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अर्थ-अनर्थ

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इंडियाबुल्स पर मेहरबान है नेहरू गांधी परिवार

अपने जन्म के साथ अब तक इंडिया बुल्स देश की सबसे चर्चित कंपनी है. 10 हजार करोड़ के आधारपूंजी वाली इस फाइनेंसियल कंपनी ने जितनी तेजी से विस्तार किया है वह दो नौसिखिए एमबीए छात्रों की प्रतिभा का ही कमाल नहीं है. इंडियाबुल्स पहली बार तब चर्चा में आयी जब दुनिया के एक बड़े उद्योगपति लक्ष्मी निवास मित्तल ने इसमें पैसा लगाना शुरू किया. लेकिन अब खबर है कि नेहरू-गांधी परिवार की कृपा भी इस व्यावसायिक घराने पर हो गयी है जिसके कारण एक व्यावसायिक कंपनी सरकारी साड़ में तब्दील हो गयी है.
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बुनकर उद्योग को महात्मा गांधी का सहारा

इटावा में बुनकरी कारोबार आजादी से बहुत पहले शुरु हो गया था. 1930 में महात्मा गांधी इटावा आये थे. गांधी का सूत प्रेम देखकर बुनकरों के मन में नया उत्साह पैदा हुआ और आजादी के वक्त तक इटावा में बुनकरी का कारोबार बहुत तेजी से बढ़ा. आजादी के बाद भी यह बढ़त जारी रही लेकिन तब तक जब तक सरकार ने विकास की योजनाओं का श्रीगणेश नहीं कर दिया.
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इस अर्थव्यवस्था की मौत का संकेत है यह मौत

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आप शायद अरविन्द पाठक को नहीं जानते. मैं भी नहीं जानता. अरविन्द पाठक को जानने का कारण बड़ा दर्दनाक है फिर भी उनकी मौत के बाद ही सही हम सबको अरविन्द पाठक को जानना चाहिए. 38 साल के अरविन्द पाठक दिल्ली के महिपालपुर एक्सटेंशन इलाके में रहते थे. बुधवार को खबर आयी कि उन्होंने अपनी बेटी, अपनी पत्नी को जहर खिलाकर संसार से विदा किया फिर बचा खुचा जहर खुद खाकर सदा सदा के लिए मौत की नींद सो गये. अरविन्द पाठक के साथ ऐसा क्या हुआ कि उन्होंने ऐसा निर्मम निर्णय ले लिया? ...
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खाये पिये बौराए लोग

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भारत के संविधान की धारा 21 में जीवन रक्षा को बुनियादी अधिकार माना गया है लेकिन जिस देश में आम आदमी को भरपेट भोजन हासिल होने की सुविधा न प्राप्त हो वहां संविधान की यह धारा अपने आप महत्वहीन हो जाती है. बढ़ती जनसंख्या के अनुरूप खाद्यान्न उत्पादन न हो पाने के चलते यदि प्रति व्यक्ति खाद्यान्न की उपलब्धता नहीं होती तो मंहगाई का भस्मासुर आम आदमी की पेट की आग को जलाता रहेगा. अंतरराष्ट्रीय एजंसी यूनेस्को कहती है कि भारत दुनिया का सबसे कुपोषित देश है. ...
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बाजार में लौटने को बेकरार

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यह दौर शब्दों के अर्थ बदल देने का दौर है. मसलन अर्थव्यवस्था की सबसे अनुदार व्यवस्था को हम उदारीकरण के रूप में जानते हैं तो अतिशय केन्द्रित बाजार व्यवस्था को हम मुक्त बाजार कहकर संबोधित करते हैं. इसी तरह एक और शब्द के साथ आजकल पूरा न्याय नहीं होता. वह शब्द है बाजार. अस्सी के दशक के बाद भारत में उदारीकरण की जिस अनुदार अर्थव्यवस्था की शुरूआत हुई उसका विरोध भी साथ के साथ खड़ा हुआ. पिछले बीस बाईस सालों में बाजार को वाद से जोड़कर जिस बाजारवाद के खिलाफ आंदोलन चलाये गये उससे बाजार शब्द मार्केट का अनुवाद होकर रह गया....
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वीजा कार्ड को टक्कर देने आ रहा है इंडिया पे कार्ड

इस समय देश में 16.71 करोड़ क्रेडिट व डेबिट कार्ड है, जिनमें से 3 करोड़ क्रेडिट कार्ड हैं और बाकी 13.71 करोड़ डेबिट कार्ड हैं। इन कार्डों से होनेवाले 97 फीसदी सौदे घरेलू ही होते हैं, लेकिन क्या आपको पता है कि इनसे की गई हर लेन-देन और खरीद-फरोख्त का ब्यौरा पल-पल दो अमेरिकी कंपनियों वीसा और मास्टरकार्ड के रिकॉर्ड में दर्ज होता रहता है। ऐसा इसलिए क्योंकि देश के हर क्रेडिट या डेबिट कार्ड को पेमेंट सिस्टम की सेवा यही कंपनियां मुहैया कराती हैं। थोड़ा-सा भी संदेह हो तो देख लीजिए, आपके कार्ड के कोने में भी इन्हीं का ठप्पा लगा होगा।
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मुकेश के खिलाफ अनिल का विज्ञापन अभियान

कृष्णा गोदावरी बेसिन गैस विवाद में अनिल अंबानी हार मानने को तैयार नहीं हैं इसलिए उन्होंने मुकेश अंबानी के खिलाफ विज्ञापन अभियान शुरू कर रखा है. 17 अगस्त से दिल्ली के विभिन्न अखबारों में अनिल अंबानी की कंपनी एडीएजी की ओर से विज्ञापन अभियान चलाकर सरकार को होनेवाले संभावित नुकसान के बारे में लोगों को जागरूक कर रहे हैं. अनिल अंबानी के इस विज्ञापन अभियान का अब असर होने लगा है और केन्द्र सरकार ने इस मामले पर बोलते हुए सफाई दी है कि उसे कोई नुकसान नहीं होनावाला है.
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देश में आ सकती है विदेशी निवेश की सुनामी

देश की विदेशी मुद्रा आस्तियां लगातार बढ़ रही हैं। इस साल मार्च के बाद इसमें 15.23 अरब डॉलर का इजाफा हो चुका है और 24 जुलाई को देश की कुल विदेशी मुद्रा आस्तियां 256.66 अरब डॉलर की थीं। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) की अद्यतन सूचना के मुताबिक अप्रैल के बाद से जुलाई अंत तक विदेशी फंडों (एफआईआई) ने देश के इक्विटी व ऋण प्रपत्रों में कुल 9.32 अरब डॉलर का निवेश किया है।
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मंहगाई के मारे प्रधानमंत्री बेचारे

देश की जनता सचेत हो जाए। अब सरकार भी महंगाई के सामने हाथ खड़ी कर चुकी है। महंगाई नियंत्रण सरकार के हाथ में नहीं है। महंगाई को नियंत्रित को अब भगवान ही करेंगे। मानूसन मेहरबान नहीं है और उधर मंहगाई चरम है। अब सरकार मानसून तो ला नहीं सकती। इसलिए सरकार ने हाथ खड़े कर दिए। देश के मुखिया बेबस है। ठीक उसी तरह से जैसे शर्म-अल-शेख में अमेरिका दबाव में बेबस थे। ज्वाइंट स्टेटमेंट जारी करते हुए भारतीय हितों को ध्यान में नहीं रखा था। दिलचस्प बात है कि यह बयान अपने आप में विरोधाभास लिए है। लेकिन प्रधानमंत्री का यह बयान लोगों को संकेत देता है कि लोग महंगाई में जीने की आदत डाले।
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जनता की कमाई पर दो भाईयों की लड़ाई

कृष्णा-गोदावरी बेसिन गैस को लेकर दोनों अंबानी भाइयों मुकेश अंबानी की रिलायंस इंड्रस्ट्रीज (आरआईएल) और अनिल अंबानी की रिलायंस नेचुरल रिसोर्सेस (आरएनआरएल) के बीच छिड़ा कारपोरेट युद्ध दिन पर दिन गहराता और तीखा होता जा रहा है। इस विवाद का दायरा फैलता हुआ संसद से सड़क तक पहुंच चुका है।
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सुदर्शन का (कु) दर्शन
जबसे आरएसएस के लोगों की आतंकवादी घटनाओं में संलिप्तता सामने आयी है, तब से आरएसएस के नेता बौखला गए हैं। इस बौखलाहट में ही शायद संघ के इतिहास में पहली बार हुआ है कि इसके स्वयंसेवक विरोध प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर उतरे। इसी बौखलाहट में आरएसएस के एक्स चीफ केएस सुदर्शन का मानसिक संतुलन बिगड़ गया और सोनिया गांधी के बारे में ऐसे शब्द बोल दिए, जिन्हें एक विकृत मानसिकता का आदमी ही बोल सकता है।...
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सीआईए नहीं केजीबी एजंट कहिए जनाब
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरसंघचालक ने 10 नवंबर को सोनिया गांधी पर सीआईए एजंट होने का आरोप लगाकर सनसनी पैदा कर दिया है. पूरी की पूरी कांग्रेस उत्तेजित है और संघ भी बैकफुट पर चला गया है. सुदर्शन के आस पास के लोगों का कहना है कि सुदर्शन जी भुलक्कड़ हो गये हैं और उन्हें कुछ ठीक से याद नहीं रहता. शायद इसीलिए उन्होंने इतनी बड़ी चूक कर दी. ...
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सोनिया का सच जान बेकाबू क्यों होते हो?
एक बार फिर लोकतंत्र पर आपातकाल मंडरा पड़ा है. राजमाता सोनिया गांधी के सिपहसालारों ने कांग्रेसी गुण्डों, माफियाओं और लोकतंत्र के हत्यारों का आह्वान किया है कि वह देशभर में संघ कार्यालयों पर धावा बोल दे. इसका तत्काल प्रभाव हुआ और कांग्रेसी गुण्डों ने संघ के दिल्ली मुख्यालय पर धावा भी बोल दिया. ठीक वैसे ही जैसे इंदिरा गांधी की मौत के बाद सिखों को निशाना बनाया गया था. हिंसक और अलोकतातंत्रिक मानसिकता से ग्रस्त कांग्रेसी सोनिया का सच जानकर आखिर इस तरह बेकाबू क्यों हो रहे हैं?...
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नये निजाम के दामन पर है ज्यादा बड़ा दाग
मुंबई। महाराष्ट्र के नए निजाम भी कोई दूध के धुले नहीं हैं। कांग्रेस आलाकमान ने अशोक चव्हाण को फर्जीवाड़े से फ्लैट पाने के आरोप में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की गद्दी से हटा दिया। लेकिन नए मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण भी उसी तरह के फर्जीवाड़े में गले तक डूबे हुए हैं। उन्होंने जितने बड़े बड़े झूठ बोलकर सरकार से फ्लैट हथियाए हैं वे कांग्रेस के लिए ज्यादा दागदार हैं।...
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अजमेर चार्जशीट और संघी उछल-कूद
बढ़ते पैमाने पर इसके साक्ष्य सामने आ रहे हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर एस एस) से जुड़े लोगों का आतंकवादी हमलों में हाथ रहा है। इन हालात में आर एस एस इस पुराने सूत्र पर चल रहा लगता है कि हमला ही सबसे अच्छा बचाव है। उसने 10 नवंबर को देशव्यापी विरोध कार्रवाइयों का आह्वान किया है। इन कार्रवाइयों में संघ के शीर्ष नेताओं के शामिल होने की बात कही जा रही है। बहरहाल, इसकी चर्चा हम जरा बाद में करेंगे।...
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अपने होने पर ही हैरान
‘चुप्पी-चुप्पी नहीं नहीं, बोलेंगे अब सभी-सभी’ इन्हीं नारों से दाहोद (गुजरात) का सीनियर रेलवे संस्थान परिसर 31 अक्टूबर को पूरे दिन गूंजता रहा। यहां गुजरात के बड़ोदरा, पंचमहल, सुरत, भड़ूच, डांग, बालसाड और साबरकांठा जिले से लगभग तीन हजार के आस पास विमुक्त एवं घुमंतू समाज से ताल्लुक रखने वाले लोग इकट्ठे हुए थे। मौका था, अधिकार अभियान की घोषणा का। उस समाज के लिए जो इस लोकतांत्रिक देश में अधिकार का अर्थ अभी तक समझ नहीं पाएं हैं। ...
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गोली लगने के बाद क्या गांधी ने कहा था- हे राम ?
यह एक ऐसा सवाल है जिस पर अब विवाद होने लगा है. 30 जनवरी 1948 को क्या जब महात्मा गांधी को नाथूराम गोडसे ने गोली मारी तो महात्मा गांधी ने अपने मुंह से हे! राम का संबोधन किया था? उस वक्त घटनास्थल पर मौजूद रहे एक प्रत्यक्षदर्शी के डी मदान का कहना है कि "मैंने नहीं सुना था कि उन्होंने हे राम कहा था या नहीं."...
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भद्दा और बेदम रहा संघ का विरोध प्रदर्शन
स्कूल जाते बच्चों के भी हाथ में भगवा थमाकर भले ही संघ ने शक्ति प्रदर्शन की भरपूर कोशिश की हो लेकिन 10 नवम्बर का दिन उसके इतिहास में कोई बडी घटना के रूप में याद नहीं किया जायेगा। हॉ हम बात कर रहे है राजस्थान के भरतपुर जिला मुख्यालय की जहॉ देश भर की ही तरह हिन्दुवादी संघटनों ने अपने उपर लग रहे ‘भगवा आतंकवाद’ के आरोपों के विरोध में शक्ति प्रदर्शन किया था। भरतपुर जहॉ संघ प्रचारक क रूप में भाजपा के पीएमइन वेंटिग लालकृष्ण आडवानी ने अपनी सेवाऐं दी है संघ का ये विरोध प्रदर्शन एक दम भददा और हल्का रहा।...
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एनसीपी के 'दादा' का दांव
महाराष्ट्र में कांग्रेस में परिवर्तन हुआ तो राष्ट्रवादी कांग्रेस ने भी अपने पत्ते खोल दिये. राज्य में लंबे समय से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के भीतर चल रही सत्ता के दावेदारी पर एनसीपी ने आखिरकार प्रदेश की प्रशासनिक कमान अपनी ओर से शरद पवार के भतीजे अजीत पवार को सौंप दी है. अब गुरुवार को शाम साढ़े चार बजे पृथ्वीराज चव्हाण के साथ अजीत "दादा" पवार उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे....
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पीएमओ वाले पृथ्वीराज
महाराष्ट्र के नये मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण यूपीए सरकार पार्ट वन और पार्ट टू में बतौर पीएमओ मिनिस्टर जाने जाते हैं. प्रधानमंत्री कार्यालय में रहते हुए भी उन्होंने कभी ताकतवर होने का दंभ नहीं पाला और चुपचाप काम करते रहे. बिट्स पिलानी से बीई और बर्कले विश्वविद्यालय से एमएस की डिग्री हासिल करनेवाले पृथ्वीराज की राजनीतिक कमेस्ट्री ने उनके सार्वजनिक जीवन में पहली बार इतना गाढ़ा रंग उड़ेला है....
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सुलग रहा है मेरठ 'हिन्दुस्तान'
एक ओर हिन्दुस्तान अखबार अपनी अलग कंपनी बनाकर अखबार को चमकाने और अखबार का विस्तार करने में लगा है वहीं दूसरी ओर हिन्दुस्तान के विभिन्न संस्करणों में हालात ठीक नहीं है. हिन्दुस्तान के मेरठ संस्करण में इन दिनों इस्तीफे दिये जा रहे हैं लेकिन प्रचारित किया जा रहा है कि जो आफिस नहीं आ रहे हैं वे छुट्टी पर चले गये हैं....
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आलोक तोमर के बगल में बसे किशोर मालवीय
सीएनईबी में पहले से एक सलाहकार संपादक थे- आलोक तोमर. अब दूसरे सलाहकार संपादक भी वहां नियुक्त हो गये हैं किशोर मालवीय. उन्होंने सीएनईबी चैनल के साथ बतौर कंसल्टिंग एडिटर अपनी नई पारी की शुरुआत की है। सीएनईबी से पहले वे ‘वायस ऑफ इंडिया’ न्यूज चैनल के साथ जुड़े हुए थे। उन्होंने करीब दो दशक के कॅरियर में देश के नामी-गिरामी मीडिया संस्थानों में कई जिम्मेदारियां निभाईं हैं।...
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सुरक्षा परिषद की छांव में खेती पर दांव
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने संसद में दिये गये अपने भाषण में भारत से मिले प्यार की भूरि भूरि प्रशंसा जरूर की लेकिन अपनी व्यावसायिक मजबूरियों को छिपा नहीं सके. बराक ओबामा ने संसद के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करते हुए जहां एक ओर भारत को महाशक्ति करार देकर उसके लिए संयुक्त राष्ट्र में स्थायी सदस्यता को अपना समर्थन दिया वहीं भारत और अमेरिका द्वारा मिलकर खेती के क्षेत्र में एक और हरित क्रांति के आगाज की घोषणा की....
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आतंक नहीं कश्मीर केन्द्रित हुई ओबामा यात्रा
रविवार की देर शाम भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा आयोजित भोज में ओमर अब्दुल्ला के शामिल होने से जो आशंका पैदा हुई थी वह सोमवार को हैदराबाद हाउस में और प्रबल रूप में सामने आ गयी जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अमेरिकी राष्ट्रपति की उपस्थिति में स्वीकार किया कि वे पाकिस्तान से बात करते वक्त "के" शब्द पर बात करने से नहीं कतराते हैं....
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भारत से धंधा, पाक को चंदा
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक हुसैन ओबामा ने अपना तीन दिवसीय दौरा पूरा कर लिया. मुंबई उतरकर दिल्ली दरबार तक उनकी दस्तक भारत पर अमेरिका के मजबूत पकड़ की मिसाल बन गया. निश्चित रूप से उनका दौरा भारत के लिए उतना महत्वपूर्ण नहीं जितना खुद अमेरिका के लिए है. मंदी के दौर से जूझ रहे अमेरिका को "कारपोरेट" जगत का धंधा दिलाने के लिए उन्होंने न केवल भारत को महाशक्ति करार दे दिया बल्कि सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता का समर्थन भी कर दिया....
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