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अर्थ-अनर्थ

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अर्थी पर अर्थतंत्र

बीते लोकसभा चुनाव में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार को संकट में पड़ी अर्थव्यवस्था को उबारने के सामथ्र्य के मापदंड पर जनादेश मिला। पर वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी के बजट से झलक रही अर्थनीति साफ-साफ बता रही है कि वे इस देश की अर्थव्यवस्था को संकट से उबारने की बजाय उसकी समस्याओं को जटिलतर करने में जुटे हुए हैं। प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह जो कि स्वयं वित्त विशेषज्ञ हैं, अर्थव्यवस्था को वैश्विकता के सुपर हाइवे पर दौड़ना चाहते हैं।
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आखिरकार कम हुआ यूरिया से याराना

भारत में रासायनिक खाद के प्रयोग ने भले ही किसानों को संकट में डाला हो लेकिन उसने देश के पूंजीपतियों को हमेशा संकट से उबारने का काम किया है. पिछले पांच दशक में भारत में रासायनिक खादों के प्रयोग में बेतहाशा वृद्धि हुई है. इस बेतहाशा वृद्धि को पूरा करने के लिए देश में लगातार रासायनिक उर्वरक के उत्पादन में वृद्धि हुई. इस बढ़े हुए उत्पादन का अतिरिक्त भार न कंपनियों पर पड़े और न किसानों पर इसलिए सरकार ने भारी मात्रा में उर्वरक कंपनियों को सब्सिडी दी. किसानों को मदद के नाम पर पचास सालों तक चले इस खेल का परिणाम यह हुआ कि किसान बदहाल हो गये, खेत बेहाल हो गये..
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दीदी के बाद दादा का जनमोहनी बजट

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हालांकि अंतरीम बजट में सामाजिक सरोकारों को लेकर सरकार प्रतिबद्ध जान पड़ रही थी, लेकिन अब जब प्रणब दादा का पिटारा खुल चुका है तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर नज़र रखने वाले पैरोकारों समेत विभिन्न अर्थशास्त्री कृषि की घोर उपेक्षा का आरोप सरकार पर लगा रहे हैं।...
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पेठिया की खाली होती पेटियां

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बहुत सालों बाद इस बार गांव (गंगेया जिला मुजफ्फरपुर) जाना हुआ और संयोग से कुछेक दिन रूकने का भी सौभाग्य मिला। इस दौरान लोगों से मिलने-मिलाने के अलावा काफी कुछ देखने को मिला और इसी कड़ी में एक दिन पेठियां जा पहुंचा। पेठियां यानी ग्रामीण बाजार जो हर इलाके के कुछ गांव में हर रोज या सप्ताह में एक या दो बार लगता है। पूर्वांचल में इसे हाट या हटिया भी कहा जाता है और दिल्ली जैसे महानगरों में सोम बाजार से लेकर शुक्र या शनि बाजार तक। हालांकि पेठियां शहर के साप्ताहिक बाजार से इस मायने में अलग है कि यहां का ज्यादातर कारोबार दिन के उजाले में होता है और शाम होते-होते सिमट जाता है।...
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खेत और खुदरा कारोबार कंपनियों के हवाले

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कृषि और खुदरा व्यापार दुनिया का सबसे बड़ा उद्योग है. लेकिन इधर कुछ दशकों में दुनिया की कुछ बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने बड़ी रणनीतिक सोच समझ के साथ कृषि और खुदरा दोनों पर अपना एकाधिकार स्थापित करने की कोशिश की है. पश्चिम के जिन देशों में इन कंपनियों का जन्म हुआ वहां लगभग पूरे व्यापार को अपने हाथ में लेने के बाद ये कंपनियां अब भारत में अपना पैर पसार रही हैं. ...
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आचार संहिता का उल्लंघन...चुपचाप

न कोई विज्ञप्ति, न कोई सार्वजनिक घोषणा। रिजर्व बैंक ने चुपचाप एक अधिसूचना जारी कर यूपीए सरकार की सर्वाधिक लोकलुभावन किसानों की कर्जमाफी योजना में नई राहत दे दी। वह भी उन किसानों को जिनके पास दो हेक्टेयर या पांच एकड़ से ज्यादा जमीन है। कर्जमाफी योजना के तहत इन किसानों को बकाया कर्ज में एकल समायोजन (वन टाइम सेटलमेंट) के तहत 25 फीसदी छूट देने का प्रावधान है, बशर्ते ये लोग बाकी 75 फीसदी कर्ज तीन किश्तों में अदा कर देते हैं।
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काले धन की माया पर स्विस बैंको की छाया

भारतीय व्यवस्था को मुंह चिढाता तथ्य है कि स्विस बैंक के खातों में देश का खरबों रुपया चोरी छिपे जमा कर रखा हुआ है। लेकिन अफसोस कि इस बार चुनाव प्रचार से स्विस बैंक में काले धन का मुद्दा पूरी तरह से गायब है। जबकि इसी दौर में स्विस बैंक में काला धन जमा करने के मामले में भारत के धवल चेहरे पर सबसे ज्यादा कालिख पुती है। स्विट्जरलैंड ने पोल खोलू रिपोर्ट जारी कर सरेआम बताया है कि सबसे ज्यादा काला धन भारतीयों के खाते में जमा है। स्विस बैंक एसोसिएशन ने काले धन के मामले में पांच शीर्षस्थ देशों की सूची जारी कर बताया है कि सबसे ज्यादा काला धन भारतीयों के नाम पर चल रहे खातों में जमा है।
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एक विफल राष्ट्र की अनर्थकारी दास्तान

पिछले कुछ अर्से से हमारे पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान को `विफल राष्ट्र´ या `फेल्ड स्टेट´ कहा जा रहा है। आतंकवादी तत्वों का सरकार, राष्ट्र और समाज पर हावी होना विफल पाकिस्तानी राष्ट्र का लक्षण एवं परिणाम है। पाकिस्तान को विफल राष्ट्र घोषित करने का प्रथम कारण एवं लक्षण उसकी अर्थव्यवस्था की व्यवहार्यता समाप्त होना था।
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उत्तर का पैसा दक्षिण का विकास

बिहार, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़ और हिमाचल की आधी से लेकर दो-तिहाई तक जमाराशि बैंक दे रहे हैं पहले से आगे बढ़े राज्यों को उत्तराखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, हिमाचल प्रदेश और छत्तीसगढ़ के आर्थिक पिछड़ेपन की और जो भी वजहें हों, लेकिन उनमें से एक प्रमुख वजह यह है कि इन राज्यों में आनेवाली जमाराशि का आधे से लेकर दो-तिहाई से ज्यादा हिस्सा यहां निवेश नहीं हो रहा है। बैंक इन राज्यों से मिलनेवाली राशि के अनुपात में यहां ऋण नहीं दे रहे हैं।
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बेवजह लागत का रोना रो रहे हैं बैंक

बैंकों ने कर्ज पर ब्याज दरें घटाने का सिलसिला शुरू कर दिया है। देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक ने हर तरह के होमलोन पर एक साल के लिए 8 फीसदी ब्याज दर घोषित करके सबको चौंका दिया है। बैंकों ने सरकार से वादा भी कर दिया है कि वे ब्याज दरों में दो फीसदी कमी कर सकते हैं, बशर्ते उनके फंड की लागत घट जाए।
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सुदर्शन का (कु) दर्शन
जबसे आरएसएस के लोगों की आतंकवादी घटनाओं में संलिप्तता सामने आयी है, तब से आरएसएस के नेता बौखला गए हैं। इस बौखलाहट में ही शायद संघ के इतिहास में पहली बार हुआ है कि इसके स्वयंसेवक विरोध प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर उतरे। इसी बौखलाहट में आरएसएस के एक्स चीफ केएस सुदर्शन का मानसिक संतुलन बिगड़ गया और सोनिया गांधी के बारे में ऐसे शब्द बोल दिए, जिन्हें एक विकृत मानसिकता का आदमी ही बोल सकता है।...
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सीआईए नहीं केजीबी एजंट कहिए जनाब
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरसंघचालक ने 10 नवंबर को सोनिया गांधी पर सीआईए एजंट होने का आरोप लगाकर सनसनी पैदा कर दिया है. पूरी की पूरी कांग्रेस उत्तेजित है और संघ भी बैकफुट पर चला गया है. सुदर्शन के आस पास के लोगों का कहना है कि सुदर्शन जी भुलक्कड़ हो गये हैं और उन्हें कुछ ठीक से याद नहीं रहता. शायद इसीलिए उन्होंने इतनी बड़ी चूक कर दी. ...
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सोनिया का सच जान बेकाबू क्यों होते हो?
एक बार फिर लोकतंत्र पर आपातकाल मंडरा पड़ा है. राजमाता सोनिया गांधी के सिपहसालारों ने कांग्रेसी गुण्डों, माफियाओं और लोकतंत्र के हत्यारों का आह्वान किया है कि वह देशभर में संघ कार्यालयों पर धावा बोल दे. इसका तत्काल प्रभाव हुआ और कांग्रेसी गुण्डों ने संघ के दिल्ली मुख्यालय पर धावा भी बोल दिया. ठीक वैसे ही जैसे इंदिरा गांधी की मौत के बाद सिखों को निशाना बनाया गया था. हिंसक और अलोकतातंत्रिक मानसिकता से ग्रस्त कांग्रेसी सोनिया का सच जानकर आखिर इस तरह बेकाबू क्यों हो रहे हैं?...
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नये निजाम के दामन पर है ज्यादा बड़ा दाग
मुंबई। महाराष्ट्र के नए निजाम भी कोई दूध के धुले नहीं हैं। कांग्रेस आलाकमान ने अशोक चव्हाण को फर्जीवाड़े से फ्लैट पाने के आरोप में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की गद्दी से हटा दिया। लेकिन नए मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण भी उसी तरह के फर्जीवाड़े में गले तक डूबे हुए हैं। उन्होंने जितने बड़े बड़े झूठ बोलकर सरकार से फ्लैट हथियाए हैं वे कांग्रेस के लिए ज्यादा दागदार हैं।...
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अजमेर चार्जशीट और संघी उछल-कूद
बढ़ते पैमाने पर इसके साक्ष्य सामने आ रहे हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर एस एस) से जुड़े लोगों का आतंकवादी हमलों में हाथ रहा है। इन हालात में आर एस एस इस पुराने सूत्र पर चल रहा लगता है कि हमला ही सबसे अच्छा बचाव है। उसने 10 नवंबर को देशव्यापी विरोध कार्रवाइयों का आह्वान किया है। इन कार्रवाइयों में संघ के शीर्ष नेताओं के शामिल होने की बात कही जा रही है। बहरहाल, इसकी चर्चा हम जरा बाद में करेंगे।...
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अपने होने पर ही हैरान
‘चुप्पी-चुप्पी नहीं नहीं, बोलेंगे अब सभी-सभी’ इन्हीं नारों से दाहोद (गुजरात) का सीनियर रेलवे संस्थान परिसर 31 अक्टूबर को पूरे दिन गूंजता रहा। यहां गुजरात के बड़ोदरा, पंचमहल, सुरत, भड़ूच, डांग, बालसाड और साबरकांठा जिले से लगभग तीन हजार के आस पास विमुक्त एवं घुमंतू समाज से ताल्लुक रखने वाले लोग इकट्ठे हुए थे। मौका था, अधिकार अभियान की घोषणा का। उस समाज के लिए जो इस लोकतांत्रिक देश में अधिकार का अर्थ अभी तक समझ नहीं पाएं हैं। ...
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गोली लगने के बाद क्या गांधी ने कहा था- हे राम ?
यह एक ऐसा सवाल है जिस पर अब विवाद होने लगा है. 30 जनवरी 1948 को क्या जब महात्मा गांधी को नाथूराम गोडसे ने गोली मारी तो महात्मा गांधी ने अपने मुंह से हे! राम का संबोधन किया था? उस वक्त घटनास्थल पर मौजूद रहे एक प्रत्यक्षदर्शी के डी मदान का कहना है कि "मैंने नहीं सुना था कि उन्होंने हे राम कहा था या नहीं."...
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भद्दा और बेदम रहा संघ का विरोध प्रदर्शन
स्कूल जाते बच्चों के भी हाथ में भगवा थमाकर भले ही संघ ने शक्ति प्रदर्शन की भरपूर कोशिश की हो लेकिन 10 नवम्बर का दिन उसके इतिहास में कोई बडी घटना के रूप में याद नहीं किया जायेगा। हॉ हम बात कर रहे है राजस्थान के भरतपुर जिला मुख्यालय की जहॉ देश भर की ही तरह हिन्दुवादी संघटनों ने अपने उपर लग रहे ‘भगवा आतंकवाद’ के आरोपों के विरोध में शक्ति प्रदर्शन किया था। भरतपुर जहॉ संघ प्रचारक क रूप में भाजपा के पीएमइन वेंटिग लालकृष्ण आडवानी ने अपनी सेवाऐं दी है संघ का ये विरोध प्रदर्शन एक दम भददा और हल्का रहा।...
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एनसीपी के 'दादा' का दांव
महाराष्ट्र में कांग्रेस में परिवर्तन हुआ तो राष्ट्रवादी कांग्रेस ने भी अपने पत्ते खोल दिये. राज्य में लंबे समय से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के भीतर चल रही सत्ता के दावेदारी पर एनसीपी ने आखिरकार प्रदेश की प्रशासनिक कमान अपनी ओर से शरद पवार के भतीजे अजीत पवार को सौंप दी है. अब गुरुवार को शाम साढ़े चार बजे पृथ्वीराज चव्हाण के साथ अजीत "दादा" पवार उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे....
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पीएमओ वाले पृथ्वीराज
महाराष्ट्र के नये मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण यूपीए सरकार पार्ट वन और पार्ट टू में बतौर पीएमओ मिनिस्टर जाने जाते हैं. प्रधानमंत्री कार्यालय में रहते हुए भी उन्होंने कभी ताकतवर होने का दंभ नहीं पाला और चुपचाप काम करते रहे. बिट्स पिलानी से बीई और बर्कले विश्वविद्यालय से एमएस की डिग्री हासिल करनेवाले पृथ्वीराज की राजनीतिक कमेस्ट्री ने उनके सार्वजनिक जीवन में पहली बार इतना गाढ़ा रंग उड़ेला है....
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सुलग रहा है मेरठ 'हिन्दुस्तान'
एक ओर हिन्दुस्तान अखबार अपनी अलग कंपनी बनाकर अखबार को चमकाने और अखबार का विस्तार करने में लगा है वहीं दूसरी ओर हिन्दुस्तान के विभिन्न संस्करणों में हालात ठीक नहीं है. हिन्दुस्तान के मेरठ संस्करण में इन दिनों इस्तीफे दिये जा रहे हैं लेकिन प्रचारित किया जा रहा है कि जो आफिस नहीं आ रहे हैं वे छुट्टी पर चले गये हैं....
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आलोक तोमर के बगल में बसे किशोर मालवीय
सीएनईबी में पहले से एक सलाहकार संपादक थे- आलोक तोमर. अब दूसरे सलाहकार संपादक भी वहां नियुक्त हो गये हैं किशोर मालवीय. उन्होंने सीएनईबी चैनल के साथ बतौर कंसल्टिंग एडिटर अपनी नई पारी की शुरुआत की है। सीएनईबी से पहले वे ‘वायस ऑफ इंडिया’ न्यूज चैनल के साथ जुड़े हुए थे। उन्होंने करीब दो दशक के कॅरियर में देश के नामी-गिरामी मीडिया संस्थानों में कई जिम्मेदारियां निभाईं हैं।...
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सुरक्षा परिषद की छांव में खेती पर दांव
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने संसद में दिये गये अपने भाषण में भारत से मिले प्यार की भूरि भूरि प्रशंसा जरूर की लेकिन अपनी व्यावसायिक मजबूरियों को छिपा नहीं सके. बराक ओबामा ने संसद के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करते हुए जहां एक ओर भारत को महाशक्ति करार देकर उसके लिए संयुक्त राष्ट्र में स्थायी सदस्यता को अपना समर्थन दिया वहीं भारत और अमेरिका द्वारा मिलकर खेती के क्षेत्र में एक और हरित क्रांति के आगाज की घोषणा की....
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आतंक नहीं कश्मीर केन्द्रित हुई ओबामा यात्रा
रविवार की देर शाम भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा आयोजित भोज में ओमर अब्दुल्ला के शामिल होने से जो आशंका पैदा हुई थी वह सोमवार को हैदराबाद हाउस में और प्रबल रूप में सामने आ गयी जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अमेरिकी राष्ट्रपति की उपस्थिति में स्वीकार किया कि वे पाकिस्तान से बात करते वक्त "के" शब्द पर बात करने से नहीं कतराते हैं....
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भारत से धंधा, पाक को चंदा
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक हुसैन ओबामा ने अपना तीन दिवसीय दौरा पूरा कर लिया. मुंबई उतरकर दिल्ली दरबार तक उनकी दस्तक भारत पर अमेरिका के मजबूत पकड़ की मिसाल बन गया. निश्चित रूप से उनका दौरा भारत के लिए उतना महत्वपूर्ण नहीं जितना खुद अमेरिका के लिए है. मंदी के दौर से जूझ रहे अमेरिका को "कारपोरेट" जगत का धंधा दिलाने के लिए उन्होंने न केवल भारत को महाशक्ति करार दे दिया बल्कि सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता का समर्थन भी कर दिया....
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