Home | कारपोरेट मीडिया | अमिताभ की नजर में नरेन्द्र मोदी सबसे बड़े सेकुलर

अमिताभ की नजर में नरेन्द्र मोदी सबसे बड़े सेकुलर

image

गुजरात के ब्राण्ड अम्बेसडर अमिताभ बच्चन का मानना है कि इस देश में नरेन्द्र मोदी सबसे बड़े सेकुलर हैं. मुंबई से प्रकाशित होनेवाले मिड डे अखबार को दिये इंटरव्यू में अमिताभ बच्चन ने कहा है कि उन्हें “नरेन्द्र मोदी को सेकुलर मानने में कोई आपत्ति नहीं है. आखिरकार वे एक राज्य के मुख्यमंत्री हैं जिन्हें वहां की जनता ने बहुमत से चुनकर भेजा है.” अमिताभ बच्चन का कहना है कि नरेन्द्र मोदी से दोस्ती न करने की कोई संवैधानिक रोक नहीं है. अमिताभ कहते हैं कि बतौर ब्राण्ड एम्बेसडर वे गुजरात को प्रमोट करते रहेंगे, फिर नरेन्द्र मोदी मुख्यमंत्री रहें या फिर कोई और.

अपने इंटरव्यू में नरेन्द्र मोदी को सेकुलर नेता और भाजपा को सेकुलर पार्टी बताते हुए अमिताभ बच्चन का कहना है कि उनके ऐसा कहने से उनके मुसलमान फैन भी नाराज नहीं होंगे. उन्हें उम्मीद है कि मुसलमान फैन अभी भी उनकी फिल्में देखेंगे. अमिताभ बच्चन का कहना है कि उन्होंने गुजरात के लिए प्रचार का काम मुफ्त में किया है और इस काम के लिए कोई पैसा नहीं िलया है. अमिताभ कहते हैं कि अपने देश को प्रचारित करने के लिए पैसा लेने का सवाल ही नहीं है. उन्होंने कहा कि गुजरात के ब्राण्ड एम्बेसडर बनने के लिए उन्हें न तो पत्नी के लिए राज्यसभा चाहिए और न ही उन्होंने कोई धन लिया है.

अमर सिंह अभी भी परिवार में
अमिताभ बच्चन का कहना है अमर सिंह अभी भी उनके परिवार के सदस्य हैं. हालांकि उन्होंने इस बात से इंकार कर दिया कि उन्होंने मुलायम सिंह और अमर सिंह के बीच समझौता कराने की कोई कोशिश की. अमिताभ ने कहा कि वे न तो हमारी फिल्मों के बारे में दखल देते हैं और न तो हम उनकी राजनीति में कोई दखल देते हैं. अमिताभ बच्चन का कहना है कि राजनीति में आने का उनका कोई इरादा नहीं है.

Subscribe to comments feed Comments (8 posted):

इंडियन on 22 October, 2010 13:42;08
avatar
अमिताभ पूरी तरह से व्यापारी हैं उन्हें अपने लाभ से काम है.अमिताभ की ससुराल भोपाल की है, यहाँ के गैस हादसे के बारे में और हत्यारी कंपनी युनिउन कार्बाइड के बारे में सब जानते हैं अमिताभ कार्बाइड द्वारा बनाये जाने वाले एवेरेडी सेल का प्रचार करते हैं,भोपाल के कुछ लोगों ने उन्हें इस कंपनी का प्रचार बंद करने का आग्रह यह कहते हुए किया की भोपाल के बारे में उनकी भी जिम्मेदारी है.अमिताभ ने यह प्रस्ताव ठुकरा दिया.उनकी नजर में जब यूका हत्यारी नहीं है, तो वे मोदी को सेकुलर बोलें, तो आश्चर्य क्यों हो?
Thumbs Up Thumbs Down
2
indian ka baap bol raha hooon on 22 October, 2010 14:12;55
avatar
मोदी को सेकुलर कहा तो बड़ी बात है। तय माना जाना चाहिए कि मोदी में हिंदुत्व की वास्तविक अभिव्यक्ति है। एक हिंदुनिष्ठ व्यक्ति ही सेकुलर हो सकता है। अमिताभ वैसे भी दो टूक आदमी हैं। मुलायम के साथ लंबा वक्त गुजार दिया, किंतु आजतक उन्हें सेकुलर नहीं कहा। यह धारणा देर से उजागर हुई, लेकिन सही व्यक्ति के बारे में है। मोदी का सेकुलरिज्म इसी से जाहिर होता है कि उनके नेतृत्व में गुजरात सर्वपक्षीय विकास कर रहा है। वह वर्तमान में एकमात्र ऐसे राजनेता हैं, जिनके हाथों में देश-धर्म की सुरक्षा है। चरमपंथियों को छोड़ दिया जाए तो राष्ट्रवादी मुस्लिम भी उन्हें पसंद करता है। अमिताभ जी शाबाश, मुक्त अभिव्यक्ति के लिए।
Thumbs Up Thumbs Down
1
वीरेन्द्र जैन on 22 October, 2010 23:42;44
avatar
इंडियन और उसके बोलते बाप से अलग एक सवाल है कि जो लोग सेक्युलरिज्म को गाली की तरह इस्तेमाल करते हैं वे ही मोदी को एक धंधेबाज द्वारा सेक्युलर कहे जाने पर गदगदायमान हैं। हम लोग कितने झूठों और पाखण्डियों दलालों की दुनिया में रह रहे हैं?
Thumbs Up Thumbs Down
1
Dr pawan on 23 October, 2010 11:10;09
avatar
Virender jain sahab aap to indian or uske baap se bhi aage nikal gaye aapki najar me secular hona ka matlab sirf hinduo ko antakwadi kehna hi h or secular to kewal hindu hi ho sakta h bata do kisi musalman ko isai ko ya fir kisi or ko jo secular ho or majsid k alawa mandir gurudwara ki baat bhi kar k dikha de rahi bbaat amitabh ji ki wo ek star h uska profession hi aisa h ki wo adv karega hi or modi k pichhe kyo pade ho gujrat ka janadesh h wo vikas k name par
moreover aise secularisto ki desh ko jaruruat nahi jinhone Bengal ko kangal kar diya bihar ko (lalu raj me) behal kar diya barbaad kar diya .
Thumbs Up Thumbs Down
0
इंडियन on 23 October, 2010 12:20;58
avatar
जैन साहेब,जिन्होंने गाँधी की हत्या की हो,उनकी धर्म निर्पक्ष्ता तो इसी ही होगी, इनमे और अमिताभ में कुछ अंतर नहीं है, यूका के जिस प्रबंधक केशव महेंद्रा को भोपाल की अदालत ने २० हजार हत्याओं का दोषी मानकर सजा दी है, उसे इनकी अटल सर्कार पद्म श्री देने वाली थी.मोदी पर उससे कम हत्याओं का दोष है.इनकी नज़र में वह भी किसी न किसी पद्म पुरुस्कार लायक है, भारत रत्न लेने के लिए उसे अभी और हत्याएं और दंगे करने होंगे.रही हमारे बोलते बाप की बात तो उन्हें इसी बात का पैसे भाजपा आईटी सेल देता है.गलियां इन्हें शाखाओं में सिखाई गईं हैं,आपको पता नहीं होता आईटी सेल में आने से पहले गलिओं की लिखित परीक्षा होती है, उसी के आधार पर नोकरी पक्की होती है.यह बात हमारे
Thumbs Up Thumbs Down
-1
इंडियन on 23 October, 2010 12:25;29
avatar
वो तो यह ठीक है की इस देश में मुसलमान बहुसंख्यक नहीं हैं सोचो अगर उल्टा होता और संघ हिन्दुओं की बजाय मुस्लिमों का संगठन होता तो इनकी नज़र में लादेन सबसे बड़ा धर्मनिरपेक्ष होता. हा....हा....हा....
Thumbs Up Thumbs Down
1
ek hindustani on 24 October, 2010 19:15;27
avatar
agar ye desh hindu bahul na hota to phir sakular logo ko pata chalta ki sekular hone ki kya saza hoti hai.
Thumbs Up Thumbs Down
0
Yashovardhan Nayak on 31 October, 2010 23:29;45
avatar
अमिताभ-बच्चन जी नरेंद्र मोदी के बारे में क्या कह रहें है?यह सोचने से पहले ,यह समझना होगा कि वे विचार व्यक्त कर रहें है ,या विज्ञापन का सन्देश पढ़ रहें है ?लोकनायक बाबू जयप्रकाश नारायण जी का जन्म दिवस जिस तिथि और माह में पढ़ता है ,संयोग-वश उसी तिथि और माह में अमिताभ भी जन्में थे इस संयोग का नुकसान यह हुआ कि इस तारीख़ को हर टेलीविजन-चैनल पर अमिताभ की चर्चा होती रहती और सदी के महानायक के नाम के कसीदे पढ़ें जाते है ,रजत-शर्मा जैसा मीडिया-महात्मा कहता है ,कि "जे.पी" के नाम पर टी.आर.पी. नहीं मिलती . "कैडवरी"ब्रांड कि चाकलेट के नमूने लिए जाने पर मुम्बई महानगर-पालिका ने पाया कि एक्सपायरी डेट की चाकलेटो में कीड़े पड गए ,तो सारी चाकलेट नश्ट करवा दी गई .बाजार में कैडबरी कि साख कूड़ा हो गई ,तब कंपनी ने इन्ही महानायक अमिताभ से विज्ञापन कराया था ."पप्पू पास हो गया" कहते हुए बच्चन जी कैडबरी खिलाते नजर आते . कैडबरी दोबारा बाजार में छा गई ."विज्ञापन अमिताभ का धंधा है ,खबरिया-चैनल रजत शर्मा का धंधा है" .यह अलग बात है ,कि अभिनेता हो या पत्रकार इनका भी सामाजिक कमिटमेंट होता है .अब इस बात की हाय-तौबा मचाना कि अमित जी मोदी जी को सेक्युलर कह रहें है ,अरे, भाई वे तो कल तक "यू.पी. में है दम" भी कहते थे ,क्या नतीजा निकला ,किसने माना? मुलायम औधें मुंह गिरे ,उनका पूरा दम निकल गया . क्या समय आ गया कि "अभिनेता ,राजनेता को सेक्युलर होने का सर्टिफिकेट बाँट रहें है."
Thumbs Up Thumbs Down
1
total: 8 | displaying: 1 - 8

Post your comment comment

Type in Hindi (हिन्दी में कमेन्ट करने के लिए यहां रोमन में लिखिए यह अपने आप हिन्दी में बदल देगा.)

Title :
Body
Powered by Vivvo CMS v4.1.2
Share |
  • email Email to a friend
  • print Print version

ईमेल से विस्फोटः अपना ईमेल यहां भरें और सब्सक्राइब करें:

Delivered by FeedBurner

Author info
visfot news network विस्फोट.कॉम इंटरनेट पर नये दौर की पत्रकारिता में परंपरागत मूल्यों को स्थापित करने की दिशा में लगातार काम कर रहा है, जो कि पूरी तरह से जनकेन्द्रित, वास्तविक और निहित स्वार्थी तत्वों के प्रभाव से मुक्त है. हमारा संपर्क है visfot@visfot.com
Rate this article
0
More from कारपोरेट मीडिया
Previous
image
अमिताभ की नजर में नरेन्द्र मोदी सबसे बड़े सेकुलर
गुजरात के ब्राण्ड अम्बेसडर अमिताभ बच्चन का मानना है कि इस देश में नरेन्द्र मोदी सबसे बड़े सेकुलर हैं. मुंबई से प्रकाशित होनेवाले मिड डे अखबार को दिये इंटरव्यू में अमिताभ बच्चन ने कहा है कि उन्हें “नरेन्द्र मोदी को सेकुलर मानने में कोई आपत्ति नहीं है. आखिरकार वे एक राज्य के मुख्यमंत्री हैं जिन्हें वहां की जनता ने बहुमत से चुनकर भेजा है.” अमिताभ बच्चन का कहना है कि नरेन्द्र मोदी से दोस्ती न करने की कोई संवैधानिक रोक नहीं है. अमिताभ कहते हैं कि बतौर ब्राण्ड एम्बेसडर वे गुजरात को प्रमोट करते रहेंगे, फिर नरेन्द्र मोदी मुख्यमंत्री रहें या फिर कोई और....
image
साहित्य को शर्मशार करते हंस और नया ज्ञानोदय
नेट खंगालते-खंगालते, सहज ही मन में इच्छा हुई कि साहित्य की प्रतिष्ठित पत्रिका हंस पढ़ी जाए। पत्रिका का अक्टूबर,2010 अंक डाउनलोड लिया। करीब एक दशक बाद हंस को पढ़ रहा था। पर यह क्या, एक दशक में काफी बदलावा दिखा। साहित्य की इस प्रतिष्ठित पत्रिका में पटना के रामधारी सिंह दिवाकर की एक कहानी रंडियां शीर्षक से छपी हैं। जिस संवदेना को कहानी का आधार बनाया गया है, उसका तानाबाना गजब का है। पर यथार्थ दिखाने के चक्कर में यह इस शब्द का प्रयोग शर्मशार करने वाला है।...
image
पत्रकार के ऊपर हमलावर हुए बुखारी
प्रेस को संबोधित कर सपा को खुश करने लखनऊ पहुंचे जामा मस्जिद के शाही इमाम अब्दुल्ला बुखारी को उस वक्त गुस्सा आ गया जब एक मुसलमान पत्रकार ने ही उनसे सवाल पूछ लिया कि जब दोनों पक्ष सहमति की ओर आगे बढ़ने को राजी हैं तो आप अनायास सवाल क्यों खड़ा कर रहे हैं? क्या कोर्ट के फैसले के बाद भी जमीन हिन्दुओं को नहीं सौंपी जा सकती? ...
image
अहा! क्या कॉमन रिपोर्टिंग है
कॉमनवेल्थ खेलों का उद्घाटन भी हो गया और आज अखबारों ने उस उद्घाटन की जमकर रिपोर्टिंग भी कर दी. दिल्ली से प्रकाशित होने वाले सभी अखबार कॉमनवेल्थ की चकाचौंध भरे उद्घाटन से अभिभूत हैं. कुछ अखबार तो हेडिंग लगाना ही भूल गये है. सिर्फ इतना लिख दिया है- अद्भुद....
image
छह महीने के भीतर ही एक हिन्दी वेबसाइट ने रच दिया इतिहास
हिंदी समाज को वित्तीय रूप से साक्षर बनाने की मुहिम के साथ शुरू हुई वेबसाइट अर्थकाम ने छह महीने बीतते-बीतते ही अपना प्रताप दिखाना शुरू कर दिया है। उसे देश में नए बिजनेस के सर्वोत्तम 74 ‘पावर ऑफ आईडियाज’ में चुन लिया गया है। दो चरणों में होनेवाली ‘पावर ऑफ आइडियाज’ नाम की प्रतियोगिता का आयोजन इकनॉमिक टाइम्स, आईआईएम अहमदाबाद और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय की तरफ से किया जाता है।...
image
प्रचार की छूट हो तो रुक जाएगा पेड न्यूज
सोमवार को सभी पार्टियों के नेताओं के साथ मुख्य चुनाव आयुक्त ने नयी दिल्ली में बैठक की और उनसे पैसा लेकर खबर लिखने और प्रकाशित करने की समस्या पर बात की. लगभग सभी पार्टियों की राय थी कि चुनाव आयोग ने जो खर्च पर सीमा बाँध दी है उसकी वजह से पेड न्यूज़ का सहारा लेना पड़ रहा है. नेताओं ने कहा कि जुलूस, पोस्टर, भोंपू और अखबारों में विज्ञापन पर लगे प्रतिबन्ध की वजह से सभी पार्टियां अपनी बात पंहुचाने के लिए कोई न कोई रास्ता तलाशती हैं और पेड न्यूज़ उसमें से एक है....
image
खबरी अपराधियों का सरगना साबित हुआ दैनिक जागरण
नक्सलवाद जमीन पर जितना है उससे अधिक अखबारों में है. टेलीवीजन चैनलों पर है. मीडिया में नक्सलवाद का जोर अनायास नहीं है. एक ओर जहां सरकार को मीडिया के इस रुख से फायदा मिल रहा है वहीं मीडिया घराने विज्ञापनदाता कंपनियों के हित साधने के लिए नक्सलवाद को अखबारों में बढ़ावा दे रही हैं. दैनिक जागरण ने हाल में ही ऐसी ही एक करतूत की जो सिर्फ और सिर्फ अपने विज्ञापनदाताओं को फायदा पहुंचाने के लिए खबर गढ़ी गयी थी....
image
भाजपा कांग्रेस में साइबर वार
भाजपा और कांग्रेस नये जमाने के साइबर वार को अंजाम दे रहे हैं. भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस को एक नोटिस भेजा है जिसमें कांग्रेस के ऊपर आरोप लगाया गया है कि वह एक ऐसे डोमेन से कांग्रेस की वेबसाइट की ओर पाठकों को मोड़ रही है जो भारतीय जनता पार्टी के नाम का सार संक्षेप है....
image
सर्वे है या राहुल राग अलापने का षण्यंत्र?
देश में कामनवेल्थ गेम्स का आयोजन हो रहा है और उभरते युवराज की कहीं चर्चा ही न हो यह भला कैसे हो सकता है? ठीक खेलों से एक दिन पहले व्यापारी घरानों की लॉबिंग करनेवाली एक संस्था एसोचैम की एक संस्था द एसोचैम सोशल डेवलपमेन्ट फाउण्डेशन ने एक सर्वे जारी किया है जिसमें बताया है कि देश में 72 प्रतिशत नौजवान ऐसे हैं जो यह चाहते हैं कि अगर खेलों के लिए राहुल गांधी को ब्राण्ड ऐम्बेसडर चुना जाता तो अच्छा होता....
image
कमाल है, जो बात प्रधानमंत्री को बोलनी चाहिए वह प्रीती जिंटा बोल रही हैं
दिल्ली से प्रकाशित होनेवाले सभी अखबारों ने आज अयोध्या पर फैसले को ही लीड स्टोरी बनाया है. अंग्रेजी दैनिक टाइम्स आफ इंडिया और हिन्दुस्तान टाइम्स ने पूरे मसले पर तफ्शील से रिपोर्टिंग करने का प्रयास किया है. टाइम्स आफ इंडिया ने लीड बनाया है- 2 Parts To Hindus, 1 Part to Muslims. हालांकि सच्चाई के बाद भी यह हेडिंग थोड़ा परेशान करनेवाली है लेकिन हिन्दुस्तान टाइम्स ने ज्यादा सटीकता से रिपोर्टिंग की है. एचटी की हेडलाइन है- Disputed site is Ram birthplace-HC....
image
थके हारे भारत की बेशर्म मीडिया
ये हिन्दुस्तान की मीडिया का अब तक का सबसे शर्मनाक चेहरा है इस चेहरे में बाजारुपने से उपजी बेशर्मी साफ़ नजर आती है, ऐसी बेशर्मी उस वक़्त भी नजर आई थी जब मुम्बई पर आतंकी हमला हुआ था। ये बेशर्मी उस वक़्त भी नजर आई थी जब सुरक्षाबलों ने देश के गरीब राज्यों में नक्सली उन्मूलन के नाम पर अघोषित युद्ध शुरू कर दिया था, और अब जब राष्ट्रमंडल खेल शुरू होने में महज चंद दिन शेष हैं, एक बार फिर सिर्फ आर्थिक लाभ और टीआरपी के लिए चैनलों की कुकुरदौड़ शुरू हो गयी है।...
image
प्रभु चावला और एमजे अकबर में बंटा इंडिया टुडे
हिन्दुस्तान समूह के बाद अब इंडिया टुडे की बारी है. इंडिया टुडे समूह अपने हिन्दी और अंग्रेजी समाचार व्यापार को अलग अलग करने की तैयारी के तहत पुनर्गठन की तैयारी कर रहा है. अंग्रेजी इंडिया टुडे और हेडलाइन्स टुडे की जिम्मेदारी एमजे अकबर को दे दी गयी है जबकि हिन्दी इंडिया टुडे और भाषायी समाचार व्यापार के सीईओ/संपादक की जिम्मेदारी प्रभु चावला को दी गयी है. ...
image
ऐसे न करें अयोध्या को रिपोर्ट
जैसे जैसे अयोध्या में विवादित स्थान पर हाईकोर्ट के फैसले की घड़ी नजदीक आ रही है इस मसले पर रिपोर्टिंग को लेकर दिल्ली के पत्रकारों में चिंता बढ़ती जा रही है. इसी चिंता के मद्देनजर बुधवार को दिल्ली पत्रकार संघ ने एक राउण्ड टेबल का आयोजन किया जिसके जरिए पत्रकारों से यह अनुरोध किया गया है कि विवादित परिसर पर हाइकोर्ट के फैसले को गफलत में रिपोर्ट न करें. ...
image
निंदक मीडिया राखिए, आंगन कुटी छवाय
''मीडिया में सिर्फ नकारात्मक खबरों का जोर नहीं रहे, बल्कि अच्छी खबरों की जानकारी भी मीडिया में आनी चाहिए। निंदक पास रखने से गलती होने की संभावना कम होती है, इसलिए मीडिया को निंदक मानते हुए उसे पास रखना चाहिए।'' यह बात द संडे इंडियन पत्रिका एवं माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय द्वारा 'मध्यप्रदेश के विकास में मीडिया की भूमिका' विषय पर आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय मीडिया सेमीनार में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कही।...
image
लाली के भ्रष्टाचार की काली दुनिया
देश के सरकारी सूचना तंत्र को संचालित करनेवाला प्रसार भारती एक बार फिर चर्चा में है. चर्चा में आने का कारण कुछ और नहीं बल्कि प्रसार भारती के सीईओ बीएस लाली हैं. प्रसार भारती बोर्ड लाली के मनमानी रवैये और भ्रष्टाचार की शिकायतों से आजिज आकर उन्हें उनके पद से हटाने के लिए प्रयासरत है लेकिन बीएस लाली ने अपने और प्रसार भारती के बीच भ्रष्टाचार का ऐसा मजबूत जोड़ बनाया है जिसे बोर्ड के सारे सदस्य मिलकर भी नहीं तोड़ पा रहे हैं. शेष नारायण सिंह की स्पेशल रिपोर्ट-...
image
बड़े अब्दुल्ला मीडिया के रुख से खफा
केन्द्रीय गैरपारंपरिक उर्जा मंत्री फारुख अब्दुल्ला मीडिया से खफा हैं. शुक्रवार को एक निजी टीवी चैनल से बात करते हुए उन्होंने कश्मीर की राजनीतिक परिस्थितियों पर तो बात की ही लेकिन साथ में मीडिया पर भी जमकर प्रहार किया कि कश्मीर में मीडिया अटकलों को खबर बनाकर पेश कर रहा है....
image
विदेशियों के हाथ बिके हुए लोग हमें बिकाऊ कह रहे हैं
छत्तीसगढ़ की मीडिया पर इस बात को लेकर बहस होने लगी है कि वह बिकाऊ है या ईमानदार? अब यह सर्टिफिकेट कौन देगा कि कौन बिकाऊ है और कौन ईमानदार? स्थानीय लोग तो यह काम कर नहीं सकते इसलिए दिल्ली में बैठे कुछ लोग अचानक सक्रिय हो जाते हैं और जमे-जमाए आंदोलन पर कब्जा करने के लिए कूद पड़ते हैं। उनकी यह प्रवृत्ति अपना अस्तित्व बनाए रखने तक सीमित रहे तो समझ में आता है लेकिन विदेशी पूंजी से देशी लोगों के जख्मों पर मरहम लगाने की कोशिश का दिखावा करने वाले कथित समाजसेवी अपनी भूमिका की सफलता को लेकर आशंकित रहते हैं और वे इसका ठीकरा स्थानीय पत्रकारिता पर फोड़नेसे बाज नहीं आते।...
Next
Tags
No tags for this article
सर्वाधिकार (अ)सुरक्षित

विस्फोट.कॉम में प्रकाशित सामग्री पर हमारी ओर से कोई कापीराइट नहीं है.

Powered by Vivvo CMS v4.1.2