पटना निगल जाता है आधा बिहार
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हमेशा से यह कहते हुए केंद्र पर अनदेखी का आरोप लगाते रहे हैं कि बिहार का विकास किए बगैर देश विकसित नहीं हो सकता, मगर जब बात उनके अपने राज्य की आती है तो संभवत: यह तर्क वे भूल जाते हैं और विकास की बड़ी राशि पटना में ही खर्च कर डालते हैं, भले भागलपुर, पूर्णिया या सुपौल जैसे जिले पिछड़े ही रह जाएं।
अभूतपूर्व विकास और सुशासन के दावे के दम पर वे बिहार में दुबारा सत्ता की कमान हासिल करने के लिए जी तोड़ कोशिश कर रहे हैं। मगर विकास की प्रक्रिया चलाते हुए उनकी सरकार ने जो अनोखी मिसाल पेश की है उससे उसके कट्टर समर्थक भी असहमत होंगे। दरअसल एक हालिया सर्वेक्षण के मुताबिक उनकी सरकार ने राज्य में खर्च हुई विकास राशि का 44 फीसदी हिस्सा अकेले राजधानी पटना में ही खर्च कर डाला है। यह आंकड़ा निश्चित तौर पर उनके विरोधियों के लिए भी संजीवनी साबित होने वाला है जो अब केंद्रीय सांख्यिकी संगठन के उस आंकड़े से सहमे हुए थे, जिसके मुताबिक राज्य ने उनके शासनकाल में 11.3 फीसदी की वृद्धि दर हासिल करने में कामयाबी हासिल की थी।
2009-10 के लिए हुए स्टेट इकानामिक सर्वे के मुताबिक अब तक केंद्र सरकार पर उपेक्षा का आरोप लगाने वाले बिहार में आंतरिक स्तर पर क्षेत्रीय असमानता की स्थिति कहीं अधिक गंभीर है। सर्वे के मुताबिक पटना जिले की औसत प्रतिव्यक्ति आय 37,737 रुपये प्रतिवर्ष है। जबकि इसके बाद राज्य में दूसरे स्थान पर रहने वाले जिले मुंगेर के लोगों की प्रतिव्यक्ति औसत आय सिर्फ 12,370 रुपये है। इसके बाद बेगुसराय का नंबर आता है जिसकी औसत आय 10,409 है। सबसे पिछड़े तीन राज्यों में जमुई (5,516रु.), अररिया(5,245रु.) और शिवहर (4,398रु.) है।
पटना जिले की आबादी राज्य का सिर्फ 5.7 प्रतिशत है, जबकि क्षेत्रफल 3.4 प्रतिशत। जबकि राज्य में विकास कार्यों के लिए व्यय हुए धन का 44 प्रतिशत सिर्फ इसी जिले में खर्च हुआ। राज्य के 38 जिलों में सर्वाधिक प्रति व्यक्ति व्यय भी 29,390 रुपये भी यहीं का है, जबकि राज्य का औसत प्रति व्यक्ति व्यय सिर्फ 3,821 रुपये है।
राज्य के मौजूदा बजट का भी बड़ा हिस्सा पटना हड़प कर गया है। प्राथमिक शिक्षा के क्षेत्र में इस जिले को प्रति व्यक्ति 3,867 रुपये हासिल हुए हैं, जबकि इस क्षेत्र में राज्य का औसत सिर्फ 425 रुपये है। वहीं स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर पटना को प्रतिव्यक्ति 752 रुपये हासिल हुए हैं, जबकि राज्य का औसत 1०6.92 रुपये है। स्वच्छता अभियान के अंतर्गत पटना को प्रति व्यक्ति 55.4 रुपये आवंटित किया गया, जबकि राज्य का औसत 6.4 रुपये है। अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ों के विकास के नाम पर पटना को 87.46 पैसे प्रति व्यक्ति मिले, जबकि इस मद में राज्य का औसत सिर्फ 23.32 रुपये है।
अगर आंकड़ों को दूसरे तरीके से देख्ों तो विषमता और अधिक कटु लगने लगती है। जैसे पटना को स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए 410 करोड़ रुपये आवंटित किए जाते हैं, जबकि शिवहर जिले को सिर्फ 2.9 करोड़। पेयजल के लिए इस पिछड़े जिले के हिस्से में कोई राशि नहीं डाली जाती। तकरीबन यही स्थिति अरवल, नवादा और लखीसराय जिले की है। 38 में से 6 जिलों को इस मद में कोई राशि आवंटित नहीं की गई है। ये आंकड़े 2008-09 के वित्तीय वर्ष के हैं।
इस मामले में सरकार के विरोधी कहते हैं कि दरअसल नीतीश पटना को चमकाकर रखना चाहते हैं ताकि बाहर से आने वाला हर व्यक्ति यह राय ले कर लौटे कि बिहार में सचमुच विकास हो रहा है। जबकि राजधानी से बाहर कैसा विकास हो रहा है, उसकी गवाही तो ये आंकड़े दे ही रहे हैं। ऐसे में केंद्रीय सांख्यिकी संगठन के 11.3 प्रतिशत वृद्धि दर वाले आंकड़े के सहारे चुनाव जीतने को आश्वस्त दिख रहे नीतीश के गले कहीं यह दूसरा आंकड़ा न पड़ जाए इस बात की आशंका बलवती होने लगी है।
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EK SAHSIK AUR EYE OPENER LEKH KE LIYE.
Patna Bihar ka dusra, Hydrabad banta ja raha hai,
AIIMS, Patna Me,
Chandragupta Law Institute Pana me,
IIT, IIM,
Sab kuch Patna me,
MITHILA ki puri tarah upeksha,
Cabinet meeting bhi Rajgir me, Tharmal Power BADH me, kaha tak ginau.
MITHILA ke hisse sirf BADH, BHUKH aur BEROJGARI,
ISKE LIYE BIHAR SARKAR AUR KENDRA SARKAR SE JYADA
MITHILAVASI JIMMEVAR HAIN,
JO na sirf apne adhikar ke prati janbujhkar anjan bane hain,
BIHAR ke MOHPAS ME BANDHE HAI,
VIKAS KA EKMATRA RASTA apne RAJYA SE AYGA.
MITHILA RAJYA, KE LIYE SANGHARSH KA WAQT AA GAYA HAI.
JAGO MAITHIL JAGO
It shows that 1. the region is poor in Bihar and, 2. that in last 44 years the per capita GDP of the region has went down from 68% of National average to 19%.
Similarlly, in education as per 2001 census, the literacy rate of Mithila region is 42.5% while Bihar-47.53%, Bihar excluding Mithila-55% and National-65.2%. In the case of higher education, last university opened in Mithila region was BN Mandal University in Madhepura in 1992. In last 18 years not a single university, Technical institute, has been opened in this region. Not a single centrally sponsored Institute has been given to the region like IIT, IIM, AIIMS, Central University, Law University, etc. The Nation has 471 Universities which stands one university for 23.5 lakh (Approx) population, Bihar excluding Mithila has one university for 44 lakh population while for Mithila region has one university for 86 lakh(Approx) POPULATION.
Still Central Govt and State Govt playing game for the rehabilitation work of Koshi Flood 2008 effected people.
Rise O Maithils,
Biharis political leaders are biased and not interested to develop mithila reason. Your views are absolultly right and those who reads this sotory can become interested to join in our fighting battle for another mithila raj. only mithila raj is solution for the better development. Thare are lots of intelegency are in mithila but bihari neta or mithila's political leaders are also not interested to use that polotics for the growth. Ofcourse bihar has occupied second place according to statistical data but where is growth. When i am visiting from delhi to my native place all the road and educational intitute,unemployment problame are same. growth on paper is right but it is nacessry that frowth shoud be on peoples mind.
वैसे आपकी जानकारी के लिए मैं भी मिथिलांचल से ही हूँ..
AAP NAKARATMAK SOCH KE DHANI HAI,
AAPKO JHARKHAND DIKHTA HAI,
LEKIN UTTRANCCHAL, CHHATISGADH NAHI DIKHA, JISNE ALAG HONE PAR VIKAS KA KIRTIMAN STHAPIT KIYA HAI.
EK BAAT AUR KITNA BHI MEDIA YA AAP BOL LEN,
JHARKHAND NE BHI TARAKKI KIYA HAI.
AUR AAP KE MAJAK UDANE SE MITHILA RAJYA NIRMAN NAHI RUKEGI.
BADH SE MUKTI, ASMITA AUR VIKAS KE LIYE MITHILI JARURI HAI, AUR BANEGI HI.
तीन दिनों तक गांधी मैदान में दिखेगा बिहार
Mar 22, 12:04 am
पटना ऐतिहासिक गांधी मैदान में बिहार दिवस समारोह की तैयारी पूरी हो चुकी है। समारोहस्थल सजधज कर दुल्हन की तरह तैयार हो गया है और झांकियों को अंतिम रूप दिया जा चुका है। अगले तीन दिनों तक होने वाले रंगारंग समारोह का पूर्वाभ्यास रविवार की देर शाम तक चला जिसमें राज्यभर के चुनिंदा कलाकारों ने जमकर पसीना बहाया। इस मौके पर विदेशी मेहमानों ने भी रिहर्सल का आनंद उठाया। राज्य सरकार के कई पदाधिकारियों ने बिहार दिवस की तैयारी का जायजा लिया।
बिहार दिवस के उपलक्ष्य पर ऐतिहासिक गांधी मैदान प्रदेश की सांस्कृतिक, धार्मिक, शैक्षणिक एवं ऐतिहासिक विरासत की झलक अगले तीन दिनों तक दिखेगी। सचिवालय, पावापुरी जल मंदिर, राजगीर का बौद्ध स्तूप, बोधगया का महाबोधि मंदिर का प्रतिरूप बन कर तैयार है। समारोह स्थल के ठीक सामने पावापुरी का जल मंदिर है। सर्वधर्म समभाव के रूप में यहां मंदिर, मस्जिद, चर्च और गुरुद्वारे बनाये गये हैं। मंदिर में मार्यादा पुरुषोत्तम राम होंगे, मस्जिद में मजार, गुरुद्वारे में गुरु गोविंद सिंह एवं चर्च में ईसा मसीह विराजमान होंगे। इन चारों के बीच में महात्मा बुद्ध की नौ फुट की प्रतिमा स्थापित की गयी है। समारोह में नालंदा के खंडहर, सात शहीद व अन्य कई एतिहासिक धरोहरों को भी पेंटिंग के माध्यम से प्रदर्शित किया जायेगा। पश्चिमोत्तर भाग में बिहार की ऐतिहासिक झांकी दिखाने के लिए एक गैलरी होगी, जिसमें गुफा से प्रवेश होगा। यह गुफा भव्य तरीके से तैयार किया जा रहा है। इस परिसर में चंद्रगुप्त, अजातशत्रु व शेरशाह की सात-सात फुट ऊंची मूर्ति भी लगेगी। इसके लिए किलकारी के बच्चों के लिए कमल फूल की आकृति लिए मंच बनाया जा रहा है, जिस पर छोटे-छोटे बच्चे तीन दिनों तक अपना कार्यक्रम पेश करेंगे। समारोह स्थल पर शहीद स्मारक, वैशाली स्तूप, मधुबनी पेंटिंग, पटना कलम शैली, आर्यभट्ट नगर, तारेगना, नालंदा व विक्रमशिला विश्वविद्यालय के अलावा सम्राट अशोक, डा. राजेन्द्र प्रसाद, डा. सच्चिदानंद सिन्हा, भिखारी ठाकुर, रामधारी सिंह दिनकर, फणीश्वर नाथ रेणु, नागार्जुन, शिवपूजन सहाय आदि को कटआउट, पोस्टर व प्रदर्शनी के माध्यम से दिखाया जायेगा।
रविवार को कमल के आकृति के मंच पर बच्चों एवं कलाकारों ने फाइनल रिहर्सल किया। बिहार दिवस के गवाह बनाने की हसरत के संग बिहार पहुंचे कई विदेशी मेहमान आज ही गांधी मैदान पहुंच गये। बच्चों को रिहर्सल करते देखकर वे खुद नहीं रोक सके और थिरकने लगे। कई पदाधिकारी सुबह से ही गांधी मैदान में मोर्चा संभाल लिये थे और समारोह की तैयारी लेने में व्यस्त रहे।
LINK- http://in.jagran.yahoo.com/news/local/bihar/4_4_6275461.html
IS PUR AAYOJAN ME AAP MITHILA, VIDYAPAT,
LORIK, SALHESH, SITA, SITAMARHI KO DUNDH LEN.
DHUNDHTE RAH JAOGE,,,,,,,,,,,,,,
AB SOCHNE KA SAMAY MITHILAVASIYON KA HAI
Because of the people like you not a single time in independent India, Mithila region has touched the average per capita income of India. In 1965 the PCI of Mithila region was almost 70% of average PCI of India, now it is 19% of India. Jhakhand is still far better than Bihar. If you see the statistics. A person like you, don't want developed Mithila region as the politicians of India. If the governments would have serious about the region then at list they would have started work on rehabilitation for Koshi flood 2008 effected more than 33 lakhs people. I wonder that how people can be so insensitive for the people of one region while at the same time such person can be much sensitive for the people of other region? what persons like you are giving the logic the same has been tough by the central as well as state govts my dear friend!
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