तेल के नाम पर खतरनाक खेल
हम सभी को समझना होगा कि भारत में एक लीटर पेट्रोल की कींमत ५३ रूपये है ऐसा क्यों? और सरकार लगातार पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में बढ़ोत्तरी करती जा रही है. आखिर तेल के नाम पर अपने देश के हुक्मरान कौन सा खतरनाक खेल खेल रहे हैं?
५ जुलाई को विपक्षी दलों नें भारत बंद का आयोजन किया, मुख्य मुद्दा था सरकार द्वारा पेट्रोलियम पदार्थों के बेतहासा दाम बढ़ाया जाना. विपक्षी दलों नें इस भारत बंद को बेहद सफल बताया तो कार्पोरेट संस्था एसोचेम नें इस बंद के कारण १० ००० करोड़ रूपये के अनुमानित नुकसान होने की बात कही, वही पेट्रोलियम मंत्रालय जो कि मूल्य वृद्धी के पहले सार्वजनिक पेट्रोलयम कंपनियों के घाटे का रोना रोती है, उन्होंने करोड़ों रूपये का मीडिया को विज्ञापन देकर आम जनता को यह बताने की कोशिश की कि पेट्रोलियम पदार्थों के कीमतों का बढ़ाया जाना गलत नहीं है. इन सबके मद्देनजर आम जनता अवाक् होकर यह ड्रामा देखती रही. उसे पता है कि अब महंगाई कम होने वाली नहीं है. आश्चर्य तो यह है कि देश का प्रबुद्ध वर्ग इस पेट्रोलियम मूल्य वृद्धी घोटाले पर अवाक् है या नहीं यह तो नहीं पता लेकिन चुप जरूर है. संभव है कि आगे चलकर पेट्रोलियम पदार्थों की मूल्य वृद्धि " पेट्रोलियम पदार्थ मूल्य वृद्धी घोटाला" के नाम से जाना जाये यह मूल्य वृद्धी हमें "पन्ना-मुक्ता-तेलक्षेत्र'' घोटाले की याद दिला रहा है जिसमें सरकार नें लगभग पूरा का पूरा तेल क्षेत्र मुफ्त में निजी कंपनियों को दे दिया. पन्ना-मुक्ता-तेलक्षेत्र का पता लगाने हेतु सारी मेहनत ओएनजीसी नें की थी किन्तु सरकार नें अपनी ही कंपनी को निकम्मा साबित करते हुए रिलायंस को काबिल बताया.
पिछले दिनों रिलायंस नें पूरे देश में १४३२ और एस्सार नें ११०० पेट्रोल पम्प खोले थे किन्तु भारत सरकार की तरफ से लगातार पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में इजाफे के कारण उक्त निजी कंपनियां सार्वजनिक क्षेत्र की तीनों कंपनी इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम लिमिटेड और भारत पेट्रोलियम लिमिटेड को सरकार के तरफ से सरकारी अनुदान मिल रहा था. वर्ष २००७-०८ में इसी वजह से रिलायंस को ८०० करोड़ रूपये का घाटा उठाना पड़ा. और रिलायंस को पेट्रोल पम्प बंद करने का निर्णय लेना पड़ा किन्तु रिलायंस पेट्रोल पम्प का डीलरशीप लेने वाले व्यापारी लगातार रिलायंस पेट्रोलियम के प्रबंधन पर “रिलायंस पेट्रोल पम्प डीलर्स एसोसियेशन” के बैनर तले दबाव डालते रहे कि या तो कंपनी फिर से पेट्रोल पम्पों को शुरू करने का तरीका ढूढे अथवा पेट्रोल पम्प डीलर द्वारा रिलायंस के पेट्रोल पम्पों में किये गए निवेश को वापस करे. इधर डीलर मालिकों और संचालकों (डीओडीओ) नें मिलकर एक प्रस्ताव पारित किया था कि भूमि के पट्टे को रद्द कर पेट्रोल पम्पों में लगे उपकरणों को बाजार के कीमत पर कंपनी खरीदे अथवा पेट्रोल पम्प फिर से शुरू कराए. सूत्रों के अनुसार रिलायंस समूह के अध्यक्ष परिमल नाथवानी नें “रिलायंस पेट्रोल पम्प डीलर्स एसोसियेशन” से इस समस्या के समाधान के लिए कुछ समय ( ६ माह ) माँगा था. अगर रिलायंस के पेट्रोल पम्प को सुरू करने जैसे समाधान पर विचार करें तो वह केवल और केवल सरकार द्वारा पेट्रोलियम पदार्थों पर से सब्सिडी हटवाने के शिवाय और कुछ था ही नहीं. रिलायंस नें एक वर्ष में करीब ४० लाख टन डीजल बेंचकर बाजार के १५ प्रतिशत हिस्से पर कब्जा बना लिया था किन्तु कंपनी को कच्चे तेल के अंतर्राष्ट्रीय बाजार में उछाल के बीच सरकार नियंत्रित मूल्य पर डीजल, पेट्रोल बेंचना घाटे का सौदा हो गया था. अतः रिलायंस के पेट्रोल पम्प फिर से शुरू करने हेतु पेट्रोलियम पदार्थों से सब्सिडी हटाकर बाजार के नियंत्रण पर छोडना जरूरी था.
यह हम सभी को समझना होगा कि भारत में एक लीटर पेट्रोल की कींमत ५३ रूपये है ऐसा क्यों? भारत में एक लीटर पेट्रोल की लगत १६.५० रूपये पड़ती है. एक लीटर पेट्रोल पर ११.८० रूपये केन्द्रीय कर, ९.७५ रूपये एक्साईज ड्यूटी, ८ रूपये से लेकर १२ रूपये प्रति लीटर राज्य सरकारों का कर और ४ रूपये सेस वसूला जाता है. इन आंकड़ों को देखते हुए सरकार की दलील पर कैसे यकीन किया जा सकता है कि सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों को घाटा हो रहा है. रिकार्ड बताते है कि वर्ष २००८-०९ में इन्डियन आयल कार्पोरेशन को २९५० करोड़ रूपये का शुद्ध मुनाफा हुआ, ३१ मार्च २०१० को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष में आईओसी को शुद्ध मुनाफा १०९९८ करोड़ रूपये हुआ, एचपीसी और बीपीसी नें क्रमशः ५४४ और ८३४ करोड़ रूपये का शुद्ध मुनाफा कमाया वर्ष २००९-१० में पेट्रोलियम सेक्टर द्वारा कर,ड्यूटी,लाभांस इत्यादि के रूप में सरकारी खजाने में ९० ००० करोड़ रूपये जमा हुए और वर्ष २०१०-११ में सरकार को पेट्रोलियम सेक्टर से १ २० ००० करोड़ रूपये से ज्यादा आय होने का अनुमान है.
सरकार कहती है कि पेट्रोलियम पर जितना खर्च हो रहा है उतने की वसूली नहीं हो पा रही है सरकार यह भी कह रही है कि पेट्रोल,डीजल, रसोई गैस और मिट्टी के तेल को बड़ी मात्रा में सब्सिडाईज करना पड़ रहा है केन्द्र सरकार के आंकड़ों के अनुसार सरकारी राशन की दुकानों से वितरित किये जाने वाले मिट्टी के तेल पर २००६-०७, २००७-०८ और २००८-०९ में क्रमशः ९७०, ९७८ और ९७४ करोड़ रूपये की सब्सिडी दी गई बदले में इन्ही वर्षों में केन्द्र सरकार नें क्रमशः १७८८३, १९१०२ और २८२२५ करोड़ रूपये सरकारी राशन की दुकानों के जरिये वसूले. इसी तरह रसोई गैस पर केंद्र सरकार नें २००६-०७, २००७-०८ और २००८-०९ में क्रमशः १५५४, १६६३ और १७१४ करोड़ रूपये की सब्सिडी दी बदले में इन्ही वर्षों में केन्द्र सरकार नें क्रमशः १०७०१, १५५२३ और १७६०० करोड़ रूपये वसूल किये यानि मिट्टी के तेल और रसोई गैस से कुल मिलाकर २००६-०७, २००७-०८ और २००८-०९ में क्रमशः २५२४, २६१४ और २६८८ करोड़ रूपये दिए और इन्ही वर्षों २००६-०७, २००७-०८ और २००८-०९ में मूल्य वृद्धि करके क्रमशः २८५८४, ३४६२५ और ४५८२५ करोड़ रूपये वसूले. इसी तरह डीजल में २००६-०७, २००७-०८ और २००८-०९ में क्रमशः १८७७६, ३५१६६ और ५२२८६ करोड़ रूपये और पेट्रोल में २००६-०७, २००७-०८ और २००८-०९ में क्रमशः २०२७, ७३३२ और ५१८१ करोड़ रूपये वसूले.
पेटोलियम पदार्थों को बाजार के नियंत्रण पर छोड़ने वाली यूपीए सरकार का विरोध करने का स्वांग रचने और भारत बंद में अग्रणी भूमिका निभाने का दावा करने वाली प्रमुख विपक्षी पार्टी भाजपा अपने कार्यकाल में पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों को यूपीए सरकार की ही तरह बेतहासा बढ़ाया था. वर्ष १९९८ में जब एनडीए के माध्यम से भाजपा सत्ता की बागडोर संभाली तो पेट्रोल २३ रूपये लीटर डीजल १०.२५, रूपये रसोई गैस १३६ रूपये और मिट्टी का तेल २.५० रूपये था किन्तु वर्ष २००४ में पेट्रोल ३४ रूपये, डीजल २१.७४ रूपये, रसोई गैस २४२ रूपये और मिट्टी का तेल ९ रूपये हो गया यानि पेट्रोल ५० फीसदी, डीजल १११ फीसदी, रसोई गैस ९० फीसदी और मिट्टी के तेल में ३०० फीसदी बढोत्तरी की इस लिहाज से कांग्रेस २००४ में जब सत्ता संभाली तो पेट्रोल की कींमत ३४ रूपये प्रति लीटर थी वह अब ५३ रूपये, डीजल २१.७४ रूपये थी अब ४१ रूपये रसोई गैस २४२ रूपये थे अब ३४५ रूपये, मिट्टी के तेल की कींमत ९ रूपये से अब १२ रूपये अर्थात पेट्रोल ५० फीसदी, डीजल ९० फीसदी, रसोई गैस ४५ फीसदी और मिट्टी के तेल में ३३ फीसदी की बढ़ोत्तरी की है.
यह लगभग सभी को पता है कि क्यों और किसके लिए इस तेल के खेल को खेला जा रहा है. यह मूल्यवृद्धि कांग्रेस की लोकप्रियता के कींमत पर की जा रही है इस मूल्य वृद्धि से मनमोहन का कुछ नहीं बिगड़ेगा क्योकि यह उनकी आखिरी पारी है किन्तु कांग्रेस और कांग्रेसी कार्यकर्ताओं को यह आत्ममंथन करने का समय है कि कांग्रेस की उर्बरा शक्ति कांग्रेसी कार्यकर्ताओं और देश के आम नागरिकों के लिए है कांग्रेस की उर्बरा शक्ति मनमोहन और उनकी चौकड़ी के माध्यम से पूंजीपतियों के लिए देश के संसाधनों के अबाध लूट का रास्ता बनाने के लिए है. जब मनमोहन सिंह देश के प्रधानमंत्री बनाये गए थे तो देश की आम जनता को यह बताया गया था कि हमें अर्थशास्त्री प्रधानमंत्री मिला है राष्ट्र आर्थिक संवृद्धि के नए-नए कीर्तिमान स्थापित करेगा. राष्ट्र का तो पता नहीं हाँ सरकार नें ताबडतोब महंगाई बढ़ाकर जरूर आम आदमी को बुरी तरह चूसने का कीर्तिमान स्थापित किया. राष्ट्र को आर्थिक संवृद्धि मिली या नहीं मिली किन्तु पूंजीपतियों और कारपोरेट घरानों की आर्थिक संवृद्धि में चार चाँद जरूर लग गए देश का एक चौथाई संसाधन १०० पूंजीपति के कब्जे में चला गया, इधर देश के २२ करोड़ लोग भूखे पेट सोने को अभिसप्त है ५ करोड बच्चों को पर्याप्त पोषक पदार्थ नहीं मिल रहा है अब तेल की कीमतें बढ़ी है तो जाहिर है कि (ट्रांसपोटेशन) खाद्यान ढुलाई भाड़ा बढ़ेगा तो खाद्यान की कीमतें अपने आप बढ़ेंगी २२ करोड भूखे पेट सोने वालों का आकड़ा बढकर ३२ करोड़ हो जायेगा ५ करोड़ कुपोषित बच्चों का आकड़ा १० करोड़ के आकडे को छू लेगा इस बीच मनमोहन जब भी बोलेंगे तो ओबामा समेत सभी अंतर्राष्ट्रीय नेता सुनेंगे जिन्हें मनमोहन की जनविरोधी नीतियों का फायदा पहुँच रहा है अगर कोई नहीं सुन पायेगा तो वो भारत का आम आदमी क्योंकि कुपोषण से उसके कान के पर्दे सूख चुके होंगे.
Title :
Body
- सुदर्शन का (कु) दर्शन
- सीआईए नहीं केजीबी एजंट कहिए जनाब
- सोनिया का सच जान बेकाबू क्यों होते हो?
- नये निजाम के दामन पर है ज्यादा बड़ा दाग
- अजमेर चार्जशीट और संघी उछल-कूद
- अपने होने पर ही हैरान
- भद्दा और बेदम रहा संघ का विरोध प्रदर्शन
- एनसीपी के 'दादा' का दांव
- पीएमओ वाले पृथ्वीराज
- गोली लगने के बाद क्या गांधी ने कहा था- हे राम ?



del.icio.us
Digg
अभय सिंह
BAHUT HI DHARDHAR LEKH LIKHA AAPNE>>>>>
apna mat wapas lene se ho sakta hai!
atah suprim cort ko chahiye ki wo aisa kanun banye!
Post your comment