अर्थ-अनर्थ
पटना निगल जाता है आधा बिहार
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हमेशा से यह कहते हुए केंद्र पर अनदेखी का आरोप लगाते रहे हैं कि बिहार का विकास किए बगैर देश विकसित नहीं हो सकता, मगर जब बात उनके अपने राज्य की आती है तो संभवत: यह तर्क वे भूल जाते हैं और विकास की बड़ी राशि पटना में ही खर्च कर डालते हैं, भले भागलपुर, पूर्णिया या सुपौल जैसे जिले पिछड़े ही रह जाएं।
लीजिए, एक और किसान हितैषी बजट
वित्तमंत्री प्रणव मुखर्जी के भाषण का आखिरी वाक्य देखिए. वे कहते हैं- "यह बजट आम आदमी से जुड़ा है. यह किसानों, कृषि कारोबारियों, उद्यमियों और निवेशकों से जुड़ा हुआ है." अरे, एक और किसान हितैषी बजट आ गया. पिछले दस सालों के बजट बाद के संपादकीय पढ़िये. आपको हर संपादकीय में एक बात जरूर दिखाई देगी कि किसानों और कृषि के उत्थान के लिए सरकार ने नये सिरे से प्रयास किये हैं. हमारी मीडिया के लिहाज से हर बार बजट में वित्त मंत्री किसानों के लिए अच्छी अच्छी खबरें लेकर आते हैं.
भविष्य के भारत की ओर पहला बजट
वित्त वर्ष 2010-11 बजट प्रस्तुत होने से पहले आम आदमी की परिभाषा दाल रोटी से जोड़ी जा रही थी. लेकिन बजट आया तो आम आदमी की जगह शहर के वे लोग आ गये जो एक घर और गाड़ी का सपना देखते हैं. अपने बजटीय प्रावधान में प्रणव मुखर्जी ने जो घोषणाएं की हैं वह उस आम आदमी को सचमुच राहत देनेवाली हैं जिनका रोना अब तक विपक्षी दल और मीडिया का एक हिस्सा रो रहा था. फिर अचानक ही प्रणव मुखर्जी का बजट आम आदमी का विरोधी कैसे हो गया?...बजट में किसान और कृषक अलग अलग क्यों हैं दद्दू?
वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने अपने बजट भाषण के अंत में कहा है कि यह बजट आम आदमी का है। यह किसानों, कृषकों, उद्यमियों और निवेशकों का है। इसमें बाकी सब तो ठीक है, लेकिन किसान और कृषक का फर्क समझ में नहीं आया। असल में वित्त मंत्री ने अपने मूल अंग्रेजी भाषण में फार्मर और एग्रीकल्चरिस्ट शब्द का इस्तेमाल किया है।...बजट में करदाताओं को मिला उम्मीद से बढ़कर
जिसकी किसी को उम्मीद नहीं थी, वित्त मंत्री ने बजट 2010-11 में वह काम कर दिखाया। सभी को यही लग रहा था कि क्योंकि प्रत्यक्ष कर संहिता (डायरेक्ट टैक्स कोड) लागू होनी है, इसलिए शायद प्रणब मुखर्जी इस बार व्यक्तिगत आयकर की दरों या स्लैब में कोई तब्दीली नहीं करेंगे।...प्रणव दा ने पेश किया 'आम' आदमी का आम बजट
शुक्रवार को लोकसभा में साल 2010-11 का बजट प्रस्तुत करते हुए वित्तमंत्री ने आखिर में इसे देश के आम आदमी को समर्पित करने के साथ समापन किया. नवगठित यूपीए सरकार के वित्तमंत्री के बतौर अपना पहला बजट प्रस्तुत करते हुए समाजवादी अर्थव्यवस्था के पक्षधर प्रणव मुखर्जी ने कारपोरेट और आम आदमी के बीच संतुलन साधने की कोशिश की है.
बजट भाषा की परिभाषा
बजट के दौरान कुछ शब्द अनिवार्य रूप से प्रयोग किये जाते हैं जो अर्थव्यवस्था के हालात बताते हैं. इन शब्दों का क्या अर्थ होता है, आइये समझने की कोशिश करते हैं-
बजट तो लॉबीइंग का खेल होता है बंधुवर!
जैसा अपना या अपने घर का बजट होता है वैसा ही देश के बजट को समझते हैं। जिसे हम देश का बजट मानते हैं वह बहुत हद तक सरकार का बजट होता है। लेकिन इससे भी ज्यादा जानने लायक बात यह है कि बजट बनाने के दौरान लॉबीइंग का खेल चलता है, जिसमें ताकतवर समूह अपना अपना हित सुनिश्चित करते हैं। ये समूह देश के भी हो सकते हैं और विदेशी भी।
वित्तमंत्री जी, कृपया ध्यान दीजिए
आम आदमी की कीमत पर प्राप्त की गई विकास दर क्या जायज है? हमारी राष्ट्रीय आय तो 7-8 प्रतिशत के बीच बढ़ने की उम्मीद है मगर देश में कृषि जगत का विकास 3 प्रतिशत से भी नीचे रहने की आशंका है, ऐसा क्यों? क्या गरीबों की थाली से अन्न गायब कर डेब्ट-जीडीपी दर को कम करना एक सही रणनीति है? ऐसे में निश्चय ही इस बार प्रणब मुखर्जी पर वित्तीय घाटा और महंगाई के बीच सामंजस्य बिठाने का दबाव रहेगा।
निजीकरण को दीदी की हरी झंडी
भविष्य में साल 2010 के रेलवे बजट को निजीकरण के लिए दरवाजा खोलने वाला बजट माना जाएगा. पहली बार द्रुत गति परियोजनाओं के लिए एक टास्क फोर्स के गठन की घोषणा की गयी है जो भारी भरकम निवेश वाली रेल परियोजनाओं के लिए पथ प्रदर्शक का काम करेगी. रेल मंत्री ने अपने भाषण में भले ही निजीकरण न करने की बात कही हो लेकिन निजीकरण के सारे शुरुआती उपाय उन्होंने कर दिये हैं.
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शौरी को साफ करने में जुटे आडवाणी
संघ की मंशा पर भले ही अपेक्षाकृत युवा नितिन गडकरी को भाजपा की कमान मिल गई हो, और आडवाणी को नेता प्रतिपक्ष से हटाकर पार्श्व में ढकेलने का प्रयास चल रहा हो, पर आडवाणी तो आडवाणी हैं। उन्होंने टीम गडकरी में अपने चहेतों को स्थान दिलवा ही दिया, भले ही वे रीढ विहीन क्यों न हों। इस आपरेशन से फारिग होने के बाद अब आडवाणी के निशाने पर संपादक से राजनेता बने अरूण शौरी पूरी तरह आ चुके हैं। आडवाणी और उनके समर्थको ने अब शौरी को राज्य सभा के रास्ते संसद में प्रवेश के रास्ते बंद करने की कवायद आरंभ कर दी है।...
डेविड हेडली का हेडेक
डेविड कोलमन हेडली के मुद्दे पर दुनिया के समक्ष भारत की ऐसी-तैसी हो गयी है. बावजूद इसके भारत सरकार, अधिकारी और मीडिया का एक हिस्सा इसे भारत पर अमेरिकी उपकार साबित कराने पर उतारू है. हमारे गृह सचिव जी.के. पिल्लई कहते हैं कि हम भले ही २६/११ के मामले में हेडली को प्रत्यर्पित करने के मामले में विफल रहे लेकिन अन्य मामलों में उसका प्रत्यर्पण संभव है. ...
मराठी बनाम बिहारी बनी टीम गडकरी
शिवसेना और महाराष्ट्र नव निर्माण सेना द्वारा समूचे महाराष्ट्र सूबे में उत्तर भारतीयों विशेषकर बिहारियों के साथ किए गए अत्याचार के बाद अब महाराष्ट्र प्रदेश से उठकर भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय राजनीति में कमान संभलने वाले नितिन गडकरी की नई टीम को मराठा बनाम बिहारी के तौर पर देखा जाने लगा है।...
खुला दिमाग लेकिन दरवाजा बंद
संसद और विधान मंडलों में महिलाओं को आरक्षण देने के लिए संविधान में संशोधन करने की कोशिशों को एक ज़बरदस्त झटका लगा है. बी जे पी की नेता सुषमा स्वराज ने कहा है कि इस बिल को लोकसभा में पास कराने के लिए प्रस्तावित सभी पार्टियों की मीटिंग में उनकी पार्टी खुले दिमाग से जायेगी. यह बयान बी जे पी के अब तक के रुख से थोडा अलग है....
मुस्लिम आरक्षण करेगा राष्ट्र का भक्षण
महिला आरक्षण पर संसद की चिकचिक चीख पुकार में बदल गयी. लालू प्रसाद यादव ने तो यहां तक कह दिया कि महिला आरक्षण विधेयक उनकी लाश पर ही पारित होगा. लेकिन लालू से लेकर तथाकथित प्रगतिशील दलों ने महिला आरक्षण का विरोध नहीं किया. उन्होंने महिला आरक्षण में जाति और मजहब के आधार पर आरक्षण के भीतर आरक्षण के लिए बवाल किया. यह प्रगतिशील दलों की नयी चाल है जिसमें उन्होंने अपने जातिवाद को धर्मनिर्पेक्षता का जामा पहना दिया है. मुस्लिम और इसाईयों के लिए आरक्षण की मांग इसी धर्मनिर्पेक्षता की पैदाइश है.
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जा तुझको माफ कर दिया, तू मुझको माफ कर!
पंजाब विधानसभा के उपाध्यक्ष सतपाल गोसाई द्वारा विधानसभा अध्यक्ष निर्मल सिंह काहलो को लिखे पत्र के संदर्भ में जब पंजाब विधानसभा में चर्चा चली तो कांग्रेस विधायक मक्खन सिंह ने कहा कि राज्य की राजनीति में राजनीतिक रंजिश के कारण कड़वाहट पैदा हो गई है। इस कड़वाहट को समाप्त करने के लिए उपाध्यक्ष गौसाई द्वारा लिखे पत्र में प्रकट विचारों पर विचार कर राजनीति में आई कड़वाहट को समाप्त करना चाहिए।...
परमाणु ताकत का खौफनाक अनुभव
आजकल भारत में परमाणु ताकत का अहसास करानेवालों की कमी नहीं है. बिजली उत्पादन में परमाणु ताकत का इस्तेमाल करने के तर्कों की भरमार है. लेकिन संसार के मानचित्र पर परमाणु ताकत ने जो तबाही मचाई है क्या हमने कभी उसके करीब जाकर परमाणु की उस विनाशक ताकत को अनुभव करने की कोशिश की है कि अगर दांव उल्टा पड़ा तो क्या होगा? जापान के हिरोशिमा और नागासाकी शहर से गुजरते हुए अश्विनी कुमार जोशी की रिपोर्ट- ...
सत्ता में महिला भागीदारी का कड़वा सच
सत्ता में सबको भागीदारी चाहिए। महिलाओं को भी सत्ता में भागीदारी देने के लिए महिला विधेयक राज्यसभा में पास करा लिया गया। सब कुछ ठीक रहा तो सत्ता में महिलाओं की तैंतींस प्रतिशत भागीदारी निश्चित हो जाएगी। हालांकि सपा, राजद और कुछ मुस्लिम नेताओं की राय है कि जो तैंतीस प्रतिशम महिलाएं चुनकर आएंगी, वे केवल 'इलीट' क्लास की होंगी। दलित, पिछड़ी और अल्पसंख्यक महिलाओं की भागीदारी नहीं के बराबर होगी। इसलिए इन राजनैतिक दलों का तर्क है कि दलित, पिछड़ी और अल्पसंख्यक महिलाओं को भी आरक्षण दिया जाए। इन दलों की बात सही है। लेकिन बात यहीं खत्म नहीं होती।...
दलित उत्पीड़न को मिल रहा है दलित सत्ता का संरक्षण
अगर उत्तर प्रदेश में दलित सत्ता का सच देखना हो तो सोनभद्र आइये .यहाँ न सिर्फ आपको त्राहि त्राहि करता मानवाधिकार मिलेगा बल्कि हदें तोड़ रहा पुलिसिया दमन चक्र भी देखने को मिलेगा, मगरदहा में घटी घटना के लगभग एक डेढ़ साल पूर्व २४ सितम्बर २००८ को भी कुछ ऐसा ही हुआ था जब आदिवासी स्त्रियों को सरेआम नंगा करके पीटा गया था लेकिन हकीकत के सामने आने में पूरे एक साल लग गए। ...
पटना निगल जाता है आधा बिहार
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हमेशा से यह कहते हुए केंद्र पर अनदेखी का आरोप लगाते रहे हैं कि बिहार का विकास किए बगैर देश विकसित नहीं हो सकता, मगर जब बात उनके अपने राज्य की आती है तो संभवत: यह तर्क वे भूल जाते हैं और विकास की बड़ी राशि पटना में ही खर्च कर डालते हैं, भले भागलपुर, पूर्णिया या सुपौल जैसे जिले पिछड़े ही रह जाएं।...
दस्यु सरगनाओं की शरणस्थली में दलित पुजारी का मंदिर
चंबल की घनघोर घाटियों को आम तौर पर लोग दस्यु दलों की शरणस्थली मानते हैं परंतु इसके साथ ही यह घाटी सामाजिक समरसता का एक ऐसा उदाहरण भी प्रस्तुत करती है जो समाज में व्याप्त छुआछूत जैसी बीमारियां फैलाने वालों पर तमाचा मारती है। लोगों को यह जानकर हैरत होगी कि देश में इटावा जिले के लखना कस्बा में स्थिति मां कालिका देवी मंदिर ऐसा एकमात्र मंदिर है जिसका पुजारी मंदिर निर्माण के समय से लेकर अब तक सिर्फ दलित ही होता है।...
भ्रष्टाचार को शिष्टाचार बनाना चाहती है भाजपा
पहले राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित होकर भ्रष्टाचार का मामला दर्ज करो। विजिलेंस की जांच करवाओ। कोर्ट में चालान पेश हो जाए। और इसके बाद एक प्रस्ताव आए, अभी तक राजनीतिक विरोध और बदले की भावना से दर्ज मामले वापस लिए जाए। वो भी राज्य के विधानसभा में। भाजपा विधायक और पंजाब विधानसभा के डिप्टी स्पीकर सतपाल गोसाई ने कुछ इस तरह का ही प्रस्ताव पंजाब विधानसभा में रखा है।...
बंगाल में सियासी सुनामी से आतंकित हैं वामपंथी
परिवर्तन की सुनामी से ग्रसित पश्चिम बंगाल में वामपंथियों को कुछ ही दिनों में एक और बड़े तूफ़ान से मुखातिब होना है. यह तूफ़ान सुनामी से भी बड़ा हो सकता है और वामपंथियों के गढ़ को उखाड़ कर फेंक सकता है. इसी खौफ से घबराये सत्तारूढ़ मोर्चे के आला नेताओं की नींद हराम है....
जीएम फसलों पर जोरजबर्दस्ती
इसे आप बायोटेक्नालाजी इमरजेन्सी मान सकते हैं. सरकार अघोषित रूप से ऐसा ही काम कर रही है कि अगर बायोटेक्नालाजी के विरोध में कोई भी स्वर उठता है तो उसे निर्ममता से कुचल दिया जाए. ऐसा लगता है कि आपातकाल का भूत फिर से जाग गया है. अगर कुख्यात इंदिरा प्रायोजित इमरजंसी में सवाल करने पर किसी भी व्यक्ति को जेल की सलाखों के पीछे भेजा जा सकता था तो आज भी बायोटेक्नॉलाजी के सवाल पर हालात वैसे ही हैं. ...
संघ से डरने डराने वाले लोग
"संघ आज की जरूरत है। इसे निकट आकर जानिए-समझिए। अनुभूति के बिना संघ समझा नहीं जा सकेगा। लेकिन कुछ जिद्दी लोग हैं जो संघ जानना-समझना नहीं चाहते। वे सिर्फ आलोचक बने रहना चाहते हैं। संघ की उलझी हुई और विद्रूप छवि बनाना चाहते हैं। यही छवि लोगों को दिखाना चाहते हैं। ऐसे ही लोगों ने संघ का डरावना चेहरा निर्मित किया है। वे चाहते हैं लोग संघ से डरें, भयभीत हों ताकि संघ का विस्तार रूके। देश और दुनिया में संघ से डरने वालों की तादाद कम है, लेकिन डराने वाले ज्यादा हैं।"...
- हिन्दू आतंकवाद का अतिवाद
- वह गुजरात जिसे आप नहीं जानते
- अब भोजपुरी में बोलेगा बाजार
- तालिबान के देसी संस्करण
- विस्फोट पर अस्थाई कार्य विराम
हमारी भाषा से आपको दुख हुआ। हमें खेद है। क्षमा चाहता हूं। पर एक बात बताना चाहता हूं। मेरी भाषा स्पष्ट है। इसलिए आपको दुख ...
EK BBAT AUR MR. SANJIV PAREN,
APNE LIKHA HAI
(आपको आपके नेता कुछ नहीं दे रहे है। तो आप क्या सिर्फ भोंपू बजाने के लिए है। )
MUJHE ...
TO APKA MATLAB HAI,
Mr Sanjiv PAREN,
KI CONGRESS WALE KUCH HADDI KA TUKRA AAP JAISE NICHLE STAR KE KARYKARTA KO DEKAR SAHI KARTI HAI,
JABKI BJP AISA ...
शेष जी का कहना है की न्यू मीदिया पर बी जे पी वालो का कब्ज़ा है | मतलैब अगर कोए शेष जी की बट से ...
कृपया नोट करे -मैं बीजेपी का कार्यकर्ता नहीं हूँ एक वोटर जरूर हूँ
महिला आरक्षण के प्रश्न पर ये पुरुष ?? समाज क्यों इतना उत्तेजित ...

