ईद के दिन ईद मुबारक आयी और कहा कि तुम चांद हो
"ईद का दिन ईद मुबारक का एस.एम.एस. आया शाम को काल आयी कि तुम तो चांद हो प्यार में उम्र मायने नहीं रखती जब से तुम्हें देखा, मुझे चैन नहीं है। काश तुम मुझे 10 साल पहले मिली होती मैं तुमसे शादी कर लेता। अब भी कुछ नहीं बिगड़ा है मैं तुम से शादी करना चाहता हूं। मैं तुम्हें हर सुख दूंगा जो तुमने सोचा भी न होगा। मैं जो भी चीज हासिल करना चाहता हूं उसे हासिल कर लेता हूं।"
इन दिनों जिस देशपाल सिंहं पंवार को लेकर विस्फोट सहित कुछ अन्य मीडिया पोर्टल पर चर्चा हो रही है ये शब्द उन्हीं देशपाल सिंह पंवार के है जो मुझसे कहे थे. 60-62 साल के पंवार मुझसे यानी एक 27 साल की लड़की से शादी करना चाहते थे. इसके लिए न केवल वे मुझ पर दबाव डाल रहे थे बल्कि यह भी बता रहे थे कि कैसे उम्र में उनकी बेटी से भी छोटी होने के बावजूद वे मुझसे शादी करने के लिए तैयार हैं. पंवार जैसे लोग जो अपनी आयु और पद की गरिमा को न ध्यान में रखकर अनैतिक कार्य करने से भी नहीं चूकते हैं। मैं एक महिला हूं और विषम परिस्थितियों में भी काम करने से आम महिलाओं की तरह नहीं घबराती हूं। मेरे अनगिनत नाम हो सकते हैं लेकिन मीडिया जगत में काम करने वाली सभी लड़कियों की पीड़ा लगभग एक ही है अन्तर इतना है किसी में तुच्छ मानसिकताओं का कोढ़ उजागर करने की क्षमता है किसी में नहीं। बहराल मीडिया मेरा कर्मक्षेत्र है मैं यहां काम करूंगी तो दुष्शासन जैसे पवार रूपी लोग मिलेगें। लेकिन फिर भी मैं कर्म करूंगी। मेरे इस पत्र में जो घटनाक्रम मेरे साथ 4 माह में घटा उसकी जो पीड़ा है वो उजागर है -
- 25 अक्टूबर पवार मेरे कार्यालय निरीक्षण के लिये आये मैनें उन्हें सम्मान पूर्वक बिठाया। हमारे आर0एम0 को आने में 5 मिनट की देरी हो गयी। मौका देख उन्होंने मेरा हाथ दबाया और बोले अच्छा करोगी तो दूर तक जाओगी। चूंकि मैं थोड़ा गर्म मिजाज हूं खुद पर नियन्त्रण कर बात को टाल दिया। जिस पद और आयु के मोड़ पर वो खुद हैं वहां मुझे कुछ कहने में कुछ शर्मिदगीं लगी।
- उसके बाद मुझे लेकर आरएम पर दवाब बनाया तुम समझदार हो क्या करना है बेहतर जानते हो।
- ईद का दिन ईद मुबारक का एस.एम.एस. आया शाम को काल आयी कि तुम तो चांद हो प्यार में उम्र मायने नहीं रखती जब से तुम्हें देखा, मुझे चैन नहीं है। काश तुम मुझे 10 साल पहले मिली होती मैं तुमसे शादी कर लेता। अब भी कुछ नहीं बिगड़ा है मैं तुम से शादी करना चाहता हूं। मैं तुम्हें हर सुख दूंगा जो तुमने सोचा भी न होगा। मैं जो भी चीज हासिल करना चाहता हूं उसे हासिल कर लेता हूं।
- तुमने अगर जवाब नहीं दिया तो मैं मर जाऊंगा। तुम मेरे पास यूनिवर्सिटी आ जाओं। अच्छा दिल्ली आ जाओ मैं व्यवस्था कर दूंगा। मैं तुम्हारा हाथ सारी दुनियां के सामने पकड़ने को तैयार हूं।
- तुम मेरे बच्चों से उमर में भी छोटी हो परन्तु फिर भी मैं तुमसे शादी करने को तैयार हूं।
- तुम आती क्यों नही ? मैं तुम्हें नौकरी से निकलवा दूंगा या मीडिया में कैरियर खत्म करवा दूंगा।
- अखबार मालिक बेवकूफ है चरित्रहीन है, तुम मेरा साथ दो तो हम मीडिया अम्पायर खड़ा कर सकते हैं बस तुम साथ दो तो सब कुछ मेरे हाथ में होगा, मीडिया हाउस भी।
- वो (नीशीथ राय) मेरा क्या कर लेगें, एक जगह से 7 करोड़ रूपये मिलने थे। अब उनको नहीं दूंगा। तुम आती क्यों नही ? कोई जवाब क्यों नहीं देती। मैं इनके सब मुख्य आदमी हटाने की शर्त रखूंगा तो लाइन पर आयेगें।
मैनें ये सभी बातें कम्पनी के प्रतिष्ठित सीट पर आसीन सम्बन्धित अधिकारी को पहले ही बता दी थी। तथा रीजनल मैनेजर भी इस बात को जानते हैं। ये सब बड़ा संक्षिप्त घटनाक्रम है। लेकिन ये परेशानी मैंने 4 माह झेली है दो बार अपना मो0 नम्बर भी बदला है फिर भी कुछ नहीं कहा। मेरा मानसिक सन्तुलन बिगड़ गया। मेरा एक माह तक मनोचिकित्सक से इलाज चला। मैनें किसी से कुछ नही कहा। और सोचा कि कहीं और शिफ्ट करूंगी। लेकिन पंवार को हमसे आगे नुकसान होने की उम्मीद में मेरी छवि मेरे कार्यालय में बिगाड़ दी। लगभग एक माह की छुट्टी ली। जब पंवार का काम नहीं बना तो इन्होंने मेरे खिलाफ अखबार मालिक को भड़काया। जाहिर है इन्सान गलत होने की स्थिति में ऐसा ही कदम उठाता है।
इससे पहले मैं कुछ कहूं उन्होंने मुझे सफाई देने के काबिल भी नहीं छोड़ा। जाहिर है जब बात मेरे चरित्र को लेकर उठती है और वो सख्श उगंली उठाता है जिसने खुद मेरे साथ गलत करने की कोशिश की। तब चुप रहना मुनासिब नहीं था। इतना तो बताना था कि क्या सही है और क्या गलत है। मैनंे 6 जून 2010 को चेयर मैन साहब को पहले मौखिक रूप से बताया फिर 9 जून 2010 को लिखित रूप में दे दिया। इनकी नोटिस छपने के बाद मेरे पास शुभचिन्तकों की तरफ से फोन किये गये और मेरे ऊपर दबाव बनाने की कोशिश की गयी। लखनऊ कार्यालय में और भी लड़कियां हैं पवार को ये कैसे पता कि इनके चरित्र पर मैंने ही उंगली उठायी है। जाहिर है मेरे साथ कुछ तो ऐसा किया होगा जिससे उन्हें अदांजा होगा कि ये शिकायत मैं हीं कर सकती है। मैं इनके साथ होती तो इसकी विटनेस न होती। जबकि इनकी कारगुजारियों की गवाह कम्पनी के दो अन्य लोग भी हैं।
मैनें कई जगह काम किया किसी की किसी के साथ प्रेम सम्बन्ध को लेकर चर्चाएं उठती है इसके लिए हम महिलाओं को पुरूष प्रधान समाज में तैयार रहना चाहिए। लेकिन अपने 10 साल के पत्रकारिता कैरियर में आज तक मैनें किसी के ऊपर उंगली नहीं उठायी फिर इनके ऊपर क्यों ? अगर मेरे अन्दर प्रतिभा है और अपने ऊपर विश्वास है तो मैं कहीं भी काम कर सकती हूं लेकिन मेरे ऊपर कोई बेगुनाह मीडिया जैसे रण क्षेत्र में बदनाम करे तो अगर मैं चुप रहती हूं तो गलत साबित होती हूं। मैं गलत नहीं हूं इसलिये खुलकर बोल रही हूं। अन्याय करने वाले से बड़ा आदमी वो गुनहगार है जो सह रहा है। हो सकता है मुझे इस प्रकरण के बाद अपना मार्ग बदलना पड़े लेकिन खुद में एक संतोष है। और सबक है उन लड़कियों के लिये जो देश के चौथे स्तम्भ से जुड़ी है और सन्देश है पंवार जैसी तुच्छ मानसिकता के उन लोगों के लिये जो अपने यहां काम करने वाली कर्मचारी लड़कियों को सीट की तरह इस्तेमाल करने को अपनें सेलरी पैकेज का हिस्सा समझते हैं।
(यह उस लड़की का इकरारनामा है जिसे लखनऊ से प्रकाशित डीएनए अखबार के समूह संपादक देशपाल सिंह पंवार ने परेशान किया. इसी लड़की के आरोप के बाद उन्हें उक्त अखबार से बर्खास्त कर दिया गया था.)
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sadak par pawar ko khada karo or use chappal se maro.
भला हो प्रो.निशीथ राय का कि उन्होंने सार्वजनिक वृत्त को साफ करने का निर्णायक कदम उठाया है.एक पीडिता के साथ खड़े होकर उन्होंने सराहनीय काम किया है.शेष मीडिया-मालिकों को प्रो. राय की संवेदनशीलता और न्यायप्रियता से सीख लेनी चाहिए और वे भी अपने यहाँ से पंवार जैसे अधम और घृणित लोगों की सफाई अभियान चलायें. तभी मीडिया राजनीति की सफाई के लिए समर्थ हो पाएगी.
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