Home | धर्म-अधर्म | स्टेनगनाय नमः, टेलीविजनाय स्वाहा! (हवन)

स्टेनगनाय नमः, टेलीविजनाय स्वाहा! (हवन)

image

भारत में यज्ञ का महत्व क्या है और हम यज्ञ क्यों करते हैं इसकी विधिवत जानकारी हमें भले ही न हो लेकि यज्ञ को लेकर भारत में भ्रांतियां बहुत हैं. स्वामी श्री अड़गड़ानंद वर्तमान यज्ञ व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं. उनके सवाल तार्किक और सटीक हैं जिसके बारे में हिन्दू समाज को निश्चित रूप से गंभीरता से विचार करना होगा. यज्ञ पर स्वामी जी के लेखन को दो किश्तों में हम यहां प्रस्तुत कर रहे हैं.

कर्मकाण्ड में पूजा-भाग के हर श्लोक में परमपुरुष परमात्मा की विविध अवस्थाओं का चित्रण है। हर श्लोक के पश्चात् मांगलिक वस्तुओं को समर्पित किया जाता है। कर्मकाण्ड का दूसरा भाग है हवन, जिसमें वेदी बनाकर आम अथवा किसी सुगन्धित वृक्ष की लकड़ी में अग्नि आधान कर तिल, यव, अगरु इत्यादि का मिश्रण करते हैं। अनेक देवताओं और वस्तुओं का नाम लेते हैं कि यह वस्तु आपके लिये है मेरी नहीं, आप इसे स्वीकार करें; किन्तु यहाँ भी एक भूल न जाने कब से स्थान पा चुकी है कि श्लोक तो परम पुरुष की महिमा के पढ़े जाते हैं, जिसका अर्थ है कि उस प्रभु के अतिरिक्त सभी नाशवान् हैं; किन्तु स्वाहा के समय अनेकानेक तैंतीस कोटि देवी-देवताओं का नाम समर्पण करने लग जाते हैं, जिनका कोई अस्तित्व नहीं है- चाहे वेद ही उठाकर क्यों न देख लें।

हवन में पचीस-तीस देवी-देवताओं तक नाम तो लिये जाते हैं; किन्तु इसके पश्चात् जड़-चेतन जीवों के नामों की गिनती शुरू हो जाती है; क्योंकि सभी देवताओं का नाम कोई नहीं जानता। कहते हैं- समुद्रेभ्यो नमः, तो साथ ही क्षीर-समुद्र, दधि-समुद्र, घृत-समुद्र, इक्षु (गन्ने के रस के) समुद्र और सुरासमुद्रेभ्यो नमः। यह सब खाने-पीने की वस्तुएँ हैं। इतना ही नहीं, नदियाँ और छोटे-मोटे नाले तक को स्वाहा। फिर छः-सात प्रकार के सर्पों को गिनाया जाता है, जैसे- सहसनाग, वासुकी, कर्कोटकाय, तक्षकाय नमः स्वाहा। आगे वृश्चिकाय नमः, कृकलाय (गिरगिट को भी) स्वाहा। शरीर की इन्द्रियों के भी नाम हैं, जैसे- भगाय नमः। स्वर्ग की अप्सराओं के प्रति भी समर्पण कराया जाता है, जैसे- मेनकायै स्वाहा, उर्वश्यै नमः, तिलोत्तमायै नमः स्वाहा। इसी प्रकार मानव-निर्मित काल-गणना और ग्रह-नक्षत्रों के प्रति भी समर्पण कराया जाता है। जैसे- सोमाय नमः, भौमाय नमः, ध्रुवाय नमः, राहवे केतवे नमः। इसी क्रम में अस्त्र-शस्त्रों को नमन, जैसे- दण्डाय नमः, गदा-अंकुश-पाश-त्रिशूल-चक्राय नमः; जबकि ये आविष्कार हजारों वर्ष पुराने पड़ चुके। फिर कहते हैं- इन्द्र और उसके उच्छृंखल लड़के जयन्त के लिये स्वाहा। पीपल से लेकर पिपीलिका तक को समर्पण, भूत-भवानी तक को नमन सिखाया जाता है। सारांशतः प्रचलित हवन-पद्धति में शाश्वत एक परमात्मा के स्थान पर क्षणभंगुर कलेवरों के प्रति हमारी श्रद्धा को बाँट दिया जाता है- ऐसा क्यों?

देवता ‘क्षीणे पुण्ये मर्त्यलोकं विशन्ति।’- पुण्य क्षीण होने पर मृत्युलोक में गिर पड़ते हैं। देवताओं का राजा बननेवाला नहुष गिरा तो अजगर बना। तैंतीस करोड़ देवता तो न जाने कब के गिने गये थे, अब तक उनमें से कितने गिरे? चन्द्रयान से पृथ्वी की परिक्रमा करनेवालों ने क्या उस सहसनाग को देखा, जिसके फन पर पृथ्वी टिकी बतायी गयी है, जिसे आप स्वाहा बोलते हैं? जिन्हें आप हवि देते हैं, क्या वे हैं भी या नहीं? कुछेक कहते हैं कि जड़-चेतन सswami_ji_592230754.jpgबको नमस्कार इसलिए कराया जाता है कि  मनीषियों को इन सबमें परमात्मा दिखायी पड़ा। किन्तु यह तो प्राप्ति के समय महापुरुष की अपनी निज अनुभूति है, दूसरों के लिए उसका क्या उपयोग? अग्नि तो प्रत्येक काष्ठ में है, किन्तु बिना जलाये क्या भोजन पक जायेगा? जिसने कभी देखा नहीं, जलाने की विधि सीखी नहीं, क्रिया करता नहीं तो लकड़ी में रहते हुए भी आग उसके लिए नहीं है।

इसी प्रकार, परमात्मा कण-कण में है- ऐसा भगवत्-प्राप्ति के समय दिखायी अवश्य पड़ता है, फिर भी महापुरुष जड़-चेतन सबको समर्पण करने नहीं लग जाता, बल्कि उसका हृदयस्थ इष्ट ही बाहर भी सर्वत्र दिखाई पड़ने लगता है। वह सर्वत्र अपने इष्ट को ही प्रणाम करता है, अन्य को नहीं। अपनी विभूतियों को गिनाते-दिखाते योगेश्वर श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा कि बहुत कुछ जानने-सुनने से तेरा क्या प्रयोजन! इतने में समझ ले कि संसार में जो कुछ भी तेजयुक्त है, मेरे ही तेजांश प्रभाव से है, तो क्या अर्जुन उन सबको पूजने लगा? क्या उसने सूर्य और चन्द्रमा की पूजा की? वह श्रीकृष्ण के प्रति समर्पित रहा। केवल भक्त के लिए प्राप्तिकाल में सृष्टि खो जाती है, भगवान ही सर्वत्र दिखायी पड़ते हैं। शेष सबको कण-कण में संसार ही दीखता है, भगवान कहीं नहीं। सर्वत्र भले ही हों;  किन्तु साधनात्मक जागृति के बिना वह हमारे और आपके लिए नहीं हैं। भगवान सर्वत्र हैं- यह योग-साधना से चलकर देखने के लिए है, मानकर बैठे जाने के लिए नहीं। यह भी कहा जाता है कि जिन उपयोगी वस्तुओं का हम प्रयोग करते हैं, उनके प्रति कृतज्ञता-ज्ञापन के लिए इन मन्त्रों से समर्पण कराया जाता है। फिर तो उपयोगी आधुनिक आविष्कारों के प्रति भी समर्पण क्यों नहीं करते कि- पम्पसेटाय स्वाहा। फाउण्टेनपेनाय नमः, टेलीविजनाय स्वाहा। उर्वरकाय स्वाहा। टैक्टराय नमः। कम्प्यूटराय नमः स्वाहा। नम्बर दो की कमाई नमः स्वाहा। स्टेनगनाय नमः इत्यादि। परमाणु पिस्टल कहें। अब दण्ड-मुग्दर का क्या उपयोग?

सन्तोष के लिए कुछ लोग मान लेते हैं कि देवी-देवता भगवान के ही विभिन्न नाम हैं, किन्तु जिन नामों से आप हवन करते हैं, क्या उनसे एक परमात्मा का बोध होता है? लोग छोटे-बड़े देवताओं की कल्पना कर उनके पीछे दौड़ने लगते हैं। कुछ मानते हैं कि देवता भी भगवान के अंग या सेवक हैं, उन्हें मिलाये रखना जरूरी है। कोई काम लेना है तो भगवान को कष्ट क्यों दें, इन्हीं से काम करा लें! किन्तु वस्तुतः ऐसा है नहीं। उपनिषदों में कहा गया है कि देवताओं की उपासना करनेवाला अर्थात् भगवान के एक अंग, एक आँख या एक कान की पूजा करनेवाला यथार्थ नहीं जानता। वह एक-एक देवताओं का पशु है। देवता उसका शोषण ही करते हैं। अर्थात् इनमें उलझकर वह एक परमात्मा के चिन्तन में समय नहीं दे पता, परमश्रेय से वंचित रह जाता है।

वस्तुतः देवता और असुर हृदय के अन्तर्गत दैवी और आसुरी गुणों के नाम हैं। परमदेव परमात्मा की ओर बढ़ानेवाले शम-दम, यम-नियम, धारणा-ध्यान अथवा समाधिपर्यन्त गुण ही देवता हैं। अपने भीतर इन गुणों को विकसित करना कठिन जानकर, बाहर इन गुणों की आकृति पूजकर सन्तोष कर लेना ही भ्रान्ति का मूल है, जैसे कि बुद्धि की देवी, क्रोध का देवता, प्रेम का देवता, समृद्धि का देवता, भोजन की देवी, बीमारियों की देवी, उनके स्त्री-बच्चे, निवास, वाहन इत्यादि कल्पित कर लिए गये हैं। ये मात्र गुण हैं और जिसमें जितनी मात्रा में प्रस्फुटित होते हैं, उसी मात्रा में शक्ति प्रदान करते हैं। इन गुणों की पराकष्ठा परमदेव परमात्मा में है। अस्तु, पूजन इन गुणों की कल्पित आकृतियों की नहीं, बल्कि इन सबके एकमात्र आश्रय परमात्मा का ही पूजन तथा एक उन्हीं के प्रति समर्पण उचित है। (जारी....)

प्रस्तुति: एस ए अस्थाना

Subscribe to comments feed Comments (10 posted):

shailendra kumar on 30 August, 2010 19:10;00
avatar
ये बाते उन ब्राम्हणों को बताइए जिन्होंने आज तक कर्मकांड के नाम पर हिन्दुओ को ठगा है आम हिन्दू तो कथा के वक्त ये भी नहीं जानता की पुरोहित किसकी उपासना कर रहा है और इन मंत्रो का क्या मतलब है उसकी भावनाओं के साथ हमेशा खिलवाड़ किया गया है
Thumbs Up Thumbs Down
0
prashant mehrishi on 30 August, 2010 20:35;36
avatar
भाई संजय जी हवन तो हम भी करते हैं हमने तो ऐसे मंत्रो से कभी नहीं किया पता नहीं ये स्वामी जी कोंन से सरभंग हैं .आशा करता hoon सरभंग का अर्थ आप जानते होंगे . क्यों यज्य हवन जो वैसे ही कम हो रहा है के विषेय मैं भ्रान्ति उत्पन्न करते हो .और शैलेन्द्र जी से पूछिये की आपके ghar कभी कोई ब्रह्मिन कहने आया है क्या की जजमान हवन करवा lo ? अपने आप ही ढूँढ़ते फिरते हैं हवन के लिए और अगर यही व्यवहार रहा तो हवन व् हवन करने वालो को dhundte रह जाओगे
Thumbs Up Thumbs Down
1
अभिषेक on 30 August, 2010 22:02;47
avatar
प्रशांत जी कृप्या सरभंग का अर्थ बताये और कई बार मेरे यहाँ गुरुवार व्रत कथा और सत्यनारायण व्रत कथा हुई है और ये दोनों कथा मैंने हिंदी में भी पढ़ी है लेकिन actual कथा क्या है (जिसका फल साधक को मिलता है) ये मुझे आज तक नहीं पता |
Thumbs Up Thumbs Down
0
Ramendra Mishra on 30 August, 2010 23:43;51
avatar
ये स्वामी जी पता नहीं कहाँ की बातें कर रहे हैं ! हवन तो मेरे भी घर में हुए हैं, हिन्दू धर्म कर्मकांड रहित है ये भी सच नहीं है लेकिन जिस प्रकार ये अड़गड़ानन्द जी कह रहे है ऐसा तो कभी नहीं देखा न सुना ! और हिन्दू धर्म की धार्मिक विधियों का और परम सत्य का ज्ञान हो गया है तो जाकर साधू संतों की तरह उसका प्रचार करिए न , यहाँ इन्टरनेट पर जिसकी पहुच अत्यंत सीमित है यहाँ क्यों सर पटक रहे हैं !
स्वामी जी मेरी बातों का बुरा लग सकता है उसके लिए क्षमा लेकिन इस तरह फालतू का confusion मत पैदा करिए !
शैलेन्द्र कुमार जी आपने बिलकुल कुतर्की बात कही है ! जिसका जवाब प्रशांत जी ने आपको दे दिया है !

Hari om !!!!!!!!
Thumbs Up Thumbs Down
1
वीरेन्द्र जैन on 31 August, 2010 12:25;25
avatar
जो लोग सच जानने का दावा ही नहीं कर रहे वे धर्मान्ध भी अड़गड़ानन्द के कथन को हजम नहीं कर रहे हैं, अगर वे गलत कह रहे हैं तो सही बता कर उनकी बात का खंडन करो। वैसे मेरा सुझाव है कि इन सब लोगों को हरिमोहन झा लिखित 'खट्टर काका" पुस्तक जरूर पढनी चाहिए।
Thumbs Up Thumbs Down
-1
Jitendra Singh on 31 August, 2010 12:39;05
avatar
अस्थाना जी आपके अनुसार आज जिन देवताओं के लिए हवं कर रहे हैं क्या वो देवता हैं या नहीं ? लेकिन आपको एक बात समझना होगा की हवं करने से जब शुद्ध आम, पीपल, तुलसी या कोई एनी लकड़ी से हवं किया जाता हैं और उसमें शुद्ध देशी घी की आहूति दी जाती है तो उससे वातावरण को शुद्ध किया जाता है. यानी जो भी नकारात्मक ऊर्जा हो वो ख़त्म हो जाए और धनात्मक ऊर्जा का प्रवाह हो. इसका वास्तविक अर्थ ये होता हैं/ और उसमें अगर किसी देवी देवता का नाम लिया जा रहा हैं तो इसका मतलब ये नहीं हैं की हम उनके लिए कर रहे हैं. फिर से आप गहन चिंतन होकर वेद शाश्त्र का अध्धययन करें. ये साड़ी बातें विज्ञान से प्रमाणित हैं. शास्त्रों में भी लिखा गयी बातों को समझने की शक्त चाहिए. पहले वो आप विकसित करें. और हवं के लिए नंबर वन लकड़ी पीपल की मानी गयी है. लेकिन पीपल की लकड़ी हर जगह नहीं मिल पाती है . आम की लकड़ी नंबर ४ पर हैं. इस पर भी आप रिसर्च कीजिये फिर लिखें तो ज्यादा अच्छा रहेगा
Thumbs Up Thumbs Down
1
prashant mehrishi on 31 August, 2010 21:45;45
avatar
हवन की विधि के लिए लाखो पुस्तके मिलती हैं कोई भी ली जा सकती है . हवन कर के वातावरण शुध्ध किया जा सकता है लेकिन गन्दी मानसिकता का इलाज हवन नहीं होता वो तो दाह संस्कार के साथ ही ठीक होती है .
primary के बच्चो के लिए किताब अलग व् graduation के लिए अलग होती है . हमारे यहाँ भी aap जैसे लोगो के लिए वेद वेदांत हैं न की भगवन सत्यनारायण की कथा ये आपको समझ नहीं आ सकती . हवन के विशे मैं aacharya श्रीराम शर्मा जी गायत्री पीठ हरिद्वार वालो की पुस्तके आप की समझ मैं आ जाएँगी क्योकि वो आप जैसे कथित बुध्हिजीवियो ko लक्ष्य कर लिखी गयी हैं .
Thumbs Up Thumbs Down
0
vivek on 01 September, 2010 09:46;29
avatar
हिन्दुओ के लाखो करोडो वर्षो के इतिहास में शायद स्वामी अड़गड़ानन्द ही अपने आप को तर्कशील और समझदार मान रहे है. हमारे सारे पुरखे संत ऋषि मह्रिषी सब अड़गड़ानन्द के अनुसार मुर्ख थे जो वे हवन और अग्निहोत्र करने को कहते थे वाह रे स्वामी अड़गड़ानन्द और उसके वीरेंदर जैन जैसे समर्थको हिन्दू धरम की सहिशुद्ता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का खूब दुरपयोग कर लो धरम के दुश्मनों यदि तुम ऐसा ही करते रहोगे तो जरूर एक दिन हिन्दू धरम में भी कट्टरता आ ही जाएगी क्योकि क्रिया की प्रतिक्रिया भी होगी ही
Thumbs Up Thumbs Down
0
sadhak ummedsingh baid on 05 September, 2010 20:04;42
avatar
जाने क्या कहना चाहते हैं बाबा अरगारानंद.
बे-सिर-पैर की हांक रहे हैं, फेंक रहे हैं फंद.
फेंक रहे हैं फंद, नए के लोभ में आकर.
कोइ मुर्गा फंस जाए, कैसे घबरा कर.
कह साधक कवि, संभालना ये करदें जाने क्या.
बाबा अदगदानंद चाहते हैं कहना क्या?
Thumbs Up Thumbs Down
0
Rajender Prasad on 15 September, 2010 18:48;25
avatar
aagay bhee lekho ji
Thumbs Up Thumbs Down
0
total: 10 | displaying: 1 - 10

Post your comment comment

Type in Hindi (हिन्दी में कमेन्ट करने के लिए यहां रोमन में लिखिए यह अपने आप हिन्दी में बदल देगा.)

Title :
Body
Powered by Vivvo CMS v4.1.2
Share |
  • email Email to a friend
  • print Print version

ईमेल से विस्फोटः अपना ईमेल यहां भरें और सब्सक्राइब करें:

Delivered by FeedBurner

Author info
visfot news network विस्फोट.कॉम इंटरनेट पर नये दौर की पत्रकारिता में परंपरागत मूल्यों को स्थापित करने की दिशा में लगातार काम कर रहा है, जो कि पूरी तरह से जनकेन्द्रित, वास्तविक और निहित स्वार्थी तत्वों के प्रभाव से मुक्त है. हमारा संपर्क है visfot@visfot.com
Rate this article
5.00
More from धर्म-अधर्म
Previous
image
ईसाईयत बनाम इस्लाम की मजहबी जंग
९/११ की नौंवीं वर्षगाँठ के निमित्त आतंकवाद के नाम पर पूरी दुनिया में तरह-तरह की चर्चा छिड़ी. फ्लोरिडा के कोई एक पादरी टेरी जोन्स ने आतंकवाद का स्रोत इस्लामपंथियों की परमपवित्र पुस्तक कुरआन शरीफ को करार देकर उसे जलाने की घोषणा कर सुर्ख़ियों में रहे. उनकी इस घोषणा से पूरी दुनिया चिंतित हुई. अमेरिकी विदेश मंत्री हिलारी क्लिंटन से लेकर भारतीय गृहमंत्री पी.चिदंबरम तक हर किसी को इस चिंता ने सताया कि फ्लोरिडा के पादरी की इस हरकत से पूरी इस्लामी दुनिया में उत्पात मच जाएगा....
image
कुरान जले पर भारत को पता न चले
इस्लाम को मानवता विरोधी बताते हुए अमेरिकी चर्च के एक हिस्से ने 9/11 को अमेरिका पर हुए अलकायदा के हमले की वर्षगांठ पर पवित्र कुरान को जलाने की घोषणा करके दुनिया भर के मुस्लिम समाज में बैचानी पैदा कर दी है। लेकिन इस घटनाक्रम को भी वेटिकन अपने फायदे के लिए इस्तेमाल कर रहा है. चर्च संगठनों की कोशिश है कि इन घटनाओं को भारत में ज्यादा प्रचार न मिले ताकि भारत में मुस्लिम-ईसाई एकता पर फर्क न पड़े. अगर ऐसा होता है तो ईसाई संगठनों के बड़े दुश्मन "हिन्दुओं" को इसका फायदा मिल सकता है और हिन्दू-मुसलमानों के बीच दूरियां कम हो सकती है जिसका सीधा नुकसान मिशनरियों को होगा. ...
image
कृष्णं वन्दे जगतगुरुम्
भारत भूमि में जन्मा कौन ऐसा व्यक्ति होगा जिसने श्रीकृष्ण का नाम न सुना हो? श्रीकृष्ण को वन्दे जगदगुरु भी कहा जाता है। श्रीरामचन्द्र के समान श्रीकृश्ण भी करोड़ों भारतवासियों की श्रद्वा और भक्ति के पात्र रहे है। वास्तव में श्रीकृष्ण की सम्पूर्ण जीवन लीला, उनका दुष्टों से लड़ना और सज्जनों की रक्षा करना, उनकी राजनीतिक क्षमता और सबसे अधिक उनका गीता के द्वारा दिया हुआ कर्मयोग का संदेश भारतीय संस्कृति की अमूल्य निधि है।...
image
स्टेनगनाय नमः, टेलीविजनाय स्वाहा! (हवन)
भारत में यज्ञ का महत्व क्या है और हम यज्ञ क्यों करते हैं इसकी विधिवत जानकारी हमें भले ही न हो लेकि यज्ञ को लेकर भारत में भ्रांतियां बहुत हैं. स्वामी श्री अड़गड़ानंद वर्तमान यज्ञ व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं. उनके सवाल तार्किक और सटीक हैं जिसके बारे में हिन्दू समाज को निश्चित रूप से गंभीरता से विचार करना होगा. यज्ञ पर स्वामी जी के लेखन को दो किश्तों में हम यहां प्रस्तुत कर रहे हैं....
image
हिन्दुत्व क्या है?
दस अगस्त को विस्फोट पर स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी द्वारा रचित पुस्तक ‘शंका समाधान’ से ‘गाय धर्म नहीं जानवर है’ प्रकाशित हुई थी, जिस पर विस्फोट के सुधी पाठकों ने अपना-अपना उन्मुक्त विचार व्यक्त किया है। इस लेख पर कुछ पाठकों ने स्वामी श्री अड़गड़ानन्द जी महाराज जी को तमाम तरह से लांक्षित कर उन्हें हिन्दू एवं हिन्दुत्व विरोधी करार देते हुए हिन्दुत्व पर अपने-अपने विचार व्यक्त किये हैं। स्वामी अड़गड़ानन्द जी महाराज के हिन्दुत्व की विचार धारा के प्रति तो हिन्दू एवं हिन्दुत्व के प्रति स्वामी अड़गड़ानन्द जी के विचार (अनछुये प्रश्न के माध्यम से) ‘हिन्दुत्व क्या है?’ को प्रस्तुत कर रहा हूं. प्रस्तुति- एस ए अस्थाना...
image
हिन्दुत्व क्या है-२
शोध संस्थान वालों ने तर्क दिया है कि दक्षिण भारत के लोग अपने को आर्य नहीं मानते ‘द्रविड़’ मानते हैं, हिन्दू मानते हैं। आर्य-दर्शन का प्रचार करने से उत्तर-दक्षिण भारतीयों में घृणा पनपेगी। राष्ट्रीय-गान आपको स्मरण ही होगा। पंजाब, सिन्धु, गुजरात, मराठा, द्रविड़, उत्कल, बंग। हिमाचल..............। ये भू-भाग के नाम हैं। एक श्लोक निरन्तर पढ़ने में आता है-...
image
गोरक्षा सनातन धर्म है, किन्तु पशु गाय धर्म नहीं
आये दिन ‘गो-वध बन्द हो’ का नारा लगता है। धर्माचार्यों के अनशन और लाखों रूपये के चन्दे इसी के नाम पर होते हैं। इन सबका परिणाम केवल इतना निकला है कि यदि सन् 1942 में 17,000 गायें नित्य दिन कटती थीं तो आज उनकी संख्या 50,000 तक पहुंच चुकी है। विचारणीय है कि क्या गाय हमारा धर्म है ?क्या इसके समर्थन में हमारे पूर्वजों ने वेद, गीता और रामचरितमानस-जैसे आर्षग्रन्थों में कुछ कहा है ? यदि नहीं कहा तो यह एक धोखा है। इससे हम सबको सतर्क हो जाना चाहिए। ...
image
अमेरिका का आध्यात्म, भारत का हिन्दुत्व
हालीवुड अभिनेत्री जूलिया राबर्ट्स हिन्दू हो गयी. देशभर की मीडिया इस खबर से अटी पड़ी है है कि उन्हें हिन्दू धर्म ने इतना प्रभावित किया कि उन्होंने पिछले साल स्वामी धर्मदेव से हुई मुलाकात ने उन्हें इतना प्रभावित किया कि उन्होंने हिन्दू धर्म स्वीकार कर लिया. इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम को मीडिया भले ही आश्चर्य की नजर से देख रहा हो लेकिन खुद स्वामी धर्मदेव को कोई आश्चर्य नहीं है. जूलिया के धर्मपरिवर्तन के बाद उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि वे जबरन धर्म परिवर्तन के पक्ष में नहीं हैं लेकिन अगर जूलिया ने अपनी आत्मा से हिन्दू धर्म को स्वीकार किया है तो उनका स्वागत किया जाना चाहिए. ...
image
दाता दरबार पर आतंक का कहर
पाकिस्तान में कट्टरपंथी जमातें उदारवादी धड़ों को लगातार निशाना बना रही हैं. अभी हाल में ही अहमदी समुदाय की मस्जिद पर हमले के बाद अब लाहौर के सूफी संत की मजार दाता दरबार पर आतंकियों ने हमला किया है जिसमें 42 से अधिक लोग मारे गये हैं और पौने दो सौ से अधिक लोग घायल हो गये हैं. पाकिस्तान में सूफी परंपरा और दाता गंज बख्श साहिब के बारे में विस्तार से बता रहे हैं प्रकाश रे....
image
अल्लाह के नाम पर
क्या यह तथ्य हैरान परेशान और पशेमाान करने वाला नहीं है कि 121 वर्ष से स्थापित एक इस्लामिक मूवमेंट जमायत अहमदिया को पाकिस्तान में खुद को मुस्लिम कहने से रोकने के लिये बाकायदा एक कड़ा कानून काम कर रहा है। पाकिस्तान में अहमदिया लोग मुस्लिम जगत में मिलने पर प्रयोग होने वाले इस्लामावालेकुम - वालेकुम इस्लाम अभिवादन करते हुए पकड़े जायें तो तीन साल तक कैद व जुर्माना लगने का कानून है।...
image
घाना में हिन्दुत्व और घनानंद
हॉल में धूप-अगरबत्ती की ख़ुशबू फैली हुई है और मूर्तियों के आगे दिए टिमटिमा रहे हैं. अगर सिर्फ़ आवाज़ें सुनी जाएँ तो लगेगा कि आप उत्तर भारत के किसी मंदिर की पूजा में शामिल हैं. लेकिन आँख खोलकर वहाँ मौजूद भक्तगणों पर नज़र डालें तो चौंके बिना नहीं रह सकते. ये घाना की राजधानी अकरा के छोर पर ओडोरकोर बस्ती में बना एक हिंदू मंदिर है लेकिन यहाँ पूजा करने आए लोगों में से एक भी भारतीय नहीं है....
image
अहमदिया संप्रदाय: सबके लिए शांति के उपासक
गुरुदासपुर के कादियान नामक कस्बे में 23 मार्च 1889 को इस्लाम के बीच एक आंदोलन शुरू हुआ जो आगे चलकर अहमदिया आंदोलन के नाम से जाना गया. यह आंदोलन बहुत ही अनोखा था. इस्लाम धर्म के बीच पहली बार एक व्यक्ति ने घोषणा की कि "मसीहा" फिर आयेंगे. मसीहा माने ईसा मसीह. इस्लाम धर्म के बीच इस अनोखे संप्रदाय को शुरू करनेवाले मिर्जा गुलाम अहमद ने अहमदिया आंदोलन शुरू करने के दो साल बाद 1891 में अपने आप को "मसीहा" घोषित कर दिया. बात सिर्फ यहीं तक नहीं रुकी. मिर्जा गुलाम अहमद ने खुद को विष्णु का आखिरी अवतार भी घोषित कर दिया. ...
image
मंदिरों की कमाई पर कब्जे की फिराक में सरकार
महाराष्ट्र सरकार की नजर अब मंदिरों पर है। दो मंदिरों का संचालन करके मलाई काट रही सरकार अब प्रदेश के दो लाख मंदिरों पर नजरें गड़ाए हुए है। अशोक चव्हाण की सरकार ने प्रदेश के तकरीबन दो लाख से भी ज्यादा मंदिरों को अपने कब्जे में लेने के लिए एक व्यापक प्रस्ताव तैयार किया है। सरकार का कहना है कि पब्लिक ट्रस्ट एक्ट के तहत जिन दो लाख मंदिरों का संचालन हो रहा है, उनके संचालन में गड़बड़ी की शिकायतें है।...
image
कुंभ पर फूटा पाप का घड़ा
यह कैसा अजब संयोग है कि जिस वक्त देश में पवित्र महाकुंभ चल रहा था उसी वक्त एक एक करके संतों के पाप का घड़ा भी फूट रहा था. तीन महीने तक हरिद्वार में चले पवित्र महाकुंभ के मौके पर "अपवित्र संन्यासियों" के पाप का घड़ा भी फूटता रहा. साधु संतों के पाप के इन फूटते घड़ों ने न केवल धर्म की मर्यादा को भंग किया बल्कि उस पावन महाकुंभ को भी कलंकित व शर्मसार कर दिया जिसका भक्तगण 12 वर्षों तक बेसब्री से इंतज़ार करते हें। ...
image
यौनाचार के दलदल में कैथोलिक चर्च
आयरिश बिशपों के एक प्रतिनिधिमंडल ने पोप बेनेडिक्ट (सोलहवें) से मंगलवार को वेटिकन में ‘बच्चों के यौन शोषण’ के मुद्दों पर चर्चा की। अमेरिका के बाद आयरलैंड में कैथोलिक चर्च को यह दूसरा सबसे बड़ा झटका है। अमेरिका की तरह आयरलैंड के चर्च विश्वासी ‘पोप’ के प्रतिनिधि बिशपों एवं पादरियों को न्यायालय में घसीट रहे है। पीड़ित परिवार मुआवजे के रुप में 1.37 अरब डालर की मांग कर रहे है। वही दूसरी और पादरियों द्वारा पीड़ित लोग वेटिकन से उन गुप्त फाइलों को सर्वाजिनक किये जाने की मांग कर रहे है जिनमें रोमन कैथोलिक चर्च में यौन दुर्व्यवहार की अदरुनी जांच का ब्यौरा है।...
image
संत वही जो पंथ दिखाए
जगदगुरु रामानंदाचार्य श्रीरामनरेशाचार्य आज के आपाधापी भरे, भौतिकता के प्रमाद में ऊभचूभ करते समय में एक ऐसे अकम्पित ज्योति-स्तम्भ हैं, जिनसे जो भी चाहे अपने जीवन में प्रकाश पा सकता है। एक ऐसे स्नेहिल-प्रेमिल संत, जो धर्म-अध्यात्म, ज्ञान-दर्शन और तत्व चिंतन के अगाध समुद्र हैं और जिनकी शीतल वाणी हृदय के दाह को शांत करके मन के तार को इस तरह झंकृत कर देती है। ...
image
बीबी-बच्चों वाले शंकराचार्य
भारत में हिन्दू धर्म व्यवस्था में शंकराचार्य सर्वोच्च स्थान पर होता है. लेकिन इस पद की गरिमा और शक्ति ने इस शंकराचार्य पदवी को पूरी तरह से शक्ति प्रदर्शन के अखाड़ों में बदल दिया है. आदि शंकर द्वारा भले ही चार पीठ स्थापित किये गये हों लेकिन इस समय दर्जनों शंकराचार्य अपनी धर्म की दुकानदारी चला रहे हैं. विस्फोट.कॉम ऐसे शंकरायार्यों की कलई खोलनेवाली एक विशेष श्रृंखला शुरू कर रहा है जिसकी पहली कड़ी में हम माधवाश्रम के बारे में आपको बता रहे हैं जो कि खुद को ज्योतिर्मठ पीठ का शंकराचार्य घोषित करते हैं. ...
Next
Tags
No tags for this article
सर्वाधिकार (अ)सुरक्षित

विस्फोट.कॉम में प्रकाशित सामग्री पर हमारी ओर से कोई कापीराइट नहीं है.

Powered by Vivvo CMS v4.1.2