अर्थ-अनर्थ
शेयर बाजार में ठगी का कारोबार
क्या आप अपनी पूंजी दोगुनी करना चाहते है? वो भी एक माह से कम समय में! आपको लग रहा होगा कि लेखक के पास कौन सी जादू की छड़ी आ गयी है कि यह एक माह से कम समय में पूंजी को दुगनी कर रहा है वो भी ऐसे मंदी के माहौल में जब दुनिया की बड़ी-बड़ी आर्थिक संस्थाएं दिवालिया हो रही हैं. लेकिन यकीन मानिये यह सच है बाम्बे स्टाक एक्सचेंज में लिस्टेड एक कंपनी जिसका नाम “ओड़िसा मिनरल डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड” है.
मंदी के रास्ते आई मंहगाई बनी हरजाई
सन २००८ में आयी आर्थिक मंदी के बाद से विश्व भर में तमाम देशों की आर्थिक सेहत खराब बनी हुई है। कभी ऐसा लगता है कि अब हालत ठीक है तो कभी स्तिथि खराब लगने लगती है। इस बड़े आर्थिक प्रहार के बाद से दो वित्तीय वर्ष पूर्ण होने के उपरांत भी आर्थिक मंदी से अपेक्षित राहत नहीं मिल सकी है और ये आर्थिक मंदी सीधे –सीधे बढती महंगाई के लिये जिम्मेदार है।
स्विस बैंक में सेंध और भारत की भूमिका
भारत के करोड़ों ईमानदार टैक्सदाताओं और नागरिकों के लिये यह एक खुशखबरी है कि फ़्रांस के HSBC बैंक के दो कर्मचारियों हर्व फ़ेल्सियानी और जॉर्जीना मिखाइल ने दावा किया है कि उनके पास स्विस बैंकों में से एक बैंक में स्थित 180 देशों के कर चोरों की पूरी डीटेल्स मौजूद हैं। 2 साल से इन्होंने लगातार यूरोपीय देशों की सरकारों को ईमेल भेजकर "टैक्स चोरों" को पकड़वाने में मदद की पेशकश कर रखी है। जर्मनी की गुप्तचर सेवा को भेजे अपने ईमेल में इन्होंने कहा था कि ये लोग स्विटज़रलैण्ड स्थित एक निजी बैंक के महत्वपूर्ण डाटा और उस कम्प्यूटर तक पुलिस की पहुँच बना सकते हैं।...तेल के नाम पर खतरनाक खेल
हम सभी को समझना होगा कि भारत में एक लीटर पेट्रोल की कींमत ५३ रूपये है ऐसा क्यों? और सरकार लगातार पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में बढ़ोत्तरी करती जा रही है. आखिर तेल के नाम पर अपने देश के हुक्मरान कौन सा खतरनाक खेल खेल रहे हैं?...चीनी आर्थिक चमत्कार के पैबंद
चीन से आ रही मजदूरों के आत्महत्या करने की खबरों से चीनी आर्थिक चमत्कार के ‘रहस्य‘ खुलने लगे हैं। क्या इस साम्यवादी राष्ट्र के विकास की बुनियाद निर्धन मजदूरों के शोषण पर टिकी है? क्या सस्ते उत्पादन के पीछे चीन में मजदूरों का अंतहीन शोषण है जो आत्महत्या के रूप में सामने आ रहा है?...भारत के लिए जरूरी है व्यापक आर्थिक परिदृश्य
भले ही हमारे देश में आर्थिक महाशक्ति बनने की संभावना है लेकिन हम इससे आत्मसंतोष नहीं कर सकते. हमें सफलता प्राप्त करने केलिए हर स्तर पर पूरी दृढ़ता के साथ सही कदम उठाने होंगे. सफलता केलिए हमें कुछ बातों पर ध्यान देने की जरूरत है.
मंहगाई की मनमोहनी मार
मंहगाई-मंहगाई के इस खेल में फायदे में रहेंगे मनमोहन और उनकी तिकड़ी तथा वे ताकतें ( बहुराष्ट्रीय निगम) जिनके लिए मंहगाई बढ़ाई जा रही है और घाटे में रहेगी इस देश की आम जनता, यूंपीए गठबंधन और गठबंधन की प्रमुख घटक कांग्रेस क्योंकि मनमोहन और उनकी तिकड़ी के नीतियों की वजह से कांग्रेस का हाथ बहुराष्ट्रीय निगमों के साथ है, देश के आम आदमी के नहीं । इसका हिसाब आम आदमी चुनाव में जरूर लेगा किन्तु हिसाब लेने में अभी चार साल बाकी है सो मंहगाई फ़िलहाल कम होगी यह उम्मीद करना दिवास्वप्न ही है ।
शेयर बाजार को ले डूबेंगी डब्बा कंपनियां
शेयर बाजार की नियामक संस्था सेबी ( सेक्योरिटी एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया) के ठीक नाक के नीचे काले धन को सफेद करने का कारोबार धड़ल्ले से जारी है । डब्बा कंपनियों के माध्यम से इसे अंजाम दे रहे हैं डब्बा ट्रेडर्स। दरअसल डब्बा ट्रेडर्स एक ऐसे कुख्यात कारोबारी तरीके का नाम है जो काले धन को सफेद करने का कारोबार धड़ल्ले से कर रहे हैं ।
आइये समझें अर्थ का शास्त्र
बहुत सारे लोग अनिल सिंह को अनिल रघुराज के नाम से जानते हैं. किसी दौर में आर्थिक पत्रकार के तौर पर दिल्ली में झंडा गाड़नेवाले अनिल सिंह मुंबई गये तो अनिल रघुराज के रूप में ब्लागिंग शुरू की. मुस्कुराते हुए बात करतें हैं और बात करते हुए बीच बीच में खांसते हैं. उन्हें खांसने का कोई रोग नहीं है लेकिन ऐसा लगता है कि यह उनका स्टाइल है. बोलते बहुत धीरे हैं लेकिन जो बोलते हैं वह समझा हुआ सा लगता है इसलिए मन में बहुत सारे सवाल जवाब नहीं आते हैं. ऐसे ही अनिल सिंह उर्फ अनिल रघुराज ने अपनी एक वेबसाइट शुरू की है- अर्थकाम.
मंहगाई को रोकना है तो...
रिज़र्व बैंक ने एक बार फिर ब्याज दरें बढ़ा दीं हैं। उनकी सोच है कि बाज़ार में रुपये की कमी से खर्च पर लगाम लगेगी और उपभोक्ता वस्तुओं की खरीद कम होगी। रिज़र्व बैंक के प्रबंधन में देश के चोटी के विद्वान लगे हैं। अर्थशास्त्र के एक प्रकांड पंडित इस देश के प्रधानमंत्री हैं इसलिए यह कहना कि ब्याज़ दर बढ़ा कर मंहगाई पर काबू पाना नामुमकिन है, शायद छोटे मुंह बड़ी बात होगी लेकिन सच्चाई यह है कि बैंकों से पैसा लेकर फालतू की चीज़ें नहीं खरीदी जातीं।
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ममता के दरबार में कांग्रेस की सरकार
पश्चिम बंगाल में जैसे जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं स्थानीय स्तर पर कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के बीच राजनीतिक खींचतान और चूहे बिल्ली का खेल बढ़ता जा रहा है. इसका एक उदाहरण उस वक्त देखने को मिला जब कांग्रेस के युवा नेता और केन्द्रीय मंत्री सचिन पायलट पश्चिम बंगाल के दौरे पर गये. ...
आतंकवाद की राजनीति और मीडिया
क्या आतंकवाद बौद्धिक स्तर पर इतना विकसित हो चुका है कि उसका राजनीतिक धरातल तैयार हो सके? इस जटिल प्रश्न का उत्तर सरल नहीं है. जो लोग अल-कायदा को आतंकी संगठन बताकर उसके खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं वे भी शायद इसे इस्लामिक चरमपंथ कहना ज्यादा मुनासिब समझेंगे बनिस्बत कि आतंकवाद के दर्शन में निहित राजनीति को मान्यता प्रदान करें. लेकिन मुस्लिम देशों में आतंकी गतिविधियों के द्वारा दुनियाभर में थरथराहट पैदा करनेवाले इस्लामिक विद्वान इसे उस राजनीति की प्रतिक्रिया मानते हैं जिसके वैचारिक आक्रमण के कारण इस्लाम को खतरा पैदा हो गया है. शायद इसीलिए "जिहाद" जरूरी हो गया था. ...
राजनीतिक हिन्दुत्व पर दिग्गी का दांव
हिन्दुओं का ठेकेदार बनने की आरएसएस और उसके मातहत संगठनों की कोशिश को चुनौती मिल रही है. भगवान् राम के नाम पर राजनीति खेलकर सत्ता तक पंहुचने वाली बीजेपी के लिए और कोई तरकीब तलाशनी पड़ सकती है क्योंकि कांग्रेस की नयी लीडरशिप हिन्दू धर्म के प्रतीकों पर बीजेपी के एकाधिकार को मंज़ूर करने को तैयार नहीं है. कांग्रेस के महासचिव दिग्विजय सिंह ने साफ़ कहा है कि हिन्दू धर्म पर किसी राजनीतिक पार्टी के एकाधिकार के सिद्धांत को वे बिल्कुल नहीं स्वीकार करते....
कृष्णं वन्दे जगतगुरुम्
भारत भूमि में जन्मा कौन ऐसा व्यक्ति होगा जिसने श्रीकृष्ण का नाम न सुना हो? श्रीकृष्ण को वन्दे जगदगुरु भी कहा जाता है। श्रीरामचन्द्र के समान श्रीकृश्ण भी करोड़ों भारतवासियों की श्रद्वा और भक्ति के पात्र रहे है। वास्तव में श्रीकृष्ण की सम्पूर्ण जीवन लीला, उनका दुष्टों से लड़ना और सज्जनों की रक्षा करना, उनकी राजनीतिक क्षमता और सबसे अधिक उनका गीता के द्वारा दिया हुआ कर्मयोग का संदेश भारतीय संस्कृति की अमूल्य निधि है।...
हरिप्रसाद का लोकतंत्र 'हठ'
हरिप्रसाद को एक हफ्ते तक पुलिस हिरासत में रखने के बाद जमानत मिल गयी है. जेल से छूटने के बाद हैदराबाद पहुंचे हरिप्रसाद ने कहा है कि वे इस गिरफ्तारी से न झुकेंगे न टूटेंगे बल्कि ईवीएम मशीनों की धोखाधड़ी के खिलाफ अपना अभियान जारी रखेंगे. हरिप्रसाद की यह दिलेरी और लोकतंत्र के प्रति हठ निश्चित रूप से काबिले तारीफ है. ...
'हिंदुस्तान' ने पूर्णिया को शर्मसार कर दिया
उम्र-78 साल और ये उम्र मैंने अपने घर के बंद कमरों में नहीं काटी. पूर्णिया की तमाम साहित्यिक-सांस्कृतिक गतिविधियों से हर दिन का साबका रहा है. कचहरी चौक पर धरना-प्रदर्शन से लेकर छोटे-बड़े तमाम मंच पर सक्रिय रहा हूं. जानता हूं कि खबरें कैसे बनती हैं और कैसे छपती हैं. 'हिंदुस्तान', 'दैनिक जागरण', 'प्रभात खबर', 'राष्ट्रीय सहारा' और ऐसे ही तमाम अखबारों में छपता रहा हूं. पत्रकारिता को लेकर खट्टे-मीठे अनुभव रहे हैं. उम्र और अनुभव का तकाजा कुछ ऐसा रहा कि कभी शाबाशी में पत्रकारों की पीठ ठोंकी तो कभी उनकी तीखी आलोचना भी की, लेकिन पिछले दिनों शहर में घटी एक घटना के बाद से बेचैन हूं, दुखी हूं, शर्मिंदा हूं- समझ नहीं आ रहा कि कैसे मन की पीड़ा व्यक्त करूं?...
सुखाड़ का शिकार हो गया बिहार
उत्तरी बिहार के कुछ इलाकों में आए बाढ़ के बारे में टीवी चैनल पर खबर देखने या फिर किसी सामाचार पत्र में खबर पढ़ कर यह अंदाजा मत लगाइए कि बिहार में इस साल भी खूब बारिश हो रही है। दरअसल बिहार के कुछ इलाकों में आई बाढ़, नेपाल की नदियों से बहकर आया पानी है जिसकी वजह से कुछ क्षेत्र जलमग्न हो गए हैं। लेकिन इस पानी से किसानों का भला नहीं होने वाला है।...
टाटा-बिड़ला-अंबानी, पीयेंगे मध्य प्रदेश का पानी
वेतन-भत्तों और सुविधाओं के विस्तार को लेकर लगातार हाय तौबा करने वाले जनप्रतिनिधि अब जनता की बुनियादी ज़रुरतों से पल्ला झाड़कर औद्योगिक घरानों की ताल पर थिरकते दिखाई दे रहे हैं। लोकतांत्रिक व्यवस्था में पानी,बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएँ जुटाने का ज़िम्मा सरकारों को सौंपा गया है। मगर सरकारें अब जनहित के कामों को छोड़कर एक के बाद एक योजनाओं को निजी हाथों में सौंपती चली जा रही है, फ़िर चाहे वो प्राकृतिक संसाधन हों, ज़मीन हो या आम जनता की सेवा से जुड़े मुद्दे हों। इसी कड़ी में अब नेताओं और उद्योगपतियों को पानी मुनाफ़े का सौदा नज़र आने लगा है।...
प्रेस क्लब ने खाना नहीं खिलाया, नोटिस थमा दिया
चंडीगढ़ प्रेस क्लब की तानाशाही का एक और नमूना सामने आया है। दैनिक भास्कर चंडीगढ़ के ब्यूरो चीफ ब्रजमोहन सिंह को क्लब ने कार्रवाई संबंधी नोटिस भेज दिया गया है। दिलचस्प बात है कि क्लब के अंदर ब्रजमोहन सिंह को दो घंटे तक खाना के आर्डर के बावजूद खाना नहीं देकर पहले बेइज्जति की गई और उसके बाद जब ब्रजमोहन सिंह ने शिकायत की तो उन्हें नोटिस दिया थमा दिया गया।...
असफल गृहमंत्री का सफल 'आतंकवाद'
हमारे केंद्रीय गृहमंत्री पी.चिदबरम ने पुलिस प्रमुखों के समेलन में ''भगवा आतंकवाद'' का नया शगूफा छोड़ दिया। वैसे इस केंद्रीय मंत्रिमंडल के कई मंत्री बयानों के मामले में शूरवीर की प्रसिद्धी प्राप्त कर चुके है। पी. चिदबरम भी ऐसे ही मंत्री हैं जो अपने बयानों के कारण चर्चा में रहते हैं. आतंकवाद का मामला हो, नकसलवाद का मामला हो, कश्मीर समस्या का मामला हो, या देश में घटित कोई भी अन्य महत्वपूर्ण मामला हो उनके आतंकवाद की थ्योरी भले ही सफल हो रही हो लेकिन बतौर गृहमंत्री वे असफल साबित हो रहे हैं....
पाँचना से फोन पर पानी पहुँचा घना
घना पक्षी विहार को इस बर्ष पानी मिल गया है। करौली जिले के पाँचना बाँध से छोडा गया पानी अब भरतपुर की सीमा में पहुँच गया है। इस पानी के बाद संभावना है घने का ताज बच जाये। पानी से रिक्शा चालकों से लेकर होटल मालिक सब प्रसन्न है, लेकिन इस पानी पहुँचने के कारणों में भरतपुर सांसद का करौली कलक्टर को फोन करना चर्चा का विषय बना हुआ है।...
तिगड्डे में फंसा किसान
वोट बैंक की राजनीति जो ना कराए वो कम है। कल तक अलीगढ़ में अपनी जमीन के मुआवजे के लिए एक महीने से लड़ रहे किसानों के साथ कोई नहीं था। लेकिन जैसे ही पुलिस की गोलीबारी में तीन किसानों की मौत हुई तो वहां नेताओं का सैलाब उमड़ पड़ा। क्या कांग्रेस, क्या बीजेपी, क्या सपा और क्या बसपा। किसी ने यह मौका नहीं छोड़ा कि वे ही किसानों के सबसे बड़े हिमायती हैं यह इतना दुखदायी और पीड़ादायी है कि बताया नहीं जा सकता।...
कांग्रेस पर सत्ता संघर्ष भारी, अब राहुल गांधी की बारी
एक अजीब से घटना है। जिस दिन राहुल गांधी अपने आपको उड़ीसा में आदिवासियों के सिपाही घोषित करते है, उसके अगले दिन ही एक खबर छपती है। खबर अखबार के पहले पन्ने की लीड है, जिसमें कहा गया है कि भारत युवाओं का देश है, पर प्रधानमंत्री बुजुर्ग है। साथ ही दुनिया के कई देशों का उदाहरण दिया गया है, जिसमें युवा लोग प्रधानमंत्री के तौर पर विराजमान है। ये एक सामान्य घटना कहेंगे या एक संयोग या एक राजनीतिक खेल? जो युवराज अभी तक कारपोरेट है, वही एकाएक आदिवासियों के सिपाही हो जाते है।...
17 अक्टूबर से हो सकते हैं बिहार में चुनाव
बिहार विधानसभा चुनावों की घोषणा होनेवाली है. चुनाव आयोग और राज्य सरकार की मशीनरी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि बिहार में दुर्गापूजा के बाद 17 अक्टूबर से चुनावों की घोषणा की जा सकती है. ऐसी संभावना है कि बिहार में चार चरणों में मतदान पूरा किया जाएगा और जल्द ही तिथियों की घोषणा कर दी जाएगी. ...
साथी की शोकसभा के लिए भी संपादक के पास समय नहीं
29 अगस्त 2010. भागलपुर में एक पत्रकार के लिए शोकसभा का आयोजन. 29 जून को ट्रेन से गिरकर पत्रकार की मौत हो गयी थी. शोकसभा का आयोजन थोड़ी देर से किया गया था लेकिन किया गया. लेकिन खुद अखबार के संपादक ही शोकसभा में नहीं आये और बहाना बनाया कि वे मीटिंग में हैं. मीटिंग में तो संपादक महोदय नहीं आये, लेकिन आश्चर्य का ठिकाना तब नहीं रहा जब अगले अखबार ने अपने ही दिवंगत साथी की शोकसभा को एक कालम की खबर का भी दर्जा नहीं दिया. ...
- आलोक तोमर की आपबीती
- वह गुजरात जिसे आप नहीं जानते
- हिन्दू आतंकवाद का अतिवाद
- बाबा रामदेव का दांव
- अब भोजपुरी में बोलेगा बाजार
what ever the reason to induce it but it doesn't reduce the imprudance of anti corruption movement run by the group
ji...pankaj..ji..aap..ki..chinta..bilkul..vajib..hai..aapke...is..chintan..me..bihar..ka..dard..saf..jhalak..rha..hai...
आदरणीय पंकज जी संघ का विरोध करने के बजाय मीडिया में क्षेत्रवाद,जातिवाद, अयोग्यतावाद, चाटुकारिता और ऐसी ना
जाने कितनी बुराईयों के विरोध के लिए कमर कसिए।
बाँसुरी की मधुर धुन छेड़ने वाला कृष्ण चरित्र ही नये भारत का सच्चा आदर्श हो सकता है किंतु धर्म के नाम पर सत्ता पाकर भ्रष्टाचार ...
पहली बात तो यह कि स्पन्दन एक साहित्यिक सांस्कृतिक संस्था है जिसमें सुप्रसिद्ध कथा लेखिका उर्मिला शिरीष, डा. शिरीष शर्मा, सुप्रसिद्ध चित्रकार गायत्री गौड़, सहित ...

