अर्थ-अनर्थ
बजट तो लॉबीइंग का खेल होता है बंधुवर!
जैसा अपना या अपने घर का बजट होता है वैसा ही देश के बजट को समझते हैं। जिसे हम देश का बजट मानते हैं वह बहुत हद तक सरकार का बजट होता है। लेकिन इससे भी ज्यादा जानने लायक बात यह है कि बजट बनाने के दौरान लॉबीइंग का खेल चलता है, जिसमें ताकतवर समूह अपना अपना हित सुनिश्चित करते हैं। ये समूह देश के भी हो सकते हैं और विदेशी भी।
वित्तमंत्री जी, कृपया ध्यान दीजिए
आम आदमी की कीमत पर प्राप्त की गई विकास दर क्या जायज है? हमारी राष्ट्रीय आय तो 7-8 प्रतिशत के बीच बढ़ने की उम्मीद है मगर देश में कृषि जगत का विकास 3 प्रतिशत से भी नीचे रहने की आशंका है, ऐसा क्यों? क्या गरीबों की थाली से अन्न गायब कर डेब्ट-जीडीपी दर को कम करना एक सही रणनीति है? ऐसे में निश्चय ही इस बार प्रणब मुखर्जी पर वित्तीय घाटा और महंगाई के बीच सामंजस्य बिठाने का दबाव रहेगा।
निजीकरण को दीदी की हरी झंडी
भविष्य में साल 2010 के रेलवे बजट को निजीकरण के लिए दरवाजा खोलने वाला बजट माना जाएगा. पहली बार द्रुत गति परियोजनाओं के लिए एक टास्क फोर्स के गठन की घोषणा की गयी है जो भारी भरकम निवेश वाली रेल परियोजनाओं के लिए पथ प्रदर्शक का काम करेगी. रेल मंत्री ने अपने भाषण में भले ही निजीकरण न करने की बात कही हो लेकिन निजीकरण के सारे शुरुआती उपाय उन्होंने कर दिये हैं....रेल बजट में कैसे समाये देश?
64 हजार किलोमीटर से अधिक का रेल नेटवर्क और प्रतिदिन 17 हजार ट्रेनों के द्वारा हर साल करीब छह अरब लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचानेवाली भारतीय रेलवे आखिरकार क्या है? एक परिवहन सेवा प्रदाता कंपनी या फिर एक सरकारी मंत्रालय? आप भी यही कहेंगे कि यह एक रेल सेवा प्रदाता संस्थान है जो भारत सरकार में एक मंत्रालय के रूप में काम करता है. क्योंकि यह सबसे बड़ा मंत्रालय है इसलिए सिर्फ रेलमंत्री को ही यह अधिकार प्राप्त है कि वह अपना बजट अलग से प्रस्तुत करे. ...लंबे सफर पर ममता की दौड़
नए रेल बजट का पूरा सच तो ममता बनर्जी के भाषण और अन्य दस्तावेज मिलने के बाद ही पता चल पाएगा। लेकिन पहली नजर में यही लगता है कि मंत्री महोदया ने इंफ्रास्ट्रकर को बढ़ाने पर पूरा ध्यान दिया है।...घाटे के बजट से पाटेंगे बदहाली, बांटेगे खुशहाली
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने सोमवार को विधानसभा में तीन हजार 180.03 करोड़ सकल वित्तीय घाटे वाला बजट प्रस्तुत करते हुए कहा कि उनकी सरकार घाटे के बाद भी प्रदेश के विकास की गति को रुकने नहीं देगी। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्ष में हर लक्ष्य को पूरा किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह जो वित्त विभाग का प्रभार भी संभाल रहे हैं, ने कहा कि वर्ष 2010-11 का बजट पूरी तरह गरीबों पर केन्द्रित है।
आशंकाओं से भरा प्रणव मुखर्जी का बजट पिटारा
इसी माह के अंत में प्रणव मुखर्जी अपने वर्तमान कार्यकाल का दूसरा बजट पेश करने जा रहे हैं. मुखर्जी २५ साल पहले समाजवादी अर्थव्यवस्था वाले भारत का भी बजट पेश कर चुके हैं. इस दौरान कांग्रेस के ही वित्तमंत्री रहे मनमोहन सिंह ने अर्थव्यवस्था की जो सर्जरी उससे भारत में पूंजीवादी अर्थव्यवस्था ने जन्म ले लिया. इस पूंजीवादी अर्थव्यवस्था को परखते हुए भी बीस साल हो गये. कमान एक बार फिर प्रणव दा के हाथ में है. सवाल है कि क्या वे एक ऐसा बजट दे पायेंगे जो आम आदमी के हित में हो? प्रेम शुक्ल का आंकलन-
बिहार के विकास की कहानी, सुशील मोदी की जुबानी
सुशील मोदी बिहार के उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री हैं. बिहार के जादुई विकास के आंकड़े के बारे में वे कहते हैं कि बिहार में उद्योग, शिक्षा और सेवाक्षेत्र ने मिलकर जो कमाल किया है उसी का परिणाम है कि बिहार ने विकास का जादुई आंकड़ा छू लिया है. बिहार के विकास की कहानी, सुशील मोदी की जुबानी.
बिहार में बदल गये अर्थशास्त्र के स्थापित सिद्धांत
बिहार ने विकास दर का जादुई आंकड़ा छू लिया. किसी को यकीन नहीं. कोई यह मानने को तैयार नहीं कि बिहार जैसे राज्य में विकास में किसी को विश्वास नहीं है. चारों ओर बिहार में विकास के आंकड़ों को स्वीकार करने की बजाय उस पर सवाल खड़ा किया जा रहा है. आइये समझते हैं कि बिहार ने विकास की दहाई का जादुई आंकड़ा छुआ कैसे?
कर्नाटक पहुंचा कॉरपोरेट उपनिवेशवाद
अब कर्नाटक दुनिया की सबसे बड़ी स्टील कम्पनी आर्सेलर-मित्तल के निशाने पर है। झारखण्ड और ओडीशा में सक्रिय स्थानीय जनप्रतिरोध के चलते उसके प्रस्तावित इस्पात संयन्त्रों के लिये ज़मीन मिलने में आ रही देरी, कठिनाई या अनिश्चितता की वजह से वह कर्नाटक में अपना जाल बिछा रही है। उसकी गिद्धदृष्टि वहां के उम्दा, बेशक़ीमती और दुर्लभ खनिज पदार्थों एवं प्राकृतिक संसाधनों पर है।
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सुदर्शन का (कु) दर्शन
जबसे आरएसएस के लोगों की आतंकवादी घटनाओं में संलिप्तता सामने आयी है, तब से आरएसएस के नेता बौखला गए हैं। इस बौखलाहट में ही शायद संघ के इतिहास में पहली बार हुआ है कि इसके स्वयंसेवक विरोध प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर उतरे। इसी बौखलाहट में आरएसएस के एक्स चीफ केएस सुदर्शन का मानसिक संतुलन बिगड़ गया और सोनिया गांधी के बारे में ऐसे शब्द बोल दिए, जिन्हें एक विकृत मानसिकता का आदमी ही बोल सकता है।...
सीआईए नहीं केजीबी एजंट कहिए जनाब
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरसंघचालक ने 10 नवंबर को सोनिया गांधी पर सीआईए एजंट होने का आरोप लगाकर सनसनी पैदा कर दिया है. पूरी की पूरी कांग्रेस उत्तेजित है और संघ भी बैकफुट पर चला गया है. सुदर्शन के आस पास के लोगों का कहना है कि सुदर्शन जी भुलक्कड़ हो गये हैं और उन्हें कुछ ठीक से याद नहीं रहता. शायद इसीलिए उन्होंने इतनी बड़ी चूक कर दी. ...
सोनिया का सच जान बेकाबू क्यों होते हो?
एक बार फिर लोकतंत्र पर आपातकाल मंडरा पड़ा है. राजमाता सोनिया गांधी के सिपहसालारों ने कांग्रेसी गुण्डों, माफियाओं और लोकतंत्र के हत्यारों का आह्वान किया है कि वह देशभर में संघ कार्यालयों पर धावा बोल दे. इसका तत्काल प्रभाव हुआ और कांग्रेसी गुण्डों ने संघ के दिल्ली मुख्यालय पर धावा भी बोल दिया. ठीक वैसे ही जैसे इंदिरा गांधी की मौत के बाद सिखों को निशाना बनाया गया था. हिंसक और अलोकतातंत्रिक मानसिकता से ग्रस्त कांग्रेसी सोनिया का सच जानकर आखिर इस तरह बेकाबू क्यों हो रहे हैं?...
नये निजाम के दामन पर है ज्यादा बड़ा दाग
मुंबई। महाराष्ट्र के नए निजाम भी कोई दूध के धुले नहीं हैं। कांग्रेस आलाकमान ने अशोक चव्हाण को फर्जीवाड़े से फ्लैट पाने के आरोप में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की गद्दी से हटा दिया। लेकिन नए मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण भी उसी तरह के फर्जीवाड़े में गले तक डूबे हुए हैं। उन्होंने जितने बड़े बड़े झूठ बोलकर सरकार से फ्लैट हथियाए हैं वे कांग्रेस के लिए ज्यादा दागदार हैं।...
अजमेर चार्जशीट और संघी उछल-कूद
बढ़ते पैमाने पर इसके साक्ष्य सामने आ रहे हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर एस एस) से जुड़े लोगों का आतंकवादी हमलों में हाथ रहा है। इन हालात में आर एस एस इस पुराने सूत्र पर चल रहा लगता है कि हमला ही सबसे अच्छा बचाव है। उसने 10 नवंबर को देशव्यापी विरोध कार्रवाइयों का आह्वान किया है। इन कार्रवाइयों में संघ के शीर्ष नेताओं के शामिल होने की बात कही जा रही है। बहरहाल, इसकी चर्चा हम जरा बाद में करेंगे।...
अपने होने पर ही हैरान
‘चुप्पी-चुप्पी नहीं नहीं, बोलेंगे अब सभी-सभी’ इन्हीं नारों से दाहोद (गुजरात) का सीनियर रेलवे संस्थान परिसर 31 अक्टूबर को पूरे दिन गूंजता रहा। यहां गुजरात के बड़ोदरा, पंचमहल, सुरत, भड़ूच, डांग, बालसाड और साबरकांठा जिले से लगभग तीन हजार के आस पास विमुक्त एवं घुमंतू समाज से ताल्लुक रखने वाले लोग इकट्ठे हुए थे। मौका था, अधिकार अभियान की घोषणा का। उस समाज के लिए जो इस लोकतांत्रिक देश में अधिकार का अर्थ अभी तक समझ नहीं पाएं हैं। ...
गोली लगने के बाद क्या गांधी ने कहा था- हे राम ?
यह एक ऐसा सवाल है जिस पर अब विवाद होने लगा है. 30 जनवरी 1948 को क्या जब महात्मा गांधी को नाथूराम गोडसे ने गोली मारी तो महात्मा गांधी ने अपने मुंह से हे! राम का संबोधन किया था? उस वक्त घटनास्थल पर मौजूद रहे एक प्रत्यक्षदर्शी के डी मदान का कहना है कि "मैंने नहीं सुना था कि उन्होंने हे राम कहा था या नहीं."...
भद्दा और बेदम रहा संघ का विरोध प्रदर्शन
स्कूल जाते बच्चों के भी हाथ में भगवा थमाकर भले ही संघ ने शक्ति प्रदर्शन की भरपूर कोशिश की हो लेकिन 10 नवम्बर का दिन उसके इतिहास में कोई बडी घटना के रूप में याद नहीं किया जायेगा। हॉ हम बात कर रहे है राजस्थान के भरतपुर जिला मुख्यालय की जहॉ देश भर की ही तरह हिन्दुवादी संघटनों ने अपने उपर लग रहे ‘भगवा आतंकवाद’ के आरोपों के विरोध में शक्ति प्रदर्शन किया था। भरतपुर जहॉ संघ प्रचारक क रूप में भाजपा के पीएमइन वेंटिग लालकृष्ण आडवानी ने अपनी सेवाऐं दी है संघ का ये विरोध प्रदर्शन एक दम भददा और हल्का रहा।...
एनसीपी के 'दादा' का दांव
महाराष्ट्र में कांग्रेस में परिवर्तन हुआ तो राष्ट्रवादी कांग्रेस ने भी अपने पत्ते खोल दिये. राज्य में लंबे समय से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के भीतर चल रही सत्ता के दावेदारी पर एनसीपी ने आखिरकार प्रदेश की प्रशासनिक कमान अपनी ओर से शरद पवार के भतीजे अजीत पवार को सौंप दी है. अब गुरुवार को शाम साढ़े चार बजे पृथ्वीराज चव्हाण के साथ अजीत "दादा" पवार उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे....
पीएमओ वाले पृथ्वीराज
महाराष्ट्र के नये मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण यूपीए सरकार पार्ट वन और पार्ट टू में बतौर पीएमओ मिनिस्टर जाने जाते हैं. प्रधानमंत्री कार्यालय में रहते हुए भी उन्होंने कभी ताकतवर होने का दंभ नहीं पाला और चुपचाप काम करते रहे. बिट्स पिलानी से बीई और बर्कले विश्वविद्यालय से एमएस की डिग्री हासिल करनेवाले पृथ्वीराज की राजनीतिक कमेस्ट्री ने उनके सार्वजनिक जीवन में पहली बार इतना गाढ़ा रंग उड़ेला है....
सुलग रहा है मेरठ 'हिन्दुस्तान'
एक ओर हिन्दुस्तान अखबार अपनी अलग कंपनी बनाकर अखबार को चमकाने और अखबार का विस्तार करने में लगा है वहीं दूसरी ओर हिन्दुस्तान के विभिन्न संस्करणों में हालात ठीक नहीं है. हिन्दुस्तान के मेरठ संस्करण में इन दिनों इस्तीफे दिये जा रहे हैं लेकिन प्रचारित किया जा रहा है कि जो आफिस नहीं आ रहे हैं वे छुट्टी पर चले गये हैं....
आलोक तोमर के बगल में बसे किशोर मालवीय
सीएनईबी में पहले से एक सलाहकार संपादक थे- आलोक तोमर. अब दूसरे सलाहकार संपादक भी वहां नियुक्त हो गये हैं किशोर मालवीय. उन्होंने सीएनईबी चैनल के साथ बतौर कंसल्टिंग एडिटर अपनी नई पारी की शुरुआत की है। सीएनईबी से पहले वे ‘वायस ऑफ इंडिया’ न्यूज चैनल के साथ जुड़े हुए थे। उन्होंने करीब दो दशक के कॅरियर में देश के नामी-गिरामी मीडिया संस्थानों में कई जिम्मेदारियां निभाईं हैं।...
सुरक्षा परिषद की छांव में खेती पर दांव
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने संसद में दिये गये अपने भाषण में भारत से मिले प्यार की भूरि भूरि प्रशंसा जरूर की लेकिन अपनी व्यावसायिक मजबूरियों को छिपा नहीं सके. बराक ओबामा ने संसद के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करते हुए जहां एक ओर भारत को महाशक्ति करार देकर उसके लिए संयुक्त राष्ट्र में स्थायी सदस्यता को अपना समर्थन दिया वहीं भारत और अमेरिका द्वारा मिलकर खेती के क्षेत्र में एक और हरित क्रांति के आगाज की घोषणा की....
आतंक नहीं कश्मीर केन्द्रित हुई ओबामा यात्रा
रविवार की देर शाम भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा आयोजित भोज में ओमर अब्दुल्ला के शामिल होने से जो आशंका पैदा हुई थी वह सोमवार को हैदराबाद हाउस में और प्रबल रूप में सामने आ गयी जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अमेरिकी राष्ट्रपति की उपस्थिति में स्वीकार किया कि वे पाकिस्तान से बात करते वक्त "के" शब्द पर बात करने से नहीं कतराते हैं....
भारत से धंधा, पाक को चंदा
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक हुसैन ओबामा ने अपना तीन दिवसीय दौरा पूरा कर लिया. मुंबई उतरकर दिल्ली दरबार तक उनकी दस्तक भारत पर अमेरिका के मजबूत पकड़ की मिसाल बन गया. निश्चित रूप से उनका दौरा भारत के लिए उतना महत्वपूर्ण नहीं जितना खुद अमेरिका के लिए है. मंदी के दौर से जूझ रहे अमेरिका को "कारपोरेट" जगत का धंधा दिलाने के लिए उन्होंने न केवल भारत को महाशक्ति करार दे दिया बल्कि सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता का समर्थन भी कर दिया....
- आलोक तोमर की आपबीती
- वह गुजरात जिसे आप नहीं जानते
- हिन्दू आतंकवाद का अतिवाद
- सिमी से भी खतरनाक है संघ का स्वरूप
- बाबा रामदेव का दांव
बहुत अच्छा व सच्चाईयो पर आधारित लेख है। सेकुलर भारत के निर्माँण मे ऐसे लेख का अहम योगदान होगा. संपादक- आपकी आवाज़.कांम
बहुत अच्छा व सच्चाईयो पर आधारित लेख है। सेकुलर भारत के निर्माँण मे ऐसे लेख का अहम योगदान होगा. संपादक- आपकी आवाज़.कांम
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...


