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शेयर बाजार में ठगी का कारोबार

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क्या आप अपनी पूंजी दोगुनी करना चाहते है? वो भी एक माह से कम समय में! आपको लग रहा होगा कि लेखक के पास कौन सी जादू की छड़ी आ गयी है कि यह एक माह से कम समय में पूंजी को दुगनी कर रहा है वो भी ऐसे मंदी के माहौल में जब दुनिया की बड़ी-बड़ी आर्थिक संस्थाएं दिवालिया हो रही हैं. लेकिन यकीन मानिये यह सच है बाम्बे स्टाक एक्सचेंज में लिस्टेड एक कंपनी जिसका नाम “ओड़िसा मिनरल डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड” है.

यह कंपनी अपने आपको खनन (माइनिंग) क्षेत्र में कार्यरत बताती है. बाम्बे स्टाक एक्सचेंज BSE की वेबसाईड पर कंपनी द्वारा दी गई जानकारियों में यह कंपनी 4 अगस्त 2010 को बाम्बे स्टाक एक्सचेंज में लिस्टेड हुई है. कंपनी का पता है एफ-डी 350 साल्ट लेक सीटी, सेक्टर 3 कोलकाता 700106. दिनांक 24 अगस्त 2010 तक की रिपोर्ट में स्क्रिप्ट आई. डी. OMDC, स्क्रिप्ट कोड 590086 और फेस वैल्यू 10 रुपया है. (डिविडेंड हिस्ट्री) लाभांश इतिहास, (एनुअल रिपोर्ट) वार्षिक रिपोर्ट, बोनस हिस्ट्री रजिस्ट्रार आदि का कोई रिकार्ड उपलब्ध नहीं है. सबसे बड़ी बात यह है कि इंटरनेट के इस आधुनिक युग में कंपनी की कोई वेबसाईट नहीं है. या अगर है तो जानबूझकर BSE की साईट पर वेब एड्रेस की जानकारी नहीं दी गई है इसलिए आप चाहकर भी कंपनी के बारे में अधिक जानकारी नहीं पा सकते.

इस कंपनी की सबसे चौकाने वाली बात यह है कि कंपनी 4 अगस्त 2010 को बाम्बे स्टाक एक्सचेंज में लिस्टेड होती है और उसके शेयर का भाव 20,475 प्रति शेयर खुलता है और मात्र 20 दिनों यानि 24 अगस्त 2010 को कंपनी के शेयरों का भाव 40,538 रूपये 65 पैसे पर बंद होता है. यहीं पर पैदा होता है जादू की छड़ी का सवाल, यह कैसे संभव है कि कंपनी के शेयर अपने लिस्टिंग के मात्र 20 दिनों में इतना लाभांश दे पा रहे है आज भी इसके शेयरों में ५% प्रतिशत प्रतिदिन के हिसाब से बढत देखी जा रही हैं. आपको यकीन नहीं हो रहा है न आप यहाँ क्लिक कीजिये. क्या यह कंपनी के शेयरों की कीमतों में वास्तविक उछाल है ? या बाजार के नए निवेशकों के साथ धोखाधड़ी अथवा कंपनी के शेयरों में इतना बड़ा उछाल लाने हेतु सेबी (सेक्योरिटी एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया), स्टाक एक्सचेंज, और ट्रेडर की मिलीभगत ! बहरहाल जो भी हो किन्तु इस पूरे मामले में कही न कही कुछ समस्या जरूर है यानि बाम्बे स्टाक एक्सचेंज में लिस्टेड कंपनियों के शेयरों की कीमतों में इतने बड़े स्तर पर उछाल यह बताता है कि शेयर बाजार में सब-कुछ ठीक नहीं है.

चिंता की बात यह यह है कि पिछले दिनों भारतीय शेयर बाजारों में आई लगभग खड़ी गिरावट की शुरुआत भी इसी तरह की एक अल्ट्रा-मेगा आईपीओ से ही हुई. जनवरी 2008 में आम निवेशक उस समय भी लालच में फंस गये थे. हालत यह हो गई थी कि लोगों ने पंद्रह दिन में रकम दुगुनी हो जाने के लोभ में अपने फिक्स्ड डिपॉजिट खाते तुड़वाकर रिलायंस पॉवर के आईपीओ में पैसे लगा दिए. सैकड़ों अरब रुपया बाजार से उठकर बैंकों के ऐस्क्रो खातों में चला गया और देखते-देखते बाजार में लिक्विडिटी का संकट खड़ा हो गया। फिर अमेरिका और न जाने कहां-कहां से आई नकारात्मक खबरों के बीच यह शेयर लिस्ट होने के साथ ही जो इसके भाव गिरने शुरू हुए तो साथ में पूरा बाजार ही डूबता चला गया. और आम  निवेशक आत्महत्या तक करने को मजबूर हो गये. 
 
बाम्बे स्टाक एक्सचेंज में लिस्टेड कंपनियों का इस तरह के खेल का लम्बा इतिहास रहा है उदहारण के रूप में बाम्बे स्टाक एक्सचेंज में लिस्टेड केजीएन इनडस्टीज लिमिटेड को ही लें जिसका स्क्रिप्ट आईडी KGNIND स्क्रिप्ट कोड 531612 है. जब यह कंपनी शेयर बाजार यानि बाम्बे स्टाक एक्सचेंज में लिस्टेड हुई तो इसके शेयरों का भाव ( मई 2008 में) 100 रुपया खुला, इसके शेयरों नें प्रति शेयर 55,000 रूपये भाव तक उछाल लिया और मई 2008 में ही केजीएन इनडस्टीज लिमिटेड के शेयरों का बंद भाव 4,169 रूपये 66 पैसे तक औधे मुह गिरा. वर्तमान समय में इस कंपनी के शेयरों का भाव 250 रूपये के करीब है. केजीएन इनडस्टीज लिमिटेड के बारे जानने के लिए यहाँ क्लिक करें. इससे साबित होता है कि बाम्बे स्टाक एक्सचेंज के ठीक नाक के नीचे कंपनियां केवल अपने मुनाफे के लिए भोले-बाले निवेशकों को ठग रही हैं सवाल यह है कि क्या शेयर बाजार की नियामक संस्थाएं इन बातों से अनभिज्ञ हैं या कंपनियों द्वारा इन नियामक संस्थाओं का जमकर दुरूपयोग हो रहा है जिसमें भोले-भाले निवेशकों को अपने चंगुल में फँसाकर उनके जीवन भर की गाढ़ी कमाई को लूटा जा रहा है.

इन स्टाक एक्सचेंजों के माध्यम से कितनी कंपनियां आम निवेशकों को ठग रही होंगी इसका न तो हमें पता हैं और न ही आपको होगा, अपने ठगे जाने का पता तो उन भोले-भाले निवेशकों को भी नहीं होगा. नेशनल स्टाक एक्सचेंज में बाम्बे स्टाक एक्सचेंज की अपेक्षा इस तरह के धोखाधड़ी के मामले कुछ कम देखने को मिलते है. जबकि बाम्बे स्टाक एक्सचेंज में आये दिन इस तरह के मामले देखने को मिलते रहते है. ऐसे मामलों के तमाम कारणों में एक कारण यह भी हैं कि बाम्बे स्टाक एक्सचेंज में अभी भी कारपोरेट घरानों का ही वर्चश्व है. नेशनल स्टाक एक्सचेंज के बरअक्स बाम्बे स्टाक एक्सचेंज में पारदर्शिता का आभाव ही कंपनियों के इस तरह की गलत गतिविधियों को बढ़ावा दे रहा है जिसके कारण आम निवेशक ठगी के शिकार हो रहे है. इन शेयर के कीमतों में आये उछाल का एक कारण यह भी हो सकता है कि देश के स्टाक एक्सचेंजों में होने वाला अधिकांश शेयर कारोबार चुनिन्दा ब्रोकिंग फार्मों के हांथों में सिमट कर रह गया है इन्ही फार्मों का शेयरों की कीमतों में घट बढ़ पर पूरा नियंत्रण है. अगर जानबूझ कर शेयरों का भाव बढ़ाया जा रहा है तो भी इसे आर्थिक अपराध की श्रेणी में ही रखना चाहिए. चिंता की बात यह है कि शेयर बाजारों पर निगाह रखने वाली सेबी कुछ नहीं कर पा रही है. दरअसल सेबी का गठन देश में इक्विटी कल्ट को फ़ैलाने के लिए हुआ था. सेबी, बीएसई, एनएसई और शेयर बाजार के बारे में पिछले दिनों संसद में भी मामला उठाया गया था. अतः आम निवेशक सेक्योरिटी एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) से पूछना चाहेगा कि क्या सफेदपोश धोखाधड़ी के ऐसे कारनामों पर रोक लगाने में वह कामयाब होगी अथवा आम निवेशकों की गाढ़ी कमाई को ये कंपनियां और ब्रोकिंग फर्में लूटती रहेंगी.
 
इन सभी के मद्देनजर ही बाजार में निवेशकों की संख्या नहीं बढ़ रही है हालाँकि सरकार द्वारा निवेशकों की संख्या बढ़ाने के टारगेट के बावजूद भारत में निवेशकों की संख्या बढ़ नहीं रही है सक्रिय निवेशकों की डीमेट एकाउंट कम ही हुए हैं. क्योंकि बार-बार शेयर बाजार में घोटाले होने, कारोबारी प्रासेस जटिल होने के कारण आम भारतीय शेयर बाजार में घुसने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है. इन समस्याओं से निपटने के लिए शख्त कदम उठाए जाने जरूरी हैं. कंपनी मामलों के विभाग और सेक्योरिटी एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) को धोखाधड़ी में लिप्त पाई जाने वाली कंपनियों के विशेष ऑडिट का तुरंत आदेश देना चाहिए। विशेष ऑडिट में गड़बड़ी पाए जाने पर कंपनियों के निदेशकों और अन्य संबद्ध लोगों के खिलाफ उपयुक्त कार्रवाई शुरू की जानी चाहिए. साथ ही इनसाइडर ट्रेडिंग के मामलों का पता लगाने के लिए सेबी को ऐसी कंपनियों के शेयरों में लेनदेन की जांच करनी चाहिए. सिर्फ यह कहना अनावश्यक है कि इनसाइडर ट्रेडिंग के मामलों में दंडात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए.

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KKC on 27 August, 2010 11:28;33
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Bahut door ki kaudi laye ho bandu. Yeh baaten sirf mera shak tha lekin aapne unki kafi had tak pushti kar di. Thanks.
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on 27 August, 2010 12:18;23
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bahut achhi jankari
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Sunil Jain on 27 August, 2010 17:21;32
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बहुत उम्दा जानकारी है किन्तु आज BSE की साईट पर कंपनी ने कुछ जानकारियां NEWS के रूप में दी है मसलन यह कंपनी भारत सरकार का उद्दम है. दूसरा यह कंपनी के बारे में बर्डग्रुप की साईट www.birdgroup.gov.in पर मौजूद है आज इस कंपनी का शेयर नीचे जा रहा है. अफ़सोस की बात यह है कि सेक्योरिटी एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) की Surveillance पर यह ट्रेडिंग क्यों नहीं है ? क्या शेयर बाजार फिर से किसी आपराधिक षड्यंत्र का शिकार तो नहीं हो रहा ?
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pushpendra on 24 September, 2010 17:40;05
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bhala karne wale
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pushpendra on 24 September, 2010 17:46;36
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घोटाले में पकडे गए तो सजा सरकारी कितनी सुनाई जाएगी साले पूरी जनम कमाएगे तो भी उतना नहीं कमा पाएंगे कंपनी मामलों के विभाग और सेक्योरिटी एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) को धोखाधड़ी में लिप्त पाई जाने वाली कंपनियों के विशेष ऑडिट का तुरंत आदेश देना चाहिए। कौन देगा ?? विशेष ऑडिट में गड़बड़ी पाए जाने पर कंपनियों के निदेशकों और अन्य संबद्ध लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की जानी चाहिए.कौन करेगा ? ? साथ ही इनसाइडर ट्रेडिंग के मामलों का पता लगाने के लिए सेबी को ऐसी कंपनियों के शेयरों में लेनदेन की जांच करनी चाहिए. सिर्फ यह कहना अनावश्यक है कि इनसाइडर ट्रेडिंग के मामलों में दंडात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए यह भी कहेगा कौन ? ? कबीरा के इस देश में भाति-भाति के लोग ? ? पत्रकार महोदय कार्रवाई के लिए उस अधिकारी का इन्तजार किया जाये जिसका पैसा इस मार्केट में न लगा हो या फिर इतना डूब गया हो की कुछ उसके पास बचा न हो ! कार्रवाई तो वही करेगा
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image राजेश सिंह मुंबई में रहनेवाले राजेश सिंह मानवाधिकार कार्यकर्ता और पत्रकार हैं. वर्तमान समय में नागरिक विकल्प नामक पत्रिका का संपादन और मानवाधिकार संस्था का संचालन.
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