व्यापारी बाबा रामदेव अब बेचेंगे क्रीम पाउडर
बाबा रामदेव अब सीएमडी ( चीफ मैनेजिंग डायरेक्टर) रामदेव हो गये हैं. योग बेचने के अपने कारोबार को बढ़ाते हुए उन्होंने फल, सब्जियां, फलों के जूस, बिस्कुट, क्रीम, पाउडर और बालों का सुगंधित तेल भी बेचेंगे. रामदेव अब योगाचार्य के साथ-साथ सब्जियों, फलों और कास्मेटिक बनानेवाली कंपनी के सीएमडी बन गये हैं.
२८ फरवरी को हरिद्वार लक्सर मार्ग पर स्थित गांव पदार्था में १२५ एकड़ खेती की जमीन पर रामदेव की कंपनी की शुरूआत की. इस मौके पर देश के कई जाने-माने उद्योगपतियों और केन्द्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय की मौजूदगी में विशालतम मेगा फूड पार्क पतंजलि फूड एण्ड पार्क लिमिटेड की नींव रखी. यह मेगा फूड पार्क रामदेव भारत सरकार की सहायता से कर रहे हैं. भारत सरकार खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय से इसके लिए उन्हें ५० करोड़ रूपये का अनुदान िमला है. स्थानीय लोगों में यह अफवाह गर्म है कि रामदेव इस उपकार के बदले कांग्रेस के पक्ष में सीमित प्रचार कर सकते हैं.
ऱामदेव का मेगा फूड पार्क १२५ एकड़ में निर्मित होगा. इसकी कुल लागत ५०० करोड़ रूपये आने का अनुमान है. पहले चरण में २५० करोड़ रूपये की लागत से निर्माण कार्य पूरा किया जाएगा और ४ अगस्त को पहले चरण का उत्पादन शुरू हो जाएगा. दूसरा चरण २०१० में ढाई सौ करोड़ की लागत से पूरा हो जाएगा. इसके पहले रामदेव ने सोमवार २३ फरवरी को केन्द्रीय राज्य मंत्री सुबोधकांत सहाय के गृहक्षेत्र रांची में भी फूड पार्क की आधारशिला रखी थी. इस फूड पार्क में भी बाबा रामदेव भारत सरकार के सहयोगी हैं.
असल में बाबा रामदेव हर जगह अपनी उपस्थिति चाहते हैं. उनका व्यापारिक साम्राज्य जिस तरह से विस्तृत हो रहा है इसे देखते हुए जरूरी है कि सत्ता प्रतिष्ठान के करीब बने रहें. यही कारण है कि थोड़े दिनों पहले तक संघ और विहिप के करीबी रहे रामदेव अब कांग्रेस और यूपीए गठबंधन के दूसरे दलों के ज्यादा नजदीक हैं. विहिप के कार्यक्रमों तक से वे अब परहेज करने लगे हैं. इसी बुधवार को संघ समर्थित धर्म रक्षा मंच की हरिद्वार में बैठक थी. रामदेव इस बैठक में नहीं गये. और तो और जमाने से स्वामी रामदेव के हर कार्यक्रम का संचालन करनेवाले स्वामी हंसदास भी स्वामी रामदेव के कार्यक्रम में नहीं आये. स्वामी हंसदास धर्म रक्षा मंच से जुड़े हुए हैं. साफ है संघ परिवार और रामदेव के बीच दूरियां बननी शुरू हो गयी हैं. हंसदास और रामदेव के बीच दूरियों का प्रमुख कारण रामदेव का व्यापारी स्वभाव है. रामदेव की मजबूरी है कि वे सत्ता के साथ बने रहें ताकि उनका व्यापार चलता रहे. जबकि महामण्डलेश्वर हंसदास जैसे संतों की कार्यशैली बिल्कुल अलग है.
हालांकि रामदेव अब सिर्फ अपने व्यापार को लेकर ही चिंतित दिखते हैं. शनिवार को उद्योगपतियों के सामने उन्होंने कहा कि वे देश में कृषि क्रांति करने जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि उनकी बड़ी चिंता अब यह है कि वे भारतीय किसानों के लिए पांच हजार करोड़ से एक लाख करोड़ का बाजार कैसे खड़ा करें. उन्होंने दावा किया कि फूड पार्क बन जाने के बाद उनके यहां तीस हजार लोगों को रोजगार मिलेगा. रिलायंस की तर्ज पर उन्होंने ऐसी व्यापारिक शैली विकसित की है ताकि किसान और कंपनी के बीच के बिचौलियों को खत्म किया जा सके. ज्ञात हो कि वालमार्ट कंपनी भी इसी शैली में काम करती है और किसानों से सीधे माल खरीदती है. रिलायंस ने जब रिटेल कारोबार में उतरने की घोषणा की तो उसने भी यही किया. अब बाबा रामदेव भी उसी रास्ते पर जा रहे हैं. रामदेव के मेगा फूड पार्क में बिस्कुट, सौंदर्य प्रसाधन, सब्जियों और फलों के जूस और आयुर्वेदिक पद्धति से अन्य खाद्य पदार्थों का उत्पादन होगा.
अपने इस स्वदेशी उत्पादन अभियान को ठीक से संचालित करने के लिए उन्होंने आजादी बचाओ आंदोलन के लोगों को भी अपने साथ जोड़ लिया है. उनके काम-काज को अंजाम देने के लिए आजादी बचाओ आंदोलन के पूर्व प्रवक्ता राजीव दीक्षीत उनके साथ जुड़ गये हैं और स्वदेशी खाद्य उत्पादन का काम देखेंगे. कृषि क्रांति के अलावा बाबा रामदेव देश में जल क्रांति भी करना चाहते हैं. वे देशवासियों को बारिश के पानी को सुरक्षित करने के नये तरीके बतायेंगे ताकि आनेवाले समय में भारतवासियों को पीने के पानी का संकट न हो.
Title :
Body
- सुदर्शन का (कु) दर्शन
- सीआईए नहीं केजीबी एजंट कहिए जनाब
- सोनिया का सच जान बेकाबू क्यों होते हो?
- नये निजाम के दामन पर है ज्यादा बड़ा दाग
- अजमेर चार्जशीट और संघी उछल-कूद
- अपने होने पर ही हैरान
- भद्दा और बेदम रहा संघ का विरोध प्रदर्शन
- एनसीपी के 'दादा' का दांव
- पीएमओ वाले पृथ्वीराज
- गोली लगने के बाद क्या गांधी ने कहा था- हे राम ?



del.icio.us
Digg
kathaakar गुरुदीप खुराना के उपन्यास ke bahane likhe gaye aalekh ko yahan paden:
http://likhoyahanvahan.blogspot.com/search/label/%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A5%81%E0%A4%A6%E0%A5%80%E0%A4%AA%20%E0%A4%96%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%BE
व्यापार एक पवित्र शब्द है। इसे गन्दगी के चश्मे से नहीं देखना चाहिये। बहुत से देशों का अस्तित्व (जीवन-मरण) व्यापार पर ही टिका हुआ है। व्यापार से युद्ध लड़े और जीते जाते हैं। व्यापार का सीधा सम्बन्ध प्रौद्योगिकी में अनुसंधान एवं विकास से है।
हम गुलामी के इतने आदी हो गये हैं कि इतनी आसान बातों को भी नहीं समझ सकते । दुनिया की 'महान्' कम्पनियाँ हमे 'कोक' पिलायें, 'पिज्जा' खिलायें, बोलना-चलना सिखाएँ, और हमे 'सभ्यता' सिखाएं तो हमे हरगिज आपत्ति नहीं। अपने देश का खाँटी देशभक्त देशी तरीके से उससे बेहतर करने की कोशिश करे तो तरह-तरह के कुतर्क करके उसे हतोत्साहित किया जायेगा।
अनुनाद ने सही कहा है
टायलेट क्लीनर से टायलेट ही साफ किया जाता है मुंह साफ नहीं किया जाता. रामदेव व्यापार करके ऐसा ही कुछ कर रहे हैं.
सुनील दत्त पाण्डेय एक ईमानदार और फक्कड़ पत्रकार हैं. जितना मैं उन्हें जानता हूं वे व्यक्तिगत रूप से किसी से वैरभाव नहीं रखते लेकिन कभी गलत को सही भी नहीं कहते. शायद इसीलिए आज भी हरिद्वार के अपने पुराने दो कमरे के घर में रह गये नहीं तो जितना संपर्क संबंध उनका है वे भी व्यापार करते तो पता नहीं कहां से कहां पहुंच जाते. ऐसा होता तो शायद एक बार को शक भी होता कि सुनील किसी निजी फायदे के लिए तो ऐसा नहीं लिख रहे हैं. ऐसा कुछ नहीं है इसलिए यह रिपोर्ट प्रकाशित की गयी है.
विदेशी उत्पादों की प्रतिस्पर्धा में देसी उत्पाद और घरेलू बाजार बनाने का काम भी तो किसी ना किसी को करना ही है.
मेरे नज़रिये में तो रामदेव बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं. योगगुरु भी और व्यापार गुरु भी!
फ़िर इसमे नया कुछ नही है - उनके अन्य आयुर्वेदिक उत्पाद भी तो चल ही रहे हैं.
Post your comment