Home | धर्म-अधर्म | कंधमाल पर चर्च नेतृत्व का नाटक

कंधमाल पर चर्च नेतृत्व का नाटक

image लक्ष्मणानंद की पिछले साल हत्या कर दी गयी थी

भारतीय चर्च नेताओं ने कल 24 अगस्त को `नेशनल कंधमाल डे´ मानया। चर्च नेतृत्व तो 23 अगस्त `स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती´ की हत्या के दिन को ग्लोबल शांति के दिन के रुप में मनाना चाहता था। इसके लिए चर्च नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र संघ तक गुहार लगाई। पर अफसोस! हिन्दू नेताओं ने चर्च की रणनीति को पलीता लगा दिया । चर्च नेता अब `नेशनल कंधमाल डे´ मनाकर ही संतोष कर रहे है।

`स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती´ की हत्या के दिन को ‘ाांति दिवस के रुप में मनाने के चर्च के प्रस्ताव को हिन्दू समुदाय ने ठुकरा दिया है। पहली नजर में ऐसा लगता है कि क्या हिन्दू शांति नही चाहते? कटक एवं भवनेश्वर के आर्च बिशप रिफल चैनथ ने संयुक्त राष्ट्र संघ से आग्रह किया था कि वह 23 अगस्त को शांति दिवस के रुप में घोिशत करे। उल्लेखनीय है कि विगत वर्ष इसी दिन उड़ीसा के कंधमाल जिले में कुछ कट्टरपंथी तत्वों द्वारा 84 वर्षीय संत स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती एवं उनके चार अनुयायियों की हत्या कर दी थी। स्वामी जी की हत्या के बाद भड़के सप्रदायिक दंगों में पचास से ज्यादा लोगों की जाने गई एवं संपत्ति का भारी नुकसान उठाना पड़ा। स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की हत्या के छीटें चर्च नेतृत्व के दामन पर भी पड़े क्योंकि स्वामी चर्च की धर्मांतरण की गतिविधियों का विरोध कर रहे थे। उड़ीसा में हुए दंगों को चर्च नेतृत्व अपने पक्ष में राश्ट्रीय एवं अंतरराश्ट्रीय स्तर पर भुनाने में कामयाब रहा है। और कुछ चर्च नेता अपने स्वार्थो के चलते कंधमाल के नाटक को लम्बे समय तक खेलने के पक्ष में है। जिसके लिए उन्होंने संयुक्त राश्ट्र संघ तक गुहार भी लगाई। 

23 अगस्त को शांति दिवस घोषित करवाने के पीछे क्या चर्च का कोई बड़ा मकसद तो नही है? क्या हिन्दू नेता चर्च नेतृत्व की शातिर चालों को समझने लगे है? वर्ल्ड् कौंसिल ऑफ आर्य समाज के अध्यक्ष स्वामी अग्निवेश चर्च के इस आइडिया के ही विरुद्ध है। उनका कहना है कि संयुक्त राष्ट्र संघ पहले ही 21 सितंबर को शांति दिवस के रूप में घोषित कर चुका है। कहीं चर्च नेतृत्व शांति के बहाने यूरोपीय देशों में यह संदेश तो नही पुहंचाना चाहता कि भारत में उनका उत्पीड़न हो रहा है? और उन्हें यहां अपना कार्य जारी रखने के लिए उनसे धन-बल की जरुरत रहेगी। अमेरिका के धार्मिक स्वतंत्रता आयोग ने हाल ही में भारत के अल्पसंख्यकों पर जारी की गई अपनी रिपोर्ट में कुछ ऐसे ही संकेत दिये हैं। उसने भारत को अपनी निगरानी सूची में रखकर यह जता दिया है कि कंधमाल का नाटक लम्बा चलेगा। 

कंधमाल के नाम पर शांति दिवस मानने से किसी का भला नही होगा जब तक चर्च नेतृत्व अपनी धर्मातरण वाली गतिविधियों को लगाम नही लगाता। जब तक ऐसा नहीं होगा तब तक ऐसे सैकड़ों शांति दिवस शांति कायम नही कर सकते। चर्च नेतृत्व को यह जान लेना चाहिए कि धर्मांतरण और शांति इकट्ठे नही चल सकते। उड़ीसा के कंधमाल में उनके कार्यों को कौन उचित ठहरा सकता है? आबादी के हिसाब से 1951 में ईसाइयों की आबादी 20 हजार थी जो कि 2001 में 60 फीसदी आबदी ईसाई हो गयी। शांति कायम करने के लिए चर्च को अपने साम्राज्यवाद के एजेण्डे को छोड़ना होगा। क्या उसके लिए चर्च नेतृत्व तैयार है?भारतीय चर्च नेता अमेरिकी आयोग द्वारा भारत को निगरानी सूची में रखने का समर्थन कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर उड़ीसा सरकार गठित न्यायाधीश एस सी महापात्रा आयोग की अंतरिम रिपोर्ट को नकार रहे हैं क्योंकि आयोग ने कंधमाल में अशांति और हिंसा की जड़ में धर्मांतरण एवं पुन: धर्मांतरण को जिम्मेवार माना है। साथ ही आदिवासी समाज में आरक्षण एवं जमीन पर होने वाले कब्जो की तरफ घ्यान देने को कहा है। आयोग की रिपोर्ट आते ही चर्च नेतृत्व ने उसे खारिज कर दिया है। वे अपने विरुद्ध आने वाली किसी भी रिपोर्ट को आज तक स्वीकार नही किये है, चाहे वह चार दशक पूर्व गठित किये गये नियोगी आयोग की रिपोर्ट हो या फिर दस वर्ष पूर्व आस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेंस की हत्या के बाद बने जस्टिस बाधवा आयोग की रिपोर्ट हो।

बी.बी.सी. समाचार सेवा को दिये अपने साक्षात्कार में इतिहासकार बिश्रमोयपति ने कहा है कि यह लड़ाई यहां के कंध लोगो की है जो कि आदिवासी है और पाणा लोगो की जो अनुसूचित जाति के है। दोनो पीड़ित है और आरक्षण के फायदे के लिए लड़ रहे है। पाण भारी संख्या में `ईसाई´ हो गये है अत: वह आरक्षण के दायरे से बाहर है। लेकिन अब वह मांग कर रहे है कि वह कंध आदिवासी की तरह `कुई´ भाषा बोलते है और उन्हें कंध आदिवासी की तरह आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए।´ चर्च नेता उनकी इस मांग को हवा देते आए है और कंधमाल में यही फसाद की जड़ है। लड़ाई धर्मप्रचार को लेकर भी है। धर्मातंरण पर प्रतिस्पर्धा का नतीजा भी साप्रदाययिक हिंसा है। इसी का जिक्र जस्टिस माहापात्रा ने अपनी रिपोर्ट में किया है।

आज ईसाइयत का प्रचार प्रसार एक व्यापार बन गया है भारतीय चर्च अपने विदेशी अाकाओं एवं दानदाताओं की मदद से भारत को ईसाइयत के झंडे के नीचे लाने के लिए हर हथकंडा अपना रहा है। गरीब हिन्दुओं, दलित एवं आदिवासी वर्गों का धर्मांतरण कर चर्च के पादरी अपना उल्लू सीधा कर रहे है। इस कार्य को इतने सधे हुए तरीके से किया जा रहा है कि राष्ट्रीय स्तर पर कुछ पता नही चलता। लेकिन आसपास के लोग इसके बारे में बखूखी जानते एवं समझते हैं। यही कारण है कि जैसे जैसे ईसाइयत का प्रचार जोर पकड़ रहा है उसी तेजी से ईसाई पादरियों एवं गिराजाघरों के विरुद्ध स्वर भी उठने लगे है। इसकी परणिति कहीं कहीं हिंसा के रूप में भी होती है।

Subscribe to comments feed Comments (3 posted):

Jeet Bhargava on 27 August, 2009 02:22;01
avatar
100% True & Excellent Analysis. Keep it up. Kudos to Fransis Sir.
Thumbs Up Thumbs Down
0
jay prakash singh on 28 August, 2009 21:33;34
avatar
bahut hi jamini vishleshan hai , dhanyawad,church ke tarike muslim atankiyo se jyada kahtarnak hai
Thumbs Up Thumbs Down
0
Prateek Abhay on 06 September, 2009 11:03;20
avatar
Vaastvikta ko sabke saamne la kr aap ne bahut he prasasneye kaam kiya hai or saath he saath un loga k gaal pr tamacha mara hai jo vaastvikta ko jaan kr bhe nahi maante.
Thumbs Up Thumbs Down
0
total: 3 | displaying: 1 - 3

Post your comment comment

Type in Hindi (हिन्दी में कमेन्ट करने के लिए यहां रोमन में लिखिए यह अपने आप हिन्दी में बदल देगा.)

Title :
Body
Powered by Vivvo CMS v4.1.2
Share |
  • email Email to a friend
  • print Print version

ईमेल से विस्फोटः अपना ईमेल यहां भरें और सब्सक्राइब करें:

Delivered by FeedBurner

Author info
image आरएल फ्रांसिस पुअर क्रिश्चियन लिबरेशन मुवमेन्ट के अध्यक्ष आर एल फ्रांसिस ईसाई मिशनरियों के बीच व्याप्त भेदभाव और कटुता के खिलाफ लगातार अपनी आवाज बुलंद किये हुए हैं. आप उन्हें pclmfrancis@gmail.com पर संपर्क कर सकते हैं.
Rate this article
4.00
More from धर्म-अधर्म
Previous
image
ईसाईयत बनाम इस्लाम की मजहबी जंग
९/११ की नौंवीं वर्षगाँठ के निमित्त आतंकवाद के नाम पर पूरी दुनिया में तरह-तरह की चर्चा छिड़ी. फ्लोरिडा के कोई एक पादरी टेरी जोन्स ने आतंकवाद का स्रोत इस्लामपंथियों की परमपवित्र पुस्तक कुरआन शरीफ को करार देकर उसे जलाने की घोषणा कर सुर्ख़ियों में रहे. उनकी इस घोषणा से पूरी दुनिया चिंतित हुई. अमेरिकी विदेश मंत्री हिलारी क्लिंटन से लेकर भारतीय गृहमंत्री पी.चिदंबरम तक हर किसी को इस चिंता ने सताया कि फ्लोरिडा के पादरी की इस हरकत से पूरी इस्लामी दुनिया में उत्पात मच जाएगा....
image
कुरान जले पर भारत को पता न चले
इस्लाम को मानवता विरोधी बताते हुए अमेरिकी चर्च के एक हिस्से ने 9/11 को अमेरिका पर हुए अलकायदा के हमले की वर्षगांठ पर पवित्र कुरान को जलाने की घोषणा करके दुनिया भर के मुस्लिम समाज में बैचानी पैदा कर दी है। लेकिन इस घटनाक्रम को भी वेटिकन अपने फायदे के लिए इस्तेमाल कर रहा है. चर्च संगठनों की कोशिश है कि इन घटनाओं को भारत में ज्यादा प्रचार न मिले ताकि भारत में मुस्लिम-ईसाई एकता पर फर्क न पड़े. अगर ऐसा होता है तो ईसाई संगठनों के बड़े दुश्मन "हिन्दुओं" को इसका फायदा मिल सकता है और हिन्दू-मुसलमानों के बीच दूरियां कम हो सकती है जिसका सीधा नुकसान मिशनरियों को होगा. ...
image
कृष्णं वन्दे जगतगुरुम्
भारत भूमि में जन्मा कौन ऐसा व्यक्ति होगा जिसने श्रीकृष्ण का नाम न सुना हो? श्रीकृष्ण को वन्दे जगदगुरु भी कहा जाता है। श्रीरामचन्द्र के समान श्रीकृश्ण भी करोड़ों भारतवासियों की श्रद्वा और भक्ति के पात्र रहे है। वास्तव में श्रीकृष्ण की सम्पूर्ण जीवन लीला, उनका दुष्टों से लड़ना और सज्जनों की रक्षा करना, उनकी राजनीतिक क्षमता और सबसे अधिक उनका गीता के द्वारा दिया हुआ कर्मयोग का संदेश भारतीय संस्कृति की अमूल्य निधि है।...
image
स्टेनगनाय नमः, टेलीविजनाय स्वाहा! (हवन)
भारत में यज्ञ का महत्व क्या है और हम यज्ञ क्यों करते हैं इसकी विधिवत जानकारी हमें भले ही न हो लेकि यज्ञ को लेकर भारत में भ्रांतियां बहुत हैं. स्वामी श्री अड़गड़ानंद वर्तमान यज्ञ व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं. उनके सवाल तार्किक और सटीक हैं जिसके बारे में हिन्दू समाज को निश्चित रूप से गंभीरता से विचार करना होगा. यज्ञ पर स्वामी जी के लेखन को दो किश्तों में हम यहां प्रस्तुत कर रहे हैं....
image
हिन्दुत्व क्या है?
दस अगस्त को विस्फोट पर स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी द्वारा रचित पुस्तक ‘शंका समाधान’ से ‘गाय धर्म नहीं जानवर है’ प्रकाशित हुई थी, जिस पर विस्फोट के सुधी पाठकों ने अपना-अपना उन्मुक्त विचार व्यक्त किया है। इस लेख पर कुछ पाठकों ने स्वामी श्री अड़गड़ानन्द जी महाराज जी को तमाम तरह से लांक्षित कर उन्हें हिन्दू एवं हिन्दुत्व विरोधी करार देते हुए हिन्दुत्व पर अपने-अपने विचार व्यक्त किये हैं। स्वामी अड़गड़ानन्द जी महाराज के हिन्दुत्व की विचार धारा के प्रति तो हिन्दू एवं हिन्दुत्व के प्रति स्वामी अड़गड़ानन्द जी के विचार (अनछुये प्रश्न के माध्यम से) ‘हिन्दुत्व क्या है?’ को प्रस्तुत कर रहा हूं. प्रस्तुति- एस ए अस्थाना...
image
हिन्दुत्व क्या है-२
शोध संस्थान वालों ने तर्क दिया है कि दक्षिण भारत के लोग अपने को आर्य नहीं मानते ‘द्रविड़’ मानते हैं, हिन्दू मानते हैं। आर्य-दर्शन का प्रचार करने से उत्तर-दक्षिण भारतीयों में घृणा पनपेगी। राष्ट्रीय-गान आपको स्मरण ही होगा। पंजाब, सिन्धु, गुजरात, मराठा, द्रविड़, उत्कल, बंग। हिमाचल..............। ये भू-भाग के नाम हैं। एक श्लोक निरन्तर पढ़ने में आता है-...
image
गोरक्षा सनातन धर्म है, किन्तु पशु गाय धर्म नहीं
आये दिन ‘गो-वध बन्द हो’ का नारा लगता है। धर्माचार्यों के अनशन और लाखों रूपये के चन्दे इसी के नाम पर होते हैं। इन सबका परिणाम केवल इतना निकला है कि यदि सन् 1942 में 17,000 गायें नित्य दिन कटती थीं तो आज उनकी संख्या 50,000 तक पहुंच चुकी है। विचारणीय है कि क्या गाय हमारा धर्म है ?क्या इसके समर्थन में हमारे पूर्वजों ने वेद, गीता और रामचरितमानस-जैसे आर्षग्रन्थों में कुछ कहा है ? यदि नहीं कहा तो यह एक धोखा है। इससे हम सबको सतर्क हो जाना चाहिए। ...
image
अमेरिका का आध्यात्म, भारत का हिन्दुत्व
हालीवुड अभिनेत्री जूलिया राबर्ट्स हिन्दू हो गयी. देशभर की मीडिया इस खबर से अटी पड़ी है है कि उन्हें हिन्दू धर्म ने इतना प्रभावित किया कि उन्होंने पिछले साल स्वामी धर्मदेव से हुई मुलाकात ने उन्हें इतना प्रभावित किया कि उन्होंने हिन्दू धर्म स्वीकार कर लिया. इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम को मीडिया भले ही आश्चर्य की नजर से देख रहा हो लेकिन खुद स्वामी धर्मदेव को कोई आश्चर्य नहीं है. जूलिया के धर्मपरिवर्तन के बाद उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि वे जबरन धर्म परिवर्तन के पक्ष में नहीं हैं लेकिन अगर जूलिया ने अपनी आत्मा से हिन्दू धर्म को स्वीकार किया है तो उनका स्वागत किया जाना चाहिए. ...
image
दाता दरबार पर आतंक का कहर
पाकिस्तान में कट्टरपंथी जमातें उदारवादी धड़ों को लगातार निशाना बना रही हैं. अभी हाल में ही अहमदी समुदाय की मस्जिद पर हमले के बाद अब लाहौर के सूफी संत की मजार दाता दरबार पर आतंकियों ने हमला किया है जिसमें 42 से अधिक लोग मारे गये हैं और पौने दो सौ से अधिक लोग घायल हो गये हैं. पाकिस्तान में सूफी परंपरा और दाता गंज बख्श साहिब के बारे में विस्तार से बता रहे हैं प्रकाश रे....
image
अल्लाह के नाम पर
क्या यह तथ्य हैरान परेशान और पशेमाान करने वाला नहीं है कि 121 वर्ष से स्थापित एक इस्लामिक मूवमेंट जमायत अहमदिया को पाकिस्तान में खुद को मुस्लिम कहने से रोकने के लिये बाकायदा एक कड़ा कानून काम कर रहा है। पाकिस्तान में अहमदिया लोग मुस्लिम जगत में मिलने पर प्रयोग होने वाले इस्लामावालेकुम - वालेकुम इस्लाम अभिवादन करते हुए पकड़े जायें तो तीन साल तक कैद व जुर्माना लगने का कानून है।...
image
घाना में हिन्दुत्व और घनानंद
हॉल में धूप-अगरबत्ती की ख़ुशबू फैली हुई है और मूर्तियों के आगे दिए टिमटिमा रहे हैं. अगर सिर्फ़ आवाज़ें सुनी जाएँ तो लगेगा कि आप उत्तर भारत के किसी मंदिर की पूजा में शामिल हैं. लेकिन आँख खोलकर वहाँ मौजूद भक्तगणों पर नज़र डालें तो चौंके बिना नहीं रह सकते. ये घाना की राजधानी अकरा के छोर पर ओडोरकोर बस्ती में बना एक हिंदू मंदिर है लेकिन यहाँ पूजा करने आए लोगों में से एक भी भारतीय नहीं है....
image
अहमदिया संप्रदाय: सबके लिए शांति के उपासक
गुरुदासपुर के कादियान नामक कस्बे में 23 मार्च 1889 को इस्लाम के बीच एक आंदोलन शुरू हुआ जो आगे चलकर अहमदिया आंदोलन के नाम से जाना गया. यह आंदोलन बहुत ही अनोखा था. इस्लाम धर्म के बीच पहली बार एक व्यक्ति ने घोषणा की कि "मसीहा" फिर आयेंगे. मसीहा माने ईसा मसीह. इस्लाम धर्म के बीच इस अनोखे संप्रदाय को शुरू करनेवाले मिर्जा गुलाम अहमद ने अहमदिया आंदोलन शुरू करने के दो साल बाद 1891 में अपने आप को "मसीहा" घोषित कर दिया. बात सिर्फ यहीं तक नहीं रुकी. मिर्जा गुलाम अहमद ने खुद को विष्णु का आखिरी अवतार भी घोषित कर दिया. ...
image
मंदिरों की कमाई पर कब्जे की फिराक में सरकार
महाराष्ट्र सरकार की नजर अब मंदिरों पर है। दो मंदिरों का संचालन करके मलाई काट रही सरकार अब प्रदेश के दो लाख मंदिरों पर नजरें गड़ाए हुए है। अशोक चव्हाण की सरकार ने प्रदेश के तकरीबन दो लाख से भी ज्यादा मंदिरों को अपने कब्जे में लेने के लिए एक व्यापक प्रस्ताव तैयार किया है। सरकार का कहना है कि पब्लिक ट्रस्ट एक्ट के तहत जिन दो लाख मंदिरों का संचालन हो रहा है, उनके संचालन में गड़बड़ी की शिकायतें है।...
image
कुंभ पर फूटा पाप का घड़ा
यह कैसा अजब संयोग है कि जिस वक्त देश में पवित्र महाकुंभ चल रहा था उसी वक्त एक एक करके संतों के पाप का घड़ा भी फूट रहा था. तीन महीने तक हरिद्वार में चले पवित्र महाकुंभ के मौके पर "अपवित्र संन्यासियों" के पाप का घड़ा भी फूटता रहा. साधु संतों के पाप के इन फूटते घड़ों ने न केवल धर्म की मर्यादा को भंग किया बल्कि उस पावन महाकुंभ को भी कलंकित व शर्मसार कर दिया जिसका भक्तगण 12 वर्षों तक बेसब्री से इंतज़ार करते हें। ...
image
यौनाचार के दलदल में कैथोलिक चर्च
आयरिश बिशपों के एक प्रतिनिधिमंडल ने पोप बेनेडिक्ट (सोलहवें) से मंगलवार को वेटिकन में ‘बच्चों के यौन शोषण’ के मुद्दों पर चर्चा की। अमेरिका के बाद आयरलैंड में कैथोलिक चर्च को यह दूसरा सबसे बड़ा झटका है। अमेरिका की तरह आयरलैंड के चर्च विश्वासी ‘पोप’ के प्रतिनिधि बिशपों एवं पादरियों को न्यायालय में घसीट रहे है। पीड़ित परिवार मुआवजे के रुप में 1.37 अरब डालर की मांग कर रहे है। वही दूसरी और पादरियों द्वारा पीड़ित लोग वेटिकन से उन गुप्त फाइलों को सर्वाजिनक किये जाने की मांग कर रहे है जिनमें रोमन कैथोलिक चर्च में यौन दुर्व्यवहार की अदरुनी जांच का ब्यौरा है।...
image
संत वही जो पंथ दिखाए
जगदगुरु रामानंदाचार्य श्रीरामनरेशाचार्य आज के आपाधापी भरे, भौतिकता के प्रमाद में ऊभचूभ करते समय में एक ऐसे अकम्पित ज्योति-स्तम्भ हैं, जिनसे जो भी चाहे अपने जीवन में प्रकाश पा सकता है। एक ऐसे स्नेहिल-प्रेमिल संत, जो धर्म-अध्यात्म, ज्ञान-दर्शन और तत्व चिंतन के अगाध समुद्र हैं और जिनकी शीतल वाणी हृदय के दाह को शांत करके मन के तार को इस तरह झंकृत कर देती है। ...
image
बीबी-बच्चों वाले शंकराचार्य
भारत में हिन्दू धर्म व्यवस्था में शंकराचार्य सर्वोच्च स्थान पर होता है. लेकिन इस पद की गरिमा और शक्ति ने इस शंकराचार्य पदवी को पूरी तरह से शक्ति प्रदर्शन के अखाड़ों में बदल दिया है. आदि शंकर द्वारा भले ही चार पीठ स्थापित किये गये हों लेकिन इस समय दर्जनों शंकराचार्य अपनी धर्म की दुकानदारी चला रहे हैं. विस्फोट.कॉम ऐसे शंकरायार्यों की कलई खोलनेवाली एक विशेष श्रृंखला शुरू कर रहा है जिसकी पहली कड़ी में हम माधवाश्रम के बारे में आपको बता रहे हैं जो कि खुद को ज्योतिर्मठ पीठ का शंकराचार्य घोषित करते हैं. ...
Next
Tags
No tags for this article
सर्वाधिकार (अ)सुरक्षित

विस्फोट.कॉम में प्रकाशित सामग्री पर हमारी ओर से कोई कापीराइट नहीं है.

Powered by Vivvo CMS v4.1.2