कारपोरेट मीडिया
नक्सलवाद को कुछ यूं रिपोर्ट कर रहे हैं हमारे अखबार
अभी हाल में ही मानवाधिकार संगठन पीयूसीएल के प्रदेश संगठन सचिव और दस्तक की संपादक सीमा आजाद को कथित नक्सली बताकर इलाहाबाद में पकड़े जाने के बाद इन क्राइम रिपोर्टरों में सनसनी फैलाने की कुकुरदौड़ मच गयी है। जिसमें सबसे आगे सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाले दैनिक जागरण के क्राइम रिपोर्टर हैं।
एक दिन सामना से सामना
सामना का संपादकीय लिखा जा चुका है. मराठी में लिखा गया बाल ठाकरे का संपादकीय हिन्दी में अनुवादित किया गया है जिसमें कहा गया है कि पुणे विस्फोट के बाद अब कांग्रेसियों को सुन्नत करा लेनी चाहिए और पाकिस्तान जाकर बस जाना चाहिए. बाल ठाकरे का यह संपादकीय हो सकता है कल फिर मीडिया में चर्चा का विषय बने कि उन्होंने कांग्रेसियों को सुन्नत कराने और पाकिस्तान बसने की सलाह दी है. लेकिन खान विवाद और पुणे विस्फोट के बीच बाल ठाकरे का यह रुख उनकी विचारधारा के अनुसार ही है.
फिल्मी समस्या और जुल्मी मीडिया
12 फरवरी की सुबह सात बजे जब नाशिक से मुंबई के लिए निकल रहे थे तो ड्राइवर ने कहा कि "आज मुंबई में थोड़ा लफड़ा-विफड़ा रइंगा, क्योंकि शाहरुख खान का फिल्म आनेवाला है." शिवेसना से शाहरुख की टसन के बीच नाशिक से मुंबई पहुंचते हुए इतना सोचने में कुछ नाजायज नहीं था....वर्चुअल स्पेश के रीयल तानाशाह
अब वर्चुअल स्पेश का इस्तेमाल भी प्रायोजित तरीके से किया जाने लगा है। पिछले कुछ समय से मीडिया के इस आधुनिकतम तकनीक का इस्तेमाल भी निजी सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए स्वहित तथा व्यक्ति विशेष को लाभ पहुँचाने के उदेश्य से किया जा रहा है। इसके ज्वलंत उदाहरण हैं - अविनाश (मोहल्ला लाइव) और यशवंत (भड़ास 4 मीडिया) की पत्रकारिता।...दिल्ली के मीडिया मण्डी की मजबूर लड़कियां
आज हम आपका परिचय कराते है देश की राजधानी दिल्ली के मीडिया घरानों और उससे जुड़े कुछ ऐसे पत्रकारों से जिन्होंने उदारीकरण के इस दौर में खुलेपन का भरपूर फायदा उठाया है या फिर आज भी फायदा उठाकर पत्रकारिता को कलंकित कर रहे हैं। सबसे पहले संगठित रूप से मीडिया में यौनाचार की कहानी हमें झंडेवालान इलाके में एक अखबार में देखने को मिली थी।...प्रिन्ट मीडिया का 'इंडिया टीवी' है चौथी दुनिया
मोसाद और सीआईए ने हिन्दुस्तान को बर्बाद और टुकड़ों में बांटने के लिए 'स्माइल इंडिया 2015' प्लान बनाया है। इस प्लान के तहत आने वाले समय में देश के नामचीन लोगों के चरित्र हनन, हिन्दु-मुस्लिम दंगों और बड़े लोगों की हत्याओं का दौर शुरु किया जाएगा, जिससे पूरे देश में अफरा-तफरी का माहौल पैदा होगा।
दक्षिण की मीडिया के दुराचारी
अपने देश के मीडिया में आज भी कुछ अच्छे लोग हैं जिसके कारण पत्रकारिता में आम आदमी की आवाज बनी हुई है. लेकिन ये कुछ अच्छे लोग बस कुछ की ही संख्या में हैं. दूर दक्षिण में आइये. नारायण दत्त तिवारी का पोर्न स्टिंग दिखाकर उन्हें राजभवन से हटानेवाले हैदराबाद की पत्रकारिता में लड़कियों का जमकर शोषण होता है. इस दूसरी किश्त में हम दक्षिण की मीडिया में दुराचार का जायजा लेंगे.
अब कोई नहीं पूछता पत्रकारिता मिशन है या प्रोफेशन
अब कोई नहीं पूछता पत्रकारिता मिशन है या प्रोफेशन। शायद अब सब जान-बूझ गए हैं कि भारत में 25000 करोड़ रुपए की मीडिया इण्डस्ट्री मिशनरी भाव से खड़ी नहीं की जा सकती है। यह शुद्ध व्यावसायिक हितों से ही सम्भव है। बिरला से लेकर उषा मार्टिन तक हर तरह के व्यावसायी इस व्यवसाय में क्या किसी सामाजिक परिवर्तन की अकांक्षा लेकर आए हैं? बिल्कुल नहीं।
बिहार की मीडिया में यौनाचार की परंपरा
मीडिया में भ्रस्टाचार के साथ ही मीडिया में यौनाचार की परम्परा भी इन दिनों कुलाचे मार रही है। हालाकि मीडिया में यौनाचार की परम्परा काफी पुरानी है। पहले और आज में अंतर केवल इतना है की पहले इक्का दुक्का लोग गलत यौन संबंधो के लिए जाने जाते थे , लेकिन आज बहुतेरे मीडिया कर्मी सेक्सुअल संबंधो को अपना अधिकार और कर्त्तव्य मान बैठे है।
हिन्दी 'नीचता' बनाम अंग्रेजी 'श्रेष्ठता' की लड़ाई
अभी एक दो दिन पहले ही किसी ने यह सवाल पूछा था कि क्या हिन्दी अखबार सिर्फ इसलिए राष्ट्रीय मान लिए जाएं क्योंकि वे सर्कुलेशन में सबसे अधिक हैं? मुश्किल सवाल है लेकिन एक किला तो हिन्दी पत्रकारिता ने फतेह किया ही है. सर्कुलेशन के लिहाज से हिन्दी के अखबार अब देश ही नहीं दुनिया के सबसे अधिक प्रसारित अखबारों में अव्वल हैं.
Latest on visfot
हुसैन के इस कर्म का मर्म समझो, हिन्दुओ!
भारतीय कलाजगत के एक ढोंगी चित्रकार मकबूल फ़िदा हुसैन ने दुनिया भर में फैले भारतीय समुदाय के बूते स्वयं को स्थापित कर मोटी कमाई की है। लेकिन आखिरकार हिन्दू भावनाओं को आहत करनेवाले चित्र बनाकर हिन्दू जनमानस के साथ खिलवाड़ कर अपने जीवन की सांध्यवेला में कतर जैसे मुस्लिम देश की नागरिकता स्वीकार कर ली. ऐसा करके उसने माँ भारती की पीठ में खंजर भोंकने का काम किया है....
नंगे पांव देश नापने का नशा
लातूर के भीषण भूकंप ने उनसे उनका परिवार छीन लिया. गर्भस्थ स्त्री, बच्चे, माता-पिता, भाई कोई नहीं बचा. अगर कोई बचा तो वे खुद मोहनराव पाटिल. अब चालीस के हो चले पाटिल ने अपने परिवार के असमय काल के गाल में समा जाने के बाद पूरे देश को ही अपना परिवार बना लिया. कंधे पर राष्ट्रीय ध्वज और गले में लटकी संदेश की तख्ती के माध्यम से वे राष्ट्रप्रेम की अलख जगा रहे हैं. लोग भले ही उन्हें कुछ भी कहें, कुछ भी समझें, उनकी अनथक, अविरल देशप्रेम की पदयात्रा जारी है. संजय स्वदेश की रिपोर्ट-...
महिला आरक्षण: कहीं खुशी का खाना, कहीं चिंता की चाय
बलवा खत्म, तो समझो महिला बिल अटक गया। यादवी तिकड़ी के हंगामे पर फिलहाल सरकार ने सरेंडर कर दिया। अब फिर बात होगी बिल के हर पहलू पर। सभी पक्षों से बात कर ही अब लोकसभा में बिल आएगा। आखिर आम बजट पास कराने की मजबूरी में सरकार को भरोसा देना पड़ा। एक बार नहीं, तीन-तीन बार। संसदीय कार्यमंत्री तो बुधवार को ही सभी से सलाह-मशविरे का एलान कर चुके। गुरुवार को लोकसभा में लालू-शरद-मुलायम ने अपनी बात रखी तो प्रणव दा ने भरोसा दिलाया। फिर भी यादवी तिकड़ी का दिल नहीं भरा।...
रिलायंस पॉवर प्लांट में हादसा, 2 मरे दर्जनभर से अधिक घायल
सोनभद्र। रिलायंस के सासन पावर प्रोजेक्ट की चिमनी पर चढ़ाये जा रहे रिग के गिरने के कारण दो लोगों की मौत हो गयी है और लगभग 15 लोगों के घायल होने की खबर है. घायलों में कुछ की स्थिति गंभीर बताई जा रही है. दुर्घटना देर शाम हुई और मौके पर घनघोर अँधेरा होने की वजह से हताहतों की सही संख्या का अनुमान नहीं लगाना मुश्किल है. ...
नौजवानों के लिए ग्लोबल नालेज सेन्टर की स्थापना करेगा 'युवा'
नई दिल्ली। बेरोजगारी और आतंकवाद के मुद्दे पर काम करने वाले अंतरराष्ट्रीय गैर सरकारी संगठन “युवा ए मुमेंट” ने एक अनोखी पहल करते हुए युवाओं के लिए एक ग्लोबल नालेज सेंटर स्थापित करने की योजना बनाई है. नालेज सेंटर की स्थापना के पहले चरण में www.yuvafoundation.co.uk नामक एक वेब साइड तैयार की गई है. इसका उदघाटन केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने आज किया....
मकबूल को क्यों करें कबूल?
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का नाम लेकर कुछ हुसैन समर्थक अश्लीलता, भारतीय अस्मिता, देवी-देवताओं के प्रति आस्था और देश के प्रति सम्मान का अपमान करने वाले हुसैन और उसकी करतूतों पर पर्दा डालने और उसका बचाव करने की कोशिश कर रहे हैं। हुसैन का बचाव करनेवाले यह क्यों नहीं मानते कि अभिव्यक्ति जब सार्वजनिक होती है उसका प्रभाव व्यापक होता है और हुसैन की अभिव्यक्ति से भी करोड़ों लोग आहत होते रहे हैं। ऐसे में ये करोड़ों लोग मकबूल को कबूल क्यों करें?...
राजस्थान में गिनती के बचे हैं गिद्ध
राजस्थान में गिद्धों से जुड़ी एक रिपोर्ट आई है. रिपोर्ट में इस बात पर चिन्ता व्यक्त की गई है कि राजस्थान में गिद्धों पर संकट है. उनकी संख्या केवल 3907 शेष बची है. प्रदेश के मुख्य जीव प्रतिपालक आर एन मेहरोत्रा का मानना है कि ये गिद्ध पश्चिमी राजस्थान में ही बचे है....
बीजेपी-कांग्रेस फंस गईं एक-दूसरे के जाल में
बलात ही सही, राज्यसभा ने अपना काम निपटा दिया पर राज्यसभा से निकली महिला बिल की लपटें अब लोकसभा को झुलसा रहीं हैं। बिल विरोधियों ने बुधवार को भी लोकसभा नहीं चलने दी। जब बिल से पहले इस कदर हंगामा तो बिल आने पर क्या होगा?...
72 घंटे में 10 किसानों ने की आत्महत्या
नागपुर। जब सरकार देश की राजधानी नई दिल्ली में महिला आरक्षण, महिला उत्थान और महिला सशक्तिकरण और महिला आरक्षण विधेयक की चर्चा आदि में व्यस्त थी, तभी किसान आत्महत्या की राजधानी विदर्भ में कृषि संकट से त्रस्त 10 किसानों ने मौत को गले लगा लिया। आत्महत्या करने वाले छह किसान यवतमाल, दो अकोला, एक वाशिम और एक नागपुर जिले के हैं।...
पप्पू प्वाइंट पर अटक गई बिहार कांग्रेस की सूई
राहुल गांधी की फार्मूला कार पर बैठकर फर्श से अर्श पर पहुंचने का सपना देख रही बिहार कांग्रेस की मुसीबत यह है कि वह हर बार एक न एक ऐसी अंदरूनी मुसीबत में उलझ जाती है कि उसे बाहर ध्यान देने का वक्त ही नहीं मिल पाता। फिलहाल साधु यादव से ज्यादा बहुचर्चित बाहुबली राजनेता पप्पू यादव उसके लिए गले की फांस बने हुए हैं।...
राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है भ्रष्टाचार
हरिद्वार। सुरक्षा की समस्याओं के लिए प्रत्येक पहलुओं पर सुधारात्मक कदम उठाने की जरूरत है। भ्रष्टाचार का विकराल रूप राष्ट्रीय सुरक्षा में सबसे बड़ी बाधा है, जिसे दूर करने करने के लिए सरकार को ठोस उपाय करने होंगे, जिसे दूर करने के लिए गैर सरकारी संगठनों की भूमिका बड़ा योगदान दे सकती है। उक्त विचार रक्षा विशेषज्ञ अभिजीत भट्टाचार्य ने फोरम फोर इंटिग्रेटेड नेशनल सिक्योरिटी (फिन्स) द्वारा भारत माता मन्दिर में आयोजित राष्ट्र रक्षा सम्मेलन बोलते हुए व्यक्त किये।
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अफगानिस्तान में तालिबान के सामने नतमस्तक
अगर यह अफवाह नहीं है तो यह बुरी खबर है. पता नहीं अफगानिस्तान भारत संबंधों के विशेषज्ञ और रणनीतिकार इसे कैसे देखेंगे और परिभाषित करेंगे लेकिन भारत सरकार के खुफिया सूत्रों द्वारा खबर मीडिया में लीक की जा रही है कि भारत सरकार अफगानिस्तान में शांतिपूर्ण विकास कार्यों में कमी लायेगा. ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि बीते महीने की 27 तारीख को काबुल दूतावास के पास एक विस्फोट हुआ जिसमें नौ भारतीय मारे गये थे....
हम ब्रजवासिनी, विश्व विनोदिनी
इक्कीसवीं सदी की कल्पना वाले भारत में महिला उत्थान के लिये चल रही तमाम योजनाओं के बावजूद उत्तर प्रदेश मूल की ब्रजवासी जाति की महिलायें समाज में उपेक्षित है ही साथ में औरतों व लड़कियों की खरीद-फरोख्त की परम्परा भी इस जाति में बदस्तूर जारी है। इस कारण नाच-गाकर लोगो के मनोंरंजन का साधन बनी ब्रजवासी महिलायें अशिक्षा व रूढ़वादिता की अंधेरी सुरंग में जागरूकता के अभाव के कारण घुट-घुट कर जिन्दा रहने को विवश हैं। आजाद भारत में इस जाति की वेवश महिलाओं की दयनीय स्थिति महिला उत्थान के दावों की पोल खोल रही है।...
नेक काम लेकिन नीयत पर शक
इस महिला आरक्षण विधेयक के कई पहलू हैं। ऐसा तो होगा नहीं कि सभी आरक्षित सीटों पर नेताओं की बीबीयां ही मैदान में उतरेंगी। ऐसा भी नहीं है कि किसी महिला कार्यकर्ता ने जगह नहीं बनाई। सुषमा स्वराज या मायावती किसकी बीबी हैं? वो तो अपने ही दम पर आगे आईं हैं। मगर ऐसी महिलाओं की संख्या कम है। आरक्षण के बाद से ऐसी महिलाओं की संख्या बढ़ने लगेगी।...
पांचजन्य के संपादक का अपने ही खिलाफ शंखनाद
नई दिल्ली। संघ के मुखपत्र पांचजन्य के संपादक बलदेवभाई शर्मा ने लगता है अपने ही खिलाफ शंखनाद कर लिया है. शायद इसीलिए पांचजन्य प्रबंधन द्वारा नये संपादक की खोज शुरू कर दी गयी है. ...
- हिन्दू आतंकवाद का अतिवाद
- वह गुजरात जिसे आप नहीं जानते
- अब भोजपुरी में बोलेगा बाजार
- तालिबान के देसी संस्करण
- विस्फोट पर अस्थाई कार्य विराम
"गर्भस्थ स्त्री" की जगह "गर्भवती स्त्री" कहना चाह रहे होंगे। गर्भस्थ मानी, गर्भ में स्थित।
सिर्फ इतना ही कहूंगा..."लाजवाब आलेख"
ऐनडीटीविए तो बेगम में भी ग़ैन का नुक्ता लगा देते हैं।
अनिल जी बधाई बहुत ही झन्नाटेदार चांटा खासकर उन लोगों के मुह पर जो सामने तो आना चाहते हैं ,पर साह्स के अभाव ...
वैसे अनिल ने भी कोई बढ़िया तरीके से ब्बत नहीं की है तर्क आछे नहीं है लास्ट वाले पैराग्राफ के

