शेयर बाजार को ले डूबेंगी डब्बा कंपनियां
शेयर बाजार की नियामक संस्था सेबी ( सेक्योरिटी एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया) के ठीक नाक के नीचे काले धन को सफेद करने का कारोबार धड़ल्ले से जारी है । डब्बा कंपनियों के माध्यम से इसे अंजाम दे रहे हैं डब्बा ट्रेडर्स। दरअसल डब्बा ट्रेडर्स एक ऐसे कुख्यात कारोबारी तरीके का नाम है जो काले धन को सफेद करने का कारोबार धड़ल्ले से कर रहे हैं ।
ये अवैध कारोबारी एक तरफ सरकार को करोड़ो के टैक्स का चूना लगा रहे हैं वहीँ दूसरी तरफ भोले-भाले निवेशकों को अपने चंगुल में फँसाकर उनके जीवन भर की गाढ़ी कमाई को लूट लेते हैं जिसके कारण निवेशक आत्महत्या तक करने को मजबूर हो जाते है । डब्बा कंपनी का मतलब ऐसी कंपनियों से होता है जो सिर्फ कागज पर होती हैं न तो इनका कार्पोरेट ऑफिस होता है और न ही ऑपरेशनल ऑफिस । सीधे शब्दों में इन्हें हम फर्जी कंपनियां कह सकते है । इन कंपनियों के शेयरों की ट्रेडिंग करते है डब्बा ट्रेडर्स । यही इन डब्बा कंपनियों के शेयरों के ट्रेडिंग के वाहियात कारोबार के माध्यम से काले धन को सफेद धन में तब्दील करते है । इनका ऑफिस भी नियमानुसार काम करने वाले शेयर ब्रोकर के ऑफिस की तरह ही होता है । फर्क केवल यह होता है कि जहां शेयर ब्रोकर अपने निवेशकों के सभी सौदों को शेयर बाज़ार के नियम के अनुसार निपटाते है वही ये डब्बा ट्रेडर्स सौदों को केवल अपने लेखों में दर्ज करता है तथा इन सौदों को शेयर बाजार के नियमों से कोई मतलब नहीं होता है । ये रजिस्ट्रेशन, मार्जिन, अंतरण, सौदा निपटान आदि कानूनों का पालन नहीं करते है ।
काले धन को सफेद करने का इनका तरीका बड़ा ही अनोखा है। इन डब्बा ट्रेडर्स के पास कंपनी का लगभग 95% इक्विटी रहती है । डब्बा ट्रेडर्स अपने शेयर्स को ऐसे व्यक्ति को बेचता है जिसे अपने काले धन को सफेद करना है । यह पूरा खेल लांग टर्म गेन (एल.टी.जी.) के नाम से खेला जाता है । उदाहरण के लिए डब्बा ट्रेडर्स से काले धन को सफेद बनाने का इच्छुक व्यक्ति 10 रूपये प्रति शेयर के मूल्य से 10,000 शेयर खरीदता है । डब्बा ट्रेडर्स द्वारा इन सौदों को केवल लेखों में दिखाया जाता है और इसे लांग टर्म गेन ( एल.टी.जी) का नाम दिया जाता है । सौदे के दिन से ठीक 13 महीने बाद डब्बा ट्रेडर्स सभी 10,000 शेयरों को स्वयं 60 रूपये के भाव से खरीद लेता है, जिससे काले धन को सफेद करने वाला फर्जी निवेशक 5,00,000 रूपये का शुद्ध मुनाफा दिखाता है । इस तरह इस फर्जी निवेशक का 5,00,000 रूपये का काला धन सफेद धन में बदल जाता है । अब यह फर्जी निवेशक डब्बा ट्रेडर्स को कुल 5,00,000 रूपये के काले धन को सफेद करने के एवज में लगभग 6 % प्रतिशत सेवा शुल्क (यानि कमीशन) देता है जो कि कुल 30,000 रूपये बैठता है ।
बाम्बे स्टाक एक्सचेंज में पंजीकृत (लिस्टेड) कुल कंपनियों में से लगभग 5% कंपनियां इस वाहियात कारोबार में लांग टर्म गेन ( एल.टी.जी) के नाम पर काले धन को सफेद करने के अवैध कारोबार में लिप्त हैं, जिसमें कुछ कंपनियों के नाम मसलन- रोज लैब, गंगोत्री आयरन स्टील, इंडिया होम, पंजाब कम्युनिकेशन, अनिल स्पेशल स्टील, थिंक्स ऑफ ग्लोबल, कैलाश फिकॉम लिमिटेड तथा सपन केमिकल है । इन कंपनियों के नाम सूत्रों के माध्यम से जानकारी में आये हैं । बता दें कि सपन केमिकल पहले सूर्यदीप साल्ट लिमिटेड के नाम से इस फर्जी कारोबार में लिप्त थी, किन्तु सूर्यदीप साल्ट लिमिटेड अब सपन केमिकल के नाम से बाजार में अवैध कारोबार कर रही है ।
इस खेल में केवल काले धन को सफेद ही नहीं किया जाता बल्कि टैक्स बचाने के लिए सफेद धन को काला भी किया जाता है । उदाहरणस्वरूप अगर पहली तिमाही में कोई कंपनी या व्यक्ति 50,00,000 रूपये का मुनाफा कमाया है तो उसे लगभग 16,50,000 रूपये टैक्स भरना चाहिए किन्तु उस कंपनी या व्यक्ति को इतना टैक्स नहीं भरना है तो वह कंपनी या व्यक्ति डब्बा ट्रेडर्स से किसी डब्बा कंपनी (फर्जी कंपनी) का 1 लाख शेयर 60 रूपये प्रति शेयर के मूल्य से खरीदता है और थोड़े दिनों के बाद उस शेयर को उसी डब्बा ट्रेडर्स को २० रूपये प्रति शेयर के हिसाब से बेच देता है जिससे उस कंपनी या व्यक्ति को प्रति शेयर 40 रूपये का नुकसान होता है यानि उस 50,00,000 रूपये के निवेश में तथाकथित निवेशक को 40,00,000 रूपये का नुकसान हो जाता है । अब उसको केवल 10,00,000 का ही टैक्स यानि लगभग 3,30,000 रूपये टैक्स भर कर पीछा छूट जाता है इस तरह वह कंपनी या व्यक्ति 13,20,000 रूपये का सरकार को टैक्स का चूना लगा देते हैं ।
इन डब्बा कंपनी चलाने वाले लोगों को जब आम निवेशक को लूटना होता है तो ये माउथ पब्लिसीटी, अखबार, इलेक्ट्रानिक मीडिया के माध्यम से कंपनी के बारे में अफवाह फैलाते है बताया जाता है कि ये लोग अख़बारों और इलेक्ट्रानिक मीडिया में पेड न्यूज चलवाते हैं जैसे- कंपनी को करोड़ों का आर्डर मिला है, कंपनी दूसरी कंपनी को टेकओवर कर रही है, कंपनी राईट इश्यू लाने जा रही है, कंपनी निवेशकों को डिविडेंड देगी, कंपनी निवेशकों को बोनस देगी आदि इस तरह के समाचारों के माध्यम से भोले-भाले निवेशकों को फंसाते हैं डब्बा कंपनी के शेयरों के माध्यम से निवेशकों से पैसे लेकर कंपनियां गायब हो जाती हैं मामला ठंडा होने के बाद ये डब्बा कंपनियां अपना नाम बदल कर वापस बाजार में आ जाती हैं । इन डब्बा कंपनियों और डब्बा ट्रेडर्स के आपराधिक कृत्य के बारे में सेबी (सेक्योरिटी एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया) किसी तरह की कोई जाँच-पड़ताल या कार्रवाई नहीं करती जिसके कारण ये डब्बा कंपनियां और डब्बा ट्रेडर्स सरकार को करोड़ों के टैक्स का चूना लगाते हैं और भोले-भाले निवेशकों को ठगते रहते है । इनपर कार्रवाई इसलिए नहीं होती क्योंकि ये डब्बा ट्रेडर्स नेताओं के काले धन को सफेद करने का काम करते है बदले में नेताओं द्वारा इन अवैध कारोबारियों को संरक्षण दिया जाता है । क्या इन अवैध कारोबारियों के नेक्सेस को जो कि शेयर बाजार में घुन की तरह लगे हुए हैं, कभी तोड़ा जा सकता है ?
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13 महीने बाद ख़रीदने की मुनासबत यह है कि इनकम टेक्स एक्ट के सेक्शन 10(38) के अनुसार शेयरों के बेचने से होने वाले लांग टर्म केपिटल गेन पर टेक्स माफ़ होता है। सेक्शन 2(42ए) के अनुसार शेयर जब 12 महीनों से ज़्यादा रखा जाए तो उसको लांग टर्म केपिटल असेट माना जाता है जिसे बेचने से होने वाले फ़ायदे को लांग टर्म केपिटल गेन या लॉस कहते हैं।
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