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तहलका संपादक के नाम खुला पत्र

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प्रिय तरूण तेजपाल जी, मैं तहलका का नियमित पाठक हूं. इसलिए पिछले दिनों जब तहलका ने सिमी पर केन्द्रित अंक निकाला तो मैंने इसे बहुत उत्सुकता से पढ़ा. लेकिन पढ़कर मैं चकित रह गया. मुझे उम्मीद थी कि तीन महीनों की खोजबीन के बाद आपने सिमी के बारे में जो जानकारी दी होगी उससे निश्चित ही मेरी समझ में बढ़ोत्तरी होगी....

यह अपेक्षा इसलिए भी थी क्योंकि तहलका पहले भी इस तरह की खोजी रपटों में हर पक्ष की गहन पड़ताल करता है और सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलुओं को सामने रखता है. लेकिन विद्वान खोजी पत्रकार अजीत साही ने तीन महीने की मेहनत और खोजबीन के बाद सिमी के बारे में जो निष्कर्ष प्रस्तुत किया है वह यह है कि सिमी के पदाधिकारी जिन्हें बम विस्फोटों और देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया गया है वे बेहद मासूम हैं और उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं है. पूरी पत्रकारिता का सार यह है, क्योंकि सिमी पर प्रतिबंध का कोई ठोस आधार नहीं बनता, इसलिए उसपर प्रतिबंध नहीं होना चाहिए.

मेरे ख्याल से आपके प्रतिनिधि अजीत साही ने तीन महीनों तक ग्यारह शहरों का कष्टदायक सफर तय करके सिमी कार्यकर्ताओं के परिजनों से मिलकर जो मालूमात हासिल की है वह तो बिल्कुल सही है क्योंकि सिमी का अपने बचाव में जो बयान है अजीत साही ने बड़ी ईमानदारी से उसे दर्ज किया है. लेकिन अफसोस सिर्फ इतना है कि उन्होंने इसे कहीं भी क्रास चेक नहीं किया है. और शहरों के बारे में तो नहीं लेकिन मुंबई में अजीत साही ने दूसरा पक्ष जानने के लिए किससे संपर्क किया? मुंबई में अंग्रेजी की वरिष्ठ पत्रकार ज्योति पुनवानी पिछले तीन सालों से मुसलमानों की समस्याओं पर इतना "सहानुभूति पूर्वक" लिखती हैं कि जमात-ए-इस्लामी और सिमी के एक पदाधिकारी ने उन्हें मुसलमान होने का न्यौता ही दे दिया था. साल भर पहले तक ज्योति पुनवानी सिमी को इस्लाम के प्रति अति उत्साही युवाओं का संगठन बताती रही हैं. जमात-ए-इस्लामी के हुकूमत-ए-इलाहिया (दुनियाभर में अल्लाह की हुकूमत) के नजरिये में उन्हें कोई आपत्ति नजर नहीं आती. विशेष न्यायाधिकरण का सिमी से प्रतिबंध हटाने का फैसला आने के बाद १७ अगस्त को टाईम्स आफ इंडिया में इन्हीं ज्योति पुनवानी ने लिखा था हाउ माई परसेप्शन आफ सिमी चेंज्ड, और विस्तार से बताया है कि कैसे सिमी के बारे में उनकी धारणा बदल गयी.

आपको यह पता ही होगा कि सिमी के पांच उद्येश्य हैं- अल्लाह मकसद हमारा, रसूल रहबल हमारा, कुरान कानून हमारा, जिहाद रास्ता हमारा, शहादत मंजिल हमारी. सिमी के लेटरहेड पर बने निशान में धरती पर कुरान रखा हुआ है और कुरान पर एके-४७ रायफल. इसलिए सिमी खुद अपने इरादों को छुपाकर नहीं रख रहा है. पृथ्वी पर कुरान और उस पवित्र किताब पर एके-४७ का अर्थ किसी को समझाने की जरूरत नहीं है. सिमी किसके खिलाफ जेहाद करना चाहता है और क्यों शहीद हो जाना चाहता है, क्या इसके पीछे छिपे मकसद को बताना होगा?तरूण तेजपाल जी, क्या साही से आपको यह नहीं पूछना चाहिए था कि उन्होंने सिमी के चरित्र का दूसरा पक्ष जानने की कोशिश क्यों नहीं की? उन्होंने अपनी पूरी रिपोर्टिंग सिमी के बचाव पक्ष के वकील के तौर पर क्यों किया? आपने सिमी का जो प्रोफाईल दिया है उसमें उसके संस्थापक मोहम्मद अहमदुल्ला सिद्दीकी के बारे में लिखा है कि उन्होंने १९७७ में उन्होंने सिमी की स्थापना की, लेकिन पाठकों को यह बताने की जहमत क्यों नहीं उठायी कि कुछ ही सालों बाद सिद्दीकी ने सिमी से अपना नाता तोड़ लिया था. पिछले साल इंडियन एक्सप्रेस को दिये एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा था उन्हें सिमी की स्थापना पर अफसोस है, क्योंकि वह इस्लाम के रास्ते से हटकर जेहाद के रास्ते पर चला गया है. इसी तरह आपने सिमी और जमात-ए-इस्लामी के संबंध पर सिर्फ इतना लिखा गया है कि वह जमात-ए-इस्लामी का एक उपसंगठन था और वह जमात से अलग अपनी पहचान कायम करना चाहता था जबकि हकीकत यह है कि सिमी के जेहादी तेवरों को देखने के बाद जमात ने खुद सिमी से अपना रिश्ता तोड़ लिया था. लेकिन यह भी सच है कि यह संबंध विच्छेद एक दिखावा मात्र था.

अब मैं कुछ ऐसे तथ्य रखना चाहूंगा जो अजीत शाही द्वारा ११ शहरों में खोजबीन करने के बाद भी सिमी के बारे में जुटाये नहीं जा सके. १९९६ में अफगानिस्तान में तालिबान की हुकूमत कायम होने के बाद सिमी ने उसे अपना आदर्श मानते हुए भारत में नारों और पोस्टरों के जरिए जेहाद का ऐलान कर दिया. २९ अक्टूबर १९९९ को सिमी ने कानपुर में सिमी ने अखिल भारतीय सम्मेलन आयोजित किया था जिसमें देशभर के २० हजार से अधिक प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया था. इस सम्मेलन को फिलीस्तीनी जिहादी संगठन हमास के नेता शेख यासीन अहमद ने संबोधित किया था. आप जानते ही होंगे कि शेख यासीन ने ही इजरायल और अमेरिका में आत्मघाती हमले करवाये थे. इसी सम्मेलन को फोन द्वारा जमात-ए-इस्लामी (पाक) के अध्यक्ष काजी हुसैन ने भी संबोधित किया था. यह सिमी ही था जिसने कानपुर के तमाम सिनेमघरों को बंद कराने का आदेश दिया था और वहां की लड़कियों को बुर्का पहनने की चेतावनी दी थी.

चलिए मान लेते हैं कि आपका संवावदताता कानपुर नहीं गया था इसलिए इन जानकारियों से मरहूम रह गया हो लेकिन आपको यह पता ही होगा कि सिमी के पांच उद्येश्य हैं- अल्लाह मकसद हमारा, रसूल रहबल हमारा, कुरान कानून हमारा, जिहाद रास्ता हमारा, शहादत मंजिल हमारी. सिमी के लेटरहेड पर बने निशान में धरती पर कुरान रखा हुआ है और कुरान पर एके-४७ रायफल. इसलिए सिमी खुद अपने इरादों को छुपाकर नहीं रख रहा है. पृथ्वी पर कुरान और उस पवित्र किताब पर एके-४७ का अर्थ किसी को समझाने की जरूरत नहीं है. सिमी किसके खिलाफ जेहाद करना चाहता है और क्यों शहीद हो जाना चाहता है, क्या इसके पीछे छिपे मकसद को बताना होगा? एक मिनट में डेढ़ सौ बुलेट दागनेवाली एके-४७ का इस्तेमाल आखिर किस लक्ष्य के लिए होता है? हमें तो यह पता है कि इससे निकलेवाली गोलियां जान बचाती नहीं, जान लेती हैं. तरूण जी जितना आपको खाकी पैण्ट और लाठीधारियों से परहेज है उतना ही हमें भी है. छह इंच का चाकूनुमा त्रिशूल बांटनेवाले बजरंगदलियों से घृणा होती है, फिर एक-४७ लेकर देहाद का इरादा रखनेवाले हमारी नजर में मासूम कैसे हो सकते हैं? "काफिर भारत" को नेस्तनाबूत कर देने की प्रतिज्ञा लेनेवाले लादेन और तालिबान जिनके आदर्श हों उन्हें किन मानदंडों पर आप राष्ट्रवादी साबित करेंगे? आपकी यह रिपोर्ट बहुत सारे उर्दू अखबारों ने अपने यहां छापी है. निश्चित रूप से जो सिमी को इस्लाम का सच्चा खिदमतगार मानते हैं उन्हें आपकी रिपोर्ट से बहुत बल मिला है. लेकिन आपकी इस रिपोर्ट से उन मुट्ठीभर मुस्लिम बुद्धिजीवियों को जरूर धक्का लगेगा जो सिमी की देशविरोधी गतिविधियों से अपने संप्रदाय को सचेत करते रहे हैं. काश तहलका सिमी के मुखौटे के पीछे की असली सच्चाई सामने लाने की कोशिश की होती....

आभार,
साजिद राशिद    
(साजिद राशिद संजीदा पत्रकार हैं और जनसत्ता में नियमित कालम लिखते हैं.)

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Suresh Chiplunkar on 24 August, 2008 17:22;59
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राशिद भाई, अगली "सेकुलर" सरकार में तरुण तेजपाल का पद्मभूषण पक्का… और उनका संवाददाता शायद उज्जैन भी नहीं आया होगा, सफ़दर नागौरी भी यहीं का है और सोहराबुद्दीन भी यही का था… आपको एक शानदार लेख के लिये बधाई…
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अशोक पाण्‍डेय on 24 August, 2008 17:48;31
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आपने विचारणीय सवाल उठाए हैं। यदि आप द्वारा प्रस्‍तुत तथ्‍य सही हैं, तो निश्चित तौर पर तहलका की पत्रकारीय निष्‍ठा सवालों के घेरे में आ जाती है। साधारण-सी डबल कॉलम की खबर में भी अपेक्षा रखी जाती है कि वह एकपक्षीय नहीं हो।
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rajesh on 24 August, 2008 18:28;50
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sajid to jansatta me abhi likh rahe hai ajit sahi express samuh se 20 sal pahle jude the aur tab se unki khabro per koi ungli nahi utha paya .sangh parivar ke logo ki bat alag hai.tehelka ka javab unhi ki patrika ko bhejne ki bajai yeha dene se saf hai ki inhe bhi prchar chahie.vaise bhi visfot ka ab sanghikaran puri tarah ho chuka hai.
jai sriram
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rajkumar singh on 25 August, 2008 03:53;36
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Rajeshjee,sawal yeh naheen hai ki kaun kitna purana hai.ham koyee chawal ya sharab naheen aank rahe hain.yahan sawal tathyon aur patrakarita ke mankon ke uthaye gaye hain.aur fir 'sangheekaran'bhagwakaran'kaha jaye ya 'vam margee'chadm dharmnirpepkchta''psuedo-secularist'ye galiyan bahas se bhatakav aur kheezh darshatee hai sanvad naheen.aur prachar kee baat kya hai?Agar patrakarita ke itihaas me jayen to haal me hee swargeeya huye rusee karanjia ka bhee yehee andaz tha.Agar sahee likha jaa raha ho to prachar naheen hota vistar hota hai aur patrakarita ka yeh ghoshit uddesh hai aur hona bhee chahiye.Main patrakarita se naheen juda par khud ko ek sajag pathak manta hoon. khud ko iseeliye sirf ek srot par hee bharosa naheen karta khud bhee cross check karta hoon.'SIMI'par english hindee marathee gujratee bangla adime na jane kitna likha ja raha hai woh bhee rashid se alag naheen hai.Aap kahen to main darzanon udaharan de sakta hoon aur ve sab tippaneekar/patrakar bahut senior hain tatha unpar abhee tak koyee rang potne kee himmat bhee naheen kar saka hai.Patrakarita kee sachchayee aur tatasthata sirf umra aur anubhav kee hee mohtaz naheen professionalism kee bhee hai.Mujhe to lagata hai ki SIMI ke mudde par jitna likha kaha ja raha hai woh nakafee hai.Yeh BHARAT ke rashtra rajya par ghoshit yuddha hai.Tathya batate hain ki is yuddha ke ghav bharat kha raha hai aur betarah lahooluhan hai.Patrakarita aur khojee patrakarita se yeh bhee apekshit hai ki yadi ye log masoom hain to fir gunahgaar kahan hain.aur yeh na samajhiye ki Tehelka se is tarah ke seedhe sawal naheen pooche ja rahe.Tejpal aur tehelka kee vishwasniyata aur professionalism bhee daon par hai.Bura na mane aur anyatha na len par visfot kee vibhinna "pratikriyaon'me kafee khemebandee najar aatee hai par vivechan bhee hai.kam se kam mujhe to abhee tak 'rang'naheen dikh raha aur hai to jaroor dikhayen par tathyon ke saath,aur 'Lal' 'bhagwa'hare'neele'peele kee bajay. aur yeh apeksha hamse aapse sabhee se kee jaanee chahiye.Ek cheez aur batata chaloon.Main yeh naheen manta ki patrakar bikaoo naheen hote ya prayojit naheen hote ya prachar/prasar kee ichcha naheen rakhate ya patrakarita sabhee ke liye misson hee hotee hai ya har reporting professionaly sahee hee hotee hai.aur kabhee kabhee ye jankar naheen keeye jatee ho jate hain.Bahut udaharan mil jayenge ki apnee tatasthata aur vishwasniyata sthapit karane ke baad bheetar hee bheetar chupke se dukan chalana asan hota hai.isee liye yuva lekhan jyada imandar ho sakta hai.main swayam umradaraj hoon par yuva lekhan par jyada bharosa karta hoon.baharhal main bhee mudde se bahar ja raha hoon.SIMI par aapke sahit sabhee se adhik se adhik jankaree chahoonga aur uske diye huye ghaon me mujhe sirf ek hee rang najar aata hai.LAL KHOON KA.BHARAT KE KHOON KA.HINDOO MUSALMAN SABHEE KA KHOON ISME SHAMIL HAI.JAI HIND.
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संजय बेंगाणी on 25 August, 2008 11:36;21
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साजिदभाई, मुसलमानो का नैतृत्व रगतिशील लोगो के हाथो में आयेगा तभी कौम का और देश का भला होगा. फिलहाल बेवकुफ धर्मनिरपेक्षतावादी मुसलमानो को पतन के रास्ते पर दाले हुए है और उन्हे कट्टरपंथियों का पिछल्लगु बना दिया है.
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umashankar mishra on 25 August, 2008 19:18;24
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सुरेश भाई अगली सरकार नहीं, बल्कि इस बात से भी नहीं इंकार किया जा सकता कि ये प्रोजेक्ट वर्तमान
प्रगतिशील धर्मनिरपेक्ष सरकार का ही हो....रशीद जी को सत्य के निर्वासन और सारगर्भित लेख के लिए बधाई.......
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amit on 26 August, 2008 20:07;32
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sajid bhai pahele mukhtar bhai bhi kafi pragatisheel hua karte the vahi naqvi aaj kal bjp ke bhopu hai aap ka bhi bhavishya ujjval hai.jaha tak ajit shahi ka saval hai unke lekh per comment dekh le pata chal jayega kitna sarha ja raha hai.
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y on 27 August, 2008 01:42;22
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rajesh bhai.vaishyavruti me achchha nakad munafa hai to bhi kitnee aurten randi hona pasand karti hai? sabhi prachar chahne wale beiman nahi hote.tehlka se asahmati rakhne wala hr saksh snghee ho yeh jaruri nahi . aap apni mitrta nahi nibah rahe hai? is ka bhi kya sabut hai? kya aap bata payenge ki hr aatankwadi musalman hi kyun hota hai?
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Brijesh on 29 August, 2008 17:32;23
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Bahut hi sahi likha hai aapne abhi Naguari ke bayan se khulasa ho gaya ki SIMI kitna bada atankvadi sangathan hai Ab tarun Tejpal kya karenge unke sach ka kya hoga jiska woh dindhora peetate hain
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amit on 30 August, 2008 06:47;01
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guru,valiulla jo varansi dhamako ka mukhya
abhiukt tha usper khali hathiyar rakhne ka mamla sabit hua.adalat ne yeh bhi kaha ki ye rastrdrohi bhi nahi hai.dosari taraf kanpur me bajrang dal vale jo bamo ka jakhira taiyar ker rahe the sayad pooja
path ke liye ve mare gaye.sajid ji ke dhyanarth.jai bajrang dal
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