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अर्थ-अनर्थ

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गायब हुआ गुड़ तो मंहगी हो गयी चीनी

बहुत दिनों बाद ऐसा मौका आया जब चेला चीनी ने अपने गुरु गुड़ को कीमतों के मामले में फिर से शिकस्त दे दी है. इन दिनों खुदरा बाजार में गुड़ की कीमत 35 रुपये है जबकि चीनी 44-45 रुपये किलो बिक रहा है और बहुत जल्द 50 रुपये प्रति किलो बिकने की तैयारी में है.
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खुशहाली का जीडीपी से कोई रिश्ता नहीं होता

भारत सरकार देश के विकास के लिए जीडीपी बढ़ाने पर पूरा जोर देती है। उसकी मान्यता है कि जीडीपी अगर 10 फीसदी पर पहुंच जाय तो देश की समस्याएं जैसे गरीबी, भुखमरी, बेरोजगारी, गैर-बराबनी काफी हद तक समाप्त हो जायेंगी। पर दुनिया के अन्य देशों का अनुभव इस बात की पुष्टि नहीं करता। इस लेख में यही दिखाया गया है कि जीडीपी ऊँचा होने पर भी लोगों में खुशहाली नहीं आ सकती और जीडीपी कम भी हो तो भी खुशहाली लायी जा सकती है। सं.
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आंकड़ों के अंकगणित से मारेंगे गरीबी

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भारत में गरीबों की वास्तविक संख्या क्या है? योजना आयोग द्वारा गठित तेन्दुलकर कमेटी कहती है कि कुल आबादी के 37 फीसदी. अब जिस सरकार के लिए योजना आयोग योजनाएं बनाती है उसी सरकार के मुखिया मनमोहन सिंह कह रहे हैं कि देश में गरीबी के ताजे आंकड़े जारी होंगे. साफ है, प्रधानमंत्री को गरीबी के आंकड़े नागवार गुजरे हैं और वे अब आंकड़ों से मारेंगे गरीबी. ...
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मंहगाई के मुसीबत की अनकही इबारत

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हमारे कृषि मंत्री शरद पवार कह रहे हैं कि मंहगाई रोक पाना उनके वश में नहीं है. अब वे साफ तौर पर अपने हाथ खड़े कर चुके हैं और कह रहे हैं कि अगर मंहगाई को रोकना है तो राज्य सरकारों को ही पहल करनी होगी. राज्य सरकारें केन्द्र सरकार को दोष दे रही हैं. लेकिन मंहगाई की लगातार बढ़ती मार का असल कारण क्या है, बता रहे हैं शेष नारायण सिंह-...
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लालू के ब्लैक मुनाफे पर ममता का ह्वाइट पेपर

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रेलवे पर लाये गये ममता बनर्जी के ह्वाइट पेपर पर ममता बनर्जी द्वारा लाये ह्वाइट पेपर को लालू प्रसाद ने ब्लैक पेपर कहा है. लेकिन हकीकत यह है कि ममता बनर्जी रेलवे के ह्वाइट पेपर में लालू के जिस मुनाफे वाली फोर्जरी का राज फास किया है उसके बारे में विस्फोट.कॉम दो बार सवाल उठा चुका है. ...
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गरीबी रेखा से भी नीचे अब आ गयी दरिद्र रेखा

प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार रह चुके अर्थशास्त्री सुरेश तेन्दुलकर ने दावा किया है कि गरीबी नापने के लिए उन्होंने नया तरीका विकसित किया है. इस नये तरीके का कमाल है कि भारत में हर तीसरा भारतीय दरिद्र हो चुका है.
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शेयर बाजार में लापता होने के कगार पर हैं 574 कंपनियां

आम निवेशकों से करोड़ों की रकम जुटाकर लापता हो चुकी 121 कंपनियों की सूची तो कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय ने बड़ी प्रमुखता से अपनी वेबसाइट पर पेश कर रखी है। इसमें बताया गया है कि कैसे कोलकाता की वेस्टर्न इंडिया इंडस्ट्रीज निवेशकों से 232.60 करोड़ जुटाकर लापता हो चुकी है। लेकिन इस बात पर न तो मंत्रालय और न ही पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी का कोई ध्यान है कि देश के दो प्रमुख स्टॉक एक्सचेंजों बीएसई और एनएसई में सूचीबद्ध 574 कंपनियां लापता होने की कगार पर पहुंच गई हैं।
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आर्थिक विकास के बीच बढ़ती लैंगिक-असमानता

भारत सरकार कहती है कि पहली बार देश में प्रति व्यक्ति आय 3000 रुपए/महीने को पार कर रही है। उधर इस साल विश्व आर्थिक मंच फोरम (डब्ल्यूईएफ) के लैंगिक-समानता पर हुए मूल्यांकन में 134 देशों के बीच भारत की 114वीं रैंकिंग रही है। जैसे एक बात (आर्थिक विकास) दूसरी (मानवीय विकास) को काटते हुए जता रही है कि विकास को दर या प्रतिव्यक्ति आय के आंकड़ों से नापना ठीक नहीं है। क्योंकि देश की 80% प्रतिशत पूंजी पर 20% घरानों का कब्जा है।
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भ्रष्टाचार को देखने का पूंजीवादी नजरिया

भारत में भ्रष्टाचार अब गर्म बहस का मुद्दा नहीं रहा. अगर ऐसा होता तो मधु कोड़ा के भ्रष्टाचार पर अखबारों के पन्ने भरे रहते और महीनों टीवी चैनल पर शायद दूसरा कोई कार्यक्रम प्रसारित नहीं होता. याद करिए नब्बे की शुरुआत का वह समय जब हर्षद मेहता का शेयर बाजार घोटाला हुआ था या फिर उससे थोड़ा पहले 65 करोड़ के एक "मामूली भ्रष्टाचार" पर दुनिया की सबसे बड़ी संसद पलट दी गयी थी।
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मोंटेक सिंह जी, मंहगाई सबसे बड़ा मुद्दा है

मंहगाई प्रति दिन बढ़ रही है। दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी के बंद को जिस तरह से समर्थन मिला है उससे साफ है कि जनता मंहगाई से त्रस्त है फिर भी योज़ना आयोग के उपाध्यक्ष श्री मोंटेक सिंह आहूलवालिया साहब का कहना है कि महंगाई को लेकर आम आदमी बेबज़ह हल्ला-गुल्ला न करें। खाद्य पदार्थों की कीमत बढ़ने से इसका सीधा फायदा किसानों को मिल रहा है। अब दलालों और व्यापारियों के लिए किसानों की जेब में सेंध लगाना असंभव है।
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सुदर्शन का (कु) दर्शन
जबसे आरएसएस के लोगों की आतंकवादी घटनाओं में संलिप्तता सामने आयी है, तब से आरएसएस के नेता बौखला गए हैं। इस बौखलाहट में ही शायद संघ के इतिहास में पहली बार हुआ है कि इसके स्वयंसेवक विरोध प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर उतरे। इसी बौखलाहट में आरएसएस के एक्स चीफ केएस सुदर्शन का मानसिक संतुलन बिगड़ गया और सोनिया गांधी के बारे में ऐसे शब्द बोल दिए, जिन्हें एक विकृत मानसिकता का आदमी ही बोल सकता है।...
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सीआईए नहीं केजीबी एजंट कहिए जनाब
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरसंघचालक ने 10 नवंबर को सोनिया गांधी पर सीआईए एजंट होने का आरोप लगाकर सनसनी पैदा कर दिया है. पूरी की पूरी कांग्रेस उत्तेजित है और संघ भी बैकफुट पर चला गया है. सुदर्शन के आस पास के लोगों का कहना है कि सुदर्शन जी भुलक्कड़ हो गये हैं और उन्हें कुछ ठीक से याद नहीं रहता. शायद इसीलिए उन्होंने इतनी बड़ी चूक कर दी. ...
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सोनिया का सच जान बेकाबू क्यों होते हो?
एक बार फिर लोकतंत्र पर आपातकाल मंडरा पड़ा है. राजमाता सोनिया गांधी के सिपहसालारों ने कांग्रेसी गुण्डों, माफियाओं और लोकतंत्र के हत्यारों का आह्वान किया है कि वह देशभर में संघ कार्यालयों पर धावा बोल दे. इसका तत्काल प्रभाव हुआ और कांग्रेसी गुण्डों ने संघ के दिल्ली मुख्यालय पर धावा भी बोल दिया. ठीक वैसे ही जैसे इंदिरा गांधी की मौत के बाद सिखों को निशाना बनाया गया था. हिंसक और अलोकतातंत्रिक मानसिकता से ग्रस्त कांग्रेसी सोनिया का सच जानकर आखिर इस तरह बेकाबू क्यों हो रहे हैं?...
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नये निजाम के दामन पर है ज्यादा बड़ा दाग
मुंबई। महाराष्ट्र के नए निजाम भी कोई दूध के धुले नहीं हैं। कांग्रेस आलाकमान ने अशोक चव्हाण को फर्जीवाड़े से फ्लैट पाने के आरोप में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की गद्दी से हटा दिया। लेकिन नए मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण भी उसी तरह के फर्जीवाड़े में गले तक डूबे हुए हैं। उन्होंने जितने बड़े बड़े झूठ बोलकर सरकार से फ्लैट हथियाए हैं वे कांग्रेस के लिए ज्यादा दागदार हैं।...
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अजमेर चार्जशीट और संघी उछल-कूद
बढ़ते पैमाने पर इसके साक्ष्य सामने आ रहे हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर एस एस) से जुड़े लोगों का आतंकवादी हमलों में हाथ रहा है। इन हालात में आर एस एस इस पुराने सूत्र पर चल रहा लगता है कि हमला ही सबसे अच्छा बचाव है। उसने 10 नवंबर को देशव्यापी विरोध कार्रवाइयों का आह्वान किया है। इन कार्रवाइयों में संघ के शीर्ष नेताओं के शामिल होने की बात कही जा रही है। बहरहाल, इसकी चर्चा हम जरा बाद में करेंगे।...
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अपने होने पर ही हैरान
‘चुप्पी-चुप्पी नहीं नहीं, बोलेंगे अब सभी-सभी’ इन्हीं नारों से दाहोद (गुजरात) का सीनियर रेलवे संस्थान परिसर 31 अक्टूबर को पूरे दिन गूंजता रहा। यहां गुजरात के बड़ोदरा, पंचमहल, सुरत, भड़ूच, डांग, बालसाड और साबरकांठा जिले से लगभग तीन हजार के आस पास विमुक्त एवं घुमंतू समाज से ताल्लुक रखने वाले लोग इकट्ठे हुए थे। मौका था, अधिकार अभियान की घोषणा का। उस समाज के लिए जो इस लोकतांत्रिक देश में अधिकार का अर्थ अभी तक समझ नहीं पाएं हैं। ...
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गोली लगने के बाद क्या गांधी ने कहा था- हे राम ?
यह एक ऐसा सवाल है जिस पर अब विवाद होने लगा है. 30 जनवरी 1948 को क्या जब महात्मा गांधी को नाथूराम गोडसे ने गोली मारी तो महात्मा गांधी ने अपने मुंह से हे! राम का संबोधन किया था? उस वक्त घटनास्थल पर मौजूद रहे एक प्रत्यक्षदर्शी के डी मदान का कहना है कि "मैंने नहीं सुना था कि उन्होंने हे राम कहा था या नहीं."...
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भद्दा और बेदम रहा संघ का विरोध प्रदर्शन
स्कूल जाते बच्चों के भी हाथ में भगवा थमाकर भले ही संघ ने शक्ति प्रदर्शन की भरपूर कोशिश की हो लेकिन 10 नवम्बर का दिन उसके इतिहास में कोई बडी घटना के रूप में याद नहीं किया जायेगा। हॉ हम बात कर रहे है राजस्थान के भरतपुर जिला मुख्यालय की जहॉ देश भर की ही तरह हिन्दुवादी संघटनों ने अपने उपर लग रहे ‘भगवा आतंकवाद’ के आरोपों के विरोध में शक्ति प्रदर्शन किया था। भरतपुर जहॉ संघ प्रचारक क रूप में भाजपा के पीएमइन वेंटिग लालकृष्ण आडवानी ने अपनी सेवाऐं दी है संघ का ये विरोध प्रदर्शन एक दम भददा और हल्का रहा।...
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एनसीपी के 'दादा' का दांव
महाराष्ट्र में कांग्रेस में परिवर्तन हुआ तो राष्ट्रवादी कांग्रेस ने भी अपने पत्ते खोल दिये. राज्य में लंबे समय से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के भीतर चल रही सत्ता के दावेदारी पर एनसीपी ने आखिरकार प्रदेश की प्रशासनिक कमान अपनी ओर से शरद पवार के भतीजे अजीत पवार को सौंप दी है. अब गुरुवार को शाम साढ़े चार बजे पृथ्वीराज चव्हाण के साथ अजीत "दादा" पवार उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे....
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पीएमओ वाले पृथ्वीराज
महाराष्ट्र के नये मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण यूपीए सरकार पार्ट वन और पार्ट टू में बतौर पीएमओ मिनिस्टर जाने जाते हैं. प्रधानमंत्री कार्यालय में रहते हुए भी उन्होंने कभी ताकतवर होने का दंभ नहीं पाला और चुपचाप काम करते रहे. बिट्स पिलानी से बीई और बर्कले विश्वविद्यालय से एमएस की डिग्री हासिल करनेवाले पृथ्वीराज की राजनीतिक कमेस्ट्री ने उनके सार्वजनिक जीवन में पहली बार इतना गाढ़ा रंग उड़ेला है....
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सुलग रहा है मेरठ 'हिन्दुस्तान'
एक ओर हिन्दुस्तान अखबार अपनी अलग कंपनी बनाकर अखबार को चमकाने और अखबार का विस्तार करने में लगा है वहीं दूसरी ओर हिन्दुस्तान के विभिन्न संस्करणों में हालात ठीक नहीं है. हिन्दुस्तान के मेरठ संस्करण में इन दिनों इस्तीफे दिये जा रहे हैं लेकिन प्रचारित किया जा रहा है कि जो आफिस नहीं आ रहे हैं वे छुट्टी पर चले गये हैं....
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आलोक तोमर के बगल में बसे किशोर मालवीय
सीएनईबी में पहले से एक सलाहकार संपादक थे- आलोक तोमर. अब दूसरे सलाहकार संपादक भी वहां नियुक्त हो गये हैं किशोर मालवीय. उन्होंने सीएनईबी चैनल के साथ बतौर कंसल्टिंग एडिटर अपनी नई पारी की शुरुआत की है। सीएनईबी से पहले वे ‘वायस ऑफ इंडिया’ न्यूज चैनल के साथ जुड़े हुए थे। उन्होंने करीब दो दशक के कॅरियर में देश के नामी-गिरामी मीडिया संस्थानों में कई जिम्मेदारियां निभाईं हैं।...
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सुरक्षा परिषद की छांव में खेती पर दांव
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने संसद में दिये गये अपने भाषण में भारत से मिले प्यार की भूरि भूरि प्रशंसा जरूर की लेकिन अपनी व्यावसायिक मजबूरियों को छिपा नहीं सके. बराक ओबामा ने संसद के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करते हुए जहां एक ओर भारत को महाशक्ति करार देकर उसके लिए संयुक्त राष्ट्र में स्थायी सदस्यता को अपना समर्थन दिया वहीं भारत और अमेरिका द्वारा मिलकर खेती के क्षेत्र में एक और हरित क्रांति के आगाज की घोषणा की....
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आतंक नहीं कश्मीर केन्द्रित हुई ओबामा यात्रा
रविवार की देर शाम भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा आयोजित भोज में ओमर अब्दुल्ला के शामिल होने से जो आशंका पैदा हुई थी वह सोमवार को हैदराबाद हाउस में और प्रबल रूप में सामने आ गयी जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अमेरिकी राष्ट्रपति की उपस्थिति में स्वीकार किया कि वे पाकिस्तान से बात करते वक्त "के" शब्द पर बात करने से नहीं कतराते हैं....
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भारत से धंधा, पाक को चंदा
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक हुसैन ओबामा ने अपना तीन दिवसीय दौरा पूरा कर लिया. मुंबई उतरकर दिल्ली दरबार तक उनकी दस्तक भारत पर अमेरिका के मजबूत पकड़ की मिसाल बन गया. निश्चित रूप से उनका दौरा भारत के लिए उतना महत्वपूर्ण नहीं जितना खुद अमेरिका के लिए है. मंदी के दौर से जूझ रहे अमेरिका को "कारपोरेट" जगत का धंधा दिलाने के लिए उन्होंने न केवल भारत को महाशक्ति करार दे दिया बल्कि सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता का समर्थन भी कर दिया....
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