Home | कारपोरेट मीडिया | रांची में पूंजी बनाम पत्रकारिता की जंग

रांची में पूंजी बनाम पत्रकारिता की जंग

image

रांची में 22 अगस्त से मीडिया वार शुरू हो चुका है. खोजी खबरें, जनसरोकार और मुद्दे की बात पर आधारित पत्रकारिता करने के लिये मशहूर अखबार समूह प्रभात खबर के इस गढ़ में हाई-लाइफ(पेज-3 पत्रकारिता), बाजारवाद और सनसनी परोसने वाला मीडिया समूह दैनिक भास्कर ने दस्तक दे दिया है.

वैसे दैनिक भास्कर दस्तक नहीं देता है वह अपने प्रोडक्ट की लांचिंग करता है. इस स्किल में उसे महारत हासिल है, ठीक उसी तरह जैसे आमिर खान को अपनी फिल्मों के प्रमोशन में महारत हासिल है. यह अखबार समूह जिस शहर में दस्तक देने वाला होता है वहां उससे पहले उसके जयपुर लांचिंग की कहानियां पहुंच जाती हैं. कि किस तरह उसने वहां मार्केटिंग सर्वे किया, प्राइस वार शुरू कराया, प्रतिद्वंद्वी अखबार के सभी योग्य मीडिया कर्मियों को खरीद लिया और पहले दिन से ही नंबर वन हो गया. यह बिल्कुल सच्ची कहानी है. मगर इसके साथ-साथ यह भी सच है कि वह जयपुर में फिलहाल नंबर वन नहीं है. और सच तो यह भी है कि अपने गृह राज्य मध्यप्रदेश छोड़ कर वह किसी प्रदेश में नंबर वन नहीं है. मध्यप्रदेश में भी अब पाठक उससे ऊब चुके हैं और पत्रिका, राज एक्सप्रेस व पीपुल्स टाइम्स जैसे अखबार वहां तेजी से अपनी पकड़ मजबूत कर रहे हैं.

इसके बनिस्पत झारखंड का नंबर वन अखबार प्रभात खबर एक बहुत छोटी पूंजी वाला अखबार है. इसके पास कुल पूंजी ही उतनी होगी जितना दैनिक भास्कर अपने एक यूनिट के लांचिंग प्रमोशन पर खर्च कर देता है. इसकी महारत न तो लांचिंग में है और न ही ब्रांड प्रमोशन में. इसकी एकमात्र खासियत है इसका एडिटोरियल कंटेंट. इसकी जनोन्मुखी, तथ्यपरक और सच्ची खबरें. इसका आंदोलनकारी तेवर. यह अखबार अपनी यूनिट की लांचिंग भी बड़े अनोखे तरीके से करता है. किराये के चार कमरे, आठ-दस नये लड़के, पुरानी आउटडेटेड मशीन और शुरू. कहीं कोई प्रचार नहीं और अखबार बाजार में उतर जाता. पाठकों को नोटिस करते-करते हफ्तों लग जाते हैं, मगर छह महीने की मेहनत के बाद यह समूह जो मुकाम हासिल करता है वह टिकाऊ होता है. आप विश्वास नहीं करेंगे इस समूह के जमशेदपुर लांचिंग का पूरा बजट ही सिर्फ दो लाख का था. धनबाद, कोलकाता और देवघर यूनिट तो इससे भी कम में लांच हुए. मगर यह अखबार इनमें सिर्फ धनबाद में नंबर टू है बांकी हर जगह नंबर वन है.

इस तरह से देखा जाय तो यह कहना कहीं से अनुचित नहीं होगा कि फिलहाल रांची में लड़ाई पूंजी बनाम पत्रकारिता की है. हम सभी जानते हैं कि कुछ सालों से अखबारों में एडिटोरियल विभाग सबसे दोयम दर्जे का माना जाने लगा है. जहां अंग्रेजी अखबारों में अशोक जैन के नेतृत्व में टाइम्स ऑफ इंडिया इस प्रक्रिया का सबसे बड़ा पोषक बन बैठा है, वहीं हिंदी में इसकी कमान दैनिक भास्कर समूह ने सुधीर अग्रवाल के नेतृत्व में थाम रखी है. मगर इस दौर में भी प्रभात खबर एक ऐसा समूह है जिसका लीडर एक संपादक है, हरिवंश न तो मालिक हैं और न ही मैनेजर. एक हरिवंश ही नहीं इस अखबार के संपादकीय विभाग के दूसरे कर्मी भी कभी मार्केटिंग विभाग के द्वारा कभी उस तरह उपेक्षित नहीं किये गये, जिस तरह दूसरे अखबारों में किये जाते रहे हैं. (इसके बावजूद आईआरएस के ताजा रिपोर्ट के मुताबिक यह देश का सबसे तेजी से बढ़ता हुआ अखबार माना गया है.)

लिहाजा इस लड़ाई के नतीजे बतायेंगे कि अखबार के लिये एडिटोरियल ज्यादा महत्वपूर्ण है या मार्केटिंग (सर्कुलेशन- स्पेस सेलिंग). यह एक ऐसी जंग है जिसे देश के सभी रचनाधर्मियों को गौर से देखना चाहिये, क्योंकि इस जंग की हार-जीत ही आने वाले समय में पत्रकारिता की दिशा तय करेगी. वैसे यहां आपको यह जानकारी दे दूं कि इस लड़ाई के पहले राउंड में देनिक भास्कर को करारी पराजय मिली है और प्रभात खबर को मनोवैज्ञानिक बढ़त हासिल हुई है.

लांचिंग वाले दिन इस अखबार के कर्मियों ने सड़क पर उतरकर जिस तरह हॉकरों से मारपीट की उसके कारण इस अखबार की छवि पर निगेटिव असर पड़ा है. इतना कुछ करके भी पहले दिन यह समूह सिर्फ 10 हजार कॉंपियां ही बेच पाया. अगले दिन भी सिर्फ 23 हजार कॉंपियां ही बिकीं. जबकि अखबार का दावा एक लाख से अधिक कॉंपियां बेचने का और पहले दिन से ही नंबर वन हो जाने का था. मगर हकीकत यह थी कि पहले दिन यह अखबार नंबर छह था और दूसरे दिन नंबर चार.

इसके अलावा लोगों ने पहली बार रांची में इस अखबार के कंटेंट में मुद्दों और आम लोगों से संबंधित खबरों की अधिकता देखी. भास्कर से पूर्व परिचित लोगों के लिये यह बड़े हैरत की बात थी. आखिर कंज्यूमरिज्म की बात करने वाला यह अखबार झारखंड में इश्यूज की बातें क्यों कर रहा है. निश्चित तौर पर यह प्रभात खबर इम्पैक्ट था. क्योंकि झारखंड में यह निर्विवाद तथ्य है कि यहां टिकना है तो प्रभात खबर का ही स्टाइल अपनाना पड़ेगा. हिन्दुस्तान के मामले में भी यही हुआ, इस अखबार ने रांची में तभी सफलता हासिल की जब उसने स्थानीय संपादक समेत प्रभात खबर की आधी टीम को तोड़ लिया और उसी की तरह खबरें छापनी शुरू की.

वैसे हिन्दुस्तान या दैनिक भास्कर जैसे अखबारों के प्रभात खबर की तरह जनोन्मुखी खबरें छापने का यह अर्थ कतई नहीं कि ये अखबार भी कंटेंट बेस्ड हो गये. इन अखबारों का नेतृत्व इसके बावजूद मैनेजमेंट और सर्कुलेशन वालों के हाथ में ही रहता है. इन अखबारों में संपादक सिर्फ नीतियों को लागू कराता है, चाहे समाज की समस्याएं छापने कहा जाय या बाजार का ग्लैमर. वह हर कुछ करने के लिये तैयार है. उसे गीता का ज्ञान छापने कहा जाय तो वह भी छाप देगा और मल्लिका शेरावत की नंगी तस्वीर छापने कहा जाय तो उससे भी गुरेज नहीं करेगा. क्या छपेगा इसका निर्णय मैनेजमेंट को करना है, वह अपनी सूझबूझ से तय करता है कि क्या बिकेगा और संपादकीय टीम को ऐसी चीजें छापने का निर्देश देता है. अगर भोपाल में ग्लैमर बिकता है तो ग्लैमर छापो, रांची में घोटाला बिकता है तो घोटाला छापो. 

इसके बनिस्पत प्रभात खबर दूसरे तरीके से काम करता है. वह यह नहीं सोचता कि रांची में क्या बिकेगा और जमशेदपुर में क्या बिकेगा. प्रभात खबर से पहले रांची में घोटाला और मुद्दे नहीं बिकते थे. इसी अखबार ने लोगों को ऐसी खबरें पढ़ने की आदत लगाई. प्रभात खबर जिस शहर में जाता है ऐसी ही पत्रकारिता करता है. उसके लिये पत्रकारिता का अर्थ यही है. धीरे-धीरे लोगों को उसकी खबरें पसंद आ जाती हैं और वह सफल हो जाता है, फिर बाद में आने वाले लोग सोचते हैं कि इस शहर में ऐसी ही खबरें बिकेंगी.

दरअसल सच और साहस भरी खबरों की आदत अगर एक बार लग जाये तो कास्मेटिक खबरें जल्दी सुहाती नहीं है और सच अगर इमानदारी से नहीं कहा जाये तो वह सच भी कास्मेटिक ही लगता है. यही वजह है कि प्रभात खबर वाला तेवर अपनाने के बावजूद हिन्दुस्तान झारखंड में नंबर वन नहीं हुआ. अब दैनिक भास्कर प्रयासरत है....

Subscribe to comments feed Comments (4 posted):

सुरेश चिपलूनकर on 25 August, 2010 18:27;44
avatar
"...दरअसल सच और साहस भरी खबरों की आदत अगर एक बार लग जाये तो कास्मेटिक खबरें जल्दी सुहाती नहीं है और सच अगर इमानदारी से नहीं कहा जाये तो वह सच भी कास्मेटिक ही लगता है..."
यह है दमदार और सच्ची बात…
Thumbs Up Thumbs Down
1
Rector Kathuria on 26 August, 2010 00:35;05
avatar
आपने सभी तथ्य बहुत ही बेबाकी से रखे हैं....!
Thumbs Up Thumbs Down
1
कपिल on 27 August, 2010 14:47;01
avatar
अभी साथियों से भास्‍कर की लांचिंग पर ही बात हो रही थी। स्‍थानीय मित्रों का कहना था प्रभात खबर बिकता है जनता से अपने जुड़ाव की वजह से। प्रभात खबर में आज भी संपादक की स्थिति बाकी अखबारों से ज्‍यादा स्‍वतंत्र है। हालत यह है कि जनोन्‍मुखी रिपोर्टिंग करना बाकी कारपोरेट अखबारों की मजबूरी बन जाती है। कोई भी अखबार आए जब तक प्रभात खबर का वर्तमान तेवर बना रहेगा, पूंजी और विज्ञापनबाजी उसपर असर जरूर डालेगी लेकिन ज्‍यादा हिला नहीं पाएगी। प्रभात खबर अपने आप में एक स्‍कूल भी है।
आपकी इस अच्‍छी रिपोर्ट के लिए बधाई।
Thumbs Up Thumbs Down
1
Akhilesh on 27 August, 2010 22:34;37
avatar
तथ्यों में थोडा संसोधन कर ले. रांची और जमशेदपुर के बारे में तो नहीं कह सकता लेकिन धनबाद में प्रभात खबर नंबर दो पर नहीं नंबर तीन पर है. किसी निष्पक्ष माध्यम से इसकी जांच करा लें .
Thumbs Up Thumbs Down
1
total: 4 | displaying: 1 - 4

Post your comment comment

Type in Hindi (हिन्दी में कमेन्ट करने के लिए यहां रोमन में लिखिए यह अपने आप हिन्दी में बदल देगा.)

Title :
Body
Powered by Vivvo CMS v4.1.2
Share |
  • email Email to a friend
  • print Print version

ईमेल से विस्फोटः अपना ईमेल यहां भरें और सब्सक्राइब करें:

Delivered by FeedBurner

Author info
visfot news network विस्फोट.कॉम इंटरनेट पर नये दौर की पत्रकारिता में परंपरागत मूल्यों को स्थापित करने की दिशा में लगातार काम कर रहा है, जो कि पूरी तरह से जनकेन्द्रित, वास्तविक और निहित स्वार्थी तत्वों के प्रभाव से मुक्त है. हमारा संपर्क है visfot@visfot.com
Rate this article
5.00
More from कारपोरेट मीडिया
Previous
image
अमिताभ की नजर में नरेन्द्र मोदी सबसे बड़े सेकुलर
गुजरात के ब्राण्ड अम्बेसडर अमिताभ बच्चन का मानना है कि इस देश में नरेन्द्र मोदी सबसे बड़े सेकुलर हैं. मुंबई से प्रकाशित होनेवाले मिड डे अखबार को दिये इंटरव्यू में अमिताभ बच्चन ने कहा है कि उन्हें “नरेन्द्र मोदी को सेकुलर मानने में कोई आपत्ति नहीं है. आखिरकार वे एक राज्य के मुख्यमंत्री हैं जिन्हें वहां की जनता ने बहुमत से चुनकर भेजा है.” अमिताभ बच्चन का कहना है कि नरेन्द्र मोदी से दोस्ती न करने की कोई संवैधानिक रोक नहीं है. अमिताभ कहते हैं कि बतौर ब्राण्ड एम्बेसडर वे गुजरात को प्रमोट करते रहेंगे, फिर नरेन्द्र मोदी मुख्यमंत्री रहें या फिर कोई और....
image
साहित्य को शर्मशार करते हंस और नया ज्ञानोदय
नेट खंगालते-खंगालते, सहज ही मन में इच्छा हुई कि साहित्य की प्रतिष्ठित पत्रिका हंस पढ़ी जाए। पत्रिका का अक्टूबर,2010 अंक डाउनलोड लिया। करीब एक दशक बाद हंस को पढ़ रहा था। पर यह क्या, एक दशक में काफी बदलावा दिखा। साहित्य की इस प्रतिष्ठित पत्रिका में पटना के रामधारी सिंह दिवाकर की एक कहानी रंडियां शीर्षक से छपी हैं। जिस संवदेना को कहानी का आधार बनाया गया है, उसका तानाबाना गजब का है। पर यथार्थ दिखाने के चक्कर में यह इस शब्द का प्रयोग शर्मशार करने वाला है।...
image
पत्रकार के ऊपर हमलावर हुए बुखारी
प्रेस को संबोधित कर सपा को खुश करने लखनऊ पहुंचे जामा मस्जिद के शाही इमाम अब्दुल्ला बुखारी को उस वक्त गुस्सा आ गया जब एक मुसलमान पत्रकार ने ही उनसे सवाल पूछ लिया कि जब दोनों पक्ष सहमति की ओर आगे बढ़ने को राजी हैं तो आप अनायास सवाल क्यों खड़ा कर रहे हैं? क्या कोर्ट के फैसले के बाद भी जमीन हिन्दुओं को नहीं सौंपी जा सकती? ...
image
अहा! क्या कॉमन रिपोर्टिंग है
कॉमनवेल्थ खेलों का उद्घाटन भी हो गया और आज अखबारों ने उस उद्घाटन की जमकर रिपोर्टिंग भी कर दी. दिल्ली से प्रकाशित होने वाले सभी अखबार कॉमनवेल्थ की चकाचौंध भरे उद्घाटन से अभिभूत हैं. कुछ अखबार तो हेडिंग लगाना ही भूल गये है. सिर्फ इतना लिख दिया है- अद्भुद....
image
छह महीने के भीतर ही एक हिन्दी वेबसाइट ने रच दिया इतिहास
हिंदी समाज को वित्तीय रूप से साक्षर बनाने की मुहिम के साथ शुरू हुई वेबसाइट अर्थकाम ने छह महीने बीतते-बीतते ही अपना प्रताप दिखाना शुरू कर दिया है। उसे देश में नए बिजनेस के सर्वोत्तम 74 ‘पावर ऑफ आईडियाज’ में चुन लिया गया है। दो चरणों में होनेवाली ‘पावर ऑफ आइडियाज’ नाम की प्रतियोगिता का आयोजन इकनॉमिक टाइम्स, आईआईएम अहमदाबाद और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय की तरफ से किया जाता है।...
image
प्रचार की छूट हो तो रुक जाएगा पेड न्यूज
सोमवार को सभी पार्टियों के नेताओं के साथ मुख्य चुनाव आयुक्त ने नयी दिल्ली में बैठक की और उनसे पैसा लेकर खबर लिखने और प्रकाशित करने की समस्या पर बात की. लगभग सभी पार्टियों की राय थी कि चुनाव आयोग ने जो खर्च पर सीमा बाँध दी है उसकी वजह से पेड न्यूज़ का सहारा लेना पड़ रहा है. नेताओं ने कहा कि जुलूस, पोस्टर, भोंपू और अखबारों में विज्ञापन पर लगे प्रतिबन्ध की वजह से सभी पार्टियां अपनी बात पंहुचाने के लिए कोई न कोई रास्ता तलाशती हैं और पेड न्यूज़ उसमें से एक है....
image
खबरी अपराधियों का सरगना साबित हुआ दैनिक जागरण
नक्सलवाद जमीन पर जितना है उससे अधिक अखबारों में है. टेलीवीजन चैनलों पर है. मीडिया में नक्सलवाद का जोर अनायास नहीं है. एक ओर जहां सरकार को मीडिया के इस रुख से फायदा मिल रहा है वहीं मीडिया घराने विज्ञापनदाता कंपनियों के हित साधने के लिए नक्सलवाद को अखबारों में बढ़ावा दे रही हैं. दैनिक जागरण ने हाल में ही ऐसी ही एक करतूत की जो सिर्फ और सिर्फ अपने विज्ञापनदाताओं को फायदा पहुंचाने के लिए खबर गढ़ी गयी थी....
image
भाजपा कांग्रेस में साइबर वार
भाजपा और कांग्रेस नये जमाने के साइबर वार को अंजाम दे रहे हैं. भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस को एक नोटिस भेजा है जिसमें कांग्रेस के ऊपर आरोप लगाया गया है कि वह एक ऐसे डोमेन से कांग्रेस की वेबसाइट की ओर पाठकों को मोड़ रही है जो भारतीय जनता पार्टी के नाम का सार संक्षेप है....
image
सर्वे है या राहुल राग अलापने का षण्यंत्र?
देश में कामनवेल्थ गेम्स का आयोजन हो रहा है और उभरते युवराज की कहीं चर्चा ही न हो यह भला कैसे हो सकता है? ठीक खेलों से एक दिन पहले व्यापारी घरानों की लॉबिंग करनेवाली एक संस्था एसोचैम की एक संस्था द एसोचैम सोशल डेवलपमेन्ट फाउण्डेशन ने एक सर्वे जारी किया है जिसमें बताया है कि देश में 72 प्रतिशत नौजवान ऐसे हैं जो यह चाहते हैं कि अगर खेलों के लिए राहुल गांधी को ब्राण्ड ऐम्बेसडर चुना जाता तो अच्छा होता....
image
कमाल है, जो बात प्रधानमंत्री को बोलनी चाहिए वह प्रीती जिंटा बोल रही हैं
दिल्ली से प्रकाशित होनेवाले सभी अखबारों ने आज अयोध्या पर फैसले को ही लीड स्टोरी बनाया है. अंग्रेजी दैनिक टाइम्स आफ इंडिया और हिन्दुस्तान टाइम्स ने पूरे मसले पर तफ्शील से रिपोर्टिंग करने का प्रयास किया है. टाइम्स आफ इंडिया ने लीड बनाया है- 2 Parts To Hindus, 1 Part to Muslims. हालांकि सच्चाई के बाद भी यह हेडिंग थोड़ा परेशान करनेवाली है लेकिन हिन्दुस्तान टाइम्स ने ज्यादा सटीकता से रिपोर्टिंग की है. एचटी की हेडलाइन है- Disputed site is Ram birthplace-HC....
image
थके हारे भारत की बेशर्म मीडिया
ये हिन्दुस्तान की मीडिया का अब तक का सबसे शर्मनाक चेहरा है इस चेहरे में बाजारुपने से उपजी बेशर्मी साफ़ नजर आती है, ऐसी बेशर्मी उस वक़्त भी नजर आई थी जब मुम्बई पर आतंकी हमला हुआ था। ये बेशर्मी उस वक़्त भी नजर आई थी जब सुरक्षाबलों ने देश के गरीब राज्यों में नक्सली उन्मूलन के नाम पर अघोषित युद्ध शुरू कर दिया था, और अब जब राष्ट्रमंडल खेल शुरू होने में महज चंद दिन शेष हैं, एक बार फिर सिर्फ आर्थिक लाभ और टीआरपी के लिए चैनलों की कुकुरदौड़ शुरू हो गयी है।...
image
प्रभु चावला और एमजे अकबर में बंटा इंडिया टुडे
हिन्दुस्तान समूह के बाद अब इंडिया टुडे की बारी है. इंडिया टुडे समूह अपने हिन्दी और अंग्रेजी समाचार व्यापार को अलग अलग करने की तैयारी के तहत पुनर्गठन की तैयारी कर रहा है. अंग्रेजी इंडिया टुडे और हेडलाइन्स टुडे की जिम्मेदारी एमजे अकबर को दे दी गयी है जबकि हिन्दी इंडिया टुडे और भाषायी समाचार व्यापार के सीईओ/संपादक की जिम्मेदारी प्रभु चावला को दी गयी है. ...
image
ऐसे न करें अयोध्या को रिपोर्ट
जैसे जैसे अयोध्या में विवादित स्थान पर हाईकोर्ट के फैसले की घड़ी नजदीक आ रही है इस मसले पर रिपोर्टिंग को लेकर दिल्ली के पत्रकारों में चिंता बढ़ती जा रही है. इसी चिंता के मद्देनजर बुधवार को दिल्ली पत्रकार संघ ने एक राउण्ड टेबल का आयोजन किया जिसके जरिए पत्रकारों से यह अनुरोध किया गया है कि विवादित परिसर पर हाइकोर्ट के फैसले को गफलत में रिपोर्ट न करें. ...
image
निंदक मीडिया राखिए, आंगन कुटी छवाय
''मीडिया में सिर्फ नकारात्मक खबरों का जोर नहीं रहे, बल्कि अच्छी खबरों की जानकारी भी मीडिया में आनी चाहिए। निंदक पास रखने से गलती होने की संभावना कम होती है, इसलिए मीडिया को निंदक मानते हुए उसे पास रखना चाहिए।'' यह बात द संडे इंडियन पत्रिका एवं माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय द्वारा 'मध्यप्रदेश के विकास में मीडिया की भूमिका' विषय पर आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय मीडिया सेमीनार में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कही।...
image
लाली के भ्रष्टाचार की काली दुनिया
देश के सरकारी सूचना तंत्र को संचालित करनेवाला प्रसार भारती एक बार फिर चर्चा में है. चर्चा में आने का कारण कुछ और नहीं बल्कि प्रसार भारती के सीईओ बीएस लाली हैं. प्रसार भारती बोर्ड लाली के मनमानी रवैये और भ्रष्टाचार की शिकायतों से आजिज आकर उन्हें उनके पद से हटाने के लिए प्रयासरत है लेकिन बीएस लाली ने अपने और प्रसार भारती के बीच भ्रष्टाचार का ऐसा मजबूत जोड़ बनाया है जिसे बोर्ड के सारे सदस्य मिलकर भी नहीं तोड़ पा रहे हैं. शेष नारायण सिंह की स्पेशल रिपोर्ट-...
image
बड़े अब्दुल्ला मीडिया के रुख से खफा
केन्द्रीय गैरपारंपरिक उर्जा मंत्री फारुख अब्दुल्ला मीडिया से खफा हैं. शुक्रवार को एक निजी टीवी चैनल से बात करते हुए उन्होंने कश्मीर की राजनीतिक परिस्थितियों पर तो बात की ही लेकिन साथ में मीडिया पर भी जमकर प्रहार किया कि कश्मीर में मीडिया अटकलों को खबर बनाकर पेश कर रहा है....
image
विदेशियों के हाथ बिके हुए लोग हमें बिकाऊ कह रहे हैं
छत्तीसगढ़ की मीडिया पर इस बात को लेकर बहस होने लगी है कि वह बिकाऊ है या ईमानदार? अब यह सर्टिफिकेट कौन देगा कि कौन बिकाऊ है और कौन ईमानदार? स्थानीय लोग तो यह काम कर नहीं सकते इसलिए दिल्ली में बैठे कुछ लोग अचानक सक्रिय हो जाते हैं और जमे-जमाए आंदोलन पर कब्जा करने के लिए कूद पड़ते हैं। उनकी यह प्रवृत्ति अपना अस्तित्व बनाए रखने तक सीमित रहे तो समझ में आता है लेकिन विदेशी पूंजी से देशी लोगों के जख्मों पर मरहम लगाने की कोशिश का दिखावा करने वाले कथित समाजसेवी अपनी भूमिका की सफलता को लेकर आशंकित रहते हैं और वे इसका ठीकरा स्थानीय पत्रकारिता पर फोड़नेसे बाज नहीं आते।...
Next
Tags
No tags for this article
सर्वाधिकार (अ)सुरक्षित

विस्फोट.कॉम में प्रकाशित सामग्री पर हमारी ओर से कोई कापीराइट नहीं है.

Powered by Vivvo CMS v4.1.2