कुरान जले पर भारत को पता न चले
इस्लाम को मानवता विरोधी बताते हुए अमेरिकी चर्च के एक हिस्से ने 9/11 को अमेरिका पर हुए अलकायदा के हमले की वर्षगांठ पर पवित्र कुरान को जलाने की घोषणा करके दुनिया भर के मुस्लिम समाज में बैचानी पैदा कर दी है। लेकिन इस घटनाक्रम को भी वेटिकन अपने फायदे के लिए इस्तेमाल कर रहा है. चर्च संगठनों की कोशिश है कि इन घटनाओं को भारत में ज्यादा प्रचार न मिले ताकि भारत में मुस्लिम-ईसाई एकता पर फर्क न पड़े. अगर ऐसा होता है तो ईसाई संगठनों के बड़े दुश्मन "हिन्दुओं" को इसका फायदा मिल सकता है और हिन्दू-मुसलमानों के बीच दूरियां कम हो सकती है जिसका सीधा नुकसान मिशनरियों को होगा.
फ्लोरिडा के डोव वर्ल्ड आउटरीच सेंटर के पास्टर टेरी जॉस अपनी निंदा की परवाह न करते हुए पवित्र कुरान को जलाने पर अड़े हुए है। डोव वर्ल्ड आउटरीच सेंटर इस्लाम विरोधी नारे लिखी टीशर्ट और इस्लाम विरोधी सहित्य को बड़े पैमाने पर दुनिया भर में बेच रहा है, इसके लिए उसे दुनियाभर से मदद भी मिल रही है। डोव वर्ल्ड आउटरीच सेंटर के इस फैसले से अमेरिकी सरकार डरी हुई नजर आ रही है। पिछले दिनों अमेरिकी विदेशमंत्री हिलेरी क्लिंटन ने चर्च को कुरान जलाओ कार्यक्रम वापिस लेने की मांग की है। इसके पूर्व अफगानिस्तान में अमेरिकी शीर्ष कमांडर डेविड पेट्रायस ने ह्वाइट हाउस से कहा है कि कुरान जलाने से विदेशों में खासकर युद्धग्रस्त देश में अमेरिकी सुरक्षाबलों को खतरा हो सकता है। काबुल से एक बयान में डेविड पेट्रायस ने कहा कि वह कुरान जलाने के प्रस्ताव से क्षुब्ध है और इससे समूचे प्रयासों को झटका लग सकता है। हालांकि वेटिकन ने सामूहिक रूप से कुरान की प्रतियां जलाने की योजना को घोर निंदनीय एवं शर्मनाक करार देते हुए इसकी भर्त्सना की है।
11 सिंतबर को पवित्र कुरान जलाये जाने की योजना के कारण भारतीय मुस्लिम समाज में बैचनी लगातार बढ़ रही है। 4 अगस्त को मुस्लिम स्टूडेंट ऑफ इंडिया के सैकड़ों कार्यकर्ता दिल्ली में एक विरोध प्रदर्शन भी कर चुके है। मुस्लिम समाज के नेताओं ने सरकार से मांग की है कि वह फ्लोरिडा चर्च के फैसले के विरुद्ध अमेरिकी राष्ट्रपति से बात करें। विश्वभर में फैले मुस्लिम समाज का एक बड़ा हिस्सा भारत में है और इस्लाम के प्रति होने वाले किसी भी घटनाक्रम से यह वर्ग अपने को अलग नही रख सकता। भारत में 20 प्रतिशत से ज्यादा मुस्लिम आबादी है। अगर अमेरिकी प्रशासन ईसाइयत के नाम पर नफरत का कारोबार चलाने वालों पर नकेल नही कसता तो उसका असर भारत में भी दिखाई देगा। अपने देश में अमन-शांति कायम रहे इसके लिए सरकार को प्रयास करने होगे।
कुछ समय पहले केरल में कुछ इस्लामी जेहादियों ने एक कैथोलिक प्रोफेसर का दिनदहाड़े हाथ काट दिया था क्योंकि उसने कालेज के प्रश्नपत्र में पैगंबर के बारे में कोई अपतिजनक सवाल लिख दिया था। पॉपुलर फ्रंट से जुड़े लोगो ने अपना विरोध जताने के लिए उनका हाथ उनके शरीर से अलग कर दिया था। हालांकि यह मामला दोनो समुदाओं की समझदारी से सप्रदायिक रंग नही ले पाया और केरल की वाम मोर्चा सरकार ने दोषियों को पकड़कर कानून के हवाले कर दिया। लेकिन चर्च नेतृत्व यह जानता है कि अगर अमेरिका में कुरान को जलाया जाता है तो उसकी आँच यहां तक भी पहुचेंगी इसलिए दोनो वर्गो के बीच समझदारी एवं आपसी सौहार्द बनाये रखने के प्रयास शुरू हो गए है। लेकिन जिस तरीके से दोनों वर्गो (मुस्लिम/ ईसाइयों) के बीच समझदारी एवं आपसी सौहार्द बनाने की बात हो रही है वह बेहद चौंकानेवाली एवं आने वाले समय में घातक साबित होने वाली है।
चर्च संगठन पिछले कई वर्षों से धर्मातंरण और अपने काम करने के तरीकों के कारण हिन्दू संगठनों के निशाने पर है। पिछले कुछ वर्षों में उड़ीसा, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, झाारखंड, छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में तनाव बढ़ा है। चर्च को अपना कामकाज समान्य तरीके से चलाये रखने के लिए एक मजबूत सहयोगी की जरुरत थी जो उसे मुस्लिम समाज के रुप में मिला है। हालांकि धर्मांतरण को लेकर मुस्लिम समाज पूरी तरह सचेत है और वह अपने क्षेत्रों में ईसाई मिशनरियों की घुसपैठ को बर्दाश्त नही करता। पिछले दिनों कश्मीर से कुछ मुस्लिमों के धर्मपरिर्वतन की खबरे आने के बाद राज्य के मुख्यमंत्री उमर अब्दुला ने विदेशी ईसाई मिशनरियों को घटी से बाहर कर दिया लेकिन इस बात की कहीं कोई चर्चा नहीं हुई.
कैथोलिक क्रिश्चियन सेक्यूलर फोरम ने पिछले दिनों भोपाल कैथोलिक आर्चडायसिस के बिशप माननीय लियो कार्नलियो की तरफ से एक अपील जारी की। अपील में फ्लोरिडा के डोव वर्ल्ड आउटरीच सेंटर द्वारा कुरान जलाये जाने की योजना का विरोध करते हुए इस्लाम को मानवतावादी बताया गया। इसमें यह भी कहा गया कि वेटिकन समेत अधिकतर ईसाई संगठनों ने इस योजना का विरोध किया है, इसलिए मुस्लिम समाज को विदेशों में घटने वाली घटना को यहां तूल नही देना चाहिए। इसमें मुस्लिम समाज को समझाने वाले तरीके से बताया गया है कि भारत में ईसाई और मुस्लिम दोनों अल्पसंख्यक हैं और यहां वह विभिन्न प्रकार की समास्याओं का सामना कर रहे हैं और यहा उनका साझा दुश्मन कट्टरपंथी हिन्दू संगठन है। इस कारण उन्हें यहां अपनी एकता हर हलात में बनाये रखनी चाहिए ताकि उनके दुश्मन उनकी फूट का लाभ न उठा पाये। यानी शांति के नाम पर भी नफरत का कारोबार जारी है। चर्च की यह सोच भविष्य के भारत और उसकी योजना की एक झांकी प्रस्तुत करती है।
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- सीआईए नहीं केजीबी एजंट कहिए जनाब
- सोनिया का सच जान बेकाबू क्यों होते हो?
- नये निजाम के दामन पर है ज्यादा बड़ा दाग
- अजमेर चार्जशीट और संघी उछल-कूद
- अपने होने पर ही हैरान
- भद्दा और बेदम रहा संघ का विरोध प्रदर्शन
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- पीएमओ वाले पृथ्वीराज
- गोली लगने के बाद क्या गांधी ने कहा था- हे राम ?



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कोई एक विचार ही बेहतर नहीं होता है समय और जरूरत के हिसाब से हर एक चीज जो की पैदा होती है परिवर्तन शील होती है
कुछ विचार समय के हिसाब से अच्छे थे या फिर कोई और भी आप्शन नहीं थे| लेकिन ये जरूरी नहीं की आज के परिद्र्ष्य में भी वही विचार धारा काम करे.
सारी दुनिया में मार्क्सवाद का क्या हाल है ये तो सारी दुनिया जानती है. और आज मार्क्स वाद के नाम पे क्या हो रहा है ये भी लोग देख रहे है.
पूरे विश्व का परिवेश बदल रहा है फिर भी कुछ तथाकथित आयातित वैचारिक लोगो का दिमाग और विचारधारा नहीं बदली| आज के समय में जहा पर इसकी उत्पत्ति हुई उन्होंने भी समयानुसार अपने को बदल लिया है पर कुछ लोग अभी भी अपने को नहीं बदल प् रहे है जब की उनका शीर्ष नेतृत्व भी बदल रहा है
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जो लोग भी किसी भी धर्म के भोले भाले लोगों को उकसाने का काम करते हैं वे स्वयं में धर्म और समाज विरोधी षड़यंत्रकारी होते हैं
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ये विचार वाकई में अच्छा है लेकिन ये जरूरी है ये विचार सभी वर्गों और धर्मो में सामान रूप से, बिना किसी भेदभाव के दिखनी चाहिए.
उस समय लोगो के विचार ही पैदा होना बंद हो जाते है या फिर सुप्त हो जाते है यहाँ पर लोग उस समय भूल जाते है कि किसी भी विचार धारा से ऊपर देश और देश वासी है.
मैं ये महसूस करता हूँ की विस्फोट नेटवर्क पर आने वाला हर एक शक्स बुद्धिजीवी होता है हर कोई ऐरा गैर यहाँ नहीं हो सकता है
यहाँ मैं आपसे से निवेदन करना चाहूँगा की आप किसी के लिए अपशब्द प्रयोग न करे, आप अपनी बात शब्दों मैं रखे.
जैन साब एक अच्छे व्यक्ति है उन पर कृपया ऐसे कमेन्ट न करे | अगर विचार धारा में फर्क है तो आप उसे तरीके से भी कह सकते है.
जैन साहेब के अनुसार कुरान जलना तो गलत है पर जो लोग ट्विन टाबर में जिन्दा जल गए और मलबे में दब गए या विस्फोट में उड़ गए वो गलत नहीं है वो केबल मुसलमानों के आक्रोश का प्रदर्शन है
उनकी टिप्पणियों से यही भाव निकलता है
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