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स्विस बैंक में सेंध और भारत की भूमिका

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भारत के करोड़ों ईमानदार टैक्सदाताओं और नागरिकों के लिये यह एक खुशखबरी है कि फ़्रांस के HSBC बैंक के दो कर्मचारियों हर्व फ़ेल्सियानी और जॉर्जीना मिखाइल ने दावा किया है कि उनके पास स्विस बैंकों में से एक बैंक में स्थित 180 देशों के कर चोरों की पूरी डीटेल्स मौजूद हैं। 2 साल से इन्होंने लगातार यूरोपीय देशों की सरकारों को ईमेल भेजकर "टैक्स चोरों" को पकड़वाने में मदद की पेशकश कर रखी है। जर्मनी की गुप्तचर सेवा को भेजे अपने ईमेल में इन्होंने कहा था कि ये लोग स्विटज़रलैण्ड स्थित एक निजी बैंक के महत्वपूर्ण डाटा और उस कम्प्यूटर तक पुलिस की पहुँच बना सकते हैं।

इसी प्रकार के ईमेल ब्रिटेन, फ़्रांस और स्पेन की सरकारों, विदेश मंत्रालयों और पुलिस को भेजे गये हैं (यहाँ देखें…)। यूरोप के देशों में इस बात पर बहस छिड़ी है कि एक "हैकर" या बैंक के कर्मचारी द्वारा चोरी किये गये डाटा पर भरोसा करना ठीक है और क्या ऐसा करना नैतिक रुप से सही है? लेकिन फ़ेल्सियानी जो कि HSBC बैंक के पूर्व कर्मचारी हैं, पर फ़िलहाल फ़्रांस और जर्मनी तो भरोसा कर रहे हैं, जबकि स्विस सरकार लाल-पीली हो रही है। HSBC के वरिष्ट अधिकारियों ने माना है कि फ़ेल्सियानी ने बैंक के मुख्यालय और इसकी एक स्विस सहयोगी बैंक से महत्वपूर्ण डाटा को अपने PC में कॉपी कर लिया है और उसने बैंक की गोपनीयता सम्बन्धी सेवा शर्तों का उल्लंघन किया है।

फ़ेल्सियानी ने स्वीकार किया है कि उनके पास 180 देशों के विभिन्न "ग्राहकों" का डाटा है, लेकिन उन्होंने किसी कानून का उल्लंघन नहीं किया, क्योंकि इस डाटा से उनका उद्देश्य पैसा कमाना नहीं है, बल्कि स्विस बैंक द्वारा अपनाई जा रही "गोपनीयता बैंकिंग प्रणाली" पर सवालिया निशान लगाना भर है। बहरहाल, फ़्रांस सरकार फ़ेल्सियानी से प्राप्त जानकारियों के आधार पर टैक्स चोरों के खिलाफ़ अभियान छेड़ चुकी है। स्विस पुलिस ने फ़ेल्सियानी के निवास पर छापा मारकर उसका कम्प्यूटर और अन्य महत्वपूर्ण हार्डवेयर जब्त कर लिया है लेकिन फ़ेल्सियानी का दावा है कि उसका डाटा सुरक्षित है और वह किसी "दूरस्थ सर्वर" पर अपलोड किया जा चुका है। इधर फ़्रांस सरकार का कहना है कि उन्हें इसमें किसी कानूनी उल्लंघन की बात नज़र नहीं आती, और वे टैक्स चोरों के खिलाफ़ अभियान जारी रखेंगे। फ़्रांस सरकार ने इटली की सरकार को 7000 अकाउंट नम्बर दिये, जिसमें लगभग 7 अरब डालर की अवैध सम्पत्ति जमा थी। स्पेन के टैक्स विभाग ने भी इस डाटा का उपयोग करते हुए इनकी जाँच शुरु कर दी है।

फ़ेल्सियानी ने सन् 2000 मे HSBC बैंक की नौकरी शुरु की थी, वह कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग में स्नातक और बैंक के सुरक्षा सॉफ़्टवेयर के कोड लिखता है। बैंक में उसका कई बार प्रमोशन हो चुका है और 2006 में उसे जिनेवा स्थित HSBC के मुख्यालय में ग्राहक डाटाबेस की सुरक्षा बढ़ाने के लिये तैनात किया गया था। इसलिये फ़ेल्सियानी की बातों और उसके दावों पर शक करने की कोई वजह नहीं बनती। फ़ेल्सियानी का कहना है कि बैंक का डाटा वह एक रिमोट सर्वर पर बैक-अप के रुप में सुरक्षित करके रखता था, जो कि एक निर्धारित प्रक्रिया थी, और मेरा इरादा इस डाटा से पैसा कमाना नहीं है।

जून 2008 से अगस्त 2009 के बीच अमेरिका के कर अधिकारियों ने स्विस बैंक UBS के "नट-बोल्ट टाइट" किये तब उसने अमेरिका के 4450 कर चोरों के बैंक डीटेल्स उन्हें दे दिये। कहने का मतलब यह है कि स्विटज़रलैण्ड की एक बैंक (जी हाँ फ़िलहाल सिर्फ़ एक बैंक) के 180 देशों के हजारों ग्राहकों (यानी डाकुओं) के खातों की पूरी जानकारी फ़ेल्सियानी नामक शख्स के पास है… अब हमारे "ईमानदार" बाबू के ज़मीर और हिम्मत पर यह निर्भर करता है कि वे यह देखना सुनिश्चित करें कि फ़ेल्सियानी के पास उपलब्ध आँकड़ों में से क्या भारत के कुछ हरामखोरों के आँकड़े भी हैं? भले ही इस डाटा को हासिल करने के लिये हमें फ़ेल्सियानी को लाखों डालर क्यों न चुकाने पड़ें, लेकिन जब फ़्रांस, जर्मनी, स्पेन और अमेरिका जैसे देश फ़ेल्सियानी के इन आँकड़ों पर न सिर्फ़ भरोसा कर रहे हैं, बल्कि छापेमारी भी कर रहे हैं… तो हमें "संकोच" नहीं करना चाहिये।

भारत के पिछले लोकसभा चुनावों में स्विस बैंकों से भारत के बड़े-बड़े मगरमच्छों द्वारा वहाँ जमा किये गये धन को भारत वापस लाने के बारे में काफ़ी हो-हल्ला मचाया गया था। भाजपा की तरफ़ से कहा गया था कि सत्ता में आने पर वे स्विस सरकार से आग्रह करेंगे कि भारत के तमाम खातों की जानकारी प्रदान करे। भाजपा की देखादेखी कांग्रेस ने भी उसमें सुर मिलाया था, लेकिन चुनाव निपटकर एक साल बीत चुका है, और हमेशा की तरह कांग्रेस ने अब तक इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया है।  एक व्यक्ति के रुप में, प्रधानमंत्री की ईमानदार छवि पर मुझे पूरा यकीन है, लेकिन क्या वे इस मौके का उपयोग देशहित में करेंगे…? यदि फ़ेल्सियानी की लिस्ट से भारत के 8-10 "मगरमच्छ" भी फ़ँसते हैं, तो मनमोहन सिंह भारत में इतिहास-पुरुष बन जायेंगे…। परन्तु जिस प्रकार की "आत्माओं" से वे घिरे हुए हैं, उस माहौल में क्या ऐसा करने की हिम्मत जुटा पायेंगे? उम्मीद तो कम ही है, क्योंकि दूरसंचार मंत्री ए राजा के खिलाफ़ पक्के सबूत, मीडिया में छपने के बावजूद वे उन पर कोई कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं, तो फ़ेल्सियानी की स्विस बैंक लिस्ट में से पता नहीं कौन सा "भयानक भूत" निकल आये और उनकी सरकार को हवा में उड़ा ले जाये…।

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भ्रष्टाचार से त्रस्त एक भारतीय नागरिक on 23 July, 2010 00:59;37
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ये वैसे तो आम जनता के लिए खुशखबरी ही है पर हमारी लिजलिजी सरकार के लिए परेशान करने वाली बात है क्योंकि जिन १८० लोगो के डेटा होने की बात फ़ेल्सियानी कर रहा है उसमे ज़रूर आधे से अधिक भारत के राजनेता, नौकरशाह और व्यापारियों के नाम होंगे | इस लिए हमारी सरकार न तो इस खबर को आने देगी और न ही कभी उन लोगो के नाम उजागर होंगे जो फ़ेल्सियानी के पास है | चूंकि इसमें सभी पार्टियों के लोग शामिल होंगे इस लिए कोई भी नेता फ़ेल्सियानी से मिलने या उस से संपर्क की कोई भी बात नहीं कहेगा | जो २५० लाख करोड़ रूपया विदेशो में सड़ रहा है वो सड़ता ही रहेगा |
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Dr. Pawan kumar on 23 July, 2010 13:43;17
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ye bechari congress aisa kyo karegi kyonki paisa to sara hi in corrupt congressio ka h ye is desh ko sata k liye bech b sakte h jaise medieval india me raja log videshio se hath milate the, congress bhi bi ek din chin or pakistan ka desh par kabja karwakar apne liye sata mangegi
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RAJ SINH on 23 July, 2010 14:06;46
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सुरेश भाई ,आप भी न !
कभी कभी अच्छा मजाक कर लेते हैं. पिछले चुनाव में ये मुद्दा तो कामचलाऊ ढंग से उठाया गया था .आधे मन से .भाजपा सहित सभी शामिल हैं इनमे और कांग्रेस तो सबकी बाप है . वह सब भी नाटक था ,गंभीरता नहीं .
और उन बैंकों से पूछेगा कौन ? इन्हीं नेताओं ,नौकरशाहों और उनको संचालित करने वालों के ही खाते हैं वहां जिन्हें इस देश की जनता कुर्सियों पर बैठाती रही है . " बिल्ली से दूध की रखवाली " ?
कितना माल है वहां , अगर लाखों करोड़ खरब में बताया जाये तो बस आंकड़ा बन कर रह आयेगा . प्रसिद्द नोबल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन के आकलन अनुसार तो सिर्फ जर्मन और स्विस बैंकों में ही इतना है की भारत के राष्ट्रपति से लेकर चपरासी तक सब की तनख्वाह ,सुरक्षा सहित और आज की घोषित योजनाओं सहित ' सात साल ' तक देश चलाया जा सकता है .
और चोरी और सीनाजोरी यह की २५ साल पहले राजीव गांधी ने कहा था दिल्ली से एक रूपया चलता है तो उद्देशित जनता को सिर्फ १५ पैसा मिल पता है ,बाकी सब भ्रष्टाचार के हवाले हो जाता है . मिस्टर क्लीन कैसे क्लीन बोल्ड हुए पता ही है .अब बेटा कह रहा है की आख़िरी आदमी को सिर्फ १० पैसा ही मिलता है . कर लो बात . अब हमारे पूर्वांचल में एक कहावत है ......' बाप पूत हल जोतेन और सवाल ये की बांओ साला कौन किहिस ' . जैसे कुछ साल छोड़ दें तो ६३ साल कोई और सरकार चला रहा था .हिम्मत है किसी राजनेता में जो कहे क़ि मेरा कोई माल वहां नहीं है .या कमसे यह ' वंश ' तो कहे जिसने अपनी प्रशस्ति गान और मूर्तियों से सारे देश के हर चौराहे पर कब्ज़ा जमा रखा है और हर महत्वपूर्ण सड़क पर अपना पता .

अब तो ' सम्पूर्ण क्रांति ' ही समाधान है पर करेगा कौन ??????
अब तो सब चाहते हैं क़ि पड़ोसी का बेटा भगत सिंह बन फाँसी झूले और अपना बेटा अमरीकी झूले पे बैठ सावन के गीत गाये .

जय हिंद ?
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virendra jain on 23 July, 2010 16:04;15
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हमारे यहाँ तो जब नेता कानून के हत्थे चड़ते हैं तो कहने लगते हैं कि सीबीआई का गलत स्तेमाल हो रहा है या हिन्दुओं या मुसलमानों को प्रेशान किया जा रहा है
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image सुरेश चिपलूणकर उद्यमी, मुक्त पत्रकार और हिन्दी ब्लागर. उज्जैन के रहनेवाले सुरेश चिपलूणकर धाकड़ लिक्खाड़ हैं. लेखन शोधपूर्ण और तथ्यात्मक हो इसका भरपूर प्रयास करते हैं. अपने बारे में वे खुद कहते हैं कि "मैं सोचता हूँ कि कुछ न करने से बेहतर है कि "कुछ" किया जाये। संपर्क: suresh.chiplunkar@gmail.com
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