Home | धर्म-अधर्म | विदेशी क्यों तय करे हमारी धार्मिक स्वतंत्रता ?

विदेशी क्यों तय करे हमारी धार्मिक स्वतंत्रता ?

image आयोग के सदस्य ईरान यात्रा पर 2008

पूरे विश्व का पंच बनने की अमेरिकी प्रवृत्ति को भारतीय चर्च नेताओं ने पंख लगा दिये है। `अतंरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग´ (यूएससीआइआरएफ) जिसे अमेरिका की विधायिका ने 1998 में स्थापित किया था, पहली बार भारत में धार्मिक स्वतंत्रता पर सुनवाई/ जांच करने के लिए जून माह में भारत आने का जोरदार प्रयास कर रहा है। अगर नवगठित सरकार ने उसे भारत आने की अनुमति दी तो आयोग के सदस्य उड़ीसा, गुजरात एवं कर्नाटक का दौरा कर सकते है। 18 सिंतबर 2000 को आयोग ने पहली बार भारत के धार्मिक मामलों पर हस्तक्षेप करते हुए `ईसाइयों पर तथाकथित हमलों´ के मामलों पर अमेरिका में सुनवाई की थी।

उस सुनवाई में भारतीय चर्च की तरफ से प्रवासी शिक्षाविद सुमित गांगुली, कैथोलिक यूनियन के उपाध्यक्ष जॉन दयाल एवं मंगलूर के मुमताज अली खान ने हिस्सा लिया था। उक्त तीनों व्यक्तियों ने वहां ऐसा महौल बनाया कि पूर्व भारतीय प्रधानमत्रीं अटल बिहारी वाजपेयी को अपने अमेरिका प्रवास के दौरान `अल्पसंख्यक विशेषकर ईसाइयों´ की सुरक्षा के बारे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय को सफाई देनी पड़ी।

वर्ष 1998 से ही आयोग भारत का दौरा करने का दबाव बनाये हुए है। लेकिन भारतीय सरकार ने उसे ऐसा करने की अनुमति प्रदान करने से इंकार कर दिया। क्योंकि `अतंरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग´ के भारत दौरे पर पहले विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी नराजगी जता चुके है। किसी भी देश की सार्वभौमिकता, एकता और अखण्डता के साथ राष्ट्रीय स्वाभिमान भी जुड़ा होता है। भारत की यह नीति रही है कि हमारे घरेलू मामलों में कोई भी देश या अंतरराष्ट्रीय संगठन हस्तक्षेप नही कर सकता। इसी नीति का पालन करते हुए राजग सरकार के मुखिया पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी वाजपेयी (1999-2004) एवं संप्रग के प्रधानमंत्री डा. मनमहोन सिंह (2004-2009) ने बनाये रखा। वैसे भी भारत की यह नीति रही है कि वह अपने अंदरुनी मामलों का समाधान खुद करेगा। इसके लिए देश में ही न्यायपालिका, विधयिका, कार्यपालिका मौजूद है।

`अतंरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग´ (यूएससीआइआरएफ) बात तो भले ही मनाव अधिकारों की करे लेकिन उसका मुख्य कार्य चर्च के साम्राज्वाद को मजबूत बनाना है। इसी रणनीति के तहत दुनिया के देशों को तीन विभिन्न विभिन्न श्रेणियों में बांट कर यह आयोग कार्य करता है। आयोग की नजर में जहां धार्मिक स्वतंत्रता एवं मानव अधिकारों का सबसे ज्यादा खतरा है उनमें बर्मा, चीन, ईरान, इराक, वियतनाम, नार्थ कोरिया, क्यूबा, उजबेकिस्तान आदि देश है। दूसरी श्रेणी में बेलारुस, तुर्की, सोमालिया जैसे देश है। आयोग की तीसरी श्रेणी में भारत, श्रीलंका, बांग्लादेश, कजाकिस्तान जैसे देश है जहां धार्मिक स्वतंत्रता को कभी भी खतरा पैदा हो सकता है। इस तरह का संदेश कुछ समय पूर्व पोप बेनेडिक्ट 16वें भी दे चुके है जब उन्होनें वेटिकन स्थित भारतीय राजदूत को बुलाकर भारत में कुछ राज्य सरकारों द्वारा `धर्मांतरण विरोधी´ बिल लाने पर अपनी नराजगी जाहिर की थी। उनका मानना था कि इस तरह के बिल लाने से चर्च के `मानव उत्थान´ कार्यक्रम में रुकावट आती है। निसंदेह `अतंरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग´ (यूएससीआइआरएफ) उन्ही देशों में हस्तक्षेप करने की योजना बनाता है जहां चर्च को आगे बढ़ने में रुकावट दिखाई देती हो।

अब प्रश्न खड़ा होता है कि क्या भारत में चर्च या ईसाई समुदाय के सामने ऐसी स्थिति आ गई है कि वह अपने धार्मिक कर्म-कांड, पूजा-पद्वति तक नही कर पा रहा? क्या ईसाइयों की जान/माल की सुरक्षा करने में देश का तंत्र असफल हो गया है? क्या विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका में इनकी सुनवाई नही हो रही? क्या विदेशी सरकारों एवं अंतराश्ट्रीय संगठनों के सामने जाने के अलावा और कोई मार्ग नही बचा? यह कुछ ऐसे प्रश्न है जिनका उतर चर्च नेताओं को विदेशी आयोग के सामने जाने से पहले भारतीय समाज को देना चाहिए। अगर हम कर्नाटक, उड़ीसा में घटी दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं को ही देखें तो वहां कि राज्य सरकारे, केन्द्र सरकार, न्यायपालिका सभी ने पीड़ितों का पक्ष लिया है। यहां तक कि देश के सर्वोच्च न्यायायलय ने हिंसा के दोरान मारे गये लोगों के उचित मुआवजे एवं क्षतिग्रस्त हुए चर्चों तक के पुनानिर्माण के आदेश दिये है।

भारतीय जनता पार्टी की सरकारे ही धर्मातरण का विरोध करती है या इसे राष्ट्र के लिए खतरा मनाती है ऐसा नही है। विगत कुछ वर्ष पूर्व कांग्रेस पार्टी की हिमाचल प्रदेश सरकार ने सर्वसमति से `धर्मांतरण विरोधी´ कानून राज्य में लागू किया है। यह अलग बात है कि वह भाजपा सरकारों द्वारा लाए जाने वाले इस तरह के कानूनों का अपने राज्यपालों के माध्यम से विरोध करती आ रही है। भारत में चर्च को कार्य करने की कितनी स्वतंत्रता है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि भारत में वेटिकन के राजदूत कितनी तेजी से नये डायसिसों का निर्माण एवं बिशपों की नियुक्तियाँ कर रहे है। हालाकि उन्हे ऐसी स्वतंत्रता हमारे पड़ौसी देशों चीन, बर्मा, भूटान, नेपाल, पकिस्तान, बंगलादेश, अफगानिस्तान आदि में नही है। भारत में `अल्पसंख्यक अधिकारों´ की आड़ में चर्च लगातार अपना विस्तार कर रहा है। हालाकि उसके अनुयायी आज भी दयनीय स्थिति में है। भारत में चर्चो के पास अपार संपत्ति है। जिसका उपयोग वह अपने अनुयायियों की स्थिति सुधारने की उपेक्षा अपना साम्राज्वाद बढ़ाने के लिए कर रहा है। धर्म-प्रचार के नाम पर चलाई जा रही गतिविधियों के कारण होने वाले तनाव में क्या चर्च की कोई भूमिका नही होती?

Subscribe to comments feed Comments (8 posted):

sourabh khandelwal on 29 May, 2009 07:44;37
avatar
isai samuday yadi daliton aur pichdon ka uddhar karne ki pavitra soch rakhe aur use sahi implimentation kare to behtar parinam samne aa sakte hai, lekin isai samuday ke sath sath har jagah neta kism ke logon ne hi kaam bigada hai aur desh ke vikash me roda atkaya hai.
Thumbs Up Thumbs Down
0
sourabh khandelwal on 29 May, 2009 07:48;51
avatar
aur rahi bat videshiyon ke dwara bharat me dharmik swatantrata ke aklan karne ki to is bat ke liye hum bharat ki sarvbhomikta ko ta per nahi rakh sakte.
Thumbs Up Thumbs Down
0
amit sharma on 29 May, 2009 22:33;46
avatar
america ki dadagiri ko rocne jaruri hai. Ham hindusthani khud apna bhala bura samajhtain hai. america ke kisi commission ko bharat aane ki jarrurat nahin.
Thumbs Up Thumbs Down
0
धर्म रिपोर्टर on 31 May, 2009 00:49;33
avatar
विदेशी क्यों तय करे हमारी धार्मिक स्वतंत्रता ?... अगर आपकी आज्ञा हो तो कृपया हम इस लेख को अपने ब्लॉग पर साभार प्रस्तुत करना चाहते हैं...
Thumbs Up Thumbs Down
0
visfot news network on 31 May, 2009 03:13;38
avatar
हमारी ओर से किसी भी लेख पर कोई कापीराईट नहीं है. लेकिन ब्लाग पर पूरा प्रकाशित करने से बेहतर है कि आप एक हिस्सा प्रकाशित कर बाकी के लिए लिंक दें. तकनीकि लिहाज से यह रास्ता ब्लाग और साईट दोनों के लिए अच्छा होगा.
Thumbs Up Thumbs Down
-1
bhagavaan daas on 31 May, 2009 13:18;42
avatar
VERY GOOD ARTICLE . I PRESSED THUMB DOWN BY MISTAKE . THIS IS A VERY GOOD ARTICLE . --- " विदेशी क्यों तय करे हमारी धार्मिक स्वतंत्रता ? " --- IT IS 100 % TRUE . MINORITIES IN INDIA ARE PEMPERED A LOT BY OUR GOVT.
Thumbs Up Thumbs Down
0
संजय बेंगाणी on 02 June, 2009 01:39;51
avatar
क्या कहें. हमारे अपने ही बेवकुफ है. यह भारतीय धर्मनिरपेक्षता का अपमान है. मगर ऐसा मानने वाले न तो सत्ता में है, न बहुसंख्यक है. अतः अपमान का घुँट पी कर रह जाते है.
Thumbs Up Thumbs Down
0
Yogi Hemant Panchpor on 02 June, 2009 10:19;19
avatar
विदेशी क्यों तय करे हमारी धार्मिक स्वतंत्रता ? is a good article. We have to use same technique of "GO BACK SYMON" during Sycom Commission during British Raj. This time it will be "GO BACK USCIRF" If Indian Govt. did not get the message, put the pressure through opposition parties to pull down Government for compromising National Soveignity.
Yogi Hemant Panchpor
Thumbs Up Thumbs Down
0
total: 8 | displaying: 1 - 8

Post your comment comment

Type in Hindi (हिन्दी में कमेन्ट करने के लिए यहां रोमन में लिखिए यह अपने आप हिन्दी में बदल देगा.)

Title :
Body
Powered by Vivvo CMS v4.1.2
Share |
  • email Email to a friend
  • print Print version

ईमेल से विस्फोटः अपना ईमेल यहां भरें और सब्सक्राइब करें:

Delivered by FeedBurner

Author info
image आरएल फ्रांसिस पुअर क्रिश्चियन लिबरेशन मुवमेन्ट के अध्यक्ष आर एल फ्रांसिस ईसाई मिशनरियों के बीच व्याप्त भेदभाव और कटुता के खिलाफ लगातार अपनी आवाज बुलंद किये हुए हैं. आप उन्हें pclmfrancis@gmail.com पर संपर्क कर सकते हैं.
Rate this article
5.00
More from धर्म-अधर्म
Previous
image
ईसाईयत बनाम इस्लाम की मजहबी जंग
९/११ की नौंवीं वर्षगाँठ के निमित्त आतंकवाद के नाम पर पूरी दुनिया में तरह-तरह की चर्चा छिड़ी. फ्लोरिडा के कोई एक पादरी टेरी जोन्स ने आतंकवाद का स्रोत इस्लामपंथियों की परमपवित्र पुस्तक कुरआन शरीफ को करार देकर उसे जलाने की घोषणा कर सुर्ख़ियों में रहे. उनकी इस घोषणा से पूरी दुनिया चिंतित हुई. अमेरिकी विदेश मंत्री हिलारी क्लिंटन से लेकर भारतीय गृहमंत्री पी.चिदंबरम तक हर किसी को इस चिंता ने सताया कि फ्लोरिडा के पादरी की इस हरकत से पूरी इस्लामी दुनिया में उत्पात मच जाएगा....
image
कुरान जले पर भारत को पता न चले
इस्लाम को मानवता विरोधी बताते हुए अमेरिकी चर्च के एक हिस्से ने 9/11 को अमेरिका पर हुए अलकायदा के हमले की वर्षगांठ पर पवित्र कुरान को जलाने की घोषणा करके दुनिया भर के मुस्लिम समाज में बैचानी पैदा कर दी है। लेकिन इस घटनाक्रम को भी वेटिकन अपने फायदे के लिए इस्तेमाल कर रहा है. चर्च संगठनों की कोशिश है कि इन घटनाओं को भारत में ज्यादा प्रचार न मिले ताकि भारत में मुस्लिम-ईसाई एकता पर फर्क न पड़े. अगर ऐसा होता है तो ईसाई संगठनों के बड़े दुश्मन "हिन्दुओं" को इसका फायदा मिल सकता है और हिन्दू-मुसलमानों के बीच दूरियां कम हो सकती है जिसका सीधा नुकसान मिशनरियों को होगा. ...
image
कृष्णं वन्दे जगतगुरुम्
भारत भूमि में जन्मा कौन ऐसा व्यक्ति होगा जिसने श्रीकृष्ण का नाम न सुना हो? श्रीकृष्ण को वन्दे जगदगुरु भी कहा जाता है। श्रीरामचन्द्र के समान श्रीकृश्ण भी करोड़ों भारतवासियों की श्रद्वा और भक्ति के पात्र रहे है। वास्तव में श्रीकृष्ण की सम्पूर्ण जीवन लीला, उनका दुष्टों से लड़ना और सज्जनों की रक्षा करना, उनकी राजनीतिक क्षमता और सबसे अधिक उनका गीता के द्वारा दिया हुआ कर्मयोग का संदेश भारतीय संस्कृति की अमूल्य निधि है।...
image
स्टेनगनाय नमः, टेलीविजनाय स्वाहा! (हवन)
भारत में यज्ञ का महत्व क्या है और हम यज्ञ क्यों करते हैं इसकी विधिवत जानकारी हमें भले ही न हो लेकि यज्ञ को लेकर भारत में भ्रांतियां बहुत हैं. स्वामी श्री अड़गड़ानंद वर्तमान यज्ञ व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं. उनके सवाल तार्किक और सटीक हैं जिसके बारे में हिन्दू समाज को निश्चित रूप से गंभीरता से विचार करना होगा. यज्ञ पर स्वामी जी के लेखन को दो किश्तों में हम यहां प्रस्तुत कर रहे हैं....
image
हिन्दुत्व क्या है?
दस अगस्त को विस्फोट पर स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी द्वारा रचित पुस्तक ‘शंका समाधान’ से ‘गाय धर्म नहीं जानवर है’ प्रकाशित हुई थी, जिस पर विस्फोट के सुधी पाठकों ने अपना-अपना उन्मुक्त विचार व्यक्त किया है। इस लेख पर कुछ पाठकों ने स्वामी श्री अड़गड़ानन्द जी महाराज जी को तमाम तरह से लांक्षित कर उन्हें हिन्दू एवं हिन्दुत्व विरोधी करार देते हुए हिन्दुत्व पर अपने-अपने विचार व्यक्त किये हैं। स्वामी अड़गड़ानन्द जी महाराज के हिन्दुत्व की विचार धारा के प्रति तो हिन्दू एवं हिन्दुत्व के प्रति स्वामी अड़गड़ानन्द जी के विचार (अनछुये प्रश्न के माध्यम से) ‘हिन्दुत्व क्या है?’ को प्रस्तुत कर रहा हूं. प्रस्तुति- एस ए अस्थाना...
image
हिन्दुत्व क्या है-२
शोध संस्थान वालों ने तर्क दिया है कि दक्षिण भारत के लोग अपने को आर्य नहीं मानते ‘द्रविड़’ मानते हैं, हिन्दू मानते हैं। आर्य-दर्शन का प्रचार करने से उत्तर-दक्षिण भारतीयों में घृणा पनपेगी। राष्ट्रीय-गान आपको स्मरण ही होगा। पंजाब, सिन्धु, गुजरात, मराठा, द्रविड़, उत्कल, बंग। हिमाचल..............। ये भू-भाग के नाम हैं। एक श्लोक निरन्तर पढ़ने में आता है-...
image
गोरक्षा सनातन धर्म है, किन्तु पशु गाय धर्म नहीं
आये दिन ‘गो-वध बन्द हो’ का नारा लगता है। धर्माचार्यों के अनशन और लाखों रूपये के चन्दे इसी के नाम पर होते हैं। इन सबका परिणाम केवल इतना निकला है कि यदि सन् 1942 में 17,000 गायें नित्य दिन कटती थीं तो आज उनकी संख्या 50,000 तक पहुंच चुकी है। विचारणीय है कि क्या गाय हमारा धर्म है ?क्या इसके समर्थन में हमारे पूर्वजों ने वेद, गीता और रामचरितमानस-जैसे आर्षग्रन्थों में कुछ कहा है ? यदि नहीं कहा तो यह एक धोखा है। इससे हम सबको सतर्क हो जाना चाहिए। ...
image
अमेरिका का आध्यात्म, भारत का हिन्दुत्व
हालीवुड अभिनेत्री जूलिया राबर्ट्स हिन्दू हो गयी. देशभर की मीडिया इस खबर से अटी पड़ी है है कि उन्हें हिन्दू धर्म ने इतना प्रभावित किया कि उन्होंने पिछले साल स्वामी धर्मदेव से हुई मुलाकात ने उन्हें इतना प्रभावित किया कि उन्होंने हिन्दू धर्म स्वीकार कर लिया. इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम को मीडिया भले ही आश्चर्य की नजर से देख रहा हो लेकिन खुद स्वामी धर्मदेव को कोई आश्चर्य नहीं है. जूलिया के धर्मपरिवर्तन के बाद उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि वे जबरन धर्म परिवर्तन के पक्ष में नहीं हैं लेकिन अगर जूलिया ने अपनी आत्मा से हिन्दू धर्म को स्वीकार किया है तो उनका स्वागत किया जाना चाहिए. ...
image
दाता दरबार पर आतंक का कहर
पाकिस्तान में कट्टरपंथी जमातें उदारवादी धड़ों को लगातार निशाना बना रही हैं. अभी हाल में ही अहमदी समुदाय की मस्जिद पर हमले के बाद अब लाहौर के सूफी संत की मजार दाता दरबार पर आतंकियों ने हमला किया है जिसमें 42 से अधिक लोग मारे गये हैं और पौने दो सौ से अधिक लोग घायल हो गये हैं. पाकिस्तान में सूफी परंपरा और दाता गंज बख्श साहिब के बारे में विस्तार से बता रहे हैं प्रकाश रे....
image
अल्लाह के नाम पर
क्या यह तथ्य हैरान परेशान और पशेमाान करने वाला नहीं है कि 121 वर्ष से स्थापित एक इस्लामिक मूवमेंट जमायत अहमदिया को पाकिस्तान में खुद को मुस्लिम कहने से रोकने के लिये बाकायदा एक कड़ा कानून काम कर रहा है। पाकिस्तान में अहमदिया लोग मुस्लिम जगत में मिलने पर प्रयोग होने वाले इस्लामावालेकुम - वालेकुम इस्लाम अभिवादन करते हुए पकड़े जायें तो तीन साल तक कैद व जुर्माना लगने का कानून है।...
image
घाना में हिन्दुत्व और घनानंद
हॉल में धूप-अगरबत्ती की ख़ुशबू फैली हुई है और मूर्तियों के आगे दिए टिमटिमा रहे हैं. अगर सिर्फ़ आवाज़ें सुनी जाएँ तो लगेगा कि आप उत्तर भारत के किसी मंदिर की पूजा में शामिल हैं. लेकिन आँख खोलकर वहाँ मौजूद भक्तगणों पर नज़र डालें तो चौंके बिना नहीं रह सकते. ये घाना की राजधानी अकरा के छोर पर ओडोरकोर बस्ती में बना एक हिंदू मंदिर है लेकिन यहाँ पूजा करने आए लोगों में से एक भी भारतीय नहीं है....
image
अहमदिया संप्रदाय: सबके लिए शांति के उपासक
गुरुदासपुर के कादियान नामक कस्बे में 23 मार्च 1889 को इस्लाम के बीच एक आंदोलन शुरू हुआ जो आगे चलकर अहमदिया आंदोलन के नाम से जाना गया. यह आंदोलन बहुत ही अनोखा था. इस्लाम धर्म के बीच पहली बार एक व्यक्ति ने घोषणा की कि "मसीहा" फिर आयेंगे. मसीहा माने ईसा मसीह. इस्लाम धर्म के बीच इस अनोखे संप्रदाय को शुरू करनेवाले मिर्जा गुलाम अहमद ने अहमदिया आंदोलन शुरू करने के दो साल बाद 1891 में अपने आप को "मसीहा" घोषित कर दिया. बात सिर्फ यहीं तक नहीं रुकी. मिर्जा गुलाम अहमद ने खुद को विष्णु का आखिरी अवतार भी घोषित कर दिया. ...
image
मंदिरों की कमाई पर कब्जे की फिराक में सरकार
महाराष्ट्र सरकार की नजर अब मंदिरों पर है। दो मंदिरों का संचालन करके मलाई काट रही सरकार अब प्रदेश के दो लाख मंदिरों पर नजरें गड़ाए हुए है। अशोक चव्हाण की सरकार ने प्रदेश के तकरीबन दो लाख से भी ज्यादा मंदिरों को अपने कब्जे में लेने के लिए एक व्यापक प्रस्ताव तैयार किया है। सरकार का कहना है कि पब्लिक ट्रस्ट एक्ट के तहत जिन दो लाख मंदिरों का संचालन हो रहा है, उनके संचालन में गड़बड़ी की शिकायतें है।...
image
कुंभ पर फूटा पाप का घड़ा
यह कैसा अजब संयोग है कि जिस वक्त देश में पवित्र महाकुंभ चल रहा था उसी वक्त एक एक करके संतों के पाप का घड़ा भी फूट रहा था. तीन महीने तक हरिद्वार में चले पवित्र महाकुंभ के मौके पर "अपवित्र संन्यासियों" के पाप का घड़ा भी फूटता रहा. साधु संतों के पाप के इन फूटते घड़ों ने न केवल धर्म की मर्यादा को भंग किया बल्कि उस पावन महाकुंभ को भी कलंकित व शर्मसार कर दिया जिसका भक्तगण 12 वर्षों तक बेसब्री से इंतज़ार करते हें। ...
image
यौनाचार के दलदल में कैथोलिक चर्च
आयरिश बिशपों के एक प्रतिनिधिमंडल ने पोप बेनेडिक्ट (सोलहवें) से मंगलवार को वेटिकन में ‘बच्चों के यौन शोषण’ के मुद्दों पर चर्चा की। अमेरिका के बाद आयरलैंड में कैथोलिक चर्च को यह दूसरा सबसे बड़ा झटका है। अमेरिका की तरह आयरलैंड के चर्च विश्वासी ‘पोप’ के प्रतिनिधि बिशपों एवं पादरियों को न्यायालय में घसीट रहे है। पीड़ित परिवार मुआवजे के रुप में 1.37 अरब डालर की मांग कर रहे है। वही दूसरी और पादरियों द्वारा पीड़ित लोग वेटिकन से उन गुप्त फाइलों को सर्वाजिनक किये जाने की मांग कर रहे है जिनमें रोमन कैथोलिक चर्च में यौन दुर्व्यवहार की अदरुनी जांच का ब्यौरा है।...
image
संत वही जो पंथ दिखाए
जगदगुरु रामानंदाचार्य श्रीरामनरेशाचार्य आज के आपाधापी भरे, भौतिकता के प्रमाद में ऊभचूभ करते समय में एक ऐसे अकम्पित ज्योति-स्तम्भ हैं, जिनसे जो भी चाहे अपने जीवन में प्रकाश पा सकता है। एक ऐसे स्नेहिल-प्रेमिल संत, जो धर्म-अध्यात्म, ज्ञान-दर्शन और तत्व चिंतन के अगाध समुद्र हैं और जिनकी शीतल वाणी हृदय के दाह को शांत करके मन के तार को इस तरह झंकृत कर देती है। ...
image
बीबी-बच्चों वाले शंकराचार्य
भारत में हिन्दू धर्म व्यवस्था में शंकराचार्य सर्वोच्च स्थान पर होता है. लेकिन इस पद की गरिमा और शक्ति ने इस शंकराचार्य पदवी को पूरी तरह से शक्ति प्रदर्शन के अखाड़ों में बदल दिया है. आदि शंकर द्वारा भले ही चार पीठ स्थापित किये गये हों लेकिन इस समय दर्जनों शंकराचार्य अपनी धर्म की दुकानदारी चला रहे हैं. विस्फोट.कॉम ऐसे शंकरायार्यों की कलई खोलनेवाली एक विशेष श्रृंखला शुरू कर रहा है जिसकी पहली कड़ी में हम माधवाश्रम के बारे में आपको बता रहे हैं जो कि खुद को ज्योतिर्मठ पीठ का शंकराचार्य घोषित करते हैं. ...
Next
Tags
No tags for this article
सर्वाधिकार (अ)सुरक्षित

विस्फोट.कॉम में प्रकाशित सामग्री पर हमारी ओर से कोई कापीराइट नहीं है.

Powered by Vivvo CMS v4.1.2