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बिहार के विकास की कहानी, सुशील मोदी की जुबानी

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सुशील मोदी बिहार के उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री हैं. बिहार के जादुई विकास के आंकड़े के बारे में वे कहते हैं कि बिहार में उद्योग, शिक्षा और सेवाक्षेत्र ने मिलकर जो कमाल किया है उसी का परिणाम है कि बिहार ने विकास का जादुई आंकड़ा छू लिया है. बिहार के विकास की कहानी, सुशील मोदी की जुबानी.

साल 2008-2009 में बिहार की ग्रोथ रेट 11.3 प्रतिशत रही है जो गुजरात के बाद देश में सबसे अधिक है. इस ग्रोथ रेट को पाकर बिहार ने सफलता की नयी इबारत लिख दी है और हम आगे भी सफलता की यही कहानी लिखते रहेंगे. बिहार में सफलता की इस कहानी के पीछे कुछ प्रमुख कारण हैं जिसमें मुख्य हैं उद्योगों के लिए अच्छा माहौल और प्रतिभा पलायन में कमी लाना. बिहार से जो लोग बाहर काम की तलाश में जाते थे वे अब बिहार में ही रुकने लगे हैं. यही नहीं अब बार से भी लोग बिहार में वापस लौट रहे हैं और यहां दोबारा  से अपने पैर जमा रहे हैं. बिहार सबसे अधिक डाक्टर, इंजीनियर और साफ्टवेयर प्रोफेशनल्स का घर है लेकिन इनमें से कोई भी यहां नहीं रुकता है. सबको काम की तलाश में बाहर जाना पड़ता है. इसमें स्किल्ड और अनस्किल्ड दोनों तरह के लेबर शामिल हैं. अकेले बैंगलोर में आईटी के सवा लाख प्रोफेशनल्स काम कर रहे हैं. ऐसे में हम इस दिशा में काम कर रहे हैं कि वे कैसे बिहार के विकास में अपना योगदान दें.

इसके लिए जरूरी है कि बिहार में काम करने का माहौल बने. हमारी कोशिश है कि बिहार आईटी सेक्टर में तेजी से ग्रोथ करे. शुरुआत हमने सरकारी विभागों से की है. हम सभी सरकारी विभागों में ई-फाइलिंग और ई-रिटर्न जैसी सुविधाओं को लागू कर रहे हैं. बिहार सरकार के सभी दफ्तरों का कम्प्यूटरीकरण किया जा रहा है. पंचायत स्तर से लेकर प्रदेश मुख्यालय तक सभी सरकारी विभागों में ई-गवर्नेंस की सुविधा लागू की जा रही है. इससे आईटी सेक्टर को प्रदेश में अच्छा ग्रोथ मिलेगा और प्रदेश में आईटी के लिए माहौल बनेगा. सरकार के इन प्रयासों ने न केवल हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा बल्कि राज्य को ई-राज्य बनाने में मदद मिलेगी.

आईटी सेक्टर में अभी बैंगलौर और हैदराबाद जैसे शहर अव्वल हैं लेकिन वहां काम करने वाले अधिकांश लोग बिहार से वहां गये हैं. ताजा अध्ययन यह बता रहे हैं कि बैंगलोर जैसे शहर अब मंहगे पड़ रहे हैं. इसलिए दूसरी श्रेणी के शहरों की ओर लोगों का रुझान बढ़ा है. हमारी कोशिश है कि पटना को भविष्य का आईटी डेस्टिनेशन बनाया जाए. इस दिशा में पहल करते हुए हमने कई आईटी कंपनियों से बात की है. उनसे बातचीत सकारात्मक है और प्रदेश में 1 लाख 33 हजार करोड़ रुपये के प्रस्ताव मिले हैं. ये सभी प्रस्ताव आगामी एक साल में आकार लेने लगेंगे. इसी वित्त वर्ष में हमने 16 हजार करोड़ रुपये योजना खर्च का लक्ष्य रखा है.

इसके साथ ही हमने बिहार में शिक्षा पर काफी ध्यान दिया है. बिहार को शिक्षा में जगतगुरु बनाने के लिए प्रदेश में 19 सुपर स्पेशिलिटी मेडिकल कालेज, 23 इंजिनीयरिंग कालेज और कुछ मैनेजमेन्ट इन्स्टीट्यूट खोलने का प्रस्ताव है. इसके साथ ही सरकार ने दो लाख शिक्षकों को भर्ती किया है और एजूकेशन सेक्टर में 10 हजार करोड़ रुपये निवेश करने के लिए काम कर रही है. हमें उम्मीद है कि हम शिक्षा, आईटी, उद्योग और सेवा क्षेत्र के जरिए बिहार में विकास की नयी कहानी लिखेंगे.

(ईटी में सुशील कुमार मोदी द्वारा की गयी बातचीत पर आधारित.)

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अभिषेक on 28 January, 2010 22:37;43
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इस लेख का मंतव्य समझ नहीं आया. लेख कई बार प्रतीत हुआ की एक विज्ञापन है बिहार सरकार का. आखिरी पंक्तियों से समझ आया की यह सुशिल मोदी जी के साक्षात्कार का अंश है जो आपने ET से लिया है.
विस्फोट को इस तरह के लेखों से बचना चाहिए. आप तथ्यपरक और बेबाक रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं और हमें उसी रूप में पसंद हैं.
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संजय तिवारी on 29 January, 2010 11:32;06
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इस लेख को सादर किसी और अखबार से लेकर प्रकाशित करने का मकसद है कि हम विस्फोट पर बिहार के विकास पर एक बहस चला रहे हैं. सुशील मोदी बिहार के उपमुख्यमंत्री हैं और वे बता रहे हैं कि कैसे हम आगे बढ़ रहे हैं. संदर्भरूप में यह लेख विस्फोट पर रहे इतना ही मकसद है.

वैसे भी बिहार सरकार कम से कम विस्फोट को तो विज्ञापन देने से रही. क्योंकि न हम विज्ञापन मांगने जाते हैं और न कोई अपने से लाकर पहुंचाता है. इसलिए इसे संदर्भ सामग्री ही माने.
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Jeet Bhargava on 31 January, 2010 04:19;26
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अच्छी रपट. वास्तव में लालू राबडी राज की काली छाया से निकल कर बिहार विकास-पथ पर आगे बढ़ रहा है. इसे हमें सकारात्मक रूप से लेना चाहिए. बिहार देश का माथा है इसने नालंदा जैसी धरोहर दी और कई प्रतिभाएं दी हैं. वह आगे बढे इसमे सारे देश की भलाई है. उसके प्रति पूर्वाग्रह रखने वाले लोगो को बिहार की बदनामी करने से बाज आना चाहिए. विस्फोट ने एक सार्थक बहस और लेखमाला की शुरूआत की है, जिसका स्वागत किया जाना चाहिए, ना कि आरोप लगाना चाहिए.
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संजय जी बतलाईये, बिन पैसे क्या हाल!
क्या पैसा ना बदल दे, किस द्दिग्गज की चाल?
किस दिग्गज की चाल, ना रुकी इस दल-दल में?
कांग्रेस-भाजप्पा- सारे इस दल-दल में.
कह साधक मीडीया बाप है, सब सुन लो जी!
बिन पैसे ना चले, बतलाईये अब संजय जी!!!
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