धर्म-अधर्म
क्या यह दुख सबको मिटाकर मिटेगा?
पिछले तीन-चार महीनों में मंदिर-मस्जिद और गिरजाघरों के भक्त आपस में लड़े हैं और इससे जो आग लगी है, उससे फिर कई लोग झुलसे हैं। कश्मीर, उड़ीसा और कर्नाटक में धर्मों की बुनियाद-सहिष्णुता को जलाकर यह आग तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में भी फैली है। गांधीजी ने सनातन धर्म को सबसे सहिष्णु धर्म बताया था। उन्होंने बहुत भारी मन से पूछा था कि क्या यह दुख सबको मिटाकर मिटेगा?
आत्मा से धोखा, इज्जत से खिलवाड़
पिछले कुछ समय से विश्वभर के समाचारपत्रों व अन्य प्रचार माध्यमों के द्वारा `पादरियों´ के नैतिक चरित्र को लेकर जोरदार सवाल खड़े किए गए हैं, जिस कारण साधारण मसीही विश्वासी अपने धार्मिक अगुवों के लगातार गिरते नैतिक स्तर के कारण शर्मिदगी महसूस करने लगे है। वैसे तो कैथोलिक कलेर्जीमैन (चरवाहों) द्वारा अपनी गलती मानने का सवाल ही नहीं उठता फिर भी अंतत: वैटिकन ने इस घिनौने तथ्य को स्वीकार कर लिया है कि कुछ पादरी एवं मिशनरी बच्चों एवं चर्च की ननों के साथ यौनाचार में लिप्त पाये गए है।
विदेशी धन और धर्मांतरण
अभी हाल में ही मैं अपने गृहराज्य कर्नाटक गया था. मैंने अनुभव किया कि इस इलाके में इधर के वर्षों में ईसाईयों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है. जब थोड़ी जानकारी इकट्ठा की तो पता चला कि धर्मांतरण में यह तेजी वर्ल्ड विजन के सक्रिय होने के बाद आयी है. यह वर्ल्ड विजन वही दानदाता संस्था है जो भारत के एक पवित्रम स्थान माजुली में धर्मांतरण के कामों को मदद कर रहा है. माजुली द्वीप समूह वैष्णव संप्रदाय के महान समाज सुधारक शंकर देव की कर्मस्थली है. वर्ल्ड विजन इन द्वीप समूहों पर ईसा का पवित्र संदेश पहुंचाना चाहता है. इसके लिए वह भारी रकम भी खर्च कर रहा है. ...दलित पादरी होने का दर्द
भारतीय चर्च अधिकारियों पर धर्मांतरित ईसाइयों के साथ गैर-बराबरी का सलूक करने के आरोप लम्बे समय से लगते रहे है। अनुसूचित जातियों एवं जनजातियों से ईसाई बने करोड़ों लोगों को इस बात की पीड़ा सताती रहती है कि जिन धार्मिक, सामाजिक एवं आर्थिक विसंगतियों एवं शोषण के खिलाफ विद्रोह करते हुए उन्होंने चर्च का दामन थामा था, यहां भी उन्हें समानता एवं न्याय नहीं मिल पाया है। चर्च ढांचे पर आज भी उच्चजातीय ईसाइयों का कब्जा है। उन्हीं में से अधिकतर बिशप, पादरी, कार्डीनल, सामाजिक संगठनों के निर्देशक नियुक्त किये जाते है।...सहज सरल जीवन का दर्शन
मध्यस्थ दर्शन का मूल सिद्धांत सह-अस्तित्ववाद है. खुद आचार्य नागराज कहते हैं "आज के भौतिकवाद का असर हम धरती पर देख रहे हैं कि क्या हुआ है. धरती बीमार हो गयी है. इस बीमार धरती को ठीक करने में हमारा आदर्शवाद भी नाकाम रहा है." यहां आदर्शवाद के नाम पर आचार्य नागराज उस वैदिक परंपरा की ओर संकेत कर रहे हैं जिसमें जाकर भारतीय मानस अपनी समस्याओं का हल खोजता रहा है. बाबा का यह सवाल तब ज्यादा ध्यानाकर्षण करता है जब हम खुद अपने चारों ओर परिस्थितियों को बद से बदतर होते हुए देखते हैं. फिर सह-अस्तित्ववाद अथवा मध्यस्थ दर्शन में क्या नया है?...सत्यदर्शिनी का सत्य-असत्य
जिस सत्यदर्शिनी पुस्तक के ऊपर कर्नाटक में चर्च के ऊपर हमले हुए और पूरे प्रदेश की शांति भंग हुई, उसे छापनेवाले न्यू लाईफ फेलोशिप ने कह दिया है कि सत्यदर्शिनी पुस्तक उन्होंने छापी ही नहीं है. केवल यही नहीं उन्होंने अपनी वेबसाईट पर दावा किया है कि पिछले 25 सालों से उन्होंने किसी प्रकार का कोई जबरी धर्मपरिवर्तन नहीं किया है. अगर उसका दावा सत्य है तो सत्यदर्शिनी का असत्य क्या है?
चर्च झूठ बोलता हैं
जी हां यह सच है कि धर्मांतंरण के मामले पर `चर्च झूठ बोलता है। चर्च से तात्पर्य यहां वैटिकन द्वारा संचालित रोमन कैथोलिक चर्च से है जो कि भारत में `कैथोलिक बिशप कांफ्रेस ऑफ इंडिया´ द्वारा शासित है, जिसका मुख्यालय नई दिल्ली में है। विगत माह उड़ीसा के कंधमाल में एक हिन्दू संत की हत्या के बाद भड़की हिंसा में वहां मुख्य कारण मंतातरण है, यह समस्या एक विकराल रुप लेती जा रही है, जिसमें केन्द्र की सरकार से लेकर पश्चिमी देशों की सरकारें तक अपनी-अपनी रोटियां सेंक रही है। उड़ीसा को मुद्दा बना कर `आस्ट्रेलिया, अमेरिका, फ्रांस, इटली आदि देश भारत पर दबाव बना रहे हैं।
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सुदर्शन का (कु) दर्शन
जबसे आरएसएस के लोगों की आतंकवादी घटनाओं में संलिप्तता सामने आयी है, तब से आरएसएस के नेता बौखला गए हैं। इस बौखलाहट में ही शायद संघ के इतिहास में पहली बार हुआ है कि इसके स्वयंसेवक विरोध प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर उतरे। इसी बौखलाहट में आरएसएस के एक्स चीफ केएस सुदर्शन का मानसिक संतुलन बिगड़ गया और सोनिया गांधी के बारे में ऐसे शब्द बोल दिए, जिन्हें एक विकृत मानसिकता का आदमी ही बोल सकता है।...
सीआईए नहीं केजीबी एजंट कहिए जनाब
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरसंघचालक ने 10 नवंबर को सोनिया गांधी पर सीआईए एजंट होने का आरोप लगाकर सनसनी पैदा कर दिया है. पूरी की पूरी कांग्रेस उत्तेजित है और संघ भी बैकफुट पर चला गया है. सुदर्शन के आस पास के लोगों का कहना है कि सुदर्शन जी भुलक्कड़ हो गये हैं और उन्हें कुछ ठीक से याद नहीं रहता. शायद इसीलिए उन्होंने इतनी बड़ी चूक कर दी. ...
सोनिया का सच जान बेकाबू क्यों होते हो?
एक बार फिर लोकतंत्र पर आपातकाल मंडरा पड़ा है. राजमाता सोनिया गांधी के सिपहसालारों ने कांग्रेसी गुण्डों, माफियाओं और लोकतंत्र के हत्यारों का आह्वान किया है कि वह देशभर में संघ कार्यालयों पर धावा बोल दे. इसका तत्काल प्रभाव हुआ और कांग्रेसी गुण्डों ने संघ के दिल्ली मुख्यालय पर धावा भी बोल दिया. ठीक वैसे ही जैसे इंदिरा गांधी की मौत के बाद सिखों को निशाना बनाया गया था. हिंसक और अलोकतातंत्रिक मानसिकता से ग्रस्त कांग्रेसी सोनिया का सच जानकर आखिर इस तरह बेकाबू क्यों हो रहे हैं?...
नये निजाम के दामन पर है ज्यादा बड़ा दाग
मुंबई। महाराष्ट्र के नए निजाम भी कोई दूध के धुले नहीं हैं। कांग्रेस आलाकमान ने अशोक चव्हाण को फर्जीवाड़े से फ्लैट पाने के आरोप में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की गद्दी से हटा दिया। लेकिन नए मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण भी उसी तरह के फर्जीवाड़े में गले तक डूबे हुए हैं। उन्होंने जितने बड़े बड़े झूठ बोलकर सरकार से फ्लैट हथियाए हैं वे कांग्रेस के लिए ज्यादा दागदार हैं।...
अजमेर चार्जशीट और संघी उछल-कूद
बढ़ते पैमाने पर इसके साक्ष्य सामने आ रहे हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर एस एस) से जुड़े लोगों का आतंकवादी हमलों में हाथ रहा है। इन हालात में आर एस एस इस पुराने सूत्र पर चल रहा लगता है कि हमला ही सबसे अच्छा बचाव है। उसने 10 नवंबर को देशव्यापी विरोध कार्रवाइयों का आह्वान किया है। इन कार्रवाइयों में संघ के शीर्ष नेताओं के शामिल होने की बात कही जा रही है। बहरहाल, इसकी चर्चा हम जरा बाद में करेंगे।...
अपने होने पर ही हैरान
‘चुप्पी-चुप्पी नहीं नहीं, बोलेंगे अब सभी-सभी’ इन्हीं नारों से दाहोद (गुजरात) का सीनियर रेलवे संस्थान परिसर 31 अक्टूबर को पूरे दिन गूंजता रहा। यहां गुजरात के बड़ोदरा, पंचमहल, सुरत, भड़ूच, डांग, बालसाड और साबरकांठा जिले से लगभग तीन हजार के आस पास विमुक्त एवं घुमंतू समाज से ताल्लुक रखने वाले लोग इकट्ठे हुए थे। मौका था, अधिकार अभियान की घोषणा का। उस समाज के लिए जो इस लोकतांत्रिक देश में अधिकार का अर्थ अभी तक समझ नहीं पाएं हैं। ...
गोली लगने के बाद क्या गांधी ने कहा था- हे राम ?
यह एक ऐसा सवाल है जिस पर अब विवाद होने लगा है. 30 जनवरी 1948 को क्या जब महात्मा गांधी को नाथूराम गोडसे ने गोली मारी तो महात्मा गांधी ने अपने मुंह से हे! राम का संबोधन किया था? उस वक्त घटनास्थल पर मौजूद रहे एक प्रत्यक्षदर्शी के डी मदान का कहना है कि "मैंने नहीं सुना था कि उन्होंने हे राम कहा था या नहीं."...
भद्दा और बेदम रहा संघ का विरोध प्रदर्शन
स्कूल जाते बच्चों के भी हाथ में भगवा थमाकर भले ही संघ ने शक्ति प्रदर्शन की भरपूर कोशिश की हो लेकिन 10 नवम्बर का दिन उसके इतिहास में कोई बडी घटना के रूप में याद नहीं किया जायेगा। हॉ हम बात कर रहे है राजस्थान के भरतपुर जिला मुख्यालय की जहॉ देश भर की ही तरह हिन्दुवादी संघटनों ने अपने उपर लग रहे ‘भगवा आतंकवाद’ के आरोपों के विरोध में शक्ति प्रदर्शन किया था। भरतपुर जहॉ संघ प्रचारक क रूप में भाजपा के पीएमइन वेंटिग लालकृष्ण आडवानी ने अपनी सेवाऐं दी है संघ का ये विरोध प्रदर्शन एक दम भददा और हल्का रहा।...
एनसीपी के 'दादा' का दांव
महाराष्ट्र में कांग्रेस में परिवर्तन हुआ तो राष्ट्रवादी कांग्रेस ने भी अपने पत्ते खोल दिये. राज्य में लंबे समय से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के भीतर चल रही सत्ता के दावेदारी पर एनसीपी ने आखिरकार प्रदेश की प्रशासनिक कमान अपनी ओर से शरद पवार के भतीजे अजीत पवार को सौंप दी है. अब गुरुवार को शाम साढ़े चार बजे पृथ्वीराज चव्हाण के साथ अजीत "दादा" पवार उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे....
पीएमओ वाले पृथ्वीराज
महाराष्ट्र के नये मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण यूपीए सरकार पार्ट वन और पार्ट टू में बतौर पीएमओ मिनिस्टर जाने जाते हैं. प्रधानमंत्री कार्यालय में रहते हुए भी उन्होंने कभी ताकतवर होने का दंभ नहीं पाला और चुपचाप काम करते रहे. बिट्स पिलानी से बीई और बर्कले विश्वविद्यालय से एमएस की डिग्री हासिल करनेवाले पृथ्वीराज की राजनीतिक कमेस्ट्री ने उनके सार्वजनिक जीवन में पहली बार इतना गाढ़ा रंग उड़ेला है....
सुलग रहा है मेरठ 'हिन्दुस्तान'
एक ओर हिन्दुस्तान अखबार अपनी अलग कंपनी बनाकर अखबार को चमकाने और अखबार का विस्तार करने में लगा है वहीं दूसरी ओर हिन्दुस्तान के विभिन्न संस्करणों में हालात ठीक नहीं है. हिन्दुस्तान के मेरठ संस्करण में इन दिनों इस्तीफे दिये जा रहे हैं लेकिन प्रचारित किया जा रहा है कि जो आफिस नहीं आ रहे हैं वे छुट्टी पर चले गये हैं....
आलोक तोमर के बगल में बसे किशोर मालवीय
सीएनईबी में पहले से एक सलाहकार संपादक थे- आलोक तोमर. अब दूसरे सलाहकार संपादक भी वहां नियुक्त हो गये हैं किशोर मालवीय. उन्होंने सीएनईबी चैनल के साथ बतौर कंसल्टिंग एडिटर अपनी नई पारी की शुरुआत की है। सीएनईबी से पहले वे ‘वायस ऑफ इंडिया’ न्यूज चैनल के साथ जुड़े हुए थे। उन्होंने करीब दो दशक के कॅरियर में देश के नामी-गिरामी मीडिया संस्थानों में कई जिम्मेदारियां निभाईं हैं।...
सुरक्षा परिषद की छांव में खेती पर दांव
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने संसद में दिये गये अपने भाषण में भारत से मिले प्यार की भूरि भूरि प्रशंसा जरूर की लेकिन अपनी व्यावसायिक मजबूरियों को छिपा नहीं सके. बराक ओबामा ने संसद के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करते हुए जहां एक ओर भारत को महाशक्ति करार देकर उसके लिए संयुक्त राष्ट्र में स्थायी सदस्यता को अपना समर्थन दिया वहीं भारत और अमेरिका द्वारा मिलकर खेती के क्षेत्र में एक और हरित क्रांति के आगाज की घोषणा की....
आतंक नहीं कश्मीर केन्द्रित हुई ओबामा यात्रा
रविवार की देर शाम भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा आयोजित भोज में ओमर अब्दुल्ला के शामिल होने से जो आशंका पैदा हुई थी वह सोमवार को हैदराबाद हाउस में और प्रबल रूप में सामने आ गयी जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अमेरिकी राष्ट्रपति की उपस्थिति में स्वीकार किया कि वे पाकिस्तान से बात करते वक्त "के" शब्द पर बात करने से नहीं कतराते हैं....
भारत से धंधा, पाक को चंदा
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक हुसैन ओबामा ने अपना तीन दिवसीय दौरा पूरा कर लिया. मुंबई उतरकर दिल्ली दरबार तक उनकी दस्तक भारत पर अमेरिका के मजबूत पकड़ की मिसाल बन गया. निश्चित रूप से उनका दौरा भारत के लिए उतना महत्वपूर्ण नहीं जितना खुद अमेरिका के लिए है. मंदी के दौर से जूझ रहे अमेरिका को "कारपोरेट" जगत का धंधा दिलाने के लिए उन्होंने न केवल भारत को महाशक्ति करार दे दिया बल्कि सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता का समर्थन भी कर दिया....
- आलोक तोमर की आपबीती
- वह गुजरात जिसे आप नहीं जानते
- हिन्दू आतंकवाद का अतिवाद
- सिमी से भी खतरनाक है संघ का स्वरूप
- बाबा रामदेव का दांव
बहुत अच्छा व सच्चाईयो पर आधारित लेख है। सेकुलर भारत के निर्माँण मे ऐसे लेख का अहम योगदान होगा. संपादक- आपकी आवाज़.कांम
बहुत अच्छा व सच्चाईयो पर आधारित लेख है। सेकुलर भारत के निर्माँण मे ऐसे लेख का अहम योगदान होगा. संपादक- आपकी आवाज़.कांम
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...

