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प्रणव दा ने पेश किया 'आम' आदमी का आम बजट

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शुक्रवार को लोकसभा में साल 2010-11 का बजट प्रस्तुत करते हुए वित्तमंत्री ने आखिर में इसे देश के आम आदमी को समर्पित करने के साथ समापन किया. नवगठित यूपीए सरकार के वित्तमंत्री के बतौर अपना पहला बजट प्रस्तुत करते हुए समाजवादी अर्थव्यवस्था के पक्षधर प्रणव मुखर्जी ने कारपोरेट और आम आदमी के बीच संतुलन साधने की कोशिश की है.

हालांकि शुक्रवार को बजट प्रस्तुत करने के दौरान समूचे विपक्ष के बहिर्गमन ने बजट सत्र की गरिमा को ठेस जरूर पहुंचाई लेकिन अपने बजटीय भाषण के दौरान वित्तमंत्री प्रणव मुखर्जी आत्मविश्वास से लबरेज दिखाई दिये. हम यहां उनके बजट भाषण की प्रमुख घोषणाएं प्रस्तुत कर रहे हैं और हिन्दी में पूरा बजट भाषण पीडीएफ फाइल के रूप में संलग्न कर रहे हैं जिसे आप अपने उपयोग के लिए डाउनलोड कर सकते हैं.

अपने बजट भाषण की शुरूआत करते हुए प्रणव मुखर्जी ने कहा कि नौ महीने अपना बजट प्रस्तुत करते हुए जिन तीन चुनौतियों का जिक्र मैंने किया था वे आज भी जस की तस बनी हुई हैं. वित्तमंत्री के अनुसार ये तीन चुनौतियां है- सकल घरेलू उत्पाद की उच्च दर 9 प्रतिशत को प्राप्त करना, सर्वसमावेशी विकास और चुस्त-दुरुस्त प्रशासन. वित्तमंत्री ने कहा कि आर्थिक सुधारों के चलते अब आर्थिक क्रियाकलापों का केन्द्रबिन्दु गैर सरकारी संगठन हो गये हैं इसलिए सरकार की भूमिका अब और महत्वपूर्ण हो गयी है. निश्चित तौर पर वित्तमंत्री का इशारा कारपोरेट घरानों की ओर है ताकि कंपनियां बेलगाम न हो सकें. वित्तमंत्री ने अपने बजट भाषण की शुरूआत करते हुए यह भी कहा कि बजट सिर्फ सरकारी आय व्यय का लेखा जोखा नहीं हो सकता. इसमें सरकार की भावी योजनाएं और नीतियां भी परिलक्षित होती हैं.

अपने बजट का सिंहावलोकन प्रस्तुत करते हुए वित्तमंत्री ने कहा कि उम्मीद से ऊंची सकल घरेलू उत्पाद दर में बीती तिमाही में 7.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी है. उन्होंने उम्मीद व्यक्त की यह आगे भी 7.2 प्रतिशत बनी रहेगी. उन्होंने कहा कि इंद्रदेव मेहरबान नहीं रहे हैं जिसके कारण कृषि विकास दर में नकारात्मक वृद्धि हुई है फिर भी सकल घरेलू उत्पाद की यह वृद्धि दर हासिल हुई है. उन्होंने कहा कि खाद्यान्न कीमतों में बढ़ोत्तरी को लेकर सरकार पूरी तरह से सचेत है और राज्यों के मुख्यमंत्रियों से सलाह मशविरा करके अनेक कदम उठाये हैं. उन्होंने अपने बजट भाषण में उम्मीद व्यक्त की कि इन उपायों के कारण अगले कुछ महीनों में परिणाम दिखने लगेंगे और खाद्यान्न सुरक्षा का बेहतर प्रबंधन किया जा सकेगा.

अपने बजट भाषण में वित्तमंत्री ने माना कि भारत एक विकासशील और जटिल अर्थव्यवस्था है और इसका प्रबंधन कठिन कार्य है. इस दिशा में बड़ी घोषणा करते हुए वित्तमंत्री ने कहा कि भारत में कर ढांचे को सरल बनाने के लिए लंबे समय से प्रयास किये जा रहे थे जो अब पूरी होने को है. नयी कर प्रणाली आगामी 1 अप्रैल 2011 से लागू हो जाएगी. उन्होंने कहा कि नयी प्रत्यक्ष कर संहिता लागू होने के साथ ही साथ उनकी कोशिश होगी कि वस्तु एवं सेवा कर एक समान व्यवस्था को भी लागू किया जाए.  वित्तमंत्री ने विनिवेश को बढ़ावा दिये जाने की घोषणा करते हुए कहा कि इस वित्तीय वर्ष में 25,000 करोड़ रुपये विभिन्न कंपनियों में विनिवेश के जरिए जुटाएगी. अपने उर्वकर नीति का बचाव करते हुए उन्होंने यूरिया पर सब्सिडी कटौती को जायज ठहराते हुए पोषक तत्व पर सब्सिडी की वकालत करते हुए किसान को सीधे फायदा पहुंचाने की बात कही है. वित्तमंत्री ने अपने बजट भाषण में बताया कि हालांकि एफडीआई में मामूली गिरावट आयी है लेकिन इसका सतत प्रवाह बना हुआ है. कारपोरेट गवर्नेन्स में सुधार के लिए उन्होंने कहा कि नया विधेयक संसद में प्रस्तुत कर दिया गया है जो कि कंपनी अधिनियम 1956 का स्थान लेगा.

वित्तमंत्री ने विवादास्पद परियोजना एसईजेड को बढ़ावा देने की वकालत करते हुए कहा कि सरकार सेज को बढ़ावा देगी ताकि विदेशी निवेश आकर्षित हो रोजगार का सृजन हो. सेज को बढ़ावा देने के साथ ही उन्होंने कृषि के लिए चार स्तरीय कार्ययोजना का ऐलान करते हुए कहा कि कृषि उत्पादन में बढ़ोत्तरी, उत्पाद की बर्बादी में कमी, किसानों को ऋण सहायता और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र पर जोर दिया जाएगा. कृषि क्षेत्र में जल परियोजनाओं और मिट्टी सुधार के लिए उन्होंने क्रमश: तीन सौ और दो सौ करोड़ रुपये आवंटित करने की घोषणा की. उन्होंने कृषि उत्पादों के भण्डारण को भी बेहतर करने की वकालत की है.

आधारभूत ढांचे के विकास के लिए सरकार ने भारतीय आधारभूत संरचना वित्त कंपनी लिमिटेड के स्थापना की है. वित्तमंत्री ने बताया कि इस कंपनी के द्वारा आधारभूत क्षेत्र की परियोजनाओं को बैंक ऋण से वित्त पोषण करने हेतु अधिकृत किया गया है. अपने बजट भाषण में उन्होंने सोलर एनर्जी के विकास पर खासा जोर दिया और 2022 तक बीस हजार मेगावाट सोलर एनर्जी के लक्ष्य को प्राप्त करने का संकल्प दोहराया. हालांकि वित्तमंत्री ने कई ऐसी घोषणाएं की जिससे उनके समाजवादी संकल्प को बल मिलता है लेकिन जैसे उन्होंने पेट्रोलियम पदार्थों पर बुनियादी शुल्क को बहाल करने की घोषणा की सदन में हंगामा मच गया. वित्तमंत्री ने इसके साथ पेट्रोल तथा डीजल पर प्रति लीटर एक एक रूपया उत्पाद शुल्क बढ़ाने की भी घोषणा की.बजट के आखिर में आम आदमी को अपना बजट समर्पित करते हुए प्रणव मुखर्जी ने कहा कि "यह बजट आम आदमी का है. यह किसानों, उद्यमियों और निवेशकों का है.....मैंने राष्ट्र के सामूहिक विवेक पर भरोसा किया है जिसका आगामी वर्षों में अकल्पनीय ऊचाईं पर पहुंचने के लिए सहारा लिया जा सकता है." इसके साथ ही उन्होंने अपना बजट भाषण सदन के माध्यम से देश को समर्पित कर दिया.

(पूरा बजट भाषण आप नीचे लिंक से डाउनलोड कर सकते हैं.)

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V.K. on 26 February, 2010 16:45;32
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ye congress sarkar is desh k aam aadami ki dusman hai videshiyon k hatho men khel rahi hai aam aadami ka khoon choos rahi hai or videshiyon ka or apana ghar bhar rahi hai ye mantri nahin hai ye to sab sattebaj vyapari hai jo aam aadami ko vot dene ki saja de rahe hain is sarkar ko jitana jaldi ukhad fankange to hi aam aadami ki jan or ijjat dono bachegi soniya ne to bandaron k hatho men ustara de k apana peecha chuda liya hai \ congress ka hath aam aadami k nivale or gireban dono pr hai
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अहमक on 26 February, 2010 17:03;59
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किस दर्जे के अक्लमंद हो मंया? यह तो मेरे जैसा अहमक भी समझ चुका है कि सरकार ने इस बजट में गरीबों की पूरी पुंगी बजा दी और तुम इस आम आदमी का कह रहे हो?

पेट्रोल के भाव 2.5 रुपये बढ़ गये यह क्या अम्बानी देगा? सब तेरे-मेरे जेब से जायेगा. देखियो अभी महंगाई किधर जाती है.

और सुनो ये तुर्रा... अमीर लोगों को टेक्स छूट, तीन की जगह पांच लाख तक दस प्रतिशत टेक्स. मतलब अगर तुम्हारी आमदनी तीन लाख से ज्यादा है तो फायदा हुआ, कम हुआ तो वही ठन-ठन.

और ये सुनो कि नरेगा में अपने चमचों की पौ-बारह करने के लिये उन्हें इस्पेशल गिफ्ट में पैसे जादा!

क्या खिलाया मंया कांग्रेस ने तुमई कि तुमको यह बजट आम आदमी का नजर आता है?

भाई पढ़ तो लो जी अपने ही लिंक को...

क्या बकवास लिखरे हो मंया!
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working editor on 26 February, 2010 17:53;48
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यह सिर्फ खबर है बजट का विश्लेषण नहीं और अपने बजट में वित्तमंत्री ने बजट को आम आदमी को ही समर्पित किया है इसलिए यह हेंडिग लगाई गयी है.
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Ajit on 26 February, 2010 18:33;24
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निहायत ही गैर जिम्मेदाराना, बेव्कोफाना और लोगो को और जनता को बहकाने वाला लेख, प्रत्यक्ष दिखाई पडता है की किस तरह आल इंडिया करप्ट कांग्रेस का कोई मेंबर या नेता इसे लिख रहा हो, विस्फोट के संपादक मंडल को ऐसे लेखको पर ध्यान देना चाहिए .
और लेखक महोदय आपने शायद समाजवाद शब्द सुना है..उसे समझा या पढ़ा नहीं है जाइए और पढ़िए.किस तरह इस बजट में आम आदमी का कचूमर और निकलने की व्यवस्था कर दी गयी है..पेरोल और डीजल के दाम बढ़ाये गए है, जो अनिवार्यतः कई और चीजोके दाम बढाने के बहाने बनेंगे..क्युकी इनके महंगा होने से ट्रांसपोर्ट, सिंचाई, महंगा गोगा जिसका सीधा और सबसे तेज मार आम आदमी को पड़ने वाली है..

महंगाई पर फिर हमेशा की तरह बहानेबाजी की आने वाले कुछ महीनो में ये नीचे आएगी, ओ की हम पिछले कई सालो से सुनते आ रहे है और वो दिन नहीं आया, और आएगा भी नहीं 2013 के पहले, हा उसके पहले कोई
बड़ा जन विस्फोट या विद्रोह हो जाय तो अलग तो अलग बात है..

और तो और आज पहली बार आम जनता के हित
के ऐतिहासिक रूप से इकट्ठे हुए विपक्ष को भी संसदीय मर्यादा को ठेस पहुचने का आरोप जड़ दिया..वाह भाई बेशर्मी हो तो ऐसी..

और श्रीमान यदि ये खबर है विश्लेषण नहीं तो कृपया ऐसी खबरे न छपे जो जनता को गुमराह करे..ये काम पालतू मीडिया और सरकार के भोपुओं पर छोड़ दे विस्फोट को बख्शो यार .
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Samar Singh on 27 February, 2010 00:05;45
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क्या बात है संजय बाबू, आप भी चले कोंग्रेस का गुणगान करने. ..? खैर आप कुछ भी लिखने को स्वतन्त्र हैं, लेकिन प्लीज सच को झूठ ना करे तो आपकी विश्वसनीयता बनी रहेगी. इस बजट को आम आदमी का बजट वो ही कह सकता है जो या तो कोंग्रेसी हो या जो समाजवाद का मखौल उड़ाना चाहता हो.
पेट्रोल के दाम बढाए हैं, डीजल के दाम भी बढायें हैं. जो कोंग्रेस राज में लगातार बढ़ रहे हैं. और तेल के यही दाम महंगाई बढाते हैं.
विदेशो से आयात की गयी दाले बंदरगाहों पर सड़ रही हैं. चीनी मिलो पर शरद पंवार कुण्डली जमाये बैठे हैं और जनता को 'शक्कर नहीं खाओगे तो मर नहीं जाओगे' की सीख दे रहे हैं.
रू. १६०,००० से ३००,००० कमाने वालो को सरकार ने कर रियायत की सौगात दी है. इस ब्रैकेट में कौन आता है आप जानते ही हैं.
० से १६०,००० तक की सीमित आय वाले आम आदमी को तो सरकार ने ठेंगा ही दिखाया है. फिर यह कैसे आम आदमी का बजट हो गया.
आशा है आप इस बजट पर पुनर्विचार करेंगे और जनता के सामने इसका असली सच रखेंगे. बाकी आपकी मर्जी.
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