत्रिका एवं माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय द्वारा 'मध्यप्रदेश के विकास में मीडिया की भूमिका' विषय पर आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय मीडिया सेमीनार में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कही।...
image
लाली के भ्रष्टाचार की काली दुनिया
देश के सरकारी सूचना तंत्र को संचालित करनेवाला प्रसार भारती एक बार फिर चर्चा में है. चर्चा में आने का कारण कुछ और नहीं बल्कि प्रसार भारती के सीईओ बीएस लाली हैं. प्रसार भारती बोर्ड लाली के मनमानी रवैये और भ्रष्टाचार की शिकायतों से आजिज आकर उन्हें उनके पद से हटाने के लिए प्रयासरत है लेकिन बीएस लाली ने अपने और प्रसार भारती के बीच भ्रष्टाचार का ऐसा मजबूत जोड़ बनाया है जिसे बोर्ड के सारे सदस्य मिलकर भी नहीं तोड़ पा रहे हैं. शेष नारायण सिंह की स्पेशल रिपोर्ट-...
image
बड़े अब्दुल्ला मीडिया के रुख से खफा
केन्द्रीय गैरपारंपरिक उर्जा मंत्री फारुख अब्दुल्ला मीडिया से खफा हैं. शुक्रवार को एक निजी टीवी चैनल से बात करते हुए उन्होंने कश्मीर की राजनीतिक परिस्थितियों पर तो बात की ही लेकिन साथ में मीडिया पर भी जमकर प्रहार किया कि कश्मीर में मीडिया अटकलों को खबर बनाकर पेश कर रहा है....
image
विदेशियों के हाथ बिके हुए लोग हमें बिकाऊ कह रहे हैं
छत्तीसगढ़ की मीडिया पर इस बात को लेकर बहस होने लगी है कि वह बिकाऊ है या ईमानदार? अब यह सर्टिफिकेट कौन देगा कि कौन बिकाऊ है और कौन ईमानदार? स्थानीय लोग तो यह काम कर नहीं सकते इसलिए दिल्ली में बैठे कुछ लोग अचानक सक्रिय हो जाते हैं और जमे-जमाए आंदोलन पर कब्जा करने के लिए कूद पड़ते हैं। उनकी यह प्रवृत्ति अपना अस्तित्व बनाए रखने तक सीमित रहे तो समझ में आता है लेकिन विदेशी पूंजी से देशी लोगों के जख्मों पर मरहम लगाने की कोशिश का दिखावा करने वाले कथित समाजसेवी अपनी भूमिका की सफलता को लेकर आशंकित रहते हैं और वे इसका ठीकरा स्थानीय पत्रकारिता पर फोड़नेसे बाज नहीं आते।...
Next
Tags
No tags for this article
सर्वाधिकार (अ)सुरक्षित

विस्फोट.कॉम में प्रकाशित सामग्री पर हमारी ओर से कोई कापीराइट नहीं है.

Powered by Vivvo CMS v4.1.2