भाड़ में जाए आईपीएल
साल दो साल पहले तक क्रिकेट खिलाड़ियों की ऐसी दुर्दशा नहीं होती थी. तब भी इतना अनादर नहीं होता था जब सट्टेबाजी के आरोप लगते थे.
लेकिन अब क्रिकेट के हीरो कंपनियों के हाथ के खिलौने हो गये हैं. वैसे ही जैसे कोई कंपनी अपने यहां कोई एमबीए छाप एक्सक्यूटिव रखती है और मुंहमांगा पैसा उसके मुंह पर मारती है. फिर कहती है अब तुम्हारा ये टार्गेट है. पूरा करो. इसे और आसानी से समझना हो तो ऐसे समझिए कि अंग्रेज बहादुर राय साहबों और जमींदारों को अपने घर में चाय पिलाते थे और गोरी मेम का दर्शन कराने के बाद उन्हें एक टार्गेट दे देते थे. जाओ और इस साल हमें इतना लगान चाहिए. उस लगान में एक हिस्सा उस जमींदार को मिल जाता था. अब वह अपना टार्गेट पूरा करने के लिए दिन-रात एक करके, अपने ही लोगों का खून चूसकर वसूली करता था और अंग्रेज बहादुर की कोठी पर जाकर चाय पीता था.
कुछ बदला नहीं है. आज कंपनियां भी अपने दूतों (एक्सक्यूटिव) को एक टार्गेट देती हैं. बदले में मुंहमांगा पैसा भी. अब उसका काम है वह मरे या जीये अपने बिजनेस टार्गेट को पूरा करे. अपना खून जलाए या दूसरे का खून पिये हर हाल में उसे टार्गेट पूरा करना होता है. क्रिकेट में भी यही हो रहा है. ललित मोदी की जिस योजना पर दस-बारह साल पहले अमल नहीं हो पाया वह उन्होंने इस साल अमल में ला दिया. जब अमल में ला दिया तो बीसीसीआई को मोटी कमाई हो गयी. उद्योगपतियों को मौका मिल गया जनता के बीच जाने का. उद्योगपति जानते हैं कि क्रिकेट के खिलाड़ी इस देश के राजनेताओं से भी बड़े हीरो हैं. उद्योगपतियों की नजर में ऐसे घोड़ों की पीठ पर माल लादकर आसानी से बेचा जा सकता है. और देखते ही देखते अरबों रूपये का निवेश हो गया.
अब अरबों का निवेश जिस घोड़े पर हो और वह रेस न जीत पाये तो उसके साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए? विजय माल्या ने यही किया. पहले चारू शर्मा को संदेश भिजवा दिया कि भैया अपना रास्ता नापो. इसके बाद राहुल द्रविड़ को अपमानित कर दिया. भाई माल खा रहे हो, खरहरा लग रहा है और रेस नहीं जीतोगे तो मालिक क्या करेगा? या तो चाबुक मारेगा या फिर अपनी टीम से बाहर कर देगा. विजय माल्या क्या गलत कर रहे हैं? और शाहरूख खान की सुनिये. उन्होंने कोलकाता टीम के चार सदस्यों को कहा कि जाओ यार होटल छोड़ो. क्यों होटल का बिल बढ़ा रहे हो. और क्रिकेटरों को कुत्ते की तरह होटल से बाहर करवा दिया.
शाहरूख खान का कहना है कि वे ऐसा कास्ट कटिंग मेजर के तहत कर रहे हैं. जरूर करो भैये. हो सके तो इन क्रिकेटरों को गले में एक पट्टा भी डाल दो. कुछ तो होश आयेगा कि हुनर को पैसे पर बेचा जाए तो क्या-क्या भुगतना पड़ता है. आईपीएल और क्रिकेटर जाय भाड़ में. मुझे तो मीडिया को लेकर चिंता हो रही है. क्या इस देश की मीडिया सिरे से पगला गयी है. यार उस पैसे के खेल में तुम लोगों को क्यों उल्लू बना रहे हो. मेरा तो साफ मानना है कि आप लोग भी आईपीएल का क्रिकेट देखने की कीमत तय कर दीजिए. जब खेलनेवाला पैसा ले रहा है, खिलवाने वाला पैसा पीट रहा है और उसे खबर बनाकर आप तक पहुंचानेवाला भी पैसा पीट रहा है तो आप क्यों नाहक अपना समय बर्बाद करते हैं. मैं तो आईपीएल क्रिकेट देखने का हर घंटे पांच सौ रूपया चार्ज करूंगा क्योंकि अपरोक्ष रूप से पूरा आईपीएल हर दर्शक से हर घंटे इससे ज्यादा कमा रहा है. नहीं तो भाड़ में जाए आईपीएल और उसके असली खिलाड़ी. किसे इतनी फुर्सत है कि मुफ्त में कंपनियों के बलि का बकरा बने. आपको है तो आप हलाल होईये.
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