कारपोरेट मीडिया
सौदा नहीं पटा तो शुरू किया अभियान
‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ खोजी खबरों के लिए नहीं जाना जाता। उसकी छवि सरकार के मुखपत्र की रही है। गत 31 जुलाई को टाइम्स ऑफ इंडिया के पाठकों को नया अनुभव हुआ। उन्हें महसूस हुआ कि अपना अखबार नए अवतार में हैं। उसने भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान छेड़ दिया है। ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ जैसा बड़ा अखबार जब खेल-कूद के एक अंतरराष्ट्रीय आयोजन की तमाम गड़बड़ियों को उजागर करने पर उतर आया तो लोगों को चारो तरफ गड़बड़ ही नजर आने लगा। उन्हें क्या पता था कि यह वह खीझ है जो अखबार में इसलिए प्रकट हो रही है, क्योंकि सौदा पटा नहीं।
रांची में पूंजी बनाम पत्रकारिता की जंग
रांची में 22 अगस्त से मीडिया वार शुरू हो चुका है. खोजी खबरें, जनसरोकार और मुद्दे की बात पर आधारित पत्रकारिता करने के लिये मशहूर अखबार समूह प्रभात खबर के इस गढ़ में हाई-लाइफ(पेज-3 पत्रकारिता), बाजारवाद और सनसनी परोसने वाला मीडिया समूह दैनिक भास्कर ने दस्तक दे दिया है.
सुतनु का संपादकीय संघवी ने चुरा लिया
बिजनेस एंड इकोनॉमी के पिछले अंक(20 अगस्त-02 सितंबर) में प्लानमैन मीडिया के ग्रुप मैनेजिंग एडिटर सुतनु गुरु ने सांसदों के वेतन बढ़ाए जाने पर चल रही खींचतान पर संपादकीय लिखा.अपने लेख में सुतनु गुरु ने भारत के सांसदों और दुनिया के कई दूसरे देशों के सांसदों को मिलने वाली तनख्वाह और दूसरी सहूलियतों का एक तुलनात्मक लेखा-जोखा दिया था और यह भी लिखा कि हमारे सांसदों के लिए लोगों के मन में ऐसी राय बन गई है कि वे सांसदों की वाजिब दिक्कतों को भी तवज्जो नहीं देते....दैनिक जागरण का सर्कुलेशन गिरा, दर्जा बरकरार
इंडियन रीडरशिप सर्वें 2010 की दूसरी तिमाही के नतीजों की घोषणा हो गयी है। इस सर्वे में टॉप10 अखबारों ने अपना स्थान बरकरार रखा है। दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर और हिन्दुस्तान टॉप थ्री पर काबिज है जबकि मलयालम मनोरमा और अमर उजाला चौथे और पांचवें नंबर पर है। इस दौरान अखबारों की प्रसार संख्या में परिवर्तन होने के बावजूद इनकी रैंकिंग में कोई बदलाव नहीं हुआ।...मराठी मार्मिक में हिन्दी
बाल ठाकरे की मराठी राजनीति को महाराष्ट्र में जिस एक पत्रिका ने परचम लहराया उसका नाम है मार्मिक. मार्मिक ही वह कार्टून पत्रिका है जो बाल ठाकरे की शुरूआती राजीनीति का आधार बना. धुर महाराष्ट्रवाद को समर्पित इस मराठी पत्रिका के पचास साल के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि पत्रिका ने हिन्दी में आलेख प्रकाशित करके बाल ठाकरे की राजनीति को नयी दिशा में जाने का संकेत दिया है. ...कलमाड़ी की करतूत को सहारा प्रणाम
प्रिय सुब्रत राय साहब, सादर प्रणाम।
आपके द्वारा समाचार पत्रों मे कामन वेल्थ गेम 2010 के लिए आम जनता के नाम की गयी मार्मिक अपील हमने पढी है। आपकी यह मार्मिक अपील उस समय समाचार पत्रों मे प्रकाशित हुई है जब चारों ओर से कामन वेल्थ गेम आयोजन समिति पर भ्र्रष्टाचार और बेइमानी के सीधे आरोप लगे है।
सहाय साहब के खिलाफ कमीनेपन की कुलबुलाहट
अंबिकानंद सहाय मौन हैं। सही और समझदार लोग अक्सर ऐसा करते हैं। वे किसी भी बकवास पर ध्यान नहीं देते। कदविहीन लोगों की जड़विहीन बातों को बिल्कुल अनदेखा कर देते हैं। चाणक्य ने कहा था, कि व्यक्ति जैसे – जैसे बड़ा होता है, उसके आस पास के बौने लोगों की घृणा भी उसे झेलनी पड़ती है। ओशो भी कहते थे – बड़ा व्यक्ति वही है, जो अपने आसपास के ओछे लोगों को, वे जो कर रहे हैं, करने दे, वरना उनको समझाने में वह अपने जीवन का अमूल्य समय खो देगा। और अपना भी मानना है कि गली में कुत्ते भले ही भोंक रहे हों, फिर भी गज को तो अपनी गति से ही चलते रहना चाहिए।
सुविधावाद की पगडंडी के पत्रकार अंबिकानंद सहाय
आज़ाद न्यूज़ के न्यूज़ डायरेक्टर अम्बिकानंद सहाय को कुछ माह पहले लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से नवाजा गया है। उनका नाम देखते ही पुरस्कार की चयन प्रक्रिया और उसके “मैनेज्ड” होने को लेकर मन शंकाओं से भर गया था। चेला संस्कृति और सुविधावाद के प्रतिनिधि पत्रकार अंबिकानंद सहाय को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड दिए जाने ने इस पुरस्कार की गरिमा और उसके कद को कम किया है। खेद की बात है कि मीडिया फेडरेशन ऑफ इंडिया को इतने बड़े देश में इस पुरस्कार के लिए अंबिकानंद सहाय से बेहतर नाम नहीं मिल सका।
'आप भी चले गये राय साहब, छिनारों की तरह'
लोकतंत्र कुत्तों के संभोग का नाम नहीं है और न ही विद्वतजनों और अभिजनों की भाषणबाजी से लोकतंत्र को परिभाषित किया जायेगा। कल जो हंस के सालाना जलसे में हुआ वो हिंदुस्तान में लोकतंत्र के जागृत होने का जीता जगता नमूना था, ये सत्ता के दमनचक्र में शामिल लोगों के खिलाफ सामूहिक क्रांति के शुरू होने का प्रत्यक्ष प्रमाण था। कार्यक्रम की सार्थकता विभूति राय और आलोक मेहता के भाषण नहीं थे. वो नारेबाजी थी, जिसकी गूंज हम अब तक सुन रहे हैं।
विभूति नारायण पागल हो गया है
पुलिस के पूर्व अधिकारी और वर्धा स्थित महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति, विभूति नारायण राय ने महिला लेखकों के बारे में जिस तरह से वेश्या होने की बात कही है, वह असंभव लगती है. लेकिन बात उनके बहुत करीबी साहित्यकार की निगरानी में छपी पत्रिका में कही गयी है इसलिए गलत होने का कोई सवाल ही नहीं है.
Latest on visfot
सुदर्शन का (कु) दर्शन
जबसे आरएसएस के लोगों की आतंकवादी घटनाओं में संलिप्तता सामने आयी है, तब से आरएसएस के नेता बौखला गए हैं। इस बौखलाहट में ही शायद संघ के इतिहास में पहली बार हुआ है कि इसके स्वयंसेवक विरोध प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर उतरे। इसी बौखलाहट में आरएसएस के एक्स चीफ केएस सुदर्शन का मानसिक संतुलन बिगड़ गया और सोनिया गांधी के बारे में ऐसे शब्द बोल दिए, जिन्हें एक विकृत मानसिकता का आदमी ही बोल सकता है।...
सीआईए नहीं केजीबी एजंट कहिए जनाब
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरसंघचालक ने 10 नवंबर को सोनिया गांधी पर सीआईए एजंट होने का आरोप लगाकर सनसनी पैदा कर दिया है. पूरी की पूरी कांग्रेस उत्तेजित है और संघ भी बैकफुट पर चला गया है. सुदर्शन के आस पास के लोगों का कहना है कि सुदर्शन जी भुलक्कड़ हो गये हैं और उन्हें कुछ ठीक से याद नहीं रहता. शायद इसीलिए उन्होंने इतनी बड़ी चूक कर दी. ...
सोनिया का सच जान बेकाबू क्यों होते हो?
एक बार फिर लोकतंत्र पर आपातकाल मंडरा पड़ा है. राजमाता सोनिया गांधी के सिपहसालारों ने कांग्रेसी गुण्डों, माफियाओं और लोकतंत्र के हत्यारों का आह्वान किया है कि वह देशभर में संघ कार्यालयों पर धावा बोल दे. इसका तत्काल प्रभाव हुआ और कांग्रेसी गुण्डों ने संघ के दिल्ली मुख्यालय पर धावा भी बोल दिया. ठीक वैसे ही जैसे इंदिरा गांधी की मौत के बाद सिखों को निशाना बनाया गया था. हिंसक और अलोकतातंत्रिक मानसिकता से ग्रस्त कांग्रेसी सोनिया का सच जानकर आखिर इस तरह बेकाबू क्यों हो रहे हैं?...
नये निजाम के दामन पर है ज्यादा बड़ा दाग
मुंबई। महाराष्ट्र के नए निजाम भी कोई दूध के धुले नहीं हैं। कांग्रेस आलाकमान ने अशोक चव्हाण को फर्जीवाड़े से फ्लैट पाने के आरोप में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की गद्दी से हटा दिया। लेकिन नए मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण भी उसी तरह के फर्जीवाड़े में गले तक डूबे हुए हैं। उन्होंने जितने बड़े बड़े झूठ बोलकर सरकार से फ्लैट हथियाए हैं वे कांग्रेस के लिए ज्यादा दागदार हैं।...
अजमेर चार्जशीट और संघी उछल-कूद
बढ़ते पैमाने पर इसके साक्ष्य सामने आ रहे हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर एस एस) से जुड़े लोगों का आतंकवादी हमलों में हाथ रहा है। इन हालात में आर एस एस इस पुराने सूत्र पर चल रहा लगता है कि हमला ही सबसे अच्छा बचाव है। उसने 10 नवंबर को देशव्यापी विरोध कार्रवाइयों का आह्वान किया है। इन कार्रवाइयों में संघ के शीर्ष नेताओं के शामिल होने की बात कही जा रही है। बहरहाल, इसकी चर्चा हम जरा बाद में करेंगे।...
अपने होने पर ही हैरान
‘चुप्पी-चुप्पी नहीं नहीं, बोलेंगे अब सभी-सभी’ इन्हीं नारों से दाहोद (गुजरात) का सीनियर रेलवे संस्थान परिसर 31 अक्टूबर को पूरे दिन गूंजता रहा। यहां गुजरात के बड़ोदरा, पंचमहल, सुरत, भड़ूच, डांग, बालसाड और साबरकांठा जिले से लगभग तीन हजार के आस पास विमुक्त एवं घुमंतू समाज से ताल्लुक रखने वाले लोग इकट्ठे हुए थे। मौका था, अधिकार अभियान की घोषणा का। उस समाज के लिए जो इस लोकतांत्रिक देश में अधिकार का अर्थ अभी तक समझ नहीं पाएं हैं। ...
गोली लगने के बाद क्या गांधी ने कहा था- हे राम ?
यह एक ऐसा सवाल है जिस पर अब विवाद होने लगा है. 30 जनवरी 1948 को क्या जब महात्मा गांधी को नाथूराम गोडसे ने गोली मारी तो महात्मा गांधी ने अपने मुंह से हे! राम का संबोधन किया था? उस वक्त घटनास्थल पर मौजूद रहे एक प्रत्यक्षदर्शी के डी मदान का कहना है कि "मैंने नहीं सुना था कि उन्होंने हे राम कहा था या नहीं."...
भद्दा और बेदम रहा संघ का विरोध प्रदर्शन
स्कूल जाते बच्चों के भी हाथ में भगवा थमाकर भले ही संघ ने शक्ति प्रदर्शन की भरपूर कोशिश की हो लेकिन 10 नवम्बर का दिन उसके इतिहास में कोई बडी घटना के रूप में याद नहीं किया जायेगा। हॉ हम बात कर रहे है राजस्थान के भरतपुर जिला मुख्यालय की जहॉ देश भर की ही तरह हिन्दुवादी संघटनों ने अपने उपर लग रहे ‘भगवा आतंकवाद’ के आरोपों के विरोध में शक्ति प्रदर्शन किया था। भरतपुर जहॉ संघ प्रचारक क रूप में भाजपा के पीएमइन वेंटिग लालकृष्ण आडवानी ने अपनी सेवाऐं दी है संघ का ये विरोध प्रदर्शन एक दम भददा और हल्का रहा।...
एनसीपी के 'दादा' का दांव
महाराष्ट्र में कांग्रेस में परिवर्तन हुआ तो राष्ट्रवादी कांग्रेस ने भी अपने पत्ते खोल दिये. राज्य में लंबे समय से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के भीतर चल रही सत्ता के दावेदारी पर एनसीपी ने आखिरकार प्रदेश की प्रशासनिक कमान अपनी ओर से शरद पवार के भतीजे अजीत पवार को सौंप दी है. अब गुरुवार को शाम साढ़े चार बजे पृथ्वीराज चव्हाण के साथ अजीत "दादा" पवार उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे....
पीएमओ वाले पृथ्वीराज
महाराष्ट्र के नये मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण यूपीए सरकार पार्ट वन और पार्ट टू में बतौर पीएमओ मिनिस्टर जाने जाते हैं. प्रधानमंत्री कार्यालय में रहते हुए भी उन्होंने कभी ताकतवर होने का दंभ नहीं पाला और चुपचाप काम करते रहे. बिट्स पिलानी से बीई और बर्कले विश्वविद्यालय से एमएस की डिग्री हासिल करनेवाले पृथ्वीराज की राजनीतिक कमेस्ट्री ने उनके सार्वजनिक जीवन में पहली बार इतना गाढ़ा रंग उड़ेला है....
सुलग रहा है मेरठ 'हिन्दुस्तान'
एक ओर हिन्दुस्तान अखबार अपनी अलग कंपनी बनाकर अखबार को चमकाने और अखबार का विस्तार करने में लगा है वहीं दूसरी ओर हिन्दुस्तान के विभिन्न संस्करणों में हालात ठीक नहीं है. हिन्दुस्तान के मेरठ संस्करण में इन दिनों इस्तीफे दिये जा रहे हैं लेकिन प्रचारित किया जा रहा है कि जो आफिस नहीं आ रहे हैं वे छुट्टी पर चले गये हैं....
आलोक तोमर के बगल में बसे किशोर मालवीय
सीएनईबी में पहले से एक सलाहकार संपादक थे- आलोक तोमर. अब दूसरे सलाहकार संपादक भी वहां नियुक्त हो गये हैं किशोर मालवीय. उन्होंने सीएनईबी चैनल के साथ बतौर कंसल्टिंग एडिटर अपनी नई पारी की शुरुआत की है। सीएनईबी से पहले वे ‘वायस ऑफ इंडिया’ न्यूज चैनल के साथ जुड़े हुए थे। उन्होंने करीब दो दशक के कॅरियर में देश के नामी-गिरामी मीडिया संस्थानों में कई जिम्मेदारियां निभाईं हैं।...
सुरक्षा परिषद की छांव में खेती पर दांव
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने संसद में दिये गये अपने भाषण में भारत से मिले प्यार की भूरि भूरि प्रशंसा जरूर की लेकिन अपनी व्यावसायिक मजबूरियों को छिपा नहीं सके. बराक ओबामा ने संसद के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करते हुए जहां एक ओर भारत को महाशक्ति करार देकर उसके लिए संयुक्त राष्ट्र में स्थायी सदस्यता को अपना समर्थन दिया वहीं भारत और अमेरिका द्वारा मिलकर खेती के क्षेत्र में एक और हरित क्रांति के आगाज की घोषणा की....
आतंक नहीं कश्मीर केन्द्रित हुई ओबामा यात्रा
रविवार की देर शाम भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा आयोजित भोज में ओमर अब्दुल्ला के शामिल होने से जो आशंका पैदा हुई थी वह सोमवार को हैदराबाद हाउस में और प्रबल रूप में सामने आ गयी जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अमेरिकी राष्ट्रपति की उपस्थिति में स्वीकार किया कि वे पाकिस्तान से बात करते वक्त "के" शब्द पर बात करने से नहीं कतराते हैं....
भारत से धंधा, पाक को चंदा
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक हुसैन ओबामा ने अपना तीन दिवसीय दौरा पूरा कर लिया. मुंबई उतरकर दिल्ली दरबार तक उनकी दस्तक भारत पर अमेरिका के मजबूत पकड़ की मिसाल बन गया. निश्चित रूप से उनका दौरा भारत के लिए उतना महत्वपूर्ण नहीं जितना खुद अमेरिका के लिए है. मंदी के दौर से जूझ रहे अमेरिका को "कारपोरेट" जगत का धंधा दिलाने के लिए उन्होंने न केवल भारत को महाशक्ति करार दे दिया बल्कि सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता का समर्थन भी कर दिया....
- आलोक तोमर की आपबीती
- वह गुजरात जिसे आप नहीं जानते
- हिन्दू आतंकवाद का अतिवाद
- सिमी से भी खतरनाक है संघ का स्वरूप
- बाबा रामदेव का दांव
बहुत अच्छा व सच्चाईयो पर आधारित लेख है। सेकुलर भारत के निर्माँण मे ऐसे लेख का अहम योगदान होगा. संपादक- आपकी आवाज़.कांम
बहुत अच्छा व सच्चाईयो पर आधारित लेख है। सेकुलर भारत के निर्माँण मे ऐसे लेख का अहम योगदान होगा. संपादक- आपकी आवाज़.कांम
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...




