Home | कारपोरेट मीडिया | अखबार मुकाबिल हो तो बन्दूक निकालो

अखबार मुकाबिल हो तो बन्दूक निकालो

image

जब तोप मुकाबिल हो तो अखबार निकालो वाली कहावत आपने सुनी ही होगी. लेकिन अब ऐसा लगता है कि इस कहावत में थोड़ा परिवर्तन आ गया है. परिवर्तन देखना है तो पत्रकारों के स्वर्ग भोपाल आईये. अभी हाल में ही यहां एक पत्रकार संगठन के चुनाव में जब बंदूकधारी पत्रकार दिखाई दिये तो अचानक ही लगा कि अब जमाना आ गया है जब कहना चाहिए अखबार मुकाबिल हो तो बन्दूक निकालो.

राष्ट्रीय और प्रादेशिक स्तर पर पत्रकारों के अनेक संगठन हैं। एनयूजे यानी नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट इसे नेशनलिस्ट यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट भी कहा जा सकता है। यह संगठन पत्रकार संगठनों को फेडेरेशन है। अर्थात पत्रकारों के अनेक संगठन इस यूनियन से संबंद्ध हैं। अनेक संगठनों में से एक - जर्नलिस्ट यूनियन ऑफ मध्यप्रदेश यानी जम्प भी इस फेडेरेशन का सदस्य है। वैसे तो मध्यप्रदेश और देश में दोनों संगठन पिता-पुत्र या बड़े-छोटे भाई की तरह अनेक वर्षों से कार्यरत हैं। कार्य करते हुए कभी आपसी मनमुटाव नहीं हुआ। होता भी कैसे अगर समविचारी लोग भले ही वे पत्रकार क्यों न हों अगर एक भले काम में लगे हैं, लोगों का संगठन कर रहे हैं। इसमें मनमुटाव की कोई गुंजाइश होना भी नहीं चाहिए। लेकिन काम करते हुए व्यक्ति ही नहीं संगठन का भी विस्तार और दबदबा बढ़ता है। संगठन अगर पत्रकारों का हो तो रूतबा और ज्यादा भी हो सकता है। यही सब कुछ हुआ पिछले वर्षों में एनयूजे और जम्प में।

रूतबा, दबदबा और ताकत के विस्तार का ही परिणाम था कि जम्प में विभिन्न पदों को लेकर चुनाव की नौबत आ गई। लोकतांत्रिक देश में किसी संगठन संस्था के लिए यह शुभ और अच्छा संकेत है कि वहां पदों के लिए चुनाव हो और चुने हुए लोग विभिन्न दायित्वों का निर्वहन करें। वैसे तो यह अच्छा होता कि अध्यक्ष, महामंत्री या सचिव सहित विभिन्न पदों और कार्यकारिणी के साथ राष्ट्रीय परिषद् के लिए भी सर्व-सम्मति से मनोनयन हो जाता। लेकिन चुनाव होना और भी अच्छी बात है, बशर्ते कि चुनाव के बाद कोई राग-द्वेष उत्पन्न न हो। चुनाव के पूर्व असहमति और विवाद के कारण कुछ मतभेद और मन-भेद पैदा हुए जिसके कारण चुनाव की नौबत आई। अब चुनाव हो चुके। चुनाव के बाद दमदार प्रत्याशी जीते यह तो मानना ही पड़ेगा। इसलिए अब जम्प भी दमदार हो गया है। पहले से अधिक रूतबे और दबदबे वाला। महिला दिवस की पूर्व संध्या पर जम्प और एनयूजे के लिए महिला पदाधिकारियों और सदस्यों का भी चुनाव हुआ। तो स्त्री शक्ति ने भी अपने रूतबे और दबदबे का इजहार कर दिया है। महिला पत्रकारों ने पुरूष वर्चस्व और एकाधिकार को तोड़ कर अपनी उपस्थिति दजे करायी है। वाकई यह मुस्लिम नेताओं के मुंह पर भी तमाचा है जो महिलाओं को सिर्फ नेता या पत्रकार पैदा करने की नसीहत दे रहे हैं। अब चुप हो जाओ मुल्ला-मौलवियों महिलाएं अब पत्रकार और नेता भी बनेंगी और पत्रकार और नेता पैदा भी करेंगी। आखिर देश को सबल, शक्तिशाली और तेजस्वी बनाने की जिम्मेदारी उनकी भी है।

लेकिन सब कुछ शुभ और नेक होने के वावजूद जम्प के चुनाव में कुछ बातें ऐसी हुई जो लोकतंत्र को धक्का और चोट पहुंचाने वाली थी। चुनाव के दिन सुबह से ही प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से पत्रकार आने लगे थे। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के प्रतिष्ठित होटल पलाश रेसिडेंसी में 7 मार्च को पत्रकारों का जमावड़ा था। चूंकि महौल चुनाव का था इसलिए सभी दावेदार प्रत्याशी अपना-अपना परिचय ले-दे रहे थे। पत्रकारों का आना-जाना भी जारी था। इतने में एक इंडिका गाड़ी आई। सबने अनुमान तो यही लगाया कि इस गाड़ी में भी कुछ पत्रकार ही होंगे। अनुमान के मुताबिक उस गाड़ी से पत्रकार ही उतरे, लेकिन वे बन्दूकधारी पत्रकार थे। इन बन्दूकधारी पत्रकारों को देखकर अकबर इलाहाबादी का वो शेर याद आया - ‘‘खींचों ना कमानो को, ना तलवार निकालो, जब तोप मुकाबिल हो तो अखबार निकालो।’’ मुझे लगा इलाहाबादी तो तोप ओर तलवारों के सामने अखबार निकालने की बात करते थे। ये कैसे पत्रकार हैं, बन्दूक से अखबार कैसे निकालेंगे! लेकिन फिर ध्यान आया इलाहाबादी ने जब अखबार निकालने की वकालत की थी तब जमाना अंग्रेजों का था। तब देश गुलाम था। गुलामी से लड़ने के लिए तोप और तलवार से अधिक ताकतवर हथियार उन्होंने अखबार को माना था। लेकिन आज तो आजाद मुल्क में हैं। कोई अंग्रेज वगैरह हमारी छाती पर बैठे नही, तो फिर अखबार की क्या जरूरत है? एक सवाल भी दिमाग में उठा - लोकतंत्र में अखबार बंदूक से भी निकाल सकते हैं। संभव है कुछ पत्रकार यह कहें कि हमारी मर्जी हम कलम की बजाए बंदूक से ही पत्रकारिता करेंगे, कोई अंग्रेजों का राज है क्या? फिर मुझे आज के अकबर इलाहाबादी याद आये - ‘‘खीचों ना कलम को, ना पैड निकालो, जब अखबार मुकाबिल हो तो बंदूक निकालो।’’

अब जबकि मध्यप्रदेश में जम्प और एनयूजे के लिए चुनाव हो चुके हैं। प्रदेश कार्यकारिणी का गठन भी हो चुका है। पत्रकार और पत्रकार संगठनों के प्रतिनिधि लोकतंत्र और प्रेस की स्वतंत्रता और उसके भविष्य के बारे में अनवरत विचार करते रहेंगे ताकि लोकतंत्र और लोकतंत्र का चैथा पाया मीडिया भी मजबूत हो सके।    

Subscribe to comments feed Comments (5 posted):

Jitendra Dave on 16 March, 2010 02:22;54
avatar
बड़ा मजेदार लेख.
Thumbs Up Thumbs Down
2
सलीम अख्तर सिद्दीकी on 16 March, 2010 12:56;39
avatar
अख़बारों की धार अब कुंद हो चुकी है. अब पैसों के लिए अखबार निकले जाते हैं. खबरें बिकती हैं. कलम बिकती है. ये सही है की अखबार के मुकाबील अब बन्दूक और पैसों की ज्यादा अहमियत है. एक अछे लेख लेख लिए आपको बधाई. अब चंद लोग ही बचे हैं जो कलम की धार को जिंदा रखे हुए है.
Thumbs Up Thumbs Down
0
shankarravi28@yahoo.com on 16 March, 2010 17:42;39
avatar
shri somitrs ji aap ki baat bilkul sahi hai aaj sabhi jankar log o ko samajna chaiya ki ease logo is kam se hamesha door rakna chaiya

app jese logo se hi desh main logo main umeed jagti hai
thankas vandematram
Thumbs Up Thumbs Down
1
Awadh regal times on 21 March, 2010 17:04;59
avatar
आप के लेखा को पड़ कर यही लगा की आज के परिवेश में लेखनी और खबरों का महत्त्व नहीं आज लिखने वाले की पहुच का महत्त्व है ............ अगर दिन पर दिन ऐसा होता रहेगा तो मिडिया का स्तर गिरता चला जाएगा...
यदि इसे बचना है तो सभी को मिलकर वर्क करना होगा क्योकि अखबार के मुकाबील बन्दूक और पैसों की ज्यादा अहमियत नहीं होनी चाहिय .....
अख़बार का कम है सच को सामने लाना.................
Thumbs Up Thumbs Down
1
jabardast on 04 April, 2010 16:07;21
avatar
jabardast
bhai ek aur
Thumbs Up Thumbs Down
0
total: 5 | displaying: 1 - 5

Post your comment comment

Type in Hindi (हिन्दी में कमेन्ट करने के लिए यहां रोमन में लिखिए यह अपने आप हिन्दी में बदल देगा.)

Title :
Body
Powered by Vivvo CMS v4.1.2
Share |
  • email Email to a friend
  • print Print version

ईमेल से विस्फोटः अपना ईमेल यहां भरें और सब्सक्राइब करें:

Delivered by FeedBurner

Author info
image Anil Saumitra जनसंचार माध्यमों की पहुंच विषय पर शोध करनेवाले अनिल सौमित्र भोपाल में रहते हैं. सामाजिक कार्य के अलावा स्वतंत्र पत्रकारिता और मीडिया एक्टिविस्ट के बतौर कार्यरत. विश्व संवाद केन्द्र में भी सक्रिय.
Rate this article
5.00
More from कारपोरेट मीडिया
Previous
image
अमिताभ की नजर में नरेन्द्र मोदी सबसे बड़े सेकुलर
गुजरात के ब्राण्ड अम्बेसडर अमिताभ बच्चन का मानना है कि इस देश में नरेन्द्र मोदी सबसे बड़े सेकुलर हैं. मुंबई से प्रकाशित होनेवाले मिड डे अखबार को दिये इंटरव्यू में अमिताभ बच्चन ने कहा है कि उन्हें “नरेन्द्र मोदी को सेकुलर मानने में कोई आपत्ति नहीं है. आखिरकार वे एक राज्य के मुख्यमंत्री हैं जिन्हें वहां की जनता ने बहुमत से चुनकर भेजा है.” अमिताभ बच्चन का कहना है कि नरेन्द्र मोदी से दोस्ती न करने की कोई संवैधानिक रोक नहीं है. अमिताभ कहते हैं कि बतौर ब्राण्ड एम्बेसडर वे गुजरात को प्रमोट करते रहेंगे, फिर नरेन्द्र मोदी मुख्यमंत्री रहें या फिर कोई और....
image
साहित्य को शर्मशार करते हंस और नया ज्ञानोदय
नेट खंगालते-खंगालते, सहज ही मन में इच्छा हुई कि साहित्य की प्रतिष्ठित पत्रिका हंस पढ़ी जाए। पत्रिका का अक्टूबर,2010 अंक डाउनलोड लिया। करीब एक दशक बाद हंस को पढ़ रहा था। पर यह क्या, एक दशक में काफी बदलावा दिखा। साहित्य की इस प्रतिष्ठित पत्रिका में पटना के रामधारी सिंह दिवाकर की एक कहानी रंडियां शीर्षक से छपी हैं। जिस संवदेना को कहानी का आधार बनाया गया है, उसका तानाबाना गजब का है। पर यथार्थ दिखाने के चक्कर में यह इस शब्द का प्रयोग शर्मशार करने वाला है।...
image
पत्रकार के ऊपर हमलावर हुए बुखारी
प्रेस को संबोधित कर सपा को खुश करने लखनऊ पहुंचे जामा मस्जिद के शाही इमाम अब्दुल्ला बुखारी को उस वक्त गुस्सा आ गया जब एक मुसलमान पत्रकार ने ही उनसे सवाल पूछ लिया कि जब दोनों पक्ष सहमति की ओर आगे बढ़ने को राजी हैं तो आप अनायास सवाल क्यों खड़ा कर रहे हैं? क्या कोर्ट के फैसले के बाद भी जमीन हिन्दुओं को नहीं सौंपी जा सकती? ...
image
अहा! क्या कॉमन रिपोर्टिंग है
कॉमनवेल्थ खेलों का उद्घाटन भी हो गया और आज अखबारों ने उस उद्घाटन की जमकर रिपोर्टिंग भी कर दी. दिल्ली से प्रकाशित होने वाले सभी अखबार कॉमनवेल्थ की चकाचौंध भरे उद्घाटन से अभिभूत हैं. कुछ अखबार तो हेडिंग लगाना ही भूल गये है. सिर्फ इतना लिख दिया है- अद्भुद....
image
छह महीने के भीतर ही एक हिन्दी वेबसाइट ने रच दिया इतिहास
हिंदी समाज को वित्तीय रूप से साक्षर बनाने की मुहिम के साथ शुरू हुई वेबसाइट अर्थकाम ने छह महीने बीतते-बीतते ही अपना प्रताप दिखाना शुरू कर दिया है। उसे देश में नए बिजनेस के सर्वोत्तम 74 ‘पावर ऑफ आईडियाज’ में चुन लिया गया है। दो चरणों में होनेवाली ‘पावर ऑफ आइडियाज’ नाम की प्रतियोगिता का आयोजन इकनॉमिक टाइम्स, आईआईएम अहमदाबाद और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय की तरफ से किया जाता है।...
image
प्रचार की छूट हो तो रुक जाएगा पेड न्यूज
सोमवार को सभी पार्टियों के नेताओं के साथ मुख्य चुनाव आयुक्त ने नयी दिल्ली में बैठक की और उनसे पैसा लेकर खबर लिखने और प्रकाशित करने की समस्या पर बात की. लगभग सभी पार्टियों की राय थी कि चुनाव आयोग ने जो खर्च पर सीमा बाँध दी है उसकी वजह से पेड न्यूज़ का सहारा लेना पड़ रहा है. नेताओं ने कहा कि जुलूस, पोस्टर, भोंपू और अखबारों में विज्ञापन पर लगे प्रतिबन्ध की वजह से सभी पार्टियां अपनी बात पंहुचाने के लिए कोई न कोई रास्ता तलाशती हैं और पेड न्यूज़ उसमें से एक है....
image
खबरी अपराधियों का सरगना साबित हुआ दैनिक जागरण
नक्सलवाद जमीन पर जितना है उससे अधिक अखबारों में है. टेलीवीजन चैनलों पर है. मीडिया में नक्सलवाद का जोर अनायास नहीं है. एक ओर जहां सरकार को मीडिया के इस रुख से फायदा मिल रहा है वहीं मीडिया घराने विज्ञापनदाता कंपनियों के हित साधने के लिए नक्सलवाद को अखबारों में बढ़ावा दे रही हैं. दैनिक जागरण ने हाल में ही ऐसी ही एक करतूत की जो सिर्फ और सिर्फ अपने विज्ञापनदाताओं को फायदा पहुंचाने के लिए खबर गढ़ी गयी थी....
image
भाजपा कांग्रेस में साइबर वार
भाजपा और कांग्रेस नये जमाने के साइबर वार को अंजाम दे रहे हैं. भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस को एक नोटिस भेजा है जिसमें कांग्रेस के ऊपर आरोप लगाया गया है कि वह एक ऐसे डोमेन से कांग्रेस की वेबसाइट की ओर पाठकों को मोड़ रही है जो भारतीय जनता पार्टी के नाम का सार संक्षेप है....
image
सर्वे है या राहुल राग अलापने का षण्यंत्र?
देश में कामनवेल्थ गेम्स का आयोजन हो रहा है और उभरते युवराज की कहीं चर्चा ही न हो यह भला कैसे हो सकता है? ठीक खेलों से एक दिन पहले व्यापारी घरानों की लॉबिंग करनेवाली एक संस्था एसोचैम की एक संस्था द एसोचैम सोशल डेवलपमेन्ट फाउण्डेशन ने एक सर्वे जारी किया है जिसमें बताया है कि देश में 72 प्रतिशत नौजवान ऐसे हैं जो यह चाहते हैं कि अगर खेलों के लिए राहुल गांधी को ब्राण्ड ऐम्बेसडर चुना जाता तो अच्छा होता....
image
कमाल है, जो बात प्रधानमंत्री को बोलनी चाहिए वह प्रीती जिंटा बोल रही हैं
दिल्ली से प्रकाशित होनेवाले सभी अखबारों ने आज अयोध्या पर फैसले को ही लीड स्टोरी बनाया है. अंग्रेजी दैनिक टाइम्स आफ इंडिया और हिन्दुस्तान टाइम्स ने पूरे मसले पर तफ्शील से रिपोर्टिंग करने का प्रयास किया है. टाइम्स आफ इंडिया ने लीड बनाया है- 2 Parts To Hindus, 1 Part to Muslims. हालांकि सच्चाई के बाद भी यह हेडिंग थोड़ा परेशान करनेवाली है लेकिन हिन्दुस्तान टाइम्स ने ज्यादा सटीकता से रिपोर्टिंग की है. एचटी की हेडलाइन है- Disputed site is Ram birthplace-HC....
image
थके हारे भारत की बेशर्म मीडिया
ये हिन्दुस्तान की मीडिया का अब तक का सबसे शर्मनाक चेहरा है इस चेहरे में बाजारुपने से उपजी बेशर्मी साफ़ नजर आती है, ऐसी बेशर्मी उस वक़्त भी नजर आई थी जब मुम्बई पर आतंकी हमला हुआ था। ये बेशर्मी उस वक़्त भी नजर आई थी जब सुरक्षाबलों ने देश के गरीब राज्यों में नक्सली उन्मूलन के नाम पर अघोषित युद्ध शुरू कर दिया था, और अब जब राष्ट्रमंडल खेल शुरू होने में महज चंद दिन शेष हैं, एक बार फिर सिर्फ आर्थिक लाभ और टीआरपी के लिए चैनलों की कुकुरदौड़ शुरू हो गयी है।...
image
प्रभु चावला और एमजे अकबर में बंटा इंडिया टुडे
हिन्दुस्तान समूह के बाद अब इंडिया टुडे की बारी है. इंडिया टुडे समूह अपने हिन्दी और अंग्रेजी समाचार व्यापार को अलग अलग करने की तैयारी के तहत पुनर्गठन की तैयारी कर रहा है. अंग्रेजी इंडिया टुडे और हेडलाइन्स टुडे की जिम्मेदारी एमजे अकबर को दे दी गयी है जबकि हिन्दी इंडिया टुडे और भाषायी समाचार व्यापार के सीईओ/संपादक की जिम्मेदारी प्रभु चावला को दी गयी है. ...
image
ऐसे न करें अयोध्या को रिपोर्ट
जैसे जैसे अयोध्या में विवादित स्थान पर हाईकोर्ट के फैसले की घड़ी नजदीक आ रही है इस मसले पर रिपोर्टिंग को लेकर दिल्ली के पत्रकारों में चिंता बढ़ती जा रही है. इसी चिंता के मद्देनजर बुधवार को दिल्ली पत्रकार संघ ने एक राउण्ड टेबल का आयोजन किया जिसके जरिए पत्रकारों से यह अनुरोध किया गया है कि विवादित परिसर पर हाइकोर्ट के फैसले को गफलत में रिपोर्ट न करें. ...
image
निंदक मीडिया राखिए, आंगन कुटी छवाय
''मीडिया में सिर्फ नकारात्मक खबरों का जोर नहीं रहे, बल्कि अच्छी खबरों की जानकारी भी मीडिया में आनी चाहिए। निंदक पास रखने से गलती होने की संभावना कम होती है, इसलिए मीडिया को निंदक मानते हुए उसे पास रखना चाहिए।'' यह बात द संडे इंडियन पत्रिका एवं माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय द्वारा 'मध्यप्रदेश के विकास में मीडिया की भूमिका' विषय पर आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय मीडिया सेमीनार में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कही।...
image
लाली के भ्रष्टाचार की काली दुनिया
देश के सरकारी सूचना तंत्र को संचालित करनेवाला प्रसार भारती एक बार फिर चर्चा में है. चर्चा में आने का कारण कुछ और नहीं बल्कि प्रसार भारती के सीईओ बीएस लाली हैं. प्रसार भारती बोर्ड लाली के मनमानी रवैये और भ्रष्टाचार की शिकायतों से आजिज आकर उन्हें उनके पद से हटाने के लिए प्रयासरत है लेकिन बीएस लाली ने अपने और प्रसार भारती के बीच भ्रष्टाचार का ऐसा मजबूत जोड़ बनाया है जिसे बोर्ड के सारे सदस्य मिलकर भी नहीं तोड़ पा रहे हैं. शेष नारायण सिंह की स्पेशल रिपोर्ट-...
image
बड़े अब्दुल्ला मीडिया के रुख से खफा
केन्द्रीय गैरपारंपरिक उर्जा मंत्री फारुख अब्दुल्ला मीडिया से खफा हैं. शुक्रवार को एक निजी टीवी चैनल से बात करते हुए उन्होंने कश्मीर की राजनीतिक परिस्थितियों पर तो बात की ही लेकिन साथ में मीडिया पर भी जमकर प्रहार किया कि कश्मीर में मीडिया अटकलों को खबर बनाकर पेश कर रहा है....
image
विदेशियों के हाथ बिके हुए लोग हमें बिकाऊ कह रहे हैं
छत्तीसगढ़ की मीडिया पर इस बात को लेकर बहस होने लगी है कि वह बिकाऊ है या ईमानदार? अब यह सर्टिफिकेट कौन देगा कि कौन बिकाऊ है और कौन ईमानदार? स्थानीय लोग तो यह काम कर नहीं सकते इसलिए दिल्ली में बैठे कुछ लोग अचानक सक्रिय हो जाते हैं और जमे-जमाए आंदोलन पर कब्जा करने के लिए कूद पड़ते हैं। उनकी यह प्रवृत्ति अपना अस्तित्व बनाए रखने तक सीमित रहे तो समझ में आता है लेकिन विदेशी पूंजी से देशी लोगों के जख्मों पर मरहम लगाने की कोशिश का दिखावा करने वाले कथित समाजसेवी अपनी भूमिका की सफलता को लेकर आशंकित रहते हैं और वे इसका ठीकरा स्थानीय पत्रकारिता पर फोड़नेसे बाज नहीं आते।...
Next
Tags
No tags for this article
सर्वाधिकार (अ)सुरक्षित

विस्फोट.कॉम में प्रकाशित सामग्री पर हमारी ओर से कोई कापीराइट नहीं है.

Powered by Vivvo CMS v4.1.2